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Blog: मंतव्य

Blogger: kamal k. jain
पहले पहल मेरे लिए सुन्दरता के मायने की कुछ और थेमसलन तब किसी स्त्री की मांसलता मुझे लुभाती थीकिसी का गौरवर्ण मुझे सहज आकर्षित कर लेता थाऔर अक्सर ही कृत्रिमता मुझे आसानी से प्रभावित कर देती थी,फिर मैं तुमसे मिला,संभवतया ये घटना मेरे जीवन की मधुर स्मृतियों में श्रेष्ठ ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   2:11am 3 Oct 2013 #प्रेम
Blogger: kamal k. jain
गाँधी, तुम थे ये मानना ज़रा दुष्कर हो चला है मेरे लिएआजकल कौन किसी के कहने से यूँ सब कुछ छोड़ छाड़ कर चल देता हैअब कौन किसी के थप्पड़ मरने पर अपना दूसरा गाल भी आगे कर देता हैबापू! अब कहा केवल अहिंसा के दम पर दुश्मनों को शिकस्त दे पाना मुमकिन हैअब कहा तुम सा समर्पण और धैर्य ला पा... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   1:55am 3 Oct 2013 #कविता
Blogger: kamal k. jain
मुझे हमेशा से ही पसंद थे लाल पीले रंग,बारिश में भीगना, वो मिट्ठी की सौंधी महकछोटे बच्चो से घंटों धींगा मस्ती करना..उन्हें परेशान करनाजाड़ों की सर्द सुबहो मेंपापा के साथ उनकी रजाई में दुबके पड़े रहनागर्मियों की दोपहरी में औंधे पड़े कॉमिक्स पढनाअपनी गन्दी सी ड्राइंग पर इत... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   2:26pm 16 Sep 2013 #ज़ज्बात
clicks 180 View   Vote 0 Like   9:14am 14 Sep 2013 #
Blogger: kamal k. jain
इन्होने भगवा को छीना, उन्होंने हरे को.. मैंने सफ़ेद चुना,  और शांति से जिया..इन्होने मदरसों में आतंक की घुट्टी दी, उन्होंने सरस्वती के मंदिरों में जहर भरा.. भला हुआ जो मैं निपट अज्ञानी रहा.मौलाना अजान में डूबे रहे, पंडित जी ठाकुर के भोग में.. उधर वो बच्ची भूख से ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   2:24pm 12 Sep 2013 #हिंदी
Blogger: kamal k. jain
मैं अक्सर सोचा करता था कीखुशियाँ यूँ ही नहीं आती है... बेमकसदना ही कोई मुक्कमल तरीका हैहमेशा खुश रहने काभले कोई लाख जतन कर लेमगर हमेशा खुश रहनाकिसी के बस की बात नहीं... किसी केमगर मैं गलत थायक़ीनन सौ फीसदी गलतदरअसल बड़ा आसान है खुश रहनाउपरवाले ने छोटी छोटी चीजो में हमेंय... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   2:10am 3 Sep 2013 #कविता
Blogger: kamal k. jain
अगर ये सच है कीइतिहास सदा राज सिंहासनो के पाए तले लिखा जाता हैतो फिर क्यूँ हमें कबूल नहींकी इतिहास सिर्फ वो नहीं जोराम, कृष्ण या अशोक को महान बताता हैइतिहास उन तमाम नष्ट किये, जलाये कुचले पन्नो में भीदर्ज हो सकता हैजो आज भी नरकासुर की चुराई गयी सोलह हज़ार रानियों के आंस... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   7:43am 29 Aug 2013 #हिंदी
Blogger: kamal k. jain
वहां जान उस मासूम की गयी,इधर नेता एक नया तैयार हो गया,अब उसकी लाश के भी सौदे होंगे,सरे आम उछाली जायेगी उस मासूम की इज्जत बेमौत मरी गयी उस निरीह को न्याय दिलाने के नाम परन जाने कितने बेगुनाहों को सताया जायेगाखबरों की भूखी दुनिया को लंबे समय तकअलग अलग मसालो के साथ परोसी जा... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   2:09pm 17 Aug 2013 #कविता
Blogger: kamal k. jain
