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Blog: ऋषभ उवाच

Blogger: ऋषभ देव शर्मा
भूमिकाप्रोफ़ेसर एन. गोपि  (1948) समकालीन भारतीय कविता और तेलुगु आलोचना के प्रथम पंक्ति के रचनाकारों में शामिल हैं। उनकी कविताओं का देश-विदेश की 25 से अधिक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उन्होंने अपने साहित्य अकादमी से पुरस्कृत काव्य 'समय को सोने नहीं दूँगा'के माध्यम से त... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   2:37pm 29 Jan 2020 #कविता
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
हर कविता त्योहार है डॉ. एन. लक्ष्मी लंबे समय से हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन-अध्यापन से जुड़ी हैं तथा अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में सेवारत हैं। अपनी इस प्रथम काव्यकृति के माध्यम से वे एक संभावनाशील तमिलभाषी हिंदी कवयित्री  के रूप में साहित्य के सुधी पाठकों के ... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   7:07pm 21 Jan 2020 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
भूमिका"तेरा मेरा साथ रहे" (2019, कानपुर: माया प्रकाशन) डॉ रामनिवास साहू (1954)  का नया उपन्यास है। इसकी कथा स्त्री-पुरुष संबंध के अलग-अलग रंग के धागों से बुनी गई है। सरल रेखा में चलती इस कथा की नायिका भारतीय समाज की एक सामान्य स्त्री है। स्त्री के रूप में वह सामान्य है, लेकिन उस... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   3:08pm 14 Dec 2019 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
अथ ... तेलुगु कहानियों के इस प्रतिनिधि संकलन की पांडुलिपि से गुजरना मेरे लिए तेलुगु भाषा-समाज की अपने अस्तित्व को रेखांकित करने की जद्दोजहद के साहित्यिक साक्ष्य से गुजरने जैसा था। तेलंगाना साहित्य अकादमी ने हिंदी अनुवाद के माध्यम से समकालीन तेलुगु कहानी के विविध त... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   1:21pm 8 Dec 2019 #तेलंगाना
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
हिंदी भाषाचिंतन को प्रो. दिलीप सिंह का अवदान-ऋषभदेव शर्माहिंदी भाषाविज्ञान की परिवर्तनशील प्रकृति और उसके व्यापक होते जा रहे सरोकारों पर जिन इने-गिने भाषा अध्येताओं का ध्यान गया है उनमें प्रो. दिलीप सिंह (1951)का नाम अग्रगण्य है। उन्होंने भाषावैज्ञानिक चिंतन को नवीन भ... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   8:32am 12 Sep 2019 #गवेषणा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
भूमिका‘खूँटी पर आकाश’ ज्ञानचंद मर्मज्ञ के बाईस निबंधों का संग्रह है। वैसे तो ज्ञानचंद मर्मज्ञ की प्रसिद्धि मुख्यतः ओज के कवि और सरस गीतकार के रूप में है, लेकिन एक राष्ट्रीय और सामाजिक चेतना संपन्न पत्रकार तथा निबंधकार के रूप में भी उनकी उपलब्धियां रेखांकित करने यो... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   11:14am 17 Aug 2019 #भूमिका
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
समीक्षित पुस्तक : कादंबिनी क्लब, हैदराबाद रजतोत्सव संस्मारिका/  संपादक मंडल : डॉ. रमा द्विवेदी, मीना मुथा, अवधेश कुमार सिन्हा, डॉ. आशा मिश्र एवं प्रवीण प्रणव/ प्रकाशक : कादंबिनी क्लब, हैदराबाद/ संस्करण : 2019/ पृष्ठ : 140  पुस्तक समीक्षा हैदरा... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   4:35pm 13 Jul 2019 #समीक्षा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
आचार्य पी.आदेश्वर राव (ज. 20 दिसंबर, 1936) दक्षिण भारत में हिंदी के उन आचार्यों में अग्रणी हैं जिन्होंने अपनी मौलिक साहित्य सर्जना के बल पर देश भर में प्रभूत यश अर्जित किया है। वे ‘गुरूणाम् गुरु’ हैं। हिंदी भाषा और साहित्य उनकी रग-रग में रमे हैं। उन्होंने काशी हिंदू विश्ववि... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   4:23pm 13 Jul 2019 #आलेख
