YASHPAL SINGH ADVOCATE RAMPUR MANIHARAN

ए काश, की तुमने मुझ पर भी,कोई गीत..... .....लिखा होता।नया सा....साज़ कोई,संगीत... लिखा होता।ए काश, की तुमने मुझ पर भी,कोई गीत.......... लिखा होता।मीरा बन... ... ...मुझसे क्यों?लगाई ये,.. .प्रीत लिखा होता।ए काश, की तुमने मुझ पर भी,कोई गीत.......... लिखा होता।मन की नौका, ...का खिवैया,मुझे मन मीत, ...लिखा होता।ए ...
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  June 12, 2015, 10:40 pm
वो, मंजिले बदलने में,मशलूग रहे।और हम,रास्ते बदलने में,.........इस कशमकश में, वक़्त कैसे .....गूजर गया।पता ही,......... नही चला।©Yashpal Singh8-6-2015 10:00pm...
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  June 12, 2015, 10:38 pm
मैंने, न जाने क्यों?सम्भालकर रखा है,आज भी,वो तुम्हारा दिया,गुलाब का फूल।....कुछ...तो, बाकि है।...हम दोनों के बीचआज फिर, एककिताब खोलकर देखी,तो, सामने आ गया,.....गुजरे जमाने की,याद दिल गया।....रंग, सुर्ख निकला,सुखी हुई थी,..पत्तियाकाँटों ने, फिदरत न बदली।ज्यों के त्यों थे, सूल...©Yshpal singh..7-6-20...
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  June 12, 2015, 10:35 pm
कलियों ने,भँवरे का ख्याल, पूछ लिया।आज फिर क्यूँ,उठा दिल में मलाल पूछ लिया।जबाब जो खुद थे,उन्होंने ही,अजीब सा, सवाल पूछ लिया।दर्दे दिल का कारण थे, जोउन्होंने ही,दिल का हाल पूछ लिया।©Yashpal Singh28-5-2015 4:50pm...
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  June 12, 2015, 10:33 pm
तुम, ....गर्मी के बहाने, बांधकर, चेहरे पर कपड़ा,होटो के काले तिल को,यूँ, ही छिपाये रखना।....काले, चश्मे के पीछे,कातिल... नैनों को,यूँ ही, छिपाये रखना।....वरना, न जाने, कितने,होंगे, जख्मी।न जाने, कितने,संसार के पार होंगे।...••© Yashpal Singh 19-5-2015. 3:40pm...
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  June 12, 2015, 10:30 pm
मैं, तलाश-ता रहा उन्हें।पत्थर'तरास कर।मुझे, पता ही नही, चला...अपने हुनर का।न जाने कब....मूर्तिकार बन गया।..©Yashpal Sinhg "Advocate" 12-05-201510:43amये जमाना भी, अज़ीब है,......दोस्तों,मैं "तन्हाई"पर, शोध करने चला था।और लोगो ने, मुझे ही।"तन्हा"..समझ लिया।....©Yashpal Singh "Advocate"29/4/2015 - 1:55pm...
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  June 12, 2015, 10:26 pm
कागज को, बदला,कलम को, बदला,स्याही को बदल कर, देख लिया।हवा को, बदला,पानी को, बदला,वादियों को बदल कर, देख लिया।क्या? करूँये कमबख्त दिल,तेरे, सिवा किसी और विषय पर,हाथ को लिखने ही,... नही देता।...© Yashpal Singh "Advocate" 1-4-2015...
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  June 12, 2015, 10:22 pm
खुला, छोड़ा होगा,आज भी, अपनी,जुल्फों को तुमने |तभी तो, ये, सावन की घटा,वापस, आई है....छुआ होगा,जुल्फों ने गालो को,तभी तो,चमचमाती बिजली,के साथ, येबे मौसम बरसात,आयीं है........"Yashpal Singh" 29/3/2015...
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  June 12, 2015, 10:18 pm
जी करता है, कि, मैं तेरीजुल्फों से खेलूं।होली, का मौका है, गुलाल लगाने के बहाने,मैं, तेरी गुलाबी, मुलायम,संगमरमरसी,गालो को अपने हाथों में, .....लेंलूँ।तुम, शरमा कर, सिर रख दो,मेरी, गोद में, आँखे बंद कर लो।मैं, होले-होले तुम्हारी जुल्फों को,सहलाऊँ, कुछ इस तरह से होली म...