तुम हर एक रिश्ते में मुकम्मल होती हो,जब तुम मेरी माँ थी तो लगता था की हर जन्नत यही कही तेरे कदमो तले ही तो है,फिर जब तुम बहन बनी तो लगा मेरी हर मुसीबत का हल एक तुम्ही तो हो,मेरे कठिन दिनों में मेरी ताकत बन साथ कड़ी मेरी प्रेयसी भी तुम्ही तो थी,मुझे हर कदम गलत राह पर जाने से रोक... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   2:37pm 12 Aug 2013 #हिंदी
Blogger: kamal k. jain
मुझे नहीं आता शब्दों का तिलिस्म रच पानाना ही मुझमे शब्दों की अबिधा से खेल पाने का सामर्थ्य हैमुझे नही सुझाते भावो के शाब्दिक पर्यायना ही मैं ढूंढ पाता हूँ अपने मन का कोई समानार्थीमैं नहीं रच पाता हूँ कोई अद्भुत कविता..मुझे चाहिए बस दो पल के लिए तुम्हारा साथ क्योंकि जब ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   2:48pm 11 Aug 2013 #हिंदी
Blogger: kamal k. jain
कितनी आसानी से कह दिया था मैंनेकी निभा लूँगा मैं तुम्हारे बिना, अब याद भी नहीं करूँगा तुम्हे मगर तुम हर पल याद आते होजब किसी कठिन क्षण मेंनहीं होता है कोई सहाराजब नहीं समझ पाता हूँदुनियादारी के दांव पेचजब याद आते है वो पलजो नसीब हुए थे सिर्फ तुम्हारी वजह सेएक तुम्हारे ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   9:24am 11 Aug 2013 #ज़ज्बात
Blogger: kamal k. jain
वो ऐसा ही कोई अगस्त का महीना थाजब तुम थे और मैं थाऔर साथ थी नक्की की वर्तुल लहरेचांदनी रातें और शीतल हवाएंइतने दिनों के हमारे रिश्ते को जब एक नाम मिलावो ऐसा ही कोई अगस्त का महीना था...कहते है पहाडो में प्रेम की जड़े होती है सबसे गहरी,वही बहा करती है प्रेम की बयारसबसे गहरी, स... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   3:53am 9 Aug 2013 #ज़ज्बात
Blogger: kamal k. jain
हर गांव में होता हैएक बुढा बरगदजो जानता है उस गांव की हर एक कहानीउस गांव का हर दुःख,हर दर्दजो शामिल होता है उस गांव की हर खुशी मेंमगर अफ़सोस... मेरे गांव में अब कोई बरगद नहीं बचायानि.... हर कटते बरगद के साथ ही कट गयीमेरे गांव की हर कहानीन जाने कितनी अल्हड जवानियो के किस्... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   7:45am 4 Aug 2013 #समाज
Blogger: kamal k. jain
मुझे शब्द पसंद थे तुम्हे मौन..मुझे भीड़ चाहिए थी, तुम्हे एकांत..मुझे अफसाने उकसाते थे, तुम्हे जमीन की हकीकत..मुझे बागी बन जाना था, तुम्हे तुम्हारे संस्कार रोकते थे.....फिर भी मुझे तुम पसंद थे, तुम्हे मैंऔर अब जान मैं बिलकुल तुम्हारे जैसा हो गया हूँ..ना मुझे शब्दों से प्यार रह... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   12:53pm 30 Jul 2013 #ज़ज्बात
Blogger: kamal k. jain
तुम बिलकुल भी तो नहीं थी..अप्रतिम... अद्वितीय... अद्भुत..ना ही तुम्हारा मुख चन्द्रमा सा थाना ही तुम्हारे बाल,  काले मेघना तुम्हारी आंखे मानसरोवर सी थीना तुम्हारे होठ कमलतुम भी औरों जैसी ही तो थीवो ही हाड-मांस से बनीवो ही रगों में बहता खून, बदन से बहता पसीनाऔरों की ही तरह बात... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   2:15am 13 Jun 2013 #यादें...
Blogger: kamal k. jain
कितना कुछ था हमारे दरमियाँ.. बेवजह सावो बेवजह तेरा हँसना.. वो बेवजह की मेरी नाराजगियां,बेवजह ही होगा तेरा यूँ मेरे दिल में उतर जाना,बेवजह ही तो था तेरा मुझमे सिमट जाना,गर उस वक्त तेरे संग-ओ-साथ को कुछ मुकम्मल वजहे मिल जाती,तो आज शायद यूँ बेवजह जीना नहीं पडता,कुछ रिश्ते यूँ ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   2:07am 13 Jun 2013 #यादें...
