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ऋषभ उवाच

भूमिका‘खूँटी पर आकाश’ ज्ञानचंद मर्मज्ञ के बाईस निबंधों का संग्रह है। वैसे तो ज्ञानचंद मर्मज्ञ की प्रसिद्धि मुख्यतः ओज के कवि और सरस गीतकार के रूप में है, लेकिन एक राष्ट्रीय और सामाजिक चेतना संपन्न पत्रकार तथा निबंधकार के रूप में भी उनकी उपलब्धियां रेखांकित करने यो...
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Tag :भूमिका
  August 17, 2019, 4:44 pm
समीक्षित पुस्तक : कादंबिनी क्लब, हैदराबाद रजतोत्सव संस्मारिका/  संपादक मंडल : डॉ. रमा द्विवेदी, मीना मुथा, अवधेश कुमार सिन्हा, डॉ. आशा मिश्र एवं प्रवीण प्रणव/ प्रकाशक : कादंबिनी क्लब, हैदराबाद/ संस्करण : 2019/ पृष्ठ : 140  पुस्तक समीक्षा हैदरा...
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Tag :समीक्षा
  July 13, 2019, 10:05 pm
आचार्य पी.आदेश्वर राव (ज. 20 दिसंबर, 1936) दक्षिण भारत में हिंदी के उन आचार्यों में अग्रणी हैं जिन्होंने अपनी मौलिक साहित्य सर्जना के बल पर देश भर में प्रभूत यश अर्जित किया है। वे ‘गुरूणाम् गुरु’ हैं। हिंदी भाषा और साहित्य उनकी रग-रग में रमे हैं। उन्होंने काशी हिंदू विश्ववि...
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Tag :आलेख
  July 13, 2019, 9:53 pm
पुस्तक - प्राचीन भारत में खेल-कूद (स्वरूप और महत्व)/ लेखक- अवधेश कुमार सिन्हा   +919849072673/ प्रकाशक - मिलिंद प्रकाशन, हैदराबाद/ संस्करण - प्रथम, 2018, पेपरबैक/ पृष्ठ - 158/ मूल्य - ₹ 250.पुस्तक चर्चा प्राचीन भारत में खेल-कूद : स्वरूप एवं महत्वसमीक्षक- ऋषभदेव शर्मा बहुज्ञ, बहुपठ, बहुश्...
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Tag :आलोचना
  July 13, 2019, 5:32 pm
अनामिका: समकालीन स्त्री विमर्श/ डॉ. चंदन कुमारी/2019/ विद्या प्रकाशन,कानपुर/176 पृष्ठ,सजिल्द/ 500 रुपये अभिमत डॉ. चंदन कुमारी की इस समीक्षा-कृति “अनामिका: समकालीन स्त्री विमर्श” की पांडुलिपि का पारायण करते समय बार-बार मुझे एक ओर चंदन कुमारी का जिज्ञासा और उत्सुकता से दी...
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Tag :पुस्तक चर्चा
  July 11, 2019, 4:59 pm
संपादकीयम्— भविष्य का आईना, वर्तमान की नज़रPraveen PranavApr 28डा० ऋषभदेव शर्मा ने बहुत स्नेह के साथ अपनी ये पुस्तक लगभग एक महीने पहले भेंट की, लेकिन इसे पढ़ने का अवसर अब मिला। इन दिनों व्यस्तता बहुत रही लेकिन ऐसा नहीं कि इस बीच कुछ पढ़ा ही नहीं। कुछ मिठाई ऐसी होती है जिसे आप स्वाद ल...
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Tag :पुस्तक
  May 2, 2019, 7:42 pm
पुस्तक समीक्षा ‘संपादकीयम्’ : वर्तमान का आईना - डॉ. चंदन कुमारी chandan82hindi@gmail.com ‘संपादकीयम्’(2019) ऋषभदेव शर्मा के चुनिंदा संपादकीयों का संग्रह है। ये संपादकीय नियमित रूप से हैदराबाद के एक दैनिक अख़बार में प्रकाशित होते रहे हैं और यह क्रम अब भी जारी है। डॉ. योगेंद्...
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Tag :पुस्तक
  April 4, 2019, 1:22 am
पुस्तक समीक्षा ‘संपादकीयम्’ : शब्दहीन का बेमिसाल सफर समीक्षक : प्रो. गोपाल शर्मा ‘संपादकीयम्’ पुस्तक में संकलित और ‘डेली हिंदी मिलाप’ में पूर्व प्रकाशित विभिन्न सामयिक विषयों पर डॉ. ऋषभदेव शर्मा द्वारा लिखे गए ‘संपादकीय’ हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में प...
