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Blog: पूर्णिमा

Blogger: ऋषभ देव शर्मा
ज्ञानतत्व और स्नेहभरित मन की संयुक्त अभिव्यक्ति डॉ. पूर्णिमा शर्मा (1965) प्रतिष्ठित समीक्षक, लेखिका और कवयित्री होने के साथ-साथ हैदराबाद स्थित “हिंदी हैं हम विश्व मैत्री मंच” नामक साहित्यिक संस्था की माननीय उपाध्यक्ष हैं | इन्होने मासिक स्तंभ ‘प्रसंगवश’ का कई वर्ष तक... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   2:41pm 17 Mar 2018 #मेरी पुस्तक
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
शार्प रिपोर्टर, (सं) अरविन्द कुमार सिंह, वर्ष 9, अंक 2, अप्रैल 2016, पत्रकारिता विशेषांक, संपादकीय कार्यालय : नीलकंठ होटल, जिला कलेक्ट्रेट, आजमगढ़ प्रायः यह कहा जाता है कि मीडिया को आत्मालोचन और आत्ममंथन करना चाहिए. लेकिन मीडिया को दूसरों की आलोचना और डंकबाजी से ही फुर्सत नह... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   7:55am 29 Jun 2016 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
रमजान महीने को नेकियों का महीना कहा गया है। जो आम दिनों में अल्लाह की इबादत नहीं कर पाता है वह भी रमजान का पूरा महीना इबादत में गुजार देता है। इस महीने को सब्र का महीना भी कहा जाता है। माना जाता है कि सब्र के बदले जन्नत मिलती है। यह महीना समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों के ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   2:26pm 21 Jun 2016 #प्रकाश किरण
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
चक्रवर्ती विजयराघवाचारीअर का जन्म  18 जून 1852को एक वैष्णव ब्राह्मण परिवार में हुआ. उनके पिता सद्गोपारचारीअर एक पुजारी थे और विजय को  प्रारंभिक शिक्षा के अंतर्गत संस्कृत भाषा और वेदों का अध्ययन कराया गया. उनका अंग्रेजी शिक्षण 12  वर्ष की आयु में प्रारंभ हुआ, और 1870 में ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   2:18pm 21 Jun 2016 #प्रकाश किरण
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
11 जून 1897 को जन्मे राम प्रसाद बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रान्तिकारी धारा के प्रमुख सेनानी थे। सन् 1916 के कांग्रेस अधिवेशन में स्वागताध्यक्ष पं॰ जगत नारायण ‘मुल्ला’ के आदेश की धज्जियाँ बिखेरते हुए रामप्रसाद ने जब लोकमान्य बालगंगाधर तिलक की पूरे लखनऊ शहर में... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   2:11pm 21 Jun 2016 #प्रकाश किरण
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
ओंकारनाथ ठाकुर (1897-1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, संगीतज्ञ एवं हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीतकार थे। उनका सम्बन्ध ग्वालियर घराने से था। उन्होंने वाराणसी में महामना पं॰ मदनमोहन मालवीय के आग्रह पर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में संगीत के आचार्य पद को सुशोभित किया। वे तत्क... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   2:08pm 21 Jun 2016 #प्रकाश किरण
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
[आजमगढ़, उत्तर प्रदेश, में 28 और 29 मार्च, 2016 को आयोजित  राष्ट्रीय सम्मलेन ''मीडिया समग्र मंथन -2016"के  "मीडिया और सरकारी तंत्र"शीर्षक विचार-सत्र में प्रस्तुत किया गया आलेख]आदरणीय अध्यक्ष महोदय, सम्मानित मंच, देवियो और सज्जनो!सबसे पहले तो मैं इस भव्य और विराट आयोजन के लिए आयो... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   10:22am 2 Apr 2016 #पत्रकारिता
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
नई सदी के हिंदी आत्मकथा साहित्य पर चर्चा करते समय सबसे पहले तो यह तथ्य विचारणीय है कि नई सदी या उसके आरंभ से ठीक पूर्व के दशक में प्रायः सभी भारतीय भाषाओं में आत्मकथा साहित्य ने नई करवट ली. इससे पहले यह समझा जाता था कि आत्मकथा का चरितनायक कोई ‘महापुरुष’ होना चाहिए. शायद ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   9:54pm 29 Feb 2016 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
