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Blog: हरीश...उन्मुक्त उड़ान

Blogger: harish jaipal mali
दर्द के बादल पिघलते नहीं चांद बचपन के ढलते नही खिलौने बदतमीज हो गये हैचाबी ना भरुं तो चलते नहीं  किताबों से बस्ते फट भी गयेआज पैसों से झोले भरते नहीं बूढी मां की बाहों में फिर बिखर जाऊंखिलौने टूट गये है बचपन भूलते नहीं अांगन में तितलियां अब कहां आती हैं'हरि'बरसा... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   5:09am 19 Apr 2015 #
Blogger: harish jaipal mali
अंत नहीं आरम्भ लिखूंगाफ़ुर्सत में प्रारंभ लिखूंगा ख्वाहिश में विश्वास लिखूंगा आस नहीं प्रयास लिखूंगा क्रांति का आकार लिखूंगा शून्य नहीं विस्तार लिखूंगा इन्कलाब को पत्र लिखूंगा शास्त्र नहीं मैं शस्त्र लिखूंगा फ़ितरत के विरुद्ध लिखूंगा छाँव नहीं मैं धूप लिखूंगा ह... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   1:55pm 17 Apr 2015 #
Blogger: harish jaipal mali
मैं अन्तर्मन तेरा, मैं ख़्वाब भी तेरा हूँ विश्वास करो मेरा, मैं साँझ सवेरा हूँ बनजारें भी अब तक, घर लौट गये होंगे मैं बीच रास्ते का, लूट गया जो डेरा हूँ कुछ दर्द उधारी के, कुछ अश्क़ मुनाफे केमैं इश्क़ का राजा हूँ, जो कुछ हूँ तेरा हूँ 'हरि'स्याह अँधेरे की, परछाई मेरी तस्वीर इक र... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   4:33pm 16 Apr 2015 #
Blogger: harish jaipal mali
ना दरिया ना मौज़ की बात करता हूँ मुट्ठी में है चाँद मर्ज़ी से रात करता हूँ ये झूठ है मेरा कि मंजिल नहीं मिली सच में तो हर रोज़ मुलाकात करता हूँ रात में हर ख्वाब, ख़फ़ा करने के लिए शाम से पहले कत्ले-जज़्बात करता हूँ जब से उनके ख्वाब आकर टूटने लगे हैं हर सहर बिस्तर की शिनाख्त करता ह... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   2:33pm 14 Apr 2015 #
Blogger: harish jaipal mali
   ना दरिया ना मौज़ की बात करता हूँ मुट्ठी में है चाँद मर्ज़ी से रात करता हूँ ये झूठ है मेरा कि मंजिल नहीं मिली सच में तो हर रोज़ मुलाकात करता हूँ रात में हर ख्वाब, ख़फ़ा करने के लिए शाम से पहले कत्ले-जज़्बात करता हूँ जब से उनके ख्वाब आकर टूटने लगे हैं हर सहर बिस्तर की शिनाख्त क... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   3:34pm 29 Mar 2014 #
Blogger: harish jaipal mali
कृष्ण कहो श्री हरि कहो या तीन लोक का ग्वाला राधे...राधे...राधे...राधे मन मौजी मतवाला कृष्ण कन्हैया मेरा प्यारामोहन मुरली वाला...!  अंग अंग मेरा रोम रोम मेरे पिय दर्शन का प्यासा  मयकशी मतवाली मूरत बृज का नन्हा लाला  कृष्ण कन्हैया मेरा प्यारा मोहन मुरली वाला...!... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   11:23am 23 Mar 2014 #
Blogger: harish jaipal mali
मेरा नाम  उनकी  जुबान पर है जैसे कोई  दरिया  उफ़ान पर है  इस बस्ती के लोगों के उसूल मत पूछो पैर जमीं पे इरादे आसमान पर है  वारदाते-क़त्ल उनके शहर में हुई मगर इल्जाम मुझ सुल्तान पर है  हारे हुए सिकंदरों को कौन पूछता है फतह के तमाम झंडे मेरे मकान पर है मेरा नाम उनकी... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   4:28pm 17 Mar 2014 #
Blogger: harish jaipal mali
कोरे कागज़ पर तू लिख रहा था कुछ कुछ हंसी गुम थी उदास दिख रहा था कुछ कुछ खुश तो था कि दुआएं मुकम्मल हुयी थी फिर भी मन ही मन चिढ़ रहा था कुछ कुछ थोड़े आंसू गिरे थे मेरे हर सवाल पर कागज़े दिल तेरा भीग रहा था कुछ कुछ एक झोंका हवा का गुजर भी गया सुर्ख पत्ता अभी भी हिल रहा था कुछ कुछ फ़ास... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   3:25pm 26 Aug 2013 #
Blogger: harish jaipal mali
