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कुछ लम्हे दिल के...

उस दिन आँगन में किलकारी गूँजते ही तुम्हें अपने विशाल कन्धों का पहली बार एहसास हुआ था। जब तुमने एक कपड़े में लिपटे नन्हे धड़कते दिल को अपने सीने से पहली बार लगाया था। बरबस ही उसका माथा चूमते हुए तुमने उससे दुनिया की हर ख़ुशी देने का वादा किया था।शाम को काम से लौटते समय प्या...
कुछ लम्हे दिल के......
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  June 16, 2019, 11:44 am
एक आदमी अपने अंतर की सुनता हैएक आदमी भीड़ की सुनता हैभीड़ की सुनने में, उसके जैसा करने में भय नहीं रहताभय नहीं रहता क्योंकि कोई जिम्मेदारी नहीं लेनी पड़तीजो भीड़ करे, करोजो भीड़ कहे, कहोजो भीड़ सुने, सुनोलेकिन जो आदमी अपने अंतर की सुनता है, गुनता हैउसे अपने कहने, करने की ...
कुछ लम्हे दिल के......
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  June 11, 2019, 2:04 pm
एक आदमी अपने अंतर की सुनता हैएक आदमी भीड़ की सुनता हैभीड़ की सुनने में, उसके जैसा करने में भय नहीं रहताभय नहीं रहता क्योंकि कोई जिम्मेदारी नहीं लेनी पड़तीजो भीड़ करे, करोजो भीड़ कहे, कहोजो भीड़ सुने, सुनोलेकिन जो आदमी अपने अंतर की सुनता है, गुनता हैउसे अपने कहने, करने की ...
कुछ लम्हे दिल के......
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  June 11, 2019, 2:04 pm
कुछ देखो-सुनो, तो बोलोकि तुम नहीं हो कोई दीवारजो जकड़ी होती हैसीमेंट से, बालू सेताकि ढह ना जाए।या तुम भी जकड़े हुए होऐसे ही सीमेंट से, बालू सेकि ढह जाओगेभड़भड़ाकर?तुम बोलोकि तुम नहीं हो कोई दीवारजिनमें पड़ी होती हैंलोहे की सरियाएंताकि ढह ना जाए।या तुम्हारे अंदर भी हैं...
कुछ लम्हे दिल के......
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  December 9, 2018, 12:12 pm
मैं, नर्मदा पर खड़ा सोच रहा हूँअब लोग मेरे जिस्म को छू सकेंगेलेकिन क्या इन फौलादी ऊँचाईयों परउनके एहसास भी मुझको छू सकेंगे?मैं सोच रहा हूँरियासतों का एकीकरण किया था लेकिनक्या सियासतों का एकीकरण कर सकूँगा?प्रतीक बना हूँ एकता काक्या नफरतों को खंडित कर सकूँगा?मैं, नर्मद...
कुछ लम्हे दिल के......
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  November 4, 2018, 12:39 pm
भीड़भीड़ की न कोई चेतना होती हैन ही कोई विचारभीड़ बस भीड़ होती हैभीड़ एक ही समय में दो जगह होती हैभीड़ पक्ष में होती हैभीड़ विपक्ष में होती हैभीड़ किसी की नहीं होतीभीड़ बस भीड़ होती हैभीड़ एक पल में प्रतिष्ठित करती हैभीड़ एक पल में धूल-धूसरित करती हैभीड़ बस भीड़ होती ह...
कुछ लम्हे दिल के......
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  June 19, 2018, 4:39 pm
किताबों के कुछ पन्ने बार-बार खुल जाते हैं कुछ वो जो मन से पढ़े गए हों या फिर  वो जिन पर मोड़ पड़ गए होंकुछ के बीच बुकमार्क लगे मिल जाते हैंजो लगाए गए होते हैं याद रखने  के लिएआगे पढ़े जाने के लिएलेकिन  उन्हें  कभी पढ़ने का मौका नहीं मिलताऐसे ही किसी दिन दिख जाते हैंपन्न...
