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ऋषभ उवाच

राम लोक के देवता हैं। लोकप्रिय हैं। लोक रक्षक हैं। लोकाभिराम हैं। इसलिए अयोध्या के राजमहल से बाहर निकलते ही वे स्वयं को लोक में विलीन कर देते हैं। लोक जितनी तीव्रता से अपने राम की ओर उमड़ता है, राम भी उतनी उत्कटता से लोक को अपने में समेटते हैं। तुलसी बाबा बताते हैं कि रा...
ऋषभ उवाच...
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  July 31, 2018, 12:30 am
आजकल जिसे देखिए वही गठबंधन और समझौते की बातें करता दिखाई देता है। किसी तात्कालिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए किए जाने वाले ऐसे गठबंधन बिखर भी बहुत जल्दी जाते हैं। दरअसल किन्हीं दो व्यक्तियों या संस्थाओं का लंबे समय तक या आजीवन साथ-साथ चलना तब तक संभव नहीं जब तक उनके परस्...
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  July 31, 2018, 12:24 am
दो शब्द‘हिंदी है हम विश्व मैत्री मंच’ की स्थापना तथा ‘हिंदी की दुनिया और दुनिया में हिंदी’ का प्रकाशन एक सपने के फलीभूत होने जैसी सुखद घटनाएँ हैं. सपने को फालतू चीज न समझें, वह भी चेतना की अवस्थाओं में से एक है. सपना देखे बिना कुछ हो भी नहीं सकता. यह सृष्टि ईश्वर का और ईश्...
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Tag :पुस्तक
  July 6, 2018, 10:28 pm
पुण्य तिथि 28 मई पर विशेषरहनुमा तो नहीं हो, साँप ही तो हो : पं. गोपाल प्रसाद व्यास-ऋषभ देव शर्माउन्होंने कक्षा सात की भी परीक्षा नहीं दी थी, लेकिन वे अलंकारशास्त्र, रससिद्धांत, नायिकाभेद और समस्त ललित कलाओं के विशेषज्ञ थे. उनका जन्म ब्रजमंडल के एक छोटे से गाँव में हुआ था, ...
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Tag :आलोचना
  May 28, 2018, 1:34 pm
रामकथा आधारित एनिमेशन ‘सीता सिंग्स द ब्ल्यूज़’ : एक अध्ययनऋषभदेव शर्मा और कुमार लव‘रामायण’, ‘महाभारत’ और ‘बृहत्कथा’ भारतीय वाङ्मय के ऐसे आकर-ग्रंथ हैं जिनकी कथाएँ अनेक रूपों में देसी लोकसाहित्य से लेकर विदेशी साहित्य तक में फैली हुई हैं. इनमें भी विशेष रूप से अपनी सर...
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Tag :नीना पाले. एनीमेशन
  May 25, 2018, 11:10 am
प्रवासी हिंदी कवियों की संवेदना : सरोकार के धरातल - ऋषभ देव शर्मा हिंदी कविता का फलक आज पूरी तरह से अक्षेत्रीय हो चुका है. हिंदी के साहित्य-जगत में अब कभी सूरज डूबता नहीं है. कक्षाओं में भले ही यह पढ़ाया जाता हो कि हिंदी अमुक-अमुक सीमित भू-खंड की भाषा है, परंतु उसका प्रसार ...
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Tag :आलोचना
  May 24, 2018, 4:59 pm
उपन्यास को आधुनिक युग का महाकाव्य कहा जाता है. इसका कारण यह है कि इस विधा में महाकाव्य की भाँति संपूर्ण जीवन को समेटने तथा भूत, भविष्य और वर्तमान को एक साथ संबोधित करने की महती संभावनाएँ निहित हैं. यही कारण है कि आधुनिक उपन्यास से हम यह भी अपेक्षा करते हैं कि वह समकालीन ज...
