| मां ,कहां से शुरू करूं ..कुछ समझ में नहीं आ रहा ..तुम्हारे बारे में कुछ लिखना बहुत मुश्किल है ..तुम क्या हो ..सिर्फ़ वही लोग जान सकते है ..जो तुमसे किसी न किसी रूप मै जुडे हुए है ..तुम जैसा दूसरा कोई है ही नहीं .जब तुम्हारे बारे में सोचती हूं ,तो समझ ही नहीं पाती हूं .कैसे तुमने हम स... |
| धूप बहुत तेज होने लगी थी ,बाहार बालकनी मै फ़ैले हुए कपडों को मै समेट रही थी.,गर्मी इतनी ज्यादा थी कपडों की एक बडी सी पोटली बांधकर मै अन्दर भागने को थी .तभी सामने नज़र पडी ,तीन बच्चे मेरे घर के सामने की बाउन्ड्री वाल के बाहार चुपचाप बैठे थे .उन्होंने पैरों मै चप्पल भी नहीं प... |
| हमशहर कि एक पौश कोलोनी मै रहते है,खुली-खुली हवादार सडके,सुव्यवस्थित मकान,दो किमी के अन्दर ही सभी आवश्यक सुविधायें जैसे-फ़ेमस नर्सिंग होम,कोचिन्ग सेन्टर,स्कूल,मार्केट सभी उपलब्ध है ...ज्यादा झन्झट नही..बस,रिक्शा किया..२० रू० के अन्दर वह आपको आपकी मन्जिल तक पहुंचा देगा..मज़... |
| लीजिये ,फ़िर होली का त्योहार आ गया ...बच्चे बोले ..चलो हम बाज़ार हो आते है .पांच दिन बाद ही तो होली है अभी तो खाने-पीने का सामान ,रंग,पिचकारी कुछ भी नही लिया..मैने भी खीझ कर कह दिया..अभी तो पांच दिन बाकी है न..सब हो जायेगा..दिमाग मत खाओ..कहने को तो मैने कह दिया .पर मै बच्चों के मन की ब... |
| फ़ादर्स डे नज़दीक है...पिछले पन्द्रह-सोलह वर्षों में पहली बार मैं अपने मायके गर्मियों की छुट्टी बिताने नही गई..इन्हीं दिनो में मेरे पापा जी का जन्मदिन भी होता है..और फ़ादर्स डे भी..दोनों ही दिन मै मिस कर रही हूं..इन दोनों ही अवसरों पर हम सभी पापाजी की जरूरतों को ध्यान मै रख... |
| बहुत देर से बालकनी मैं बैठी-बैठी बोर हो रही थी ..रात के ग्यारह बज चुके थे..लगभग सभी घरों की लाईटें बंद हो चुकीं थीं..सडकें भी सूनसान होने लगी थीं..मेरे घर के ठीक सामने वाले घर मैं दो माह पहले लगभग 45-46 वर्षिय महिला जिन्हें हम शीला भाभी के नाम से पुकारते थे .कि लम्बी बीमारी के चल... |
| रोज कि तरह आज भी सुबह के ढेर सारे काम निबटा कर अखबार पढने बैठ गई .पता नही क्यूं पिछले 14-15 वर्षों से [जब से कानपुर ब्याह कर आई हूं ] मेरी आदत बन गई है अखबार को उल्टा पढने की ,उल्टे से यह मतलब कतई ना लगायें कि में अखबार का ऊपरी हिस्सा नीचे और नीचे वाला हिस्सा ऊपर कर देती हूं .नहीं ... |
| दशहरा नज़दीक है,साल दर साल दशहरा हो या कोई अन्य त्योहार..हम सब में त्योहार को मनाने का जोश कम ही होता नज़र आ रहा है..कुछ त्यौहारों का आना तो अब बला समान लगता है..दशहरे से जुडी दो यादगार घटनायें मैं आपके साथ शेयर करना चाहूंगी..पहली घटना तब की है..जब मैं ग्यारहवीं क्लास मैं पढ्ती... |
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October 16, 2010, 6:01 pm |
| आकलल पित्र पक्ष चल रहा है ,हिन्दु धर्म में आस्था रखने वालों के लिये यह पक्ष बहुत महत्वपूर्ण है .कहा जाता है कि इन दिनों "पित्रलोक" पूरे वर्ष भर में धर्ती के सबसे निकट होता है . लोग अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार पितरों को जल चढाते ,पन्डितों-गरीबों को भोजन कराते,दान वगै... |
