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Blog: मन पाए विश्राम जहाँ

Blogger: Anita nihalani
गणतन्त्र दिवस पर शुभकामनायें गणपति के देश में फलता-फूलता रहा है गणतन्त्र शताब्दियों से इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं उन गणराज्यों की अनेक गाथाएं जहाँ भारत ने विकास के चरम को छुआ था लोकतान्त्रिक गणतन्त्र यह देश बना है मिसाल दुनिया के लिए जहाँ जनता सर्वोपरि है जिसक... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   2:45am 25 Jan 2021 #इतिहास
Blogger: Anita nihalani
हवा का सागर हवा की सरगोशियाँ गर कोई सुन सके पल भर भी तन्हा छोड़ती न रब हो जैसे लिपट जाती परस उसका फूल जैसा जिंदगी को राह देती श्वास बनकर झूमते वट, वृक्ष, जंगल, लता, पादप, फूल सारे लहर दरिया, सिंधु के तन पर उठातीसरसराती सी कभी कानों को छूले सुनो ! कहती मत कहो, तुम हो अकेले ! वह ... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   10:08am 24 Jan 2021 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
कुछ ख्याल ‘कुछ’ होने से ‘कुछ नहीं’ हो जाना  इश्क का इतना सा ही तो फ़साना  चुप रहकर ही यह बयां होता है आवाजों में बस रुसवा होता है सुनो, सुनो और कुछ न कहोउसी धारा में चुपचाप बहो उससे बढ़कर न कुछ था न होगा जमाने में उसी को आने दो हर बात, हर तराने में लाख पर्दों में छिपा हो हीरा... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   9:40am 20 Jan 2021 #ख्याल
Blogger: Anita nihalani
बस इतना सा ही सरमायागीत अनकहे, उश्ना उर की बस इतना सा ही सरमाया ! काँधे पर जीवन हल रखकर धरती पर जब कदम बढाये कुछ शब्दों के बीज गिराकर  उपवन गीतों से महकाए ! प्रीत अदेखी, याद उसी की बस इतना सा ही सरमाया ! कदमों से धरती जब नापीअंतरिक्ष में जा पहुँचा मन कुछ तारों के हार पिरोय... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   9:19am 19 Jan 2021 #गीत
Blogger: Anita nihalani
 कोई जानता हैमन के ‘परदे’ पर यादों की फिल्म चलती है ‘वह’ उसी तरह रहता है अलिप्त जैसे आँख के पर्दे पर चित्र बने अग्नि का तो जलती नहीं न ही भीगती समुन्दर की लहरों को घंटों देखते हुए स्मृतियों के बीज हमने संभाल कर रखे हैं वर्तमान और अनेक जन्मों के उन्हें स्वयं ही बोते है... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   5:37am 18 Jan 2021 #फिल्म
Blogger: Anita nihalani
तुम यदि  तुम यदि बन जाओ सूत्रधार तो सँवर ही जायेगा जीवन का हर क्षण  मुस्कान झरेगी जैसे झरते हैं फूल शेफाली के अनायास ही हवा के हल्के से झोंके की छुअन से या सूरज की पहली किरण आकर जगाती है  तो हो जाते हैं समर्पित अस्तित्त्व को सहज ही !तुम यदि बनो जीवन आधारतो निखर ही जायेग... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   9:59am 17 Jan 2021 #आशंका
Blogger: Anita nihalani
सहज है जीवन भूल गए जग को जहाँ सँवारा हमने मन पर धूल गिरी थी आकर, जग पानी पी-पी कर धोया मन का प्रक्षालन भूल गए !नाजुक है जो जरा ठेस से आहत होता किरच चुभे गर, दिखता आर-पार भी इसके कांच ही है यह भूल गए !तुलना करना सदा व्यर्थ है दो पत्ते भी नहीं एक से, व्यर्थ स्वयं को तौला करते स... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   5:59am 15 Jan 2021 #जीवन
Blogger: Anita nihalani
जब नया साल आने को है  हर भोर नयी हर दिवस नया हर साँझ नयी हर चाँद नया,हर अनुभुव भी पृथक पूर्व से हर स्वप्न लिए संदेश नया !हम बंधे  हुए इक लीक चलें प्रतिबिम्ब कैद ज्यों दर्पण में,समय चक्र आगे बढ़ता पर ठिठक वहीं रह जाते तकते !नयी चुनौती, नव उम्मीदें करें सामना नई ललक से, बीता क... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   5:48am 22 Dec 2020 #नया साल
Blogger: Anita nihalani
