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पंखुड़ियाँ : View Blog Posts
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पंखुड़ियाँ

सुबह पाँच बजे“श्याम, बेटा उठ ना, गुनगुना पानी और त्रिफला चूर्ण दे-दे मुझे!” “ऊँम्म...अभी देता हूँ पिता जी!” “अरे बेटा, मेरी चाय में थोड़ी चीनी और डाल दे, फीकी लगती है!” “पिता जी, चाय में पहले ही इतनी चीनी है!” “अच्छा-अच्छा, नाराज़ क्यों होता है...अ...सुन वो अखबार बाहर आ गया हो तो...
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  November 30, 2017, 8:42 pm
रात की पाली आरम्भ हो चुकी है। स्टाफ़ के नाम पर दो वार्ड बॉय दिख रहे हैं। रात की नीरवता को चीरते यंत्रों की पीप-पीप और इक्का-दुक्का मरीजों की कराहों ने वातावरण बोझिल बना दिया है। नींद कोसों दूर है। तभी सामने वाले मरीज को इंजेक्शन लगाने के लिए एक नर्स मरुस्थल में हरियाली स...
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  November 6, 2017, 8:14 pm
“पापा, आज तो हम ज़ू चलेंगे ना?”“-------------““बोलो ना पापा!” “आँ...हुम्म...चलेंगे...”“लेकिन कब पापा?”आज इतवार था। आकाश आलमारी के कागजों को बिस्तर पर फैलाए उनकी कतरब्योंत में लगा था। रोहन थोड़ी देर खड़ा उत्तर की प्रतीक्षा करता रहा फिर हमेशा की तरह बालकनी में जाकर सड़क पर आते-जाते लोग...
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  July 24, 2017, 10:01 pm
शोर से नमिता की नींद टूट गयी। नमिता ने मोबाइल उठा कर देखा। डेढ़ बज रहा था।सामने वाली बिल्डिंग में सुदूर देश-प्रदेश से आए कुछ लड़के रहते हैं। कुछ पढ़ने वाले हैं और कुछ नौकरीपेशा। जोर की ऊँची आवाज़ से यह जाहिर था कि यह शोर उन्हीं का है।“ओफ्फ्फ़ ओssह!...लोग सही कहते हैं कि ये निर...
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  April 26, 2017, 8:22 pm
आये दिन महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं से निकिता का मन उद्विग्न हो उठा था।"एक लड़की का जीवन काँटों के बीच से गुज़रने जैसा है...ना जाने कब कौन सा काँटा उसकी अस्मिता को चीर कर तार-तार कर दे...उफ्फ्फ़! ये पुरुष!” दांत पीसते हुए निकिता ने मुट्ठियाँ भींच लीं।विचारों के द्वन्...
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  April 17, 2017, 11:45 pm
अलसुबह गुमटी पर चाय-बिस्कुट खाते महेश जी को उनके दो मित्रों ने देख लिया।“भाई, ये महेश सुबह-सुबह गुमटी पर चाय पी रहा है, आखिर मामला क्या है?” एक मित्र ने कहा।“अरे यही नहीं एक दिन बंदे को सट्टी से सत्तू खरीदते हुए भी देखा था, पूछने पर बोला, भाई रिटायर्मेंट के मजे ले रहा हूँ।”...
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  April 10, 2017, 7:55 pm
अलसुबह गुमटी पर चाय-बिस्कुट खाते महेश जी को उनके दो मित्रों ने देख लिया।“भाई, ये महेश सुबह-सुबह गुमटी पर चाय पी रहा है, आखिर मामला क्या है?” एक मित्र ने कहा।“अरे यही नहीं एक दिन बंदे को सट्टी से सत्तू खरीदते हुए भी देखा था, पूछने पर बोला, भाई रिटायर्मेंट के मजे ले रहा हूँ।”...
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  April 10, 2017, 7:55 pm
गुलाब के पौधे पर कलियों के बीच एक फूल को झूमते देख मार्था के गुलाबी होठ लरज़ उठे। वह उसे बरबस निहारने लगी। तभी एक लड़का जो मार्था के यहाँ पेइंगगेस्ट था वहाँ आ पहुँचा।“मैडम, क्या मैं यह गुलाब ले सकता हूँ?” मार्था अचकचा गई। उसने लड़के को ऊपर से नीचे तक देखा। फिर शरारत भरे अंदा...
