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Blog: अपनी बात

Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
रिमझिम बारिश औरउसकी बूंदों का संगीत,कभी सूना है तुमने,ध्‍यान से,आज मैं कह रहा हूं,कभी सुनना,तुम खो जाओगे,उसकी धुन में,जितना डूबोगे,इस धुन में,उतना मुझे पाओगे,बस यही फर्क है,मुझमें और तुममें,मैं तुम्‍हारे सामने हूं,बाहें फैलाकर खड़ा हूं,और तुम हो कि नहीं चाहते,मुझे पाना, ... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   11:31am 16 Jun 2013 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
रात भी क्‍या खूब है,आती है सुलाने के लिए,पर कभी-कभी भूल जाती,कि उसका धर्म क्‍या है,शायद बचपना,हां शायद बचपना सवार हो जाता होगा उस पर,अक्‍सर रात खेलती है मेरे साथ,खुद तो सोती नहीं,और न ही मुझे देती है सोने,बीती रात भी बार-बार,मुझे जगाया रात ने,कई बार चला ये जगने-जगाने का खेल,न... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   3:37am 4 May 2013 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
क्यों रे अमलतास,निकल गई न,तेरी सारी हेकड़ी,कुछ रोज पहले तक,बहुत गुमान था,तुझे अपने वासंती यौवन पर, तुझ पर ही तो छाया था,अद्भुत वासंती रंग,लोग तेरी सुंदरता देखकर,अघाते नहीं थे,काश! बरकरार रहती,तेरी सुंदरता,अब झड़ चुके हैं,तेरे फूल और पत्ते,तू तो ऐसा लग रहा है,मानों हो शिकार,... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   6:53am 8 Apr 2013 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
मैं ‘गांव’ हूं,पर वक्‍त की मार से,बदल रहा हूं हर पल,पल-पल खो रहा हूं,अपना अस्तित्‍व,मेरी तालाबों पर,बन गए हैं महल,खेतों की हरियाली,बन गई है कंकरीट,अब कोई भी,गर्मी की शांति को,नहीं रोपता है,बरगद, पाकड़ और पीपल,शायद इसीलिए,राहगीर इस और नहीं आते,और न ही लगता है,कोई प्‍याऊ,प्‍या... Read more
clicks 373 View   Vote 0 Like   10:49am 4 Apr 2013 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
याद आ रहा वो दौर,जब हम छोटे हुआ करते थे,कई दिनों पहलेचालू हो जाता था गीतों की तैयारी,चमचमाती ड्रेस में,दौड़ जाते थे अपने स्‍कूल की ओर,हाथ में खुद से बनाया हुआ,तिरंगा लिए,मिठाई के चक्‍कर में न जाने,कहां कहां के चक्‍कर कटाते थे,पर दिल में जज्‍बा हुआ करता था,कुछ कर गुजरने का,द... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   8:01am 26 Jan 2013 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
ये जुगनू सी तेरी आंखें,तेरा चेहरा है किताबी सा,ये सोणी सी हंसी तेरी,वो बेंदा लाज़बाबी सा,तेरे माथे पे चमके है,पिया का रंग लाली सा,वो होठों पर खिली लाली,लगे जैसे शबाबी सा।यूं न देखो मुझे ऐसे,कहीं न होश खो बैठूं,कि तुझसे बात करना भी,लगे है अफताबी सा।लिखूं में प्रेम की कविता,... Read more
clicks 405 View   Vote 0 Like   2:49pm 17 Jan 2013 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
मुझे हर वक्‍त रह रहकर वो बचपन याद आता है,मैं खो जाता हूं यादों में वो डरना याद आता है,वो बाबा की कहानी में कहीं जो भूत आ जाये,वो दादी की गोद में छुपकर के सुनना याद आता है।यूं ही कट जाती थीं रातेंनहीं लगती थी ठंडी तब,वो खेलों में मेरे दिन का गुजरना याद आता है,वो मस्‍ती पाठशाल... Read more
clicks 280 View   Vote 0 Like   5:18am 7 Jan 2013 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
The WordPress.com stats helper monkeys prepared a 2012 annual report for this blog.Here’s an excerpt:600 people reached the top of Mt. Everest in 2012. This blog got about 5,500 views in 2012. If every person who reached the top of Mt. Everest viewed this blog, it would have taken 9 years to get that many views.Click here to see the complete report.... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   4:57am 2 Jan 2013 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
