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Blog: सिमरन की कविताएँ

Blogger: simran
बर्फ दिल हो तुम अन्ना,पत्थर दिल यह सरकार तुम पिघल ना जाना आगे बढ़ो यह सरकार सिर्फ पड़ी रहती अपने दरबारी भेज देती खुले छोड़ रखे अपनी सिपाही और मंत्री,करने को भ्रष्टाचार|पत्थर दिल यह सरकार|... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   7:05am 16 Oct 2011
Blogger: simran
मेरे पास दो कागज थे, मैंने उनकी गुड़िया बनाईगुड़िया टूटी और रूठी,मैंने उसे फिर से जुड़वाईऔर हम दोनों गई सागर ओर हमने देखे वहां दो सुन्दर मोर अपने पंख फैलता झट से उड़कर बाग में जाता फट से हम भी भागे उसके पीछे देखा तो वह कीड़े खा रहा नीचेमोर को पसंद है कीड़े खाना कोयल को मन-... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   6:56am 16 Oct 2011
Blogger: simran
"एक-दो-तीन-चार"चार पे लगाओ अपनी रोटी पर आचार "पांच-छै-सात-आठ"लगाओ सामान पर रस्सी की गांठ "नौ-दस"दस पर चलेगी अपनी सीकर की बस| ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   6:46am 16 Oct 2011
Blogger: simran
मेरे पास थे दो-दो बन्दर, एक था अनाड़ी एक था सिकंदर|दोनों मिलकर साथ साथ रहते,सोते,खाते,पीते साथ में नहाते|हर काम साथ साथ मिलकर करते|दोस्तों यह है अच्छी बात सदा रहना एक दूसरे के साथ|... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   6:36am 16 Oct 2011
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