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Blog: पंखुड़ियाँ

Blogger: अर्चना तिवारी
"मम्मा! मेरा ब्रेकफ़ास्ट दो ना प्लीज़!""बेटा टेबल पर लगा है!""एलेक्सा! प्ले डांस म्यूजिक!" 'ओके...नाच मेरी जान, फटा-फट फट...'"अपर्णा, सुनती हो, एक कप और  गरमागरम चाय मिल जाती तो मज़ा आ जाता!""आपकी चाय टेबल पर पहले से रख दी है!""एलेक्सा! ओपेन टुडेज़ न्यूज़!" 'ओके...आज पूरे देश में नवर... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   10:21am 17 Oct 2020 #
Blogger: अर्चना तिवारी
“डैड से बोला था कि किसी प्राइवेट डाॅक्टर को दिखा लेते हैं पर नहीं...कहते हैं यहाँ के डॉक्टर अच्छे हैं!” रजिस्ट्रेशन-विंडो की कतार में लगी प्रिया खीझ उठी।“डैड ने बोला तो था कि किसी से कहकर हमारा नंबर आगे लगवा देंगे!” उसके निकट खड़ी नेहा ने आश्वस्त किया।प्रिया बार-बार मोब... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   7:23pm 8 Oct 2020 #
Blogger: अर्चना तिवारी
"डैड से बोला था कि तुझे किसी प्राइवेट डॉक्टर को दिखा लेते हैं पर नहीं...कहते हैं यहाँ के डॉक्टर अच्छे हैं!” रजिस्ट्रेशन-विंडो की कतार में लगी प्रिया खीझ उठी।“बस रजिस्ट्रेशन हो जाए, फिर आगे के लिए डैड ने तो बात की ही है ना!” उसके निकट खड़ी नेहा ने आश्वस्त किया।कतार में प्रि... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   7:23pm 8 Oct 2020 #
Blogger: अर्चना तिवारी
जगन, छगन, गगन। मध्यावकाश की घंटी बजी नहीं कि इनकी गेंद तड़ी चालू।"जगन हमें दे! जगन हमें दे!"चूँकि गेंद जगन की है तो वह जिसको चाहता पहली चाल उसी की होती। ऐसे में छगन नंबर मार जाता। यह कमाल उसकी जेब का है। जो कभी अंबियों, तो कभी जामुनों से फूली रहती है। "ओ छगन, एक अंबी दे ना!"भाव त... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   3:35am 5 Oct 2020 #
Blogger: अर्चना तिवारी
जगन, छगन, गगन। मध्यावकाश की घंटी बजी नहीं कि इनकी गेंद तड़ी चालू।"जगन हमें दे! जगन हमें दे!"चूँकि गेंद जगन की है तो वह जिसको चाहता पहली चाल उसी की होती। ऐसे में छगन नंबर मार जाता। यह कमाल उसकी जेब का है। जो कभी अंबियों, तो कभी जामुनों से फूली रहती है। "ओ छगन, एक अंबी दे ना!"भाव त... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   9:22am 4 Oct 2020 #
Blogger: अर्चना तिवारी
‘सुनो! पता नहीं, क्या हो गया है सबको! कोई किसी से बात ही नहीं करता। सब मोबाइल में लगे हैं। मम्मी-पापा-दीदी, सब के सब।‘‘जानती हो, आज तो मुझे भी मोबाइल पर पढ़ाया गया। बहुत मज़ा आया। अरे, तुमको तो पता ही नहीं, वाट्सएप पर मेरी कक्षा का ग्रुप बना है। मैडम की आवाज़ सुनी, दोस्तों की भी आ... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   3:50am 10 Sep 2020 #
Blogger: अर्चना तिवारी
वह खाली रिक्शा लिए तिराहे तक जाता फिर वहाँ से वापस लौटता। सिर पर अंगोछा लपेटे। जिसका एक सिरा नाक-मुँह से होता हुआ कान तक जाकर गायब हो गया था। कुछ भी नाम हो सकता है उसका किन्तु चेहरे के नाम पर दो गड्ढे थे जिनमें उभरी आँखें सड़क पर सर्राटे से आती-जाती गाड़ियों को टुकुर-टुकुर ... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   5:20pm 27 Jun 2020 #
Blogger: अर्चना तिवारी
बाग़ के मालिक ने ढेला उठा कर वृक्ष की टहनियों पर दे मारा। चह-चह करते पंछी उड़ चले।फुटपाथ पर बैठा नजफ़ भावशून्य आँखों से आसमान में उन्हें दूर तक जाते हुए देखता रहा।“कहाँ गए होंगे? अपने-अपने बसेरों पर शायद?” नजफ़ की होठों की सूखी पपड़ाई पत्तियाँ थरथरा उठीं।“न...जाएँगे कहाँ, बसे... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   5:45pm 23 May 2020 #
Blogger: अर्चना तिवारी
