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रूप-अरूप

शाम उतर गयी पेड़ों के पीछे। मन भी धुँधलाया सा है जैसे कम रोशनी में आँखों को थोड़ी तकलीफ़ होती है स्पष्ट देखने के लिए।मैं भी समझ नहीं पायी हूँ कुछ रिश्तों का ताना-बाना। बार-बार कुछ जुड़ता है...टूटता है। आस भी बड़ी अजीब चीज़ होती है ..ज़िद्दी...टूट के फिर जुड़ जाती है एक बार और...
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  November 11, 2017, 12:11 pm
शर्ट ख़रीदा उस दिन । अपनी फ़ेवरेट ब्लू जीन्स के साथ व्हाइट शर्ट। झक्क सफ़ेद। उसने कहा - 'एकदम व्हाइट शर्ट क्यों पहनती हो। कोई प्रिंट लेना था। कुछ लिखा ही होता तो क्या बुरा था ...'मैंने कहा- पेन देती हूँ। तुम ही लिख दो। देखूँ ज़रा क्या लिखते हो .....'You aur mine '...बस ये तीन शब्द लिख दूँग...
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  November 9, 2017, 10:54 am
दुनिया के शोर सेऊबा हुआ मनएकांत तलाशता हैजब उस एकांत काशोर भीबहुत तीखा हो जाता हैतो आवाज़ लगाता हैउसेजिससे उम्मीद हो किइन सब से परे ले जाएगामगरदुनिया अपने मन के जैसीनहीं होतीआपको दुनिया के साथ- साथख़ुद से भी लड़ना होता हैक्योंकिज़रूरत के वक़्त आपकभी किसी को पास नही...
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  November 6, 2017, 2:06 pm
तुम्हारे नाम की शाम अब तक है मेरे पास नहीं सौंप पायी किसी को भी अपनी उदासी अपना दर्द, अपना डर और अपना एकांत भीबस करती रही इंतज़ारना तुम लौटेना कोई आ पाया जीवन मेंतुम्हारे नाम सौंपी गयी शाम परकिसी और का नामकभी लिख नहीं पायीवो वक़्तअधूरा ही रहा जीवन मेंकुछ के रा...
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  November 2, 2017, 10:07 pm
जड़ें कहीं जमती नहींतो पीछे कुछ भी नहीं छूटताज़िंदगी ख़ानाबदोश सीरही अब तकजब तक रहे, वहीं के हुएफिर कहीं के नहीं हुएलगता है इस बारजड़ें जम गईं हैं गहरे तककष्ट होता हैनिकलने में, बढ़ने मेंछूटने का अहसासलौटा लाता है बार-बारजंगल सी खामोशीमहसूस होती हैकई बार आसपासरात वि...
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  November 1, 2017, 1:45 pm
धागा, जो प्रेम का होता है धागा, जो मोतियाँ पिरोता है धागा, जो फूलों की माला गूँथता हैवही धागामाटी को माटी से जुदा करता हैअलग रूप, अलग रंग,अलग आकार देता हैधागा,जोड़ता ही नहीं, तोड़ता भी हैजैसे प्रेम मेंसँवरते नहीं,कुछ बिखर भी जाते हैंमाटी का तनमाटी में मिलना है ए...
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  October 11, 2017, 10:22 pm
ओ साथीतेरे इंतज़ार में गिन रहेसमुद्र की लहरेंजाने कितने समय सेसमेट लो अपने डैनेमत भरो उड़ानलौट आओ वापससमुद्र वाली काली चट्टान परजहाँ समुन्दर कानिरंतर प्रहार भीपथ से विचलित न कर पायामैं थमा हूँ अब भीमेरी एकाग्रता और इंतज़ार कीमत लो और परीक्षाकि आना ही होगा एक दिन औ...
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  September 7, 2017, 12:55 pm
अपनी अँगूठीकहीं रखकर भूल गयीभूल जाती है अक्सरवो इन दिनोंदराज़ की चाबी कहीं कभी गैस पर कड़ाही चढ़ाकरकई बार तोगाड़ी चलाते वक़्तचौराहे पर रूककर सोचने लगती हैकि उसे जाना कहाँ थावो भूलती हैबारिश में अलगनी से कपड़े उतारनाचाय में चीनी डालनाऔर अख़बार पढ़ना भीआश्चर्य है...