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Tag :परिलेख प्रकाशन
  April 4, 2019, 12:49 am
शांति लाने में है बहादुरी : ‘संपादकीयम्’-डॉ. रामनिवास साहूआज का मानव अपनी सभ्यता के विकास को चरम स्थिति पर पाकर जहाँ गर्व से फूला जा रहा है, वहीं आज के चिंतक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, साधु, ऋषि, मुनि, उपदेशक, रक्षक, संरक्षक, यहाँ तक कि उच्चतम पत्रकार, संपादक संसार  के, विश्व के,...
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Tag :पुस्तक
  March 23, 2019, 10:06 pm
प्राक्कथन डॉ. सत्यनारायण के ग्रंथ “हरियाणा का सामाजिक एवं साहित्यिक परिदृश्य” की पांडुलिपि देखने का सौभाग्य मिला। इस सामग्री से गुजरते हुए मैं जहाँ लेखक की गहन शोध दृष्टि का कायल होता गया, वहीं इस ग्रंथ की नींव में निहित हरियाणा की सामाजिक और साहित्यिक चेतना से अभ...
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Tag :पुस्तक चर्चा
  March 23, 2019, 9:12 pm
यह महान दृश्य है...@01मार्च,2019भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को अंतत: पाकिस्तान ने विधिवत भारत को सौंप दिया। भारत भर में दीवाली का हर्ष छा गया। वह क्षण अत्यंत रोमांचकारी और गौरवपूर्ण था जब भारतमाता के इस सपूत ने मातृभूमि की सीमा में वापस प्रवेश किया। उस ऐ...
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Tag :
  March 4, 2019, 8:48 am
साहित्य : सुधारात्मक दृष्टिकोण-ऋषभदेव शर्मा एवं पूर्णिमा शर्मासाहित्य की भारतीय अवधारणा ‘सहित’ अर्थात सामाजिकता, सामूहिकता और लोकमंगल के साथ जुड़ी हुई है। साहित्य के प्रयोजनों की चर्चा करते हुए यहाँ ‘शिवेतर’ की ‘क्षति’ का भी  बलपूर्वक आख्यान किया गया है। समाज क...
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Tag :
  December 31, 2018, 1:31 am
सं. बिश्नोई, मिलन (2018), किन्नर विमर्श : साहित्य और समाज, कानपुर : विद्या भूमिका उत्तर आधुनिक विमर्श का दौर आने पर हिंदी साहित्य सृजन और समीक्षा के क्षेत्र में परिधि का केंद्र की ओर सरकने का जो क्रम शुरू हुआ था, उसके काफी अच्छे परिणाम निकले हैं। कल तक जो समुदाय और मुद्दे स...
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Tag :पुस्तक
  December 29, 2018, 10:06 pm
भक्तिकाल में सगुणमार्गीय कवियों का एक वर्ग रामभक्ति काव्यधारा के रूप में माना जाता है। इसमें सगुण भक्ति के आलंबन के रूप में विष्णु के अवतार राम की प्रतिष्ठा है। यहाँ ‘राम’ का अर्थ परब्रह्म या ऐसी परम शक्ति है जिसमें सभी देवता रमण करें। बाद में यह ‘दशरथपुत्र राम’ का व...
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Tag :हिंदी साहित्य का इतिहास
  October 10, 2018, 4:38 pm
सगुणमार्गीय भक्तिकाव्य में कृष्ण को आराध्य मानने वाले कवियों ने कृष्ण भक्ति काव्य परंपरा का विकास किया। भारतीय संस्कृति में कृष्ण का व्यक्तित्व अत्यंत विलक्षण माना जाता है। ऋग्वेद, उपनिषद, महाभारत तथा हरिवंश, विष्णु, भागवत, ब्रह्मवैवर्त आदि पुराणों में उपलब्धता क...
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Tag :हिंदी साहित्य का इतिहास
  October 10, 2018, 4:34 pm
निर्गुण काव्यधारा के “जिन कवियों ने प्रेम द्वारा ईश्वर की प्राप्ति पर बल दिया, वे प्रेममार्गी अथवा सूफी कवि कहलाए। जायसी, मंझन, कुतुबन, उस्मान आदि इस धारा के प्रतिनिधि कवि हैं। इन कवियों की सभी रचनाएँ (पद्मावत, मृगावती, मधुमालती, चित्रावली) भारतीय प्रेम गाथाओं की कथाव...
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Tag :हिंदी साहित्य का इतिहास
  October 10, 2018, 4:12 pm
भक्तिकाल को ‘हिंदी साहित्य का स्वर्णयुग’ कहा जाता है। इस काव्य की दो मुख्य धाराएँ हैं – एक निर्गुण काव्य धारा, दो – सगुण काव्य धारा। इनके भी प्रवृत्तिगत दो-दो भेद हैं। निर्गुण धारा के अंतर्गत (1) निर्गुण संत काव्य (ज्ञानाश्रयी शाखा) तथा (2) प्रेमाख्यानक काव्य (प्रेमाश्रय...
