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Blog: * * * * जीवन पुष्प * * * *

Blogger: मनीष कुमार नीलू
जीवन में कितना जंग है !अब बचा नहीं उमंग है !एक ही पथ है, एक ही रथ हैफिर अपनों से कैसा हठ है  !सब सारथि को ललकार रहापूर्वज को धिक्कार रहा !धन –धान्य की वशीभूत में भौतिक सुखों की अभिभूत में पुत्र पिता पे हुंकार रहा !!क्या लाया था, क्या पाया है ?जो समेट रहे हो सब जाया है सृष्टी को ... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   2:53am 23 Feb 2019 #
Blogger: मनीष कुमार नीलू
 मैं उब गया था जीने से जब दर्द सिमटा था सीने से ! मर ही जाते मयखाने में,कोई रोका ना होता पीने से ! छलते आये जो मासूमियत पेमुंह मोड़ लूँगा सब  कमीने से ! कल तक मुरझाया था ये चेहरा, धुलकर निखर गया पसीने से !  उम्मीद सोई थी वर्षों तलकआज जागी है करीने से ! तुम आये तो ... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   8:12am 1 Oct 2017 #
Blogger: मनीष कुमार नीलू
है जिन्दा आज भी जज्बा    अभी मैं झुक नहीं सकता !    आरजू मुकम्मल हो या न होसफ़र ये रुक नहीं सकता !!जब तुम याद आती हो एक कसक सी जगती है...निगाहें फलक पे टिकती हैनजरे नम हो उठती है...वही तराना गाता हूँ...शबनम फिर से टपकती है ...!!... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   8:56am 8 Jun 2016 #
Blogger: मनीष कुमार नीलू
ए काश कि तुम्हे भी पता होताअपना मिलन है चंद घड़ियों का मुद्दत से जुड़े थे जिस बंधन में टूटेगा मोती अब उन लड़ियों का !ए काश कि तुम्हे भी पता होता हम गले कभी अब, मिल न सकेंगे रख के सर, तेरे कंधों पे सनम कभी सिसक कर रो न सकेंगे !ए काश कि तुम्हे भी पता होता जुदा होकर  गम नहीं  करना ... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   8:47am 8 Jun 2016 #
Blogger: मनीष कुमार नीलू
सहर्ष प्रेम पथ परहम दीपक जलाये थी चाहत उड़ने की दूर पंख फैलाये था तकदीर का दोष या तदबीर का रोष जो मुन्तजिर हुए हम और छुट गया संग गूंजती है आज भी आवाज रूहानी सी उठती है सीने में एक कसक पुरानी सी अब नीर नैनों के   स्वछन्द बह जायेएक संदेसा है उनको  वो भी दिल से भुलाये   &n... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   4:03pm 11 Jul 2015 #
Blogger: मनीष कुमार नीलू
कब सुन पाउँगा फिर अम्मा की वो लोरी, खाली हो चूका है   किस्से की तिजोरी !सुनते थे दास्ताँ कभीचुप-चाप परियों की, अब सुनते है सिर्फ टिक–टिक घड़ियों की ! आधी रातों में उठकरबैठ जाते है अक्सर,कब मुमकिन होगा फिर आँचल का मयस्सर...!आ गये कितने दूरछोड़ कर वो बचपन अब छुट चुका पीछे &... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   5:04pm 10 Jul 2015 #
Blogger: मनीष कुमार नीलू
पुष्पित थी अभिलाषा मेरीपर, हिस्से में तो काँटे थे भेद गये वो तन–मन कोजिसे हम प्रेम से बाँटे थे बुत बने यूँ खड़े रहे हम वर्षों से बिन प्रतिफल के प्रतीक्षा है उस आँचल का  जिसे क़द्र हो अश्रुजल के |ह्रदय धक् से धड़क रहे थेहम जीवन में सरक रहे थे खुलती और बंद होती पलकें जब गिर... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   2:45pm 3 Mar 2013 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
रूह की धरा सेमन के फलक तक  जब उठती है अदृश्य मदमस्त दिशाहीन एक भावनाओं का सैलाब !तब घटा बन, धीमें-धीमें  कलम की रगों से बरसती है बूंद - बूंद  फिर खिलता है पन्नों पेशब्दों का सुन्दर गुलाब !मैं देखा हूँ शिद्दतों से मुहब्बत में जब कलम चूमती है पन्नों कोतभी दुनिया कहती हैबह... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   5:49am 4 Feb 2013 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
