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Blog: मस्त बारिश में मलंग... माधवी के संग

Blogger: Ashwani kumar
कुछ बातें ना मुझे तब समझ आती थीं ना अब आती हैंकुछ उलझाने ना मुझसे तब सुलझती थींना अब सुलझती हैंअब या तो गाँठ ज्यादा उलझी है या मेरी समझ कम हैअच्छा अब तुम मत बताओ..मुझे पता है...इतनी समझ है मुझे कि मेरी समझ ही कम है!!... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   7:55pm 15 Nov 2018 #
Blogger: Ashwani kumar
पुतला बनने पे तुम रोये और अफगानिस्तान में पुतले गिरने पे भी तुम रोयेमैं हमेशा से पुतलों के खिलाफ थापर तुम्हारा stand समझ नही आयातुम पुतलों के खिलाफ थे या पुतलों के साथ। बहुत से पुतलों को देखने के लिए तुम टिकट लेते होटिकट ना हो तो भी वो तुम्हारी itinery का हिस्सा होते हैंजब तु... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   8:32pm 7 Nov 2018 #
Blogger: Ashwani kumar
हर साल होंगे विसर्जित गणपति।हर साल कुछ लोग डालेंगे फोटुएंविखंडित गनपतियों कीमरती मछलियों कीऔर फिर अगले साल पहले से कुछ और ज़्यादा विखंडित गनपतियों कीकुछ और ज़्यादा मरी हुई मछलियों की।और ऐसे में मैं कर रहा होऊंगा कोई बहाना किसी दोस्त के घर गणपति बिठाने पे नहीं जाने का... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   6:23pm 22 Sep 2018 #
Blogger: Ashwani kumar
निर्धन= गरीबनिर्धन= बिना धन कानिधन= मौत निधन= बिना धन कानिर्धन= निधनगरीब= मौत... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   7:41am 19 Apr 2017 #
Blogger: Ashwani kumar
मध्यमवर्ग हावी है....निराशा अवश्यम्भावी है !!! नोट- कृपया इन 2 पंक्तियों को पढ़कर आशावादी बनने की मुफ्त सलाह ना दें !!... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   9:00am 23 Oct 2016 #
Blogger: Ashwani kumar
बढ़ता पेट घटता रेट ज़ालिम सेठनींद बेवफ़ा सपने सफा उम्मीद रफा-दफाहाथ में कंपनपैर में झनझनदिमाग में सनसनपरसोच है ज़िन्दाज़िद्दी परिंदा बेपरवाह बाशिंदा  उड़ चलाआसमां को करने शर्मिंदा... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   8:00pm 28 Jul 2016 #
Blogger: Ashwani kumar
दिल में जन्मीबाज़ार में दम तोड़ गईकविता मेरी... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   8:54am 28 Jul 2016 #
Blogger: Ashwani kumar
किस्सा था कहानी थीयाद नहींबचपन था जवानी थी याद नहीयाद है बस इतना तू पास नहींतेरे आने की कोई आस नहीं... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   6:38pm 27 Jul 2016 #
Blogger: Ashwani kumar
ऑटो में बैठा तो पैदल चलने वालों को हिकारत से देखाकार में बैठ के ऑटो वालों पे गुस्सा आयापैदल चला तो कार वाले को गाली दीशुक्र है सड़कों पे जहाज़ नहीं चलते वर्ना क़त्ल कर देता किसी काजहाज़ में बैठ कर... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   5:42am 27 Jul 2016 #
Blogger: Ashwani kumar
कहीं घुमते-फिरते दिख जाता है कोई नया भूखंडया कोई नया परिदृश्य या स्थानतो लगता है ऐसेकिपा लिया सारा जहांजीत ली सारी दुनियाहालाँकि उन सभी भूखंडों परिदृश्यों-स्थानों परपड़ चुके होते हैं किसी के पाँवपड़ चुकी होती है किसी की नज़रऔर मैं उन जगहों पर चालाकी से अपने अकेले कोतस्... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   7:51pm 10 Jul 2016 #
Blogger: Ashwani kumar