कुछ लम्हे दिल के......
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  July 1, 2017, 7:06 pm
 मधुमास यानी प्रेम का मासप्रेम शब्दों में सिमटी कोई कविता नहीं हैजिसे प्रकट करने के लिए कहा जाय प्रेम प्रकट किये जाने का मोहताज भी नहीं है  क्योंकि यह अप्रकट होकर भी संचारित हो जाता...प्रेम शर्तों में लिपटी कोई नियमावली भी नहीं हैजिसको मानने के लिए बाध्य किया जा...
कुछ लम्हे दिल के......
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  February 3, 2017, 5:57 pm
भोर का चाँद अधिक देर तक नहीं दिखता फिर भी उग आता है भोर मेंशायद वह जानता है कि इस पर उसका वश नहीं हैवश है तो केवल चलते रहने परवह जानता हैकि दिन में उसका अस्तित्व बेशक ना होपर रात पर तो उसी का एकाधिकार है......
कुछ लम्हे दिल के......
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  December 4, 2016, 12:44 pm
तुम सिर्फ़ अपने नाम तक सीमित नहीं होतुम सिर्फ़ अपने सम्मान तक सीमित नहीं होतुम सिर्फ़ अपने गान तक भी सीमित नहीं होतुम बिखरे पड़े होनदी, पहाड़, जंगल, खाड़ी, सागर, मैदान, रेगिस्तान में तुम समाए हुए होहर दिल, हर धड़कन, हर नब्ज़ मेंतुम समाए हुए हो हर आवाज़ में, हर इंकलाब मेंतुम शब्द नह...
कुछ लम्हे दिल के......
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  November 30, 2016, 10:55 pm
इंसान बड़ा सयाना हैवह सब जानता हैकि उसे क्या चाहिए, क्या नहींनहीं रखता कभीअपने पास, अपने आसपास ग़ैरज़रूरी, व्यर्थ की वस्तुएँउन्हें फेंक देता है उठाकरकचरे के डिब्बे में प्रतिदिन।इंसान बड़ा सयाना हैनहीं फेंकता कुछ वस्तुएँ कभीकिसी भी कचरे के डिब्बे मेंबेशक वे कितनी ह...
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  September 25, 2016, 1:10 pm
ज़िन्दगी शुरू होती है हर सुबहकुछ इस तरहरोज़मर्रा के काम जल्दी-जल्दी निपटानातैयार हो काम के लिए निकलनाठीक स्कूटर निकालते वक़्तएक स्कूल की वैन का घर के सामने रुकनाड्राइवर का मुझे निकलते हुए देखनाबच्चों का खिड़की से झाँकनाफिर एक अंजाना सा रिश्ता बन जानाऔर प्रतिदिन की आदत...
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  September 16, 2016, 5:20 pm
तुम चाहे कितना ही चुप  रहो तुम्हारी आँखों के नुकीले कोर सदा मुस्कुराते हैं.......
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  August 14, 2016, 7:36 pm
दूरियाँ बतातेतसल्ली दिलातेरास्तों में गड़े मिल जाते हैंअनगिनत मील के पत्थर।दिशाएँ दिखाते, आस जगातेरास्ते पर तने मिल जाते हैंअसंख्य बोर्ड।लेकिन कुछ दूरियाँऐसी होती हैंजिनके लिएन कोई मील के पत्थर मिलेंगेन ही कोई दिशा दिखाने वाले बोर्ड।उनको स्वयं तय करना पड़ता हैभट...
कुछ लम्हे दिल के......
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  June 5, 2016, 1:26 pm
चुभते हैं।कुछ शब्दचुभते हैं।रिश्तों के बीच हो जाती हैंजब छुटपुट झड़पेंअनजाने ही बन जाते हैंकुछ शब्दकिरकिरे नुकीले बाणजो चल जाते हैंअपनों परऔर फिरजीवन पर्यंतचुभते रहते हैं।कुछ शब्द चुभते रहते हैं।शब्द रच देते हैंएक अभेद चक्रव्यूहजिसमें फँसता जाता हैजितना भी न...
