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Blog: मंजुश्री

Blogger: Dr Manjushri Gupta
ग्लोबल गाँव का आदमी इन्टरनेट ,वाई फाई ,लैपटॉप ,कंप्यूटर .....वेबकैम ,हेड फोन ,ब्लू टूथ ,एंड्राइड फोन तरह तरह के उपकरणों से .....लैस हुआ जाता है  ग्लोबल गाँव का आदमीट्विटर ,फेस बुक ,मेसंजेर, स्काइप, व्हाट्स एपसे दुनिया भर के लोगों से जुड़ जाता हैमगर घर ,परिवार और पड़ोस में क्या ह... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   5:57pm 26 May 2013 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
आम आदमी अर्थशास्त्रीय सिद्धांतों की भूलभुलैया  और आंकड़ों की बाजीगरी में गुम  हो जाता है आम आदमी !हर पांच वर्ष में नयी योजना बनती है हर साल बजट आता  है साल दर साल गरीबी हटाओ ,रोजगार बढाओ और इंक्लूसिव ग्रोथ के नारे लगते हैं किन्तु खुद को जहाँ का तहांखड़ा  पाता  है आम... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   6:28am 24 May 2013 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
     दौड़ सारे तीरथ भागे दौड़े मन की थाह न ली तो क्या?इधर उधर बाहर को दौड़े घर की बात न की तो क्या?हर एक को खुश करने में खुद की ख़ुशी नहीं पहचानी दुनिया भर को वक़्त दिया अपनों को दिया बिसार  तो क्या?धन ,पद ,यश और काम की दौड़े मंजिल कभी मिली है क्या?क्या राजा क्या रंक  धरा पर ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   11:39pm 3 May 2013 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
 ग्लोबल मानव इन्टरनेट ,वाई फाई ,लैपटॉप ,कंप्यूटर .....वेबकैम ,हेड फोन ,ब्लू टूथ ,एंड्राइड  फोन तरह तरह के उपकरणों से .....लैस हुआ जाता है  है ग्लोबल मानव ट्विटर ,फेस बुक ,मेसंजेर, स्काइप, व्हाट्स एप से दुनिया भर के लोगों से जुड़ जाता है मगर घर ,परिवार और पड़ोस में क्या हो  रहा है... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   5:10am 23 Apr 2013 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
कई बार सभी को संतुष्ट करने की चेष्टा में व्यक्ति यह नहीं समझ पाता  कि वह स्वयं क्या चाहता है?उसे स्वयं किस बात से ख़ुशी मिलती  है?सबकी दृष्टि में अच्छा बनने की चेष्टा में वह स्वयं खंड खंड हो कर रह जाता है ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   9:45am 20 Apr 2013 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
शुभचिंतक मन के विचार कुछ बुरे कुछ अच्छे गुत्थम गुत्था हो जाते हैं जैसे डिब्बे में बंद अलग अलग रंगों के रेशमी धागों के लच्छे तुम एक कुशल कशीदाकार की तरह अपने शब्दों के मखमली  स्पर्श से धीरे धीरे धीरज से सुलझाती हो अलग अलग धागों को !कभी गांठों को तोड़ती  भी हो अपने क... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   9:33pm 16 Apr 2013 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
मन उपवनमन के उपवन मेंउगते हैंफूल भी कांटे भीये तुम पर निर्भर हैकी तुम क्या बोते हो .....मगर दूसरों के लिए बोये गए कांटेघायल करते हैं खुद के मन कोकभी न चाहने पर भी उग आते हैंअनचाहे जंगली पौधे औए कांटे .माली तो हम स्वयं हैंक्यों न निराई गुडाई करेंफेंक दें ईर्ष्या ,द्वेष,कटुत... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   9:14pm 16 Apr 2013 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
ये  दिवस क्यों?महिला दिवस हिंदी दिवस मदर डे फादर दे क्यों????क्योंकि ये उपेक्षित हैं साल के 365 दिनों में सिर्फ एक दिन इनका?कभी सुना है?पुरुष दिवस?इंग्लिश डे?पुत्र दिवस या पुत्री दिवस?नहीं!क्योंकि साल के सारे  365 दिन इनके हैं साल का एक दिन आधी आबादी को देकर हम कौन सा न्या... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   3:49am 8 Mar 2013 #
