व्यंग्यम शरणम गच्छामि

 स्वागत हो तेरा सन बारहसन ग्यारह ने ,अज़ब गज़ब का खेल दिखाया ,इसने खाया -उसने खाया ,मिलकर सबने जमकर खाया |लाख बिठाये पहरे पीछे ,निकलकर कुछ भी बाहर न आया |बाहर गाली देते दीखे ,पीछे सबने हाथ मिलाया |इधर कलह और उधर ज़िरहस्वागत हो तेरा सन बारह .......स्वागत हो तेरा सन बारह .......काले धन ...
व्यंग्यम शरणम गच्छामि...
Dr. Rakesh Sharad
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  January 1, 2012, 2:14 pm
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