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                                    रेत - रेतरेत -  रेत  हो  गई  इच्छाएं  मन कीबिखर  गई  पंखुरियांमेरे स्वपन की अर्थ  में  उलझ  गई  गति  जीवन कीबिखर  गए  मोती  अंजुरियों  केटूट  गई  डोर  प्रीत  कीतनहा   ही  रही  अंजुमन  मन  की अरमां  भी  है  कुछ  खोये  तनहा  सेऋतु  भी  है  कुछ  पतझर  कीले  गया  छ...
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Tag :
  March 23, 2012, 9:58 pm
                                                                धूप चुपके से दाखिल होती है धूप खिरकी के रास्ते आती है  धूप ,नींद की चादर   कुतर  जाती है धूप बाल खोले जब आती है धूप ,तितलियों पर सवार आती  है धूप दरख्तों के बीच धूप छुपी  खेलती है धूप ,पत्तियों से बाते करती है धूपयादों को सुखाती है धू...
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Tag :
  February 25, 2012, 11:13 pm
                                                   बंदिशआने दो मुझे जरा बंदिशों से बाहर बात करने को जी चाहता  है .कभी खयालो से नहीं हुआ जो बाहर आज पाने को जी चाहता  है .जो कभी न हो सका खयालो से दूर आज उसे गुनगुनाने को  जी चाहता  है .जो कभी न हो सका मुझसे बाहर उसे ही पाने को जी चाहता  है .आने दो मु...
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Tag :
  February 25, 2012, 10:45 pm
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