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Blog: कुछ लम्हे दिल के...

Blogger: अर्चना तिवारी
अबन विचार में गांधी हैंन हृदय में राम ही'गांधी'की जगह 'गोली मारो'हो गयाऔर 'राम'की जगह 'राज करो'।अबन देश सोने की चिड़िया हैन अनेकता में एकता ही'सोने की चिड़िया''ट्विटर'हो गईऔर 'एकता''धारावाहिक निर्माता'।अबन बाग में माली हैन पौधे को पानी ही'माली''महंत'हो गयाऔर 'पानी''करंट'।तो ब... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   3:10pm 30 Jan 2020 #
Blogger: अर्चना तिवारी
अबन विचार में गांधी हैंन हृदय में राम ही'गांधी'की जगह 'गोली मारो'हो गयाऔर 'राम'की जगह 'राज करो'।अबन देश सोने की चिड़िया हैन अनेकता में एकता ही'सोने की चिड़िया''ट्विटर'हो गईऔर 'एकता''धारावाहिक निर्माता'।अबन बाग में माली हैन पौधे को पानी ही'माली''महंत'हो गयाऔर 'पानी''करंट'।तो ब... Read more
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Blogger: अर्चना तिवारी
मैं, पत्थर हूँ,पड़ा रहता हूँ कहीं भीचल-फिर नहीं सकतान कुछ बोल सकता हूँन ही देख-सुन सकने की क्षमता है मेरीफिर भी जाने क्यों काई सी जम जाती है मेरी आँखों के इर्द-गिर्द?शायद इसलिए कि महसूसता हूँजो भी घटित हो रहा हो मेरे इर्द-गिर्द।तुम, मानव होचल-फिर सकते होबोल सकते होदेख-सुन... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   11:32am 9 Jan 2020 #
Blogger: अर्चना तिवारी
मैं, पत्थर हूँ,पड़ा रहता हूँ कहीं भीचल-फिर नहीं सकतान कुछ बोल सकता हूँन ही देख-सुन सकने की क्षमता है मेरीफिर भी जाने क्यों काई सी जम जाती है मेरी आँखों के इर्द-गिर्द?शायद इसलिए कि महसूसता हूँजो भी घटित हो रहा हो मेरे इर्द-गिर्द।तुम, मानव होचल-फिर सकते होबोल सकते होदेख-सुन... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   11:32am 9 Jan 2020 #
Blogger: अर्चना तिवारी
समय कहाँ पर आ कर ठहरा है?अंधेरे का वर्चस्व गहरा हैक्या सरपंच, क्या पंचायत की कहेंपूरा गाँव ही जब अंधा, गूँगा, बहरा हैलगा ज्ञानमंदिर पर अर्थ का पहरा हैफिर भी गुमान है कि भविष्य सुनहरा हैकहते हैं ईश्वर के घर देर हैशायद इसीलिए बस्ती का उजाला कहीं और ठहरा है... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   5:14pm 14 Nov 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
समय कहाँ पर आ कर ठहरा है?अंधेरे का वर्चस्व गहरा हैक्या सरपंच, क्या पंचायत की कहेंपूरा गाँव ही जब अंधा, गूँगा, बहरा हैलगा ज्ञानमंदिर पर अर्थ का पहरा हैफिर भी गुमान है कि भविष्य सुनहरा हैकहते हैं ईश्वर के घर देर हैशायद इसीलिए बस्ती का उजाला कहीं और ठहरा है... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   5:14pm 14 Nov 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
आज भी मिलते हैं ये झुनझुने और भोंपूलेकिन आजकल के बच्चे इससे नहीं खेलतेफिर भी क्यों बनते हैं ऐसे खिलौने?कौन खरीदता होगा इन्हें? आपका बच्चा इनको लेने की जिद्द तो करता न होगा? यदि जिद्द करे तो क्या खरीदेंगे आप?क्या यूँ ही नहीं खरीद लेंगे अपने बच्चे के लिए?या फिर किसी बच्चे ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   7:19am 11 Nov 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
आज भी मिलते हैं ये झुनझुने और भोंपूलेकिन आजकल के बच्चे इससे नहीं खेलतेफिर भी क्यों बनते हैं ऐसे खिलौने?कौन खरीदता होगा इन्हें? आपका बच्चा इनको लेने की जिद्द तो करता न होगा? यदि जिद्द करे तो क्या खरीदेंगे आप?क्या यूँ ही नहीं खरीद लेंगे अपने बच्चे के लिए?या फिर किसी बच्चे ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   7:19am 11 Nov 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