Blogger: kamal k. jain
सुना है...वेरा ! अब भी उन सपनो की कथा सुनाती है,अब भी आनासागर के किनारे प्यार की कसमे खायी जाती है,दरगाह जाते हुए... मदार गेट पर अब भी किसी का यूँ ही इंतज़ार होता है,बस स्टेंड की पार्किंग अब भी उसकी एक्टिवा से गुलज़ार है,उसकी कमर अब भी पुष्कर की घाटियों सी बल खाती है,उसकी आवाज ... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   3:31pm 5 Apr 2013 #प्रेम
Blogger: kamal k. jain
लो आज आखिर आ ही गयाआखिरी दिन ..हमारे प्रेम का,हमारे समर्पण का,हमारे सपनो का,हर उस लम्हे काजो हमने बियाते थेएक दुसरे की यादों में खोये हुएउन लम्हों, उन यादों के बिनाकैसे होगा मुमकिन मेरा जीनाया शायद जी भी लूंमगर तेरे बिना वो जीनाकभी जीना नही होगाजैसे तेरे बिना जीना कभी ज... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   6:46am 13 Mar 2013 #आपबीती
Blogger: kamal k. jain
बस चंद दिन और... फिर तुम नहीं होंगीयूँ इस तरह मेरे साथजिस तरह होती हो इन दिनोंना होंगी तुम्हारी हिदायतेना होगी कोई शिकायतेसोच कर भी घबरा जाता हूँ मैंफिर कोई नहीं होगा यूँ हर बार मुझे समझाने वालाइस बार बिखरने से पहले  हज़ार बार सोचना होगा मुझकोअब नहीं होगा कोई मुझे संभाल... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   8:53am 9 Dec 2012 #प्रेरणा
Blogger: kamal k. jain
बीत चूका है वो समयजब तुम और सुख आते थे साथ साथ..एक दूसरे कीगल बहियाँ  डाले..जब खुशियाँढूंढा करती थीबहाने तेरे होने के--अब तो लगता है दुःख में और तुममे कोई रिश्ता है.. जब भी ये होता है तुम भी होती हो यहीं कहीं आस पास..मेरी यादों में ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   11:00am 7 Dec 2012 #यादें...
Blogger: kamal k. jain
लेखक - किधोर चौधरी पिछले दिनों कुछ एसा गठित हुआ जो हिन्दी साहित्य में एक अनूठा इतिहास रच गया। ऐसे दौर में जब हर कोई किताबो और उनको पढने वालों को बीते जमाने का बताने से नहीं चूक रहा था ठीक उसी समय एक नए परन्तु अनजाने नहीं ब्लॉगर की पहली किताब आने की घोषणा होती है और मानो सम... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   7:32am 24 Nov 2012 #हिंदी
Blogger: kamal k. jain
लेखक - किधोर चौधरी पिछले दिनों कुछ एसा गठित हुआ जो हिन्दी साहित्य में एक अनूठा इतिहास रच गया। ऐसे दौर में जब हर कोई किताबो और उनको पढने वालों को बीते जमाने का बताने से नहीं चूक रहा था ठीक उसी समय एक नए परन्तु अनजाने नहीं ब्लॉगर की पहली किताब आने की घोषणा होती है और मानो सम... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   7:32am 24 Nov 2012 #पुस्तक
Blogger: kamal k. jain
सोचा था की हर लम्हा जिन्दगी का गुजरेगा तेरे ही संगअब तेरे बिना जीना गर जिंदगी है तो हाँ जिंदा हूँ मैं...कभी सोचा भी न था की जीना पड़ेगा बिन तेरेअब तुझ बिन जीने की सोचना गर जिंदगी है तो हाँ जिंदा हूँ मैं...गर सिर्फ सांसों का चलना भर जिंदगी है...तो हाँ.. जिंदा हूँ मैं....... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   11:55am 17 Nov 2012 #यादें...
Blogger: kamal k. jain
धरती पर चार दीवारे खड़ी कर देने भर से जो बना था उसी को वो घर कहता था. और रात को सोते समय उसके और चाँद तारो के बीच में जो टूटी खपरैल आती थी उसे छत. इसी छत में बने एक सुराख़ से छन कर आने वाले धूप के चंद टुकडो से खेलते उसका दिन बितता था. घर में जैसे जैसे धूप सरकती वो इधर से उधर सरकता ज... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   5:56am 8 Nov 2012 #कहानी
Blogger: kamal k. jain
क्यूँ घर भर का काज करे है वोक्यूँ दुनिया भर से लाज करे है वोक्यूँ खेल सके ना मन से वो,क्यूँ सहन करे है सब कुछ वोहै वो भी भैया जैसी ही पर भैया सा प्यार नहीं मिलताहै इंसा वो भी उस जैसे हीपर इंसा सा मान नहीं मिलता... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   7:02am 6 Nov 2012 #ज़ज्बात
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