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Tag :पुस्तक चर्चा
  March 21, 2018, 12:42 pm
प्रो. ऋषभदेव शर्मा के कक्षा-व्याख्यानों के आधार पर डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा द्वारा लिप्यंकिततुलनात्मक भारतीय साहित्य : अवधारणा और मूल्य - प्रो. ऋषभदेव शर्मा [1]सामान्य साहित्यतुलनात्मक साहित्य का अध्ययन करते समय तीन परस्पर निकटस्थ अवधारणाओं से टकराना पड़ता है. ये ह...
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Tag :तुलनात्मक साहित्य
  March 21, 2018, 3:16 am
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  February 27, 2018, 5:46 pm
भारतीय साहित्य के अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को समझने के लिए हमें पहले यह जानना होगा कि भारतीय साहित्य का निजी परिप्रेक्ष्य क्या और कैसा है. आज  विश्व साहित्य के माध्यम से और विश्व में जो समाज-सांस्कृतिक और राजनैतिक परिवर्तन हो रहे हैं, उनके प्रभाव को ग्रहण करके एक...
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  February 27, 2018, 4:39 pm
 हिंदी साहित्य के विश्व परिप्रेक्ष्य को हमें हिंदी की आज की स्थिति के सापेक्ष  विवेचित करना होगा. इसमें संदेह नहीं कि आज हिंदी  का विस्तार पूरी दुनिया में है. बहुत सारे देशों में, विश्वविद्यालयों में, हिंदी पढ़ी-पढाई जाती है. हिंदी में लिखने वाले भारतीय और भारतेतर ल...
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  February 27, 2018, 4:09 pm
शर्मा, हरीश कुमार. (2016), राष्ट्रीय स्मृति, संस्कृति और भाषा. इलाहाबाद : साहित्य भंडार राजीव गांधी विश्वविद्यालय, अरुणाचल प्रदेश :24 फरवरी, 2018 : पुस्तक के लेखक प्रोफेसर हरीश कुमार शर्मा ने इसके भूमिका-लेखक डॉ. ऋषभदेव शर्मा को 'राष्ट्रीय स्मृति, संस्कृति और भाषा'की प्रति भें...
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Tag :भूमिका
  February 26, 2018, 1:13 am
नया साल (हिंदी में अनूदित तेलुगु कविताएँ)/ संपादक : मामिडि हरिकृष्ण/ अनुवादक : गुड्ला परमेश्वर द्विवागीश/ 2017/  250 रूपए  भाषा सांस्कृतिक शाखा, तेलंगाना सरकार, कला भवन, रवींद्र भारती, हैदराबाद/   ‘कोत्त सालू’ या ‘नया साल’ तेलंगाना के 59 कवियों की कविताओं का संकलन है...
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Tag :अनुवाद विमर्श
  February 14, 2018, 1:06 am
'समन्वय दक्षिण' : अप्रैल-सितंबर, 2017 : पृष्ठ 84-92 : केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद आलूरि बैरागी चौधरी का कविकर्म-डॉ. ऋषभ देव शर्मा धुनी जा रही दुर्बल काया .मलिन चाम में हाड-मांस जिसमें स्वर्गिक सपनों की माया.नस-नस तांत बनी धुन जातीरग-रग में हिम-ज्वाल सुलगतीउड़ते उजले मन क...
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Tag :आलेख
  November 27, 2017, 11:59 am
तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर के वार्षिक ब्रह्मोत्सव -2017 की अविस्मरणीय झाँकी*******ब्रह्मोत्सव का पहला दिन“””””””””””””””””””””””22 सितंबर, 2017। आज सुबह मैं तिरुपति पहुँचा। स्टेशन से लगे हुए विशाल भवन 'विष्णु निवासं'में ठहराया गया। शाम को सामान सहित कार से तिरुमला ले आ...
