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Blog: प्रेम का दरिया

Blogger: प्रेम चंद गांधी
मुझे एक बार मेरी जान-पहचान वाले एक व्‍यक्ति ने यह घटना बताई थी।उन दिनों में मास्को में पढ़ता था। मेरे पड़ोस में एक ऐसी महिला रहती थी, जिसकी प्रतिष्‍ठा को वहां सन्दिग्ध माना जाना था। वह पोलैंड की रहने वाली थी और उसका नाम टेरेसा था। मर्दों की तरह लम्बा कद, गठीला डील-डौल, का... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   12:56pm 3 Aug 2013 #प्रेम
Blogger: प्रेम चंद गांधी
हिंदुस्‍तान के सबसे बड़े और महानतम नास्तिक अमर शहीद भगत सिंह को समर्पित हैं ये कविताएं। भगत सिंह जो हमें हर समय मनुष्‍य की अपराजेय कर्मशीलता की याद दिलाते रहते हैं। मुझे तो हर मुश्किल में भगत सिंह का रास्‍ता ही दिशा दिखाता है। उसी महान प्रेरक को लाल सलाम कहते हुए प्रस... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   3:56am 27 Sep 2012 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
दरख्तों से सरसब्ज पहाड़ी पर पुराने फैशन की एक हवेली थी। ऊंचे और लंबे छायादार पेड़ों की हरियाली उसे घेरे हुए थी। एक विशाल बाग था, जिसके आगे घना जंगल और फिर एक खुला मैदान था। हवेली के सामने की तरफ पत्थर का एक विशालकाय जलकुंड था, जिसमें संगमरमर में तराशी हुई परियां नहा रह... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   1:01pm 5 Aug 2012 #अनुवाद
Blogger: प्रेम चंद गांधी
जिंदगी की किताब स्त्री पुरुष के एक बाग में मिलने से शुरू होती है और ईश्वरीय ज्ञान पर खत्म हो जाती है। - ऑस्कर वाइल्डजी हां, बहुत से लोगों की जिंदगी की किताब भी उसी अध्याय से शुरू होती है जिसमें स्त्री का प्रवेश होता है। मेरे साथ भी यही हुआ। वह मेरी जिंदगी में तब आई, जब मैं ... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   12:55pm 5 Jul 2012 #कहानी
Blogger: प्रेम चंद गांधी
मां की ममता पर सदियों से कविता, कहानी और उपन्‍यास लिखे जा रहे हैं। गोर्की का उपन्‍यास 'मां' तो अपने में क्‍लासिक है ही। आज मातृ-दिवस यानी मदर्स डे पर पश्चिमी साहित्‍य की ये तीन क्‍लासिक कहानियां हिंदी पाठकों के लिए विशेष रूप से प्रस्‍तुत हैं। इनमें से शुरु की दो कहानिया... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   2:35am 13 May 2012 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
मां की ममता पर सदियों से कविता, कहानी और उपन्‍यास लिखे जा रहे हैं। गोर्की का उपन्‍यास 'मां' तो अपने में क्‍लासिक है ही। आज मातृ-दिवस यानी मदर्स डे पर पश्चिमी साहित्‍य की ये तीन क्‍लासिक कहानियां हिंदी पाठकों के लिए विशेष रूप से प्रस्‍तुत हैं। इनमें से शुरु की दो कहान... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   2:35am 13 May 2012 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
अभी-अभी उस अभय वाजपेयी को आखिरी सलाम कहकर आया हूं, जो हरदिलअजीज था। राजस्‍थान पत्रिका के पॉकेट कार्टून ‘झरोखा’  के विख्‍यात त्रिशंकु, जिसे लाखों पाठकों कीबेपनाह मोहब्‍बत हासिल थी... जिसने अपने मुंह से कभी नहीं कहा कि मैं ही त्रिशंकुहूं और मैं ही कलाकार, रंगकर्मी, निर्द... Read more
Blogger: प्रेम चंद गांधी