मुझे बहुत अच्छे लगते हैं प्रशांत भैया।जब भी सोनी बुआ के आने की खबर लगती तो मैं पूरे घर में फिरकी सी नाचने लगती। जुबान यह पूछ-पूछ कर हलकान कर लेती कि"बुआ की ट्रेन कब आएगी।""ये बुआ हमेशा हमारे स्कूल जाने के बाद ही क्यों आती हैं?"सुबह साढ़े छह बजे स्कूल वैन यमदूत की तरह द्वार ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   10:55am 28 Sep 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
चूहा इधर से गया कि उधर से। पारिवारिक नोकझोंक के लिए किसी मुद्दे की आवश्यकता होती है क्या? और फिर बात तेरी-मेरी के खाल उधेड़ तक कब पहुँच जाती है पता भी नहीं चलता। आज जब बात हद से गुजरने लगी तो हम झनकते-पटकते घर से निकल आए। अनमने से कॉलोनी के पार्क की ओर चल दिए।पार्क में प्रवे... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   3:57am 15 Sep 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
 "आपने एडमीशन फार्म में बच्चे का धर्म नहीं लिखा?""जी, नहीं है।""क्यों, आपका कोई धर्म नहीं है क्या?""है, बिलकुल है। मैं सिख हूँ, पत्नी ईसाई है।""हाँ तो आप इस काॅलम में सिख भरिए!""बिलकुल नहीं!""क्यों?""क्योंकि बच्चे को धर्म के बारे में अभी कुछ पता नहीं।""वह बताना तो आपका फ़र्ज है।""ज... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   6:54am 10 Sep 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
फ़ोटोग्राफ़ी और कहानी लिखना सोनाक्षी का सबसे पसंदीदा शौक था। यह शौक उसकी रोजी-रोटी का सहारा भी था। अक्सर उसकी निगाहें सड़कों पर कुछ तलाशती चलतीं। शायद कोई कहानी। कोई ऐसी कहानी, जो मास्टरपीस बन जाए। मोनालिसा की तरह।कल भी वह इसी धुन में चली जा रही थी। ओवर ब्रिज के नीचे लगे न... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   9:29am 8 Sep 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
“होय! एक किलो आलू देना...” “अरे हम कब से खड़े हैं, आधा किलो भिन्डी के लिए!” “टमाटर दोगे! या बढ़ें कहीं और से लें!” “सबसे पहले हम आये थे, और अभी तक खड़े हैं आध किलो प्याज के लिए!”तमाम आवाजें। कुछ झल्लाईं, कुछ खीझतीं। न जाने कहाँ से इन आवाजों को चीरती एक अलग आवाज आई। न झल्लाहट, न खीझ औ... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   5:30am 24 Jun 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
खड़ी दोपहरिया है। बाग में एक टीलेनुमा स्थान पर बच्चे खेलने जुट रहे हैं। कुछ दूरी पर शीबू बूट पॉलिश की डिब्बी को गाड़ी बना लुढ़काते हुए इधर-उधर दौड़ रहा है। चिनिया अभी नहीं आई है। इसलिए शीबू बीच-बीच में पगडंडी की ओर भी देख लेता है। सहसा पत्तों की सरसराहट के साथ भद की आवाज़ आ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   2:48am 15 Jun 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
खड़ी दोपहरिया है। बाग में एक टीलेनुमा स्थान पर बच्चे खेलने जुट रहे हैं। कुछ दूरी पर शीबू बूट पॉलिश की डिब्बी को गाड़ी बना लुढ़काते हुए इधर-उधर दौड़ रहा है। चिनिया अभी नहीं आई है। इसलिए शीबू बीच-बीच में पगडंडी की ओर भी देख लेता है। सहसा पत्तों की सरसराहट के साथ भद की आवाज़ आ... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   8:17am 11 Jun 2019 #
Blogger: अर्चना तिवारी
दोपहर थी लेकिन आकाश में छाए बादल भोर का आभास करा रहे थे। मैं खिड़की के पास बैठी रेडियो के गीतों के साथ इस मोहक नज़ारे का आनंद ले रही थी। तभी मेरी निगाह बाउंड्री के बाहर एक युवक पर पड़ी। वह एड़ियाँ उचकाकर गमले से पौधे की टहनी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। अक्सर लोग छोटे पौधों की ट... Read more
clicks 350 View   Vote 0 Like   4:45pm 26 Apr 2018 #
Blogger: अर्चना तिवारी
नये साल के स्वागत में मॉल की रौनक चरम पर थी। ठीक उसके सामने रेहड़ी-खोमचे वाले खड़े थे। उनके बीच कुछ खिलौने-गुब्बारे बेचने वाले बच्चे भी थे जो मॉल के अंदर आने-जाने वालों से अपना सामान खरीदने की मिन्नतें करते घूम रहे थे।निशा मॉल से निकल कर टैक्सी की प्रतीक्षा करने लगी तभी... Read more
