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Blog: उसका सच

Blogger: सौरभ के.स्वतंत्र
बिहार की राजनीतिक चौसर पर रैली-रैला का महत्व कुछ ज्यादा रहा है। दरअसल, पीछले दस वर्षों में बिहार में जितनी भी रैलियां हुई हैं उससे बिहार राष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर चर्चा का विषय रहा है। रैली की बात आती है तो राजनीति के शूरमा लालू प्रसाद जोकि अभी सजायाफ्ता हैं के द्वारा ... Read more
clicks 361 View   Vote 0 Like   11:58am 3 Oct 2013 #हूंकार रैली
Blogger: सौरभ के.स्वतंत्र
लालू प्रसाद और राष्ट्रीय जनता दल का भविष्य ----------------------------- - सौरभ के.स्वतंत्र ----------------------------- बिहार में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद जब सत्ता में थें तब ‘ससुराल’ समीकरण की तूती बोलती थी। साधू, सुभाष, राबड़ी और लालू के इर्द-गिर्द हीं सत्ता की धुरी घूमा करती थी। ठेठ राजनीति करने व... Read more
clicks 305 View   Vote 0 Like   3:21pm 30 Sep 2013 #lalu prasad
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तिलेश्वर महाराज  बिहार के बगहा पुलिस जिला स्थित पकीबावली मंदिर का रहस्य आज भी अनसुलझा है। 200 वर्ष पूर्व नेपाल नरेश जंग बहादुर द्वारा भेंट किया गया जिंदा सालीग्राम, जिसे चुनौटी (खईनी का डब्बा) में रखकर भारत लाया गया था, आज लगभग नारियल से दो गुना आकार का हो गया है और निरं... Read more
clicks 356 View   Vote 0 Like   2:13am 28 Sep 2013 #बगहा
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मेरा नाम है स्वप्न. मै दिन और रात दोनों समय घुस जाता हूँ मन में. मुझे एक बार घुसेड़ दिया गया बिहार के चम्पारण स्थित एक पुलिस जिले के लोगों के मन में. किसी और ने नहीं स्वयं नीतीश कुमार जी ने मेरे साथ ऐसा किया. उस समय वे मुख्यमंत्री नहीं थे और यही वजह थी कि उन्होंने मुझे लोगों ... Read more
clicks 365 View   Vote 0 Like   2:40am 26 Sep 2013 #bagaha
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जल। जीवन का एक अभिन्न हिस्सा। शरीर का हिस्सा। सृष्टि का हिस्सा। कृषि का हिस्सा। हर क्षेत्र में सहभागी। कुदरत ने क्या कमाल किया, जल बिना सब सून या ठेठ साहित्य में कह लें तो बिन पानी सब सून। दरअसल, मैं पानी के जगह जल इसलिए उपयोग कर रहा था कि पानी के दो अर्थ हैं। एक पानी हया स... Read more
clicks 328 View   Vote 0 Like   4:33pm 22 Sep 2013 #सोशल इशू
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पटना का हड़ताली चौक हो या दिल्ली का जंतर-मंतर, इसके आगोश में आने के बाद कार वाले लोग बे-कार और बेकार लोग सरगर्म हो जाते हैं। मैं भी एक दिन बे-कार के मानिंद जंतर-मंतर पहुंचा। जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारों से गूंजता वातावरण मुझे बड़ा ही रमणीय लगा। कहीं लोग धरना पर बैठकर वायल... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   9:44am 18 Sep 2013 #
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भितिहरवा का गाँधी आश्रम  एक सपना था-बापू का ऐतिहासिक धरोहर भितिहरवा आश्रम सरकारी तंत्र की तंद्रा के चलते उपेक्षित न रहे। न हीं उसकी चाहरदिवारी धूल-धूसरीत हो। सो एक सामाजिक न्याय के झंडाबरदार ने अपने इस सपने को साकार करने के लिए वीणा उठाया। अन्होंने अपने बेबाक वक्तव... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   2:11am 18 Sep 2013 #चंपारण
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कल शाम की आंधी में उड़े थे बहुत कुछ बेतरतीब, उसी आंधी में उड़ी थी  मेरी एक कविता भी, मैंने अफ़सोस नहीं किया सोंचा और अपने आप को कोंचा कि कही इसी कविता से  आंधी में बही मानवता वापस आ जाए,चारों ओर खुशहाली छा जाए,दिवाली और ईदहम साथ-साथ मनाए,आंधी की शुरुआत करने वालोंका दिल बदल ... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   4:07pm 17 Sep 2013 #