| 3 जुलाई को प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह जी का कानपुर आगमन था.सभी शहरवासी उत्साहित थे.तैयारियां ज़ोरों पर थीं.पीएम की त्री आयामी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी पूरे शहर की सडकें जो लम्बे समय से खुदी पडीं थीं,उन में से वे सडकें, जिन पर से होकर पीएम की सवारी को गुजरना था.बहुत भा... |
| यह कहानी बुन्देलखंड के एक छोटे से गांव की है.. जहां लोग घर आये मेहमान का दिल खोलकर स्वागत करते है.दामाद तो उनके लिये भगवान का स्वरूप होता है..आज भी बेटी के मां-बाप.अपने दामाद के पैर छूते है..दामाद अपनी ससुराल से खुशी-खुशी विदा हो..इसका पूरा खयाल रखते है. इस कहानी का दामाद सिं... |
| हमशहरकि एक पौश कोलोनी मै रहते है,खुली-खुली हवादार सडके,सुव्यवस्थित मकान,दो किमी के अन्दर ही सभी आवश्यक सुविधायें जैसे-फ़ेमस नर्सिंग होम,कोचिन्ग सेन्टर,स्कूल,मार्केट सभी उपलब्ध है ...ज्यादा झन्झट नही..बस,रिक्शा किया..२० रू० के अन्दर वह आपको आपकी मन्जिल तक पहुंचा देगा..मज़ा... |
| पिछलेकुछ वर्षो से हमें एक ऐसे काम की तलाश है जिसमे हमें काम कम दाम ज्यादा मिले ...अभी तक जितने लोगो से इस सिलसिले मई मुलाक़ात हुई ..वे दाम कम ,काम ज्यादा चाहते थे .....इसलिए आज तक हमे अपनी कमाई के दस रूपए भी नसीब न हुए ....कलशाम से बार-बार एक ही विचार दिमाग मै कौंध रहा है ..क्यों मै दस-... |
| पाब्लोनेरुदाको१९७१मैनोबेलपुरस्कारसेसम्मानितकियागयाथा ...नेरुदाकेवलएकक्रांतिदृष्टाहीनहीं थे बल्किसौंदर्यप्रेमीभीथे ....कवितासेअधिकउन्हेंकविताकेविषयसेसरोकारथा ...उन्होंनेअप्रचलितविषयों को छुआ ..उसकीबारीकियों ,खूबियोंकोदेखा...उनकीप्रचलितकविता ''टूटतीहुईची... |
| हम जिस बिल्डिंग में रहते है उसमे पाँच परिवार रहते है ...सभी परिवारों के मर्द जिन्दगी के पांचवे दशक का आनंद ले रहे है ...सादगी पसंद है ...जींस पहनने मै सकुचाते है ...घटना(दुर्घटना) कुछ दिन पहले की है ..बीच के पोर्शन मै एक महिला आई .उम्र चालीस पार , पर वे अपने आपको ''मसकली'' से कम न समझत... |
| लम्बे समय की कोशिश के पश्चात राज्यसभा मै महिला आरक्षण बिल पास हो गया ...प्रसन्नता की बात है ...राज्यसभा ने बहुमत से विधेयक पारित कर इतिहास बना दिया है ..........भविष्य मै इसका लाभ भी दिखेगा ...यह अलग बात है की जब आरक्षण नहीं था तब भी महिलायें अपने कर्तव्य को पूरा कर रही थी ..परिवार,स... |
| नमस्कार. लम्बे समय से चिट्ठा-जगत से पाठिका के रूप में जुडी हूं. सोच रही थी, कोई बढिया "मुहूर्त" दिखे, तो ब्लॉग-जगत की संख्या बढाऊं. अब कल महिला दिवस है, इससे अच्छा मुहूर्त और क्या हो सकता है? तो लीजिये आ गई आपके बीच, दुष्यंत कुमार जी की इस रचना और महिला दिवस की शुभकामनाओं के स... |
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