अब आप मांगा सकते हैं अपनी बात ‘काव्य संग्रह’ घर बैठे Genre: Poetry Language: Hindi Format: Paper Back Publisher: Uttakarsh Prakashan (2012) MRP: 100 Offer Price: 80* Shipping Details: Free (*anywhere in India) Pages: 96 ORDER NOW Payment Options: 1. NET BANKING: Transfer SUM of Rs 80/- from your Net Banking Account to: Account Name: Aditya Kumar Shukla Account Number: 4694001500002443 (Savings Account) IFSC Code: PUNB0469400 Bank: Punjab National Bank Branch: Dev Sanskriti Vishwavidhayalaya, Shantikunj. E-Mail TRANSACTION DETAILS along with your NAME & ADDRESS and Recipient NAME & ADDRESS to aditya.ds... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   6:03am 16 Dec 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
मुझसे मुझको यूं ही जुदा न करो,मैं मर जाऊंगा मुझे अलविदा न करो,बहुत दुआ की है तुम्‍हें पाने के लिए,मोहब्‍बत मेरी है इसे विदा न करो।बहुत मुश्किल से मिलती है मुहब्‍बत यारों,इसे आहिस्‍ते से संभालो अरे खुशी के लिए।। तू मिले न मिले मुझसे ये मर्जी तेरी,मुझसे दूर जाकर ये फासला ... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   5:10am 1 Dec 2012 #गज़ल
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
मुक्‍त आकाश,मेरी कल्‍पनाओं का,उसमें विचरण करता,मन मेरा,बेरोक-टोक,बहता हवाओं के साथ,तुमने देख होगा,लड़ाकू विमानों को,करतब करते हुए,ठीक वैसे ही,मेरा मन,करतब कर रहा है,मैं जी रहा हूं,एक स्‍वप्‍न,एक ऐसा स्‍वप्‍न,जो मानवीय जीवन में,पूर्ण होना,लगता है असंभव सा,हां पर एक बात है,... Read more
clicks 250 View   Vote 0 Like   4:57am 27 Nov 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
तुम्‍हें याद है न,वो पहर,जब हम मिले थे,उन अनजान गलियों में,जहां शुरू हुआ था,जीवन का एक नया अध्‍याय,मिलन के पलों का गवाह बना था,वो छोटा सा गांव,जो बसा है उन पहाड़ों के बीच,जिनकी हरियाली से परिपूर्ण चोटियां,जीने का मर्म समझाती है,पथरीले रास्‍तों पर भी,अडिग होकर बढ़ना सिखाती... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   12:23pm 3 Oct 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
आ जाओ तुम,अब नहीं जिया जाता,तुम्‍हारे बिन,कितने दिन गुजरे,तुम्‍हारा अलिंगन किए हुए,वो चैन की सांस,जो ली थी तुम्‍हारे साथ,आ जाओ तुम,वो कोमल पलकों से,मेरे घावों को हल्‍के से,सहलना,बहुत याद आ रहा है,तेरा आंखों में मुस्‍करना,आ जाओ तुम,तुम्‍हारे नाजुक हाथों का स्‍पर्श,याद आ र... Read more
clicks 273 View   Vote 0 Like   12:43pm 2 Oct 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
एक एहसास,अनकहा सा,अनसुना सा,अनछुआ सा,जैसे मन मेंउठ रही होजल तंरग,नदी के शांत जल में,जैसे फेंका गया हो पत्‍थर,मेरा काव्‍य,मार रहा हो हिलोंरे,चांद को देखकर,समद में उठने वालेज्‍वार-भाटे की तरह,शब्‍दों से परे,निगुर्ण, नि:शब्‍द सा,एक एहसासबालों में रेंगतीउंगलियों सा,चुबंन स... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   4:30am 25 Aug 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
मेरे जे़हन में उभरती हैएक अनजानी सी तस्‍वीर,न जाने कौन है वो,मेरे मन में उभरते हैं,अनेक प्रश्‍न,तुम कौन हो,क्यों आई हो,इस तरह,मेरे जीवन में,तुम्हें क्यों पाया मैने,शायद रहा होगा,कोई रिश्तों हमारा तुम्हारा,बीते हुए जनम् में,क्या तुम मेरी थी,किसी काल के अंतराल में,लेकिन न... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   5:06am 24 Aug 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
मुझे बिकना है,कोई खरीदेगा मुझे,इस बाजार में,जहां भावनाओं का मोल नहीं,जहां प्‍यार की अहमियत न के बराबर,जहां इंसानियत तो है ही नहीं,अब तो बस मेरा शरीर ही है,खरीद लो इसे,मिल जाएंगे इसके मांस से कुछ पैसे,जिससे भला हो जाएगा,कुछ राष्‍ट्रवादियों का,इसकी हड्डियों के चूरमे से मि... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   7:25am 23 Aug 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