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Tag :हिंदी साहित्य का इतिहास
  October 10, 2018, 3:52 pm
भक्तिकाल : पृष्ठभूमि : सांस्कृतिक परिस्थिति सांस्कृतिक दृष्टि से भक्तिकालीन वातावरण में हिंदू और मुस्लिम संस्कृतियों का आमना-सामना, विरोध और समन्वय घटित हुआ। मध्यकालीन हिंदू संस्कृति में लोक और शास्त्र सम्मत अलग-अलग जीवनधाराएँ विद्यमान थीं, जिनके द्वारा साहिष्...
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Tag :
  October 7, 2018, 5:15 pm
भक्तिकालीन साहित्य की पृष्ठभूमि में विद्यमान समाज संक्रमण काल से गुजरने वाला समाज है। यों तो भारतीय समाज में अलग-अलग स्रोतों से आई हुई जातियाँ सम्मिलित थीं, जो इस काल से पूर्व ही सामंजस्य की प्रक्रिया को पूर्ण कर चुकी थीं; परंतु इस काल में एक ऐसी जाति का आगमन विजेता के ...
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Tag :
  October 7, 2018, 5:10 pm
राजनैतिक दृष्टि से भक्तिकाल के एक छोर पर मुहम्मद तुगलक और दूसरे छोर पर शाहजहाँ की सत्ता विद्यमान है अर्थात यह काल भारतीय इतिहास का वह महत्वपूर्ण समय है जिसमें दिल्ली सल्तनत में तुगलक वंश से लेकर मुगलवंश तक का आधिपत्य रहा। मुहम्मद तुगलक एक सनकी परंतु निष्पक्ष शासक ...
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Tag :हिंदी
  October 7, 2018, 5:04 pm
14 वीं शताब्दी के मध्य से 17 वीं शताब्दी के मध्य तक के काल को हिंदी साहित्य के इतिहास में पूर्वमध्यकाल और भक्तिकाल कहा जाता है। इस काल का समग्र साहित्य मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की काव्यात्मक परिणति है और उस व्यापक जनजागरण के प्रेरणा सूत्र इसमें छिपे हैं, जिसने मध्यकालीन र...
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Tag :छात्रोपयोगी
  October 7, 2018, 5:00 pm
तुलसी के राम का स्वभाव अत्यंत कोमल है। उन्हें रिझाने के लिए बस एक ही योग्यता चाहिए। भक्त के हृदय में अगर सच्चा प्रेम है तो राम इतने दयालु हैं कि उसके सारे पापों और अपराधों का तुरंत शमन कर देते हैं और पापमुक्त करके अपनी शरण में ले लेते हैं। इसीलिए बाबा कहते हैं कि मेरे रा...
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Tag :
  September 22, 2018, 2:20 am
अवधेश कुमार सिन्हा (ज. 9 सितंबर, 1950) की 68वीं वर्षगाँठ पर उनकी शोधपूर्ण कृति "प्राचीन भारत में खेल-कूद (स्वरूप एवं महत्व)" (2018. हैदराबाद : मिलिंद प्र.) का प्रकाशन/लोकार्पण हैदराबाद के हिंदी जगत के लिए अत्यंत हर्षकारी है।  अवधेश जी बहुज्ञ लेखक हैं। उनका वैज्ञानिक और तर्कपूर्ण ...
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Tag :जन्मदिन
  September 7, 2018, 8:03 pm
राम लोक के देवता हैं। लोकप्रिय हैं। लोक रक्षक हैं। लोकाभिराम हैं। इसलिए अयोध्या के राजमहल से बाहर निकलते ही वे स्वयं को लोक में विलीन कर देते हैं। लोक जितनी तीव्रता से अपने राम की ओर उमड़ता है, राम भी उतनी उत्कटता से लोक को अपने में समेटते हैं। तुलसी बाबा बताते हैं कि रा...
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Tag :
  July 31, 2018, 12:30 am
आजकल जिसे देखिए वही गठबंधन और समझौते की बातें करता दिखाई देता है। किसी तात्कालिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए किए जाने वाले ऐसे गठबंधन बिखर भी बहुत जल्दी जाते हैं। दरअसल किन्हीं दो व्यक्तियों या संस्थाओं का लंबे समय तक या आजीवन साथ-साथ चलना तब तक संभव नहीं जब तक उनके परस्...
ऋषभ उवाच...
Tag :
  July 31, 2018, 12:24 am
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