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ऋषभ उवाच

नया साल (हिंदी में अनूदित तेलुगु कविताएँ)/ संपादक : मामिडि हरिकृष्ण/ अनुवादक : गुड्ला परमेश्वर द्विवागीश/ 2017/  250 रूपए  भाषा सांस्कृतिक शाखा, तेलंगाना सरकार, कला भवन, रवींद्र भारती, हैदराबाद/   ‘कोत्त सालू’ या ‘नया साल’ तेलंगाना के 59 कवियों की कविताओं का संकलन है...
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Tag :अनुवाद विमर्श
  February 14, 2018, 1:06 am
'समन्वय दक्षिण' : अप्रैल-सितंबर, 2017 : पृष्ठ 84-92 : केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद आलूरि बैरागी चौधरी का कविकर्म-डॉ. ऋषभ देव शर्मा धुनी जा रही दुर्बल काया .मलिन चाम में हाड-मांस जिसमें स्वर्गिक सपनों की माया.नस-नस तांत बनी धुन जातीरग-रग में हिम-ज्वाल सुलगतीउड़ते उजले मन क...
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Tag :आलेख
  November 27, 2017, 11:59 am
तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर के वार्षिक ब्रह्मोत्सव -2017 की अविस्मरणीय झाँकी*******ब्रह्मोत्सव का पहला दिन“””””””””””””””””””””””22 सितंबर, 2017। आज सुबह मैं तिरुपति पहुँचा। स्टेशन से लगे हुए विशाल भवन 'विष्णु निवासं'में ठहराया गया। शाम को सामान सहित कार से तिरुमला ले आ...
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Tag :
  September 25, 2017, 2:41 am
23 जुलाई 2017 को हिंदी भवन, नई दिल्ली के सभागार में कवि श्री रामकिशोर उपाध्याय के कविता संग्रह ''दीवार में आले''के लोकार्पण के अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ. ऋषभदेव शर्मा द्वारा दिया गया बीज वक्तव्य....
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Tag :पुस्तक चर्चा
  September 19, 2017, 12:14 am
हैदराबाद : 27 अगस्त, 2017 ;"हिंदी हैं हम विश्व मैत्री मंच"के उद्घाटन समारोह में अध्यक्षीय वक्तव्य : डॉ. ऋषभ देव शर्मा...
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Tag :you tube
  August 29, 2017, 1:35 am
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Tag :चंद्रमौलेश्वर प्रसाद
  August 22, 2017, 10:21 pm
राजौरिया, शिवकुमार (2017). वृद्धावस्था विमर्श और हिंदी कहानी. भारत, नई दिल्ली : अद्वैत प्रकाशन. आईएसबीएन : 978-93-82554-87-5. रु. 595/- 296 पृष्ठ. सजिल्द भूमिका विभिन्न हाशियाकृत समुदायों के मानवाधिकारों की चिंता के बीच इधर कुछ दशकों से विश्व भर में उत्तर आधुनिक संदर्भ में वृद्धों की सम...
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Tag :चित्रावली
  August 2, 2017, 1:59 am
अशोक वाटिका में जब हनुमान पहली बार सीता के समक्ष आते हैं तो उनकी पहचान के प्रति आश्वस्त होने पर सीता जाने कब से बँधे पड़े अपने मन को उनके समक्ष खोल देती हैं. राम-लक्ष्मण की कुशलता पूछने के बाद वे इतने दिन तक अपनी उपेक्षा रूपी निष्ठुरता को राम के लिए स्वाभाविक नहीं मानतीं. ...
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Tag :संपादकीय : 'रामायण संदर्शन' के
  June 27, 2017, 12:29 am
सुंदरकांड में कई स्थलों पर तुलसी बाबा ने राम के स्वभाव की चर्चा की है. विभीषण से प्मिलने पर हनुमान उन्हें बताते हैं कि सेवक के प्रति प्रीति रखना राम का स्वभाव है. यहाँ हमें सेवक का अर्थ भक्त समझना चाहिए – ऐसा भक्त जिसके लिए राम ही एकमात्र शरण हैं. अभी उस दिन एक विद्वान बो...
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Tag :संपादकीय : 'रामायण संदर्शन' के
  June 27, 2017, 12:23 am
भारतीय संस्कृति भारतवर्ष में बसे हुए विभिन्न मानव समुदायों की हजारों वर्षों की उस साधना का परिणाम है जो उन्होंने जीवन को उत्कृष्ट, उदात्त और श्रेष्ठ बनाने के लिए की. मनुष्य को उसके आदिम स्तर से उठाकर दिव्यता से भर देने के लिए जुड़े जो प्रयास अलग-अलग देशकाल में संपन्न ह...
