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Blog: YASHPAL SINGH ADVOCATE

Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
मोती बने अगर, आंसू तुम्हारे,अपने आँचल,. में समेट लूँगा।....सितारे बन बरसे, ....घर मेरे,अपने आँगन में,. समेट लूँगा।....बदरा बन बरसे,...... संग मेरे,उन्हें वफाओ का.. सिला दूँगा......©Yashpal Singh "Advocate"8-7-2015 12:05pm... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   4:15pm 13 Jul 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
उनके सब्र का..... ...बाँध टूटा,कल उन्होंने पूछ... ..ही लिया,कि आप... .....लिखने के लिए,ये सुंदर शब्द कहाँ से लाते है।....मैंने,बड़े सहज़ ही जबाब दिया,मैं शब्द कही से.. ..लाता नही,तुम्हारी सुंदरता........ को देख,खुद ही, जहन में....आ जाते हैं।....©Yashpal Singh21-6-2015 7:15am... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   3:19am 26 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
तुम बिन ये बरसात, ...........अब अच्छी नही लगती!*****************************************तुम्हारे संग  गुजरे हुए ................. .पलो को सोचकर,गुजरते है,दिनअच्छे,...मगर रात अच्छी नही लगती!तुम बिन ये  बरसात, ...........अब अच्छी नही लगती!मिलते तो हम है, .................सबसे मगर,तेरे सिवा,किसी और से मुलाकात,...... से अच्छी नही लगती!तुम ब... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   2:20pm 18 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
लौटकर अब, ..वो गुजरे जमाने नही आते।*******************************************खाया करते थे.... .....जो कभी कसमे,साथ मेरे जीने की......साथ मेरे मरने की।अब भूल गए ..वादों को, निभाने नही आते,लौटकर अब, ...वो गूजरे जमाने नही आते।पतझड़ में गिर जाये..गर दरख्तो के पत्ते,तुम लाख कौशिशें............ करके देख लो,फूल नये खिलते है, क... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   4:57pm 17 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
तुम्हें, कुछ लिखना..... हो अगर,तो, मेरे मन के ख्यालात लिख दो।कुछ अहसास....... लिखो,कुछ जज्बात ....लिख दो।तुम्हें, कुछ लिखना....... हो अगर,तो, मेरे मन के ख्यालात लिख दो।कुछ दिन की..... ..बातें लिखो,कैसे गुजरती है..रात लिख दो।तुम्हें, कुछ लिखना....... हो अगर,तो, मेरे मन के ख्यालात लिख दो।कलियों की... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   5:57pm 15 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
ए काश, की तुमने मुझ पर भी,कोई गीत..... .....लिखा होता।नया सा....साज़ कोई,संगीत... लिखा होता।ए काश, की तुमने मुझ पर भी,कोई गीत.......... लिखा होता।मीरा बन... ... ...मुझसे क्यों?लगाई ये,.. .प्रीत लिखा होता।ए काश, की तुमने मुझ पर भी,कोई गीत.......... लिखा होता।मन की नौका, ...का खिवैया,मुझे मन मीत, ...लिखा होता।ए ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   5:10pm 12 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
वो, मंजिले बदलने में,मशलूग रहे।और हम,रास्ते बदलने में,.........इस कशमकश में, वक़्त कैसे .....गूजर गया।पता ही,......... नही चला।©Yashpal Singh8-6-2015 10:00pm... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   5:08pm 12 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
मैंने, न जाने क्यों?सम्भालकर रखा है,आज भी,वो तुम्हारा दिया,गुलाब का फूल।....कुछ...तो, बाकि है।...हम दोनों के बीचआज फिर, एककिताब खोलकर देखी,तो, सामने आ गया,.....गुजरे जमाने की,याद दिल गया।....रंग, सुर्ख निकला,सुखी हुई थी,..पत्तियाकाँटों ने, फिदरत न बदली।ज्यों के त्यों थे, सूल...©Yshpal singh..7-6-20... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   5:05pm 12 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
