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चिकोटी

जबमेरे कने करने को कुछ खास नहीं होता, तब मैं सिर्फ 'चिंता'करता हूं। 'चिंता'मुझे 'चिंतन'करने से कहीं बेहतर लगती है! मुद्दा या मौका चाहे जो जैसा हो, मैं चिंता करने का कारण ढूंढ ही लेता हूं। ऐसा कर मुझे दिमागी सुकून मिलता है। मन ही मन महसूस होता है, मानो मैंने बहुत बड़ा तीर मार ल...
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  October 13, 2018, 12:15 pm
हालांकिऐसा कुछ है नहीं फिर भी सचेत तो रहना पड़ेगा न। जब से 'मी टू'से जुड़े किस्से कब्र से बाहर आए हैं, मेरा बीपी थोड़ा बढ़-सा गया है। बचपन से लेकर अब तक की गई अपनी 'ओछी शरारतों'पर गहन चिंतन करना शुरू कर दिया है। शायद कहीं कोई ऐसा किस्सा याद आ जाए, जहां 'मी टू'टाइप कुछ घटा हो। मगर या...
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  October 12, 2018, 2:43 pm
हालांकिअभी मैं उस भूलने-भालने वाली उम्र में नहीं मगर फिर भी भूलने लगा हूं। कभी भी कुछ भी कैसे भी भूल जाता हूं। दो-चार दफा तो अपने घर का पता ही भूल चुका हूं। वो तो भला हो पड़ोसियों का उन्होंने मुझे घर पहुंचाया। लेकिन बेमकसद किसी के घर में घुस जाना मुझ जैसे शरीफ लेखक को सुहा...
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  October 12, 2018, 12:17 pm
मनुष्यमूलतः दोगली प्रजाति प्राणी है। दोगलापन उसकी नस-नस में बसा है। सामने कुछ और पीठ पीछे कुछ। दिनभर में जब तक दो-चार बातें इधर की उधर, उधर की इधर कर नहीं लेता उसकी रोटी हजम नहीं होती। दूसरों की जलाने और सुलगाने में उसे उतना ही आनंद आता है, जितना दूधिए को दूध में पानी मिल...
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  September 29, 2018, 1:03 pm
अभीरुपए की फिसलन रुक नहीं पाई, उधर तेल की बढ़ी कीमत अलग आग लगा रही है। विरोध का फोकस कभी रुपए पर केंद्रित हो जाता है तो कभी तेल पर। सरकार परेशान है, करे तो क्या करे। दबी जुबान में उसने कह भी दिया है- कीमतों पर नियंत्रण उसके बस से बाहर है!कुछ हद तक बात सही भी है। रुपए का लुढ़कना ...
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  September 28, 2018, 4:07 pm
इधर, मुझ इंस्टाग्राम पर शायरी करने का भूत सवार हुआ है। लोग फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप पर शेर कह रहे हैं, मैंने सोचा क्यों न मैं इंस्टाग्राम पर शायरी करूं। यह थोड़ा लीक से हटकर भी रहेगा और मुझे एक नए सोशल प्लेटफार्म पर शायर होने की इज्जत भी हासिल हो जाएगी। एक पंथ, दो काज होने ...
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  September 21, 2018, 10:13 am
डॉलरने एक दफा फिर से रुपए को टंगड़ी मार गिरा दिया है। रुपया 71 के स्तर पर चारों खाने चित्त पड़ा है। बड़ी उम्मीद से वो सरकार और रिजर्व बैंक की तरफ देख रहा है; कोई तो आकर उसे उठाए। उससे सांत्वना के दो बोल बोले। उसमें फिर से उठने का जोश भरे।अफसोस, सरकार की तरफ से रुपए की गिरावट पर ...
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  September 19, 2018, 11:17 am
आईनानिहारने का मुझे शौक नहीं। मजबूरीवश निहारता हूं ताकि अपनी नाक को देख सकूं।चेहरे पर नाक मेरी मजबूरी है। आईने में अपनी साबूत नाक देखकर परेशान हो जाता हूं कि ये अभी भी जगह पर है, कटी क्यों नहीं!साबूत नाक के अपने लफड़े हैं। कटी नाक के नहीं। हालांकि सुख सबसे अधिक नाक के कट...
