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अनकही...

सोच रही हूं सूर्य उत्तरायण होने के साथ ही आज अपने ब्लॉग को जिसे पिछले दिनों भुला ही दिया था मैने, उसको भी एक नई सुबह के साथ प्रणाम करूं..कुछ ऩई शुरुआत करूं..कुछ पंक्तियां आज की इस नई सुबह के साथ.......'अनकही'को मेरी कुछ कही समर्पित......जलाकर लाश अपने ख्वाबों की ही आ रहे थे हमकि रस...
अनकही......
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  January 15, 2012, 12:28 pm
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