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Blog: स्व.आयुवान सिंह शेखावत,हुडील

Blogger: Shekhawat
भाग 3 से आगे ...... राजपूत जाति की एक मुख्य आंतरिक कमजोरी उसकी आर्थिक विषमता रही है| आर्थिक विभाजन के अनुसार राजपूत जाति को तीन भागों में बांटा जा सकता है| अरबपति और करोड़पति राजा-महाराजाओं से लेकर अर्द्ध-नग्न और अर्द्ध-भूखा श्रमिक राजपूत परिवार रक्त और परम्परा की दृष्टि से ... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   4:08pm 10 Jun 2013 #Rajput aur Bhavishy
Blogger: Shekhawat
भाग-२ से आगे.... इन सब परिस्थितियों में राजपूत के नेतृत्व का प्रश्न एक अत्यंत ही जटिल समस्या है| इस कमी की पूर्ति सफलता के प्रथम सोपान की प्राप्ति है| सफल नेतृत्व की कसौटी के विषय में इसी पुस्तक में आगे विचार किया गया है, अतएव यहाँ अब दूसरी आंतरिक कमजोरियों की और ध्यान देना... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   1:56pm 12 Nov 2012 #Rajput aur Bhavishy
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भाग- १ से आगे..... राजपूत जाति अपने रूढ़िवादी संस्कारों के करण इन्हीं राजाओं को अपना स्वामी और नेता समझती रही| उसने स्वतंत्र रूप से सोचने और कार्य करने की शक्ति को एकदम कुंठित कर दिया| किन्हीं विशेष परिस्थितियों में व्यवहृत और लाभदायक स्वामी-भक्ति की ओट लेकर राजपूत जाति ... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   1:51pm 12 Nov 2012 #Rajput aur Bhavishy
Blogger: Shekhawat
राजपूत जाति के पतन के कारणों पर एक पक्षीय विचार हम गत अध्याय में कर चुकें है| विपक्षी हमारे विनाश के लिए कितने उतरदायी है और हम स्वयं अपने विनाश के लिए कितने उत्तरदायी है, समस्या के इन दोनों पहलुओं पर सम्यक रीती के विचार करने पर ही हम अपने पतन के वास्तविक कारणों को समझने ... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   1:33pm 2 Nov 2012 #Rajput aur Bhavishy
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भाग सात से आगे.... जब सामाजिक ढांचा विश्रंखलित और अस्त व्यस्त हो जायेगा तब अब तक के समस्त रीती-रिवाज, रहन-सहन, व्यवहार आदि के तरीकों में भी आमूल परिवर्तन आ जायेगा| सामाजिक आदर्श और मान्यताएं बदलकर नवीन प्रकारों को जन्म देंगी| सामाजिक ढांचे का यह परिवर्तन अनियंत्रित परिस... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   1:48pm 1 Nov 2012 #Rajput aur Bhavishy
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भाग छ: से आगे... मध्यम-वर्ग का जीविकोपार्जन का सबसे बड़ा साधन कृषि था| महाजनों से ऋण लेकर और अपनी औरतों के जेवर तक बेच कर इस वर्ग के अधिकाँश लोगों ने अपनी भूमि पर कुए,तलब आदि बनवाये थे| इस प्रकार कृषि की भूमि पर उत्पादन बढाने के लिए सुधार कर वे अपनी भूमि कृषकों को जोतने के लिए ... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   12:41pm 1 Nov 2012 #Rajput aur Bhavishy
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भाग पांच से आगे .....देशी राज्यों की इस प्रकार की समाप्ति के रूप में बुद्धिजीवी नेताओं के शब्दों में राष्ट्र की एकता पूर्ण हुई,इतिहासज्ञों के विचारों में वह एक रक्तहीन राज्य-क्रान्ति थी;-देश के अनुत्तरदायी विध्वंसक तत्वों की वाणी में वह बर्बर सामंतीय युग की स्वाभाविक इ... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   12:34pm 1 Nov 2012 #Rajput aur Bhavishy
Blogger: Shekhawat
