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Blog: Sahitya

Blogger: Sudheer Maurya
साँझ: साँझ,जून २०१२-सामग्री: अतीत से में - शहरयार, अदम 'गोंडवी', फिराक गोरखपुरी, और परवीन शाकिर   काव्य धरा में - संजय वर्मा 'दृष्टि', विनीता जोशी, सबा युनुस, सफल...http://emagzinesanjh.blogspot.com... Read more
clicks 245 View   Vote 0 Like   11:20am 1 Jun 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
साँझ के मई २०१२ के अंक में,अतीत से, में शहरयार की ग़ज़ल और परवीन शाकिर की नज़्म.कव्यधरा में, अंकिता पंवार, विनीता जोशी,सुधीर मौर्या 'सुधीर' की कवियाये और बरकतुल्ला अंसारी की ग़ज़ल.कथासागर में, सुधीर मौर्या 'सुधीर' की लघुकथा. http://emagzinsanjh.blogsot.com... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   7:37pm 3 May 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
आज प्रस्तुत हे उत्तराखंड की दो कवियत्री अंकिता पंवार और विनीता जोशी की भाव पूर्ण रचनाय.Ankita Panwarगरीबी दुष्चक्रप्रति छन प्रत्यक  जगह एक से हालात नहीं होतेजब कुछ लोग चैन से होते हेतो कहीं होती हेदिल दहला देने वाली चीत्कारेंकहीं उम्मीद दूर रही होती हेऔर कहीं भ्रस्टाचार की... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   2:57pm 4 Apr 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
उजाड़ कुछ भी नहीं होतामेरी बंद पड़ी कलम आज कुछ लिखना चाहती  हेऔर वो स्याही मिल गई हे तेरे एहसासों मेंजो कुछ अरसे से सूख गई थीअब ये शब्द एक लंबा सफ़र तय करना चाहते हेवहां तक जहाँ तुम होमेरी आत्मा में जो कम्पन हो रहा हेउसमे से कुछ ध्वनियाँ निकलना चाह रही हेछितिज  से दूर फे... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   1:12pm 2 Apr 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
विनीता जोशी की दस कविताएँमाँ जब तक रहेगीमाँजब तक रहेगीछोटी-छोटीक्यारियों में महकेगाधनिया/पुदीनाखेतों की मेड़ों परखिलेंगेगेंदे के पीले फूलआँगन मेंदाना चुगने आएगीनन्हीं गोरैयादेहरी परसजी रहेगी रंगोलीकोठरी मेंखेलेंगेभूरी बिल्ली के बच्चेरम्भाएगी बूढ़ी गायछत में ... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   12:44pm 2 Apr 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
विनीता जोशीआप उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद की निवासी हे. आपने कुमॉयं universiti  से हिंदी सहित & अर्थशास्त्र में ऍम. ऐ. किया हे तदुपरांत आप ने बी. एड. की टैनिंग प्राप्त की हे.वर्तमान समय में आप अध्यापन के साथ - साथ स्वलेखन में व्यस्त हे.आपकी काव्य संग्रह 'चिड़िया चुग ले आसमान' प्... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   2:32pm 21 Mar 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
प्रस्तुत हे अंकिता पंवारकी एक भावपूर्ण कविता  अधूरी ख्वाहिशएक तमन्ना हे जो बढाती हे कदमख्वाहिश हे ये इसी जो अधूरी हे हरदमपल दिन क्या कहें कहीं गुज़रे तो नहींहोश आया जब तो वो थे या नहींएक कशिश थी पल की उसमे जिन्दगी तो नहींअक्स के ख्वाब साहिल हे या नहींएक तमन्ना हे जिन्द... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   2:33pm 18 Mar 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
