| खरगोश की उछालमृग की कुलांचबाज़ की उड़ानशावक की दहाड़शबनम की चादरगुलाब की महकपीपल का पावित्र्यतुलसी का आमृत्य निम्बू की सनसनाहटअशोक की लटपटाहट _______ये सब अब कहाँ सूझते हैं कविता करते समयअब तोआदमी का ख़ूनबाज़ार की मंहगाईखादी का भ्रष्टाचारसंसद का हंगामाग्लोबलवार्मिं... |
| रिश्ते जब रिसने लगते हैंतो परिजन पिसने लगते हैंमत दिखलाना घाव किसी कोलोग नमक घिसने लगते हैंहास्यकवि अलबेला खत्री फिल्म संगीतकार राम लक्ष्मण के साथ मुंबई में गानों की रिकॉर्डिंग के अवसर पर जय हिन्द !... |
| आज मुझे सपने में आया सपना एक महानसपने में देखा मैंने सपनों का हिन्दुस्तान मैंने देखा पुलिसकर्मियों में विनम्र स्वभाव मैंने देखा सस्ते होगये फल-सब्ज़ी के भाव मैंने देखा रेलों में कोई धक्कम-पेल नहीं है मैंने देखा किसी शहर में कोई जेल नहीं है भ्रष्टाचारी लोग कर चुक... |
| सियारी खाल की बदबू हवा से जान लेता हूंसियासत वालों को मैं दूर से पहचान लेता हूँभुवन में हो कोई बाधा तो आए रोक ले मुझकोवो पूरा करके रहता हूं जो मन में ठान लेता हूंमेरे गंगानगर में नहर है पंजाब से आतीइसी कारण मैं पीने से प्रथम जल छान लेता हूंये सब इक कर्ज़ अदाई है, न बेटा है,... |
| नम्रता यदि ज्ञान से कुछ कम नहींतो अहम अज्ञान से कुछ कम नहींसड़ रहे हैं शव जहां पर प्राणियों केवे उदर श्मशान से कुछ कम नहींजिस हृदय में प्रेम और करुणा नहींवो हृदय पाषाण से कुछ कम नहींइतनी महंगाई में भी ज़िन्दा हैं हमयह किसी बलिदान से कुछ कम नहींआचरण यदि दानवों का छोड़ द... |
| पैरोडी : इट हैप्पन्ज ओनली इन इण्डिया ...जहाँ गाँव है घायल, नगर है ज़ख्मी,महानगर भी दुखिया इट हैप्पन्ज ओनली इन इण्डिया ...इट हैप्पन्ज ओनली इन इण्डिया जहाँ खादी वाले चूस रहे हैं आज़ादी का गन्ना जहाँ गुण्डों के हिस्से आता है देश का नेता बनना जहाँ रक्षक ही भक्षक बन बैठे रौंद ... |
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February 29, 2012, 2:11 pm |
| हाकिम को घूस दे केअपना बना लो, यहीकाम करवाने का है ढंग मेरे देश मेंधनी लोगों, वासना केलोलुपों को रात दिनबेचती गरीबी अंग-अंग मेरे देश मेंक्षेत्र सम्प्रदायों केअसीम हैं, अनन्त हैं वबन्दगी के दायरे हैं तंग मेरे देश मेंढूंढना जो चाहो ढूंढ़ो,आदमी मिले न मिले,लाखों मिल जाएं... |
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February 28, 2012, 9:22 am |
| मधुर-मधुर, मीठा-मीठा और मन्द-मन्द मुस्काते हैं सुन्दर-सुन्दर स्वप्न सलोने हमें रात भर आते हैं बस्ती-बस्ती बगिया-बगिया,परबत-परबत झूमे हैमस्त पवन के निर्मल झोंके प्रीत के गीत सुनाते हैं उभरा है तन पे यौवन ज्यों चमके बिजली बादल में शीतल शबनम के क़तरे तन-मन में आग लगाते हैं... |
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February 27, 2012, 9:40 am |
| रात न ढले तो कभी भोर नहीं होती बन्धुसांझ न ढले तो कभी तम नहीं होता है लोहू तो निकाल सकता तेरे पाँव में से कांच से मगर घाव कम नहीं होता है जीने की जो चाह है तो मौत से भी नेह कर डरते हैं वो ही जिनमें दम नहीं होता है सच मानो जब तक पीर का काग़ज़ न हो कवि की कलम का जनम नहीं होता हैहा... |
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February 25, 2012, 10:36 am |
