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सही में औरतें बहुत ही बेवकूफ होती हैहजारों ताने उल्हाने, मार पीट सहकर भी उम्मीद का दामन जो नहीं छोड़ पाती यह औरतेंन जाने कितनी बार टूट -टूटकर बिखर जाने के बाद भी खुद को समेट जो लेती हैं यह औरतेंन जाने कहाँ से एक नए अंकुर की तरह हर रोज़ पुनः जन्म लेती हैं यह औरतेंएक नयी आशा के...
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  April 15, 2017, 11:05 am
गुज़र रही है ज़िंदगी कुछ इस तरह कि जैसे इसे किसी की कोई चाहत ही नहींकभी दिल है तो कभी दिमाग है ज़िंदगी कभी एक नदिया तो कभी एक किताब है ज़िंदगीन मंजिल का पता है ना राह की कोई खबर न डूबने का डर है न उबरने की कोई फिकर  शब्द भी खामोश है और कलम भी बेज़ुबान है बस समय की धारा में ब...
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  April 10, 2017, 7:48 pm
कभी रुकती संभलती, कभी ज़रा सी ठहरती तो कभी डूबती उबरती कुछ यूं ही हवा सी बह रही है ज़िंदगी न समय का पता है, न मंज़िल की कोई खबर गुज़र गया जो कल जहन में आता नहीं आज में जीने को जी चाहता है फिर न जाने क्यूँ  ? कैसे अचानक ही आने वाले कल की चिंता सिर उठती हैफिर ज़रा देर को ...
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  July 23, 2016, 5:27 pm
इस अभिव्यक्ति की जान अंतिम पंक्तियाँ मेरी नहीं है मैंने उन्हें कहीं पढ़ा था। कहाँ अब यह भी मुझे याद नहीं है। कृपया इस बात को अन्यथा न लें।   'कोमल है कमजोर नहीं तू शक्ति का नाम ही नारी'स्त्री एक कोमल भाव के साथ एक कोमलता का एहसास दिलाता शब्द जिसके पीछे छिपी होती है ए...
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  November 30, 2015, 9:36 pm
कैसे अजीब होते है वो पल, जब एक इंसान खुद को इतना मजबूर पाता है कि खुल के रो भी नहीं पाता।  तब, जब अंधेरी रात में बिस्तर पर पड़े-पड़े निरर्थक प्रयास करता है उस क्रोध के आवेग को अपने अंदर समा लेने का तब और अधिक तीव्रता से ज़ोर मारते है वह आँसू जिनका अक्सर गले में ही दम घो...
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  November 2, 2015, 5:16 pm
वर्तमान हालातों को मद्दे नज़र रखते हुए जब मैंने मेरी ही एक सहेली से फोन पर बात की और तब जब उसने यह कहा कि यार चिंता और फिक्र क्या होती है यह आज समझ आरहा है मुझे...जब हम बच्चे थे तब तो हमेशा यही लगता था कि माँ नाहक ही इतना चिंता करती है मेरी, सिर्फ इसलिए क्यूंकि मैं एक लड़की हूँ। ...
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  August 27, 2014, 12:39 pm
प्रेम क्या है ! इस बात का शायद किसी के पास कोई जवाब नहीं है। क्योंकि प्रेम की कोई निश्चित परिभाषा भी तो नहीं है। प्रकृति के कण–कण में प्रेम है। साँझ का सूरज से प्रेम,धरती का अंबर से प्रेम,पेड़ का अपनी जड़ों से प्रेम,जहां देखो बस प्रेम ही प्रेम। प्रेम एक शाश्वत सत्य है। प्रभ...
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  February 22, 2014, 6:03 pm
अजीब दास्‍तान है ये कहां शुरू कहां खत्मये मंज़िलें हैं कौन सी न वो समझ सके न हम....सच ज़िंदगी भी तो ऐसी ही है। ठीक इसी गीत की पंक्तियों की तरह एक कभी न समझ आनेवाली पहेली। एक लंबा किन्तु बहुत छोटा सा सफर, जिसकी जाने कब साँझ ढल जाये, इसका पता ही नहीं चलता। न जाने कितने भावनात...