कहते हैं एक-दूसरे से दो देशों के रहवासी यह, बताओ किसका दुःख है बड़ा, किसकी परेशानी है जायज़...?वे कहते हैं, "हमें मेट्रो चाहिए, हम अपने बच्चों को डेढ़-डेढ़ घंटे लोकल में लटकाकर नहीं भेज सकते। हमारी परेशानियों को तुम दूर रहवासी क्या जानो?"वे कहते हैं, हमें पेड़ चाहिए, हम अपने ... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   7:53am 6 Oct 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
कहते हैं एक-दूसरे से दो देशों के रहवासी यह, बताओ किसका दुःख है बड़ा, किसकी परेशानी है जायज़...?वे कहते हैं, "हमें मेट्रो चाहिए, हम अपने बच्चों को डेढ़-डेढ़ घंटे लोकल में लटकाकर नहीं भेज सकते। हमारी परेशानियों को तुम दूर रहवासी क्या जानो?"वे कहते हैं, हमें पेड़ चाहिए, हम अपने ... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   7:53am 6 Oct 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
देश पहले होकिन्तु देशवासी?सड़क-सड़क स्वच्छ होकिन्तु विचार?नगर-नगर विकसित होकिन्तु जंगल?मंच-मंच भाषण होकिन्तु सवाल?घोष जय श्री राम का होकिन्तु आचरण?तलवार स्वतंत्र होकिन्तु कलम?'राज'की व्यवस्था होकिन्तु अर्थव्यवस्था?मिशन में स्वास्थ्य होकिन्तु भूख?बलात्कार की खुली... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   9:36am 2 Oct 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
स्थापित हो जाना एक ऐसी शय हैजिसे भय होता है हर पल गिराए जाने कारोपित किए जाते समय भयभीत नहीं करता भूमि का कच्चापनन ही उखड़ जाने का होता है भयउस दौरान कितनी ही बार निराई जाती हैजड़ों के आस-पास की कच्ची भूमिखर-पतवार उग जाने पर उलट-पलट दी जाती है मिट्टी भीताकि जड़ों तक पहुँ... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   11:50am 14 Sep 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
अब भी याद आती हैवह।जब रोते-रोते हिचकी बंध जातीवह पास आकर पुचकारतीकभी बाँहों में भरकरढाढस बँधाती, सहलाती।अब भी याद आती हैवह।घर से दूर रहने परउसका ही साथ संबल देताउसके स्पर्श की गर्माहटकुछ पहचानी सी लगतीअनजानों में एक वही तोअपनी सी लगती।अब भी याद आती हैवह।किसी विद्य... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   9:50am 22 Aug 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
क्या?तुम प्रश्न करते हो?तुम देशद्रोही हो!तुम नमन नहीं सलाम करते हो?तुम देशद्रोही हो!तुम सूरज की जगह चाँद देखते हो?तुम देशद्रोही हो!तुम गाय को नहीं बच्चे को बचाते हो?तुम देशद्रोही हो!तुम राम नहीं ईश्वर कहते हो?तुम देशद्रोही हो!तुम जय भारत नहीं जय हिंद कहते हो?तुम देशद्रो... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   2:09pm 15 Aug 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
लिखें तो क्या लिखेंहँसी लिखें, खुशी लिखेंया कि लिखें दर्द?या वो लिखें जो आता है नज़र?लेकिन, जो नज़र आता है उसे लिखा जाता है क्या?लिखा जाता है तो पढ़ा जाता है क्या?पढ़ा जाता है तो समझा जाता है क्या?समझे जाने पर परिवर्तन आता है क्या?फिर भी लिखा तो जाता ही है नाक्योंकिलिखा जा... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   4:35pm 3 Aug 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
लिखें तो क्या लिखेंहँसी लिखें, खुशी लिखेंया कि लिखें दर्द?या वो लिखें जो आता है नज़र?लेकिन, जो नज़र आता है उसे लिखा जाता है क्या?लिखा जाता है तो पढ़ा जाता है क्या?पढ़ा जाता है तो समझा जाता है क्या?समझे जाने पर परिवर्तन आता है क्या?फिर भी लिखा तो जाना चाहिए नाक्योंकि लिखा ज... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   4:35pm 3 Aug 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
