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रूप-अरूप

नहीं, बिल्कुल नहीं भीगी थी बारिश की फुहारों में मगर पसलियों में अकड़न है ऐंठ रही पिंडलियांताप बढ़ता ही जाता हैफूलदान में सजे रजनीगंधा सेकोई ख़ुशबू नहीं आतीबेस्वाद है सबबड़बड़ाहट तेज़ हुई जा रहीहाँ, नहीं जी सकती तुम्हारे बिनाभूलना असम्भव हैपास आओ, रख दो माथे ...
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  July 17, 2018, 2:31 pm
दुःख उलीचती रही प्रतिदिनअँजुरी भर-भर सागर उफनता रहा दुःख बढ़ता गया संबंधटूटने और जुड़ने के बीचउभरती, सिहरती पीड़ासघन होती गईदर्द हैं, अपेक्षाएँ हैंफिरनिपट सूनी ज़िंदगीगरम दिन मेंछांव तलाशती सीकि कोई हवा साआता-जाता रहाआया समझदुःख सागर हैनिस्पृह होना ज़रूर...
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  July 14, 2018, 9:16 pm
“ मेरी मुट्ठियों में बंद हैएक मीठी छुवनजिस दिन खुलेंगी हथेलियाँमैं अकेली हो जाऊँगीजीवन भर के लिए...”...
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  July 10, 2018, 11:11 am
झकझोरा तुमने लौटी हूँ मानो नींद के गाँव से खिंचता सन्नाटा जैसे बस टूटना ही चाहता हो अब दर्द सहलाता है आवाज़ की दुनियाँ मेंरंगों की सतरंगी चमक बरक़रार है।...
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  July 7, 2018, 3:29 pm
रात की छाती परनहीं है चाँदकाली घटाएँ घिर-घिरखोल रही स्मृति के पिंजरेमेघ देख हृदय का माटी फिर दूब सा हरा हुआहै बारिश की झड़ीपत्तों-पत्तों में छुपा संदेशमेघों से पर्वतों के लिपटने काआया दिनहाँ है ये आषाढ़ का दिन...
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  July 6, 2018, 4:02 pm
चीख़ रही तन्हाइयाँपिछली कई रातों से मत जाओ, रुको भी देखो एक बार कितनी अकेली पड़ गई तुम और मैं..जलते-बुझते जुगनू देखललिमा भी देखती हूँ रोज़कुछ बातें सुनकरअनसुना करना आ गया मुझे भी।...
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  July 5, 2018, 1:26 pm
पेड़ अपने बदन से गिरा देता है एक-एक कर सारी पत्तियाँफिर खड़ा रहता है निस्संगसब छोड़ देने का अपना सुख हैजैसेइंसान छोड़ता जाता हैपुराने रिश्ते-नातेतोड़ कर निकल आता हैउन तन्तुओं कोजिनके उगने, फलने, फूलनेतकजीवन के कई-कई वर्ष ख़र्चकिए थेपर आना पड़ता है बाहरकई बार ठू...
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  July 3, 2018, 3:40 pm
बेटियों ने बेटियों को बचाना चाहाअपने जैसी मासूमों कोबताना चाहा, कि समझोतुम कोई सामान नहींकि तस्करी की जाए तुम्हारीऔर एक दिनलुट-पिट कर, आबरू औरबरसों की कमाई गवाँख़ाली हाथ लौट आओउसी गाँव मेंजहाँ कोई भैया, दादा या दीदीफिर फुसलाकर बेच देपाँच बोरी अनाज की क़ीमत मेंएक जीव...
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  July 2, 2018, 10:44 am
आओ नपास बैठो तुमतुम्‍हारे मौन मेंमैं वो शब्‍द सुनूंगीजो जुबां कहती नहींदि‍ल कहता है तुम्‍हारा....आओ नफि‍र कभी मेरे इंतजार मेंतुम तन्‍हा उदास बैठोऔर दूर खड़ी होकरमैं तुम्‍हारी बेचैनी देखूंगी...आओ न...मि‍ल जाओ कभीराहों में बाहें फैलाएमैं नि‍कल जाऊँगी कतराकर मगरखुद को ...
