| पृथ्वीराज चौहान, जो कि दिल्ली के चौहान राजवंश के अन्तिम शासक थे का जन्म सन् 1168 में हुआ था। उनके पिता सोमेश्वर चौहान तथा माता कर्पूरी देवी थीं। सोमेश्वर चौहान अजमेर के राजा थे तथा कर्पूरी देवी दिल्ली के राजा अनंगपाल की इकलौती पुत्री थीं। उत्तराधिकारी के अभाव में अनंगप... |
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October 30, 2012, 7:44 am |
| राजस्थान, जो अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में शुमार है,जहां एक ओर दूर तक फैला हुआ थार का रेगिस्तान है तो दूसरी ओर राजपूत राजा-महाराजाओं के गौरवपूर्ण इतिहास की गाथा गाते हुए ऊंचे-ऊंचे महल हैं|जहां की कला संस्कृति सम्पूर्ण विश्व में अपनी एक अलग छाप लिए हुए है| पूरे विश्... |
| कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। ~ राजपूत... |
| लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,कोशिश करने वालों की कभी ... |
| राजपूतों की ऐसी कहानी है , कि राजपूत ही राजपूत कि निशानी है lहम जब आये तो तुमको एहसास था , कि कोई एक शेर मेरे पास था llहम गरम खून के उबाल हैं , प्यासी नदियों की चाल हैं , lहमारी गर्जना विन्ध्य पर्वतों से टकराती है और हिमालय की चोटी तक जाती है llहम थक कर बैठेने वाले रड बांकुर नहीं ठ... |
| एक ऐसा भारतीय शासक जिसने अकेले दम पर अंग्रेजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। इकलौता ऐसा शासक, जिसका खौफ अंग्रेजों में साफ-साफ दिखता था। एकमात्र ऐसा शासक जिसके साथ अंग्रेज हर हाल में बिना शर्त समझौता करने को तैयार थे। एक ऐसा शासक, जिसे अपनों ने ही बार-बार धोखा द... |
| आपने जोधपुर की रूठी रानी के बारे में पढ़ते हुए उसकी दासी भारमली का नाम भी पढ़ा होगा | जैसलमेर की राजकुमारी उमादे जो इतिहास में रूठी रानी के नाम से प्रसिद्ध है अपनी इसी रूपवती दासी भारमली के चलते ही अपने पति जोधपुर के शक्तिशाली शासक राव मालदेव से रूठ गई थी और मालदेव के ला... |
| कुत्ता :कुत्तों की आदत होती है कि वे झुंड में रहकर अपना शिकार करते है।बड़ी बुरी तरह से शिकार को नोचते खाते है।कुत्ते अपना पेट मरे हुये जानवर की हड्डी के टुकडे से भी भर सकते है।कुत्ते को जब भूख लगी होती है तो वह पूंछ हिलाकर आगे पीछे घूम कर अपने भोजन को लेने के चक्कर में रह... |
| एक गांव में प्रतापनेर गद्दी के राजा भेष बदल कर गये और एक दरवाजे पर पडे तख्त पर बैठ गये। गांव राजपूतों का कहा जाता था। सभी अपने अपने नाम के आगे सिंह लगाया करते थे। घर के मर्द सभी खेती किसानी और अपने अपने कामो को करने के लिये गांव से बाहर गये थे। कोई भी दरवाजे पर पानी के लिये... |
| राजपूतोँ का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। हिँदू धर्म के अनुसार राजपूतोँ का काम शासन चलाना होता है।कुछ राजपुतवन्श अपने को भगवान श्री राम के वन्शज बताते है।राजस्थान का अशिकन्श भाग ब्रिटिश काल मे राजपुताना के नाम से जाना जाता था।हमारे देश का इतिहास आदिकाल से गौरवमय ... |
| इन राजपूत वंशों की उत्पत्ति के विषय में विद्धानों के दो मत प्रचलित हैं- एक का मानना है कि राजपूतों की उत्पत्ति विदेशी है, जबकि दूसरे का मानना है कि, राजपूतों की उत्पत्ति भारतीय है। 12वीं शताब्दी के बाद् के उत्तर भारत के इतिहास को टोड ने 'राजपूत काल' भी कहा है। कुछ इतिहासका... |
| मै राजपूत मै राजपूतमै बलिदानों का हूँ प्रतिक मै भारत माता का सपूत !मै राजपूत मै राजपूत !!मैने धरती के कागज पर असिधाराओ से लिखे लेख !मैने अम्बर को लाल किया प्राची में उषाकाल देख !!सूर्य चन्द्र की अग्नि में पूरित हें महातेज !में सृष्टि के अवसान काल की विकट थिरकती प्रलय रेख !!... |
| राजस्थान के राजपूत शासन काल में राजपूत हमेशा युद्धरत रहते थे कभी बाहरी आक्रमण तो कभी अपना अपना राज्य बढ़ाने के लिए राजाओं की आपसी लड़ाईयां|इन लड़ाइयों के चलते राजपूत योद्धाओं को कभी कभी अपनी शादी तक के लिए समय तक नहीं मिल पाता था|कई बार ऐसे भी अवसर आते थे कि शादी की रस्... |
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February 29, 2012, 3:18 pm |
| गुजरात का हमीर जाडेजा अपनी ससुराल अमरकोट (सिंध) आया हुआ था | उसका विवाह अमरकोट के राणा वीसलदे सोढा की पुत्री से हुआ था | राणा वीसलदे का पुत्र महिंद्रा व हमीर हमउम्र थे इसलिए दोनों में खूब जमती थी साथ खेलते,खाते,पीते,शिकार करते और मौज करते | एक दिन दोनों शिकार करते समय एक हि... |
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February 26, 2012, 12:05 am |
| राजपूत उत्तर भारत का एक क्षत्रिय कुल। यह नाम राजपुत्र का अपभ्रंश है। राजस्थान में राजपूतों के अनेक किले हैं। राठौर, कुशवाहा, सिसोदिया, चौहान, जादों, पंवार आदि इनके प्रमुख गोत्र हैं। राजस्थान को ब्रिटिशकाल मे राजपूताना भी कहा गया है। पुराने समय में आर्य जाति में केवल ... |
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February 25, 2012, 11:55 pm |
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