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  January 29, 2014, 4:22 pm
 सुनो जानते हो कल फिर आया था चाँद मेरे द्वारे। मेरे कमरे की खिड़की में टंगे जाली के पर्दे की ओट से चुपके-चुपके देख रहा था वो कल रात मुझेइस बार चाँदनी भी साथ थी उसके कुछ कम उदास नज़र आया वो मुझे कल रात शायद अब मन हलका हो गया है उसका तभी तो चांदनी को भी मना लिया उसने...
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  January 2, 2014, 9:08 pm
सर्दियों की ठंडी ठंडी सुबह में मैं और मेरे घर का आँगन मध्यम-मध्यम बहती हुई शीत लहर सी पवन जैसे मेरे मन में किसी गोरी के रूप को गढ़ रहे हैजैसे ही हवा के एक झौंके से ज़रा-ज़रा झूमता है एक पेड़तो ऐसा लगता है जैसे किसी सुंदर सलोनी स्त्री के अधरों पर बिखर रही हैएक मीठी सी मुस्...
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  December 18, 2013, 3:26 pm
कल रात मैंने चाँद को देखा। सूने आकाश में उदास बहुत उदास सा जान पड़ा वो मुझे कल रात। ऐसा लगा जैसे बहुत कुछ कहना चाहता है वो मुझ से, वरना इस कड़कड़ाती ठंड की ठिठुरती रात में भला वो अपनी पूरी जगमाहट लिए मेरी खिड़की पर क्या कर रहा था। शायद बहुत कुछ था उसके पास, जो वो कहना चाहता था मु...
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  December 11, 2013, 3:15 pm
सर्द हवाओं में ठिठुरते एहसास और तुम इन दिनों बहुत सर्दी है यहाँ,  एकदम गलन वाली ठंड के जैसी ठंड पड़ रही हैजिसमें कुछ नहीं बचतासब गल के पानी हो जाना चाहता हैजैसे रेगिस्तान में रेत के तले सब सूख जाता है ना बिलकुल वैसे ही यहाँ की ठंड में भी कुछ नहीं बचता  यहाँ तक के खुद ...
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  December 4, 2013, 10:40 pm
    सर्द हवाओं में मेरे साथ साथ चलतीदूर बहुत दूर तलक मेरे साथ सूनी लंबी सड़कजिस पर बिछे हैन जाने कितने अनगिनत लाखो करोड़ोंसूखे पत्ते नुमा ख्यालजिनपर चलकर कदमों से आती हुई पदचापऐसी महसूस होती है, मानो यह कोई पदचाप नहींबल्कि किसी गोरी के पैरों की पायल हो कोईजिसकी मधु...
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  November 18, 2013, 7:43 pm
कभी देखा सुना या महसूस भी किया है तन्हाइयों को खामोशी की चादर लपेटे एक चुप सी तन्हाई जो दिल और दिमाग के गहरे समंदर से निकली हुई एक लहर हो कोई जब कभी दिलो और दिमाग की जद्दोजहद के बीच शून्य में निहारती है आंखे तो जैसे हर चीज़ में प्राण से फूँक जाते है और ज़रा-ज़रा स...
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  September 25, 2013, 2:48 am
ख़याली पुलाव कितने स्वादिष्ट होते है ना झट पट बन जाते हैइतनी जल्दी तो इंसटेंट खाना भी नहीं बन पाता मगर यह ख़याली पुलाव तो, जब तब, यहाँ वहाँ, कहीं भी आसानी से उपलब्ध हो जाते है बस एक वजह चाहिए होती है इन्हें पकाने की वो मिली नहीं कि पुलाव तैयार है..................................................
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  August 29, 2013, 11:21 pm
निंद्रा में खोई थी मोहनस्वप्न सजीले देख रही थीभटक रही थी उन गलियों मेंचित चोर रहे तुम वहींकितना मोहक था सब कुछजहां नाच रहा था मोरहरियाली ही हरियाली थीसब थे भाव बिहोरन कोई दुख था, न कोई पीड़ान वियोग का छोर,अब देखो तो कुछ न बाकीविरह पसरे चहुं ओरनहीं रहे अब नदिया सागरबिखर...
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  August 5, 2013, 10:28 pm
देखो ना सावन आने वाला हैयूं तो सावन का महीना लग गया हैमगर मैं भला कैसे मान लूँ कि सावन आगया है क्यूंकि प्रिय ऐसा तो ना था मेरा सावन जैसा अब के बरस आया है  मेरे मन की सुनी धरती  तो अब भी प्यासी है, उस एक सावन की बरसात के लिए जिसकी मनोरम छवि अब भी रह रह कर उभरती हैमे...