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  June 29, 2018, 2:04 pm
ये वक़्त हैसूखने, चटकने, टूटने और मरने काधरती सूखी हैसूरज के प्रचंड ताप से पड़ गईं है दरारेंत्राहि मची है चारों ओर कई रिश्ते भी टूटे इन्हीं दिनोंटूटती पत्तियों की तरह नहींहरी-भरी डाली गिर गईज़रा सी हवा ने सबकी औक़ातउजागर कर दीकई आइने चटके पड़े हैंआदमी बँटा नज़र आ रह...
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  June 22, 2018, 9:28 pm
तुम ठहर सकते थेकुछ दिन औरजैसे पेड़ पर पकने की प्रकिया मेंफल ठहर जाते हैं कुछ रोज़किसी के तोड़ लेने और ख़ुद टूटकर गिर जाने केसंशय के बावजूदअपने भीतर भरपूर मिठास समेटेरहना चाहते हैं पकते फलपेड़ पर मज़बूती से टिके, लुभातेहवा के झोकों से ख़ुद को बचातेवैसे हीकोई भी रिश्...
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  June 21, 2018, 1:38 pm
अब और कुछ संभव नहीं था कि‍ देखा जा सके। हम होटल की ओर लौट चले। रास्‍ते में स्‍थानीय बाजार का एक चक्‍कर लगाया जहाँ दुकानदार लोग हाथों में छोटे-छोटे धर्म चक्र घुमाते हुए सूखे खूबानी और बाकी दैनि‍क उपयोग की चीजें बेच रहे थे। ज्‍यादातर ड्राई फ्रूट्रस ही थे। ऐसा वि‍शेष कु...
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  June 20, 2018, 9:51 pm
सि‍न्‍धु का मोह मन में लि‍ए सीधे पहुँचे हॉल ऑफ फेम । यह शहर से 4 कि‍लोमीटर की दूरी पर है। पर्यटक यहां सुबह नौ से शाम के सात बजे तक जा सकते हैं। दोपहर मे एक से दो तक बंद रहता है। लद्दाख में भारतीय सेना की वीरता व कुर्बानियों का इतिहास समेटने वाले हॉल ऑफ फेम को एशि...
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  June 18, 2018, 11:58 am
अब वापस लेह शहर की ओर। हेमि‍स को पीछे छोड़ते ही आगे एक पुल मि‍ला। वहां आगुंतको के लि‍ए धन्‍यवाद लि‍खा था। पुल के नीचे मटमैली सि‍न्‍धु नदी बह रही थी। बौद्ध धर्म के प्रतीक लाल-पीले-नीले पताके फहरा रहे थे। पास ही कुछ पुराने मि‍ट्टी और पत्‍थरों से बने घर थे जि‍नके लकड़ी के ...
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  June 16, 2018, 3:28 pm
अब हेमि‍स की ओर। कुछ दूर बाद बेहद खूबसूरत द्वार मि‍ला। रास्‍ते की बेमि‍साल खूबसूरती का जि‍क्र क्‍या करूँ। ऊँची पहाड़ी में हमारी गाड़ी चढ़ती जाती है और हम अभि‍भूत होते जाते हैं। खासकर यह सोचकर कि‍ 16वीं सदी में जब आवागमन की पर्याप्‍त सुवि‍धा भी नहीं थी, तब इतने दु...
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  June 15, 2018, 6:25 pm
अब हमे जाना था हेमि‍स की ओर। मगर उसके पहले रास्‍ते में ड्राइवर जि‍म्‍मी ने पूछा- ‘’वो स्‍कूल देखना है आपलोगों को जहाँ थ्री इडि‍यट की शूटिंग हुई थी।” हमने कहा- “हाँ, देखते चलते हैं।” हमारी दि‍लचस्‍पी तो थी ही स्‍कूल देखने के लि‍ए। फि‍ल्‍म का अंति‍म भाग यहीं फि‍ल...
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  June 13, 2018, 11:03 pm
सुबह एक बार फि‍र पूरी हि‍म्‍मत सँजो।कर हम नि‍कल पड़े। मगर आज बच्‍चों ने इंकार कर दि‍या। कहा बेहद थके हैं। होटल में ही आराम करेंगे। आपलोग मठ घूम आओ। सबसे पहले हम पहुँचे कर्मा दुप्‍ग्‍युद चोएलिङ्ग मठ जो लेह से करीब 9 कि‍लोमीटर की दूरी पर है। इस मठ की देखभाल ति‍ब्‍...