जब हर कुत्ता बिल्ला भोंक रहा था मैंने चुप रह जाना बेहतर समझाजब हर कोई सहिष्णुता असहिष्णुता पे अपने ब्यान ठोक रहा था मैंने चुप रह जाना बेहतर समझा जब हर रोज़ बदलते मुद्दों पे हो रही थी बहस-बसाई, मार-कुटाई(अदालत में)मैंने चुप रह जाना बेहतर समझाजब बन रहे थे गुट, और मांगी जा रह... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   7:48pm 7 Mar 2016 #
Blogger: Ashwani kumar
जैसे बरसों बाद आइना देखो तो खुद को पहचानना होता है मुश्किल !!वैसे ही कुछ साल बीत जाने के बाद अपनी लिखी कविताएं भी लगती हैं अपरिचित !!! जैसे आइना पूछता है सवाल कि कहाँ थे इतने दिन !!वैसे ही कविताएं कहती हैं कि आप कौन भाईसाब??भले ही आइना ना देखो बरसों पर कविता को मुंह ना दिखाना न... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   5:59pm 3 Jan 2016 #
Blogger: Ashwani kumar
फटीचर टीचरों के हाथों मार खा-खा कर हम बच्चे इतने अभ्यस्त हो चुके थे कि हमें लगता था यही हमारी नियति है और सारे संसार के स्कूलों में भी बच्चों की इसी तरह पिटाई होती है..लेकिन कभी-कभार हमारी पुकार भी ऊपरवाले के कानों तक पहुँच जाती थी..हुआ यूँ कि हमारा संस्कृत टीचर( जिसका ज़िक... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   3:36pm 1 Dec 2015 #
Blogger: Ashwani kumar
जब ज़िन्दगी डेंगू मलेरिया के साथ साथ देश में फ़ैल रही अराजकता के बीच कट रही थी !जब यू ट्यूब फेसबुक और व्हाट्स-ऐप के वीडियो मनोरंजन कम और अशांत अधिक कर रहे थेजब स्वर्ग में बैठा भगवान 'स्वर्गवासी'नज़र आने लग गया थाजब मन को समझाने के सारे उपाए निरुपाय हो रहे थेजब कोई किताब पढ़ना... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   4:11pm 4 Oct 2015 #
Blogger: Ashwani kumar
ख़तरनाक पड़ाव है उम्र चालीस ज़्यादा मांगती है कम देती हैना झपटने की ताक़त होती है ना मांगने की हिम्मत होती हैबहुत ज़ोर लगाना पड़ता है बहुत शोर मचाना पड़ता है मन को घंटों मनाना पड़ता है दिमाग को दाम दंड साम भेद से चुप कराना पड़ता हैकुछ बेवजह-सी गोलियां अलमारी में जगह बन... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   12:58pm 25 Sep 2015 #
Blogger: Ashwani kumar
ये सब मैं टीचर डे पर लिखना चाहता था, जब सारा फेसबुक टीचर नाम के एक प्राणी और एक उपाधि का महिमामंडन करने में लगा हुआ था। जो उपाधि हमारे समय में (मैं आज 40 का हूँ) ग्रेजुएशन या उस से भी कम पढ़ाई में मिल जाया करती थी और बिना किसी विशेष प्रतिभा के एक तुच्छ-सा प्राणी टीचर बन जाया कर... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   2:28pm 18 Sep 2015 #
Blogger: Ashwani kumar
लम्बी उम्र की कामनाओं के बीच कुछ समय के लिए मर जाने का वरदान मांग लूँ अगर कोई भगवान हो जाए मेहरबान लगातार दौड़ते दिमागी घोड़ों की तोड़ दूँ टांगें लपर झपर ज़बान के पर दूँ क़तर बढ़ते कदम थाम  हर प्रयास को दूँ आरामबेकाम हो मेरा काम अनाम हो मेरा नाम हर रोज़ की जीव... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   9:19am 4 Apr 2014 #
Blogger: Ashwani kumar
If I could connect with five or more people in a WeChat group- I would love to chat with these people…  Mirza Ghalib- I will ask him “Dil-e-Nadan Tujhe Hua Kya Hai… Akhir Iss Dard Ki Dawa Kya Hai!” Want to listen to his sher-o-shayari in his own voice & andaaz. Because he had said… “Hain Aur Bhi Duniya Mein Sukhanawar Bahut Achhe, Kahte Hain Ki 'Ghalib' Ka Hai Andaz-e-Bayan Aur!” I want to savor his Andaaz-e-Bayaan. I want to WeChat with Ghalib because I just adore him. For me he is not just a Shayar. He is a philosopher, a masiah. Listening to his words give me peace which no one else can give me.Shivaji Satam aka ACP Pradyuman- I will ask him ki ‘Akhir insan... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   4:08pm 13 Jun 2013 #डायरी
