POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: साहित्यालोचन

Blogger: Bhaskar
ज बाज़ारवाद पर जो लोग अच्छी चर्चा कर रहे हैं वे स्त्रीवादी विमर्श के लोग हैं. बाजार का सबसे बड़ा असर व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन पर पड़ा है. इसने व्यक्तिगत भावनाओं, धार्मिक आस्थाओं और परम्परागत समाज के स्त्रियोचित-पुरुषोचित व्यवहार को लाभ के लिए भुनाया है. औरत की द... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   4:35pm 3 Feb 2018 #
Blogger: Bhaskar
"निराला"पुस्तक की भूमिका (द्वितीय संस्करण) में डॉ० रामविलास शर्मा लिखते है कि तब से लेकर अब तक देश और साहित्य में अनेक परिवर्तन हो चुके हैं। भारत अब उपनिवेश न रहकर अर्द्ध-उपनिवेश हो गया है। परंतु यह जर्जर सामंती ढांचा अब भी है। जिससे निराला साहित्य का घनिष्ट संबंध अब भी... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   12:25pm 14 Jul 2016 #
Blogger: Bhaskar
रचनाकार की दृष्टि यदि उनकी रचनाओं में समाहित हो तो रचनाकार का व्यक्तित्व वउनकी विशेषताओं को उजागर करने के लिए रचना से परे कम ही भटकना पड़ता है. तुलसीदास को 'लोकवादी'का विशेषण देने के लिए डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी अपनीपुस्तक 'लोकवादी तुलसीदास' में उनकी रचनाओं को ही आधार ... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   2:52pm 16 Nov 2015 #
Blogger: Bhaskar
ज बच्चे हमारे सबसे मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन हैं। वे समाज और संसार के नियंता हैं। नियंता इस दृष्टि से कि उनके द्वारा उस समाज को आगे बढ़ाया जाना है जिसमें उनका पालन हो रहा है, जिसमे उनका बचपन गुज़र रहा है। मानव जीवन के सबसे स्वतंत्र और स्वच्छंद समय को देखा जाए तो निःसंदेह ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   7:58pm 24 Aug 2015 #
Blogger: Bhaskar
रतीय इतिहास में मध्यकाल राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा सामाजिक सभी दृष्टि से महत्वपूर्ण था । एक और जहाँ इस्लामी संस्कृति भारतीय सामाजिक संरचना को प्रभावित कर रही थी तो वहीं इसकी पृष्ठभूमि में भक्ति आंदोलन का सूत्रपात भी होता है । साहित्येतिहास में इसे स्वर्णिम क... Read more
clicks 236 View   Vote 0 Like   2:59pm 18 Jan 2015 #
Blogger: Bhaskar
दगाह पढ़ कर प्रायः पहला विस्मय हामिद के बारे में होता है। ऐसा बच्चा सचमुच का हो सकता है क्या। उम्र चार पांच साल। गरीब सूरत गरीब हालत। दादी का इकलौता अनाथ। अड़ोसियों पड़ोसियों की अभिभावकता में साथी बच्चों के साथ गांव से शहर तक पैदल चल कर जाता है , सारे दिन भूखा प्यासा मे... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   11:35am 1 Sep 2014 #
Blogger: Bhaskar
कविता हमारी सांस्कृतिक धरोहर है. हमारे अपने समय का ऐसा दस्तावेज़, जिसके माध्यम से कवि प्रतीकों में इतिहास दर्ज करता है. इतिहास को तो तथ्यात्मक होना चाहिए, लेकिन कविता के पास यह स्पेस है कि वह अधिक विवरणात्मक और काल्पनिक होकर भी प्रतीकों में अपने समय के यथार्थ को अभिव्... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   12:15pm 18 Jun 2014 #नरेश
Blogger: Bhaskar
विता हमारी सांस्कृतिक धरोहर है. हमारे अपने समय का ऐसा दस्तावेज़, जिसके माध्यम से कवि प्रतीकों में इतिहास दर्ज करता है. इतिहास को तो तथ्यात्मक होना चाहिए, लेकिन कविता के पास यह स्पेस है कि वह अधिक विवरणात्मक और काल्पनिक होकर भी प्रतीकों में अपने समय के यथार्थ को अभिव्य... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   12:15pm 18 Jun 2014 #नरेश
Blogger: Bhaskar
