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चिकोटी

जबभी फुर्सत पाती है, मंटो की 'आत्मा'मेरे पास चली आती है। हालांकि मंटो को गुजरे पचास साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है मगर उसकी आत्मा में खास बदलाव नहीं आया है। वो दुनिया-समाज से तब भी नाराज थी, आज भी उतनी ही नाराज है। नाराज हो भी क्यों न! जिस समाज ने हमेशा उसे 'पागल'और उसके लि...
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  May 16, 2018, 9:44 am
मनुष्यबड़ा ही डरपोक किस्म का प्राणी है। किसी न किसी बात पर हर वक्त डरा-सहमा सा रहता है। लेकिन 'डर के आगे जीत'होने का दावा भी करता है। हालांकि इस तरह के दावे विज्ञापनों में ही किए जाते, वास्तव में जब डर सामने होता है, तब सारी जीत दस्त बनकर निकल जाती है।फिलहाल, इन दिनों मनुष्य...
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  May 10, 2018, 10:05 am
बातबहुत बड़ी नहीं, बस इतनी-सी है। कि, सरकार लाल किले की देख-भाल का जिम्मा एक निजी ग्रुप को सौंप रही है। तो क्या...! सौंपने दीजिए न। जब खुद से नहीं संभल-संवर पा रहा तो निजी ग्रुप ही देखे। इस बहाने लाल किला लाल किला तो नजर आएगा। निजी ग्रुप उसकी साफ-सफाई तो करता रहेगा। रंगाई-पुता...
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  May 2, 2018, 9:49 am
उनकेउपवास को उपहास का केंद्र खामखां बनाया गया। जबकि ऐसा किसी इतिहास या कानून की किताब में नहीं लिखा है कि उपवास मतलब नितांत 'भूखा'रहना। पहले या बीच-बीच में थोड़ी-बहुत टूंगा-टांगी चलती है। बंदा उपवास कर रहा है, कोई अपनी जान देने थोड़े न बैठा है। जीवन अनमोल है।सोशल मीडिया त...
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  April 26, 2018, 9:31 am
जब'पैसा हाथ का मैल है'तो 'एटीएम में कैश नहीं है'को लेकर इतना फिक्रमंद क्यों होना महाराज? नहीं है तो नहीं है। समझदारी तो इसमें है कि जो चीज नहीं है, काम उसके वगैर चलाया जाए। लेकिन नहीं...।लगा पड़ा है हर कोई सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक कभी सरकार तो कभी बैंक को गरियाने में। गरियात...
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  April 25, 2018, 9:23 am
आजकलमुझे मच्छरों से पीड़ित लोग बहुत मिल रहे हैं। हर किसी की जुबान पर बस यही शिकायत है- 'मच्छरों ने आतंक मचा रखा है।'तो क्या मच्छर आतंकवादी हो गए हैं? नहीं। मैं मच्छरों की तुलना आतंक या आतंकवादी से करने के सख्त खिलाफ हूं। यह एक निरही जीव को बदनाम करने की कुत्सित साजिश है।मै...
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  April 14, 2018, 11:20 am
तयकिया है कि मैं अपना नाम बदलूंगा! यह नाम अब मुझे जमता नहीं। न तो मेरे नाम में फिल्मी फील है न साहित्यिक प्रभाव। जब भी कोई मेरा नाम पुकारता है, लगता है, शुष्क नदी में पत्थर फेंक रहा हो! पता नहीं, क्या और क्यों सोचकर मेरे घर वालों ने मेरा यह नाम रख दिया।बहुत अच्छे से याद है, ज...
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  April 13, 2018, 10:24 am
सिवाय'लोटावाद'को छोड़कर दुनिया के किसी भी वाद में मेरा रत्तीभर विश्वास नहीं। बाकी वादों के साथ अपनी-अपनी वैचारिक प्रतिबद्धताएं हैं लेकिन लोटावाद के साथ ऐसा कुछ भी नहीं। यह वाद एकदम स्वतंत्र है।हालांकि लोग ऐसा मानेंगे नहीं लेकिन अपनी-अपनी लाइफ में थोड़े-बहुत लोटे तो हम...