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  March 4, 2017, 11:56 pm
आज निक्की की हल्दी है। कमरे में साड़ियों के पैकेट बिखरे पड़े हैं। कुछ औरतें उन पर नामों की पर्चियाँ लगा रही हैं कि कौन सी साड़ी किसे देनी है। कुछ औरतें जो रिश्ते से निक्की की भाभी लगती हैं वे बीच-बीच में उसको ससुराल के नाम से छेड़ती भी जा रही हैं।एक ने निक्की के गाल पर हल्दी ल...
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  February 6, 2017, 5:13 pm
कोहरा छंट गया था। वातावरण में ठण्ड की चुभन बरकरार थी। रफ़्ता-रफ़्ता नुक्कड़ पर लोगों की आवा-जाही शुरू हो गई थी। हमेशा की तरह भोला के ढाबे पर चाय के तलबगारों का जमावड़ा जुटने लगा था। उसके सामने लैंपपोस्ट के खम्भे के नीचे बेरवाली भी आकर बैठ गई थी। अपने आस-पास पड़े रैपरों व पोली...
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  January 22, 2017, 4:00 pm
तुषार ने अचानक एलान किया कि इस बार न्यू इयर पार्टी के लिए उसने अपने बॉस को सपत्नीक निमंत्रित किया है।“अंकिता, मैं बताना भूल गया था, खाना मैंने होटल से ऑर्डर कर दिया है।’’ सुबह-सुबह तुषार ने कहा।अंकिता ने उसकी ओर प्रश्नवाचक दृष्टि डाली, जैसे पूछ रही हो, ‘क्यों?’“वो क्या ...
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  January 8, 2017, 12:52 am
“दीपा, हमें कल गाँव जाना होगा, अपने खेतों का हिस्सा-बाँटा करने के लिए।‘’ ‘’क्यों ?’’‘’पता चला है कि बड़े भैया ने हमारे हिस्से वाले खेतों की मिट्टी ईंट के भठ्ठे वालों को बेच रहे हैं।” मीता आवेश में बोली।“ये तो गलत बात है, इससे तो हमारे खेत बंजर हो जाएँगे!” यह सुनकर दीपा भी...
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  December 13, 2016, 7:48 pm
“दीपा, हमें कल गाँव जाना होगा, अपने खेतों का हिस्सा-बाँटा करने के लिए।‘’ ‘’क्यों ?’’‘’पता चला है कि बड़े भैया ने हमारे हिस्से वाले खेतों की मिट्टी ईंट के भठ्ठे वालों को बेच रहे हैं।” मीता आवेश में बोली।“ये तो गलत बात है, इससे तो हमारे खेत बंजर हो जाएँगे!” यह सुनकर दीपा भी...
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  December 13, 2016, 7:48 pm
“देखिये ये बच्चों की तस्वीरों का कोलाज उनके कमरों के लिए बनवाया है!’“बहुत अच्छा है।”“और ये हमारी तस्वीरों का कोलाज, अपने बेडरूम के लिए।”“अरे वाह, ये वाली तब की है ना जब ईशा होने वाली थी?”“नहीं, ये हमारी शादी की पहली सालगिरह की है।”“अरे हाँ याद आया, तुम साल भर में एकदम गोल...
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  December 5, 2016, 8:45 pm
“देखिये ये बच्चों की तस्वीरों का कोलाज उनके कमरों के लिए बनवाया है!’“बहुत अच्छा है।”“और ये हमारी तस्वीरों का कोलाज, अपने बेडरूम के लिए।”“अरे वाह, ये वाली तब की है ना जब ईशा होने वाली थी?”“नहीं, ये हमारी शादी की पहली सालगिरह की है।”“अरे हाँ याद आया, तुम साल भर में एकदम गोल...
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  December 5, 2016, 8:45 pm
“अरे, आपने अभी तक कुछ नहीं खाया?” घर आते ही जया ने डाइनिंग टेबल पर निगाह डालते हुए आरना से पूछा।“-------------““आरना, मम्मा कुछ पूछ रही हैं न।”“-------------“ आरना अनसुना कर रिमोट के बटन दबाती रही।“ओ-ओ ! मेरी बेबी नाराज़ हो गई क्या ?” आरना को बाँहों में भरते हुए जया ने पुचकारा।“मैं आपसे बात...
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  November 27, 2016, 11:39 am
“शाल, नी कैप, बाम, हेल्थ ड्रिंक्स, बिस्किट्स ये सब चीज़ें तो दिल्ली में भी मिलती हैं। फिर यहाँ से लाद कर ले जाने की क्या ज़रूरत है ?” स्नेहा को चीज़ें बैग में डालते देख शिखर ने पूछा।“मिलती हैं, लेकिन ऑफिस में काम के बाद मैं ये सब चीज़ें खरीदने लगूँगी तो आधा दिन बर्बाद हो जाएगा। ...
