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मस्त बारिश में मलंग... माधवी के संग

निर्धन= गरीबनिर्धन= बिना धन कानिधन= मौत निधन= बिना धन कानिर्धन= निधनगरीब= मौत...
मस्त बारिश में मलंग... माधवी के ...
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  April 19, 2017, 1:11 pm
मध्यमवर्ग हावी है....निराशा अवश्यम्भावी है !!! नोट- कृपया इन 2 पंक्तियों को पढ़कर आशावादी बनने की मुफ्त सलाह ना दें !!...
मस्त बारिश में मलंग... माधवी के ...
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  October 23, 2016, 2:30 pm
बढ़ता पेट घटता रेट ज़ालिम सेठनींद बेवफ़ा सपने सफा उम्मीद रफा-दफाहाथ में कंपनपैर में झनझनदिमाग में सनसनपरसोच है ज़िन्दाज़िद्दी परिंदा बेपरवाह बाशिंदा  उड़ चलाआसमां को करने शर्मिंदा...
मस्त बारिश में मलंग... माधवी के ...
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  July 29, 2016, 1:30 am
दिल में जन्मीबाज़ार में दम तोड़ गईकविता मेरी...
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  July 28, 2016, 2:24 pm
किस्सा था कहानी थीयाद नहींबचपन था जवानी थी याद नहीयाद है बस इतना तू पास नहींतेरे आने की कोई आस नहीं...
मस्त बारिश में मलंग... माधवी के ...
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  July 28, 2016, 12:08 am
ऑटो में बैठा तो पैदल चलने वालों को हिकारत से देखाकार में बैठ के ऑटो वालों पे गुस्सा आयापैदल चला तो कार वाले को गाली दीशुक्र है सड़कों पे जहाज़ नहीं चलते वर्ना क़त्ल कर देता किसी काजहाज़ में बैठ कर...
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  July 27, 2016, 11:12 am
कहीं घुमते-फिरते दिख जाता है कोई नया भूखंडया कोई नया परिदृश्य या स्थानतो लगता है ऐसेकिपा लिया सारा जहांजीत ली सारी दुनियाहालाँकि उन सभी भूखंडों परिदृश्यों-स्थानों परपड़ चुके होते हैं किसी के पाँवपड़ चुकी होती है किसी की नज़रऔर मैं उन जगहों पर चालाकी से अपने अकेले कोतस्...
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  July 11, 2016, 1:21 am
जब हर कुत्ता बिल्ला भोंक रहा था मैंने चुप रह जाना बेहतर समझाजब हर कोई सहिष्णुता असहिष्णुता पे अपने ब्यान ठोक रहा था मैंने चुप रह जाना बेहतर समझा जब हर रोज़ बदलते मुद्दों पे हो रही थी बहस-बसाई, मार-कुटाई(अदालत में)मैंने चुप रह जाना बेहतर समझाजब बन रहे थे गुट, और मांगी जा रह...
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  March 8, 2016, 1:18 am
जैसे बरसों बाद आइना देखो तो खुद को पहचानना होता है मुश्किल !!वैसे ही कुछ साल बीत जाने के बाद अपनी लिखी कविताएं भी लगती हैं अपरिचित !!! जैसे आइना पूछता है सवाल कि कहाँ थे इतने दिन !!वैसे ही कविताएं कहती हैं कि आप कौन भाईसाब??भले ही आइना ना देखो बरसों पर कविता को मुंह ना दिखाना न...
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  January 3, 2016, 11:29 pm
फटीचर टीचरों के हाथों मार खा-खा कर हम बच्चे इतने अभ्यस्त हो चुके थे कि हमें लगता था यही हमारी नियति है और सारे संसार के स्कूलों में भी बच्चों की इसी तरह पिटाई होती है..लेकिन कभी-कभार हमारी पुकार भी ऊपरवाले के कानों तक पहुँच जाती थी..हुआ यूँ कि हमारा संस्कृत टीचर( जिसका ज़िक...