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  April 12, 2018, 11:51 am
हमारेसमय की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि हम खुद पर हंसने से कतराते हैं। हां, दूसरों पर हंसने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते। दूसरों पर हंसना हमें अपनी 'उपलब्धि'नजर आता है। कुछ चेहरे ऐसे भी होते हैं जिन्हें देखकर यह सोचना पड़ता है कि आखिर बार वे कब और कितना हंसे होंगे? एक अजी...
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  April 11, 2018, 1:03 pm
'जियो और जीने दो'में मेरा विश्वास बचपन से है। अपनी तरफ से मेरी पूरी कोशिश रहती है- मैं न किसी को सताऊं, न मारूं, न दबाऊं। खुद भी सुकून की जिंदगी काटूं, दूसरे को भी काटने दूं। क्योंकि जीवन अनमोल है।इसीलिए मैंने मच्छरों को मारना, उड़ाना, भागना कतई बंद कर दिया है। कमरे में विकट ...
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  April 10, 2018, 9:37 am
मनुष्यएक सामाजिक प्राणी कभी था। अब सोशल मीडिया का प्राणी है। जागने से लेकर सोने तक के सारे काम अब वो सोशल मीडिया पर 'ही'करता है। उसकी उंगलियों को तब तक चैन नहीं पड़ता जब तक वो उससे छोटी से छोटी बात का स्टेटस उसके फेसबुक पर डलवा नहीं लेतीं।सोशल मीडिया पर किसी का किसी से कुछ...
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  April 3, 2018, 10:08 am
जिनतमाम बातों की फिक्र मैं नहीं करता उनमें से एक 31 मार्च भी है। 31 मार्च को भी मैं वैसे ही बरतता हूं जैसे अन्य तारीखों को। मार्च एंड है तो क्या! कोई हव्वा थोड़े है। मैं तो बस इतना जनता हूं कि मार्च एंड में मुझे अपना कुछ भी क्लोज नहीं करना है। जो जैसा चल रहा है, चलते रहने देना ह...
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  March 31, 2018, 11:55 am
एकजमाने में उनके 'आंदोलन'खूब चर्चा में रहते थे, आजकल 'माफीनामे'चर्चा में हैं। शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो जिस दिन वो विरोधी दल के नेता से माफी न मांग रहे हों। कोई दब-छिपकर नहीं, खुलकर माफी मांग रहे हैं। हालांकि उनको इस तरह माफी मांगते देखना अच्छा तो नहीं लग रहा लेकिन सुब...
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  March 29, 2018, 1:41 pm
पहलेमैं मूर्तियों के खिलाफ था। जबकि मुझे नहीं होना चाहिए था। मूर्तियां रहती हैं तो राजनीतिक व सामाजिक दलों को गाहे-बगाहे 'फेम'दिलवाती रहती हैं। पक्षियों के रहने-बैठने का ठिकाना होती हैं। मूर्तियों के नीचे खड़े होकर नारे लगाने और क्रांति करने का हौसला पैदा होता है। मू...
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  March 28, 2018, 9:49 am
इससेकहीं अच्छा तो पहले का जमाना था, जब सोशल मीडिया हमारे जीवन में दूर-दूर तलक नहीं था। चैन से खाते थे। सुकून से पीते थे। आराम से सोते थे। जी भरकर एक-दूसरे से घंटों बातें किया करते थे। जीवन में रंग, उमंग, तरंग सबकुछ था। संवेदनशील तब भी थे पर इतने भी नहीं कि भूत का नाम सुनते ह...
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  March 27, 2018, 10:01 am
फिलहाल, मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि बैंक से कर्ज (लोन) लेने में कोई बुराई नहीं। बल्कि फायदा ही फायदा है। माशाअल्लाह आप अगर अमीर बंदे है तो दसों उंगलियां घी में। लोन लेके चुकाओ न चुकाओ, कोई न टोकने वाला। लोन लेके विदेश भाग जाओ तो नहले पे दहला। फिर तो मुल्क की पुलिस, सीब...
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  March 20, 2018, 9:49 am
रिस्कलेने का अपना मजा है। दाल में नमक का स्वाद और दूध में पानी की मात्रा रिस्क लेकर ही समझ आती है। रिस्क लेकर ही पता चलता है कि आपका दिल वाकई मजबूत है या मजबूत करने की गोलियां ले रहे हैं। बिना रिस्क लिए तो आप पत्नी के बनाए खाने की 'बुराई-भलाई'भी नहीं कर सकते। मैं तो यहां तक ...