वजागरण कालीन साहित्यकारों,पत्रकारों और चिंतकों ने यूरोप से भारतीय संसर्ग में जिन सरोकारों पर विस्तार से विचार किया उसमें शिक्षा को पर्याप्त महत्व दिया है | यह स्वाभाविक भी था क्योंकि तुलनात्मकता की दृष्टि ने उस समय के चिंतकों का ध्यान आकृष्ट किया था जिससे शिक्षा के ... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   11:26am 25 Jan 2014 #
Blogger: Bhaskar
chj vius le; esa vk/kqfud Fks\ ;g dgus dk QS’ku lk py iM+k gSA bl dFku ds ihNs tks fopkj dke dj jgk gS og ;g fd vk/kqfudrk dksbZ cgqr gh mEnk vkSj ekuoh; ewY; gS ftlds fcuk dksbZ Hkh ekuork dk i{k/kj gks gh ugha ldrkA dchj vk/kqfud Fks rks cq+) vkSj egkohj Hkh vk/kqfud Fks\ blesa dksbZ 'kd ;k xqatkb’k ugha jgrh gSA blds cjDl dksbZ ;g dgs fd bUgsa vk/kqfud dgdj vki budk vieku dj jgs gSa rks og izfrfØ;koknh ?kksf"kr dj fn;k tk;sxkA D;k ge dHkh ;g loky iwNrs gSa fd dchj] egkohj ;k cq) bl ccZj vkSj voekuohd`r vk/kqfudrk dk BIik vius Åij yxokuk Hkh pkgrs gSa ;k ugha\ dchj tSlk lk/kkj.k vkSj lgt O;fDr vk/kqfud ccZjrk vkSj tfVy iwathokn ds nq"pØ esa filrs miHkksDrk dks ns[kdj Hkh ;gh dgrk dh... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   7:48pm 19 Nov 2013 #
Blogger: Bhaskar
लेरी जी ने कुल तीन कहानियां लिखीं और तीनो हीं प्रथम प्रेम की कहानियां हैं। 'सुखमय जीवन और 'बुद्धू का कांटा' की मनोभूमि चञ्चल और उत्फुल्ल है जबकि 'उसने कहा था' एक त्रासदी। इनमें तीसरी 'उसने कहा था' असंदिग्ध रूप से भाषा और विषयवस्तु के साथ व्यवहार, संरचना और गठन आदि को देखते ... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   4:00pm 11 Oct 2013 #
Blogger: Bhaskar
पन्यास सम्राट के नाम से सुप्रसिद्ध मुंशी प्रेमचन्द उर्दू का संस्कार लेकर हिन्दी में आए और हिन्दी के महान लेखक बने। उन्होंने हिन्दी को अपना खास मुहावरा और खुलापन दिया। कथा लेखन के क्षेत्र में उन्होंने युगान्तरकारी परिवर्तन किए। आम आदमी को उन्होंने अपनी रचनाओं का वि... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   12:19pm 2 Jul 2013 #
Blogger: Bhaskar
छले वर्ष फ़िल्मी गीतों की दुनिया में एक अभूतपूर्व विवाद जुड़ा जब ‘डी.के. बोस’ नाम के एक सज्जन को एक टीवी चैनल पर उनकी प्रतिक्रिया के लिए बैठा पाया | वे उस समय के एक प्रसिद्ध फिल्मी गीत ‘भाग-भाग डी के बोस’ से इतने प्रताड़ित हो चुके थे कि सीधे खबर का हिस्सा ही बना दिए गए | पत्... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   5:58pm 26 Jun 2013 #
Blogger: Bhaskar
‘क़िस्सा क्या है? कहानी का कच्चा माल’, कहानियों के इस कच्चे माल को बरतने में राजेश जोशी ने कोई कोताही नहीं बरती और अपने पाठकों के लिए विधागत सीखचों के बंधन से मुक्त एक ‘मुक्त-सा गल्प’रच डाला.यह उन्मुक्तता ‘किस्सा कोताह’में छाई हुई है.मुक्त-सा इसलिए भी कि ‘किस्सों को कह... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   9:49am 2 Jun 2013 #
Blogger: Bhaskar
आज के साहित्य में वसंत की पड़ताल की जाए तो निश्चित ही यह समझ बनती है कि कहीं साहित्य से उसका सम्बन्ध ऐतिहासिक तो नहीं था ! पारंपरिक साहित्य वसंत के आगमन की सूचना रस के आस्वादन के साथ देखता था और उसे मनुष्य के जीवन का एक ऐसा पर्व मानता था जिसमें वह अपने मनुष्यत्व की रक्षा ... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   2:22pm 15 Apr 2013 #
Blogger: Bhaskar
ज के साहित्य में वसंत की पड़ताल की जाए तो निश्चित ही यह समझ बनती है कि कहीं साहित्य से उसका सम्बन्ध ऐतिहासिक तो नहीं था ! पारंपरिक साहित्य वसंत के आगमन की सूचना रस के आस्वादन के साथ देखता था और उसे मनुष्य के जीवन का एक ऐसा पर्व मानता था जिसमें वह अपने मनुष्यत्व की रक्षा औ... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   2:22pm 15 Apr 2013 #
