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Blog: kagad ki lekhi

Blogger: Reena Pant
 किंडल - ला ला लाकिताब- अरे कोई इधर भी देखो ।मेरी धूल तो झाड़ दो।किंडल - ला ला ला (किताब को मुंह चिढ़ाता है ) पड़ी रहो एक कोने में चुपचाप।किताब - क्या जमाना था मेरा भी ।लोग हाथों हाथ लेते थे।किंडल - अब जमाना मेरा है ।अब सबके हाथों में मैं हूं।तुम तो अब पुराने जमाने की बात हो ग... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   12:54am 10 Aug 2021 #
Blogger: Reena Pant
 देखिए तो, आज ये जनाब फिर आ गए। मुंबई इमेजिका से जो साथ चले,बस साथ छोड़ा नहीं। मुंबई का हाल पूछा ।थोड़ा नाराज थे कल बातचीत नहीं हुई न , इसलिए।कितना समझाना पड़ा कि कल बड़ौदा में थकान भरे सफर के बाद आरामगाह की खोज में व्यस्त हो गई थी।इसलिए तुम्हेँ देख ही न पाई। बहुत मनाना प... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   3:24am 30 Dec 2020 #
Blogger: Reena Pant
           अपनी गलतियों का दोष भाग्य और इश्वर  पर डालते जरा भी नहीं सोचते कि कभी हमारी गलतियों की इन्तहा होगी ?एक तूफान आया और सब अपने साथ बहा के गया।घर,लोग,पशु पेड़ ...हे ईश्वर,जरा भी दया नहीं आई।कितने बच्चे थे ,कितने बूढे  थे कितने लाचार थे।सबको लील लिया .....बहुत शि... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   5:20pm 2 Jul 2013 #
Blogger: Reena Pant
हमारी आस्थाएँ                  मेरी ईश्वर  में गहरी  आस्था है।सुबह की गहमागहमी में घर का काम निबटाने  की जल्दी के बावजूद  नहाकर मंदिर में दीया  जरुर जलाती हूँ।धर्म में भी मेरी उतनी ही आस्था है क्यूंकि कही पढ़ा था कि  धर्म हमे बुराइयों से बचाता है,कर्त्तव्य निर्वाह के लिए प्र... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   2:07pm 12 Apr 2013 #dharm.
Blogger: Reena Pant
स्त्री मैने हमेशा सुना कि  स्त्री-पुरुष एक गाड़ी के दो पहिये है और इश्वर की कृपा से इतनी भाग्यशाली रही कि  हमेशा एक स्त्री के रूप में सम्मान पाया .पिता,पति,भाई ,बेटा, मित्र सबने यथोचित सम्मान दिया पर समाज में हो रहे अत्याचार,लड़किओं के प्रति दुर्व्यवहार ने दिल को दुखी ... Read more
clicks 269 View   Vote 0 Like   12:33pm 10 Mar 2013 #
Blogger: Reena Pant
कविता मैं बहुत देर तक शब्दों को पकडती रही,कविता रचने का प्रयास करती रही और शब्द उड़ते रहे आगे -पीछे दाएँ -बाएं बनते-बिगडते रहे कभी बादल बन विस्तृत आकाश की सीमा लांघने की कोशिश में विफलकभी चाँद की चांदनी में पिघल गए तो कभी सूरज की गर्मी में जल गए। मैं बहुत देर तक ... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   11:40am 31 Oct 2012 #shabd
Blogger: Reena Pant
हाथहर बेटी मानती है कि उसके पिताजी इस दुनिया  का सबसे अच्छे पिता  हैं ,उन जैसा कोई दूसरा हो ही नहींसकता .मुझे भी यही विश्वास  है .मेरे बाबूजी जैसा कोई नहीं सारे संसारमें .कोई समस्या हो ,कोई प्रश्न हो सबका हल बाबूजी के पास ....आज मैं  जहाँ हूँ जैसी भी हूँ बाब... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   3:48pm 10 Oct 2012 #
Blogger: Reena Pant
आज सुबह-सुबह एक कार्यक्रम देख रही थी.इमरान साक्षत्कार कर रहे थे जाने माने कलाकार विक्टर बनर्जी का..इसी दौरान उन्होंने  एक बहुत ही हृदयस्पर्शी कहानी सुनाई जो इस प्रकार है .....   'उत्तराखंड  बचाओ आन्दोलन' के समय की बात है.विक्टर उस समय मसूरी में रह रहे थे और आन्दोलन में स... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   4:31pm 30 Sep 2012 #