clicks 359 View   Vote 0 Like   5:12pm 24 Apr 2018 #
Blogger: अर्चना तिवारी
मोबाइल पर सन्देश चमका। कोई वीडियो था। साथ ही एक नोट था, “इसे अकेले में देखें।“सन्देश देखते ही मेरी बाँछें खिल गईं। मैंने वीडियो चालू किया।“पलट इसे, चेहरा देखना है!” एक अकड़दार आवाज कड़की। उसके साथ ही दिखा कि एक औरत औंधे मुँह जमीन पर पड़ी है। उसके शरीर पर कपड़े न के बराबर थे।... Read more
clicks 292 View   Vote 0 Like   5:21pm 21 Mar 2018 #
Blogger: अर्चना तिवारी
सुबह पाँच बजे“श्याम, बेटा उठ ना, गुनगुना पानी और त्रिफला चूर्ण दे-दे मुझे!” “ऊँम्म...अभी देता हूँ पिता जी!” “अरे बेटा, मेरी चाय में थोड़ी चीनी और डाल दे, फीकी लगती है!” “पिता जी, चाय में पहले ही इतनी चीनी है!” “अच्छा-अच्छा, नाराज़ क्यों होता है...अ...सुन वो अखबार बाहर आ गया हो तो... Read more
clicks 310 View   Vote 0 Like   3:12pm 30 Nov 2017 #
Blogger: अर्चना तिवारी
रात की पाली आरम्भ हो चुकी है। स्टाफ़ के नाम पर दो वार्ड बॉय दिख रहे हैं। रात की नीरवता को चीरते यंत्रों की पीप-पीप और इक्का-दुक्का मरीजों की कराहों ने वातावरण बोझिल बना दिया है। नींद कोसों दूर है। तभी सामने वाले मरीज को इंजेक्शन लगाने के लिए एक नर्स मरुस्थल में हरियाली स... Read more
clicks 281 View   Vote 0 Like   2:44pm 6 Nov 2017 #
Blogger: अर्चना तिवारी
"सबेरे से कुछ बिका कि नहीं रे?"बिसुना खी खी करता हुआ शामली को छेड़ने लगा।"ये लो...तो का नाहीं? दुकान रखते ही ग्वालिन, गनेशा और ऊ बड़का सिपहिया फौरन बिका गया !""अच्छा! ई बात!...तो ऊ चटख रंग वाली मातारानी के कोई काहे नहीं ले गया?...हेहेहे...!""लोग ले जायेंगे उनको भी...का पता अभी जरूरत ना हो?"... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   4:21pm 1 Oct 2017 #
Blogger: अर्चना तिवारी
“पापा, आज तो हम ज़ू चलेंगे ना?”“-------------““बोलो ना पापा!” “आँ...हुम्म...चलेंगे...”“लेकिन कब पापा?”आज इतवार था। आकाश आलमारी के कागजों को बिस्तर पर फैलाए उनकी कतरब्योंत में लगा था। रोहन थोड़ी देर खड़ा उत्तर की प्रतीक्षा करता रहा फिर हमेशा की तरह बालकनी में जाकर सड़क पर आते-जाते लोग... Read more
clicks 439 View   Vote 0 Like   4:31pm 24 Jul 2017 #
Blogger: अर्चना तिवारी
शोर से नमिता की नींद टूट गयी। नमिता ने मोबाइल उठा कर देखा। डेढ़ बज रहा था।सामने वाली बिल्डिंग में सुदूर देश-प्रदेश से आए कुछ लड़के रहते हैं। कुछ पढ़ने वाले हैं और कुछ नौकरीपेशा। जोर की ऊँची आवाज़ से यह जाहिर था कि यह शोर उन्हीं का है।“ओफ्फ्फ़ ओssह!...लोग सही कहते हैं कि ये निर... Read more
clicks 259 View   Vote 0 Like   2:52pm 26 Apr 2017 #
Blogger: अर्चना तिवारी
आये दिन महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं से निकिता का मन उद्विग्न हो उठा था।"एक लड़की का जीवन काँटों के बीच से गुज़रने जैसा है...ना जाने कब कौन सा काँटा उसकी अस्मिता को चीर कर तार-तार कर दे...उफ्फ्फ़! ये पुरुष!” दांत पीसते हुए निकिता ने मुट्ठियाँ भींच लीं।विचारों के द्वन्... Read more
clicks 362 View   Vote 0 Like   6:15pm 17 Apr 2017 #
Blogger: अर्चना तिवारी
अलसुबह गुमटी पर चाय-बिस्कुट खाते महेश जी को उनके दो मित्रों ने देख लिया।“भाई, ये महेश सुबह-सुबह गुमटी पर चाय पी रहा है, आखिर मामला क्या है?” एक मित्र ने कहा।“अरे यही नहीं एक दिन बंदे को सट्टी से सत्तू खरीदते हुए भी देखा था, पूछने पर बोला, भाई रिटायर्मेंट के मजे ले रहा हूँ।”... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   2:25pm 10 Apr 2017 #
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