 जाता हुआ साल कोरोना का महाआतंक छाया रहा पूरे साल शताब्दी की प्रथम महामारी से आज भी दुनिया है बेहाल !करोड़ों हुए संक्रमित, लाखों ने जान गंवायीअर्थव्यवस्थाएं पटरी से उतरीं न जाने कैसी आफत आयी !उम्मीद टिकी है वैक्सीन पर राजनीतिक उठापटक चलती रही बदस्तूर ट्रम्प हुए विदा ... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   10:32am 19 Dec 2020 #जलवायु
Blogger: Anita nihalani
ध्यान में  ज्यों बेदखल कर देता है कोई पिता नाकारा संतति को अपनी वसीयत से कई बार समझाने पर  राह पर न आना चाहे जो वैसे ही नादां मन जब तक नहीं किया जाता बेदखल चैन नहीं मिलता पल भर अतीत की स्मृतियों को उभारेगानए-नए सुझाव और विचार देगा उन्नति के पूर्वाग्रहों और धारणाओं से ... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   10:12am 15 Dec 2020 #ध्यान
Blogger: Anita nihalani
ऊँघता मधुमास भीतर अनसुनी कब तक करोगे टेर वह दिन-रात देता,ऊँघता मधुमास भीतर कब खिलेगा बाट तकता !विकट पाहन कन्दरा में सरिता सुखद इक बह रही, तोड़ सारे बाँध झूठे राह देनी है उसे भी !एक है कैलाश अनुपम प्रकृति पावन स्रोत भी है,  कुम्भ एक अमृत सरीखा क्षीर सागर भी वहीं है !दृष्ट... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   10:17am 3 Dec 2020 #प्रकृति
Blogger: Anita nihalani
पल-पल है चेतना नई सीग्रह - नक्षत्र, धरा,रवि, चाँद पादप, पशु, नदिया, चट्टान,  पवन डोलती तूफ़ां उठते सृष्टि पूर्ण मानव अनजान !बंधी एक नियम, ऋत, क्रम में नित नूतन यह पुनर्नवा सी, अंतर घिरा अतीत धूम्र से पल-पल है चेतना नई सी !सुख की चाह रहे भरमाती पीड़ा के वन में ले जाए, जितनी दौड़ लग... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   5:12am 2 Dec 2020 #चेतन
Blogger: Anita nihalani
 लो फिर आयी विमल दीवाली जगमग दीप जले पंक्ति में बन्दनवार लगे हर द्वारे सजी दिवाली महके जन पथ तोरण सजे गली चौबारे उठी सुगन्ध गुजिया, मोदक की वस्त्र नए देहों पर सरसरलगी झालरें जली बत्तियां थाल सजे पूजा के मनहर सजे विनयाक, धान्य लक्ष्मी राग जगाती सुख बरसाती लो फिर आयी ... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   11:08am 12 Nov 2020 #पूजा
Blogger: Anita nihalani
समय या भ्रम   समय जो निरंतर गतिमान है क्या वाकई गति करता है? या घटनाएं ही ऐसा प्रतीत कराती हैं दिन और रात माह और वर्ष जन्म और मृत्यु के मध्य समय बहता सा लगता है  पर देखने वाला सदा एक सा रहता है ! रेत पर धँसे पाँव ज्यों कहीं जाते से प्रतीत होते हैं लहर आकर चली जाती है ... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   5:41am 5 Nov 2020 #जन्म
Blogger: Anita nihalani
स्वधर्म – परधर्मस्वधर्म – परधर्म यह सारी कायनात भिन्न नहीं है हमसे झींगुर बोलता बाहर है पर हम भीतर सुनते हैं पेड़ पर गाती कोकिल की गूंज भीतर कुछ स्पंदन जगा जाती है सूरज बाहर है या भीतर ? हमारी आँखें उसी से नहीं देखती क्या   बाहर बहती हवा प्राण भीतर भरती  है भीतर व बाहर का भ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   5:11am 29 Oct 2020 #कायनात
Blogger: Anita nihalani
 व्यक्त वही अव्यक्त हो सके हे वाग्देवी ! जगत जननी  वाणी में मधुरिम रस भर दो, जीवन की शुभ पावनता का शब्दों से भी परिचय कर दो !भाषा का उद्गम तुमसे है नाम-रूप से यह जग रचतीं,ध्वनि जो गुंजित है कण-कण में नव अर्थों से सज्जित करतीं !शिव-शिवानी अ, इ में समाएक से म पंचम वर्गीय सृष्ट... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   10:17am 24 Oct 2020 #भाषा
Blogger: Anita nihalani
 ठहरे विमल झील का दर्पण पूर्ण चन्द्रमा, पूर्ण समंदर पूर्ण, पूर्ण से मिलने जाये,  माने मन स्वयं को अधूरा अधजल गगरी छलकत जाये !चाहों के मोहक जंगल में इधर भागता उधर दौड़ता, कुछ पाने की कुछ करने  कीसदा किसी फ़िराक में रहता !ठहरे विमल झील का दर्पण शांत सदा भीतर तल झलके, जिस पर ट... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   10:27am 20 Oct 2020 #झील
