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Blog: पंखुड़ियाँ

Blogger: अर्चना तिवारी
चूहा इधर से गया कि उधर से। पारिवारिक नोकझोंक के लिए किसी मुद्दे की आवश्यकता होती है क्या? और फिर बात तेरी-मेरी के खाल उधेड़ तक कब पहुँच जाती है पता भी नहीं चलता। आज जब बात हद से गुजरने लगी तो हम झनकते-पटकते घर से निकल आए। अनमने से कॉलोनी के पार्क की ओर चल दिए।पार्क में प्रवे... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   3:57am 15 Sep 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
 "आपने एडमीशन फार्म में बच्चे का धर्म नहीं लिखा?""जी, नहीं है।""क्यों, आपका कोई धर्म नहीं है क्या?""है, बिलकुल है। मैं सिख हूँ, पत्नी ईसाई है।""हाँ तो आप इस काॅलम में सिख भरिए!""बिलकुल नहीं!""क्यों?""क्योंकि बच्चे को धर्म के बारे में अभी कुछ पता नहीं।""वह बताना तो आपका फ़र्ज है।""ज... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   6:54am 10 Sep 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
फ़ोटोग्राफ़ी और कहानी लिखना सोनाक्षी का सबसे पसंदीदा शौक था। यह शौक उसकी रोजी-रोटी का सहारा भी था। अक्सर उसकी निगाहें सड़कों पर कुछ तलाशती चलतीं। शायद कोई कहानी। कोई ऐसी कहानी, जो मास्टरपीस बन जाए। मोनालिसा की तरह।कल भी वह इसी धुन में चली जा रही थी। ओवर ब्रिज के नीचे लगे न... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   9:29am 8 Sep 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
“होय! एक किलो आलू देना...” “अरे हम कब से खड़े हैं, आधा किलो भिन्डी के लिए!” “टमाटर दोगे! या बढ़ें कहीं और से लें!” “सबसे पहले हम आये थे, और अभी तक खड़े हैं आध किलो प्याज के लिए!”तमाम आवाजें। कुछ झल्लाईं, कुछ खीझतीं। न जाने कहाँ से इन आवाजों को चीरती एक अलग आवाज आई। न झल्लाहट, न खीझ औ... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   5:30am 24 Jun 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
खड़ी दोपहरिया है। बाग में एक टीलेनुमा स्थान पर बच्चे खेलने जुट रहे हैं। कुछ दूरी पर शीबू बूट पॉलिश की डिब्बी को गाड़ी बना लुढ़काते हुए इधर-उधर दौड़ रहा है। चिनिया अभी नहीं आई है। इसलिए शीबू बीच-बीच में पगडंडी की ओर भी देख लेता है। सहसा पत्तों की सरसराहट के साथ भद की आवाज़ आ... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   2:48am 15 Jun 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
खड़ी दोपहरिया है। बाग में एक टीलेनुमा स्थान पर बच्चे खेलने जुट रहे हैं। कुछ दूरी पर शीबू बूट पॉलिश की डिब्बी को गाड़ी बना लुढ़काते हुए इधर-उधर दौड़ रहा है। चिनिया अभी नहीं आई है। इसलिए शीबू बीच-बीच में पगडंडी की ओर भी देख लेता है। सहसा पत्तों की सरसराहट के साथ भद की आवाज़ आ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   8:17am 11 Jun 2019
Blogger: अर्चना तिवारी
दोपहर थी लेकिन आकाश में छाए बादल भोर का आभास करा रहे थे। मैं खिड़की के पास बैठी रेडियो के गीतों के साथ इस मोहक नज़ारे का आनंद ले रही थी। तभी मेरी निगाह बाउंड्री के बाहर एक युवक पर पड़ी। वह एड़ियाँ उचकाकर गमले से पौधे की टहनी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। अक्सर लोग छोटे पौधों की ट... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   4:45pm 26 Apr 2018
Blogger: अर्चना तिवारी
नये साल के स्वागत में मॉल की रौनक चरम पर थी। ठीक उसके सामने रेहड़ी-खोमचे वाले खड़े थे। उनके बीच कुछ खिलौने-गुब्बारे बेचने वाले बच्चे भी थे जो मॉल के अंदर आने-जाने वालों से अपना सामान खरीदने की मिन्नतें करते घूम रहे थे।निशा मॉल से निकल कर टैक्सी की प्रतीक्षा करने लगी तभी... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   5:12pm 24 Apr 2018
Blogger: अर्चना तिवारी
