POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: Pasand

Blogger: pallavi
तप्ती गरमी और कड़ाके की ठंड को सहती हुई यह वादियाँ ना जाने कितनी सदियों से प्रतीक्षा कर रही है उस आसमान के एक आलिंग कि, की जिसे पाकर मनो मोक्ष मिल जायेगा इन्हें।इनकी पथराई आंखों मे भी लहराए गा कभी जज़्बातों का पानी और फिर खेलेगा एक पत्थर का फूल इनके आँचल में,पाषाण युग से आज... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   5:05am 31 May 2020 #
Blogger: pallavi
क्या कहूँ तुम से कि नि शब्द हूँ मैं आजतुम्हारी बातें, जैसा मेरा श्रृंगारसुनते ही मानो....मानो मेरे मन मंदिर में जैसे, बज उठते हैं हजारों सितारएक नहीं, बल्कि कई सौ बारउठती रहती हैं लहरें दूर.... कहीं मन के उस पारआज भी सुनने को आतुर है मन, फिर एक बार वही कही सुनीसुनी अनसुनी बात... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   9:15am 25 May 2020 #
Blogger: pallavi
इतनी सुंदर तो न थी मैं, जितना आज तुमने मुझे बना दियाकुछ यूं घुमाया शब्दों को, मानो एक दीपक जला दियागुज़र हुये दिन कुछ इस तरह याद आएकी लहरों ने समंदर को नचा दियाघुंगरू थे इन पाँव में कभीतुम्हारे शब्दों ने देखो इन्हें नूपुर बना दियादब के रह गयी थी कहीं जो बातेंदेखो आज मेरे ... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   6:47am 23 May 2020 #
Blogger: pallavi
आज वैलेंटाइन डे है। अर्थात प्यार का दिन, प्यार करने वालों का दिन, लेकिन क्या प्यार का भी कोई दिन होना चाहिए ? आप अपने साथी से कितना प्यार करते है यह जताने के लिए आपको किसी विशेष दिन का इंतज़ार नही होना चाहिए।…................................................................................कभी महसूस किया है ऐसे प्यार को जहा... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   5:20am 14 Feb 2020 #
Blogger: pallavi
सच सच ही होता है और झूठ झूठ ही होता है फिर कहा जाता है किसी की भलाई के लिए बोला गया झूठ सच से बढ़कर होता है। लेकिन विडंबना देखिये कि फिर भी ''सत्यम शिवम सुंदरम''ही कहा जाता है। हम मस्ती मज़ाक में भी सहजता से झूठ बोल जाते है और गंभीर विषय में भी, शायद इसलिए कि झूठ बोलने में हमें ज... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   6:58am 12 Jan 2020 #
Blogger: pallavi
जाने मन तुम कमाल करती हो...उठते ही सुबह से सबका ख्याल करती होबच्चों को स्कूल भेज खुद काम पे निकलती होसारा दिन खट के जब घर में कदम रखती होचेहरे पर न शिकन कोई न थकान का कोई अंशबच्चों के संग बच्चा बन जब हँसती होजानेमन तुम कमाल करती हो....रात को भी अपने घर का सारा काम निपटापति के ... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   5:16am 8 Jan 2020 #
Blogger: pallavi
सही में औरतें बहुत ही बेवकूफ होती हैहजारों ताने उल्हाने, मार पीट सहकर भी उम्मीद का दामन जो नहीं छोड़ पाती यह औरतेंन जाने कितनी बार टूट -टूटकर बिखर जाने के बाद भी खुद को समेट जो लेती हैं यह औरतेंन जाने कहाँ से एक नए अंकुर की तरह हर रोज़ पुनः जन्म लेती हैं यह औरतेंएक नयी आशा के... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   5:35am 15 Apr 2017 #
Blogger: pallavi
गुज़र रही है ज़िंदगी कुछ इस तरह कि जैसे इसे किसी की कोई चाहत ही नहींकभी दिल है तो कभी दिमाग है ज़िंदगी कभी एक नदिया तो कभी एक किताब है ज़िंदगीन मंजिल का पता है ना राह की कोई खबर न डूबने का डर है न उबरने की कोई फिकर  शब्द भी खामोश है और कलम भी बेज़ुबान है बस समय की धारा में ब... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   2:18pm 10 Apr 2017 #
Blogger: pallavi