clicks 156 View   Vote 0 Like   5:02pm 6 Mar 2013 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
मौन का संवाद "काव्य संकलन का लोकार्पण  27 जनवरी 2013 को स्थानीय जवाहर रंगमंच में श्रीमती प्रतिभा चौधरी द्वारा किया गया .... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   8:23am 28 Feb 2013 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
                                                     मेरा प्रथम काव्य संकलन "मौन का संवाद"... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   8:13am 28 Feb 2013 #
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प्रेम -कुछ भिन्न आयाममैं और तुम कुछ ऐसे प्रेम करें की मैं मैं ही रहूँऔर तुम तुम ही रहोमैं दिन को अगर रात कहूंतो तुम मुझे सुधारोहम चाँद के पार न जाकरयहीं धरती पर सुलझाएं और लड़ेजमीनी वास्तविकताओं काहम कल्पनाओं में नहीं जियें वरन  जिंदगी की आपाधापी में  एक दूसरे का स... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   2:57am 14 Feb 2013 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
                                          लघुकथा -अनाथ                                             घर के सब लोग उसे छोड़ कर पार्टी में गए थे।आठ  साल के नन्हे आदित्य की समझ में नहीं आ  रहा था कि  वह क्या करे?रोते रोते वह बिना कुछ खाए सो गया .                                   मम्मी -पापा के कार एक्सीडेंट में गुज... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   4:08am 29 Jan 2013 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
कितना अच्छा  लगता है कितना अच्छा लगता है सर्दी की धूप में बैठ कर अमरुद खाना . गर्मी की अलस दोपहर में कूलर की ठंडी हवा में पसर कर सो जाना .रोटी बनाते समय रेडियो पर बज रहे अपने प्रिय गीत को गुनगुनाना .कितना अच्छा लगता है सोते हुए बच्चे का मुस्कुराना अच्छे नंबर लेकर बच्चे क... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   11:44am 8 Jan 2013 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
 हम सब अपराधी हैंहम समाज को दोष देते समय एक उंगली सामने की ओर  उठाते हैंतो तीन उंगलियाँ हमारे अपनी तरफ होती हैंहाँ हम सब अपराधी हैं, भ्रष्ट हैंआईने के सामने खड़े हो करक्या हम स्वयं से नजरें मिला पाते  हैं?कितना सहज है उपदेश और गलियाँ देनाकितना कठिन है आदर्शों पर चलनाहम ह... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   10:09am 31 Dec 2012 #
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नव वर्ष की शुभकामनायें  फिर से नया वर्ष  आ गया हर वर्ष की तरहकैलेन्डर के पन्ने बदले दिसम्बर माह से जनवरी हुआ हर वर्ष की तरहफोने कॉल, ग्रीटिंग कार्ड ,ई मेल .....वही घिसी पिटी उधार  ली हुयी भाषाफ़ॉर्वर्डेड  एस एम् एस और ई मेल क्या बदला ?तारीख के अलावा समाज में ?हमारे दिलों में... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   5:00am 31 Dec 2012 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
कविता की मृत्यु एक बच्चा जनमता  है आश्चर्य सृष्टि का आँखों में कौतूहल  लिये बड़ा होता है नित नए आश्चर्य जन्म लेती है कविता वह कवि  बन जाता है अपनी कल्पनाओं की रंगीन दुनिया में खोया हुआबच्चा बड़ा और बड़ा होता जाता है दुनिया के बदलते रंगों को महसूसता है-भोगता है छल कपट ,धोखा ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   3:48am 30 Dec 2012 #
