अंदाज़-ए-बयाँ और....

हमदीवानों की क्या हस्ती, हम आज यहाँ कल वहां चलेमस्ती का आलम साथ चला,हम धूल उडाते जहाँ चलेआए बनकर उल्लास अभीआँसू बनकर बह चले अभी,सब कहते ही रह गए,अरे तुम कैसे आए, कहाँ चले?किस ओर चले? यह मत पूछो,चलना है, बस इसलिए चले,जग से उसका कुछ लिए चले,जग को अपना कुछ दिए चले।दो बात कही, दो ब...
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Tag :bharat
  March 8, 2014, 4:49 pm
आज अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्लाह खान की पुण्य तिथि है। उनकी पुण्य तिथि पर मैं राम प्रसाद बिस्मिल की लिखी कविता जो लहू में उबाल ला देती है; उसे पेश कर रहा हूँ:हैफ़ हम जिसपे कि तैयार थे मर जाने कोजीते जी हमने छुडाया उसी कशाने कोक्या न था और बहाना कोई तडपाने को...
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Tag :dhull
  December 19, 2013, 3:48 pm
बादशाह अकबर और उनके दरबारी एक प्रश्न पर विचार कर रहे थे जो राज-काज चलाने की दृष्टि से बेहद अहम न था। सभी एक-एक कर अपनी राय दे...
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Tag :
  September 15, 2013, 9:38 pm
अपना भारत वो भारत है जिसके पीछे संसार चला। आज बड़े दिन के बाद पूर्व और पश्चिम का यह गीत सुना।  हम कहाँ थे और कहाँ पंहुच गए! भारत अर्थात आर्यावर्त; न केवल इसकी भाषा अपितु इसकी संस्कृति, वेशभूषा, धर्म, मान्यताएं और यहाँ तक कि नागरिक भी एक गंभीर खतरे से रूबरू हैं और इसे कोई ...
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Tag :
  August 18, 2013, 11:04 pm
जाग रहे हम वीर जवान,जियो जियो अय हिन्दुस्तान !हम प्रभात की नई किरण हैं, हम दिन के आलोक नवल,हम नवीन भारत के सैनिक, धीर,वीर,गंभ...
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Tag :
  August 17, 2013, 4:55 pm
 "संसार के लिए यह बड़े ही दुर्भाग्य की  बात होगी यदि सभी मनुष्य एक ही धर्म, उपासना की एक ही पद्यति और नैतिकता के एक ही आदर्श को स्वीकार कर लें।  इससे सभी धार्मिक और आद्यात्मिक उन्नति को मृत्यु जैसा आघात पंहुचेगा।  " दूसरे धर्म या मत के लिए हमें केवल सहनशीलता नहीं दिख...
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Tag :thoughts
  August 16, 2013, 11:40 pm
यतो धर्मस्ततो जयः, अर्थात जहाँ धर्म है वहां जय है। हिन्दू धर्म का यह महान सन्देश कहीं गुम हो गया लगता है।  आज गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती है, उन्होंने अपने महान काव्य में कहा था," परहित सरसी धर्म नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधमाई" अर्थात दूसरे के हित से बड़ा धर्म नहीं है ए...
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Tag :
  August 13, 2013, 9:19 pm
कोई भी धर्म हिंसा, घृणा, वैर नहीं फैला सकता। यदि वह ऐसा करता है तो उस धर्म का प्रचारक पाखंडी एवं झूठा है। अब यह सोचने वाली बात है कि मैंने धर्म प्रचारकों को पाखंडी कहा; धर्म को नहीं। धर्म मेरे किसी विचार से एवं किसी एक मनुष्य से कहीं महान हैं। धर्म चाहे कोई भी हो, पृथ्वी ...
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Tag :india
  June 24, 2013, 11:31 pm
वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई हैउसी के दम से रौनक आपके बँगले में आई हैइधर एक दिन की आमदनी का औसत है चवन्‍नी काउधर लाखों में गांधी जी के चेलों की कमाई हैकोई भी सिरफिरा धमका के जब चाहे जिना कर लेहमारा मुल्‍क इस माने में बुधुआ की लुगाई हैरोटी कितनी महँगी है ये व...