कलियों ने,भँवरे का ख्याल, पूछ लिया।आज फिर क्यूँ,उठा दिल में मलाल पूछ लिया।जबाब जो खुद थे,उन्होंने ही,अजीब सा, सवाल पूछ लिया।दर्दे दिल का कारण थे, जोउन्होंने ही,दिल का हाल पूछ लिया।©Yashpal Singh28-5-2015 4:50pm... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   5:03pm 12 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
तुम, ....गर्मी के बहाने, बांधकर, चेहरे पर कपड़ा,होटो के काले तिल को,यूँ, ही छिपाये रखना।....काले, चश्मे के पीछे,कातिल... नैनों को,यूँ ही, छिपाये रखना।....वरना, न जाने, कितने,होंगे, जख्मी।न जाने, कितने,संसार के पार होंगे।...••© Yashpal Singh 19-5-2015. 3:40pm... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   5:00pm 12 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
मैं, तलाश-ता रहा उन्हें।पत्थर'तरास कर।मुझे, पता ही नही, चला...अपने हुनर का।न जाने कब....मूर्तिकार बन गया।..©Yashpal Sinhg "Advocate" 12-05-201510:43amये जमाना भी, अज़ीब है,......दोस्तों,मैं "तन्हाई"पर, शोध करने चला था।और लोगो ने, मुझे ही।"तन्हा"..समझ लिया।....©Yashpal Singh "Advocate"29/4/2015 - 1:55pm... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   4:56pm 12 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
कागज को, बदला,कलम को, बदला,स्याही को बदल कर, देख लिया।हवा को, बदला,पानी को, बदला,वादियों को बदल कर, देख लिया।क्या? करूँये कमबख्त दिल,तेरे, सिवा किसी और विषय पर,हाथ को लिखने ही,... नही देता।...© Yashpal Singh "Advocate" 1-4-2015... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   4:52pm 12 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
खुला, छोड़ा होगा,आज भी, अपनी,जुल्फों को तुमने |तभी तो, ये, सावन की घटा,वापस, आई है....छुआ होगा,जुल्फों ने गालो को,तभी तो,चमचमाती बिजली,के साथ, येबे मौसम बरसात,आयीं है........"Yashpal Singh" 29/3/2015... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   4:48pm 12 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
जी करता है, कि, मैं तेरीजुल्फों से खेलूं।होली, का मौका है, गुलाल लगाने के बहाने,मैं, तेरी गुलाबी, मुलायम,संगमरमरसी,गालो को अपने हाथों में, .....लेंलूँ।तुम, शरमा कर, सिर रख दो,मेरी, गोद में, आँखे बंद कर लो।मैं, होले-होले तुम्हारी जुल्फों को,सहलाऊँ, कुछ इस तरह से होली म... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   4:40pm 12 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
   रोक लो, ...इन हवाओं को,  कहीं, .. तूफ़ान न बन जाये।   दरिया खुद में,... डुबोले किश्ती को,   कहीं, ...साहिल गवाह न बन जाये।   रोक लो, ...इन हवाओं को,   कहीं, .. तूफ़ान न बन जाये।   समा की चाहत में,...परवाना,   कहीं, जलकर बर्बाद न, हो जाये।   रोक लो, ...इन हवाओं को,   कहीं,... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   4:30pm 12 Jun 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
मैंने, "रोज डे"पर,उन्हें, सलाम लिख दिया।********************डालियों, से काँटों, को चुना मैंने,फूलों, को तेरे नाम लिख दिया|मैंने, "रोज डे"पर,उन्हें, सलाम लिख दिया।********************देखा, उनकी और,नजरें थी, झुकी हुई।उठी, तो ये पैगाम लिख दिया।मैंने, "रोज डे"पर,उन्हें, सलाम लिख दिया।********************तुम, मान... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   3:07am 13 Feb 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
आज तुम घर से नही निकलोगे,ऐसा, श्रीमती जी ने प्रतिबन्ध लगाया।***************************************"रोज"डे गया, "चाकलेट"डे गया,"हग"डे गया, "किस"डे गया,जैसे ही, "वेलेंन्टान डे"का नम्बर आया...आज तुम घर से नही निकलोगे,ऐसा, श्रीमती जी ने प्रतिबन्ध लगाया।**************************************अगर, आज तुमने किसी भी, पड़ोसन ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   3:03am 13 Feb 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