भाग-चार के आगे .... भारत का चतुर बुद्धिजीवी-वर्ग यह भली भांति जनता था कि विदेशी सत्ता की भारत में उपस्थिति के समय इन देशी राज्यों की समाप्ति की बात से प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती थी| अतएव जब तक देश में अंग्रेज सत्ता रही तब तक धूर्त-वर्ग ने भूलकर भी इन राज्यों की स... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   12:58pm 8 Oct 2012 #Rajput aur Bhavishy
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भाग -३ से आगे ....... ये सब कार्य लुभावनें सिद्धांतों की ओट लेकर, कहीं शोषण से कहीं दासता से और कहीं सामंतशाही के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के नाम पर कराये गए| कहीं राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक समानता की दुहाई दी गयी तो कहीं राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक न्याय की स्थापना की प... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   1:52pm 28 Sep 2012 #Rajput aur Bhavishy
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भाग दो से आगे........ उस समय ब्रिटिश भारत में स्वतंत्रता का जो संग्राम अंग्रेजों और भारतीय जनता के बीच चल रहा था, राजस्थान में उसका रूप सामंत-वर्ग और प्रजा-मंडलों के पारस्परिक द्वेष के रूप में प्रकट हुआ| सामंत-वर्ग उस समय अपने कर्तव्यधिकारों के प्रति जागरूक नहीं था और ण प्र... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   1:52pm 28 Sep 2012 #Rajput aur Bhavishy
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भाग एक से आगे.... पाकिस्तान की स्थापना कांग्रेस ने इसलिए कराई कि जिससे देश का प्रबल और प्रभावशाली मुस्लिम-वर्ग शेष भारत से प्रथक होकर अन्य राष्ट्र का शाषक बन जाय और इस प्रकार भारत में कांग्रेसी प्रभुत्व के अबाध रूप से प्रसार के लिए एकदम मार्ग खुल जाए| दुर्नितिपूर्ण योज... Read more
clicks 252 View   Vote 0 Like   11:31am 26 Sep 2012 #Rajput aur Bhavishy
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सन् 1957में स्व.श्री आयुवानसिंह जी ने उस समय की सामाजिक,राजनैतिक परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए "राजपूत और भविष्य" नामक पुस्तक लिखी थी| उसी पुस्तक के अंश यहाँ प्रस्तुत है -- देश के विभाजन पर कांग्रेसी चालों का विश्लेषण करते हुए स्व.आयुवानसिंह जी ने उन तथ्यों व कारणों प... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   1:19pm 25 Sep 2012 #Rajput aur Bhavishy
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सन् 1957में स्व.श्री आयुवानसिंह जी ने उस समय की सामाजिक,राजनैतिक परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए "राजपूत और भविष्य" नामक पुस्तक लिखी थी| उसी पुस्तक के अंश यहाँ प्रस्तुत है -- देश के विभाजन पर कांग्रेसी चालों का विश्लेषण करते हुए स्व.आयुवानसिंह जी ने उन तथ्यों व कारणों प... Read more
clicks 253 View   Vote 0 Like   1:19pm 21 Jul 2012 #राजपूत और भविष्य
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- ओ देवी! सिंह-वाहिनी, असुर-संहारिणी, शुम्भ-निशुम्भ-निपातिनी, चक्र-धारिणी, रक्त-बीज-नाशिनी तेरा यह रौद्र रूप शत शत कोटि बार वन्दनीय है| समस्त विश्व का धारण और संहार करने वाला तेरा यह प्रचंड चंडी रूप स्तुत्य है| तू जीवन का जीवन, प्राणों की प्राण, आत्मा की आत्मा है| विश्व के कण... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   5:00pm 29 Oct 2011 #मेरी साधना
Blogger: Shekhawat