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  August 29, 2018, 12:09 pm
नॉर्मललोग बड़ी आसानी से मिल जाते हैं। पर्सनल लोग खोजे नहीं मिल पाते। जीवन में घटने वाली तमाम घटनाओं के साथ जितना उम्दा सामंजस्य नार्मल लोग बैठा लेते हैं, उतना पर्सनल नहीं।यों भी, पर्सनल होने के नार्मल होने से कहीं ज्यादा खतरे हैं। मगर जो इन दोनों को साध ले, वो ही सच्चा स...
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  August 28, 2018, 9:51 am
लाइफमें सबकुछ मिलना इतना सरल न होता। संघर्ष तो करना ही पड़ता है। जीने से लेकर मृत्यु तक संघर्ष ही संघर्ष है।फिर भी, कुछ संघर्ष ऐसे होते हैं जो 'लाइन मारने'पर निर्भर करते हैं। जी हां, लाइन मारना भी संघर्ष की ही निशानी है।अमूमन लोग लाइन मारने को गलत-सलत अर्थों में ले लेते ह...
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  August 27, 2018, 10:25 am
सेंसेक्सने कामयाबी का एक और नया शिखर पार कर लिया। उसे कोटि-कोटि बधाई।दिली खुशी मिलती है सेंसेक्स को चढ़ता देख। बिना शोर-शराबा या शिकवा-शिकायत किए बेहद खामोशी से वो अपना काम करता रहता है। मैंने कभी उसे खुद से अपनी सफलता का जश्न मनाते या असफलता का रोना रोते नहीं देखा। यहा...
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  August 9, 2018, 9:23 am
यद्यपिमैं जानता हूं कि 'ट्रोल करना'या 'ट्रोल होना'दोनों ही सबसे खतरनाक सोशल अवस्थाएं हैं, फिर भी, मैं 'ट्रोल'होना चाहता हूं। ट्रोल होकर उससे मिलने वाले 'यश'या 'अपयश'को भुगतना चाहता हूं। देखना चाहता हूं, कल को मेरे ट्रोल होने पर अखबारों में जो 'हेड-लाइन'बनती हैं, वो कैसी होंग...
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  August 3, 2018, 11:29 am
ख्याली पुलावपकाने में हमारा जवाब नहीं। जब दिल किया किसी न किसी मसले पर ख्याली पुलाव पकाने बैठ गए। सबसे ज्यादा ख्याली पुलाव खाली दिमागों में ही पकते हैं। कभी-कभी इतना पक जाते हैं कि जलने की बू तक आने लगती है। लेकिन पकाने वाले को जलने की बू से कोई मतलब नहीं रहता। उसे तो सि...
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  July 31, 2018, 9:43 am
किस्मतवाले होते हैं वो जिन्हें किसी का गले लगना या आंख मारना नसीब होता है। वरना इस मतलबी दुनिया में किसे फुर्सत है, किसी के गले लगने या मौका भांप आंख मारने की।उन्होंने भी तो उस रोज संसद में यही किया था, भावावेश में जाकर उनके गले ही तो लगे थे। फिर, किसी को एक आंख मार अपना रू...
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  July 24, 2018, 9:27 am
अविश्वासप्रस्ताव को गिरना ही था, गिर गया। अब तक जिद के आगे जीत सुनते आए थे, इस दफा जिद के आगे हार देख ली। हार भी कोई ऐसी-वैसी नहीं, तगड़ी वाली। लेकिन गिरने या हारने का उन्हें कोई अफसोस नहीं। वे उनके चीख-पुकार युक्त भाषण में फिलहाल अपनी जीत देखकर ही मुतमईन हैं।देश का बुद्धि...
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  July 23, 2018, 10:33 am
किसीवक़्त मुझे थूक और थूकने वालों से बहुत चिढ़ होती थी। किसी को भी थूकते देख दिमाग भन्ना जाता और दिल भीषण घृणा से भर उठता था। जी तो करता अभी उस बंदे का गिरेबान पकड़ उसके गले में जितना थूक जमा है अपनी उंगलियां डाल सब निकाल लूं। न आंगन टेढ़ा होगा। न राधा नाचेगी।मतलब हद होती है, ...
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  July 20, 2018, 11:38 am
योंतो ऊपर वाले का दिया मेरे पास सबकुछ है, बस स्मार्टफोन ही नहीं है। ऐसा नहीं है कि मैं स्मार्टफोन खरीद नहीं सकता। खरीद सकता हूं, लेकिन खरीदता इसलिए नहीं क्योंकि स्मार्टफोन मेरे लिए 'अशुभ'है!पिछले दिनों शहर के एक ऊंचे ज्योतिष ने- मेरे ग्रहों के बर्ताव को देखते हुए- मुझे ह...