शुक्रवार की साहित्‍य वार्षिकी-2012 में ये दो नई कविताएं प्रकाशित हुई हैं। मेरे मित्र और पाठक जानते हैं कि इधर मेरी कविताओं का स्‍वर बहुत बदला है और ये कविताएं इसे बताती हैं। कुछ मित्रों ने इन कविताओं को पहले सुना भी है और शायद एकाध ने पढ़ा भी है। आज मैं अपने तमाम दोस्‍तों ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   5:00am 12 Jan 2012 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
नौ ग्रहों में सबसे चमकीले शुक्र जैसी है उसकी आभाआवाज़ जैसे पंचम में बजती बांसुरी तीन लोकों में सबसे अलग वह दूसरा कोई नहीं उसके जैसा नवचंद्रमा-सी दर्शनीय वह लुटाती मुझ पर सृष्टि का छठा तत्‍व प्रेम नौ दिन का करिश्‍मा नहीं वह शाश्‍वत है हिमशिखरों पर बर्फ की मानिंद सात मह... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   5:47am 13 Nov 2011 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
2005 में अपनी पहली पाकिस्‍तान यात्रा के दौरान कराची देखने का अवसर मिला। शहर कराची को लेकर कुछ कविताएं लिखी थीं। उनमें से एक कविता यहां प्रस्‍तुत कर रहा हूं। सब दोस्‍तों को ईद की दिली मुबारकबाद के साथ सबकी सलामती की कामनाओं के साथ। न जाने कितनी दूर तक चली गई हैयह बल्लियों ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   6:19am 7 Nov 2011 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
ठीक से याद नहीं आता, लेकिन इन कविताओं को लिखे हुए 15 साल से अधिक हो चुके हैं। उस समय वैचारिक परिपक्‍वता नहीं थी, लेकिन जीवन-जगत को एक कवि की दृष्टि से देखने की कोशिश तो चलती ही रहती थी। उन दिनों ठोस गद्य की कविताएं लिखने का भी एक चलन चला था। अमूर्त विषयों पर भी खूब लिखा जाता ... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   4:29am 24 Oct 2011 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
श्रेष्‍ठ विचार और आदर्शों को लेकर चलने वाला एक आंदोलन कैसे दिशाहीनता और दिग्‍भ्रम का शिकार होकर हास्‍यास्‍पद हो जाता है, जनलोकपाल आंदोलन इसका ज्‍वलंत उदाहरण है। एक गैर राजनीतिक आंदोलन अंततोगत्‍वा राजनीति की शरण में जा रहा है या कहें कि अन्‍ना हजारे की साफ सुथरी छवि ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   10:13am 13 Oct 2011 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
आज बेटियों का दिन है। मेरी बड़ी बेटी दृष्टि के जन्‍म पर यह कविता अपने आप फूटी थी, आत्‍मा की गहराइयों से। आज आप सब दोस्‍तों के लिए यह कविता दुनिया की तमाम बेटियों के नाम करता हूं। दृष्टि तुम्‍हारे स्‍वागत मेंदृष्टितुम्‍हारे स्‍वागत मेंमरुधरा की तपती रेत पर बरस गयीसाव... Read more
clicks 245 View   Vote 0 Like   4:16am 25 Sep 2011 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
हम चाहे नास्तिक हों या आस्तिक, पारिवारिक संबंध आपको कभी भी अनास्‍थावान नहीं होने देते, यह कारण है कि नास्तिक लोग शायद आस्तिकों की तुलना में मानवीय और पारिवारिक संबंधों को कहीं ज्‍यादा सम्‍मान देते हैं। मेरे पिता जब आठवीं कक्षा में पढ़ते थे, तभी दादाजी की अकाल मृत्‍यु ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   4:17am 20 Sep 2011 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
इधर मेरी कुछ कविताएं लखनऊ से प्रकाशित होने वाले जनसंदेश टाइम्‍स में प्रकाशित हुईं और फिर भाई प्रभात रंजन ने इन्‍हें जानकी पुल पर प्रकाशित किया। ये कविताएं अब आप सबके लिए यहां भी प्रस्‍तुत कर रहा हूं। देह विमर्शएकपरिचय सिर्फ इतना कि नाम-पता मालूममिलना शायद ही कभी हुआ... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   4:06am 12 Sep 2011 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