सत्य या सच के साथ मुहावरे की तरह दो विशेषणों का प्रयोग होता है. एक है नग्न और दूसरा है कटु. आपने भी बहुत बार यह कहा-सुना होगा कि सच नंगा होता है और सच कड़वा होता है. मुझे लगता है कि सच के नग्न होने का अर्थ है कि जहाँ कोई पर्दा हो, आवरण हो, दुराव-छिपाव हो वहां झूठ और पाखंड निवास कर... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   9:30pm 29 Feb 2016 #प्रकाश किरण
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
हम मनुष्य हैं. हमने लम्बी साधना करके मनुष्यता का विकास किया है. यह मनुष्यता ही हमें जगत के अन्य समस्त प्राणियों से श्रेष्ठ बनाती है. इसका आधार वे सुनहरे सिद्धांत हैं जिन्हें हम मानव-मूल्य और जीवन-मूल्य कहते हैं. इन उत्तम मूल्यों में जीवन को सुंदर और धरती को सुरक्षित रखन... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   9:27pm 29 Feb 2016 #प्रकाश किरण
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
भारतीय परंपरा में माँ को इतना अधिक महत्त्व और सम्मान दिया गया है कि यदि यह कहा जाए कि भारतीय संस्कृति माँ पर केन्द्रित संस्कृति है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति न होगी. माँ जननी और पालन करने वाली तो है ही, ममता और वात्सल्य के रूप में ईश्वर की तरह सर्व-व्यापक भी है. सबसे बड़ी बात ... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   9:24pm 29 Feb 2016 #प्रकाश किरण
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
रोटी-रोजी की व्यवस्था के लिए जीवन की आपाधापी में लगे साधारण नागरिक के जीवन को जो चिंताएं कै जाती हैं, उनमें ‘महँगाई’ का स्थान संभवतः सबसे ऊपर है. आम नागरिक रूपी हनुमान की विकास-यात्रा के मार्ग में मुँह फाड़े बैठी सुरसा है – महँगाई. अर्थशास्त्र की शब्दावली में, वस्तुओं और... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   9:20pm 29 Feb 2016 #प्रकाश किरण
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
बरसों पहले मैंने धरा था पहला पाँव अग्नि की लीक पर और तुमने जला ली थीं अपनी हथेलियाँ मेरे तलवे बचाने को. तबसे मैं चलती आई हूँ तुम्हारी हथलियों पर बरसों-बरस, मीलों-मील. बुढ़ाने लगी  हैं तुम्हारी हथेलियाँ;काँपते हैं मेरे पैर. और तुम कहते हो –अभी तोमीलों जाना है!         ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   8:36am 20 Jan 2016 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
नन्हीं लाल चुन्नी!यह कहाँ आ गईं बिटिया तुम?नानी के लिए फूल लेने आई थी न?पर अब इस बगिया में फूल नहीं खिलतेअब तो यहाँहवा भी हाथ में खंजर लेकर चलती है,नई कोपलें मातम में लिपटी रहती हैं, फूलों से खून टपकता है. वह जो देख रही हो ण तुम फुलवारी के बीचों-बीच; समाधि है तुम्हारी छोटी बह... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   8:35am 20 Jan 2016 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
एक पेड़ हुआ करता था यहाँ बरगद का छतनार.सरदी, गरमी, बारिश, आंधी, तूफ़ानऔर बर्फबारी झेलता रहा बरसों-बरस;बचाता रहा हमेंप्रकृति के प्रकोप से.हम बड़े सुरक्षित थेबरगद की गोद में.एक दिन एक गिद्ध आया,बैठ गया बरगद के शिखर पर,फैलाने लगा अपने पंख.दैत्याकार पंखऔर-और फैलते गए,ढक लिया पूर... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   8:34am 20 Jan 2016 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
धरती की देह परकौन लगा गया हल्दी रातों-रात?किसने दहका दिएटेसू के ये लाल गाल?संध्या के आकाश में मोर पंख से कौन लिख गया खुशियों का पैगाम?किसने पिला दी कटोरी भर-भर कर मदिरा कि महक उठे आम?लगता है, होली आ गई.            - पूर्णिमा शर्मा ... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   8:33am 20 Jan 2016 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
पैंसठ साल पहलेकैद से छूटकर बाहर निकला था वह,शिशिर ऋतु में.सब तरफपतझड़ था;पेड़ पीले पत्ते झाड़ रहे थे.उसने सोचा –वसंत आएगा,पेड़ हरे होंगे,नीले, पीले, गुलाबी, लालफूल मुस्कुराएंगें झूमती डालियों पर.पैसठ साल से वह खड़ा हैवसंत की प्रतीक्षा मेंऔर आसमान हर साल उगल रहा है शोले ,धरती ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   8:31am 20 Jan 2016 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
