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Blog: अजन्ता शर्मा

Blogger: ajanta
तुम्हें जिस दिन अपनी गलियों से गुज़रते देखा था,मेरा दहकता धर्मगंगोत्री के चरण धरसुरसरी संग बहने की इच्छा करने लगा था. मैं सूर्य हूँ.अपने आकाश में आंखें तरेरे आग उड़ेले अडिग बनछड़ी की नोक परसर्वत्र धमकती फिरती हूँ. किंतु, हे धवल बादल !उस दिन जब तुम्हें बहता देखा था मैंन... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   6:38pm 21 Oct 2011 #
Blogger: ajanta
(Struggle for Existence **)हथेलियों का अपमानमेरे गालों परअब नहीं जड़ता, न हीं अवसादों का कीचड मेरे वस्त्र को गंदा करता है. तिरस्कार की चटनी से मेरी थाल सज जाती है, मुट्ठी भर घृणा से मेरा पेट भर जाता है. अपशब्दों का आब मेरी तृष्णा को पर्याप्त है, फब्तियां कसती खिड़कियाँ हैं, अवहेलित करता ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   9:34pm 26 Sep 2011 #
Blogger: ajanta
तुमसे हींअपने जीवन के उन क्षणों मेंमैं अदृश्य ही रही,अनावश्यक,अकारथ ,बेजा विषयों की दासी बनकर.व्यर्थ रहकरकाटती रही हर लम्हाअपनी एकटक निगाहों से,तुम्हारीही चाह में .तुम्हारागुजरना ही हुआ,मेरी पथराई छाती परहल सा.मुझे भेदमेरी चेतना को जगाता.तुम्हारा याद करना ही हुआकि... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   5:44pm 18 Jan 2010 #
Blogger: ajanta
मल्हार अचानककिसी बसंती सुबहतुम गरज बरसमुझे खींच लेते होअंगना में .मैं तुममेंनहा लेने को आतुरबाहें पसारेढलक जाती हूँ .मेरा रोम रोमतुम चूमते हो असंख्य बार .अपने आलिंगन मेंभिगो देते होमेरा पोर पोर.मेरी अलसाई पलकों परशीत बन पसर जाते हो.माटी के बुलबुलों में छुपकरमेरी पा... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   6:50am 21 Jul 2009 #
Blogger: ajanta
जानवर से आदमीएक जानवरमेरे साथ रहता है.मेरे बगल मे सोता है.अपने बदन पर उगी हुई घासें दिखाकरमुझे उससे चिपकने को कहता है.उघरी हुई टाँगें दिखातापूरे घर मेंइधर उधर फिरता रहता है.सड़ी बदबूदार दांतों के बीच दबाकरआधी चोकलेट मुझे काटने को कहता है.अपने खुरदुरे हाथों सेमेरे गाल... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   5:15am 8 Jun 2009 #
Blogger: ajanta
दूरियांमैं चली जाऊँ तो निराश मत होना.जीना ही तो है!एक सीधा-सा प्रश्नएक अटपटा-सा उत्तर.अपने अगले पलों में छिपाकर रखूँगी मैं तुम्हेंऔर तुम मुझे रखना.मौका पाते हीउन निधियों के हम सामने रख खोला करेंगे.उनके रहते ना मेरी रातें स्याह होगीना तुम्हारे दिन तपे हुए.ये पल ही होगा... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   7:04am 6 Apr 2009 #
Blogger: ajanta
उत्तरमरिचिका से भ्रमित हो वह प्रश्न कर बैठे हैंथोडा पास आकर देखेंजीवन बिल्कुल सपाट हैअपने निष्टुर आंखों सेजो आग उगलते रहते हैंउनपर बर्फ सा गिरतामेरा निश्छल अट्टहास हैजीवन ने फल जो दियावह अन्तकाल मे नीम हुआउसे निगल मुस्काती अपने रिश्ते की मिठास है... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   4:45am 31 Mar 2009 #
Blogger: ajanta
(८ मार्च - महिला दिवस के अवसर पर )पूर्णतुम मुझसे डरो !क्योंकि मैं खुद को रोकना नहीं जानती.तुम मुझसे डरो !क्योंकि मैं समस्याओं के टीले पर खडी होकर भीउन्मादित हो हंसती हूँ.तुम डरो !क्योंकि तुम्हारे लाख मारने पर भीमैं ’कुछ’ प्रसंगों को पल-पल जीती हूँ.तुम चाहते हो मैं रोती रह... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   6:33am 8 Mar 2009 #
Blogger: ajanta
आईनाकाश !कि तुम आईना ही बन जाते ,मैंठिठकी खड़ी रहती ,औरतुम मेरा चेहरा पढ़ पाते ,मेरे एक एक भाव सेहोती रहती मैं ज़ाहिर ,तुमअपलक निहारते मुझेऔरबांछ्ते मेरे माथे की लकीर ,मेरे हाथ बढ़ाए बिनातुममुझे एकाकार कर लेते ,हर प्रश्न का उत्तरतुम्हारी आखों मेमेरा चेहरा होता ,मेरे शब्दबि... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   8:09am 7 Mar 2009 #
Blogger: ajanta
एकाकारएक आकार बनमेरे मानस में तुम्हारा स्थापनमुझे ठहरा गया है.न अब कोई प्रतीक्षा है.न भय है तुम्हारे जाने का.मेरी दीवारें भीअब तुम्हें खूब पहचानती हैंमहका करती हैं वोतुम्हारी खुश्बू की भांतिऔर मुझे नहलाती है.मेरी बन्द पलकों परवायु का सा एक थक्काजबतुम - सा स्पर्श करन... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   8:24am 3 Mar 2009 #
