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Blog: कथा कहानी

Blogger: Kajal Kumar
यार सोचता हूं,कलम प्यार लिखती है.कहीं मैं मोहब्बत में तो नहीं ! 00000... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   1:00am 2 Jul 2017
Blogger: Kajal Kumar
वह गांव से शहर आया था, कुछ छोटा-मोटा काम खोजता हुआ. शुरू-शुरू में ख़र्चा बांट कर किसी के साथ रहने लगा. उधर, किसी पक्की नौकरी की कोशिश भी करता रहा. एक दिन, एक बड़े कारखाने में बात बन ही गर्इ, नौकरी पक्की तो नहीं थी पर यह पता चला कि अगर पांच साल तक मेहनत से काम करे तो ... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   11:16am 26 Jan 2017
Blogger: Kajal Kumar
उसकी शादी हुए कुछ समय हो गया था. पर गोद अभी नहीं भरी थी. यूं तो इस बात पर किसी का कोर्इ ख़ास ध्यान नहीं था पर उसकी सास को इस बात का मलाल था और, गाहे-बगाहे इस बारे में कुछ टेढ़ा सा सुना ही देती थी. उनके घरों में, इन मामलों में डॉक्‍टरों की सलाह लेना ज़रा सही नहीं माना जाता था. यह ... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   10:47pm 9 Dec 2016
Blogger: Kajal Kumar
वहभार्इ-बहनोंमेंसबसेबड़ीथी. बचपनमेंही एकआदिवासीगांवसेशहरआगर्इथी.  अपनेबचपनमें, दूसरेपरिवारोंकेबच्चेसंभालनेकाकामकिया. बड़ीहोगर्इतोघरोंमेंनौकरानीकाकामकिया. लोगउसेमेडकहतेथे. हरमहीनेगांवमनिऑर्डरभेजती. गांवजानातभीहोताथाजबकोर्इशादी-विवाहहो. एकबारगांवग... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   9:19am 4 Jul 2016
Blogger: Kajal Kumar
उस महानगर के बीचो-बीच एक बहुत बड़े चाैराहे के चारों तरफ वहां का बाज़ार बसा था. बाज़ार बस बाज़ार ही नहीं था, उसमें तमाम तरह के दफ़्तर भी थे. उस चौराहे पर पता नहीं कौन लोग सुबह मुंह-अंधेरे कुछ दाना डाल जाते, आैर कबूतर सारा दिन उसे चुगते रहते. चौराहे पर ट्रैफ़िक का बहुत ज़ोर र... Read more
clicks 314 View   Vote 0 Like   11:12pm 15 Mar 2016
Blogger: Kajal Kumar
जब जब गांव आती है खुदाई की  मशीन,डर जाता है खेतसहमता है चूल्‍हा हंसता है ताला.पगडंडी-से पैण्‍डुलम के दूसरे सि‍रे पर बंधा शहर ठठाता हैबुलाता है.बस कुछ दि‍न और...मुटा जाता है शहरडर जाता है खेतमर जाता है खेत.00000... Read more
clicks 297 View   Vote 0 Like   5:22am 30 Dec 2015
Blogger: Kajal Kumar
उसकी उम्र तीन-चार साल थी. बाजार के कोने में एक दुकान बन रही थी जहां उसके मां-वाप ईंटें ढोने का काम कर रहे थे. वह वहीं अपने मां-बाप के आस-पास खेलता रहता. पास की दुकानों पर लोग आते-जाते, वह उन्‍हें देखता रहता. आने-जाने वालों के साथ बच्‍चे भी होते वह उन बच्‍चों को भी देखता. और देख... Read more
clicks 359 View   Vote 0 Like   2:32am 13 Nov 2015
Blogger: Kajal Kumar
लाला बहुत परेशान था. उसने जगह-जगह फ़ोन करने के बाद फ़ैसला कि‍या कि‍ थाने जाना ही ठीक रहेगा. थानेदार को मि‍ला और अपनी आपबीती सुनाई कि‍ -‘साहब, मेरा सेल्‍समैन रामू मेरा तेइस लाख रूपया लेकर भाग गया. दो नंबर का पैसा नहीं थासाहब, तीन दि‍न की बि‍क्री का पैसा था. बैंक के सभी काम व... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   1:57am 2 Nov 2015
Blogger: Kajal Kumar
गांव में दोनों के घर साथ-साथ थे. पर दुश्‍मनी पुश्‍तैनी थी, कि‍सी को याद नहीं था कि‍ दुश्‍मनी कि‍स बात पर और कब से चली आ रही थी. दोनों घरों में आने वाली नई बहुएं भी बि‍ना कहे ही शीतयुद्ध की पैठ समझ जाती और समय के साथ-साथ वे भी अपने-अपने दायरे बना लेती.एक दि‍न, उन्‍हीं में से एक ... Read more