| कुछ अरसा पहले भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री श्री जसवंतसिंह ने एक पुस्तक रच कर जिन्ना के प्रति नरम रुख दिखाया था जिस पर बड़ा बवाल मचा और उन्हें पार्टी से बाहर तक होना पड़ा था ....उसी दौर में कटाक्ष के रूप में मैंने कुछ हाइकू लिख... |
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February 24, 2012, 8:12 pm |
| ऐ मेरी ज़िन्दगी, तू कहाँ खो गई ?शायरी भी मेरी, अब जवां हो गईजल रही है ज़मीं, जल रहा आसमांक़ायनात-ए-तमाम पुर-तवां हो गईहर शहर हर मकां मौतगाह बन गयाहर निगाहो - नज़र खूंफ़िशां हो गईतौबा-तौबा ख़ुदा ! लुट गए - लुट गएआज घर- घर यही दास्ताँ हो गईईश्वर ! रहम कर हाल पे हिन्द केरोते... |
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February 24, 2012, 7:31 pm |
| इक मुख यदि है गुलाब जैसा महका तोसैकड़ों के चेहरे उदास मेरे देश मेंएक के शरीर पे रेमण्ड का सफ़ारी है तोपांच सौ पे उधड़ा लिबास मेरे देश मेंकाम सारे हो रहे हैं कुर्सी की टांगों नीचे काग़ज़ों में हो रहे विकास मेरे देश मेंदूध है जो महंगा तो पीयो ख़ूब सस्ता हैआदमी के ख़ून क... |
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February 24, 2012, 7:34 am |
| अरुण की लालिमा में जब गगन से ओस गिरती हैउजाले की किरण जब इस धरा पर पांव धरती हैहवा में हर दिशा जब मरमरी आभा बिखरती हैसरोवर में कमल कलिकायें जिस दम खिलखिलाती हैंतुम्हारी याद आती हैयदि योगी तपस्वी साधु सिद्ध जब ध्यान करते हैंगुरूद्वारे गुरूवाणी का जब गुणगान करते हैंहर... |
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February 23, 2012, 6:56 pm |
| तेग़-ओ-खंजर उठाने का वक़्त आ गयालोहू अपना बहाने का वक़्त आ गयासर झुकाते - झुकाते तो हद हो गयीअब तो नज़रें मिलाने का वक़्त आ गयाख़त्म दहशत पसन्दों को कर दें ज़रा मुल्क़ में अम्न लाने का वक़्त आ गया क़त्ल-ओ-गारत के साये हटाने चलें अब तो मौसम सुहाने का वक़्त आ गया क्यों अँधेरे मे... |
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February 22, 2012, 9:06 am |
| { कविता की तीन अवस्थाएं } शब्द-शब्द जब मानवता के हितचिन्तन में जुट जाता हैतम का घोर अन्धार भेद कर दिव्य ज्योति दिखलाता हैजब भीतर की उत्कंठायें स्वयं तुष्ट हो जाती हैंअन्तर में प्रज्ञा की आभा हुष्ट-पुष्ट हो जाती हैअमृत घट जब छलक उठेबिन तेल जले जब बातीतब कवि... |
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February 22, 2012, 8:18 am |
| { कविता की तीन अवस्थाएं } शब्द-शब्द जब मानवता के हितचिन्तन में जुट जाता हैतम का घोर अन्धार भेद कर दिव्य ज्योति दिखलाता हैजब भीतर की उत्कंठायें स्वयं तुष्ट हो जाती हैंअन्तर में प्रज्ञा की आभा हुष्ट-पुष्ट हो जाती हैअमृत घट जब छलक उठेबिन तेल जले जब बातीतब कवि... |
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February 22, 2012, 8:18 am |
| फ़ित्न-ए- दौरां में हर लम्हा हवादिस देखियेअब्र से बरसे है हर दम बर्क़ बारिश देखियेमुज़्तरिब हो, रो पड़ा है हक़ भी हाल-ए-दहर परआदमी का हर कदम है एक साजिश देखियेइस तरफ़ से उस तरफ़ रक्स-ए-क़यामत हो रहाउस तरफ़ से इस तरफ़ बिखरी है आतिश देखियेहर दरो-दीवार पर है दाग़-ए-खून-ए-हुर... |
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February 21, 2012, 2:04 pm |
