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मंतव्य : View Blog Posts
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मंतव्य

पहले पहल मेरे लिए सुन्दरता के मायने की कुछ और थेमसलन तब किसी स्त्री की मांसलता मुझे लुभाती थीकिसी का गौरवर्ण मुझे सहज आकर्षित कर लेता थाऔर अक्सर ही कृत्रिमता मुझे आसानी से प्रभावित कर देती थी,फिर मैं तुमसे मिला,संभवतया ये घटना मेरे जीवन की मधुर स्मृतियों में श्रेष्ठ ...
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Tag :प्रेम
  October 3, 2013, 7:41 am
गाँधी, तुम थे ये मानना ज़रा दुष्कर हो चला है मेरे लिएआजकल कौन किसी के कहने से यूँ सब कुछ छोड़ छाड़ कर चल देता हैअब कौन किसी के थप्पड़ मरने पर अपना दूसरा गाल भी आगे कर देता हैबापू! अब कहा केवल अहिंसा के दम पर दुश्मनों को शिकस्त दे पाना मुमकिन हैअब कहा तुम सा समर्पण और धैर्य ला पा...
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Tag :कविता
  October 3, 2013, 7:25 am
मुझे हमेशा से ही पसंद थे लाल पीले रंग,बारिश में भीगना, वो मिट्ठी की सौंधी महकछोटे बच्चो से घंटों धींगा मस्ती करना..उन्हें परेशान करनाजाड़ों की सर्द सुबहो मेंपापा के साथ उनकी रजाई में दुबके पड़े रहनागर्मियों की दोपहरी में औंधे पड़े कॉमिक्स पढनाअपनी गन्दी सी ड्राइंग पर इत...
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Tag :ज़ज्बात
  September 16, 2013, 7:56 pm
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Tag :
  September 14, 2013, 2:44 pm
इन्होने भगवा को छीना, उन्होंने हरे को.. मैंने सफ़ेद चुना,  और शांति से जिया..इन्होने मदरसों में आतंक की घुट्टी दी, उन्होंने सरस्वती के मंदिरों में जहर भरा.. भला हुआ जो मैं निपट अज्ञानी रहा.मौलाना अजान में डूबे रहे, पंडित जी ठाकुर के भोग में.. उधर वो बच्ची भूख से ...
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Tag :हिंदी
  September 12, 2013, 7:54 pm
मैं अक्सर सोचा करता था कीखुशियाँ यूँ ही नहीं आती है... बेमकसदना ही कोई मुक्कमल तरीका हैहमेशा खुश रहने काभले कोई लाख जतन कर लेमगर हमेशा खुश रहनाकिसी के बस की बात नहीं... किसी केमगर मैं गलत थायक़ीनन सौ फीसदी गलतदरअसल बड़ा आसान है खुश रहनाउपरवाले ने छोटी छोटी चीजो में हमेंय...
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Tag :कविता
  September 3, 2013, 7:40 am
अगर ये सच है कीइतिहास सदा राज सिंहासनो के पाए तले लिखा जाता हैतो फिर क्यूँ हमें कबूल नहींकी इतिहास सिर्फ वो नहीं जोराम, कृष्ण या अशोक को महान बताता हैइतिहास उन तमाम नष्ट किये, जलाये कुचले पन्नो में भीदर्ज हो सकता हैजो आज भी नरकासुर की चुराई गयी सोलह हज़ार रानियों के आंस...
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Tag :हिंदी
  August 29, 2013, 1:13 pm
वहां जान उस मासूम की गयी,इधर नेता एक नया तैयार हो गया,अब उसकी लाश के भी सौदे होंगे,सरे आम उछाली जायेगी उस मासूम की इज्जत बेमौत मरी गयी उस निरीह को न्याय दिलाने के नाम परन जाने कितने बेगुनाहों को सताया जायेगाखबरों की भूखी दुनिया को लंबे समय तकअलग अलग मसालो के साथ परोसी जा...
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Tag :कविता
  August 17, 2013, 7:39 pm
तुम हर एक रिश्ते में मुकम्मल होती हो,जब तुम मेरी माँ थी तो लगता था की हर जन्नत यही कही तेरे कदमो तले ही तो है,फिर जब तुम बहन बनी तो लगा मेरी हर मुसीबत का हल एक तुम्ही तो हो,मेरे कठिन दिनों में मेरी ताकत बन साथ कड़ी मेरी प्रेयसी भी तुम्ही तो थी,मुझे हर कदम गलत राह पर जाने से रोक...