कभी रुकती संभलती, कभी ज़रा सी ठहरती तो कभी डूबती उबरती कुछ यूं ही हवा सी बह रही है ज़िंदगी न समय का पता है, न मंज़िल की कोई खबर गुज़र गया जो कल जहन में आता नहीं आज में जीने को जी चाहता है फिर न जाने क्यूँ  ? कैसे अचानक ही आने वाले कल की चिंता सिर उठती हैफिर ज़रा देर को ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   11:57am 23 Jul 2016 #
Blogger: pallavi
इस अभिव्यक्ति की जान अंतिम पंक्तियाँ मेरी नहीं है मैंने उन्हें कहीं पढ़ा था। कहाँ अब यह भी मुझे याद नहीं है। कृपया इस बात को अन्यथा न लें।   'कोमल है कमजोर नहीं तू शक्ति का नाम ही नारी'स्त्री एक कोमल भाव के साथ एक कोमलता का एहसास दिलाता शब्द जिसके पीछे छिपी होती है ए... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   4:06pm 30 Nov 2015 #
Blogger: pallavi
कैसे अजीब होते है वो पल, जब एक इंसान खुद को इतना मजबूर पाता है कि खुल के रो भी नहीं पाता।  तब, जब अंधेरी रात में बिस्तर पर पड़े-पड़े निरर्थक प्रयास करता है उस क्रोध के आवेग को अपने अंदर समा लेने का तब और अधिक तीव्रता से ज़ोर मारते है वह आँसू जिनका अक्सर गले में ही दम घो... Read more
clicks 254 View   Vote 0 Like   11:46am 2 Nov 2015 #
Blogger: pallavi
वर्तमान हालातों को मद्दे नज़र रखते हुए जब मैंने मेरी ही एक सहेली से फोन पर बात की और तब जब उसने यह कहा कि यार चिंता और फिक्र क्या होती है यह आज समझ आरहा है मुझे...जब हम बच्चे थे तब तो हमेशा यही लगता था कि माँ नाहक ही इतना चिंता करती है मेरी, सिर्फ इसलिए क्यूंकि मैं एक लड़की हूँ। ... Read more
clicks 294 View   Vote 0 Like   7:09am 27 Aug 2014 #
Blogger: pallavi
प्रेम क्या है ! इस बात का शायद किसी के पास कोई जवाब नहीं है। क्योंकि प्रेम की कोई निश्चित परिभाषा भी तो नहीं है। प्रकृति के कण–कण में प्रेम है। साँझ का सूरज से प्रेम,धरती का अंबर से प्रेम,पेड़ का अपनी जड़ों से प्रेम,जहां देखो बस प्रेम ही प्रेम। प्रेम एक शाश्वत सत्य है। प्रभ... Read more
clicks 299 View   Vote 0 Like   12:33pm 22 Feb 2014 #
Blogger: pallavi
अजीब दास्‍तान है ये कहां शुरू कहां खत्मये मंज़िलें हैं कौन सी न वो समझ सके न हम....सच ज़िंदगी भी तो ऐसी ही है। ठीक इसी गीत की पंक्तियों की तरह एक कभी न समझ आनेवाली पहेली। एक लंबा किन्तु बहुत छोटा सा सफर, जिसकी जाने कब साँझ ढल जाये, इसका पता ही नहीं चलता। न जाने कितने भावनात... Read more
clicks 288 View   Vote 0 Like   10:52am 29 Jan 2014 #
Blogger: pallavi
 सुनो जानते हो कल फिर आया था चाँद मेरे द्वारे। मेरे कमरे की खिड़की में टंगे जाली के पर्दे की ओट से चुपके-चुपके देख रहा था वो कल रात मुझेइस बार चाँदनी भी साथ थी उसके कुछ कम उदास नज़र आया वो मुझे कल रात शायद अब मन हलका हो गया है उसका तभी तो चांदनी को भी मना लिया उसने... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   3:38pm 2 Jan 2014 #
Blogger: pallavi
सर्दियों की ठंडी ठंडी सुबह में मैं और मेरे घर का आँगन मध्यम-मध्यम बहती हुई शीत लहर सी पवन जैसे मेरे मन में किसी गोरी के रूप को गढ़ रहे हैजैसे ही हवा के एक झौंके से ज़रा-ज़रा झूमता है एक पेड़तो ऐसा लगता है जैसे किसी सुंदर सलोनी स्त्री के अधरों पर बिखर रही हैएक मीठी सी मुस्... Read more
clicks 332 View   Vote 0 Like   9:56am 18 Dec 2013 #
Blogger: pallavi
कल रात मैंने चाँद को देखा। सूने आकाश में उदास बहुत उदास सा जान पड़ा वो मुझे कल रात। ऐसा लगा जैसे बहुत कुछ कहना चाहता है वो मुझ से, वरना इस कड़कड़ाती ठंड की ठिठुरती रात में भला वो अपनी पूरी जगमाहट लिए मेरी खिड़की पर क्या कर रहा था। शायद बहुत कुछ था उसके पास, जो वो कहना चाहता था मु... Read more
