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Blog: Pasand

Blogger: pallavi
सही में औरतें बहुत ही बेवकूफ होती हैहजारों ताने उल्हाने, मार पीट सहकर भी उम्मीद का दामन जो नहीं छोड़ पाती यह औरतेंन जाने कितनी बार टूट -टूटकर बिखर जाने के बाद भी खुद को समेट जो लेती हैं यह औरतेंन जाने कहाँ से एक नए अंकुर की तरह हर रोज़ पुनः जन्म लेती हैं यह औरतेंएक नयी आशा के... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   5:35am 15 Apr 2017 #
Blogger: pallavi
गुज़र रही है ज़िंदगी कुछ इस तरह कि जैसे इसे किसी की कोई चाहत ही नहींकभी दिल है तो कभी दिमाग है ज़िंदगी कभी एक नदिया तो कभी एक किताब है ज़िंदगीन मंजिल का पता है ना राह की कोई खबर न डूबने का डर है न उबरने की कोई फिकर  शब्द भी खामोश है और कलम भी बेज़ुबान है बस समय की धारा में ब... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   2:18pm 10 Apr 2017 #
Blogger: pallavi
कभी रुकती संभलती, कभी ज़रा सी ठहरती तो कभी डूबती उबरती कुछ यूं ही हवा सी बह रही है ज़िंदगी न समय का पता है, न मंज़िल की कोई खबर गुज़र गया जो कल जहन में आता नहीं आज में जीने को जी चाहता है फिर न जाने क्यूँ  ? कैसे अचानक ही आने वाले कल की चिंता सिर उठती हैफिर ज़रा देर को ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   11:57am 23 Jul 2016 #
Blogger: pallavi
इस अभिव्यक्ति की जान अंतिम पंक्तियाँ मेरी नहीं है मैंने उन्हें कहीं पढ़ा था। कहाँ अब यह भी मुझे याद नहीं है। कृपया इस बात को अन्यथा न लें।   'कोमल है कमजोर नहीं तू शक्ति का नाम ही नारी'स्त्री एक कोमल भाव के साथ एक कोमलता का एहसास दिलाता शब्द जिसके पीछे छिपी होती है ए... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   4:06pm 30 Nov 2015 #
Blogger: pallavi
कैसे अजीब होते है वो पल, जब एक इंसान खुद को इतना मजबूर पाता है कि खुल के रो भी नहीं पाता।  तब, जब अंधेरी रात में बिस्तर पर पड़े-पड़े निरर्थक प्रयास करता है उस क्रोध के आवेग को अपने अंदर समा लेने का तब और अधिक तीव्रता से ज़ोर मारते है वह आँसू जिनका अक्सर गले में ही दम घो... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   11:46am 2 Nov 2015 #
Blogger: pallavi
वर्तमान हालातों को मद्दे नज़र रखते हुए जब मैंने मेरी ही एक सहेली से फोन पर बात की और तब जब उसने यह कहा कि यार चिंता और फिक्र क्या होती है यह आज समझ आरहा है मुझे...जब हम बच्चे थे तब तो हमेशा यही लगता था कि माँ नाहक ही इतना चिंता करती है मेरी, सिर्फ इसलिए क्यूंकि मैं एक लड़की हूँ। ... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   7:09am 27 Aug 2014 #
Blogger: pallavi
प्रेम क्या है ! इस बात का शायद किसी के पास कोई जवाब नहीं है। क्योंकि प्रेम की कोई निश्चित परिभाषा भी तो नहीं है। प्रकृति के कण–कण में प्रेम है। साँझ का सूरज से प्रेम,धरती का अंबर से प्रेम,पेड़ का अपनी जड़ों से प्रेम,जहां देखो बस प्रेम ही प्रेम। प्रेम एक शाश्वत सत्य है। प्रभ... Read more
clicks 269 View   Vote 0 Like   12:33pm 22 Feb 2014 #
Blogger: pallavi
अजीब दास्‍तान है ये कहां शुरू कहां खत्मये मंज़िलें हैं कौन सी न वो समझ सके न हम....सच ज़िंदगी भी तो ऐसी ही है। ठीक इसी गीत की पंक्तियों की तरह एक कभी न समझ आनेवाली पहेली। एक लंबा किन्तु बहुत छोटा सा सफर, जिसकी जाने कब साँझ ढल जाये, इसका पता ही नहीं चलता। न जाने कितने भावनात... Read more
clicks 244 View   Vote 0 Like   10:52am 29 Jan 2014 #