कागज की बनी कश्ती कुछ देर तक ही तैरती है पन्नों की बनी चिड़ियाँ कुछ दूर तक ही उड़ती हैपर, हमें तो पार करना है मुश्किलों से भरा दरिया और, पंख फैलाये उड़ना हैफलक के उस पार तक जहाँ इंतजार में खड़ी हैजन्नत की कई परियां बनाना है दृढ़तापूर्वकविश्वास से भरी कश्ती  जो तूफा... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   12:03pm 23 Sep 2012 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
ह्रदय को लिए ह्रदय में माँतुम हो कितने संशय में माँदेने को इन्हें जीवन सरलहो रही तू कितनी विकलपता नहीं ये तुमको कलमासूमियत पे करेंगे छल...! जिनको तुम खुदा से मांगीवो भूल जायेंगे तेरा यतनशायद तुम्हारी मौत पर माँनसीब भी ना हो कफ़नतुम इनकी अरमां के खातिरअपनी खुशिया... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   2:25pm 16 Sep 2012 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
जीवन में, कई साँझ को  आँधियाँ आती रहीडाली-डाली, झूम-झूमकरराग नया गाती रही ।टूटे कई हरे पत्ते भी, संग हवा के उड़ते रहेबसते थे जिस नीड़ के अंदरतिनकों में वो बिखरते रहे ।आज थमी है आँधियाँ आहिस्ता, वो तो हवा की साजिश थी ।अब दशा कुछ बदल रहा हैये तो खुदा की ख्वाहिश थी ।।... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   3:47am 19 Aug 2012 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
ये कैसी तेरी निर्मम प्यास,ये कैसी सियासत की भूख ! जो क़त्ल करके मानवता काले रहे हो सत्ता का सुख !! लूट की भूख जब जगती हैतब खाते हो हमसब की रोटी ।बनकर दुह्शासन कलयुग काखीचते हो गाँधी की, एकलौती धोती।। हसरतों को जगने से पहलेजहर देकर, सुला देते हो हमारे आंसुओं के आगे ... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   8:26am 15 Aug 2012 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
तुम्हे जरुरत क्या थी मेरे ख्वाब में आने की, बसकर रूह में फिर सेएक आग लगाने की...?तुम्हे जरुरत क्या थीदस्तूर निभाने की,सूखे  हुए पलकों को अश्कों में भिंगाने की...?तुम्हे जरुरत क्या थीदाग दामन में लगाने कीपरवाह तो कर लेती एक बार ज़माने की...?... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   3:54pm 29 Jul 2012 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
तू नहीं तो कुछ भी नहींइस व्यथित मन को मुक्ति भी नहीं देखो इस खंजर को ये हमसे रूठ गया है खामोश है सितार भी इसका कोई शायदतार टूट गया है...!कलाई की चूड़ीअब खनकती ही नहींऔर पावों की पायलछनकती ही नहींवक्त गुजर रहा है साँसे अटक रही है सुनसान रेगिस्तान में जिंदगी सरक रह... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   9:34am 4 Mar 2012 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
तूफानों के मुख पर जाकरहम अपना नीड़ बना बैठे !तिनका-तिनका जीवन का  तोड़-तोड़ कर बिखरा बैठे !चाहत थी मंजिल पाने कीपर, पग-पग हम भुला बैठे ! जो ख्वाब सजे थे पलकों पेहम एक फूँक में ही उड़ा बैठे !रोये इतना हम फूट-फूटकर कि आँखों का नीर सूखा बैठे !चुन-चुनकर बिखरे तिनके कोहमें ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   7:25am 2 Mar 2012 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
पाँवों में घुँघरू बँधे है समाँ बँधा है ताली सेपत्ता-पत्ता टूट रहा हैमेरे जीवन की डाली से !मासूमियत उजड़ रही हैसूरत भोली-भाली सेचमक सब खो गई है मेरे होठों की लाली से !हमें बेचकर बचपन में सबमालामाल हुए दलाली सेमैं भी किसी की बेटी थी आज ज़िन्दगी भरी ह... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   6:00am 19 Jan 2012 #
Blogger: मनीष कुमार नीलू
पाँवों में घुँघरू बँधे है समाँ बँधा है ताली सेपत्ता-पत्ता टूट रहा हैमेरे जीवन की डाली से !मासूमियत उजड़ रही हैसूरत भोली-भाली सेचमक सब खो गई है मेरे होठों की लाली से !हमें बेचकर बचपन में सबमालामाल हुए दलाली सेमैं भी किसी की बेटी थी आज ज़िन्दगी भरी ह... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   6:00am 19 Jan 2012 #