clicks 273 View   Vote 0 Like   11:55am 25 Sep 2015
Blogger: Kajal Kumar
वह कड़े जीवट वाला सीधा सा इन्‍सान था. नौकरी की खोज में गांव से शहर आया था. पढ़ने का शौक उसे पत्रकारि‍ता में ले गया. ईमानदारी से नौकरी की और उतनी तरक्‍की भी पायी जि‍तनी एक ईमानदार को मि‍लती है, इसलि‍ए पूरी ज़िंदगी तंगी में गुजारी. पर उसे कभी कि‍सी से कोई शि‍कायत नहीं रही. कि... Read more
clicks 281 View   Vote 0 Like   4:14pm 16 Sep 2015
Blogger: Kajal Kumar
वह आढ़ति‍ये का इकलौता बेटा था. पि‍ता का, सब्‍ज़ी की आढ़त का अच्‍छा-ख़ासा काम था. मंडी में, कई सब्‍ज़ि‍यों और फलों के किंग माने जाते थे. बड़ी सी कोठी थी. कारें थीं. कई प्रापर्टि‍यां थीं. लोगों पर लाखों का उधार था. पि‍ता की सलाह थी कि‍ वह यही पुश्‍तैनी काम संभाल ले, पर उसे पि‍त... Read more
clicks 287 View   Vote 0 Like   7:27am 3 Sep 2015
Blogger: Kajal Kumar
दूर कहीं कि‍सी देश में एक गांव था, दीन-दुनि‍या की बातों से अछूता. गांव, बाहर की दुनि‍या से एकदम कटा हुआ था. ऊपर खुला आसमान और नीचे हरी धरती ही गांव वालों की दुनि‍या थे.  गांव में हर तरह के लोग थे. अलग-अलग धर्मों से मि‍लते-जुलते से उनके तरह-तरह के वि‍श्‍वास थे. अपनी ज़रूरत की ... Read more
clicks 292 View   Vote 0 Like   5:35am 1 Sep 2015
Blogger: Kajal Kumar
उसे लि‍खने का बहुत शौक था. नौकरी तो थी पर उसमें, लेखक होने के बावजूद कोई इज्‍ज़त नहीं थी. कोई उसकी इस बात को भाव नहीं देता था कि‍ वह लेखक था. वह बचपन से ही कवि‍ताएं लि‍खता आ रहा था. उसे कवि‍ के बजाय लेखक कहलाना पसंद था. उसने अपनी कवि‍ताओं की डायरि‍यां बड़ी संभाल के रखी हुई थी... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   2:02pm 23 Aug 2015
Blogger: Kajal Kumar
उसकी उमर बहुत हो गई थी. पर फि‍र भी घर के नज़दीक ही एक डॉक्‍टर के छोटे से प्राइवेट क्‍लीनि‍क में सफाई-पोचे का काम करती थी. घर पर कुछ ख़ास काम नहीं होता था सो, सुबह-सवेरे पहुंच जाती, धीरे-धीरे आराम से काम नि‍पटाती, पूरा दि‍न वहीं रहती और फि‍र शाम को ही घर जाती. एक दि‍न सुबह-सुबह ... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   12:08pm 22 Aug 2015
Blogger: Kajal Kumar
वह बहुत बड़ा लीडर था. और यह, उस लीडर के मातहत एक छोटा सा मुलाजि‍म. लीडर एक दि‍न इस मुलाजि‍म के यहां दौरे पर आया. साथ चल रहे लोगों पर रौब गांठने की गर्ज़ से, कुछ बहाना बना कर उसने मातहत को एक थप्‍पड़ जड़ दि‍या. मातहत ने केस दर्ज़ करा दि‍या. मामला चलता रहा. साल-महीने बीतते रहे.एक... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   12:30am 1 Aug 2015
Blogger: Kajal Kumar
वह गांव से शहर आकर एक सि‍क्‍योरि‍टी कंपनी में गार्ड लग गया था. रि‍सैटलमेंट कॉलोनी में कि‍राए का एक कमराभी सही कर लि‍या था. शुरू-शुरू में उसे रात की ड्यूटी मि‍लती. आमतौर से यहां-वहां ग़ुप हाउसिंग सोसायटि‍यों के गैट पर चौकीदारी करता. रात को सीनि‍यर गार्ड सोता और गेट खोलने... Read more
clicks 249 View   Vote 0 Like   12:30am 30 Jul 2015
Blogger: Kajal Kumar
उस शहर की सड़क के फुटपाथ पर तीन छोटू रहते थे, बड़ा छोटू, छोटा छोटू और बि‍चका छोटू. यही उनके नाम थे. पूरा दि‍न यहां-वहां कूड़े में से, तीनों कुछ-कुछ काम की चीज़ें चुनते रहते और शाम को एक कबाड़ी के यहां उन्‍हें बेचकर चार पैसे कमा लेते. फि‍र खा-पी कर रात को वहीं फ़ुटपाथ से सटी दी... Read more
clicks 297 View   Vote 0 Like   12:30am 29 Jul 2015