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बालिकाओं में कुपोषण -गंभीर प्रश्न राजकीय  कन्या महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना की संयोजिका का पद भार सँभालने के साथ ही सामाजिक सिद्धांतों के परे जमीनी वास्तविकताओं का साक्षात्कार करने का अनुभव हो रहा है।कुछ स्थितियां मन मस्तिष्क को आंदोलित कर देती हैं। मह... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   4:40pm 29 Nov 2012 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
    भारतीय नारी -अस्मिता की तलाश                           नारी को हमेशा से या तो देवी रूप में महिमा मंडित किया जाता है अथवा उसेदोयम दर्जे का प्राणी समझ कर व्यवहार किया जाता है.यत्र नार्यस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता  या ढोल गंवार शूद्र पशु नारी ये सब ताडन केअधिकारी.....या फि... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   10:43pm 27 Nov 2012 #
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आत्मदीप काली अंधियारी रात भयंकर झंझावात वर्ष घनघोर प्रलयंकर पूछती हूँ प्रश्न मैं घबराकर है छुपा कहाँ आशा दिनकर?मन ही कहता क्यूँ भटके तू इधर उधर?खुद तुझसे ही है आस किरण तुझ जैसे होंगे कई भयभीत कातर कर प्रज्ज्वलित पथ स्वयं ही दीप बन !दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ ... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   4:52am 12 Nov 2012 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
 कला अंकुर पिछले वर्ष अजमेर की प्रमुख कला प्रोत्साहन संस्था कला अंकुर( www.kalaankur.org ) से जुड़ने का व उसकी सदस्य बनने का मौका मिला.इसके कार्यक्रमों की स्क्रिप्ट राइटिंग में सक्रिय भागेदारी से मेरी रचनात्मकता को खुराक मिलती है .कला अंकुर के रूपक कार्यक्रम में मेरा परिचय कराय... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   3:23pm 30 Oct 2012 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
कविता का प्रसव हर  आने   वाले  दिन  का  वाकया  और  जाने  वाले  दिन  की   उथल  पुथल  क्यों  जागते  नहीं   एहसास  कोई ? उमड़ता  घुमड़ता  रहता  है  दिल   में  कुछ  कुछ  क्यों  उतार  नहीं  पाती  हूँ  पन्नो   पर  कविता  में ?क्यों  महसूस  नहीं  पाती  हूँ  गम  की  चुभन  या  ख़ुशी  की  छुअन  ह... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   4:17pm 9 Oct 2012 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
पानी की पुकार!मैं......नदियों और समुद्रों से भाप बन उड़ताबादलों में समाताफिर बरसता तुम्हारे घर आंगन ,झीलों ,नदियों वन ,उपवन में आकांक्षा यही है मेरीकोई प्यासा न रहेवन उपवनहरे भरे रहें ....मगर तुम क्या कर रहे हो?तुम्हारी संख्या तो बढती ही जा रही हैकैसे बुझाऊँ तुम सबकी प्यास... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   4:36pm 28 Sep 2012 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
खंड खंड जिंदगीखंड खंड जिंदगीटुकड़ा टुकड़ा मैं!जिंदगी का एक सिरा सँभालने की कोशिश करती हूँतो दूसरा छूटजाता है..........घर -परिवारपति- बच्चेसास -ससुरनाते -रिश्तेदारऑफिस-बॉस ऊपर  से तीज -त्यौहारIसुनती हो.....मम्मी....बहू...की हमेशा लगती रहती है गुहारऔर ऑफिस में अक्सरबॉस की पड़त... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:26pm 13 Sep 2012 #
Blogger: Dr Manjushri Gupta
मौन का संवादमैं लिख रही हूँकिताबजिंदगी की यथार्थ कविताओं कीक्या तुम पढ़ सकते हो?मेरी आँखों में तैरते शब्द?सुन सकते हो?आंसुओं से टपकते गीतमुस्कान के पीछे छिपा हुआदर्द का संगीत?समझ सकते हो?हर रोटी के साथ सिंकती मेरी भावनाएं?चख सकते होसब्जी में उतरा कविता का रस?बच्चों ... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   11:10am 13 Sep 2012 #
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