किसी  रोज़ जिंदगी  बिखर जाएगी उड़ती पतंगे आसमां से उतर जाएगी इस ओर कुछ दूरियाँ ज़ायज हैं वर्ना उस ओर मुहब्बत की खबर जाएगीमैंने देखा है मुहब्बत के गुलाबों का अंजाम अश्कों में नहलाकर किताब निगल जाएगी इस बुढ़ापे में इश्क की ख़ता न करो दोस्तज़ात-ऐ-बुजुर्ग बे आबरू होकर जाएगी ग... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   3:05pm 21 Aug 2013 #
Blogger: harish jaipal mali
  नासाज  तबियत थोड़ी  ठीक हो जाय  आओ  हम  ग़म में चूर चूर  हो जायबंजारों से कह दो हम उनसे वाबस्ता नहीं ये दिन आराम के है तो कुछ आराम हो जाय  वक़्त कहता है तो कोई नयी दुनिया बसा लेतुम जमीं हो जाओ  हम आसमां हो जाय मेरे गांव के पंछी साँझ को घर नहीं लौटते जरुरी है तेरे ग... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   11:34am 17 Aug 2013 #
Blogger: harish jaipal mali
 कभी अपने ख्यालों की मैं सुनता हूँ तो कभी ख्याल मेरी अपनी सुनते है इसी सिलसिले के दरमियाँ आजकल जो हालात मेरे और मेरे ख्यालों के बीच बन पड़े है वो इस 'उत्सवी' ग़ज़ल में पेश करता हूँ...!अब  परस्तिश ना रही  भगवानों की तबाह  हुयी तासीर  मेरे  फरमानों की गफ़लत में इनाद आदमी... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   4:50pm 16 Aug 2013 #
Blogger: harish jaipal mali
''कोई कसक दिल में दबी रह गयी ...!'' ऐसे गीत मुझसे गाये नहीं जाते हा मगर दिल के ज़ज्बात अक़सर अल्फाजों की शक्ल-औ-सूरत अख्तियार कर ही लेते है ...मगर यही मेरी बेबसी है और मेरी अनकही आरज़ू भी ...आज मुल्क के हालात के लिए अगर मैं बेबस हूँ तो मेरे अल्फाज़ भी...!   'ज़श्न -ऐ-आज़ादी' से क्या होग... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   1:21pm 15 Aug 2013 #
Blogger: harish jaipal mali
''कोई कसक दिल में दबी रह गयी ...!''ऐसे गीत मुझसे गाये नहीं जाते हा मगर दिल के ज़ज्बात अक़सर अल्फाजों की शक्ल-औ-सूरत अख्तियार कर ही लेते है ...मगर यही मेरी बेबसी है और मेरी अनकही आरज़ू भी ...आज मुल्क के हालात के लिए अगर मैं बेबस हूँ तो मेरे अल्फाज़ भी...!   'ज़श्न -ऐ-आज़ादी'से क्या होगा.... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   1:21pm 15 Aug 2013 #
Blogger: harish jaipal mali
इस जिंदगी के नाम इक जाम हो जायेकुछ रात मयखाने में आराम हो जायेहम उनसे ये कहकर घर से निकले थे इंतजार ना करना चाहे शाम हो जाए वो इतना हसीं है की गम न होगा गरउससे मुहब्बत करके बदनाम हो जाए क्यू करे मुहब्बत छुप-छुपकर जहाँ से हर राज बेनकाब सरे-आम हो जाए इक मुलाकात उनसे जरुर... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   4:34am 27 May 2012 #
Blogger: harish jaipal mali
इक कसम ऐसी भी अब खा ली जाये जिससे दोस्ती-दुश्मनी संभाली जाये टूटी तस्वीर से आंसू टपकते देखकर किसी कलंदर की दुआएं बुला ली जाये अब कोई ताल्लुक न रहा उसका मुझसेहो सके इश्क की अफवाहें दबा ली जाये खबर है तूफां जानिबे-समंदर निकले हैं वक़्त पर टूटी कश्तियाँ सजा ली जाये इन... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   7:31am 26 May 2012 #
Blogger: harish jaipal mali
मुहब्बत का तिलिस्मी अफ़साना हो जाये चाँद भी तेरे हुस्न का गर दीवाना हो जाये इस नादान दिल को सुकूँ भी मिल जायेगा  हर रोज तेरा मेरे घर आना जाना हो जाये ये लंबा सफ़र है जीने का आखरी सांस तक  जिंदगी को लम्हों में बांटकर जीना हो जाये अब मजे की बात नहीं रही ते... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   4:43pm 23 May 2012 #
Blogger: harish jaipal mali
मुहब्बत भी एक किस्म की फकीरी है जनाबफुरकते-महबूब में तड़पना मझबूरी है जनाब सूखे पत्तों की खबर अंधड़-तूफानों से पूछिये बेसहारा जिंदगी की हर सांस आखिरी है जनाब वो कहते रहे गैरों से दिल की बाते रो-रो कर जैसे इश्क की बातों में अश्क जरुरी है जनाब ये चाँद ये सितारे ये जमीं आस... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   12:17pm 22 May 2012 #