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Tag :संस्कृति
  June 15, 2017, 3:52 pm
सत्तरोत्तर हिंदी कविता और समकालीन राष्ट्रीय चेतना-    ऋषभदेव शर्मा निश्चित भूभाग, जनसंख्या, सरकार और संप्रभुता राष्ट्र के मूल तत्व हैं. राजनीति-विचारकों ने इन्हीं तत्वों की व्याख्या करते हुए ऐसे निश्चित भूभाग को राष्ट्र कहा है जिसमें रहने वाली जनसंख्या एक विशि...
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Tag :आलोचना
  June 8, 2017, 4:05 pm
संकल्प, राजभाषा विशेषांक, 2016-17, अंक 18,मिश्र धातु निगम लिमिटेड रक्षा मंत्रालय, कंचनबाग, हैदाराबद - 500008पृष्ठ 25-29 ...
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Tag :ऋषभ देव शर्मा
  June 2, 2017, 3:33 pm
भूमिकाहल्की बूँदाबाँदी में चहल कदमी संतोष अलेक्स (1971) बहुभाषाविद अनुवादक और रचनाकार हैं. ‘हमारे बीच का मौन’ यों तो उनका दूसरा कविता संग्रह है, लेकिन यह उनकी तीसवीं प्रकाशित पुस्तक है. स्वभाव से विनम्र और मृदुभाषी संतोष निरंतर अनुवाद और सृजन में लगे रहते हैं. उनकी रचन...
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Tag :पुस्तक
  May 31, 2017, 1:59 am
लंबी सांस्कृतिक परंपरा से प्राप्त किसी कथा को महाकाव्य का आधार बनाते समय रचनाकार के समक्ष अनेक विकल्प हो सकते हैं. तब तो और भी अधिक जब वह कथा लोक और शास्त्र में अनेकानेक भिन्न-भिन्न पाठों के रूप में विद्यमान रामकथा हो. बाबा तुलसी ने स्वविवेक के बल पर इन पाठों के समांतर ...
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Tag :संपादकीय : 'रामायण संदर्शन' के
  May 22, 2017, 2:21 am
भूमिका रामकिशोर उपाध्याय अपने इस कविता संग्रह ‘दीवार में आले’ के माध्यम से एक ऐसे सुपरिचित संवेदनशील कवि के रूप में अपनी पहचान को गहराते हुए सामने आते हैं जिसके निकट वैयक्तिक और निजी अनुभूतियाँ भी तभी सार्थक और व्याख्येय हैं जब वे किसी सामान्य और सामाजिक अनुभव के ...
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Tag :पुस्तक
  May 20, 2017, 2:43 am
काणे भगत जी का ओजपूर्ण प्रवचन चल रहा था - स्त्री मोह है, स्त्री माया है, स्त्री नरक का द्वार है।अचानक चपला जी उठीं और झूमती-झामती जाकर काणे भगत जी की गोद में गिर पड़ीं।काणे भगत जी का सुर बदल गया - स्त्री शक्ति है और शक्ति के बिना तो शिव भी अधूरे रहते हैं!पहली पंक्ति में बैठा र...
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Tag :
  May 12, 2017, 12:24 am
बाबा तुलसी के लिए दशरथ सुत राम और भगवान राम दो नहीं हैं. हो ही नहीं सकते. वे विष्णु का अवतार भर भी नहीं हैं. ब्रह्मा-विष्णु-महेश तो पहले ही साकार और सगुण हैं. हमारे राम ये सब होते हुए रूपातीत और गुणातीत हैं. कुछ भी उनसे परे नहीं है. वे परात्पर ब्रह्म हैं; जगनिवास अखिल लोक विश...
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Tag :संपादकीय : 'रामायण संदर्शन' के
  April 19, 2017, 10:58 am
परंपरा कनफटे जोगियों कीपुरानी रोमांटिक प्रणय-गाथाओं से लेकर आधुनिक सनसनीखेज मीडिया-कथाओं तक में एक रोचक रूढि की तरह ध्यान खींचने वाले ‘कनफटे जोगी’ असल में नाथ-पंथ के अनुयायी हठयोगी होते हैं. नाथ-पंथ और ‘हठयोग’ का प्रवर्तक गुरु गोरखनाथ को माना जाता है जो हिंदी के आदि...
