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रूप-अरूप

अहा....फि‍र करवट लि‍या मौसम ने....सुन रही हूं सर्द हवाओं की दस्‍तक ...शाम गुलाबी है, सि‍हरन जगाती। अब पगडंडि‍यों पर वो दौड़ती नजर आएगी...हथेलि‍यों में पारि‍जात के फूल भरे....उधर मंदि‍र के आंगन में गले में ऊनी मफलर डाले बेसब्री से कर रहा होगा वो उसका इंतजार....सर्दियां रूमा...
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  October 25, 2018, 1:09 pm
शरद पूर्णिमा की रात है। धवल..उज्जवल चाँद खिला है आकाश में । लड़की एकटक देखे जा रही चाँद की तरफ़....ख़ुश है। उसका चेहरा भी चमक रहा चाँद की तरह...लड़का पास आता है।दोनों हाथ थामे चाँद देखते है...लगातार..।”हमारा जीवन ऐसा ही हो. ये कामना है। सब कुछ उजला...कोई दाग़ न कहीं....।” लड़की स्व...
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  October 24, 2018, 2:08 pm
आने के लिए नहीं जाता कोईशाम ढलती हैरात चुपचाप चली जाती हैसुबह नहीं लौटता वो हीजो गुज़र चुका होता हैआज कली, कल फूल हैफूल कल फिर नहीं खिलताजो चला जाता है कहकरकि लौट आऊँगावह पहले सा कभी नहीं मिलताजो इंतज़ार में टकटकी लगाएबैठा रहता है बरसोंवो अपनी हँसी हँसताऔर अपने दुःख स...
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  October 22, 2018, 11:06 am
कितनी यादें लेकर आते हो साथ...मन तोला-माशा होता है। वो बिस्तर पर चाँदनी का सोना...हरसिंगार का ...खिलना-महकना-गिरनासमेटना हथेलियों में तुम्हारी याद की तरह हरसिंगार और ....पांच सुरों का राग कोई गाता है दूर..मालकौंसमन को अतीत में खींच ले ही जाता है, कितना भी रोके कोई..ओह अक्तूबर ......
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  October 16, 2018, 2:09 pm
तुम्हें रहना है तो रहो अपने दिल से पूछ लो मेरी ज़िद से रुके तो क्या रुके ?...
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  October 6, 2018, 4:57 pm
तुम सा कोई नहीं होगा भी तो, किसी की तलाश क्यूँ हो जी लिया जितना एक जीवन के लिए ज़रूरी होता है महसूस कियाप्यार, शिद्दत और बेहिसाब दर्द भीअब कुछ बचा नहींजिसे सोचने, परखने या फिर जी लेने कीइच्छा बाक़ी रहेअनुभवों से समृद्ध है जीवनबैठ जाऊँ यदि कभी जीवन मेंथक कर कहींय...
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  September 28, 2018, 12:05 pm
                   ज़रूरत होती हैहथेलियों को भीएक ऐसी गरम हथेली कीजो टूटन के पलों मेंआकर कस ले और अहसास दिला देकि कोई हैजिसे हम अपनेसारे दुःख सौंप सकते हैं।...
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  September 3, 2018, 10:17 pm
डरती हूँतुमसे नहींन उस प्यार से, जोफूलों की तरह बरसा रहे तुमऔर मैं भीग रही सुबह की ओस में गुलाब की तरहडरती हूँइस साथ सेदिन-रात की बात सेजो हो नहीं पाई उस मुलाक़ात सेकि आदतें जीने नहीं देती पहले की तरहडरती हूँअंतहीन इंतज़ार के ख़्याल सेकि एक दिन कहकर भीजो नहीं आओगेमैं...
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  August 31, 2018, 1:28 pm
भोर की तलछट में झाँका एक चेहरा।बहुत दिनों बाद शगुन की भीड़ में शामिल हुआ। नज़रें मिलीं, टिकीं फिर मुड़ गयी भीड़ की ओर।ढोलक की थाप गूँजती रही। बुलाहट हुई ...जाओ कर लो चुमावन...पीछे से आवाज़ लगाई ..लो, ये लेकर जाओ। पॉकेट की तरफ़ हाथ बढ़ा....क्यों जी...आपसे क्यूँ.....नहीं देखा मुड़क...