Blogger: Anita nihalani
उस देवी की पूजा करें हम  थामती जो हर  विपद में  ज्ञान दीपक पथ दिखाती,प्राण का आधार भी है   रात्रि बन विश्राम देती !सौंदर्य देवी कहाएजगत को आकार देती, शिव मिलन की प्रेरणा दे ले स्वयं कैलाश जाती !ऊर्जा अपार धारेअनंत का दर्शन कराती,  दात्री बनी सिद्धि रिद्धिनिःशंक जो सदा व... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   10:13am 18 Oct 2020 #ज्ञान
Blogger: Anita nihalani
 सिंधु से नाता जोड़ लेंनींद टूटे, स्मरण जागे फिर खिल उठे मन का कमल   जो बन्द है मधु कोष बन     हो प्रकट वह शुभता अमल !हम बिंदु हैं तो क्या हुआ सिंधु से नाता जोड़ लें, इक लपट ही हों आग की रवि की तरफ मुख मोड़ लें !अब शक्ति को पहचान निज खिल कर उसे बह लेने  दें, जो सुप्त है कई जन्म से ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   5:47am 15 Oct 2020 #कमल
Blogger: Anita nihalani
उस लोक में जहां आलोक है अहर्निश किंतु समय ही नहीं है जहाँरात-दिन घटें कैसे ? पर शब्दों की सीमा है जागरण के उस लोक में जहाँ नितांत एकांत है और निपट नीरव पर जहाँ जाकर ही मिलता है मानव को निजता का गौरव उस निजता का जिसमें कोई पराया है ही नहीं जहाँ हर पेड़-पौधे, हर प्राणी से ज... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   6:19am 13 Oct 2020 #एकांत
Blogger: Anita nihalani
 जो खिल रहा अनंत में एक ही तो बात है एक ही तो राज है, एक को ही साधना एक से दिल बाँधना !एक ही आनंद है वही जीवन छंद है, बह रहा मकरंद है मदिर कोई गंध है !खिले वही अनंत में दुःख-विरह के अंत में, राधा-श्याम कंत मेंऋतुराजा वसंत में !   रहे यदि बंटे हुए जीवन से कटे हुए,  तीर से बिंधे ह... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   9:29am 12 Oct 2020 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
 प्रार्थना जो दिया है तूने हे प्रभु !असीम है नहीं समाता इस झोली में तू दिए ही जाता है तेरी अनुकम्पा की क्या कोई सीमा है ?उदार मालिक द्वारा दिए गए अतिरिक्त धन की तरह तू भरे जाता है संसार मेरा मन झुका है तेरे कदमों में बैठा नहीं जाता देर तक दुखती है बूढ़ी हड्डियाँकरवटें ब... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   5:04am 8 Oct 2020 #आनंद
Blogger: Anita nihalani
 नीला अम्बर सदा वहीं थासंशय, भ्रम, भय, दुःख के बादल  जग को हमने जैसा देखा, छिपा लिया था दृष्टि पथ ही मन पर पड़ी हुई थी रेखा !कैसे दिखे विमल नभ अम्बरआशाओं की ओट पड़ी हो,कैसे कल-कल निर्मल सरिता भेदभाव की भीत गड़ी हो !दुराग्रहों के मोटे पर्दे नयनों को करते हों धूमिल,नीला अम्बर सद... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   5:46am 21 Sep 2020 #जग
Blogger: Anita nihalani
 पितृ पक्ष में परलोक से बना रहे हमारा संपर्क स्मरण यह पितृ श्राद्ध कराते हैं, हमारे अस्तित्त्व में जिन पूर्वजों का है योगदान जिस वंश परंपरा के हैं हम वाहक जगे कृतज्ञता की भावना उनके प्रति यह याद भी दिलाते हैं !बने रहें सत्य के पथ पर होते रहें दान-पुण्य भर भर भक्ति, ध्य... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   10:00am 16 Sep 2020 #पूर्वज
Blogger: Anita nihalani
जरा जाग कर देखा खुद को  स्वप्न खो गए जब नींदों से चढ़ा प्रीत का रंग गुलाल, दौड़ व्यर्थ की मिटी जगत में झरा हृदय से विषाद, मलाल ! द्रष्टा  बन मन जगत निहारे बना कृष्ण का योगी,अर्जुन,कर्ता का जब बोझ उताराकृत्य नहीं अब बनते बन्धन ! श्वास चल रही रक्त विचरता तन अपनी ही धुन में रमत... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   5:41am 9 Sep 2020 #कृष्ण
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