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Blog: ऋषभ की कविताएँ

Blogger: ऋषभ देव शर्मा
नान्ना! नुव्वु वॆळ्ळिपोयिनप्पट्नुंची======================नान्ना!नुव्वु वॆळ्ळिपोयिनप्पट्नुंचीचाला गुर्तॊस्तूने उंदिपल्लॆलोनि मन इल्लुआ वेपचॆट्टुऎवरू वित्तनं नाटकुंडानेमॊलिचिंदि मन वाकिट्लोनी चिन्नप्पुडॆप्पुडोनीतो पाटे ऎदिगिंदि अदि कूडा.तात ऒकरोजुनातो अन्नाडु\'ई वे... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   4:01pm 22 Jun 2017 #कविता
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
रैतुल नॆत्तुटि कुंडलु-------------------------हिंदी मूलं : रिषभदेव शर्म अनुवादं : आर.शांतसुंदरिरैतुल नॆत्तुटि कुंडलुपाति उन्नविई नेललोने !तिंडिगिंजलु पंडिचिनवाडुबट्टल कोसं पत्ति पॆंचिनवाडुनेल ऒडिनि पच्चागा उंचेंदुकु अनुनित्यं तन ऒंटिनि ऎंडबॆट्टिनवाडु अतनु.तडिपाडु पादुलनु... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   11:21am 13 Jun 2017 #कविता
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
అప్పుడు నువ్వెక్కడున్నావు?---------------------------------------                                 మూలం -రిషభదేవ్ శర్మ                               అనువాదం - ఆర్.శాంతసుంద                              ఉన్న పౌరుషాన్నంతా కూడగట్టుకునిదేశమంతా పోరాడుతున్... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   4:22pm 3 Jun 2017 #कविता
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
अप्पुडु नुव्वॆक्कडुन्नावु?---------------------------------हिंदी मूलं -रिषभदेव् शर्मतेलुगु अनुवादं - आर्.शांतसुंदरि………………………………..उन्न पौरुषान्नंता कूडगट्टुकुनिदेशमंता पोराडुतुन्नप्पुडुरात्रनकपगलनककॊत्त कॊत्त युद्ध स्थावराल्लोकास्त चॆप्पवा मित्रमानुव्वप्पुडु ऎक्कड उन्नाव... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   4:13pm 3 Jun 2017 #कविता
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
अब तक निभाया,आगे भी साथ दो!साँस टूटे तो,सिर पर तुम्हारा हाथ हो!!                            [4/5/2017]... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   6:50pm 11 May 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
ओस प्यासी, गुलाब प्यासे हैं।नींद प्यासी है,ख्वाब प्यासे हैं।।रेत का तन तप चुका कितना,कितनी पी लें शराब प्यासे हैं।।जब से ढाला गया इन ओठों को,उस ही दिन से, जनाब, प्यासे हैं।।मोर ये, चातक ये, पपीहे ये,इनको दीजे जवाब, प्यासे हैं।।कब के जागे हैं नयन दीवाने,अब तो उलटो नक़ाब, प्य... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   6:46pm 11 May 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
माँएँ राजनीति नहीं समझतीं,खोजती हैं उस सुदर्शनधारी कोजिसने काठ की तलवार देकरचक्रव्यूह में धकेल दिएउनके जवान बेटे।24/4/2017... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   5:28am 11 May 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
धरती के वेणी संहार कोप्रतीक्षा रहती है भीम की।----युधिष्ठिर स्वर्ग में ही अच्छे!24/4/2017... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   5:24am 11 May 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
जनता भूखी है, हुआ करे।किसान नंगे हैं, हुआ करें।।जवान मरते हैं, मरा करें।सत्ता बची रहे, दुआ करें।।24/4/2017... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:22am 11 May 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
చిన్నప్పుడు విన్న మాట ఃభూమి గోమాత కొమ్ముమీద ఆని ఉందనీబరువు వల్ల ఒక కొమ్ము అలసిపోతేగోమాత రెండో కొమ్ముకి మార్చుకుంటుందనీఅప్పుడు భూమి కంపిస్తుందననీ .ఒకసారి ఎక్కడో చదివాను ఃబ్రహ్మాండమైన తాబేలు మూపు మీదభూమి ఆని ఉంటుందనీవీపు దురద పెట్టినప్పుడుఎప్పుడైనా ఆ తాబే... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   5:19am 11 May 2017 #बाल कविता
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
************************************************इक अप्पुडु भूमि कंपिस्तुंदि*************************************************( ऋषभ देव शर्मा की हिंदी कविता“और तब धरती हिलती है” काआर. शांता सुंदरी कृत तेलुगु अनुवाद)^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^चिन्नप्पुडु विन्न माटःभूमि गोमात कॊम्मुमीद आनि उंदनीबरुवु वल्ल ऒक कॊम्मु अलसिपोतेगोमात रॆंडो कॊ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   5:13am 11 May 2017 #कविता
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