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Tag :hindu
  May 17, 2013, 6:36 pm
 मेरा एक जीवन हैउसमें मेरे प्रिय हैं, मेरे हितैषी हैं, मेरे गुरुजन हैंउसमें कोई मेरा अनन्यतम भी हैपर मेरा एक और जीवन हैजिसमें मैं अकेला हूँजिस नगर के गलियारों, फुटपाथ, मैदानों में घूमा हूँहँसा खेला हूँउसके अनेक हैं नागर, सेठ, म्युनिस्पलम कमिश्नर, नेताऔर सैलानी, शतरंज...
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Tag :india
  May 17, 2013, 6:31 pm

"एक और नया भारत कहता है कि पाश्चात्य भाव, भाषा, खान-पान और वेश भूषा का अवलंबन करने से ही हम लोग पाश्चात्य शक्तियों की भांति शक्तिमान हो सकेंगे। दूसरी और प्राचीन भारत कहता है कि मूर्ख!नक़ल करने से कहीं दूसरों का भाव अपना हुआ है? बिना उपार्जन किये कोई वास्तु अपनी नहीं होती...
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Tag :
  March 17, 2013, 10:32 pm
जिंदगी ने कर लिया स्वीकार,अब तो पथ यही है|अब उभरते ज्वार का आवेग मद्धिम हो चला है,एक हलका सा धुंधलका था कहीं, कम हो चला है,यह शिला पिघले न पिघले, रास्ता नम हो चला है,क्यों करूँ आकाश की मनुहार ,अब तो पथ यही है |क्या भरोसा, कांच का घट है, किसी दिन फूट जाए,एक मामूली कहानी है, अधूरी ...
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Tag :
  January 6, 2013, 1:21 pm
एक बेहद सुन्दर ब्लॉग से मुझे आज चाणक्य सीरियल का चन्द्रगुप्त मौर्या द्वारा दिया गया वह भाषण मिला जो उन्होंने अपने राज्याभिषेक पर दिया था। इसे पढ़ें और आज की स्थिति के अनुसार इसके बारे में सोचें, मैं इसको लिखित रूप में प्रस्तुत करने के लिए इस ब्लॉग के लेखक का आभारी हूँ:-...
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Tag :chanakya
  November 28, 2012, 11:55 am
गुरु नानक देव जी के जन्मदिन पर अल्लामा इकबाल जी के द्वारा लिखी गयी एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह ग़ज़ल उन्होंने गुरु नानक देव जी के लिए ही लिखी थी।कौम ने पैग़ाम-ए-गौतम की ज़रा परवा न कीक़द्र पहचानी न अपने गौहर-ए-यक-दाना कीआह बदकिस्मत रहे, आवाज़-ए-हक़ से बेख़बरग़ाफ़ि...
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Tag :rsdhull
  November 28, 2012, 11:52 am
फेसबुक से कुछ समय के लिए छुट्टी ली है तो सोचा है कि कुछ अपने लिए लिखूं और कुछ पढूं। इस ही कड़ी में मैंने एक ब्लॉग पढ़ते हुए मनु स्मृति का एक श्लोक ढूँढा जो शायद मेरी कई दुविधाओं का हल हो सकता है। मैं हमेशा से इच्छुक रहा हूँ यह जानने का कि धर्म क्या है और क्यों इसे धर्म कहते ...
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Tag :hindustan
  November 26, 2012, 10:52 pm
दुष्यंत कुमार की पुस्तक "साए में धूप " एक अपाहिज समाज की व्यथा है जो भारत के आजाद होने के बाद इसके नेताओं ने इसे बना दिया है। एक ग़ज़ल नीचे प्रस्तुत कर रहा हूँ कृपया ध्यान से पढ़ें और सोचें:ये रौशनी है हक़ीक़त में एक छल, लोगोकि जैसे जल में झलकता हुआ महल, लोगो देखिये यहाँ पर ...
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Tag :hindi
  November 17, 2012, 10:57 am
राम गइओ रावन गइओ, जाको बहु परिवार।कहु नानक थिरु कुछ नहीं, सुपने जिऊँ संसार॥एक बेहद सुन्दर साखी के साथ आप सब को प्रणाम। श्री गुरु तेग बहादुर के द्वारा रचित इस साखी में वे कहते हैं कि इस संसार से श्री राम भी चले गए, रावण भी चला गया, वे कहते हैं कि आपका कुछ नहीं है और यह संसार ए...