Blogger: harish jaipal mali
दोस्तों!ग़ज़ल सूफी फकीरों की दौलत है जो शायरों को विरासत में मिली है। ये जागीर ही ऐसी है जिसे हर कोई अपनी मुहब्बत और गमदीदा माहौल में इस्तेमाल करता है। मुहब्बत-गम और शायरी इस जहाँ की एक अटूट तिगडी है जिसकी खूबसूरती का चर्चा वक़्त की पगडंडियों पर सरे-राह होता रहा है...। ... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   6:20am 21 May 2012 #
Blogger: harish jaipal mali
नकाब में हुस्न की मूरत हो तुमरंगे-खुशबू सी खुबसूरत हो तुमजिंदगी की बेनजीर जागीर हो किसी गरीब की दौलत हो तुम हो उजली ठंडी बूंद बारिश की बंजर जमीं की जरुरत हो तुम बुरा मानने का जिक्र क्यों करूंमीठी-मीठी सी शरारत हो तुम दर्द का दरिया सुकूं का साहिल कश्ती में बिखरी मुहब... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   3:49am 19 May 2012 #
Blogger: harish jaipal mali
उसका  रूठ  जाना  तबाही से कम नहींलिबासे-ख़ामोशी झूठी गवाही से कम नहीं अब न रोना है उसका  न खिलखिलानावो गुजरे लम्हे भी  शायरी से कम नहीं तमाम उम्र भी कम है  शिकवों के लिए जिंदगी के शिकवे  जिंदगी से कम नहींपंछी  भी उड़ते-उड़ते  दम तोड़ देते है आसमां की कीमत  जमीं से कम नहीं... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   4:06pm 18 May 2012 #
Blogger: harish jaipal mali
जिन्दा हूँ मगर आज भी गम के लिबास में बिखरी हुई कहानियाँ जिस्मे-अलफ़ाज़ में आखिरी ख्वाहिश ये मेरी नाम-ऐ-साकी है तमाम  ईंट-ऐ-कब्र  नहला  दो  शराब मेंन जाने किसके गले से आगाज़-ऐ-क़त्ल हो बेहिसाब फिक्रमंद है लोग बिखरी कतार मेंबदनामियों का डर महज  उनको ही होगावे अजनबी जो ठह... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   7:25am 17 May 2012 #
Blogger: harish jaipal mali
जिन्दा हूँ मगर आज भी गम के लिबास में बिखरी हुई कहानियाँ जिस्मे-अलफ़ाज़ में आखिरी ख्वाहिश ये मेरी नाम-ऐ-साकी है तमाम  ईंट-ऐ-कब्र  नहला  दो  शराब मेंन जाने किसके गले से आगाज़-ऐ-क़त्ल हो बेहिसाब फिक्रमंद है लोग बिखरी कतार में ख़त्म हो भी तो कैसे हो परेशानियां  'हरीश'सवा... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   7:25am 17 May 2012 #
Blogger: harish jaipal mali
जिंदगी जीने के जो आसां तरीके है मौत की चौखट पे मुद्दतों से सीखे है तू ही था जिस पर मुझे नाजिश था कभी आज तेरे ख्याल भी खामोश फीके है होश में रहना गज़ब हुनर की बात है इश्क की शराब जो हम पी के बैठे हैं परेशाँ है बादशाहों के महल घर-बार  बेफिक्र चैन-औ-सुकूँ से फकीर लेटे है क्य... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   3:10pm 12 May 2012 #
Blogger: harish jaipal mali
जिंदगी के मसलों की ज़ीनत जरुरी है जागीरे-बख्शीस की कीमत जरुरी है...नफरतों की गुस्ताखी हर रोज करता हूंमुहब्बत करने को तो फुर्सत जरुरी है... जंग का मैदान जख्मे-जमीं हो गया अब अमनौ-चैन की हरकत जरुरी है...आँख का मतलब नहीं हर वक़्त रोया जाय अश्क की बारिश को फुरकत जरुरी है... मुहब... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   2:59pm 12 May 2012 #
Blogger: harish jaipal mali
बेक़सूर निगाहों के मसलें चश्मदीद गवाह हो गये हम इतना डूबे उसकी चाहत में कि दरिया हो गये मुहब्बत की बाँहों में सिसककर गम शुकून पाता है अश्कों में नहाकर बेआबरू  तमाम शिकवा हो गये एक बार जो उसकी खैर ली तो वो लिपट के रो पड़ा बातों बातों में हम भी गमे-यार के हिस्सेदार हो ग... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   2:54pm 10 May 2012 #
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