Blogger: Reena Pant
           रोज़ ६.१५ का समय तय है .हम तीनों  नियमानुसार  निकल पडे.तय स्थान है जहाँ शाम को हम walk के लिए जाते है .walk के साथ talk  भी उसी speed से होता है पतियों की बुराई से लेकर बच्चों की पढाई और बाइयों का रोना .......दिन भर की हलचल......सबको साझा करने का वही समय है (ये अलग बात है कि पत... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   11:40am 20 Sep 2012 #
Blogger: Reena Pant
उम्र ..........आओ समय मैं सहेज लूँबंद कर अपनी हथेलीताउम्र न खुले ये पहेली .....जान भी न पाए कोईक्यों हुए  थे गाल  गुलाबी .क्यों नशे में बंद आंखेक्यों छाई  थी वो लाली।याद कर कर के वो शर्माना .बस  धीरे  से मुस्कानाकही खो जाना ,गुम  हो जानारातों को जागते रहनाउजाले में भी घबरानाकभी  ... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   1:47pm 12 Sep 2012 #
Blogger: Reena Pant
           फिर बेटी ने कहामाँ मुझको भी आने दो अपनी गोद सजाने दो बनकर आसमान में चंदा चांदनी से भर दूंगी बनकर असमान का सूरज मैं रौशनी कर दूंगी बनकर फूलों की पंखुडिया अपनी गोद सजाने दो आने दो माँ आने दो माँ अपनी गोद सजाने दो तितली बनकर आसपास जब मैं  लहराऊंगीलाल ला... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   12:00pm 11 Sep 2012 #
Blogger: Reena Pant
           फिर बेटी ने कहामाँ मुझको भी आने दो, अपनी गोद सजाने दो बनकर आसमान में चंदा ,चांदनी से भर दूंगी बनकर असमान का सूरज ,मैं रौशनी कर दूंगी बनकर फूलों की पंखुडिया, अपनी गोद सजाने दो आने दो माँ ,आने दो माँ ,अपनी गोद सजाने दो तितली बनकर आसपास ,जब मैं  लहराऊंगीलाल ला... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   12:00pm 11 Sep 2012 #maan
Blogger: Reena Pant
        कल अचानक उनकी मृत्यु का समाचार मिला .कुछ भी असामान्य  नहीं था. ८० की उम्र में मृत्यु .....सुनकर उतना दुःख नहीं होता.  हाँ अपनों को खोने  की कसक तो हमेशा रहती है.बहुत पहले मिलना हुआ था बुआ से पर फूफाजी से नहीं के बराबर मुलाकात होती. यू तो बुआ से रिश्ता कोई ब... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   3:41pm 2 Sep 2012 #
Blogger: Reena Pant
नींद आज खुमारी सी छाई हैशायद बहुत दिनों के बाद,नींद आई है ......आज बारिश हुई है फिर से कहींअभी-अभी खबर ये आई हैमहकी हुई है खुशबु से हर ग़ज़ल जो हमने गाई है  यूँ तो कहते हैं  सपने आते है नींदों में.  हमने तो हरदम  उनीदी आँखों में सपनो की दुनिया सजाई है....... रात दिन  जाग-जाग कर हमने ... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   5:18pm 7 Aug 2012 #
Blogger: Reena Pant
पर तुम नहीं आये .......क्या विवाह की रस्म ,लिए दिए वचन प्रेम की कसौटी है ? लगभग ७५% लोग तो वास्तव में जीवन अकेले जीते है ,क्या गृहस्थ और प्रेम एक दूसरे का पर्याय है?या प्रेम एक भाव है और गृहस्थी एक जिम्मेदारी ....या दोनों एक है ?मैं इंतज़ार करती रहीपर तुम नहीं आए ........बस सप्तपदी फेर... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   1:10pm 15 Jul 2012 #
Blogger: Reena Pant
प्रेम कुछ देर और खामोश बैठो कि दिल की जुबान कुछ कहना चाहती है कोई गीत होंठों  से निकल न जाएँकि दिल की धड़कन कुछ गुनगुनाती है .महसूस करो  इस प्यार की कशिशनर्म हथेलिओं की रेखाओं  का मिलना बंद आंखों से देखने की कोशिश लरजते बादलों के बीच कौंधती बिजली .कि कहीं  हुई बारिश स... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   2:36pm 12 Jul 2012 #
Blogger: Reena Pant