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  December 1, 2015, 9:06 pm
जब ज़िन्दगी डेंगू मलेरिया के साथ साथ देश में फ़ैल रही अराजकता के बीच कट रही थी !जब यू ट्यूब फेसबुक और व्हाट्स-ऐप के वीडियो मनोरंजन कम और अशांत अधिक कर रहे थेजब स्वर्ग में बैठा भगवान 'स्वर्गवासी'नज़र आने लग गया थाजब मन को समझाने के सारे उपाए निरुपाय हो रहे थेजब कोई किताब पढ़ना...
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  October 4, 2015, 9:41 pm
ख़तरनाक पड़ाव है उम्र चालीस ज़्यादा मांगती है कम देती हैना झपटने की ताक़त होती है ना मांगने की हिम्मत होती हैबहुत ज़ोर लगाना पड़ता है बहुत शोर मचाना पड़ता है मन को घंटों मनाना पड़ता है दिमाग को दाम दंड साम भेद से चुप कराना पड़ता हैकुछ बेवजह-सी गोलियां अलमारी में जगह बन...
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  September 25, 2015, 6:28 pm
ये सब मैं टीचर डे पर लिखना चाहता था, जब सारा फेसबुक टीचर नाम के एक प्राणी और एक उपाधि का महिमामंडन करने में लगा हुआ था। जो उपाधि हमारे समय में (मैं आज 40 का हूँ) ग्रेजुएशन या उस से भी कम पढ़ाई में मिल जाया करती थी और बिना किसी विशेष प्रतिभा के एक तुच्छ-सा प्राणी टीचर बन जाया कर...
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  September 18, 2015, 7:58 pm
लम्बी उम्र की कामनाओं के बीच कुछ समय के लिए मर जाने का वरदान मांग लूँ अगर कोई भगवान हो जाए मेहरबान लगातार दौड़ते दिमागी घोड़ों की तोड़ दूँ टांगें लपर झपर ज़बान के पर दूँ क़तर बढ़ते कदम थाम  हर प्रयास को दूँ आरामबेकाम हो मेरा काम अनाम हो मेरा नाम हर रोज़ की जीव...
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  April 4, 2014, 2:49 pm
If I could connect with five or more people in a WeChat group- I would love to chat with these people…  Mirza Ghalib- I will ask him “Dil-e-Nadan Tujhe Hua Kya Hai… Akhir Iss Dard Ki Dawa Kya Hai!” Want to listen to his sher-o-shayari in his own voice & andaaz. Because he had said… “Hain Aur Bhi Duniya Mein Sukhanawar Bahut Achhe, Kahte Hain Ki 'Ghalib' Ka Hai Andaz-e-Bayan Aur!” I want to savor his Andaaz-e-Bayaan. I want to WeChat with Ghalib because I just adore him. For me he is not just a Shayar. He is a philosopher, a masiah. Listening to his words give me peace which no one else can give me.Shivaji Satam aka ACP Pradyuman- I will ask him ki ‘Akhir insan...
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Tag :डायरी
  June 13, 2013, 9:38 pm
FictionIt was when I started chewing Paan. I would go out for a walk after my dinner and end up reaching a Paan shop. As soon as Nandu Paanwallah would see me, he would start making a special Paan with extra Kattha. I would relish that Paan all my way back home, and with the taste of it I would go to thebed straightaway.The mornings were usually frightening for me as I would spit reddish while brushing. I kept on wondering that it was nothing but the outcome of Paan and it’s extra Kattha. I was convinced with this very thought for a while.Slowly and steadily Paan became the part and parcel of my life. I never missed chewing Paan and it became a ritual. I ate Paan every single day. And ever...
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Tag :डायरी
  May 19, 2013, 12:56 am
लिखने से अच्छा है पढ़ना बोलने से सुननारूठने से मानना हटने सेजुड़ना बचने से जूझना गिनने से लुटाना ऊंघने  से सोना सोने से जागना और  तेरा हो कर ना होने से तेरा ना होना  ...