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  March 16, 2018, 10:28 am
जीवनमिथ्या है। इच्छा भ्रम है। मृत्यु ही अंतिम सत्य है। फिर इच्छा-मृत्यु से क्या घबराना!यों भी, मृत्यु को समझने का कोई फायदा नहीं। मृत्यु तो एक न एक दिन आनी ही है। वो गाना है न 'जिंदगी तो बेवफा है एक दिन ठुकरएगी...।'तो जो ठुकरा दे उससे मोह पालना बेकार है।सच बताऊं, मुझे तो बड़ी ...
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  March 14, 2018, 10:33 am
शोकसभाएं मुझे बचपन से आकर्षित करती रही हैं। एक बार को किसी के सुख में शरीक न होऊं लेकिन शोक सभा में जरूर जाता हूं। शोक और दुख दोनों एकसाथ प्रकट हो जाते हैं। वरना, अलग से दुख प्रकट करना मुझे बड़ा अटपटा-सा लगता है। अक्सर भूल जाता हूं कि किस स्थिति में किस प्रकार का दुख प्रकट ...
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  March 9, 2018, 9:39 am
ताजाखबर तो यही है कि वे अब वामपंथी नहीं रहे। उन्होंने अपने वामपंथ का त्याग कर दिया। अपनी जिंदगी में वामपंथ से जुड़े प्रत्येक प्रतीक को बक्से में बंदकर गंगा में बहा दिया। अपने वामपंथी दोस्तों से किनारा कर लिया। घर के दरवाजे पर लगी 'कॉमरेड'नाम की नेमप्लेट से कॉमरेड हटाकर...
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  March 7, 2018, 10:07 am
इस दफा'व्हाट्सएप्प पर होली'खेलना तय हुआ है। जब पूरा देश ही व्हाट्सएप्प पर व्यस्त रहने लगा है तो होली को ही क्यों छोड़ा जाए। यह सही है कि व्हाट्सएप्प होली में पारंपरिक होली जैसी बात नहीं आ सकती हां दिल तो बहलाया ही जा सकता है न। आज के जमाने में दिल का बहलना बहुत जरूरी है। ल...
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  March 1, 2018, 9:51 am
दुनियामें ऐसा कोई है जो भाग न रहा हो? कोई वजह तो कोई बे-वजह भाग रहा है। बिन भागे कुछ भी मिलना संभव नहीं। आराम से बैठकर खाने-कमाने के दिन अब हवा हुए।डॉक्टर्स भी यही कहते हैं, जितना हम भागेंगे उतना ही स्वस्थ रहेंगे।कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो या तो चोरी करके भागते हैं या घोटाल...
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  February 24, 2018, 1:29 pm
घोटालाअपने नेचर में 'प्रेम'की तरह होता है। किया नहीं जाता, हो जाता है। जिनमें माआदा होता है वे अपने प्रेम को खींचकर शादी तक ले जाते हैं। जिनमें रिस्क लेने की हिम्मत नहीं होती वे बेगानी शादी में 'अब्दुल्ला'बनकर रह जाते हैं।ठीक ऐसी ही प्रवृत्ति घोटालेबाज में पाई जाती है। ...
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  February 23, 2018, 10:03 am
'इमरान (भाई) खान को तीसरी शादी मुबारक।'इतना स्टेटस लिख मैंने अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया ही था कि मुझे तरह-तरह के ताने दिए जाने लगे। पहली आपत्ति तो लोगों को यही थी कि मैंने पड़ोसी (दुश्मन) मुल्क के किसी बंदे को मुबारक दी ही क्यों? इस खबर को इग्नोर क्यों नहीं किया? एक सज्जन ने...
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  February 22, 2018, 9:24 am
पिछलेदिनों सोशल मीडिया पर जितनी शिद्दत के साथ सोनम गुप्ता को बेवफा माना गया, मुझे बहुत खराब लगा। बिना जाने, न पहचाने, न देखे किसी को बेवफा होने का तमगा दे देना ठीक नहीं। हां, यह सही है कि इश्क का इतिहास तमाम तरह की बेवाफाईयों से भरा पड़ा है। पर उनकी की भी कोई न कोई मजबूरियां...
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  February 21, 2018, 9:45 am
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