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  September 17, 2016, 8:13 pm
******************************************************पंडित बब्भन शास्त्री और सेठ सूदामल अपने परिवार के साथ शिमला जा रहे थे। वे जैसे ही प्‍लेटफार्म पर दाखिल हुए। इंजन ने सीटी दे दी। ट्रेन आहिस्ता-आहिस्ता रेंगने लगी। सामने जनरल डिब्बा था, जिसमें मज़दूर रैली का बैनर लगा था।गिरते-पड़ते दोनों परिवार उसी ...
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  September 12, 2016, 4:13 pm
फ़ोटोग्राफ़ी और कहानी लिखना सोनाक्षी का सबसे पसंदीदा शौक था। यह शौक उसकी रोजी-रोटी का सहारा भी था। सोनाक्षी जब भी अपनी एक्टिवा पर निकलती तो उसकी निगाहें सड़कों पर कुछ तलाशती चलतीं। शायद कोई कहानी। कोई ऐसी कहानी, जो मास्टरपीस बन जाए। मोनालिसा की तरह।आज भी वह इसी धुन में च...
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  September 7, 2016, 4:14 pm
इधर तीन-चार रोज़ से अखबार का फ्रंट पेज गायब रहता था। समझ नहीं आ रहा था कि आखिर माज़रा क्या है ? इत्तेफ़ाक से अखबारवाला बिल लेकर आ गया। उसे देखते ही मेरा पारा हाई हो गया।“क्या बात है, तीन-चार रोज़ से तुम आधा अखबार डाल रहे हो?” मैने उसे हड़काया।“आधा अखबार ! ऐसा कैसे हो सकता है बाबूज...
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  August 8, 2016, 8:31 pm
उत्तर पुस्तिका में अंग्रेज़ी के कम अंक देखकर रत्ना परेशान हो उठी थी। उसने रोहन की अंग्रेज़ी सुधारने के लिए क्या कुछ नहीं किया। दो-दो ट्यूशन। यहाँ तक कि घर में अंग्रेज़ी का माहौल बना रहे इसलिए उसने हिंदी बोलने, पढ़ने और टीवी पर हिंदी कार्यक्रम देखने पर भी कर्फ्यू लगा रखा था...
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  July 17, 2016, 11:15 pm
चिलचिलाती धूप। पारा सैंतालिस पार कर चुका था। लगभग नौ-दस साल का एक लड़का थर्मोकोल के बक्से में पानी की थैलियाँ रखकर बेच रहा था। जब भी कोई ऑटो या बस बाईपास पर रूकती तो वह हाथों में थैलियाँ लिए ‘पानी ! पानी !’ की आवाज़ लगाता हुआ उनकी ओर दौड़ पड़ता। लोग पानी की थैलियों के बदले उसक...
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  June 28, 2016, 6:22 pm
उस दिन आँगन में किलकारी गूँजते ही तुम्हें अपने विशाल कन्धों का एहसास हुआ था। जब तुमने एक कपड़े में लिपटे नन्हे धड़कते दिल को अपने सीने से पहली बार लगाया था। बरबस ही तुमने उससे दुनिया भर की खुशियाँ देने का वादा किया था।शाम को काम से लौटते समय प्यास से हलकान गले को तर करना च...
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  June 19, 2016, 3:00 pm
उस दिन आँगन में किलकारी गूँजते ही तुम्हें अपने विशाल कन्धों का पहली बार एहसास हुआ था। जब तुमने एक कपड़े में लिपटे नन्हे धड़कते दिल को अपने सीने से पहली बार लगाया था। बरबस ही उसका माथा चूमते हुए तुमने उससे दुनिया की हर ख़ुशी देने का वादा किया था।शाम को काम से लौटते समय प्या...
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  June 19, 2016, 3:00 pm
विद्यालय में वार्षिक परीक्षाएँ चल रहीं थीं। मैं स्टाफ़ रूम में उत्तर पुस्तिकायें जाँच रही थी। कुछ समय बाद पास के कक्ष से सहकर्मी सुमन की ज़ोर-ज़ोर से बोलने की आवाज़ आयी। मै सुनने की कोशिश करने लगी किन्तु कुछ स्पष्ट नहीं हुआ। मैं स्टाफ़ रूम से बाहर आ गई। मैंने देखा कि सुमन ए...
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  June 10, 2016, 1:50 pm
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