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
पुस्तक - प्राचीन भारत में खेल-कूद (स्वरूप और महत्व)/ लेखक- अवधेश कुमार सिन्हा   +919849072673/ प्रकाशक - मिलिंद प्रकाशन, हैदराबाद/ संस्करण - प्रथम, 2018, पेपरबैक/ पृष्ठ - 158/ मूल्य - ₹ 250.पुस्तक चर्चा प्राचीन भारत में खेल-कूद : स्वरूप एवं महत्वसमीक्षक- ऋषभदेव शर्मा बहुज्ञ, बहुपठ, बहुश्... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   12:02pm 13 Jul 2019 #आलोचना
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
अनामिका: समकालीन स्त्री विमर्श/ डॉ. चंदन कुमारी/2019/ विद्या प्रकाशन,कानपुर/176 पृष्ठ,सजिल्द/ 500 रुपये अभिमत डॉ. चंदन कुमारी की इस समीक्षा-कृति “अनामिका: समकालीन स्त्री विमर्श” की पांडुलिपि का पारायण करते समय बार-बार मुझे एक ओर चंदन कुमारी का जिज्ञासा और उत्सुकता से दी... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   11:29am 11 Jul 2019 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
संपादकीयम्— भविष्य का आईना, वर्तमान की नज़रPraveen PranavApr 28डा० ऋषभदेव शर्मा ने बहुत स्नेह के साथ अपनी ये पुस्तक लगभग एक महीने पहले भेंट की, लेकिन इसे पढ़ने का अवसर अब मिला। इन दिनों व्यस्तता बहुत रही लेकिन ऐसा नहीं कि इस बीच कुछ पढ़ा ही नहीं। कुछ मिठाई ऐसी होती है जिसे आप स्वाद ल... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   2:12pm 2 May 2019 #पुस्तक
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
पुस्तक समीक्षा ‘संपादकीयम्’ : वर्तमान का आईना - डॉ. चंदन कुमारी chandan82hindi@gmail.com ‘संपादकीयम्’(2019) ऋषभदेव शर्मा के चुनिंदा संपादकीयों का संग्रह है। ये संपादकीय नियमित रूप से हैदराबाद के एक दैनिक अख़बार में प्रकाशित होते रहे हैं और यह क्रम अब भी जारी है। डॉ. योगेंद्... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   7:52pm 3 Apr 2019 #पुस्तक
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
पुस्तक समीक्षा ‘संपादकीयम्’ : शब्दहीन का बेमिसाल सफर समीक्षक : प्रो. गोपाल शर्मा ‘संपादकीयम्’ पुस्तक में संकलित और ‘डेली हिंदी मिलाप’ में पूर्व प्रकाशित विभिन्न सामयिक विषयों पर डॉ. ऋषभदेव शर्मा द्वारा लिखे गए ‘संपादकीय’ हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में प... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   7:19pm 3 Apr 2019 #परिलेख प्रकाशन
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
शांति लाने में है बहादुरी : ‘संपादकीयम्’-डॉ. रामनिवास साहूआज का मानव अपनी सभ्यता के विकास को चरम स्थिति पर पाकर जहाँ गर्व से फूला जा रहा है, वहीं आज के चिंतक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, साधु, ऋषि, मुनि, उपदेशक, रक्षक, संरक्षक, यहाँ तक कि उच्चतम पत्रकार, संपादक संसार  के, विश्व के,... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   4:36pm 23 Mar 2019 #पुस्तक
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
प्राक्कथन डॉ. सत्यनारायण के ग्रंथ “हरियाणा का सामाजिक एवं साहित्यिक परिदृश्य” की पांडुलिपि देखने का सौभाग्य मिला। इस सामग्री से गुजरते हुए मैं जहाँ लेखक की गहन शोध दृष्टि का कायल होता गया, वहीं इस ग्रंथ की नींव में निहित हरियाणा की सामाजिक और साहित्यिक चेतना से अभ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   3:42pm 23 Mar 2019 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