हर बीज को,जरूरत होती है,खुद को गलाने की,पूर्ण अस्तित्‍व पाने की,अगर उसे उगाना है,तो गलना पड़ेगा,तभी तो बो बन पाएगा,एक विशाल,बोधि वृक्ष।जीवन भीएक बीज ही तो,भौतिकता के आवरण,में ठका बीज,इसे जरूरत है उर्वरभूमि की,जिसमें ये गला सकेअपना अस्तित्‍व,तभी तोजाना जा सकेगा,जीवन काअस... Read more
clicks 246 View   Vote 0 Like   7:01pm 20 Aug 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
कुछ दिनों सेथकान सी है,पर नहीं हैमेरे पास कोई गोद,जिसमें सो सकूं मैं,चैन की नींद,थक गया हूं,इतना की अब,चला नहीं जाता,ठहरी है जिंदगी,अपने ही चौराहे पर,किस रास्‍ते जाना है,पता ही नहीं,तलाश है मुझे उसकी,जो पहुंचा दे,मंजिल तक,पर मैने सुना है,कोई किसी का,साथ नहीं देता,क्‍योंकि व... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   7:10am 19 Aug 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
लाल किले की चोटी पर हर बार तिरंगा फहराता है,वीरों की गाथाओं का फिर गान सुनाया जाता है।उपलब्धि बहुत कर ली हमने, ये यशोगान बन जाता है,गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक को, याद किया जाता है।।पर भूल गए हैं वो मकसद, जिस हित पाई थी आजादी,कितनी माओं ने देखी थी, अपने आंगन की बर्बादी।।।ऐसी आ... Read more
clicks 254 View   Vote 0 Like   4:34am 17 Aug 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
झूठे ख्‍वाव सी आजादी का वास्‍ता मत दे,या खुदा मुझको ये सहारा मत दे,टूट जाएंगी सब जंजीरें जुल्‍मों सितम की,मुझको है तजुर्बा मुझे दगा मत दे।अब भी भूखे हैं बच्‍चे उनके, जिनने पाला,उनको उनके किए की सजा मत दे,मेरे देश का हश्र क्‍या हो गया ऊपर वाले,मौत दे दे मगर ऐसी बद्दुआ मत दे... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   4:29am 14 Aug 2012 #गज़ल
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
किसी के उदास ख्वाव की तरह,है आज की शाम,शायद कोई अपना,रूठ कर बैठ गया हो जैसे,जैसे गंगा तट पर,निहार रहा हो,लहरों को,उसकी आंखों में सवाल हैं,सवाल दोस्ती  के,सवाल मोहब्बत के,वो नहीं जानता,इसे क्या् नाम दे,पर बन गया है,एक अजीब रिश्ताह,इन लहरों का,उस अजनबी से,जो रोज मिलने आता,चुपक... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   1:52pm 13 Aug 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
काश! में पंछी होता,उड़ता नीले अंबर केइस छोर से उस छोर तकनापने अंनत आकाश को,काले घने बादलों के,अंधकार के बीच,गुमा देता खुद को,बारिश आने से पहले ही,बादलों से लिपटकर,भिगा लेता खुद को,दिन की धूप मेंसूरज के साथ चलता,उससे दोस्‍ती करता,उसकी तपन में,न्‍यौछावर कर देता,अपना गीलापन,... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   8:02am 9 Aug 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
मेरे पास सब कुछ है,बस तुम्‍हारे सिवा,तुम्‍हें पाने की कोशिशें,करता हूं दिन-रात,सुबह और शाम,दु:ख में सुख में,अनमने से मन में,धूप का तीखापन भी,नहीं रोक पाता,तुम्‍हारी खोज को,जो निरंतर जारी है,कई जन्‍मों से अब तक,हे कलयुग के कृष्‍ण,तुम कहां हो,जरूरत है,इस जहां को तुम्‍हारी,रा... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   12:36pm 7 Aug 2012 #कविता
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
दर्द को दर्द की आंखों से जब देखा जाएगा,दर्द के पार भी एक दर्द नज़र आएगा,झुक जाएगा शर्म से सर अपना भी,कोई गरीब जब भूख से मर जाएगा।दौलतों के लगते रहेंगें अम्‍बार यूं ही,कोई हिस्‍सा किसी के काम नहीं आएगा,बिखर जायेंगे कई घर बनने से पहले,जब जनाज़ा बड़े बाप का उठा जाएगा।उन्‍हे... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   7:08am 6 Aug 2012 #गज़ल
Blogger: आदित्‍य शुक्‍ला
बिखरे शब्‍द,कविता कैसे लिखें,कुछ तो लिखूंगा,जोडूंगा शब्‍दों को,प्रेम के धागे से,लिखूंगा,दिल का दर्द,भूख की आग,गरीबी का दंश,मौत की खेती,फूलों का श्रृंगार,भावानाओं का व्‍यापार,प्रकृति की मादकता,प्रेम का पार भी कुछ लिखूंगा,पर कैसे,उससे पहले,कोई रोक ले,मेरे शब्‍दों को,बिख... Read more
clicks 268 View   Vote 0 Like   12:37pm 3 Aug 2012 #कविता
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