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  August 28, 2018, 2:42 pm
ये तुम्हारे चले जाने के बाद की बात हैलोग लेते हैं जैसेबारिश का मौसम बीतने के बादबरसात का जायज़ालगाते हैं हिसाब कि किस जिले में पड़ा है सुखाड़कहाँ उतरा है नादियों का पानी खेत मेंकहाँ कैसी है दरकारजोड़-तोड़ कर करते हैं सरकार सेमुआवज़े की माँगऐसे ही तुम्हारे जाने के ब...
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  July 27, 2018, 10:07 pm
तुम रोज़ की तरह इंतज़ार करते मिलतेतो लगतादिल के किसी खाने में अब तकप्यार ज़िंदा है, गहरी साँस लेता हुआकिसी करिश्मे की उम्मीद में ठहरा हुआपर तुम जा चुके थे,जैसे ठीक नौ बजे किसी स्कूल कागेट बंद हो जाता हैकिसी दफ़्तर के बायोमेट्रिक सिस्टम मेंलेट आना दर्ज हो जाता हैउसी ...
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  July 23, 2018, 5:28 pm
नहीं, बिल्कुल नहीं भीगी थी बारिश की फुहारों में मगर पसलियों में अकड़न है ऐंठ रही पिंडलियांताप बढ़ता ही जाता हैफूलदान में सजे रजनीगंधा सेकोई ख़ुशबू नहीं आतीबेस्वाद है सबबड़बड़ाहट तेज़ हुई जा रहीहाँ, नहीं जी सकती तुम्हारे बिनाभूलना असम्भव हैपास आओ, रख दो माथे ...
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  July 17, 2018, 2:31 pm
दुःख उलीचती रही प्रतिदिनअँजुरी भर-भर सागर उफनता रहा दुःख बढ़ता गया संबंधटूटने और जुड़ने के बीचउभरती, सिहरती पीड़ासघन होती गईदर्द हैं, अपेक्षाएँ हैंफिरनिपट सूनी ज़िंदगीगरम दिन मेंछांव तलाशती सीकि कोई हवा साआता-जाता रहाआया समझदुःख सागर हैनिस्पृह होना ज़रूर...
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  July 14, 2018, 9:16 pm
“ मेरी मुट्ठियों में बंद हैएक मीठी छुवनजिस दिन खुलेंगी हथेलियाँमैं अकेली हो जाऊँगीजीवन भर के लिए...”...
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  July 10, 2018, 11:11 am
झकझोरा तुमने लौटी हूँ मानो नींद के गाँव से खिंचता सन्नाटा जैसे बस टूटना ही चाहता हो अब दर्द सहलाता है आवाज़ की दुनियाँ मेंरंगों की सतरंगी चमक बरक़रार है।...
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  July 7, 2018, 3:29 pm
रात की छाती परनहीं है चाँदकाली घटाएँ घिर-घिरखोल रही स्मृति के पिंजरेमेघ देख हृदय का माटी फिर दूब सा हरा हुआहै बारिश की झड़ीपत्तों-पत्तों में छुपा संदेशमेघों से पर्वतों के लिपटने काआया दिनहाँ है ये आषाढ़ का दिन...
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  July 6, 2018, 4:02 pm
चीख़ रही तन्हाइयाँपिछली कई रातों से मत जाओ, रुको भी देखो एक बार कितनी अकेली पड़ गई तुम और मैं..जलते-बुझते जुगनू देखललिमा भी देखती हूँ रोज़कुछ बातें सुनकरअनसुना करना आ गया मुझे भी।...
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  July 5, 2018, 1:26 pm
पेड़ अपने बदन से गिरा देता है एक-एक कर सारी पत्तियाँफिर खड़ा रहता है निस्संगसब छोड़ देने का अपना सुख हैजैसेइंसान छोड़ता जाता हैपुराने रिश्ते-नातेतोड़ कर निकल आता हैउन तन्तुओं कोजिनके उगने, फलने, फूलनेतकजीवन के कई-कई वर्ष ख़र्चकिए थेपर आना पड़ता है बाहरकई बार ठू...