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  July 17, 2018, 5:10 pm
मैंकई दिनों से इस कोशिश में लगा हूं कि अपना लक पहनकर चल सकूं। लेकिन लक है कि मेरे खांचे में ही नहीं आ पा रहा। जबकि लक की जरूरत के मुताबिक मैंने अपना आकार-प्रकार भी घटा लिया है। बात फिर भी बन नहीं पा रही।बार-बार दिल में यही ख्याल आता है कि मेरा लक दूसरों के लक से भिन्न क्यों ...
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  July 13, 2018, 2:16 pm
जीते-जीइस बात का पता लगाना बेहद मुश्किल है कि ये दुनिया, समाज और नाते-रिश्तेदार आपके बारे में क्या और कैसा सोचते हैं। ये सब जानने के लिए आपको मरना पड़ेगा। क्योंकि इंसान की सामाजिक औकात का पता उसके मरने के बाद ही लगता है।तो, एक दिन मैंने भी यही सोचा क्यों न मर ही लिया जाए। य...
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  July 9, 2018, 2:41 pm
गिरना एक स्वभाविक प्रक्रिया है। कुछ मैदान-ए-जंग में गिरते हैं तो कुछ मैदान-ए-बाजार में। गिरकर जो उठ या संभल नहीं पाते, दुनिया उन्हें बहुत जल्द भूला देती है। जैसे- शेयर बाजार के जाने कितने ही शेयर। आज उन शेयरों का अता-पता तक नहीं। एक बार गिरे तो कभी उठ ही न सके।यह भी उतना ही...
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  July 4, 2018, 9:54 am
ऐसेलोग मुझे बेहद पसंद हैं, जो बुरा मानते हैं। या कहूं, धरती पर जन्म ही उन्होंने बुरा मानने के लिए लिया होता है। वे इसी खुशफहमी में डूबे रहते हैं कि यह दुनिया टिकी ही उनकी बुरा मानने की आदत पर है। वे अगर बुरा नहीं मानेंगे तो विश्वभर की तमाम बुरी आत्माओं का भविष्य खतरे में ...
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  July 3, 2018, 9:45 am
इनदिनों मेरे साथ कुछ भी ठीक नहीं हो रहा। कभी बनता काम बिगड़ जाता है, तो कभी सड़क चलते कोई भी लड़ लेता है। चार रोज हुए, उल्टे पैर की कन्नी उंगली में ऐसी चोट लगी कि दिन में चांद-सितारे नजर आने लगे। जैसे-तैसे उससे करार पाया तो अभी कोई मेरी फुटबॉल चुरा ले भागा। कल जेब से पांचों का न...
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  June 29, 2018, 1:06 pm
मुझेसपने नहीं आ रहे। सपनों के न आने से मैं खासा परेशान हूं। पूरा दिन इसी सोच-विचार में निकल जाता है कि आखिर क्या कारण है, जो सपनों ने मुझसे किनारा कर लिया है।सपने न आने की समस्या जब भी पत्नी या यार-दोस्तों के समक्ष रखता हूं तो यह कहकर मुझे टाल देते हैं कि 'अच्छा है जो तुम्ह...
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  June 28, 2018, 1:05 pm
जिसका'डर'कम 'यकीन'ज्यादा था, वही हुआ। एक और 'राजनीतिक गठबंधन' (बीजेपी-पीडीपी) 'ब्रेकअप'की भेंट चढ़ गया। देश का बच्चा-बच्चा जानता था कि 'गठबंधन'की बुनियाद खोखली है मगर फिर भी दोनों ने निभाने की जिद पकड़ रखी थी। गठबंधन में ऐसी 'जिदें'भला कहां कामयाब हुई हैं! इतिहास उठाकर देख लीजि...
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  June 26, 2018, 9:39 am
कई दिनोंसे मैं समाज को सुधारने की सोच रहा हूं! न न आप गलत समझ रहे हैं। मैं समाज को समाज के बीच जाकर नहीं, अपने लेखन के दम पर सुधराना चाहता हूं। समाज के लिए कुछ सुधार-पूर्ण लिखना चाहता हूं। समाज को बताना चाहता हूं कि वो ये-ये उपाय कर खुद को कैसे और किस हद तक सुधार सकता है।हाला...
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  June 22, 2018, 11:21 am
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