- मेरे देखते ही देखते वह समाज-भवन ढहने लगा| भगवान राम और कृष्ण, कर्ण और युधिष्टर, बुद्ध और चंद्रगुप्त का समाज इतना निर्बल, पंगु, साहसहीन, निर्लज्ज और मूढ़ निकलेगा;- यह विचारातीत था| पर मैंने देखा उसका चतुर्मुखी पतन उन आँखों से जिनसे कभी विश्व-विजय, वैभव-विलास और सर्वोत्कर्... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   1:39pm 26 Oct 2011 #मेरी साधना
Blogger: Shekhawat
-मैं सुनूं - अपने पूर्वजों का उपालम्भ,ऋषियों का आदेश,राष्ट्र की पुकार,समाज क्रन्दन,दुष्टों का अट्टहास और आत्मा की ध्वनि|मैं देखूं- विध्वंस का नृत्य, सर्व-नाश का दृश्य, सत्य का दमन और जीवन का पतन|अनुभव करूं- इनके प्रति भारी उत्तरदायित्व को, मोटी ऋण राशि को, कृतज्ञता और अल्... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   2:23pm 21 Oct 2011 #मेरी साधना
Blogger: Shekhawat
-मैंने अमरता और क्षणभंगुरता के रहस्य को समझ लिया है| स्व-धर्म रूपी अमृत के आस्वादन से मैं देवत्व की अमर योनि का अधिकारी और धर्म-विमुखता रूपी गरल-सीकर पान कर मृत्यु का ग्रास बन सकता हूँ|तो मैं क्या करूं?- मैं मृत्यु और जीवन दोनों का रसास्वादन करना चाहता हूँ;- मर कर भी जीवित ... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   2:24am 19 Oct 2011 #मेरी साधना
Blogger: Shekhawat
- जरा समझूँ भगवान के मंगलमय विधान को| विष्णु शक्ति का आव्हान करूं| अमृत रूपी तत्वों की वृद्धि,पोषण और रक्षण में योग दूँ| उन्हें क्षय से बचाऊं| क्षत्रिय-संज्ञा को सार्थक करूं| फिर मैं ही रूद्र बनकर विषरूपी तत्वों का संहार करूं| मेरे प्रचंड आघातों से विप्लव का कलेजा फट जाए; ... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   1:45pm 17 Oct 2011 #मेरी साधना
Blogger: Shekhawat
-चेतना के स्वाभाविक जागरण से सब जाग उठे; ज्ञान की उज्जल प्रदीप्ति से सब दीप्त हो जाएँ; स्फूर्ति के मंगलमय प्रांगण में सब प्रवेश कर जाएँ;- सबको कर्तव्य-पथ-गामी बनाने के लिए शंखधारी विष्णु के गुणों को मैं धारण करूँ;- उद्बोधन का महा-शंख बजाऊं;- महानिशा की समाप्ति का ढिंढोरा प... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   3:45am 16 Oct 2011 #मेरी साधना
Blogger: Shekhawat
-पर मुझे आवश्यकता है धर्म के व्यावहारिक स्वरूप की; उसके मूर्तिमान अस्तित्व की,- गोचर,व्यक्त,प्रकट और स्थूल की उपासना की| मैं समाज-सीमाओं में आबद्ध समाज-धर्म से आगे जा भी नहीं सकता| क्षितिज के उस पार,अवनि के कोलाहल से परे नि:स्तब्ध एकांत साधना मेरे-गुण स्वभाव के प्रतिकूल प... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   12:57pm 14 Oct 2011 #मेरी साधना
Blogger: Shekhawat
उस दिन बादशाह औरंगजेब लम्बी बीमारी से उठ कर पहली बार दरबार में आया था | दीवाने ख़ास का वह दरबार खचाखच भरा हुआ था | बीमारी की थकावट और साम्राज्य की नित नई उत्पन्न होती समस्याओं के कारण बादशाह का चेहरा गंभीर था | बादशाह ने मयूर सिंहासन पर बैठकर ज्योंहि अपनी दृष्टि चारों और ... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   1:30pm 13 Oct 2011 #ममता और कर्तव्य
Blogger: Shekhawat
स्वमाता और मातृत्व-आरोपित अन्य स्त्री में वात्सल्य का मूल स्रोत एकसा होते हुए भी उसका उपयोग स्व पर आकर भिन्न भिन्न हो जाता है| स्वमाता और विमाता का भी अंतर प्राकृतिक है| यही अवस्था और संबंध स्वधर्म और विश्व धर्म की है; - यही प्राकृतिक अंतर स्वधर्म और पर-धर्म में है| अतएव ... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   1:11pm 13 Oct 2011 #मेरी साधना
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