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रूप-अरूप

महाकाल के दर्शन के लि‍ए उज्‍जैन हम अक्‍सर जाते हैं। क्‍या आपको मालूम है कि‍ इस नगरी में महादेव के 84 मंदि‍र हैं। इस श्रृखंला में 38वें नंबर पर आता है कुसुमेश्‍वर महादेव का मंदि‍र। पि‍छले दि‍नों जब हम उज्‍जैन की यात्रा पर थे, तो महाकाल के दर्शन के बाद आसपास के सभी प्रसि‍...
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  March 4, 2019, 5:36 pm
कह पाती उस तरह तो आज भी कहती मगरन तुम रहे उस क़ाबिल औरन मैं रही अब वैसी मासूम.......
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  February 21, 2019, 8:48 pm
मन के अरण्य में स्मृतियों की बंजर हथेली परसूखे- झरे पात हैंएक-एक करचुन लूँबिखरी यादों कोइस उदास मौसम मेंपतझड़ के आख़री पत्ते की तरहऔर गुनगुनाती धूप मेंधीमे-धीमेदुख से बाहर आने काकोई रास्ता देखूँकि सुना हैवसंत की ऊँगलियों मेंजादू हैवो खिलाएगा पल्लव नयाउगेगा सरसो...
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  February 15, 2019, 8:13 pm
आज फिर तेरी याद आयी...बेतरह आयी...इतनी कि सम्भाली न गयी और आँसुओं से अपना ही दामन तर हो गया।तू बिछड़ा है तो क़ुसूर मेरा है ना ..तू तो जाने कब से बता रहा था मुझे कि अब मैं रहूँ न रहूँ, तुम्हें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला। हर बार झगड़े के बाद मैं रूठती और फिर मान भी जाती....दरअसल दूस...
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  February 12, 2019, 9:27 pm
उम्र कुछ भी हो...आंखों में कुछ सपने सदा वैसे ही रहते हैं, जैसे बचपन में देखा हुआ आकाश का चांद या नदी में लगाई छलांग...या कुछ आदतें, जो परि‍स्‍थि‍तयों की नहीं, जी गई जि‍ंदगी की सौगात होती है।     उन्‍न्‍हतर वर्ष की उम्र में भी 'कि‍टी मेमसाहब'की आंखों में चमक कौंध जाती है लै...
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  February 11, 2019, 9:27 pm
मैं मुक्त हूँ, तुम मुक्त हो ..निकल आओइस जन्म-मृत्यु के चक्र सेलगा लो डुबकी प्रयाग में कर लो संगम स्नानले जाओ मेरी यादेंहड्डियों की तरह, राख की तरहकर दो प्रवाहितहरिद्वार मेंजोड़कर हाथ, कहनाहम दोनों मुक्त हुएये अंतिम प्रणाम है...अंतिम प्रणाम हैकहो न प्रिय !तुम सच लेकर मर...
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  February 1, 2019, 8:26 pm
बहती रही धार में...जाने कब से। कई बार कि‍नारे की तरफ जाने को सोचा भी....मगर डर लगता रहा...क्‍या पता डूब ही जाऊं....बेहतर है, बहती चलूं धार के साथ....थपेड़े बर्दाश्‍त करते-करते आदत हो गई।कभी-कभी जब सम पर होता सब कुछ तो कि‍तना सुकून मि‍लता है।लगता है इससे बड़ा सुख और कुछ नहीं। जो मि‍...
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  January 31, 2019, 8:37 pm
दर्द झेलना बहुत मुश्‍कि‍ल होता है..खासकर तब, जब यह दर्द दि‍ल को घायल करने के बाद मन से तन में उतरने लगता है.....मन और तन की तकलीफ साथ-साथ तंग करती है तो समझ नहीं आता कि‍से पहले देखूं....कि‍से शांत करूं.;क्‍या इलाज करूं....बहुत प्‍यास लगती है इन दि‍नों...जैसे पानी बेअसर हो .....तुम्‍ह...