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  July 3, 2018, 3:40 pm
बेटियों ने बेटियों को बचाना चाहाअपने जैसी मासूमों कोबताना चाहा, कि समझोतुम कोई सामान नहींकि तस्करी की जाए तुम्हारीऔर एक दिनलुट-पिट कर, आबरू औरबरसों की कमाई गवाँख़ाली हाथ लौट आओउसी गाँव मेंजहाँ कोई भैया, दादा या दीदीफिर फुसलाकर बेच देपाँच बोरी अनाज की क़ीमत मेंएक जीव...
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  July 2, 2018, 10:44 am
आओ नपास बैठो तुमतुम्‍हारे मौन मेंमैं वो शब्‍द सुनूंगीजो जुबां कहती नहींदि‍ल कहता है तुम्‍हारा....आओ नफि‍र कभी मेरे इंतजार मेंतुम तन्‍हा उदास बैठोऔर दूर खड़ी होकरमैं तुम्‍हारी बेचैनी देखूंगी...आओ न...मि‍ल जाओ कभीराहों में बाहें फैलाएमैं नि‍कल जाऊँगी कतराकर मगरखुद को ...
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  June 29, 2018, 2:04 pm
ये वक़्त हैसूखने, चटकने, टूटने और मरने काधरती सूखी हैसूरज के प्रचंड ताप से पड़ गईं है दरारेंत्राहि मची है चारों ओर कई रिश्ते भी टूटे इन्हीं दिनोंटूटती पत्तियों की तरह नहींहरी-भरी डाली गिर गईज़रा सी हवा ने सबकी औक़ातउजागर कर दीकई आइने चटके पड़े हैंआदमी बँटा नज़र आ रह...
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  June 22, 2018, 9:28 pm
तुम ठहर सकते थेकुछ दिन औरजैसे पेड़ पर पकने की प्रकिया मेंफल ठहर जाते हैं कुछ रोज़किसी के तोड़ लेने और ख़ुद टूटकर गिर जाने केसंशय के बावजूदअपने भीतर भरपूर मिठास समेटेरहना चाहते हैं पकते फलपेड़ पर मज़बूती से टिके, लुभातेहवा के झोकों से ख़ुद को बचातेवैसे हीकोई भी रिश्...
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  June 21, 2018, 1:38 pm
अब और कुछ संभव नहीं था कि‍ देखा जा सके। हम होटल की ओर लौट चले। रास्‍ते में स्‍थानीय बाजार का एक चक्‍कर लगाया जहाँ दुकानदार लोग हाथों में छोटे-छोटे धर्म चक्र घुमाते हुए सूखे खूबानी और बाकी दैनि‍क उपयोग की चीजें बेच रहे थे। ज्‍यादातर ड्राई फ्रूट्रस ही थे। ऐसा वि‍शेष कु...
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  June 20, 2018, 9:51 pm
सि‍न्‍धु का मोह मन में लि‍ए सीधे पहुँचे हॉल ऑफ फेम । यह शहर से 4 कि‍लोमीटर की दूरी पर है। पर्यटक यहां सुबह नौ से शाम के सात बजे तक जा सकते हैं। दोपहर मे एक से दो तक बंद रहता है। लद्दाख में भारतीय सेना की वीरता व कुर्बानियों का इतिहास समेटने वाले हॉल ऑफ फेम को एशि...
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  June 18, 2018, 11:58 am
अब वापस लेह शहर की ओर। हेमि‍स को पीछे छोड़ते ही आगे एक पुल मि‍ला। वहां आगुंतको के लि‍ए धन्‍यवाद लि‍खा था। पुल के नीचे मटमैली सि‍न्‍धु नदी बह रही थी। बौद्ध धर्म के प्रतीक लाल-पीले-नीले पताके फहरा रहे थे। पास ही कुछ पुराने मि‍ट्टी और पत्‍थरों से बने घर थे जि‍नके लकड़ी के ...
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  June 16, 2018, 3:28 pm
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