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ये मौन/ये सन्नाटाक्यूँ?आखिर हुआ क्या?रिश्ते दरकते हैं तोआवाज़ आती है..फिर...लगता है कोई दिल का टुकड़ा अलग हुआ है/शायद वजह यही है.-------------------------- सौरभ के स्वतंत्र button="hori"; lang="hi"; submit_url ="" ... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   5:58pm 16 Sep 2013 #
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आज पढ़ रहा था/ भुकड़ी लगे रोटियों को, थोड़ी पिली जरूर पर शब्दश: सब कुछ अभी भी लिखा है उन रोटियों पर माँ का प्यार और सुझाव, पिता का स्नेह और मानी-आर्डर के पावती का जिक्र, बहन के साथ झोटा-पकड़ लड़ाई पर माँ की डांट , हर रोटियां कुछ न कुछ जरूर कह रही हैं, उसी में दबा मिला एक और रोट... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   4:28am 15 Sep 2013 #
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हंग पार्लियामेंट से बेहतर होगा कि हम अपना वोट और विश्वास उस गठबंधन को सौपें जो लगता है कि वाकई ये सत्ता का प्रबल दावेदार है. अन्यथा इस देश की माली हालत छिपी नहीं है. देश को एक स्थिर और निर्णायक सरकार की दरकार है. लिहाजा, हमें चाहिए की हम तीसरे मोर्चे पर भी अपनी राय स्पष्ट क... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   1:53am 15 Sep 2013 #
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‘अभिभावक की अपेक्षाएं’ और ‘बच्चों पर बस्ते का बोझ’ जैसे मुद्दे पर निरंतर बहस जारी है। पर विडम्बना यह है कि शिक्षाविद् भी इस बहस में संतुलन नहीं बना पा रहे। बच्चों पर आखिर कितना बोझ दिया जाए और अभिभावकों की अत्यधिक अपेक्षाओं पर लगाम कैसे लगाया जाए, इन सवालों का जवाब ढ़... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   3:07am 14 Sep 2013 #
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एक चौथाई रोटी खायेंगे, कांग्रेस को जिताएंगे, राहुल बाबा की खातिर अंतड़ी/पेट को सुखायेंगे,ज्यादा हुआ तो हवा पियेंगे और पानी खायेंगे. button="hori"; lang="hi"; submit_url ="" ... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   2:57am 14 Sep 2013 #
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<!-- Blogvani.com Vote for Post Code Begins -->लोक आस्था का पर्व छठ शुरू है..दीपावली बीत गयी..भले ही कई घर अँधेरे में रहे हो, कई महिलाएं अपने ग़ुरबत को कोसती रही हो..पर छठ ऐसा पर्व है इससे हर तबके के लोगों मेंऐसी ताकत और जूनून आ जाती है कि उसे छठ व्रत करने से कोई रोक नहीं सकता. बिहार की एक लोक गीत की बा... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   4:46am 18 Nov 2012 #chhath pooja
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सोचता हूँआसमान की तरहखामोश रहू,चुप-चाप बस जमी को निहारूऔर तारीफ़ में तारो कोटिम-टिमा दूबेबसी यही है किमै अथाह तो हूँ,मै करीब तो दिखता हूँ,पर हूँ दूर,गोयाजुरर्त ये करता हूँकि एक मुट्ठी चांदनी मेंजरुर भेजता हूँ सन्देशा,जताना चाहता हूँमै ही हूँआसमान,तारो वाला आसमान.- सौ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   5:18pm 12 Jul 2012 #
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बिहार की राजनीति में धुंआ उठता नजर आ रहा है...यह कभी भी आग में तब्दील हो सकता है. दरअसल, जदयू और भाजपा में जो तल्खी महसूस की जा रही है उसके अच्छे संकेत नहीं मिल रहे हैं. मुख्यमंत्री का भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को मीडिया के जरिये जवाब देना गठबंधन धर्म की तिलांजलि देने जैसा लगता ... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   4:33pm 9 Jul 2012 #