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Tag :sikh
  November 13, 2012, 10:05 am
यही कोई पंद्रह वर्ष पहले दूरदर्शन पर एक सीरियल आता था "चाणक्य" नाम से . देश प्रेम के वाक्यों से लबालब यह सीरियल सही मायने में एक महान रचना थी। उस सीरियल के एक एपिसोड में चाणक्य कहते हैं,"यवनों ने भिन्न-भिन्न जनपदों के आस्था के भेद को नहीं देखा था. आक्रान्ताओं ने सभी के साथ ...
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Tag :maharashtra
  September 2, 2012, 11:11 am
यही कोई पंद्रह वर्ष पहले दूरदर्शन पर एक सीरियल आता था "चाणक्य" नाम से . देश प्रेम के वाक्यों से लबालब यह सीरियल सही मायने में एक महान रचना थी। उस सीरियल के एक एपिसोड में चाणक्य कहते हैं,"यवनों ने भिन्न-भिन्न जनपदों के आस्था के भेद को नहीं देखा था. आक्रान्ताओं ने सभी के सा...
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Tag :unity
  September 2, 2012, 11:11 am
हम भी आराम उठा सकते थे घर पर रह कर,हमको भी पाला था माँ-बाप ने दुःख सह-सह कर ,वक्ते-रुख्सत उन्हें इतना भी न आये कह कर,गोद में अश्क जो टपकें कभी रुख से बह कर ,तिफ्ल उनको ही समझ लेना जी बहलाने को !अपनी किस्मत में अजल ही से सितम रक्खा था,रंज रक्खा था मेहन रक्खी थी गम रक्खा था ,किसको ...
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Tag :
  August 18, 2012, 12:08 pm
आज मानव सड़क पर चला जा रहा था। उसके मन में कई तरह की गुत्थियां चल रही थीं।नौकरी मिल नहीं रही थी, ऊपर से माँ उसकी चिंता में मरी जा रही थी। मानव के तीन भाइयों में वह ही ऐसा था जिसके पास नौकरी नहीं थी, इसलिए उसे घर में कोई बहुत ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती थी। पिता जी कुछ चाय बनान...
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Tag :gady
  August 17, 2012, 7:52 pm
शहर में चारों और दंगे हो रहे थे और तबाही मची थी, तभी एक छोटी सी कुटिया के पास आकर भीड़ रुकी. मुस्लिम लोगों की भीड़ थी वह; उस भीड़ ने आवाज लगाईं, "जो कोई भी है बाहर निकले, अपना मजहब बताये वरना हम कुटिया को जला देंगे". एक अधेड़ उम्र की बुढ़िया बाहर आई, एक प्रश्न चिह्न लगाते हु...
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Tag :gady
  August 16, 2012, 4:47 pm
तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो ।आदमी के पक्ष में हो या कि आदमखोर हो ।।ख़ुद को पसीने में भिगोना ही नहीं है ज़िन्दगी,रेंग कर मर-मर कर जीना ही नहीं है ज़िन्दगी,कुछ करो कि ज़िन्दगी की डोर न कमज़ोर हो ।तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो ।।खोलो आँखें फँस न जाना तुम सुनहरे ...
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Tag :blog
  August 16, 2012, 4:06 pm
आजादी की छुट्टी पर एक छोटा बच्चा अपनी माँ से पूछ बैठा, "माँ, ये छुट्टी क्यों होती है" माँ परेशान रहती हुई कोई जवाब न दे पायी. इतने में बच्चे ने फिर से पूछा, "माँ जवाब क्यों नहीं देती?" माँ ने सोचा फिर जवाब दिया,"बेटा क्योंकि आज के दिन हमें गुलामी से आजादी मिली थी, इस से ...
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Tag :gady
  August 15, 2012, 2:58 pm
इस किनारे चलते हुए चुन्नी  लाल  ने  बहती नदिया के पार देखा. इस किनारे बड़े बंगले थे, बड़े बाजार थे, उन बाजारों में केवल कुछ हजार लोग थे। वे लोग ऐसे थे जो चलते थे, उड़ते थे, कभी कभी तो कर्म ऐसा करते थे, जिन कर्मों में कोई धर्म नहीं, जिन आदमियों में कोई सच्चा कर्म नहीं,पर उनका ...
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Tag :gady
  August 15, 2012, 2:26 pm
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  गूगल के द्वारा अपनी रीडर सेवा बंद करने के कारण हमारीवाणी की सभी कोडिंग दुबारा की गई है। हमारीवाणी "क्...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
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