clicks 338 View   Vote 0 Like   9:45am 11 Dec 2013 #
Blogger: pallavi
सर्द हवाओं में ठिठुरते एहसास और तुम इन दिनों बहुत सर्दी है यहाँ,  एकदम गलन वाली ठंड के जैसी ठंड पड़ रही हैजिसमें कुछ नहीं बचतासब गल के पानी हो जाना चाहता हैजैसे रेगिस्तान में रेत के तले सब सूख जाता है ना बिलकुल वैसे ही यहाँ की ठंड में भी कुछ नहीं बचता  यहाँ तक के खुद ... Read more
clicks 278 View   Vote 0 Like   5:10pm 4 Dec 2013 #
Blogger: pallavi
    सर्द हवाओं में मेरे साथ साथ चलतीदूर बहुत दूर तलक मेरे साथ सूनी लंबी सड़कजिस पर बिछे हैन जाने कितने अनगिनत लाखो करोड़ोंसूखे पत्ते नुमा ख्यालजिनपर चलकर कदमों से आती हुई पदचापऐसी महसूस होती है, मानो यह कोई पदचाप नहींबल्कि किसी गोरी के पैरों की पायल हो कोईजिसकी मधु... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   2:13pm 18 Nov 2013 #
Blogger: pallavi
कभी देखा सुना या महसूस भी किया है तन्हाइयों को खामोशी की चादर लपेटे एक चुप सी तन्हाई जो दिल और दिमाग के गहरे समंदर से निकली हुई एक लहर हो कोई जब कभी दिलो और दिमाग की जद्दोजहद के बीच शून्य में निहारती है आंखे तो जैसे हर चीज़ में प्राण से फूँक जाते है और ज़रा-ज़रा स... Read more
clicks 296 View   Vote 0 Like   9:18pm 24 Sep 2013 #
Blogger: pallavi
ख़याली पुलाव कितने स्वादिष्ट होते है ना झट पट बन जाते हैइतनी जल्दी तो इंसटेंट खाना भी नहीं बन पाता मगर यह ख़याली पुलाव तो, जब तब, यहाँ वहाँ, कहीं भी आसानी से उपलब्ध हो जाते है बस एक वजह चाहिए होती है इन्हें पकाने की वो मिली नहीं कि पुलाव तैयार है.................................................. Read more
clicks 291 View   Vote 0 Like   5:51pm 29 Aug 2013 #
Blogger: pallavi
निंद्रा में खोई थी मोहनस्वप्न सजीले देख रही थीभटक रही थी उन गलियों मेंचित चोर रहे तुम वहींकितना मोहक था सब कुछजहां नाच रहा था मोरहरियाली ही हरियाली थीसब थे भाव बिहोरन कोई दुख था, न कोई पीड़ान वियोग का छोर,अब देखो तो कुछ न बाकीविरह पसरे चहुं ओरनहीं रहे अब नदिया सागरबिखर... Read more
clicks 253 View   Vote 0 Like   4:58pm 5 Aug 2013 #
Blogger: pallavi
देखो ना सावन आने वाला हैयूं तो सावन का महीना लग गया हैमगर मैं भला कैसे मान लूँ कि सावन आगया है क्यूंकि प्रिय ऐसा तो ना था मेरा सावन जैसा अब के बरस आया है  मेरे मन की सुनी धरती  तो अब भी प्यासी है, उस एक सावन की बरसात के लिए जिसकी मनोरम छवि अब भी रह रह कर उभरती हैमे... Read more
clicks 280 View   Vote 0 Like   8:51am 25 Jul 2013 #
Blogger: pallavi
कुछ मत सोचो न कोई रचना, ना ही कवितामैं यह सोचूँ काश के तुम बन जाओ कविता जब चाहे जब तुमको देखूँ जब चाहे जब पढ़ लूँ तुमको ऐसी हो रसपान कविता हो जिसमें चंदन की महक पर  लोबान सी महके वो कविता हो जिसमें गुरबानी के गुण रहती हो गिरजा घर में वो, प्रथनाओं में लीन क... Read more
clicks 253 View   Vote 0 Like   7:26am 20 Jul 2013 #
Blogger: pallavi
तुम, तुम प्यार की बात कर रहे हो सुनो तुम्हारे मुंह से यह प्यार व्यार की बातें अच्छी नहीं लगती (जानेमन)  तुम जानते भी हो प्यार होता क्या है ? प्यार ज़िंदगी में केवल एक बार होता है दोस्त बारबार नहीं,   तो भला फिर तुम्हें प्यार करने का हक़ ही कहाँ रह जाता हैप्यार करने वाले कभ... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   5:07pm 21 Jun 2013 #
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:

Members Login

    Forget Password? Click here!
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3956) कुल पोस्ट (193618)