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वन में मानव, शहर में   बढ़ई के एक कील मारने भर से बहुमंजिला इमारत ध्वस्त नहीं होता, यदि होता है तो विध्वंस के कारणों का पता लगाना होगा। बात हो रही है वन्य जीवों के आशियानों की। दरअसल, आशियाने कई प्रकार के होते हैं, पेड़ वाले आशियाने, कंक्रीट वाले आशियाने, गरीबों के फूस वाल... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   5:21pm 14 Jun 2012 #pil for jim corbbet
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लोकपाल बनाम जनलोकपाल, सरकार बनाम जनता कैसे बना इसका जीता-जागता मिसाल अन्ना हजारे का आन्दोलन है. अन्ना हजारे के आन्दोलन का साक्षी वर्ष 2011 भी रहा. कांग्रेस की फजीहत सड़क से संसद तक हुई, जंतर-मंतर से सारे जहाँ में हुयी. कारण जिद! सरकार की जिद! जब पास करेंगे तो लोकपाल ही..कुछ ... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   4:20pm 29 Dec 2011 #lokpal
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शिक्षा के क्षेत्र में पैदल रहा बिहार अब तक तक़रीबन पचास से साठ हज़ार निजी विद्यालयों पर आश्रित है. आई.ए.एस. और आई.पी.एस. के उत्पादक बिहार में लगभग साठ लाख बच्चे अपना पठन-पाठन निजी विद्यालयों से करते आ रहे हैं. तब जाकर पैदल बिहार की कमर कुछ हद तक सुरक्षित है. देश में आर.टी.ई. ... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   4:04pm 10 Nov 2011 #rte
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पेट्रोल एक हज़ार रुपये प्रति लीटर, चीनी पांच सौ रुपये प्रति भर, दाल आठ सौ रुपये प्रति रत्ती , सब्जी सात सौ रुपये प्रति दस ग्राम, चावल तीन सौ रुपये प्रति तोला. यह तस्वीर हमारे आने वाले कल की है. दरअसल, इस तस्वीर के पीछे जो बैकग्राउंड है वह बढ़ती जनसँख्या का है. आज पूरे विश्व ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   2:18pm 31 Oct 2011 #birth of seven crore number child
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टाइम पत्रिका में नीतीश, बिहार तेरी जय बोल!... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   4:46pm 30 Oct 2011 #
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कही ये बसंत तो नहीं! « जनरल डब्बा... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   2:30pm 28 Oct 2011 #
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हमि न छोड़ब हो भैया छठ देई व्रतिया! « जनरल डब्बा... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   7:28am 27 Oct 2011 #
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बेगानों की शादी में अब्दुल्ला दीवाना बने या बेगाना….कन्फ्युशन है! क्योंकि, बीते दिनों बिहार के मुखिया नीतीश कुमार दिल्ली में राष्ट्रीय विकास परिषद् की बैठक में जो बोले उसने भी कन्फ्यूश कर दिया. दरअसल, सुशासन बाबू ने यह कहा कि केंद्र सरकार आर.टी.ई., बीज व खाद्य सुरक्षा व... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   2:14am 26 Oct 2011 #पटना
Blogger: सौरभ के.स्वतंत्र
बढ़ते अपराध को ले पुलिस के बजाये मीडिया पर बरसते नीतीश!फिर पनप रहा है अपरहण उद्योग!० सौरभ के.स्वतंत्र सुशासन बाबू के नाम से विख्यात नीतीश कुमार के २००४ में सत्ता में आने के बाद बिहार को एक नयी उम्मीद की किरण दिखी. मसलन, अब बिहार से जंगल राज समाप्त हो रहा है..अपराध का ग्राफ ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   12:53pm 23 Oct 2011 #सुशासन
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