Blogger: Bhaskar
                                            मिथक : अर्थ और स्वरूपव्य से मिथक का घनिष्ठ सम्बन्ध है जो भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी माना जाता है. हिंदी में मिथक शब्द का प्रयोग आधुनिक काल में प्रारंभ हुआ जो सन 1950 के बाद नयी कविता में सृजन के एक विशिष्ट उपादान की तरह प्रयुक्त होने ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   5:51pm 10 Mar 2013 #
Blogger: Bhaskar
                                            मिथक : अर्थ और स्वरूप        काव्य से मिथक का घनिष्ठ सम्बन्ध है जो भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी माना जाता है. हिंदी में मिथक शब्द का प्रयोग आधुनिक काल में प्रारंभ हुआ जो सन 1950 के बाद नयी कविता में सृजन के एक विशिष्ट उपादान की तरह प्रयु... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   5:51pm 10 Mar 2013 #
Blogger: Bhaskar
            आलोचना की शुरूआत भारतेन्दु से मानी जाती है तो बालकृष्ण भट्ट से और ‘प्रेमघन’से भी. ‘‘साधारणतः हिन्दी-विद्वानों की यह धारणा बनी हुई है कि प्रेमघनजी ही हिन्दी के सर्वप्रथम समालोचक हैं.’’1इसके अलावा वैचारिक घालमेल भी है. जिसमें एक तरफ तो यह कहा जाता है कि, ‘‘भारते... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   10:47am 7 Oct 2012 #
Blogger: Bhaskar
लोचना की शुरूआत भारतेन्दु से मानी जाती है तो बालकृष्ण भट्ट से और ‘प्रेमघन’से भी. ‘‘साधारणतः हिन्दी-विद्वानों की यह धारणा बनी हुई है कि प्रेमघनजी ही हिन्दी के सर्वप्रथम समालोचक हैं.’’1इसके अलावा वैचारिक घालमेल भी है. जिसमें एक तरफ तो यह कहा जाता है कि, ‘‘भारतेन्दु बाब... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   10:47am 7 Oct 2012 #
Blogger: Bhaskar
शहूर उत्तरउपनिवेशवादी चिंतक एडवर्ड सईद ने कई अन्य पाश्चात्य चिंतकों की तरह निर्वासन के शिकार या विस्थापित लेखकों और अपने मुल्क से दूर कर दिये गये नागरिक समूहों के बारे में विस्तार से लिखा है। अपने इसी सैद्धान्तिक चिंतन के बीच उन्होंने महमूद दरवेश और फ़ैज़ अहमद फ़ै... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   8:33pm 5 Jul 2012 #
Blogger: Bhaskar
मशहूर उत्तरउपनिवेशवादी चिंतक एडवर्ड सईद ने कई अन्य पाश्चात्य चिंतकों की तरह निर्वासन के शिकार या विस्थापित लेखकों और अपने मुल्क से दूर कर दिये गये नागरिक समूहों के बारे में विस्तार से लिखा है। अपने इसी सैद्धान्तिक चिंतन के बीच उन्होंने महमूद दरवेश और फ़ैज़ अहमद फ़... Read more
clicks 220 View   Vote 1 Like   8:33pm 5 Jul 2012 #
Blogger: Bhaskar
शमशेर से मुलाक़ात उस समय हुर्इ थी जब वे दिल्ली विश्वविधालय की टयूटोरियल लाइब्रेरी बिलिडंग की पहली मंजि़ल पर एक कमरे में उर्दू विभाग की एक योजना के तहत 'उर्दू-हिंदी शब्दकोश' बनाने के काम के सिलसिले में रोज़ बैठते थे और मैं एम. ए. अंग्रेज़ी करने के दौरान और फिर एक सांध्य क... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   3:06pm 6 May 2012 #
Blogger: Bhaskar
मशेर से मुलाक़ात उस समय हुर्इ थी जब वे दिल्ली विश्वविधालय की टयूटोरियल लाइब्रेरी बिलिडंग की पहली मंजि़ल पर एक कमरे में उर्दू विभाग की एक योजना के तहत 'उर्दू-हिंदी शब्दकोश' बनाने के काम के सिलसिले में रोज़ बैठते थे और मैं एम. ए. अंग्रेज़ी करने के दौरान और फिर एक सांध्य का... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   3:06pm 6 May 2012 #
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Publish Post