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 सुनो जानते हो कल फिर आया था चाँद मेरे द्वारे। मेरे कमरे की खिड़की में टंगे जाली के पर्दे की ओट से चुपके-चुपके देख रहा था वो कल रात मुझेइस बार चाँदनी भी साथ थी उसके कुछ कम उदास नज़र आया वो मुझे कल रात शायद अब मन हलका हो गया है उसका तभी तो चांदनी को भी मना लिया उसने... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   3:38pm 2 Jan 2014 #
Blogger: pallavi
सर्दियों की ठंडी ठंडी सुबह में मैं और मेरे घर का आँगन मध्यम-मध्यम बहती हुई शीत लहर सी पवन जैसे मेरे मन में किसी गोरी के रूप को गढ़ रहे हैजैसे ही हवा के एक झौंके से ज़रा-ज़रा झूमता है एक पेड़तो ऐसा लगता है जैसे किसी सुंदर सलोनी स्त्री के अधरों पर बिखर रही हैएक मीठी सी मुस्... Read more
clicks 310 View   Vote 0 Like   9:56am 18 Dec 2013 #
Blogger: pallavi
कल रात मैंने चाँद को देखा। सूने आकाश में उदास बहुत उदास सा जान पड़ा वो मुझे कल रात। ऐसा लगा जैसे बहुत कुछ कहना चाहता है वो मुझ से, वरना इस कड़कड़ाती ठंड की ठिठुरती रात में भला वो अपनी पूरी जगमाहट लिए मेरी खिड़की पर क्या कर रहा था। शायद बहुत कुछ था उसके पास, जो वो कहना चाहता था मु... Read more
clicks 286 View   Vote 0 Like   9:45am 11 Dec 2013 #
Blogger: pallavi
सर्द हवाओं में ठिठुरते एहसास और तुम इन दिनों बहुत सर्दी है यहाँ,  एकदम गलन वाली ठंड के जैसी ठंड पड़ रही हैजिसमें कुछ नहीं बचतासब गल के पानी हो जाना चाहता हैजैसे रेगिस्तान में रेत के तले सब सूख जाता है ना बिलकुल वैसे ही यहाँ की ठंड में भी कुछ नहीं बचता  यहाँ तक के खुद ... Read more
clicks 260 View   Vote 0 Like   5:10pm 4 Dec 2013 #
Blogger: pallavi
    सर्द हवाओं में मेरे साथ साथ चलतीदूर बहुत दूर तलक मेरे साथ सूनी लंबी सड़कजिस पर बिछे हैन जाने कितने अनगिनत लाखो करोड़ोंसूखे पत्ते नुमा ख्यालजिनपर चलकर कदमों से आती हुई पदचापऐसी महसूस होती है, मानो यह कोई पदचाप नहींबल्कि किसी गोरी के पैरों की पायल हो कोईजिसकी मधु... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   2:13pm 18 Nov 2013 #
Blogger: pallavi
कभी देखा सुना या महसूस भी किया है तन्हाइयों को खामोशी की चादर लपेटे एक चुप सी तन्हाई जो दिल और दिमाग के गहरे समंदर से निकली हुई एक लहर हो कोई जब कभी दिलो और दिमाग की जद्दोजहद के बीच शून्य में निहारती है आंखे तो जैसे हर चीज़ में प्राण से फूँक जाते है और ज़रा-ज़रा स... Read more
clicks 268 View   Vote 0 Like   9:18pm 24 Sep 2013 #
Blogger: pallavi
ख़याली पुलाव कितने स्वादिष्ट होते है ना झट पट बन जाते हैइतनी जल्दी तो इंसटेंट खाना भी नहीं बन पाता मगर यह ख़याली पुलाव तो, जब तब, यहाँ वहाँ, कहीं भी आसानी से उपलब्ध हो जाते है बस एक वजह चाहिए होती है इन्हें पकाने की वो मिली नहीं कि पुलाव तैयार है.................................................. Read more
clicks 267 View   Vote 0 Like   5:51pm 29 Aug 2013 #
Blogger: pallavi
निंद्रा में खोई थी मोहनस्वप्न सजीले देख रही थीभटक रही थी उन गलियों मेंचित चोर रहे तुम वहींकितना मोहक था सब कुछजहां नाच रहा था मोरहरियाली ही हरियाली थीसब थे भाव बिहोरन कोई दुख था, न कोई पीड़ान वियोग का छोर,अब देखो तो कुछ न बाकीविरह पसरे चहुं ओरनहीं रहे अब नदिया सागरबिखर... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   4:58pm 5 Aug 2013 #
Blogger: pallavi
देखो ना सावन आने वाला हैयूं तो सावन का महीना लग गया हैमगर मैं भला कैसे मान लूँ कि सावन आगया है क्यूंकि प्रिय ऐसा तो ना था मेरा सावन जैसा अब के बरस आया है  मेरे मन की सुनी धरती  तो अब भी प्यासी है, उस एक सावन की बरसात के लिए जिसकी मनोरम छवि अब भी रह रह कर उभरती हैमे... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   8:51am 25 Jul 2013 #
