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Blog: यह देस विराना, हे सखी

Blogger: sharad
हालात अजीब ही बन पड़े हैं...इस निराशा के दौर में शायद ही कोई यथार्थवादी होगा जिसमे कुछ बदलने की जरा भी हिम्मत बची हो...तन तो अब भी वही है यहाँ लेकिन मन जैसे जल पड़ा है किसी शीतल सपने की छांह बुनते-बुनते......लुट-पात, खूनखराबे और भ्रष्टाचार के इस दलदल में है कोई जगह जो विषाक्त न हो...... Read more
clicks 239 View   Vote 0 Like   6:13pm 13 Jun 2012
Blogger: sharad
आज बगीचे में देखा था मैंने एक तितलीऔर उसके पीछे भागती सिंड्रेलाबेताब उसे छूने को, निकट जाकर देखने को, महसूस करने को.याद आया मुझे एक ऐसा दिन भी जब यह तितली छोटी थी,अनाकर्षक, घिनौनी, एक 'कैटरपिलर' के जैसे पत्तों पर पड़ी होती थीतब इसे देखकर डर गयी थी सिंड्रेला!!!यूँ ही कभी मैं भ... Read more
clicks 245 View   Vote 0 Like   3:26pm 12 Apr 2012
Blogger: sharad
अबकी इक अच्छा स्वप्न देखा था मैंनेदेखा था एक नया सूरज, एक नया आसमां,कुछ नए पेड़ और ढेर सारे पंछी.एक सुन्दर सुहाना सपना जहाँ कोई ग़म नहीं।कलकल करती एक नदी और किनारे परनाचते कई मोरउफ़क पर उजले बादल और जमीं पर हरियाली ही हरियालीनज़रें घुमाकर देखा तो हर जगह तुम ही तुमअचानक ... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   2:07pm 30 Mar 2012
Blogger: sharad
याद है एक बार, साथ बैठी थी तुम मेरे और एक कोरे कागज पर कोई नज़्म लिखना चाहा था मैंनेशब्द ही कम पड़ गए थे शायद या खो गया थामैं तुम्हारी आँखों के उन अनकहे शब्दों में, कुछभी ना लिख पाया और यूँ ही चली गयी तुमआकर देखो जरा, एक नज़्म लिखी है मैंनेअपनी कितनी ही हसरतें, कितनी ही ख्व... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   2:34pm 4 Mar 2012
Blogger: sharad
मेरे आँगन में एक आम का पेड़ हैबचपन में झूले डालकर खेला था मैं इनपरकहते हैं अब कुछ बीमार सा हो गया है यह,नहीं लगते अब इसपर कोई फलकाट डालेंगे इसे, आंगन में थोड़ी जगह जो मिलेगी!नहीं झूमेंगी अब इसकी पत्तियां और नहीं खेलेगी उनके बिचमेरे बचपन की याद.उड़ जायेंगे कुछ पंछी,मर जाए... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   8:23am 2 Mar 2012
Blogger: sharad
अपनी hi mad me dub rahe,malum नहीं क्या क्या हाराjo शीतल छाँव चुनी तुमने उसमे झुलसा है जग सारा मैं लाख बुझाऊं अंगारे,मेरी हस्ती का मोल नहींaur tu bas ik शमसीर चला दे तेरे जलवे aalamaara ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   5:42pm 29 Dec 2011
Blogger: sharad
मुझे याद है मेरा बचपनजब ग़मों से बेख़ौफ़ हर चाल में दुनिया जितता था मैं.किसी तामीर की हसरत ना थी, ना किसी दिखावे की आकांक्षा.इस बड़े से जहान में छोटी उड़ानें भरता था एक आज़ाद सेगौरैये की तरह.या की हरे मैदानों में दौड़ता जाता था बेफिक्र,बेकुफ्र.आज कुछ कदम चलना भी मुश्किल ... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   3:53pm 20 Dec 2011
Blogger: sharad
मेरे आँगन में एक आम का पेड़ हैबचपन में झूले डालकर खेला था मैं इनपरकहते हैं अब कुछ बीमार सा हो गया है यह,नहीं लगते अब इसपर कोई फलकाट डालेंगे इसे, आंगन में थोड़ी जगह जो मिलेगी!नहीं झूमेंगी अब इसकी पत्तियां और नहीं खेलेगी उनके बिचमेरे बचपन की याद.उड़ जायेंगे कुछ पंछी,मर जाए... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   7:13pm 17 Dec 2011