Blogger: Kajal Kumar
वह बचपन से ही माता पि‍ता के साथ शहर में रह कर पला बढ़ा. और फि‍र आगे की पढ़ाई करने के लि‍ए वह अमरीका चला गया था. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अब वहीं नौकरी कर रहा था और उसे ग्रीन कार्ड भी मि‍ल गया था. वह लंबे समय बाद भारत लौटा था और आजकल समय नि‍काल कर अपने पुश्तैनी गांव आया हुआ था. ... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   6:15am 26 Jul 2015
Blogger: Kajal Kumar
'अजीसुनतेहो, सेफ़्टीपिननहींमिलरहीं. कहींदेखीं?’'तुमनेहीइधर-उधररखदीहोंगी. ध्‍यानसेढूंढो.’उसनेबुदबुदातेहुएड्रॉअरऔरअल्मारि‍यांबारी-बारीसेखोलनीशुरू कर दीं – ‘दि‍लकरताहै, आजहीकामसेनि‍कालदूंइसे. जबदेखोतबकुछनकुछचुपचापउठाकरलेजातीहै. औरअगरपूछोतोऐसेएक्‍टिंगक... Read more
clicks 249 View   Vote 0 Like   6:54am 24 Jul 2015
Blogger: Kajal Kumar
उसे अपनी ज़िंदगी से यूं तो कोई शि‍कायत नहीं थी पर फि‍र भी बहुत से ऐसे सवाल थे जि‍नके जवाब उसके पास नहीं थे; कि‍ताबें थीं कि‍ उनमें अलग-अलग तरह की बातें लि‍खी मि‍लतीं. और उन कि‍ताबों से भी उठते दूसरे सवालों के जवाब देने वाला फि‍र कोई न होता. इसी ऊहापोह में उसने एक बाबा जी का... Read more
clicks 260 View   Vote 0 Like   2:13am 23 Jul 2015
Blogger: Kajal Kumar
उसे अपनी ज़िंदगी से यूं तो कोई शि‍कायत नहीं थी पर फि‍र भी बहुत से ऐसे सवाल थे जि‍नके जवाब उसके पास नहीं थे; कि‍ताबें थीं कि‍ उनमें अलग-अलग तरह की बातें लि‍खी मि‍लतीं. और उन कि‍ताबों से भी उठते दूसरे सवालों के जवाब देने वाला फि‍र कोई न होता. इसी ऊहापोह में उसने एक बाबा जी का... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   2:13am 23 Jul 2015
Blogger: Kajal Kumar
बहुत भागदौड़ के बाद एक दि‍न, वह एक बहुत बड़ी सरकारी कंपनी में छोटा सा बाउ बन गया. उसे बाबू होने से शि‍कायत नहीं था, पर छोटा-बाबू होना उसे रास न आता था. उसने यूनि‍यनबाजी कर ली और जल्‍दी ही यूनि‍यन का प्रधान भी हो गया. कंपनी ने नाममात्र के लि‍ए उसे, लोगों की कम्‍प्‍लेंटें लेन... Read more
clicks 273 View   Vote 0 Like   7:58am 14 Jul 2015
Blogger: Kajal Kumar
वह स्‍कूल से नि‍कल कर कॉलेज आया तो उसकी ज़िंदगी में मानो पंख लग गए. नए दोस्त बने. कोई पूछने वाला नहीं, कोई बंदि‍श नहीं. जहां दि‍ल कि‍या वहां घूमे, जो चाहा सो कि‍या. देखते ही देखते तीन साल यूं ही बीत गए. सब ग्रेजुएट हो गए. कुछ नौकरि‍यों में चले गए कुछ आगे पढ़ने लगे. कुछ ने अपने ... Read more
clicks 270 View   Vote 0 Like   9:59pm 5 Jul 2015
Blogger: Kajal Kumar
उसे शहर में नौकरी मि‍ली तो गांव से आकर यहीं बस गया. साथ में काम करने वाली एक लड़की से उसे प्‍यार हो गया. दोनों वि‍वाह कर, कि‍राए के मकान में रहने लगे. एक बेटा और बेटी हुए. उनकी खुशि‍यां चौगुनी हो गईं. धीरे धीरे उनकी दुनि‍या ही बदल गई. उनकी ज़िंदगी बच्‍चों के चारों ओर घूमने लग... Read more
clicks 299 View   Vote 0 Like   2:28am 3 Jul 2015
Blogger: Kajal Kumar
गांव में उन दोनों के परि‍वार, आपस में दुश्‍मनी के ही कारण जाने जाते थे. दोनों ही परि‍वार कोई बहुत अमीर नहीं थे पर फि‍र भी उन दोनों परि‍वारों में पुश्‍तैनी दुश्‍मनी अमीरी से कम न थी. दुश्‍मनी कि‍स बात पर चली आ रही थी यह अब कि‍सी को याद तक न था. उस दि‍न भी, फि‍र कि‍सी बात पर झग... Read more
clicks 298 View   Vote 0 Like   2:58pm 24 May 2015
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