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  September 2, 2017, 8:04 pm
दर्दइतना हल्‍का भी नहींकिशब्‍दों के गले लगरो लेमिट जाए।रेशे-रेशे में रवां हैजोदिया तुमनेऔर अनचाहे हीस्‍वीकारा मैंने।एक सूत बराबर थीखाईजोड़ने के बजायदो ईंट तुमने हटाईंदो मैंनेखिसकाई।अबटूटा जुड़ता नहींखालीपनभरता नहींखिसकी ईंटो सेकमजोर हो रहीअभेद इमारत।गिर जा...
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  August 30, 2017, 8:53 pm
चुप की छाया नेनिगल लिया उस वक़्त कोजो एक खूबसूरतलम्हा बन सकता था।समय भीहरसिंगार साझड़ता है धरती परऔर धूल में लिपट जाता है।रात हसीन लगती हैजबआँखों में कोई ख्वाब होऔर नींद से दुश्मनी हो जाएकुछ आँखो कोसपने गिराने की आदत होती हैखो जाने के बाद सब स्वीकारनाअकेलपन से किया सम...
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  August 28, 2017, 12:08 pm
नीलगगन की थाली मेंमक्खन जैसे बादल ।सूरज घेवर के टुकड़े सा नदियां जैसे छागल ।बर्फीली चादर तान सुमेरु मस्त धूप में सोए ।श्योक नदी के तट किसनेरेत के टिब्बे बोए ।मरीचिका सी लेह भूमिमन को कर गई पागल ।...
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  August 25, 2017, 12:54 pm
मि‍त्रों.....आपके साथ एक खुशी साझा करने का मन है। मेरे दूसरे एकल कवि‍ता संग्रह का कल दि‍नांक 20 अगस्‍त को लोकार्पण हुआ। साहि‍त्‍यकार महुआ माजी मुख्‍य अति‍थि‍ थीं और अध्‍यक्षता की थी कुलपति‍ डा. रमेश कुमार पांडेय जी ने। कुछ तस्‍वीरें आपके लि‍ए ... ...
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  August 21, 2017, 4:58 pm
"डूबती सांझ का सूरज सदा देद‍िल में है क्‍या आज बता देनद‍ियों के संगम में भीगी है यादेंसामने आकर तू भी मुस्‍करा दे "...
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  August 8, 2017, 1:47 pm
हम 'बड़ा'बोलते थे उन्‍हें। हम, यानी मैं और मेरी पक्‍की वाली सहेली मनु, साथ ही बड़ा के घर वाले और मुहल्‍ले के सारे लोग। 'बड़ा'का अर्थ है बड़ी मां। वो एक उम्रदार कर्कशा ब्राह्णण औरत थीं, ऊपर से वि‍धवा। कोई संतान भी नहीं। जमाने के प्रति‍ जि‍तनी कटुता उनके अंदर थी वो सब चेहरे स...
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  August 4, 2017, 11:52 am
आओजरा बति‍या लें कुछआप फेरोमाला मनके कीमैं मन के फेरे लगा लूंइन खूबसूरत वादि‍यों सेथोड़ी खूबसूरतीयादों में अपन बसा लूंकलकल नदि‍यों का स्‍वरअपने भीतर भर लाऊंओ दुनि‍यां के छत के वासि‍योंमैं भी जरा तुम सीसुंदर हो जाऊंहि‍मनदि‍या सी छलछलबहती जाऊं...बहती जाऊं...
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  August 1, 2017, 1:44 pm
हल्की-हल्की सी बारिश और तनहा यहाँ हम ऐसे में तुझको याद न करेंतो और क्या करें हम पत्तों पर ठहरी शबनम और बूँदों के नीचे ठहरें हम इस बयार में तेरा नाम न पुकारेंतो और क्या करें हम आसमान जब देता है धरती को बारिश की थपकी ऐसे में सावन को ना निहारें तो और क्या करे...
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  July 23, 2017, 8:22 pm
तलाक..तलाक..तलाक। ये तीन शब्‍द कहने मात्र से पति‍-पत्‍नी का रि‍श्‍ता खत्‍म हो जाता है, चाहे उस रि‍श्‍ते की उम्र दो महीने पुरानी हो या बीस वर्ष। इस संबध में हि‍ंदू और मुस्‍लि‍म धर्म के अनुसार स्‍थि‍ति‍ अलग है। हि‍ंदू धर्म में जहां इसे सात जन्‍मों का बंधन माना गया है वहीं ...