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  June 12, 2018, 12:10 pm
पैंगोग जाते वक्‍त जि‍तना लंबा रास्‍ता लगा था, उतना लौटते में नहीं लगा। जाते वक्‍त हमलोगों को थि‍कसे मठ मि‍ला था; मगर जाने की हड़बड़ी में हमने देखा नहीं था। अब जब वापस आ रहे थे ,तो आश्चर्य था कि‍ जब हम थि‍कसे मठ के समीप पहुँचे तो सूरज अस्‍ताचल की ओर जा ही रहा था,&n...
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  June 9, 2018, 8:21 pm
बहुत कुछ दूर और ऐसा ही रास्‍ता मि‍ला...वीरान। कब पहुँचेंगे सह सोचकर हम बेसब्र होने लगे। जि‍म्‍मी ने सांत्‍वना दी, बस अगले मोड़ के बाद बाद हम पैंगोंग होंगे। यहाँ से आपलोगों को झील दि‍खेगी। जैसे मोड़ मुड़े, वाह..दूर से दि‍खती झील की पहली झलक ने हमें पागल कर दि‍या। रास...
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  June 8, 2018, 6:04 pm
आज की मंजि‍ल थी पांगोंग झील। चि‍र प्रति‍क्षि‍त, हमारी ही नहीं, बच्‍चों की भी। नीले पानी के झील का आकर्षण हाल-फि‍लहाल के कुछ फि‍ल्‍मों ने बढ़ा दि‍या ,जि‍समें प्रमुख हैं 'थ्री इडि‍यट' और 'जब तक है जान'। हम एक बार फि‍र सिन्धु के कि‍नारे-कि‍नारे चल पड़े बादलों से बात...
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  June 4, 2018, 10:38 pm
आज की मंजि‍ल थी पांगोंग झील। चि‍र प्रति‍क्षि‍त, हमारी ही नहीं, बच्‍चों की भी। नीले पानी के झील का आकर्षण हाल-फि‍लहाल के कुछ फि‍ल्‍मों ने बढ़ा दि‍या ,जि‍समें प्रमुख हैं 'थ्री इडि‍यट' और 'जब तक है जान'। हम एक बार फि‍र सिन्धु के कि‍नारे-कि‍नारे चल पड़े बादलों से बात...
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  June 4, 2018, 10:38 pm
यह ऐसी पहाड़ी है जि‍से मैग्‍नेटि‍क हि‍ल के नाम से जाना जाता है। यहाँ गाड़ी बंद कर छोड़ दीजि‍ए तो वह खुद ब खुद ऊपर की ओर जाने लगती है। हम भी रुके वहाँ। ड्राइवर ने गाड़ी बंद कर दी। गाड़ी अपने आप चलने लगी ऊपर की तरफ। सभी पर्यटक यहाँ रुककर एक बार जरूर परीक्षण करते हैं ...
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  June 3, 2018, 8:33 pm
शाम होने से पहले हम जांस्‍कर-सिन्धु संगम जाना चाहते थे। होटल में अभि‍रूप को छोड़ नि‍कल गए कारगि‍ल वाले रास्‍ते पर। उसी रास्‍ते एयरपोर्ट है और भी कई चीजें हैं देखने के लि‍ए। पर हमें वो संगम देखना था जो लेह से करीब 35 कि‍लोमीटर की दूरी पर है । यह नीमो गाॅँव के ...
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  May 30, 2018, 11:31 am
घंटे भर के सफर के बाद हम लेह महल पहुँचे। एक बार फि‍र शहर हमारे आंखों के आगे था। शहर के मध्य में स्थित इस महल का निर्माण सोलहवीं शताब्दी में सिंगे नामग्याल ने करवाया था। अंदर जाने के लि‍ए टि‍कट लेना पड़ा। बच्‍चों का मन नहीं था मगर हमें देखना था लेह महल। प्रवेश द्वार लकड...
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  May 27, 2018, 10:47 pm
कुछ दूर आगे बढ़ने पर पता लगा कि‍ सड़क बंद है। रास्‍ते में चट्टान गिर जाने से रास्‍ता बंद हो गया है। दूर तक लंबी कतार थी वाहनों की। पर वह एक खूबसूरत जगह थी। ऊँचे पहाड़, हरे-भरे । वहाँ दूर-दूर तक याक चर रहे थे। बगल में श्‍योक नदी बह रही थी। यह जगह खलसर थी।  हमने मजाक भी ...
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  May 25, 2018, 12:56 pm
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