| नम्रता यदि ज्ञान से कुछ कम नहींतो अहम अज्ञान से कुछ कम नहींसड़ रहे हैं शव जहां पर प्राणियों केवे उदर श्मशान से कुछ कम नहींजिस हृदय में प्रेम और करुणा नहींवो हृदय पाषाण से कुछ कम नहींइतनी महंगाई में भी ज़िन्दा हैं हमयह किसी बलिदान से कुछ कम नहींआचरण यदि दानवों का छोड़ ... |
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February 21, 2012, 1:06 pm |
| ज़िन्दगी इक इल्म है, सुपर डुपर फ़िल्म है देखूँगा,दिखलाऊंगा ....गीत ख़ुशी के गाऊंगा ज़िन्दगी असहाय है, व्यय अधिक कम आय है फिर भी काम चलाऊंगा,गीत ख़ुशी के गाऊंगा ज़िन्दगी इक कीर है, सुख व दु:ख ज़ंजीर है तोड़ इसे उड़ जाऊँगा...गीत ख़ुशी के गाऊंगा ज़िन्दगी अभिषेक है, मन्दिर- मस्जिद एक ह... |
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February 17, 2012, 3:51 am |
| ग़मगुसारोंकीनिगाहेंतीरसीक्यूँहैशायरीमेंदर्दकीतासीरसीक्यूँहै हसरतेंथींकलबिहारीसीहमारीआजदिलकीआरज़ूएंमीरसीक्यूँहैउनकेआतेहीसुकूंथालौटआतासामनेवोहैं तो शब शमशीर सी क्यूँ हैला पिलादे मयफ़िशां अन्दाज़ ही सेदिख रही मय आज मुझको शीर सी क्यूँ हैहिन्द तो 'अलबेल... |
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February 16, 2012, 6:04 am |
| बुरा-भला कह रहे शमा को कुछ पागल परवाने लोग बन्द किवाड़ों को कर बैठे, घर घुस कर मर्दाने लोग पानी बिकने लगा यहाँ पर,कसर हवा की बाकी है भटक-भटक कर ढूंढ रहे हैं गेहूं के दो दाने लोग और पिलाओ दूध साँप को , डसने पर क्यों रोते हो?कहना माना नहीं हमारा , देते हैं यों ताने लोग कैसा है ये ... |
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February 15, 2012, 1:06 pm |
| गुलकन्द है मकरन्द है साँसों में आपकी ज़ाफ़रान की सुगन्ध है साँसों में आपकी दुनिया में तो भरे हैं ज़ख्मो-रंजो-दर्दो-ग़म आह्लाद और आनन्द है साँसों में आपकी कितनी है गीतिकाएं,ग़ज़लें और रुबाइयां कितने ही गीतो-छन्द हैं साँसों में आपकी कहीं और ठौर ही नहीं है जाऊंगा कहाँ ?... |
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February 14, 2012, 10:28 am |
| बेटियां आँगन की महक होती हैंबेटियां चौंतरे की चहक होती हैंबेटियां सलीका होती हैंबेटियां शऊर होती हैंबेटियों की नज़र उतारनी चाहिएक्योंकि बेटियां नज़र का नूर होती हैंइसीलिएबेटी जब दूर होती हैं बाप सेतो मन भर जाता संताप सेडोली जब उठती है बेटी कीतो पत्थरदिलों के दि... |
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February 13, 2012, 6:52 am |
| जिस प्रकारहवा हाथों के इशारे नहीं समझतीआगआँखों से डरा नहीं करतीपानीआँचल में क़ैद नहीं हो सकताअम्बरकिसी एक का हो नहीं सकतावसुधाअपनी ममता त्याग नहीं सकतीवोसिर्फ़ देना जानती है, मांग नहीं सकतीउसी प्रकारमनुष्य भीयदि अपने स्वभाव पर अडिग रहता तो बेहतर थापरन्तु इसने... |
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February 11, 2012, 5:32 pm |
| एक गोरी सांवरी सी मेरे गीतों की फ़ैन हो गईएक छोरी बावरी सी मेरे गीतों की फ़ैन हो गईपनघट जाती-जाती गाएजल भर लाती-लाती गाएआती गाए, जाती गाएसखियों से बतियाती जाएपल में सौ बल खाती जाएगीत वो मेरे गाती जाएकितनी बेचैन हो गई, कितनी बेचैन हो गई ... रे मेरे गीतों की ....उसकी छैल छबीली आ... |
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February 10, 2012, 3:37 pm |
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