Blogger: sharad
तुम को पाकर खोने का यह दर्द जो मैंने जाना है,अब दिल में तेरे ठौर1 नहीं, तो दूजा कौन ठिकाना है?तुम लाख मना लेना दिल को इस दुनिया की खुशफहमी से,जब जाते जाते जा न सकूँ,तुम्हें आते आते आना है.ये दुनिया वाले कहते हैं चीर-काल रहूँ सौ साल जिउं,इक तुम ही मेरा जीवन हो, यह फक़त2 ही मैंन... Read more
clicks 484 View   Vote 0 Like   2:30pm 15 Dec 2011
Blogger: sharad
सोचो जो अगर इस दुनिया में पैसा न होतातो यह स्वार्थी इन्सान भला कैसा होता??शायद इस दुनिया में बंटवारे ना होते,हर दिन ये झगडे इतने सारे ना होते,एक भाई भाई का दुश्मन ना होताअपनों के बीच कोई चिलमन न होताकिसी से मुहब्बत पे इतनी पाबन्दी न होती,दिलों के बिछड़ने का कारन पैसे की र... Read more
clicks 499 View   Vote 0 Like   9:33am 12 Dec 2011
Blogger: sharad
मैं नहीं विश्वास करता ऐसे किसी अल्लाह, ईसा या भगवान में,जो भेद करता है मजहब में, धर्म में, इंसान मेंदेखो तो, आज इसने हमें कितना बाँट दिया है.मैं नहीं जाता किसी मंदिर, मस्जिद या दरगाह मेंजो सिखाते हमें नित नए पाखंड, बतलाते झूठे आदर्शआज इन्ही ने तो किया है इंसानों को सत्य से... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   1:52pm 6 Dec 2011
Blogger: sharad
अभी परसों की ही तो बात है- देखा दो बच्चे आपस में लड़ रहे हैं. एक के हाँथ में बल्ला और दुसरे के हाँथ में विकेट. मार-धाड़ करने को उतारू. अगल बगल बच्चों का एक ज़खीरा लेकिन अफ़सोस की उन्हें रोकने वाला कोई भी नहीं. कोई हंस रहा है, कोई तालियाँ मार रहा है तो कोई उन दोनों को एक दुसरे ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   12:32pm 3 Dec 2011
Blogger: sharad
इस चित्र को मेरी बहन द्वारा कागज पर उकेरा गया है. इस चित्र को बनाने में निहित उनकी भावनाओं को मैं नहीं जनता पर इसके बारे में अपने विचारों को साझा करने की चेष्टा करता हूँ. उम्मीद है यह आपको पसंद आयेगी.एक गिरता हुआ प्याला, प्याले में बची मय की कुछ बूंदें,इनके बिच स... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   7:37pm 29 Nov 2011
Blogger: sharad
निम्नलिखित 3 चुनिन्दा शेर अफ़्गार द्वारा लिखित हैं जो उन्होंने हमसे साझा किया. उम्मीद है यह आपको भी पसंद आएंगे.1.ग़म-ए-हस्ती को मिटाने का कोई जरिया नहीं सूझतालोग कहते हैं मोहब्बत कर,उसके लिए जी,उसी के लिए मरहम तो हरदिल तैयार थे 'अफ़्गार'पर इस सफ़र में कोई राह-ए-हमसफ़र ही... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   1:52am 24 Nov 2011
Blogger: sharad
सुर्ख़ियों में रहना ठाकरे खानदान की शायद पुरानी आदत हो चुकी है. जब देखो तभी सब मिलकर जोड़-तोड़ की राजनीती में लगे रहते हैं. अब राज ठाकरे ने इसमें एक नया आयाम जोड़ दिया है.गौरतलब है की पिछले दिनों जब मुंबई की टीम भोपाल में कबड्डी खेलने गयी तो वह किसी वजह से दोनों टीमों के ब... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   12:04pm 19 Nov 2011
Blogger: sharad
जब मैं बच्चा था, शायद दूसरी या तीसरी कक्षा में पढता था तो एक दिन शिक्षक महोदय ने हम लोगों से एक प्रश्न पूछा-"अक्ल बड़ी या भैंस?" आपके शिक्षक महोदय ने भी आपसे यह प्रश्न कभी न कभी अवश्य पूछा होगा. नहीं?? कुछ प्रश्न होते ही हैं ऐसे जो हर बार पूछे जाते हैं क्यूंकि मेरी समझ में हर श... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   3:44am 18 Nov 2011