मोबाइल पर सन्देश चमका। कोई वीडियो था। साथ ही एक नोट था, “इसे अकेले में देखें।“सन्देश देखते ही मेरी बाँछें खिल गईं। मैंने वीडियो चालू किया।“पलट इसे, चेहरा देखना है!” एक अकड़दार आवाज कड़की। उसके साथ ही दिखा कि एक औरत औंधे मुँह जमीन पर पड़ी है। उसके शरीर पर कपड़े न के बराबर थे।... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   5:21pm 21 Mar 2018
Blogger: अर्चना तिवारी
सुबह पाँच बजे“श्याम, बेटा उठ ना, गुनगुना पानी और त्रिफला चूर्ण दे-दे मुझे!” “ऊँम्म...अभी देता हूँ पिता जी!” “अरे बेटा, मेरी चाय में थोड़ी चीनी और डाल दे, फीकी लगती है!” “पिता जी, चाय में पहले ही इतनी चीनी है!” “अच्छा-अच्छा, नाराज़ क्यों होता है...अ...सुन वो अखबार बाहर आ गया हो तो... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   3:12pm 30 Nov 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
रात की पाली आरम्भ हो चुकी है। स्टाफ़ के नाम पर दो वार्ड बॉय दिख रहे हैं। रात की नीरवता को चीरते यंत्रों की पीप-पीप और इक्का-दुक्का मरीजों की कराहों ने वातावरण बोझिल बना दिया है। नींद कोसों दूर है। तभी सामने वाले मरीज को इंजेक्शन लगाने के लिए एक नर्स मरुस्थल में हरियाली स... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   2:44pm 6 Nov 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
"सबेरे से कुछ बिका कि नहीं रे?"बिसुना खी खी करता हुआ शामली को छेड़ने लगा।"ये लो...तो का नाहीं? दुकान रखते ही ग्वालिन, गनेशा और ऊ बड़का सिपहिया फौरन बिका गया !""अच्छा! ई बात!...तो ऊ चटख रंग वाली मातारानी के कोई काहे नहीं ले गया?...हेहेहे...!""लोग ले जायेंगे उनको भी...का पता अभी जरूरत ना हो?"... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   4:21pm 1 Oct 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
“पापा, आज तो हम ज़ू चलेंगे ना?”“-------------““बोलो ना पापा!” “आँ...हुम्म...चलेंगे...”“लेकिन कब पापा?”आज इतवार था। आकाश आलमारी के कागजों को बिस्तर पर फैलाए उनकी कतरब्योंत में लगा था। रोहन थोड़ी देर खड़ा उत्तर की प्रतीक्षा करता रहा फिर हमेशा की तरह बालकनी में जाकर सड़क पर आते-जाते लोग... Read more
clicks 316 View   Vote 0 Like   4:31pm 24 Jul 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
शोर से नमिता की नींद टूट गयी। नमिता ने मोबाइल उठा कर देखा। डेढ़ बज रहा था।सामने वाली बिल्डिंग में सुदूर देश-प्रदेश से आए कुछ लड़के रहते हैं। कुछ पढ़ने वाले हैं और कुछ नौकरीपेशा। जोर की ऊँची आवाज़ से यह जाहिर था कि यह शोर उन्हीं का है।“ओफ्फ्फ़ ओssह!...लोग सही कहते हैं कि ये निर... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   2:52pm 26 Apr 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
आये दिन महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं से निकिता का मन उद्विग्न हो उठा था।"एक लड़की का जीवन काँटों के बीच से गुज़रने जैसा है...ना जाने कब कौन सा काँटा उसकी अस्मिता को चीर कर तार-तार कर दे...उफ्फ्फ़! ये पुरुष!” दांत पीसते हुए निकिता ने मुट्ठियाँ भींच लीं।विचारों के द्वन्... Read more
clicks 246 View   Vote 0 Like   6:15pm 17 Apr 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
अलसुबह गुमटी पर चाय-बिस्कुट खाते महेश जी को उनके दो मित्रों ने देख लिया।“भाई, ये महेश सुबह-सुबह गुमटी पर चाय पी रहा है, आखिर मामला क्या है?” एक मित्र ने कहा।“अरे यही नहीं एक दिन बंदे को सट्टी से सत्तू खरीदते हुए भी देखा था, पूछने पर बोला, भाई रिटायर्मेंट के मजे ले रहा हूँ।”... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   2:25pm 10 Apr 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
अलसुबह गुमटी पर चाय-बिस्कुट खाते महेश जी को उनके दो मित्रों ने देख लिया।“भाई, ये महेश सुबह-सुबह गुमटी पर चाय पी रहा है, आखिर मामला क्या है?” एक मित्र ने कहा।“अरे यही नहीं एक दिन बंदे को सट्टी से सत्तू खरीदते हुए भी देखा था, पूछने पर बोला, भाई रिटायर्मेंट के मजे ले रहा हूँ।”... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   2:25pm 10 Apr 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