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  May 31, 2016, 10:12 pm
पथराई आसपथराई आँखशायद पानी मर गया........
कुछ लम्हे दिल के......
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  May 26, 2016, 12:08 pm
जो करीब है वो दूर बहुत है जो दूर बहुत है वही करीब है......
कुछ लम्हे दिल के......
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  May 25, 2016, 4:22 pm
जो करीब हैवो दूर बहुत है, जो दूर बहुत हैवही करीब है......
कुछ लम्हे दिल के......
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  May 25, 2016, 4:22 pm
धूप है तो क्या घटा इक रोज़ छा ही जायेगी चल पड़े हैं राह पर मंज़िल तो आ ही जायेगी आज पतझर, फूल, पत्ती, डालियों को रौंद ले जब बहार आएगी गुलशन को सजा ही जायेगी इस हवस पर आप खुश हैं एक दिन होगा यहीआपकी औकात पलभर में घटा ही जायेगीजाति, भाषा, धर्म, बोली की सियासत आग हैइस नगर ...
कुछ लम्हे दिल के......
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  November 10, 2013, 5:46 pm
मेरे विद्यालय में रजत जयंती समारोह में बच्चों द्वारा प्रस्तुत नृत्य . इस नृत्य को मैंने तैयार करवाया था  . आपको कैसा लगा देख कर अवश्य बताइयेगा.......
कुछ लम्हे दिल के......
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  January 27, 2012, 6:14 pm
नकली बाम / ऊँचे दामत्रस्त अवाम / मूक निजामभ्रष्टाचार / होता आमशहरी रोड / ट्रेफिक जामकुर्सी आज/ चारों धामख़ूनी हाँथ / मुख में रामउजड़े खेत/ हल नीलाम कन्या दान/ मुश्किल कामराहत  कोष/ माघी घामबनते माल/ मिटते ग्रामअफ़सर राज/ फ़ाइल झामआँगन धूप/ ढलती शामझूठ...
कुछ लम्हे दिल के......
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  October 9, 2011, 12:49 pm
कभी कूटी , कभी वो रौंदी जाती है उसी माटी की मूरत पूजी जाती है गुले गुलज़ार हो जाती है हर डाली  गुलाबों की कलम जब काटी जाती है सुदामा स्नेह की गठरी तो भारी कर वज़न से पोटली अब आंकी जाती है शहीदों पर किसी दिन फूल पड़ते हैं मगर फिर ख़ाक उन पर डाली जाती है पुर...
कुछ लम्हे दिल के......
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  October 2, 2011, 1:31 pm

पहचान लेगा कोई जौहरी तुझको भी अपनी चमक को न तू धुंधली पड़ने दे ...
कुछ लम्हे दिल के......
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  September 24, 2011, 4:51 pm
कर्म को देव बना कर देखो सत्य के मार्ग पे जा कर देखो साथ में होंगे करोड़ों इक दिन पाँव तो पहले बढ़ा कर देखो सारे इंसान हैं इस दुनिया में सरहदें अपनी मिटा कर देखो क्या है नफरत, ये अदावत क्या है प्रेम का राग तो गा कर देखो मंजिलें साफ़ नज़र आएंगी ज्ञान के दीप ज...
कुछ लम्हे दिल के......
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  November 28, 2010, 2:00 pm
कौन यहाँ अब पूछे फ़न को,आज कहाँ यह दिखता हैनाम बिके हैं महफ़िल-महफ़िल, फ़न  से किस का रिश्ता हैजोंक बनें हैं आज चिकित्सक ,खून सभी का चूसे हैंउनके दवाखानों में भी नित, मौत का तांडव होता हैखेल, खिलाड़ी, अभिनेता को, लोग बिठाते सर-माथेवीर जवानों की कुर्बानी, मोल बहुत ही सस्ता...
कुछ लम्हे दिल के......
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  August 25, 2010, 8:45 pm
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