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Tag :हिंदी
  August 12, 2013, 8:07 pm
मुझे नहीं आता शब्दों का तिलिस्म रच पानाना ही मुझमे शब्दों की अबिधा से खेल पाने का सामर्थ्य हैमुझे नही सुझाते भावो के शाब्दिक पर्यायना ही मैं ढूंढ पाता हूँ अपने मन का कोई समानार्थीमैं नहीं रच पाता हूँ कोई अद्भुत कविता..मुझे चाहिए बस दो पल के लिए तुम्हारा साथ क्योंकि जब ...
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Tag :हिंदी
  August 11, 2013, 8:18 pm
कितनी आसानी से कह दिया था मैंनेकी निभा लूँगा मैं तुम्हारे बिना, अब याद भी नहीं करूँगा तुम्हे मगर तुम हर पल याद आते होजब किसी कठिन क्षण मेंनहीं होता है कोई सहाराजब नहीं समझ पाता हूँदुनियादारी के दांव पेचजब याद आते है वो पलजो नसीब हुए थे सिर्फ तुम्हारी वजह सेएक तुम्हारे ...
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Tag :ज़ज्बात
  August 11, 2013, 2:54 pm
वो ऐसा ही कोई अगस्त का महीना थाजब तुम थे और मैं थाऔर साथ थी नक्की की वर्तुल लहरेचांदनी रातें और शीतल हवाएंइतने दिनों के हमारे रिश्ते को जब एक नाम मिलावो ऐसा ही कोई अगस्त का महीना था...कहते है पहाडो में प्रेम की जड़े होती है सबसे गहरी,वही बहा करती है प्रेम की बयारसबसे गहरी, स...
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Tag :ज़ज्बात
  August 9, 2013, 9:23 am
हर गांव में होता हैएक बुढा बरगदजो जानता है उस गांव की हर एक कहानीउस गांव का हर दुःख,हर दर्दजो शामिल होता है उस गांव की हर खुशी मेंमगर अफ़सोस... मेरे गांव में अब कोई बरगद नहीं बचायानि.... हर कटते बरगद के साथ ही कट गयीमेरे गांव की हर कहानीन जाने कितनी अल्हड जवानियो के किस्...
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Tag :समाज
  August 4, 2013, 1:15 pm
मुझे शब्द पसंद थे तुम्हे मौन..मुझे भीड़ चाहिए थी, तुम्हे एकांत..मुझे अफसाने उकसाते थे, तुम्हे जमीन की हकीकत..मुझे बागी बन जाना था, तुम्हे तुम्हारे संस्कार रोकते थे.....फिर भी मुझे तुम पसंद थे, तुम्हे मैंऔर अब जान मैं बिलकुल तुम्हारे जैसा हो गया हूँ..ना मुझे शब्दों से प्यार रह...
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Tag :ज़ज्बात
  July 30, 2013, 6:23 pm
तुम बिलकुल भी तो नहीं थी..अप्रतिम... अद्वितीय... अद्भुत..ना ही तुम्हारा मुख चन्द्रमा सा थाना ही तुम्हारे बाल,  काले मेघना तुम्हारी आंखे मानसरोवर सी थीना तुम्हारे होठ कमलतुम भी औरों जैसी ही तो थीवो ही हाड-मांस से बनीवो ही रगों में बहता खून, बदन से बहता पसीनाऔरों की ही तरह बात...
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Tag :यादें...
  June 13, 2013, 7:45 am
कितना कुछ था हमारे दरमियाँ.. बेवजह सावो बेवजह तेरा हँसना.. वो बेवजह की मेरी नाराजगियां,बेवजह ही होगा तेरा यूँ मेरे दिल में उतर जाना,बेवजह ही तो था तेरा मुझमे सिमट जाना,गर उस वक्त तेरे संग-ओ-साथ को कुछ मुकम्मल वजहे मिल जाती,तो आज शायद यूँ बेवजह जीना नहीं पडता,कुछ रिश्ते यूँ ...
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Tag :यादें...
  June 13, 2013, 7:37 am
सुना है...वेरा ! अब भी उन सपनो की कथा सुनाती है,अब भी आनासागर के किनारे प्यार की कसमे खायी जाती है,दरगाह जाते हुए... मदार गेट पर अब भी किसी का यूँ ही इंतज़ार होता है,बस स्टेंड की पार्किंग अब भी उसकी एक्टिवा से गुलज़ार है,उसकी कमर अब भी पुष्कर की घाटियों सी बल खाती है,उसकी आवाज ...