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  September 25, 2017, 2:41 am
23 जुलाई 2017 को हिंदी भवन, नई दिल्ली के सभागार में कवि श्री रामकिशोर उपाध्याय के कविता संग्रह ''दीवार में आले''के लोकार्पण के अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ. ऋषभदेव शर्मा द्वारा दिया गया बीज वक्तव्य....
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Tag :पुस्तक चर्चा
  September 19, 2017, 12:14 am
हैदराबाद : 27 अगस्त, 2017 ;"हिंदी हैं हम विश्व मैत्री मंच"के उद्घाटन समारोह में अध्यक्षीय वक्तव्य : डॉ. ऋषभ देव शर्मा...
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Tag :you tube
  August 29, 2017, 1:35 am
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Tag :चंद्रमौलेश्वर प्रसाद
  August 22, 2017, 10:21 pm
राजौरिया, शिवकुमार (2017). वृद्धावस्था विमर्श और हिंदी कहानी. भारत, नई दिल्ली : अद्वैत प्रकाशन. आईएसबीएन : 978-93-82554-87-5. रु. 595/- 296 पृष्ठ. सजिल्द भूमिका विभिन्न हाशियाकृत समुदायों के मानवाधिकारों की चिंता के बीच इधर कुछ दशकों से विश्व भर में उत्तर आधुनिक संदर्भ में वृद्धों की सम...
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Tag :चित्रावली
  August 2, 2017, 1:59 am
अशोक वाटिका में जब हनुमान पहली बार सीता के समक्ष आते हैं तो उनकी पहचान के प्रति आश्वस्त होने पर सीता जाने कब से बँधे पड़े अपने मन को उनके समक्ष खोल देती हैं. राम-लक्ष्मण की कुशलता पूछने के बाद वे इतने दिन तक अपनी उपेक्षा रूपी निष्ठुरता को राम के लिए स्वाभाविक नहीं मानतीं. ...
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Tag :संपादकीय : 'रामायण संदर्शन' के
  June 27, 2017, 12:29 am
सुंदरकांड में कई स्थलों पर तुलसी बाबा ने राम के स्वभाव की चर्चा की है. विभीषण से प्मिलने पर हनुमान उन्हें बताते हैं कि सेवक के प्रति प्रीति रखना राम का स्वभाव है. यहाँ हमें सेवक का अर्थ भक्त समझना चाहिए – ऐसा भक्त जिसके लिए राम ही एकमात्र शरण हैं. अभी उस दिन एक विद्वान बो...
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Tag :संपादकीय : 'रामायण संदर्शन' के
  June 27, 2017, 12:23 am
भारतीय संस्कृति भारतवर्ष में बसे हुए विभिन्न मानव समुदायों की हजारों वर्षों की उस साधना का परिणाम है जो उन्होंने जीवन को उत्कृष्ट, उदात्त और श्रेष्ठ बनाने के लिए की. मनुष्य को उसके आदिम स्तर से उठाकर दिव्यता से भर देने के लिए जुड़े जो प्रयास अलग-अलग देशकाल में संपन्न ह...
ऋषभ उवाच...
Tag :संस्कृति
  June 15, 2017, 3:52 pm
सत्तरोत्तर हिंदी कविता और समकालीन राष्ट्रीय चेतना-    ऋषभदेव शर्मा निश्चित भूभाग, जनसंख्या, सरकार और संप्रभुता राष्ट्र के मूल तत्व हैं. राजनीति-विचारकों ने इन्हीं तत्वों की व्याख्या करते हुए ऐसे निश्चित भूभाग को राष्ट्र कहा है जिसमें रहने वाली जनसंख्या एक विशि...
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Tag :आलोचना
  June 8, 2017, 4:05 pm
संकल्प, राजभाषा विशेषांक, 2016-17, अंक 18,मिश्र धातु निगम लिमिटेड रक्षा मंत्रालय, कंचनबाग, हैदाराबद - 500008पृष्ठ 25-29 ...
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Tag :ऋषभ देव शर्मा
  June 2, 2017, 3:33 pm
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