Blogger: ajanta
सूत सी इच्छाएं...रोते रोतेजी चाहता है,मोम की तरह गलती जाऊं.दीवार से चिपककरउसमें समा जाऊं.पर क्या करुं!हाड-मांस की हूं जो!जलने पर बू आती है.औरसामने खडा वोमुझसे दूर भागता है.मेरी सूत सी इच्छाओं कोकोईउस आग सेखींचकरबाहर नहीं निकालता.... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   6:02am 2 Mar 2009 #
Blogger: ajanta
तुम मेरे पास हो...तुम ख्याल बन,मेरी अधजगी रातों में उतरे हो।मेरे मुस्काते लबों से लेकर...उँगलियों की शरारत तक।तुम सिमटे हो मेरी करवट की सरसराहट में,कभी बिखरे हो खुशबू बनकर...जिसे अपनी देह से लपेट,आभास लेती हूँ तुम्हारे आलिंगन का।जाने कितने रूप छुपे हैं तुम्हारे,मेरी बन्... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   1:21pm 28 Feb 2009 #
Blogger: ajanta
जमावतमतमाये सूरज ने मेरे गालों से लिपटी बूंदें सुखा डालीं.ज़िन्दगी !तूने जो भी दिया...उसका ग़म अब क्यों हों?मैं जो हूँकुछ दीवारों और काँच के टुकड़ों के बीच.जहाँ चन्द उजाले हैं.कुछ अंधेरे घंटे भी.कुछ खास भी नहींजिसमें सिमटी पड़ी रहूँ.खाली सड़क परन है किसी राहगीर का अंदेशा.... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   4:58am 27 Feb 2009 #
Blogger: ajanta
...और बातें हो जायेंगीआओ...हम साथ बैठें।पास बैठें।कभी खोलूँकभी पहनूँ मैं अपनी अँगूठी।तुम्हारे चेहरे को टिकाएतुम्हारी ही कसी हुई मुट्ठी।चमका करे धुली हुई मेज़हमारे नेत्रों के अपलक परावर्तन से।और तब तकअंत: मंडल डबडबाएप्रश्न उत्तरों के प्रत्यारोपण से।विद्युत बन बहेह... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   4:28pm 25 Feb 2009 #
Blogger: ajanta
इस बारअनगिनत आँगनअनगिनत छत,अनगिनत दियेऔर उनके उजालों का कोलाहल..इनके बीचकहीं गुम सी मैं,कहीं भागने की हठ करता हुआलौ सा मचलता मेरा मन...वो एकाकीजो तुम्हारे गले लग करमुझसे लिपटने आया हैउसकी तपिश मेंहिम सी पिघलती मेरी नज़रें...मुझसे निकलकरमुझको ही डुबोती हुई...इस शोर और रौश... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   8:51am 23 Feb 2009 #
Blogger: ajanta
अस्तित्वमुझसे वो पूछता हैकि अब तुम कहाँ हो?घर के उस कोने सेतुम्हारा निशां धुल गयाहै वो आसमां वीरां,जहाँ भटका करती थी तुम,कहाँ गया वो हुनरखुद को उढ़ेलने का?अपनी ज़िन्दगी का खाँचा बनाशतरंज की गोटियाँ चराती फिरती हो...कहाँ राख भरोगी?कहाँ भरोगी एक मुखौटा?खा गयी एक शीत-लहरतुम... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   6:44pm 22 Feb 2009 #
Blogger: ajanta
अनुरोधहे बादल!अब मेरे आँचल मेंतृणों की लहराई डार नहीं,न है तुम्हारे स्वागत के लियेढेरों मुस्काते रंग.मेरा ज़िस्मईंट और पत्थरों के बोझ के तलेदबा है.उस तमतमाये सूरज से भागकरजो उबलते इंसानइन छतों के नीचे पका करते हैंतुम नहीं जानते...किएक तुम ही होजिसके मृदु फुहार कीआस रह... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   8:19am 18 Feb 2009 #
Blogger: ajanta
व्यर्थ विषयक्षणिक भ्रमित प्यार पाकर तुम क्या करोगे?आकाशहीन-आधार पाकर तुम क्या करोगे?तुम्हारे हीं कदमों से कुचली, रक्त-रंजित भयी,सुर्ख फूलों का हार पाकर तुम क्या करोगे?जिनके थिरकन पर न हो रोने हँसने का गुमांऐसी घुंघरू की झनकार पाकर तुम क्या करोगे?अभिशप्त बोध करता हो ज... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   7:35am 17 Feb 2009 #
Blogger: ajanta
ज़बह हर रोज़मेरी खाल उतरती है.मुझेएक हुक से टांगा जाता है.थोडी थोडी देर मेंमुझेथोड़ा थोड़ा काटा जाता है. अपने शरीर सेटपके रक्त कोबूँद बूँद उठामैं देह से चिपकाती हूँ.फिरखाल उतरवाने कोतैयार हो जाती हूँ.... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   7:55am 5 Feb 2009 #
Blogger: ajanta
तुम्हारी बाततुम जो कहते होउसे आवरण बनाअपने सर्वस्व कोउससे लपेट लेती हूँवह मेरी ऊर्जा कोसहेजता हैमुझेअपने स्पर्श सेउष्मित करता हैतुम जो कहते होउसे ओढ़कर मैंख़ुद कोजीवन-अनल मध्यप्रहलाद सा सुरक्षित पाती हूँतुम जो कहते होवह मेरे चेहरे परऐसे खिलता हैज्योंप्रातः किर... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   6:34am 4 Feb 2009 #
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