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  July 25, 2013, 2:21 pm
कुछ मत सोचो न कोई रचना, ना ही कवितामैं यह सोचूँ काश के तुम बन जाओ कविता जब चाहे जब तुमको देखूँ जब चाहे जब पढ़ लूँ तुमको ऐसी हो रसपान कविता हो जिसमें चंदन की महक पर  लोबान सी महके वो कविता हो जिसमें गुरबानी के गुण रहती हो गिरजा घर में वो, प्रथनाओं में लीन क...
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  July 20, 2013, 12:56 pm
तुम, तुम प्यार की बात कर रहे हो सुनो तुम्हारे मुंह से यह प्यार व्यार की बातें अच्छी नहीं लगती (जानेमन)  तुम जानते भी हो प्यार होता क्या है ? प्यार ज़िंदगी में केवल एक बार होता है दोस्त बारबार नहीं,   तो भला फिर तुम्हें प्यार करने का हक़ ही कहाँ रह जाता हैप्यार करने वाले कभ...
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  June 21, 2013, 10:37 pm
मेरा नाम है गंगाहाँ हूँ, मैं ही हूँ गंगावो गंगाजिसे तुम नेअपने सर माथे लगायाबच्चों को मेरा नामलेले कर नहलाया,जो कुछ भी मिला सकते थेतुम, तुम ने मेरे आँचलमें वो सब कुछ मिलायान सोचा एक बार भीमेरे लिए कि गंदगीसे मुझे भी हो सकती हैतकलीफ़, असहनिए पीड़ायह कहाँ का इंसाफ हैपाप त...
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  June 19, 2013, 10:40 pm
"फूल गुलाब का लाखों में हजारों में चेहरा जनाब का" कितना आसान होता है ना, किसी को गुलाब कह देनानिर्मल, कोमल, खुशबू से लबरेज़ महकता हुआ गुलाबकिसी के होंटों गुलाब, तो किसी के गालों पर गुलाबऔर हो भी क्यूँ नाआखिर यूं हीं थोड़ी न फूलों का राजा कहलाता है गुलाबमगर किसी को गुल...
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  June 11, 2013, 9:17 pm
पल पल बदलते रहने का नाम है ज़िंदगीआज सुबह तो कल शाम है ज़िंदगीअपने ग़म में तो सभी जीते हैदूसरों के ग़म को जीने का नाम है ज़िंदगीखूद अपनी खुशी में हंस लिए तो क्या बड़ा कियारोते हुए बच्चे को हँसाने का नाम है ज़िंदगीचढ़ते सूरज के साथ आगाज़ का नाम है ज़िंदगीनित नए पल मिलने ...
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  June 9, 2013, 3:26 pm
 समंदर का दर्द तो सभी महसूस करते है लेकिन क्या कभी किसी ने उसके किनारे पड़ी रेत के दर्द को भी महसूस किया है शायद नहीं,क्यूंकि लोगों को तो अक्सर सिर्फ आँसू बहाने वालों का ही दर्द दिखाई देता है मौन रहकर जो दर्द सहे वह भला कब किसको दिखाई दिया है कुछ वैसा ही हाल है उस रेत का ज...
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  June 5, 2013, 8:54 pm
ज़िंदगी की सारी खुशियाँ जैसे मौन हो कर रह गयी वो छोटे-छोटे खुशनुमा पल वो गरमियों की छुट्टियों में चंगे अष्टे खेलनावो रातों को सितारों की चादर तले देखना वो करना बात कुछ आज की, कुछ कल के सपनों को देखना वो लगाना आँगन में झाड़ू और पानी का फिर फेंकना प्यासे पेड़ों को पानी दे, वो ...
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  May 25, 2013, 7:45 pm
आज क्या लिखूँ कि मन उलझा-उलझा सा है रास्ते पर चलते हुए जब छतरी के ऊपर गिरती पानी की बूँदें शोर मचाती है तो कभी उस शोर को सुन मन मयूर मचल उठता है और तब मेरे दिल से निकलता है बस एक यही गीत...."रिमझिम गिरे सावन, मचल-मचल जाये मन, भीगे आज इस मौसम,लागि कैसी यह अगन" यूं तो यह बारिश का ...
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  March 12, 2013, 2:41 pm
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