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Tag :प्रेम
  April 5, 2013, 9:01 pm
लो आज आखिर आ ही गयाआखिरी दिन ..हमारे प्रेम का,हमारे समर्पण का,हमारे सपनो का,हर उस लम्हे काजो हमने बियाते थेएक दुसरे की यादों में खोये हुएउन लम्हों, उन यादों के बिनाकैसे होगा मुमकिन मेरा जीनाया शायद जी भी लूंमगर तेरे बिना वो जीनाकभी जीना नही होगाजैसे तेरे बिना जीना कभी ज...
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Tag :आपबीती
  March 13, 2013, 12:16 pm
बस चंद दिन और... फिर तुम नहीं होंगीयूँ इस तरह मेरे साथजिस तरह होती हो इन दिनोंना होंगी तुम्हारी हिदायतेना होगी कोई शिकायतेसोच कर भी घबरा जाता हूँ मैंफिर कोई नहीं होगा यूँ हर बार मुझे समझाने वालाइस बार बिखरने से पहले  हज़ार बार सोचना होगा मुझकोअब नहीं होगा कोई मुझे संभाल...
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Tag :प्रेरणा
  December 9, 2012, 2:23 pm
बीत चूका है वो समयजब तुम और सुख आते थे साथ साथ..एक दूसरे कीगल बहियाँ  डाले..जब खुशियाँढूंढा करती थीबहाने तेरे होने के--अब तो लगता है दुःख में और तुममे कोई रिश्ता है.. जब भी ये होता है तुम भी होती हो यहीं कहीं आस पास..मेरी यादों में ...
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Tag :यादें...
  December 7, 2012, 4:30 pm
लेखक - किधोर चौधरी पिछले दिनों कुछ एसा गठित हुआ जो हिन्दी साहित्य में एक अनूठा इतिहास रच गया। ऐसे दौर में जब हर कोई किताबो और उनको पढने वालों को बीते जमाने का बताने से नहीं चूक रहा था ठीक उसी समय एक नए परन्तु अनजाने नहीं ब्लॉगर की पहली किताब आने की घोषणा होती है और मानो सम...
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Tag :हिंदी
  November 24, 2012, 1:02 pm
लेखक - किधोर चौधरी पिछले दिनों कुछ एसा गठित हुआ जो हिन्दी साहित्य में एक अनूठा इतिहास रच गया। ऐसे दौर में जब हर कोई किताबो और उनको पढने वालों को बीते जमाने का बताने से नहीं चूक रहा था ठीक उसी समय एक नए परन्तु अनजाने नहीं ब्लॉगर की पहली किताब आने की घोषणा होती है और मानो सम...
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Tag :पुस्तक
  November 24, 2012, 1:02 pm
सोचा था की हर लम्हा जिन्दगी का गुजरेगा तेरे ही संगअब तेरे बिना जीना गर जिंदगी है तो हाँ जिंदा हूँ मैं...कभी सोचा भी न था की जीना पड़ेगा बिन तेरेअब तुझ बिन जीने की सोचना गर जिंदगी है तो हाँ जिंदा हूँ मैं...गर सिर्फ सांसों का चलना भर जिंदगी है...तो हाँ.. जिंदा हूँ मैं.......
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Tag :यादें...
  November 17, 2012, 5:25 pm
धरती पर चार दीवारे खड़ी कर देने भर से जो बना था उसी को वो घर कहता था. और रात को सोते समय उसके और चाँद तारो के बीच में जो टूटी खपरैल आती थी उसे छत. इसी छत में बने एक सुराख़ से छन कर आने वाले धूप के चंद टुकडो से खेलते उसका दिन बितता था. घर में जैसे जैसे धूप सरकती वो इधर से उधर सरकता ज...
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Tag :कहानी
  November 8, 2012, 11:26 am
क्यूँ घर भर का काज करे है वोक्यूँ दुनिया भर से लाज करे है वोक्यूँ खेल सके ना मन से वो,क्यूँ सहन करे है सब कुछ वोहै वो भी भैया जैसी ही पर भैया सा प्यार नहीं मिलताहै इंसा वो भी उस जैसे हीपर इंसा सा मान नहीं मिलता...
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Tag :ज़ज्बात
  November 6, 2012, 12:32 pm
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