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  January 30, 2019, 2:01 pm
आज फि‍र पूर्णिमा है....जाने इन दि‍नों चांद का मुझसे कैसा नाता हो गया है...मैं समुद्र तो नहीं....मगर चांद रातों में ज्‍वार उठता है मेरे अंदर...सब उथल-पुथल।पौष पूर्णिमा को सूर्य और चंद्रमा के संगम का दि‍न माना जाता है न...मगर मन का संगम न हो तो कुछ भी नहीं....। कल से महीना बदल जाएगा औ...
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  January 21, 2019, 9:54 pm
ज़िंदगी में ग़मशुमार करना हैएक बार फिर सेउसे प्यार करना हैवक़्त के ख़ाली लिफ़ाफ़े से अब जी नहीं बहलताफूलों की गमक सेअपनी शाम भरना हैनहीं भाता सर्दियों केउदास मौसम मेंधड़कनों का इस क़दरसर्द हो जानाकिसी की याद में फिर सेदिल बेक़रार करना हैसुन ए दिल एक बारफिर से उसे ...
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  January 10, 2019, 2:14 pm
बिछड़ने की बात पर दो बूँद आँखों से बेआवाज़ गिर जाना अब न चुभता है ना पूछना चाहता है दिल कि अबकी बरसबिछड़ जाओगे तोकैसे जी पाएँगे ...?उलझा लोगे ख़ुद कोतमाम उलझनों मेंकि सुबह से रात तकदम न लेने पाओमगर किसी शब के सन्नाटे मेंचाँद के रूबरू होगेतो देखनायाद में कैसे तड...
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  January 9, 2019, 5:47 pm
अहा....फि‍र करवट लि‍या मौसम ने....सुन रही हूं सर्द हवाओं की दस्‍तक ...शाम गुलाबी है, सि‍हरन जगाती। अब पगडंडि‍यों पर वो दौड़ती नजर आएगी...हथेलि‍यों में पारि‍जात के फूल भरे....उधर मंदि‍र के आंगन में गले में ऊनी मफलर डाले बेसब्री से कर रहा होगा वो उसका इंतजार....सर्दियां रूमा...
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  October 25, 2018, 1:09 pm
शरद पूर्णिमा की रात है। धवल..उज्जवल चाँद खिला है आकाश में । लड़की एकटक देखे जा रही चाँद की तरफ़....ख़ुश है। उसका चेहरा भी चमक रहा चाँद की तरह...लड़का पास आता है।दोनों हाथ थामे चाँद देखते है...लगातार..।”हमारा जीवन ऐसा ही हो. ये कामना है। सब कुछ उजला...कोई दाग़ न कहीं....।” लड़की स्व...
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  October 24, 2018, 2:08 pm
आने के लिए नहीं जाता कोईशाम ढलती हैरात चुपचाप चली जाती हैसुबह नहीं लौटता वो हीजो गुज़र चुका होता हैआज कली, कल फूल हैफूल कल फिर नहीं खिलताजो चला जाता है कहकरकि लौट आऊँगावह पहले सा कभी नहीं मिलताजो इंतज़ार में टकटकी लगाएबैठा रहता है बरसोंवो अपनी हँसी हँसताऔर अपने दुःख स...
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  October 22, 2018, 11:06 am
कितनी यादें लेकर आते हो साथ...मन तोला-माशा होता है। वो बिस्तर पर चाँदनी का सोना...हरसिंगार का ...खिलना-महकना-गिरनासमेटना हथेलियों में तुम्हारी याद की तरह हरसिंगार और ....पांच सुरों का राग कोई गाता है दूर..मालकौंसमन को अतीत में खींच ले ही जाता है, कितना भी रोके कोई..ओह अक्तूबर ......
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  October 16, 2018, 2:09 pm
तुम्हें रहना है तो रहो अपने दिल से पूछ लो मेरी ज़िद से रुके तो क्या रुके ?...
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  October 6, 2018, 4:57 pm
तुम सा कोई नहीं होगा भी तो, किसी की तलाश क्यूँ हो जी लिया जितना एक जीवन के लिए ज़रूरी होता है महसूस कियाप्यार, शिद्दत और बेहिसाब दर्द भीअब कुछ बचा नहींजिसे सोचने, परखने या फिर जी लेने कीइच्छा बाक़ी रहेअनुभवों से समृद्ध है जीवनबैठ जाऊँ यदि कभी जीवन मेंथक कर कहींय...