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  July 20, 2017, 9:57 am
उस पर भरोसा नहीं करतीराई-रत्ती जितनी भी नहींमगर उसकी परेशानियों सेउतनी ही दुखी होती हूँजितना कि वो......एक दिन भी उसकोयाद नहीं करना चाहतीमगर एक पल ऐसा नहीं बीतताजो उसकी याद के साये में न गुज़रेजानती हूँ सच-झूठ के ताने-बाने सेबुना है उसने अपना जीवनअपनी सहूलियत के हिसाब स...
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  July 4, 2017, 11:21 am
"ये ज़हर मेरे लहू में उतर गया कैसे".....रात भर गूंजती रही कमरे में मेहदी हसन की दर्द भरी आवाज.....ऐसा ही होता है जब प्रेम और प्रेम से उपजा दर्द तराज़ू के दो पलड़ों में बराबर तुलता है। वक़्त ठहरा होता है। साल की सबसे छोटी रात सबसे लंबी कब हो जाती है .....यह दर्द के लहरों पर सवार उस प्रेमी...
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  June 24, 2017, 10:17 pm
लोरि‍यों में कभी नहीं होते पि‍ता पि‍ता होते हैं अाधी रात को नींद में डूबे बच्‍चों के सर पर मीठी थपकि‍यों मेंकौर-कौर भोजन में नहीं होता पि‍‍‍‍ता के हाथों का स्‍वादपि‍ता जुटे होते हैंथाली के व्‍यंजनों की जुगाड़ मेंपि‍ता कि‍स्‍से नहीं सुनाते मगर ताड़ लेते हैंकि‍स ओर च...
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  June 18, 2017, 8:44 pm
अब शाम का रंग बदलने लगा थ्‍ाा। सूरज के आसपास नारंगी रंग फैला था। एक के बाद एक पहाड़ दूर तक नजर आ रहे थे। लोगों का ध्‍यान सब तरफ से हटकर सूरज की ओर था। आसमान साफ था, सो हम आराम से देख पा रहे थे कि‍ कैसे सूरज के आसपास लालि‍मा बढ़ती जा रही है और गहरे होते आसमान में सूरज कि‍तना ख...
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  June 6, 2017, 12:44 pm
बचपन से सुना है नेतरहाट के बारे में। एक तो वहां का सूर्योदय और सूर्यास्‍त, दूसरा नेतरहाट वि‍द्यालय, जो अपने शि‍क्षा के कारण बेहद प्रसि‍द्ध है। बि‍हार बोर्ड की परीक्षाओं में माना जाता था कि‍ प्रथम दस तक का स्‍थान नेतरहाट आवासीय वि‍द्यालय के बच्‍चे ही प्राप्‍त करते थे...
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  June 4, 2017, 8:30 pm
मेरा मन कभ्‍ाी-कभ्‍ाी बन जाता है हाईकोर्टआसपास की समस्‍यादि‍ल के अलग-अलग खानों मेंरखा हुआ दर्दचीत्‍कार उठता है तोस्‍वत: संज्ञान लेता है मनआदेश देता है दि‍माग कोकि‍दि‍ल के उस कोने में अति‍क्रमण हैत्‍वरि‍त कार्रवाई करस्‍थि‍ति‍ नि‍यंत्रण में लाई जाएयदि‍होता रहे ऐस...
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  May 31, 2017, 3:43 pm
वो इस क़दर मुझमें उतर गया दि‍ल बना एक कमरा और वो रौशनी सा भर गया तस्‍वीर...भीमताल की ...
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  May 31, 2017, 3:02 pm
मि‍लन की तीसरी कि‍स्‍त.... अब हम दोनों खूब जोर से हंस पड़े। अपनी कल्‍पना की उड़ान पर तुम मुग्‍ध दि‍खे और मैं तुम पर। हंसी थमने पर वेटर को बुलाकर तुमने कुछ स्‍नैक्‍स का आर्डर दि‍या और अपने बगल से एक पैकेट उठाकर मेरी ओर बढ़ाया। वह एक खूबसूरत रैपर से लि‍पटा गि‍फ्ट पैक था। मै...
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  May 29, 2017, 4:31 pm
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