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Blog: मैं और मेरी कवितायेँ...

Blogger: sandhya sharma
सक्षम / सृजक संस्कारों एवंसृष्टि का आधार जिम्मेदार/समझदारप्रकृति का अनमोल उपहारपालनहारमौन/प्राण/ अपान ममता/सत्य ललकारक्षमताओं से परिचितसंदेहों से प्रभावितअधिकारों से वंचितनारी नहीं देवी हो तुम... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   4:01am 6 Feb 2012 #सृजक
Blogger: sandhya sharma
 सीने में गर है तुम्हारे दिलतो दर्द से तड़पकर दिखाओ गर तुम्हे कोई इंसा कहे तोमन में दर्द-ए-अहसास जगाओकिसी ठोकर से गर टूटे दिलनगमा मोहब्बत का सुनाओनफ़रत-ए-खंजर लिए लोगों कोअपनी ठोकरों से धूल चटाओ गर अमन से बना सको तुम इस जहान को जन्नत बनाओ है दम अगर डूबने से पहले मझधार से ... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   5:38am 1 Feb 2012 #अमन
Blogger: sandhya sharma
ऐसी ही है वहखूब बोलना चाहती हैपर बोलती नहींजब बोलने को कहोकह देती हैकुछ नहीं कहनाहाँ लेकिन उसी वक़्तउन मुरझाई आँखों सेटपक जाती हैं दो बूंदें........!बिलकुल दर्पण की तरह  जिसमे झलकता हैउसका प्रतिबिंब झुर्रियों भरा चेहरास्पष्ट उभर आती हैंअनगिनत रेखाएंआखिर उन बूंदों परइ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   12:39pm 27 Jan 2012 #रेखाएं
Blogger: sandhya sharma
वक़्त कल तुमसे हिसाब मांगेगा सुलगते सवालों का जवाब मांगेगाक्यों बैचैन हो गया है बचपन क्यों है जवानों के चहरे पर उलझन  क्यों खनकते नहीं बाँहों में कंगना क्यों पलाश फूलते नहीं अंगना                          क्यों हो रहा है हर तरफ भेदभाव क्यों है भाई का भाई से मनमुटाव  क्यों ... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   10:31am 25 Jan 2012 #सवाल
Blogger: sandhya sharma
मज़बूत विश्वास की जड़किसी तूफ़ान बहाव सेनहीं हिलतीविश्वासपानी में उठताबुलबुला नहींजो मिट जाये एक पल में ही विश्वाससिद्धांतों से अडिग हैं जो नहीं बदलतेकिसी भी प्रयोग से....... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   5:33pm 19 Jan 2012 #वज्र विश्वास
Blogger: sandhya sharma
विषयुक्त वातावरण में, अमृत कलश खोज लूँ जरा.क्षण के इस जीवन का मंथन कर, दो घूंट अमृत के पी लूँ जरा. शब्दों में समेट दूँ साँसों को,गीतों में संवेदना भर लूँ जरा.दुःख के अंधियारे आसमान में,  ध्रुवताराअमन का ढूंढ़ लूँ जरा.प्रश्नों और समाधानों का, सत्यान्वेषण कर लूँ जरा.जीवन - म... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   10:38am 15 Jan 2012 #देख लूँ जरा..
Blogger: sandhya sharma
  अपना वादा ऐसे निभाते हैं    सदा ख्वाबों में आते-जाते हैं,     अपने आने का अहसास देकर,मीलों के फ़ासले मिटाते हैं.   रजनीगंधा की खुश्बु बनकर,  मेरी साँसों में सिमट जाते हैं.   अपनी यादों का हौसला देकर,   राह मंजिल की वो दिखाते हैं.                            मेरी सादा सी सूरत को भी,   ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   5:24am 10 Jan 2012 #"सुनहला ख्वाब"
Blogger: sandhya sharma
बीते साल की विदा बेलानए साल का आगमनआओ हिलमिल महका देंखुशियों का आँगन.समय है यह , सफर क्षण -क्षण का " भूतो न भवति , ना भविष्यत् "आता है यह और जाता है चला ....!हम सभी हैं इस स्थिति से अवगत "खूब कोशिश की सब कुछ पाने कीपर कुछ भी नहीं निकला सार"क्या है यह दुनिया , क्या अपनी किस्मत ऐसे वा... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   8:15am 1 Jan 2012 #नए साल का आगमन
Blogger: sandhya sharma
                                                                   चलो तुम कुछ शुरुआत करो                                  जहां तक बने कुछ बात करो                                  बहुत हो चुकी जहां की बातें                                  अब अपने मन की बात करो                                                       चलो तुम... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   11:49am 24 Dec 2011 #जीवन
Blogger: sandhya sharma
सृष्टि के अंतिम दिनउसके और हमारे बीचकोई नहीं होगातब मृत्युएक कविता होगी एक अंतिम कविताबिना किसी भेद-भाव केस्वागत करेगी सबकाउस दिन यह दुनियान तेरी होगीन मेरी होगीजब धरा लुढ़क रही होगीखुल जायेगासिन्धु का तट बंधबिखर जायेगा अम्बर प्यारा अंधकार के महागर्त मेंखो जायेग... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   4:35am 19 Dec 2011 #पतन
Blogger: sandhya sharma
तारों में हँसतीफूलों सी खिलतीआज भी इस मन मेंबसती है तूमिट्टी की खुश्बूअब भी तुझे लुभाती हैपहिली बारिश में अब भी भीगती है तूअब भी संग मेरे धूप में चलती हैआँचल की शीतल छाँव अब भी करती है तूमेरी अंखियों के झरोखों से अब भी झांकती है तूअब भी मन की देहरी परदीप जलाती है तूबोलत... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   3:06pm 12 Dec 2011 #मौन के शब्द
Blogger: sandhya sharma
कभी कविता मिल जाती थीविद्यार्थियों के अल्हड चेहरे परकोतुहल भरे भाव दिखते थेनन्ही सी सुन्दर आँखों मेंअब ना चेहरे पर पहचान हैना ही आँखों में हैं भावसिर्फ बढ़ते ही जा रहे हैंऊंचाई में, आयु मेंसिर्फ शरीर सेखोखली संवेदना लिएकविता से दूरपरीक्षा में अंको के लिएयाद कर लेत... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   7:02am 9 Dec 2011 #अल्हड़ बादल
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