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  September 28, 2018, 12:05 pm
                   ज़रूरत होती हैहथेलियों को भीएक ऐसी गरम हथेली कीजो टूटन के पलों मेंआकर कस ले और अहसास दिला देकि कोई हैजिसे हम अपनेसारे दुःख सौंप सकते हैं।...
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  September 3, 2018, 10:17 pm
डरती हूँतुमसे नहींन उस प्यार से, जोफूलों की तरह बरसा रहे तुमऔर मैं भीग रही सुबह की ओस में गुलाब की तरहडरती हूँइस साथ सेदिन-रात की बात सेजो हो नहीं पाई उस मुलाक़ात सेकि आदतें जीने नहीं देती पहले की तरहडरती हूँअंतहीन इंतज़ार के ख़्याल सेकि एक दिन कहकर भीजो नहीं आओगेमैं...
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  August 31, 2018, 1:28 pm
भोर की तलछट में झाँका एक चेहरा।बहुत दिनों बाद शगुन की भीड़ में शामिल हुआ। नज़रें मिलीं, टिकीं फिर मुड़ गयी भीड़ की ओर।ढोलक की थाप गूँजती रही। बुलाहट हुई ...जाओ कर लो चुमावन...पीछे से आवाज़ लगाई ..लो, ये लेकर जाओ। पॉकेट की तरफ़ हाथ बढ़ा....क्यों जी...आपसे क्यूँ.....नहीं देखा मुड़क...
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  August 28, 2018, 2:42 pm
ये तुम्हारे चले जाने के बाद की बात हैलोग लेते हैं जैसेबारिश का मौसम बीतने के बादबरसात का जायज़ालगाते हैं हिसाब कि किस जिले में पड़ा है सुखाड़कहाँ उतरा है नादियों का पानी खेत मेंकहाँ कैसी है दरकारजोड़-तोड़ कर करते हैं सरकार सेमुआवज़े की माँगऐसे ही तुम्हारे जाने के ब...
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  July 27, 2018, 10:07 pm
तुम रोज़ की तरह इंतज़ार करते मिलतेतो लगतादिल के किसी खाने में अब तकप्यार ज़िंदा है, गहरी साँस लेता हुआकिसी करिश्मे की उम्मीद में ठहरा हुआपर तुम जा चुके थे,जैसे ठीक नौ बजे किसी स्कूल कागेट बंद हो जाता हैकिसी दफ़्तर के बायोमेट्रिक सिस्टम मेंलेट आना दर्ज हो जाता हैउसी ...
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  July 23, 2018, 5:28 pm
नहीं, बिल्कुल नहीं भीगी थी बारिश की फुहारों में मगर पसलियों में अकड़न है ऐंठ रही पिंडलियांताप बढ़ता ही जाता हैफूलदान में सजे रजनीगंधा सेकोई ख़ुशबू नहीं आतीबेस्वाद है सबबड़बड़ाहट तेज़ हुई जा रहीहाँ, नहीं जी सकती तुम्हारे बिनाभूलना असम्भव हैपास आओ, रख दो माथे ...
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  July 17, 2018, 2:31 pm
दुःख उलीचती रही प्रतिदिनअँजुरी भर-भर सागर उफनता रहा दुःख बढ़ता गया संबंधटूटने और जुड़ने के बीचउभरती, सिहरती पीड़ासघन होती गईदर्द हैं, अपेक्षाएँ हैंफिरनिपट सूनी ज़िंदगीगरम दिन मेंछांव तलाशती सीकि कोई हवा साआता-जाता रहाआया समझदुःख सागर हैनिस्पृह होना ज़रूर...
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  July 14, 2018, 9:16 pm
“ मेरी मुट्ठियों में बंद हैएक मीठी छुवनजिस दिन खुलेंगी हथेलियाँमैं अकेली हो जाऊँगीजीवन भर के लिए...”...
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  July 10, 2018, 11:11 am
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