अंकिता पंवारपहाडो के प्रदेश देवभूमि उत्तराखंड की उभरती हुई कवियत्री हे अंकिता पंवार. आपका जन्म जनपद टिहरी गडवाल के भरपुरिया गावं , ल्म्ब्गावं में १२ दिसम्बर १९९० को हुआ. और यहीं से आपने स्नातक की पढाई पूरी की.वर्तमान समय में आप पुण्यभूमि ऋषिकेश में निवास करती हे. आप क... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   12:37pm 16 Mar 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
 तनहइयो ने कबमेरे हाथ मेंजाम दे दियाकुछ इसका पता नहींहर शाम-हर रातहर सुबह बस में औरमेरा जाममुझे लगाअब जिन्दगीचैन से कट जायगीग़लतफ़हमी थी मेरीअब तो हाथ मेंजाम लेने से भीडर लगता हे न जाने क्योंतेरा अक्स मुझे अबउसमे नज़र आता हे. 'लम्स' सेसुधीर मौर्या 'सुधीर'... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   3:07pm 12 Mar 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
हड़ताल का अर्थ मालिक के केबिन से निकलकर नंदन जब बाहर निकला तो उसकी छाती घमंड से चोडी थी.आज कंपनी के मालिक ने उसकी चिरौरी की थी हड़ताल ख़त्म करने के लिए पर वो तस से मास नहीं हुआ था. उसे डबल बोनस है हाल में चाहिए था, अगर नहीं तो हड़ताल जारी.केबिन  से बाहर निकलते ही उसके पास श्... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   1:58pm 4 Mar 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
जिन्दगी जब से आई उनके घेरो मेंरौशनी दिखने लगी हमको अन्धेरो मेउनकी शरारते बड़ी भली लगने लगीकंकड़ मर के छिपने उनका मुंडेरो मेंढलती शाम अब सुहानी लगने लगीलुत्फ़ आने लगा हमको अब सवेरो मेचांदनी चाँद की आहट दर पर देती हेचमक दोस्तों हे आज हमारे डेरो मेंसुधीर मौर्या    गंज ज... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   8:56am 4 Mar 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
 दोशीजा होठो पे शबनम के कतरेलचके बदन पे कसाव जो निखरेसावन को खुमारे जिस्म की यादकंधो  पे खुलकर ज़ुल्फ़ हरसू बिखरे.  ज़ुल्फ़ खुल गए रात की अंधियारी हेदुनिया पे उनका खुमार तारी  हेसितारों का सुकूत दस्तक देता हेकोई तूफ़ान आने की तय्यारी हे.   सुधीर मौर्या 'सुधीर'गंज जलाला... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   2:56pm 1 Mar 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
ये तेरा शहरये तेरा गाँवमुबारक हो तुझेमेरा क्या हेमें तो बस मेहमान हूँदो पल के लिएमहकता ही रहेचहकता ही रहेये तेरा घरये आँगन तेराक्या हुआजोन न  रहा कोई फूलमेरी ग़ज़ल के लिएतूं सवरती ही रहेतूं निखरती ही रहेअपने साजन के लिएभूल जा दिल से मुझेतूं अपने कल के लिए'सुधीर' के दा... Read more
clicks 262 View   Vote 0 Like   10:59am 25 Feb 2012 #
clicks 222 View   Vote 0 Like   6:34am 24 Feb 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
सपना थाउस की आँखों मेंपढने का, लिकने काआसमान में उड़ने काचाँद सितारे पाने काधनक धनक हो जाने कावो थी सुन्दरवो थी दलितउसका यही अभिशाप थावो थी मेधावी बचपन सेपर उसका गरीब बाप था.आते ही किशोर अवस्था केउसे गिद्ध निगाहें ताकने लगीगाहे बगाहे दबंगों  की छिटाकशी व... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   3:00pm 21 Feb 2012 #
Blogger: Sudheer Maurya
असीरी शफक की धुप मेंमे जाकर छत पर तनहा खड़ा हो गयापड़ोस की छत पेबल बनाती हुई लड़कीमुस्करा दीमैंने उसकी जानिबजब कोई तवज्जो न दीतो वो उतर करनिचे चली गईकाश कुछ साल पहलेमें एसा कर पाताकिसी की जुल्फों की असीरी से खुद को बचा पाताशायद तब ये शफक ये शब् मेरे तनहा न होतेया फिर वही ... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   3:15pm 15 Feb 2012 #
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