गुलाब के पौधे पर कलियों के बीच एक फूल को झूमते देख मार्था के गुलाबी होठ लरज़ उठे। वह उसे बरबस निहारने लगी। तभी एक लड़का जो मार्था के यहाँ पेइंगगेस्ट था वहाँ आ पहुँचा।“मैडम, क्या मैं यह गुलाब ले सकता हूँ?” मार्था अचकचा गई। उसने लड़के को ऊपर से नीचे तक देखा। फिर शरारत भरे अंदा... Read more
clicks 263 View   Vote 0 Like   6:26pm 4 Mar 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
आज निक्की की हल्दी है। कमरे में साड़ियों के पैकेट बिखरे पड़े हैं। कुछ औरतें उन पर नामों की पर्चियाँ लगा रही हैं कि कौन सी साड़ी किसे देनी है। कुछ औरतें जो रिश्ते से निक्की की भाभी लगती हैं वे बीच-बीच में उसको ससुराल के नाम से छेड़ती भी जा रही हैं।एक ने निक्की के गाल पर हल्दी ल... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   11:43am 6 Feb 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
कोहरा छंट गया था। वातावरण में ठण्ड की चुभन बरकरार थी। रफ़्ता-रफ़्ता नुक्कड़ पर लोगों की आवा-जाही शुरू हो गई थी। हमेशा की तरह भोला के ढाबे पर चाय के तलबगारों का जमावड़ा जुटने लगा था। उसके सामने लैंपपोस्ट के खम्भे के नीचे बेरवाली भी आकर बैठ गई थी। अपने आस-पास पड़े रैपरों व पोली... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   10:30am 22 Jan 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
तुषार ने अचानक एलान किया कि इस बार न्यू इयर पार्टी के लिए उसने अपने बॉस को सपत्नीक निमंत्रित किया है।“अंकिता, मैं बताना भूल गया था, खाना मैंने होटल से ऑर्डर कर दिया है।’’ सुबह-सुबह तुषार ने कहा।अंकिता ने उसकी ओर प्रश्नवाचक दृष्टि डाली, जैसे पूछ रही हो, ‘क्यों?’“वो क्या ... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   7:22pm 7 Jan 2017
Blogger: अर्चना तिवारी
“दीपा, हमें कल गाँव जाना होगा, अपने खेतों का हिस्सा-बाँटा करने के लिए।‘’ ‘’क्यों ?’’‘’पता चला है कि बड़े भैया ने हमारे हिस्से वाले खेतों की मिट्टी ईंट के भठ्ठे वालों को बेच रहे हैं।” मीता आवेश में बोली।“ये तो गलत बात है, इससे तो हमारे खेत बंजर हो जाएँगे!” यह सुनकर दीपा भी... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   2:18pm 13 Dec 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
“दीपा, हमें कल गाँव जाना होगा, अपने खेतों का हिस्सा-बाँटा करने के लिए।‘’ ‘’क्यों ?’’‘’पता चला है कि बड़े भैया ने हमारे हिस्से वाले खेतों की मिट्टी ईंट के भठ्ठे वालों को बेच रहे हैं।” मीता आवेश में बोली।“ये तो गलत बात है, इससे तो हमारे खेत बंजर हो जाएँगे!” यह सुनकर दीपा भी... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   2:18pm 13 Dec 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
“दीपा, हमें कल गाँव जाना होगा, अपने खेतों का हिस्सा-बाँटा करने के लिए।‘’‘’क्यों ?’’‘’पता चला है कि बड़े भैया हमारे हिस्से वाले खेतों की मिट्टी ईंट के भठ्ठे वालों को बेच रहे हैं।” मीता आवेश में बोली।“ये तो गलत बात है, इससे तो हमारे खेत बंजर हो जाएँगे!... सच दीदी, पिताजी ने ता... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   2:18pm 13 Dec 2016
Blogger: अर्चना तिवारी
“देखिये ये बच्चों की तस्वीरों का कोलाज उनके कमरों के लिए बनवाया है!’“बहुत अच्छा है।”“और ये हमारी तस्वीरों का कोलाज, अपने बेडरूम के लिए।”“अरे वाह, ये वाली तब की है ना जब ईशा होने वाली थी?”“नहीं, ये हमारी शादी की पहली सालगिरह की है।”“अरे हाँ याद आया, तुम साल भर में एकदम गोल... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   3:15pm 5 Dec 2016
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