बस यूँ ही आँख बंद किये आँगन में बैठीधूप पी रही थीकि एक नन्ही सी तितलीकाली पीली धब्बो वालीबांह पर  आकार बैठ गयीऔर बार बार पंख फडफडा कर अपना अस्तित्व जताने कीकोशिश करती रही .हवा का झोंका,मेरी सांसो की गति, उसे उड़ा न सकी मैं उनींदी आँखों से देखती रही उसे निहारती रही मै... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   11:34am 4 Jul 2012 #
Blogger: Reena Pant
उम्मीद दिन भर में कई चेहरे ऐसे दिखते है जो निराश,हताश हो चुके है.ज़िन्दगी कभी कभी किसी के लिए इतनी निष्ठुर क्यों हो जाती है .काश कि एक उम्मीद का दीया  उस ज़िन्दगी में  जला सकूँ ...जब  भी देखती हूँ तुम्हारी आंखों में खो जाती हूँ दर्द की गहराई मेंउतरती जाती हूँ गहरे और ग... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   5:40pm 28 Jun 2012 #
Blogger: Reena Pant
1 june2012.......अट्ठारह वर्ष यूँ ही गुज़र गए आज भी याद है कैसे नवेली दुल्हन बनकर आई  तुम्हारी आंगन मेंकितना शरमाई थी कितना घबराई  थी न जानेकैसे निभेगा जन्मों का साथ माँ ने कहा था  जब बांधी थी दुपट्टे में गांठ अब है निभाना ज़िन्दगी भर  साथ और तब से चाल रहे है साथ क़ि इतने वर्षो... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   4:55pm 19 Jun 2012 #
Blogger: Reena Pant
समुंदर की लहर बड़ी बेआबरू है जी बेलिहाज होकर यू ही इतराती बलबलाती है, बलखाती चली आती है न जाने कैसेकिस छोर से पागल, मिटा कर चली जाती है समुंदर की लहर देखो .कभी गाती कभी डरातीकभी बुलाती अपनी ओर कभी उथली कभी धुंधली नागिन सी ये बलखाती चली आती है समुंदर की लहर देखो .कभी... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   4:37pm 27 May 2012 #
Blogger: Reena Pant
ठहर  जा शाम कुछ पल और     अभी होना है मिलन बाकीधरा और सूरज कागुलाबी  रंगतों में डूबना हैधरा को कि आते ही शुरू होगी चंदा की मधुर शरारत किसी ओट से करेगा वोएक कोशिश सताने की कहीं लजा न जायेदुल्हन सी धरा अलबेली समेटे जो हरी चुनरी छिपाए नूर सा चेहरा अधखुली आँखों से बाट जोहत... Read more
clicks 246 View   Vote 0 Like   5:24pm 30 Apr 2012 #
Blogger: Reena Pant
मेरा जन्म मुक्तेश्वर की सुरम्य वादियोंमें हुआ. मुक्तेश्वर को भूल पाना ,पल भर भी बिसराना मेरे लिए मुश्किल है .मैं हर पल वहा की हवा को अपने भीतर महसूस करती हूँ ........हिमालय की सुर्ख सफ़ेद पर्वत श्रखलाओं  के नीचे हरे देवदार के दरख्तों के बीच बुरुंश के लाल फूलों की छटाएंसफ़... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   6:12pm 28 Apr 2012 #
Blogger: Reena Pant
मित्र चलो दोस्त , कुछ फुर्सत मिली है बिता लें लम्हे साथ  कुछ बातें कुछ किस्से कुछ यादें .कुछ पल और जी ले खिलखिला के हंस ले .दिलों के जोड़-तोड़ तमाम बंध खोल  पंछी से उड़ लें समय के आसमान में.थोड़ी सी और दूरी जो रह गयी थी अधूरी तय कर ले चलते चलते  सागर के साथ साथ .चंदा की रौ... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   4:30pm 28 Apr 2012 #
Blogger: Reena Pant
क्या बनोगी ?बचपन में जब भी मैं अपनी बेटी से कहती" क्या बनोगी " उत्तर होता "माँ "थोड़ी बड़ी होने पर उत्तर होता "बाई ".उसकी मासूमियत पर हम खूब हंसते .अब वो और बड़ी हो गयी है कि अब तय करना होगा वास्तव में उसे क्या बनना  है? फिर हमारा  जीवन भौतिकता की  चपेट में कुछ इस तरह  है कि भ... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   11:03am 25 Mar 2012 #
clicks 203 View   Vote 0 Like   10:57am 25 Mar 2012 #
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