Blogger: Ashwani kumar
FictionIt was when I started chewing Paan. I would go out for a walk after my dinner and end up reaching a Paan shop. As soon as Nandu Paanwallah would see me, he would start making a special Paan with extra Kattha. I would relish that Paan all my way back home, and with the taste of it I would go to thebed straightaway.The mornings were usually frightening for me as I would spit reddish while brushing. I kept on wondering that it was nothing but the outcome of Paan and it’s extra Kattha. I was convinced with this very thought for a while.Slowly and steadily Paan became the part and parcel of my life. I never missed chewing Paan and it became a ritual. I ate Paan every single day. And ever... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   7:26pm 18 May 2013 #डायरी
Blogger: Ashwani kumar
लिखने से अच्छा है पढ़ना बोलने से सुननारूठने से मानना हटने सेजुड़ना बचने से जूझना गिनने से लुटाना ऊंघने  से सोना सोने से जागना और  तेरा हो कर ना होने से तेरा ना होना  ... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   11:08am 7 Jan 2013 #
Blogger: Ashwani kumar
सूरजमुखी का फूल याद आते ही आंखों के सामने आ जाता है एक हंसता-खिलखिलाता चेहरा... आपने कभी ध्यान से सूरजमुखी को देखा है? ऐसा लगता है जैसे एक बड़ा-सा चेहरा चौड़ी मुस्कान लिए लहलहा रहा हो। कितना ख़ूबसूरत और असंख्य गुणों से भरपूर है सूरजमुखी!गंधरहित होकर भी अपने गुणों की सुगं... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   10:59am 24 Nov 2012 #डायरी
Blogger: Ashwani kumar
कविता लिखने कलम उठाईमुद्दों विचारों सोचोंका मचा झंझावातकलम रखीसो गयाकमबख्तनींद भी नहीं आई... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   6:24am 13 Sep 2012 #
Blogger: Ashwani kumar
चन्द लम्हे  कंपन से गुज़रा हाथ लकीरें गडमड हो गईएक छोटी सी कंपन नेतकदीर बदल डालीगुनाह के रस्ते पे था अकेला भटकन थी डगर तूने पास बिठाया  दो पलतस्वीर बदल डाली कुछ घटनाओं को समझने लगा था प्यार एक बादल को बहारतूने चंद की बातें बादल छंट गयातदबीर बदल डाली नाशुक्रा था सदा ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   5:57am 20 Aug 2012 #मेरी कविताएं
Blogger: Ashwani kumar
घुमंतू आत्मा कैद शिथिल जिस्म मेंघुमंतू सोच कैदकुंद दिमाग मेंघुमंतू प्रेम कैद बासी सम्बन्ध मेंघुमंतू नज़र कैद जबरन नकाब में घुमंतू चाहकैद ओढ़ी आह में घुमंतू घुमंतू घुमंतू घुमंतू रहूँ घुमंतू सोचूं घुमंतू चाहूँ घुमंतू भोगूँ घुमंतू पाऊं घुमंतू देखूं घुमंतू जियूं घुम... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   12:59pm 16 Aug 2012 #
Blogger: Ashwani kumar
हलचल हुई हिया हिला ताके टुकुर टुकुर अपना ही अक्सझिलमिल झिलमिल धुंधला धुंधलाहाथ बढ़ा पोछा आइना आइना चमका अक्स धुंधलामगर घाव अंदरूनी इलाज बाहरी नज़र पे जाला नज़र नाकारा दृष्टि प्राप्त करनी होगी जो मार करे दूर तक जो वार करे दूर तक जब दिखेंगे भीतर के ज़ख़्म रखूंगा मरहम सा ह... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   8:10am 14 Aug 2012 #
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