उस दिन आँगन में किलकारी गूँजते ही तुम्हें अपने विशाल कन्धों का पहली बार एहसास हुआ था। जब तुमने एक कपड़े में लिपटे नन्हे धड़कते दिल को अपने सीने से पहली बार लगाया था। बरबस ही उसका माथा चूमते हुए तुमने उससे दुनिया की हर ख़ुशी देने का वादा किया था।शाम को काम से लौटते समय प्या... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   6:14am 16 Jun 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
एक आदमी अपने अंतर की सुनता हैएक आदमी भीड़ की सुनता हैभीड़ की सुनने में, उसके जैसा करने में भय नहीं रहताभय नहीं रहता क्योंकि कोई जिम्मेदारी नहीं लेनी पड़तीजो भीड़ करे, करोजो भीड़ कहे, कहोजो भीड़ सुने, सुनोलेकिन जो आदमी अपने अंतर की सुनता है, गुनता हैउसे अपने कहने, करने की ... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   8:34am 11 Jun 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
एक आदमी अपने अंतर की सुनता हैएक आदमी भीड़ की सुनता हैभीड़ की सुनने में, उसके जैसा करने में भय नहीं रहताभय नहीं रहता क्योंकि कोई जिम्मेदारी नहीं लेनी पड़तीजो भीड़ करे, करोजो भीड़ कहे, कहोजो भीड़ सुने, सुनोलेकिन जो आदमी अपने अंतर की सुनता है, गुनता हैउसे अपने कहने, करने की ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   8:34am 11 Jun 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
एक आदमी अपने अंतर की सुनता हैएक आदमी भीड़ की सुनता हैभीड़ की सुनने में, उसके जैसा करने में भय नहीं रहताभय नहीं रहता क्योंकि कोई जिम्मेदारी नहीं लेनी पड़तीजो भीड़ करे, करोजो भीड़ कहे, कहोजो भीड़ सुने, सुनोलेकिन जो आदमी अपने अंतर की सुनता है, गुनता हैउसे अपने कहने, करने की ... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   8:34am 11 Jun 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
कुछ देखो-सुनो, तो बोलोकि तुम नहीं हो कोई दीवारजो जकड़ी होती हैसीमेंट से, बालू सेताकि ढह ना जाए।या तुम भी जकड़े हुए होऐसे ही सीमेंट से, बालू सेकि ढह जाओगेभड़भड़ाकर?तुम बोलोकि तुम नहीं हो कोई दीवारजिनमें पड़ी होती हैंलोहे की सरियाएंताकि ढह ना जाए।या तुम्हारे अंदर भी हैं... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   6:42am 9 Dec 2018 #
Blogger: अर्चना तिवारी
मैं, नर्मदा पर खड़ा सोच रहा हूँअब लोग मेरे जिस्म को छू सकेंगेलेकिन क्या इन फौलादी ऊँचाईयों परउनके एहसास भी मुझको छू सकेंगे?मैं सोच रहा हूँरियासतों का एकीकरण किया था लेकिनक्या सियासतों का एकीकरण कर सकूँगा?प्रतीक बना हूँ एकता काक्या नफरतों को खंडित कर सकूँगा?मैं, नर्मद... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   7:09am 4 Nov 2018 #
Blogger: अर्चना तिवारी
भीड़भीड़ की न कोई चेतना होती हैन ही कोई विचारभीड़ बस भीड़ होती हैभीड़ एक ही समय में दो जगह होती हैभीड़ पक्ष में होती हैभीड़ विपक्ष में होती हैभीड़ किसी की नहीं होतीभीड़ बस भीड़ होती हैभीड़ एक पल में प्रतिष्ठित करती हैभीड़ एक पल में धूल-धूसरित करती हैभीड़ बस भीड़ होती ह... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   11:09am 19 Jun 2018 #
Blogger: अर्चना तिवारी
किताबों के कुछ पन्ने बार-बार खुल जाते हैं कुछ वो जो मन से पढ़े गए हों या फिर  वो जिन पर मोड़ पड़ गए होंकुछ के बीच बुकमार्क लगे मिल जाते हैंजो लगाए गए होते हैं याद रखने  के लिएआगे पढ़े जाने के लिएलेकिन  उन्हें  कभी पढ़ने का मौका नहीं मिलताऐसे ही किसी दिन दिख जाते हैंपन्न... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   1:36pm 1 Jul 2017 #
Blogger: अर्चना तिवारी
 मधुमास यानी प्रेम का मासप्रेम शब्दों में सिमटी कोई कविता नहीं हैजिसे प्रकट करने के लिए कहा जाय प्रेम प्रकट किये जाने का मोहताज भी नहीं है  क्योंकि यह अप्रकट होकर भी संचारित हो जाता...प्रेम शर्तों में लिपटी कोई नियमावली भी नहीं हैजिसको मानने के लिए बाध्य किया जा... Read more
clicks 278 View   Vote 0 Like   12:27pm 3 Feb 2017 #
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