यह महान दृश्य है...@01मार्च,2019भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को अंतत: पाकिस्तान ने विधिवत भारत को सौंप दिया। भारत भर में दीवाली का हर्ष छा गया। वह क्षण अत्यंत रोमांचकारी और गौरवपूर्ण था जब भारतमाता के इस सपूत ने मातृभूमि की सीमा में वापस प्रवेश किया। उस ऐ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   3:18am 4 Mar 2019 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
साहित्य : सुधारात्मक दृष्टिकोण-ऋषभदेव शर्मा एवं पूर्णिमा शर्मासाहित्य की भारतीय अवधारणा ‘सहित’ अर्थात सामाजिकता, सामूहिकता और लोकमंगल के साथ जुड़ी हुई है। साहित्य के प्रयोजनों की चर्चा करते हुए यहाँ ‘शिवेतर’ की ‘क्षति’ का भी  बलपूर्वक आख्यान किया गया है। समाज क... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   8:01pm 30 Dec 2018 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
सं. बिश्नोई, मिलन (2018), किन्नर विमर्श : साहित्य और समाज, कानपुर : विद्या भूमिका उत्तर आधुनिक विमर्श का दौर आने पर हिंदी साहित्य सृजन और समीक्षा के क्षेत्र में परिधि का केंद्र की ओर सरकने का जो क्रम शुरू हुआ था, उसके काफी अच्छे परिणाम निकले हैं। कल तक जो समुदाय और मुद्दे स... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   4:36pm 29 Dec 2018 #पुस्तक
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
भक्तिकाल में सगुणमार्गीय कवियों का एक वर्ग रामभक्ति काव्यधारा के रूप में माना जाता है। इसमें सगुण भक्ति के आलंबन के रूप में विष्णु के अवतार राम की प्रतिष्ठा है। यहाँ ‘राम’ का अर्थ परब्रह्म या ऐसी परम शक्ति है जिसमें सभी देवता रमण करें। बाद में यह ‘दशरथपुत्र राम’ का व... Read more
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
सगुणमार्गीय भक्तिकाव्य में कृष्ण को आराध्य मानने वाले कवियों ने कृष्ण भक्ति काव्य परंपरा का विकास किया। भारतीय संस्कृति में कृष्ण का व्यक्तित्व अत्यंत विलक्षण माना जाता है। ऋग्वेद, उपनिषद, महाभारत तथा हरिवंश, विष्णु, भागवत, ब्रह्मवैवर्त आदि पुराणों में उपलब्धता क... Read more
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
निर्गुण काव्यधारा के “जिन कवियों ने प्रेम द्वारा ईश्वर की प्राप्ति पर बल दिया, वे प्रेममार्गी अथवा सूफी कवि कहलाए। जायसी, मंझन, कुतुबन, उस्मान आदि इस धारा के प्रतिनिधि कवि हैं। इन कवियों की सभी रचनाएँ (पद्मावत, मृगावती, मधुमालती, चित्रावली) भारतीय प्रेम गाथाओं की कथाव... Read more
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
भक्तिकाल को ‘हिंदी साहित्य का स्वर्णयुग’ कहा जाता है। इस काव्य की दो मुख्य धाराएँ हैं – एक निर्गुण काव्य धारा, दो – सगुण काव्य धारा। इनके भी प्रवृत्तिगत दो-दो भेद हैं। निर्गुण धारा के अंतर्गत (1) निर्गुण संत काव्य (ज्ञानाश्रयी शाखा) तथा (2) प्रेमाख्यानक काव्य (प्रेमाश्रय... Read more
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
भक्तिकाल : पृष्ठभूमि : सांस्कृतिक परिस्थिति सांस्कृतिक दृष्टि से भक्तिकालीन वातावरण में हिंदू और मुस्लिम संस्कृतियों का आमना-सामना, विरोध और समन्वय घटित हुआ। मध्यकालीन हिंदू संस्कृति में लोक और शास्त्र सम्मत अलग-अलग जीवनधाराएँ विद्यमान थीं, जिनके द्वारा साहिष्... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   11:45am 7 Oct 2018 #
Blogger: ऋषभ देव शर्मा
भक्तिकालीन साहित्य की पृष्ठभूमि में विद्यमान समाज संक्रमण काल से गुजरने वाला समाज है। यों तो भारतीय समाज में अलग-अलग स्रोतों से आई हुई जातियाँ सम्मिलित थीं, जो इस काल से पूर्व ही सामंजस्य की प्रक्रिया को पूर्ण कर चुकी थीं; परंतु इस काल में एक ऐसी जाति का आगमन विजेता के ... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   11:40am 7 Oct 2018 #
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