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  June 12, 2015, 10:10 pm
   रोक लो, ...इन हवाओं को,  कहीं, .. तूफ़ान न बन जाये।   दरिया खुद में,... डुबोले किश्ती को,   कहीं, ...साहिल गवाह न बन जाये।   रोक लो, ...इन हवाओं को,   कहीं, .. तूफ़ान न बन जाये।   समा की चाहत में,...परवाना,   कहीं, जलकर बर्बाद न, हो जाये।   रोक लो, ...इन हवाओं को,   कहीं,...
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  June 12, 2015, 10:00 pm
मैंने, "रोज डे"पर,उन्हें, सलाम लिख दिया।********************डालियों, से काँटों, को चुना मैंने,फूलों, को तेरे नाम लिख दिया|मैंने, "रोज डे"पर,उन्हें, सलाम लिख दिया।********************देखा, उनकी और,नजरें थी, झुकी हुई।उठी, तो ये पैगाम लिख दिया।मैंने, "रोज डे"पर,उन्हें, सलाम लिख दिया।********************तुम, मान...
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  February 13, 2015, 8:37 am
आज तुम घर से नही निकलोगे,ऐसा, श्रीमती जी ने प्रतिबन्ध लगाया।***************************************"रोज"डे गया, "चाकलेट"डे गया,"हग"डे गया, "किस"डे गया,जैसे ही, "वेलेंन्टान डे"का नम्बर आया...आज तुम घर से नही निकलोगे,ऐसा, श्रीमती जी ने प्रतिबन्ध लगाया।**************************************अगर, आज तुमने किसी भी, पड़ोसन ...
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  February 13, 2015, 8:33 am
 यह मेरी लघु कविता भारत माता के चरणों में समर्पित है। और हमारे देश की सीमओं पर तैनात फौजी भाइयों की होसला  अफजाई के लिए है. जो मेरे द्वारा 26/01/2015 की पूर्व संध्या पर लिखी गयी है। माँ हम तुझे, सलाम करते है।..... ************************* पाला है, तुमने हमें, तुमने ही, संभाला है, झुका कर...
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  January 26, 2015, 8:39 pm
 प्यार कैसा होता है, मुझे नहीं, पता। लेकिन, इतना अहसास है, मुझे।.... गुजरते है, जब, वो, करीब से.. तो, धडकने, बढने लगती है। मन में, भूचाल से आते है।.... मचल उठता है, दिल मेरा, उनके, मनुहार को, इसमें, तूफान से आते है।.... हुआ, करता था, ऐसा, पहले कभी, जब,...
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  January 26, 2015, 8:36 pm
मेरी, यह कविता सत्य घटना पर आधारित है। कल्पना का कोई सहारा नही लिया गया है। इसका किसी फेसबुक मित्र/Whatsaapमित्र या पूर्व प्रेमिका (वर्तमान में पतनी को छोडकर नही है) या किसी भी पुरुष/महिला से कोई भी सम्बन्ध किसी प्रकार का नही है। और न ही किसी की भावना को ठेस पहुंचना मेरी कवित...
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  January 2, 2015, 8:07 pm
नये, साल की, पहली बारिश... ************************नये, साल की,पहली बारिश।रुमझम-रुमझम,रिमझिम-रिमझिम।चलो, कुछ, सपने सजाते है..भीगना, ..तो है,पूरे, साल,बारिश में, अकेले-अकेले।आज, हम..दोनों,साथ मिलकर,भीग, जाते है।चलो,कुछ, सपने सजाते है.. ....©Yashpal Singh "Advocate" 02/01/2015...
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  January 2, 2015, 8:02 pm
पुराना साल, जाते-जाते.....***********************पुराना साल,जाते-जाते,मुझे, कई तौहफे दे, गया...सब, ठीक चला,खुशिया, बरसती रही,काम, कुछ अनोखे दे, गया...पुराना साल,जाते-जाते,मुझे, कई तोहफे दे, गया....उनसे, बाते,होती रही,मुलाकात, केकई, मौके दे, गया....पुराना साल,जाते-जाते,मुझे, कई तोहफे दे, गया......©Yahpal Singh "Advocate"...