मेरी माँ के लिए 26जनवरी एक राष्ट्रीय पर्व था – जनता के अपने राज का पर्व, संविधान की वर्षगाँठ का पर्व, राम-राज्य के सपने का पर्व .मेरे लिए  26जनवरी राष्ट्रीय अवकाश का दिन था – परेड का दिन, मिठाई बांटने का दिन, चादर तानकर सोने का दिन .मेरी बेटी के लिए26जनवरीराष्ट्रीय असुरक्षा ... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   8:40pm 5 Nov 2015 #मेरा कविता संग्रह
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
“नहीं, मम्मी, नहीं.”-                         गर्भ में से चीखती है एक अजन्मी लड़कीऔर दस्तक देती है माँ के दिलो-दिमाग पर,पूछती है – “मम्मी, मेरे ही साथ क्यों हो रहा है ऐसा?क्यों हो रही है मुझे ही मारने की साज़िश?जन्म से पहले क्यों पढ़े जा रहे हैं मृत्यु के मंत्र?क्यों ... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   8:30pm 5 Nov 2015 #मेरा कविता संग्रह
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
हम सोये थे बेखबर पड़ोसी ने गिरा दी दोनों बाजुओं की दीवारें;और खुद बुला लाया पंचों को .हम चुप हो गए,पंचों को परमेश्वर मानकर फिर सो गए .                      पड़ोसी पूरा शैतान थाहर रात चुपके-चुपकेकभी नींद में तेज़ाब डालता,कभी दीवारों में सेंध लगाता ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   8:26pm 5 Nov 2015 #मेरा कविता संग्रह
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
एक शाम पहुँची वहअपने घर कई घंटे देर से रस्ते में फँस गई थी .घर पहुंची तो दौड़ कर बेटा और बेटी डरे हुए कबूतर की तरह चिपक गए उसकी गोद में, पति बौखलाया हुआ सा आया झपटता हुआ – भौंहे तनी हुई थीं माथे पर बल थे चेहरा पीला पड़ गया था लगता था खून नसों में जम गया है .“तुम आ गईं?इतनी देर कैस... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   8:18pm 5 Nov 2015 #मेरा कविता संग्रह
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
भारतीय मनीषा ने बहुत पहले ही मानव जीवन के चरम मूल्यों के रूप में चार पुरुषार्थों की अवधारणा विकसित की थी. ये चार पुरुषार्थ हैं – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष.  धर्म का संबंध विवेक पूर्वक अपने कर्तव्य के पालन से है तो अर्थ का संबंध धर्मपूर्वक जीवन की समस्त सुख-सुविधाओं को जु... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   9:47am 11 Sep 2015 #प्रकाश किरण
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
स्थिर होकर बैठना आसन कहलाता है. इसके लिए जिस किसी शारिरिक मुद्रा का उपयोग किया जाता है वह भी आसन कहलाती है और जिस आधार पर बैठा जाता है उसे भी आसन कहते हैं. हमारे देवतागण अलग-अलग प्रकार के आसनों पर विराजते हैं. उदाहरण के लिए लक्ष्मी जी हों या प्रजापति ब्रह्मा, दोनों को कमल ... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   9:46am 11 Sep 2015 #प्रकाश किरण
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
किसी कार्य की सिद्धि के लिए अपनी समस्त शक्ति से कठोर साधना करना तपस्या है. आपने सुना होगा कि बहुत से महात्मा किसी भी प्रकार के ऋतु परिवर्तन की परवाह किए बिना इस प्रकार की साधना किया करते हैं जो सामान्य जन के लिए अकल्पनीय है. उदाहरण के लिए वे जनवरी के महीने में बर्फीले जल-... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   9:42am 11 Sep 2015 #प्रकाश किरण
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
मनुष्य की विशेषता का आधार है उसका मन. मन का स्वभाव है चंचलता. आपने अनुभव किया होगा कि मन तनिक देर भी एक स्थान पर नहीं टिकता. यहाँ तक कि जब कभी आप आध्यात्मिक भाव से अपने इष्ट का चिंतन-मनन करने बैठते हैं, यह चंचल मन तब भी चैन से बैठता नहीं है. जैसा कि संत कबीरदास कह गए हैं, हमारे... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   9:39am 11 Sep 2015 #प्रकाश किरण
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