Blogger: sharad
जब वह पैदा हुआ तो मनाई गई खुशियाँ,बनाये गए पकवान और बांटी गयी मिठाइयाँतब दुनिया हँसी थी क्यूंकि तब वह रोया थापर मैं रोया था क्यूंकि उसकी आवाज़ में दर्द था,और शायद एक रुदन इस दुनिया में आने काफिर वह थोडा बड़ा हुआ, हँसता-खेलता बचपन आया,पर नहीं वह बच्चा नहीं था क्यूंकि वह ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   5:05pm 16 Nov 2011
Blogger: sharad
तुम कहते हो मैं जाहिल हूँ, आवारा हूँ,मेरी सोच,मेरे विचार महज दिखावा हैं.मैं जो भी कहता हूँ,करता हूँ , सब एक फरेब हैढूंढने को तो हम सब में हीं कितने सारे ऐब हैं.दूसरों में सिर्फ कमियां देखना एक कमजोरी है,कमियां तो सब में ही हैं,किसी में अधिक किसी में थोड़ी है.अगर स्वछंद ह... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   1:58pm 8 Nov 2011
Blogger: sharad
आज लोकतंत्र इस तरह अपने पर पसार चुका था की अब तो जंगल में भी इसकी आहत होने लगी थी. बकरियां, भेड़ें और हिरन सरीखे कई जानवर तो महीनों से आमरण अनशन पर बैठे थे की जंगल में जल्द ही शेर की सत्ता को समाप्त कर लोकतंत्र को अपनाया जाये. पर एक बहूत बड़ी समस्या थी-पुरे जंगल में कही कोई श... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   1:39pm 5 Nov 2011
Blogger: sharad
7  अरबबां बच्चाऔर एक नज़र डालें अपने आने वाले भविष्य पर भी आज हम 7 बिलियन यानि 7 अरब हो गए. इस बात को लेकर लोगों में गहरा मतभेद है की आखिर वह अनोखा बच्चा कौन है(उस बच्चे में इस अंक के अलवा अभी शायद ही कुछ अनोखा हो).आज लगभग 3 .5  लाख बच्चों का जन्म हुआ और हर कोई अपने बच्चे... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:02pm 1 Nov 2011
Blogger: sharad
आजकल के अख़बारों और समाचार पत्रों में अक्सर यह पढ़ने सुनने को मिल जाता है की किसी बच्चे की कॉपी की जाँच गलत ढंग से हो गयी. लेकिन इस बार तो वाकया कुछ ज्यादा ही आगे वढ़ गया.जैसा मैंने एक समाचार पत्र में पढ़ा,उसके अनुसार एक बच्चे को बी-एड के किसी विषय में बहूत कम नंबर मिले जबक... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   3:24pm 31 Oct 2011
Blogger: sharad
लीजिये एक बार फिर से दिवाली आ गयी औए यह एहसास करा गयी की आखिर यह एक साल कितनी जल्दी बीत गया. आप सभी पाठकों को मेरी तरफ से दीपों के इस पर्व की बहूत बहूत शुभकामनायें.परन्तु आज के परिप्रेक्ष्य में इस पर्व पर खुशियों से झुमने-गाने, मिठाइयाँ खाने और पटाखे जलने से इतर भी बहूत कु... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   2:51pm 26 Oct 2011
Blogger: sharad
भरनी है मुझे एक ऊँची उडान, दे दे मुझे दो पररोक नहीं सकती मुझे तेरी बंदिशें,काट डाले मैंने वो पिंजरउड़ना है मुझे लेकर एक नयी मुस्कानकरना है खुद के एक नए जीवन का आह्वानफिरना है इस नीले गगन में उन्मुक्तसाथ लिए उत्साह, इन दुःख की कलिमाओं से मुक्त.जाना है बहूत दूर, खोजना ह... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   8:54am 24 Oct 2011
clicks 130 View   Vote 0 Like   12:00am 1 Jan 1970
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