Blogger: मनीष कुमार नीलू
पाँवों में घुँघरू बँधे है समाँ बँधा है ताली सेपत्ता-पत्ता टूट रहा हैमेरे जीवन की डाली से !मासूमियत उजड़ रही हैसूरत भोली-भाली सेचमक सब खो गई है मेरे होठों की लाली से !हमें बेचकर बचपन में सबमालामाल हुए दलाली सेमैं भी किसी की बेटी थी आज ज़िन्दगी भरी है गाली से !धन-वर्षा ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:00am 19 Jan 2012 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
जीवन के अंगारों पे चलकर उग आये फफोले पाँव में !फिर भी कहीं मैं रुका नहींकिसी पेड़ों की छाँव में !!गैरों से क्या शिकायत करते घर की आँखों ने की परिहास !सच कहता हूँ उसी समय सेहोने लगा दर्द का एहसास !!पथरीले पथ से टकराकर पाँव के फफोले फूटने लगे !मन मेरे विचलित हो-होकर उलझी स... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   4:43am 14 Jan 2012 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
तुम्हारे जाने के कुछ निशानरेत पर, और मेरे मन परएक साथ उभर गये !इसे मिटाने की कोशिश मेंना जाने कितने मोती आँसू केइस समंदर में बिखर गये !आज  आने की आहट पर इन हवाओं की छूअन सेतन-मन मेरे सिहर गये !जो पार गये थे सात समंदरआ गये सब लौटकर लेकिनना जाने तुम किधर गये...?... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   9:07am 10 Jan 2012 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
वो दिन गए जब मैं बँधवाया करती थीलाल-लाल फीतों में अपनी अम्मा से चोटी !काजल लगवाती थीआँगन में खिले फूलों से बालों को सजाती थीफिर खिल उठती थीमेरे नैनों की ज्योति !जब, आईना देखती थी तो अम्मा से पूछती थी " अम्मा मैं कैसी लगती हूँ ?क्या मैं सचमुच की मुनिया लगती हूँ...? "अम्मा हँ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   10:25am 7 Jan 2012 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
लब हिले ना हिले, हमें आँखों का ईशारा कम तो नहीं !तुम मिलो ना मिलो, हमें यादो का सहारा कम तो नहीं !!... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   10:56am 5 Jan 2012 #शायरी
Blogger: मनीष कुमार नीलू
 मन में तपिश है इतनी कि समंदर सूख न जायेचल रही साँसें इतनी तेज कि हवा भी रूठ न जाये !अगर, समंदर ना रहा तोनदी को पनाह कौन देगा ?और, हवा भी रूठ गई तो जीवन को राह कौन देगा...?बच सकता है समंदर यूँ ही सूखने सेरुक सकती है हवा भी यूँ ही रूठने से...अगर, जाकर कोई  कह दे उसेएक झलक अपनी व... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   7:02am 2 Jan 2012 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
मेरे आँसू तुमआँखों में ही रहनाअतीत की धारों मेंतुम नहीं बहना लोग हँसेंगे ताने भी देंगे कुछ अपने तो कुछ ज़माने भी देंगेबस तुम सुनना मत कुछ कहनामेरे आँसू तुम आँखों में ही रहना !मानाकि आज हमकुछ भी नहीं है पर अपनी माँ काहै हम जिगरपरवाह नहीं हैज़माने भर की पर कैसे ना करे... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   5:20pm 27 Dec 2011 #कविता
Blogger: मनीष कुमार नीलू
मैं तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ !सात सुरों का सरगम सजाना चाहता हूँ !बनकर मैं बादल, तेरे मन की धरती परएक धीमें सावन को बरसाना चाहता हूँ !उठ रही जो लहर, मेरे दिल के दरिया मेंइसे तेरी रगों में भी, दौडाना चाहता हूँ !ना मैं कोई सँपेरा, ना मैं कोई लुटेरामैं तो तेरे हुस्न का खजाना ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   3:06pm 25 Dec 2011 #ग़ज़ल
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