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Tag :कविता
  April 16, 2017, 2:28 am
मिल जाएँ दो पानियों जैसेवैयक्तिकता और निजी अस्मिता के चरम विस्फोट के इस दौर में जो सामाजिक संस्था सर्वाधिक विचलित हुई दिखाई देती है, वह है विवाह व्यवस्था. भारतीय समाज की नींव माने जाने वाले परिवार के हिलने से इस समाज-सभ्यता की पूरी संरचना काँपने लग गई है. विदेशी आर्थि...
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Tag :पुस्तक
  March 24, 2017, 1:52 am
चुप रहूँ ... या बोल दूँ / प्रवीण प्रणव/ गीता प्रकाशन, हैदराबाद/ 2017/ 149 रुपए/ पेपरबैक : 136  पृष्ठ भूमिका आपने कहा है तो मान जाता हूँ चलिए हामी में सर हिलाता हूँ दरिया मिलता है यूँ तो समंदर से मैं अश्कों को पानी में मिलाता हूँ ...ज़रा मुश्किल तो है पर बच्चों को सूखी रोटी ख़्...
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Tag :पुस्तक
  March 23, 2017, 3:46 pm
न्यू होराइजन कॉलेज, बेंगलूरु (कर्नाटक) में 29 जनवरी, 2016 को ''हिंदी भाषा एवं शिक्षण''विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी हुई थी. मुझे उसमें बीज भाषण करने का अवसर मिला था. हिंदी विभाग की अध्यक्ष और संगोष्ठी संयोजक डॉ. नीलिमा दुबेके संपादकत्व में उस संगोष्ठी के सभी भाषण और शोधपत्र''प...
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Tag :पुस्तक
  March 21, 2017, 12:55 am
- डॉ. सुपर्णा मुखर्जी, हैदराबादmukherjee.jaydeep@gmail.com`कथाकारों की दुनिया' [2017] डॉ. ऋषभदेव शर्मा [1957] की ओर से पाठकों को दिया गया एक और नायाब उपहार है. संपूर्ण पुस्तक 6 खंडों में विभक्त है. पहले दो खंडों में लेखक ने जहाँ हिंदी उपन्यासों और उपन्यासकारों की दुनिया की सैर कराई है, वहीं तीसरे औ...
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Tag :कथाकारों की दुनिया
  March 14, 2017, 1:04 am
कथाकारों की दुनिया/ ऋषभदेव शर्मा I.S.B.N. : 978-81-7965-278-7प्रथम संस्करण, 2017 पृष्ठ 392, मूल्य : रु. 800 तक्षशिला प्रकाशन, 98 ए, हिंदी पार्क, दरियागंज, नई दिल्ली - 110002दूरभाष : 011-43528469, 23258802ईमेल : info@taxshilabooks.in, taxshilabooks@gmail.comअनुक्रम दो शब्द अभिमत आशंसा आभार                  ∫∫ खंड 1∫∫ : हिंदी ...
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Tag :कथाकारों की दुनिया
  February 12, 2017, 9:02 pm
कथाकारों की दुनिया/ ऋषभदेव शर्मा I.S.B.N. : 978-81-7965-278-7प्रथम संस्करण, 2017 पृष्ठ 392, मूल्य : रु. 800 तक्षशिला प्रकाशन, 98 ए, हिंदी पार्क, दरियागंज, नई दिल्ली - 110002दूरभाष : 011-43528469, 23258802ईमेल : info@taxshilabooks.in, taxshilabooks@gmail.comआशंसासाहित्य का संसार अपार है - अपार संभावनाओं से भरा हुआ. ये अपार संभावनाएँ साहित्...
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Tag :ऋषभ देव शर्मा
  February 12, 2017, 8:58 pm
कथाकारों की दुनिया/ ऋषभदेव शर्मा I.S.B.N. : 978-81-7965-278-7प्रथम संस्करण, 2017 पृष्ठ 392, मूल्य : रु. 800 तक्षशिला प्रकाशन, 98 ए, हिंदी पार्क, दरियागंज, नई दिल्ली - 110002दूरभाष : 011-43528469, 23258802ईमेल : info@taxshilabooks.in, taxshilabooks@gmail.comअभिमत कवि,समीक्षक, समालोचक, भाषाविद और साहित्य की अन्यान्य विधाओं के गंभीर अध्ये...
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Tag :ऋषभ देव शर्मा
  February 12, 2017, 8:53 pm
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