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  January 7, 2013, 4:38 pm
सूरजमुखी का फूल याद आते ही आंखों के सामने आ जाता है एक हंसता-खिलखिलाता चेहरा... आपने कभी ध्यान से सूरजमुखी को देखा है? ऐसा लगता है जैसे एक बड़ा-सा चेहरा चौड़ी मुस्कान लिए लहलहा रहा हो। कितना ख़ूबसूरत और असंख्य गुणों से भरपूर है सूरजमुखी!गंधरहित होकर भी अपने गुणों की सुगं...
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Tag :डायरी
  November 24, 2012, 4:29 pm
कविता लिखने कलम उठाईमुद्दों विचारों सोचोंका मचा झंझावातकलम रखीसो गयाकमबख्तनींद भी नहीं आई...
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  September 13, 2012, 11:54 am
चन्द लम्हे  कंपन से गुज़रा हाथ लकीरें गडमड हो गईएक छोटी सी कंपन नेतकदीर बदल डालीगुनाह के रस्ते पे था अकेला भटकन थी डगर तूने पास बिठाया  दो पलतस्वीर बदल डाली कुछ घटनाओं को समझने लगा था प्यार एक बादल को बहारतूने चंद की बातें बादल छंट गयातदबीर बदल डाली नाशुक्रा था सदा ...
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Tag :मेरी कविताएं
  August 20, 2012, 11:27 am
घुमंतू आत्मा कैद शिथिल जिस्म मेंघुमंतू सोच कैदकुंद दिमाग मेंघुमंतू प्रेम कैद बासी सम्बन्ध मेंघुमंतू नज़र कैद जबरन नकाब में घुमंतू चाहकैद ओढ़ी आह में घुमंतू घुमंतू घुमंतू घुमंतू रहूँ घुमंतू सोचूं घुमंतू चाहूँ घुमंतू भोगूँ घुमंतू पाऊं घुमंतू देखूं घुमंतू जियूं घुम...
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Tag :
  August 16, 2012, 6:29 pm
हलचल हुई हिया हिला ताके टुकुर टुकुर अपना ही अक्सझिलमिल झिलमिल धुंधला धुंधलाहाथ बढ़ा पोछा आइना आइना चमका अक्स धुंधलामगर घाव अंदरूनी इलाज बाहरी नज़र पे जाला नज़र नाकारा दृष्टि प्राप्त करनी होगी जो मार करे दूर तक जो वार करे दूर तक जब दिखेंगे भीतर के ज़ख़्म रखूंगा मरहम सा ह...
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  August 14, 2012, 1:40 pm
टिक टिक टप टप धप धप   समय सरका पानी बरसाकदम धमका    ठक ठक चिप चिप दिप दिप द्वार खटका बदन तमकामुख चमका लप लप गट गटछन छन   स्वाद बहका गला चहका घूंघरू लहका  सब है चलायमान सब है निरंतर सब है जारी सब है सदा  फिर क्यूँ दिल करे हूम हूमक्यूँ न करे धक धक...
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  July 24, 2012, 12:56 am
 सिलसिलों टूटोकिस्मत  चमक  आह कर असर मेहनत हो सफल प्यार आ ख़ुशीठहर सोच अच्छा सोच समय कट संतापघटऐ ज़िन्दगी गले लगा ले ...
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  July 17, 2012, 7:27 pm
सीप सा जीवनमोती चोरी लेकिन हथेली बरक़रार लकीरें गायब लेकिन दिल प्रस्तुत धड़कन शांत लेकिन आंखें खुलीदृष्टि धुंधली मगर कदम कायम राह अदृश्य किन्तु सांस सुरक्षितसाहस समाप्त परन्तु जीवन जारी जान जमींदोज पर ऐसे कैसे चलेगा यार ??? ...
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Tag :
  July 6, 2012, 4:14 pm
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