वह खोए बचपन की तलाश करता हुआ अचानक बच्चों के बीच पहुँच गया। पर यह देखकर सकते में आ गया कि बच्चे तो उससे ज़्यादा बूढ़े लगने लगे हैं।तनाव और थकान से भरे बच्चे बड़े अजनबी से लगे उसे।वे उसे पहचान भी नहीं सके।वह भी कहाँ उन्हें पहचान सका था!खिलना-खिलखिलाना वे भूल चुके थे - अभिनय ज़... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   2:35pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
शाम थी कैसी कि नटखट बादलों में हम घिरे थे।सब दिशाएँ खो गई थीं, भटकते यूँ ही फिरे थे।।याद हैं फिसलन भरी क्या चीड़ की वे पत्तियाँ?एक-दूजे को संभाले दूर तक जिनसे गिरे थे।।... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   2:14pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
पुतलियों में तैरता जो स्वप्न का संसार था।आपका वर्चस्व था बस आपका अधिकार था।।मैं जिसे गुस्सा समझ ताज़िंदगी डरता रहा;डायरी ने राज़ खोला, आपका वह प्यार था।।... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   2:12pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
अमरित की कनी ज़हर में डुबाई है।चमकती हुई तलवार निकल आई है।।यह अलौकिक रूप नज़रें बाँध लेगा;आज बिजली चाँदनी में नहाई है।।... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   2:11pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
डर रहे बूढ़े सयाने, सब कहें 'हम क्या करें'?छिप गए सब कोटरों में, जान कर भी क्यों मरें??चाँदनी में बाल खोले, घूमती है प्रेतनी!और बच्चे हैं कि बाहर खेलने की ज़िद करें!... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   2:06pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
झल्लाई सी सुबह, पगलाई सी शाम।क्रोध भरी दोपहर, यों ही दिवस तमाम।।प्रेत ठोकते द्वार, ले ले मेरा नाम!रात भूतनी बनी, यहाँ कहाँ विश्राम।।... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   2:04pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
खेत काटकर सड़क बना दी, सभी सुखा दीं क्यारी।मथुरा का बाज़ार फैलता, ऊधो हैं व्यापारी।।कहीं तुम्हारी विजय कथा में, मेरा नाम नहीं है!ब्रज का सब कुछ हरण कर लिया, प्रभुता यही तुम्हारी।।... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   2:02pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
मैंने जिनके वास्ते सब छल किए।सौ बलाएँ लीं, सदा मंगल किए।।वक़्त का क्या फेर? सत्ता क्या गई?वे मुझी को छोड़, आगे चल दिए।।... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   2:00pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
हाथ में लेकर पताका शिखर पर चढ़ता रहा।आदमी अपनी सरहदें खींचकर लड़ता रहा।।भूमि जिसके नाम पर खून से लथपथ पड़ी है!सातवें आकाश पर वह बैठकर हँसता रहा।।... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   1:59pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
मरता है कोई छात्र तो सियासत न कीजिए।भूखों मरे किसान तो तिजारत न कीजिए।।हैं आप बड़े बुद्धिमान, शब्दों के खिलाड़ी!लेकिन पिशाच कर्म की वकालत न कीजिए।।... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   1:57pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
कल आपने बोई थीं गलियों में नफ़रतें।यों आज लहलहाई हैं घर घर में दहशतें।।नादान बालकों को वहशी बनाने वालो!खाएँगी तुमको एक दिन तुम्हारी वहशतें।।... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   1:56pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
तुम्हारी ज़ुल्फ़ों से मधुरिम पराग झरता हैतुम्हारी निगाह से धरा का रँग निखरता है जाग उठती हैं दिशाएँ तुम्हारे आने सेतुम्हारे गाने से सूरज उड़ान भरता है... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   1:53pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
एक पगली छोकरी।फूलों की टोकरी।।खुशबू ने कर ली उसके घर नौकरी।।... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   1:51pm 19 Apr 2017 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
दम तोड़ने से पहले सपने नीले पड़ गए थे,होंठ ऐंठ गए थे सफेद फेन उगलते-उगलते;अच्छा हुआ, नींद में ही तड़क गई थीं नसें,दम टूट गया; नींद नहीं टूटी!जल्लाद! तुम सचमुच कितने दयालु हो!! ... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   1:49pm 19 Apr 2017 #
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