 यह मेरी लघु कविता भारत माता के चरणों में समर्पित है। और हमारे देश की सीमओं पर तैनात फौजी भाइयों की होसला  अफजाई के लिए है. जो मेरे द्वारा 26/01/2015 की पूर्व संध्या पर लिखी गयी है। माँ हम तुझे, सलाम करते है।..... ************************* पाला है, तुमने हमें, तुमने ही, संभाला है, झुका कर... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   3:09pm 26 Jan 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
 प्यार कैसा होता है, मुझे नहीं, पता। लेकिन, इतना अहसास है, मुझे।.... गुजरते है, जब, वो, करीब से.. तो, धडकने, बढने लगती है। मन में, भूचाल से आते है।.... मचल उठता है, दिल मेरा, उनके, मनुहार को, इसमें, तूफान से आते है।.... हुआ, करता था, ऐसा, पहले कभी, जब,... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   3:06pm 26 Jan 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
मेरी, यह कविता सत्य घटना पर आधारित है। कल्पना का कोई सहारा नही लिया गया है। इसका किसी फेसबुक मित्र/Whatsaapमित्र या पूर्व प्रेमिका (वर्तमान में पतनी को छोडकर नही है) या किसी भी पुरुष/महिला से कोई भी सम्बन्ध किसी प्रकार का नही है। और न ही किसी की भावना को ठेस पहुंचना मेरी कवित... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   2:37pm 2 Jan 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
नये, साल की, पहली बारिश... ************************नये, साल की,पहली बारिश।रुमझम-रुमझम,रिमझिम-रिमझिम।चलो, कुछ, सपने सजाते है..भीगना, ..तो है,पूरे, साल,बारिश में, अकेले-अकेले।आज, हम..दोनों,साथ मिलकर,भीग, जाते है।चलो,कुछ, सपने सजाते है.. ....©Yashpal Singh "Advocate" 02/01/2015... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   2:32pm 2 Jan 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
पुराना साल, जाते-जाते.....***********************पुराना साल,जाते-जाते,मुझे, कई तौहफे दे, गया...सब, ठीक चला,खुशिया, बरसती रही,काम, कुछ अनोखे दे, गया...पुराना साल,जाते-जाते,मुझे, कई तोहफे दे, गया....उनसे, बाते,होती रही,मुलाकात, केकई, मौके दे, गया....पुराना साल,जाते-जाते,मुझे, कई तोहफे दे, गया......©Yahpal Singh "Advocate"... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   2:27pm 2 Jan 2015 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
वो, सीखने चले थे। मैं, सीखने चला था।प्यार का अध्याय।पढ़ाने चला था।सबक, वो नही था।जो, वो समझ गये।सबक, वो था।जो मैं,उन्हें समझा न सका।आँखे, बयाँ करती रही।हाले दिल।जुबां से, कुछ बता न सका।            ........... © "यशपाल सिंह"... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   9:06am 4 Nov 2014 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
ये कुहरा और शर्दी============ये कुहरा और शर्दी,मुझे, याद दिलाती है,उस शर्दी के मौसम की,कुहरे की चादर की, स्म्रति की गागर की,हमारे प्रेम सम्बन्धों की, सम्बन्धों के तपन की,तुम्हारे, उस काले,ऊनी शाल की,गर्म आगोश की,++++++++++जब, हम बैठते थे, छत पर,देखते थे, नीचेतो, घने कुहरे में,ऐसा, लगता था,म... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   3:56pm 2 Jan 2013 #
Blogger: यशपाल सिंह "एडवोकेट"
इन्द्रधनुष की बनाकर रस्सी....+++++++++++++++++++{हरियाली तीज विशेष}इन्द्रधनुष की बनाकर रस्सी !सावन की,रिम—झिम फुआरों के बीच !बादलों की लहराती लताओ में,मैं, तुम्हारा झूला डालूँ !सितारें हो,इन लताओ के फूल !मन है, के तुम्हे झुलाऊ !अरमानो के हाथ बढाकर,झूले तक,तेरे पहुंचा कर !झूले दूँ इतने ... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   3:37pm 21 Jul 2012 #
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