(एक असमाप्‍त लंबी कविता का पहला ड्राफ्ट )इस जहां में हो कहांइशरत जहांतुम्‍हारा नाम सुन-सुन कर पक ही गए हैं मेरे कानआज फिर उस उजड़ी हुईबगीची के पास से गुज़रा हूं तोतुम्‍हारी याद के नश्‍तर गहरे चुभने लगेतुम कैसे भूल सकती हो यह बगीचीयहीं मेरी पीठ पर चढ़कर तुमने तोड़ी थीं ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   6:59am 31 Aug 2011 #साम्रदायिकता
Blogger: प्रेम चंद गांधी
भ्रष्‍टाचार भारत सहित तीसरी दुनिया में खास तौर एशियाई देशों में एक विकराल समस्‍या है, जिससे आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्‍सा परेशान है। सभी देशों में इससे निपटने के कानून भी बने हुए हैं, बावजूद इसके भ्रष्‍टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा। भारत में ही देखा जाए तो बैंकिंग और ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   4:31am 20 Aug 2011 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
तेरा घर और मेरा जंगल भीगता है साथ साथऐसी बरसातें कि बादल भीगता है साथ साथ                            *परवीन शाकिर क्‍या घर, क्‍या जंगल और क्‍या बादल, सावन में तो यूं लगता है जैसे पूरी कायनात भीग रही है। पत्‍ता-पत्‍ता, बूटा-बूटा, रेशा-रेशा, ... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   3:24am 24 Jul 2011 #मौसम
Blogger: प्रेम चंद गांधी
साप्ताहिक पत्रिका ‘शुक्रवार’ में मेरी तीन कविताएं प्रकाशित हुई हैं। आज से ब्लॉग का सिलसिला फिर शुरू करते हैं। सिक्के तल में पड़े रह जाते हैंनदियां समंदर तक पहुंच जाती हैंआस्था नदियों में है कि जल मेंमालूम नहींपर श्रद्धा में अर्पित किए गए सिक्के नदी के तल में हैंआस्थ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   3:58pm 26 May 2011 #
Blogger: प्रेम चंद गांधी
यह कहानी मेरी प्रिय प्रेम कहानियों में से एक है। पिछले दिनों प्रेम दिवस के पूर्व रविवार 13 फरवरी, 2011 को यह राजस्‍थान पत्रिका के रविवारीय संस्‍करण में प्रकाशित हुई। इस लंबी कहानी को अखबार के लिए कुछ संक्षिप्‍त किया गया है। "उसने कहा है कि अगर मैं उसके लिए एक लाल गुलाब ले आ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   2:18pm 23 Feb 2011 #प्रथम प्रेम
Blogger: प्रेम चंद गांधी
भोर की पहली किरण की तरह आता है जिंदगी में पहला प्रेम और पूरे वजूद को इस तरह जकड़ लेता है जैसे आकाश में परिंदों का एक अंतहीन काफिला हमें उड़ाता लिए चला जा रहा हो। कोई नहीं जानता कि यह कब, क्यों और कैसे होता है, लेकिन जिसके जीवन में पहला प्रेम आता है उसके लिए ही नहीं दुनिया क... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   1:04pm 20 Feb 2011 #प्रथम प्रेम
Blogger: प्रेम चंद गांधी
तीन बाई दो की उस पथरीली बेंच पर तुमने बैठते ही पूछा था किबसन्त से पहले झड़े हुए पत्तों काउल्काओं से क्या रिश्ता हैपसोपेश में पड़ गया था मैं यह सोचकर किउल्काएँ कौनसे बसंत के पहले गिरती हैं किपृथ्वी के अलावा सृष्टि में और कहाँ आता है बसन्तचंद्रमा से पूछा मैंने तो उसने क... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   9:13am 6 Feb 2011 #बसंत
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