Blogger: pallavi
कुछ मत सोचो न कोई रचना, ना ही कवितामैं यह सोचूँ काश के तुम बन जाओ कविता जब चाहे जब तुमको देखूँ जब चाहे जब पढ़ लूँ तुमको ऐसी हो रसपान कविता हो जिसमें चंदन की महक पर  लोबान सी महके वो कविता हो जिसमें गुरबानी के गुण रहती हो गिरजा घर में वो, प्रथनाओं में लीन क... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   7:26am 20 Jul 2013 #
Blogger: pallavi
तुम, तुम प्यार की बात कर रहे हो सुनो तुम्हारे मुंह से यह प्यार व्यार की बातें अच्छी नहीं लगती (जानेमन)  तुम जानते भी हो प्यार होता क्या है ? प्यार ज़िंदगी में केवल एक बार होता है दोस्त बारबार नहीं,   तो भला फिर तुम्हें प्यार करने का हक़ ही कहाँ रह जाता हैप्यार करने वाले कभ... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   5:07pm 21 Jun 2013 #
Blogger: pallavi
मेरा नाम है गंगाहाँ हूँ, मैं ही हूँ गंगावो गंगाजिसे तुम नेअपने सर माथे लगायाबच्चों को मेरा नामलेले कर नहलाया,जो कुछ भी मिला सकते थेतुम, तुम ने मेरे आँचलमें वो सब कुछ मिलायान सोचा एक बार भीमेरे लिए कि गंदगीसे मुझे भी हो सकती हैतकलीफ़, असहनिए पीड़ायह कहाँ का इंसाफ हैपाप त... Read more
clicks 288 View   Vote 0 Like   5:10pm 19 Jun 2013 #
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"फूल गुलाब का लाखों में हजारों में चेहरा जनाब का" कितना आसान होता है ना, किसी को गुलाब कह देनानिर्मल, कोमल, खुशबू से लबरेज़ महकता हुआ गुलाबकिसी के होंटों गुलाब, तो किसी के गालों पर गुलाबऔर हो भी क्यूँ नाआखिर यूं हीं थोड़ी न फूलों का राजा कहलाता है गुलाबमगर किसी को गुल... Read more
clicks 315 View   Vote 0 Like   3:47pm 11 Jun 2013 #
Blogger: pallavi
पल पल बदलते रहने का नाम है ज़िंदगीआज सुबह तो कल शाम है ज़िंदगीअपने ग़म में तो सभी जीते हैदूसरों के ग़म को जीने का नाम है ज़िंदगीखूद अपनी खुशी में हंस लिए तो क्या बड़ा कियारोते हुए बच्चे को हँसाने का नाम है ज़िंदगीचढ़ते सूरज के साथ आगाज़ का नाम है ज़िंदगीनित नए पल मिलने ... Read more
clicks 321 View   Vote 0 Like   9:56am 9 Jun 2013 #
Blogger: pallavi
 समंदर का दर्द तो सभी महसूस करते है लेकिन क्या कभी किसी ने उसके किनारे पड़ी रेत के दर्द को भी महसूस किया है शायद नहीं,क्यूंकि लोगों को तो अक्सर सिर्फ आँसू बहाने वालों का ही दर्द दिखाई देता है मौन रहकर जो दर्द सहे वह भला कब किसको दिखाई दिया है कुछ वैसा ही हाल है उस रेत का ज... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   3:24pm 5 Jun 2013 #
Blogger: pallavi
ज़िंदगी की सारी खुशियाँ जैसे मौन हो कर रह गयी वो छोटे-छोटे खुशनुमा पल वो गरमियों की छुट्टियों में चंगे अष्टे खेलनावो रातों को सितारों की चादर तले देखना वो करना बात कुछ आज की, कुछ कल के सपनों को देखना वो लगाना आँगन में झाड़ू और पानी का फिर फेंकना प्यासे पेड़ों को पानी दे, वो ... Read more
clicks 295 View   Vote 0 Like   2:15pm 25 May 2013 #
Blogger: pallavi
आज क्या लिखूँ कि मन उलझा-उलझा सा है रास्ते पर चलते हुए जब छतरी के ऊपर गिरती पानी की बूँदें शोर मचाती है तो कभी उस शोर को सुन मन मयूर मचल उठता है और तब मेरे दिल से निकलता है बस एक यही गीत...."रिमझिम गिरे सावन, मचल-मचल जाये मन, भीगे आज इस मौसम,लागि कैसी यह अगन" यूं तो यह बारिश का ... Read more
clicks 277 View   Vote 0 Like   9:11am 12 Mar 2013 #
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