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  January 2, 2015, 7:57 pm
वो, सीखने चले थे। मैं, सीखने चला था।प्यार का अध्याय।पढ़ाने चला था।सबक, वो नही था।जो, वो समझ गये।सबक, वो था।जो मैं,उन्हें समझा न सका।आँखे, बयाँ करती रही।हाले दिल।जुबां से, कुछ बता न सका।            ........... © "यशपाल सिंह"...
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  November 4, 2014, 2:36 pm
ये कुहरा और शर्दी============ये कुहरा और शर्दी,मुझे, याद दिलाती है,उस शर्दी के मौसम की,कुहरे की चादर की, स्म्रति की गागर की,हमारे प्रेम सम्बन्धों की, सम्बन्धों के तपन की,तुम्हारे, उस काले,ऊनी शाल की,गर्म आगोश की,++++++++++जब, हम बैठते थे, छत पर,देखते थे, नीचेतो, घने कुहरे में,ऐसा, लगता था,म...
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  January 2, 2013, 9:26 pm
इन्द्रधनुष की बनाकर रस्सी....+++++++++++++++++++{हरियाली तीज विशेष}इन्द्रधनुष की बनाकर रस्सी !सावन की,रिम—झिम फुआरों के बीच !बादलों की लहराती लताओ में,मैं, तुम्हारा झूला डालूँ !सितारें हो,इन लताओ के फूल !मन है, के तुम्हे झुलाऊ !अरमानो के हाथ बढाकर,झूले तक,तेरे पहुंचा कर !झूले दूँ इतने ...
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  July 21, 2012, 9:07 pm
+++++++ गजल ++++++   ============= मैं, तेरे नाम पे......, इक सुन्दर सी गजल लिखूँगा,जानेजाना तुझे मैं....२, इक शायर का ख्वाब लिखूँगा !मैं, तेरे नाम पे......,अफसराओं को जमीं पर, आने की जरूरत क्या है?रानी परियों की तुझे मैं...२, मलिकाए हुस्न लिखूँगा !मैं, तेरे नाम पे......,चाँद सितारोंकी इस जहाँ को, अब जरूरत क्...
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  May 27, 2012, 9:39 pm
     गर्मी में, कब्रिस्तान से आती आवाज...  ++++++++++++++++++++++++++++               पड़ रही है, गजब की गर्मी,                    गर्मी से तंग है, हाल,        ऐसे में, कब्रिस्तान से, आई एक आवाज,         अरे, ओ जिन्दा दुनिया के, इंसानों,              मुझे तुम से शिकायत है,               मैं हूँ , गर्मी से परेशान,      ...
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  May 17, 2012, 9:14 pm
यादों को बन्दी बनाया है, मैंने !उनकी,आँखों में आशियाना था, मेरा !जिनकी,बस, मिलते ही यादों को,जुदाई की सजा,यादों को, घसीट लाया,निर्ममता से,दिल की कठोर दीवारों में !बन्दी बनाया,  अँधेरी काल कोठरी में !करुणा का लगाकर ताला,विरह खाने में दिया,कभी अपशब्द, तो कभी कुण्ठाघात किया,न ज...
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  April 24, 2012, 2:22 pm
अजब है, ये प्रेम कहानी,कभी लगती है, नयी,कभी लगती है, पुरानी........इस भौतिकता के दौर में,लोगों को, नित नये आवास,पसंद है, मैं तुम्हारे,... दिल के, टूटे खंडरो में रहता हूँ,कभी बनकर लहू, जिगर का,धमनियों में बहता हूँ,भले ही तुम न कहो,मुझे, पता है,तुम भी याद, करते हो,मुझे , तन्हाई में अक्सर,औ...
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  March 27, 2012, 8:24 am
लो भाई, आ गयी होली,+++++++++++++++++नई उमंग, नई तरंग,जीवन, में बरसाने रंग,लिए, बहारे संग,अब, रंग में रंग जायेगीं ,सूरते, भोली- भाली,  लो भाई, आ गयी होली.......+++++++++++++++++कुछ हाथो में, पिचकारी है,कुछ हाथो, में है- गुलाल,कुछ, चेहरे पहिचाने जाते,कुछ, रंग ने किये बे-पहिचाने,होली, लिखी टोपी- ओढ़े,बस, निकल प...
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  March 7, 2012, 10:04 pm
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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