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Blog: मन पाए विश्राम जहाँ

Blogger: Anita nihalani
 गाकर कोई गीत मुक्ति का मन नि:शंक हो, ठहरे जल सा जब इक दर्पण बन जाए,झांके कहीं से आ कोईनिज प्रतिबिम्ब दिखा जाए !मन उदार हो, जलते रवि सा जब इक दाता बन जाए,  हर ले सारी उलझन कोईनिज मुदिता से भर जाए !मन बहता हो,निर्मल जल सा जब इक निर्झर बन जाए,  आकर कोई सारे जग की शीतलता फिर भर जा... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   5:13am 9 Sep 2021 #बंधन
Blogger: Anita nihalani
प्रेम उस के घर से आया बन उजाला, चाँदनी भी इस धरा की और धायावृक्ष हँसते कुसुम बरसाकभी देते सघन छाया नीर बन बरसे गगन से  लहर में गति बन समायातृषित उर की प्यास बुझती सरस जीवन लहलहाया खिलखिलाती नदी बहती प्रेम उसकी खबर लाया मीत बनते प्रीत सजती गोद में शिशु मुस्कुराया  ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   4:23am 7 Sep 2021 #नदी
Blogger: Anita nihalani
नींद हर रात हम अपने घर जाते हैं अनजाने ही और भोर में पोषित होकर लौटते हैं जाहिर है घर पर कोई है यदि रात सो न सका कोईतो वह घर का पता ही भूल गया है या भटक गया है आधी रात को अथवा घर से दूर निकल गया है जाना चाहता है पर कोई वाहन नहीं मिलता भय और थकान भी उसे घेर लेते हैं नींद न आन... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   9:35am 4 Sep 2021 #नींद
Blogger: Anita nihalani
देह दीप में तेल हृदय यहज्योति पुष्प उर के उपवन में खिला सदा है उसे निहारें,सुख का सागर भीतर बहता सदा रहा है उसे पुकारें !नयनों में उसी का उजाला अंतर में विश्वास बना है, वही चलाता दिल की धड़कन रग-रग में उल्लास घना है !ज्योति वह दामिनी बन चमके सूर्य चंद्रमा में भी दमके, उस... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   5:50am 2 Sep 2021 #तेल
Blogger: Anita nihalani
मौन प्रकाश कहा नहीं जाता अंधकार की कहे कौन ?असीम शब्दों में नहीं समाता अच्छा है रहें मौन  मुखर जब मौन होगा सुवास बन खुद बहेगा चकित हुआ मन जहाँ मधु रस में पगेगा समर्पण हो समर्पित उर उन्हीं चरणों पे ऐसे धूलि जिनकी करे पावन बन सके फिर मन यह दर्पण  झलक जाए जग यह सारा पर छ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   9:44am 6 Aug 2021 #प्रकाश
Blogger: Anita nihalani
टूटी अंतर की हर कारा जिस क्षण तजा प्रमाद मनस ने एक उमंग सहज भर जाती, कुछ पाने की मिटी चाह जब हर दुविधा भी संग मर जाती !लोभ-लाभ की भाषा भूली प्रतिद्वंद, स्पर्धा भी छूटे, चित्त उदार बनेगा, उस क्षण आनंद घट हृदय में फूटे !कंपित था भयभीत हुआ मन खो जाए ना प्रेम किसी क्षण, अभय मिल... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   4:56am 1 Aug 2021 #भय
Blogger: Anita nihalani
प्रकृति के कुछ रंग अपने–अपने घरों में कैदखुद से बतियातेअपने इर्दगिर्द ब्रह्मांड रचने वाले लोगक्या जानें कि नदी क्यों बहती हैदूर बीहड़ रास्तों से आठंडे पानी को अपने अंक में समेटेतटों को भिगोती, धरा को ठंडकपहुंचाती चली जाती हैक्यों सूरज बालू को सतरंगी बनातानदी की गो... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   10:34am 18 Jun 2021 #नदी
Blogger: Anita nihalani
मंजिल या मझधार हम पहुँच ही जाते हैं किनारे पर कि कोई लहर बहा ले जाती है संग अपने और डूबने लगते हैं फिर मझधार में न जाने कितनी बार यह इतिहास दोहराया गया है मंजिल जिसे समझ बैठे थे हर बार वह रास्ता ही पाया गया है जब अनंत है वह तो मंजिल बन भी नहीं सकता अनंत ही होंगे उसके ठिक... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   5:19am 13 Jun 2021 #कमल
Blogger: Anita nihalani
अम्बर नीला का नीला है माना दुःख भारी है जग में उर आनंद अनंत छुपा है, कितने भी तूफां उठते हों अंतर हर तूफ़ां से बड़ा है !मृत्यु हजारों रूप धरे पर जीवन पल-पल प्रकट रहा है, क्या बिगाड़ पाएगी उसका जो स्वयं मरकर पुनः जगा है !बादल चाहे घटाटोप हों अम्बर नीला का नीला है, महल दुमहल धर... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   4:54am 5 Jun 2021 #बदल
Blogger: Anita nihalani
मधुर याद बनकर रह जाते महाशून्य में जो खो जाते मधुर याद बनकर रह जाते !जीवन रण में विजयी हो भी हो आहत जो बाट जोहते, कालदेव अंतिम पीड़ा हर हर बंधन से मुक्ति दिलाते !छोड़ जगत यह वापस जाते मधुर याद बनकर रह जाते !जग मेले में आकर मिलते सँग-सँग खुशियां सोग बांटते, इक दूजे का स्नेह प... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   5:55am 19 May 2021 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
जीवन तो है इक क्रीड़ांगनजीवन जो उपहार मिला था उसे व्यर्थ ही बोझ बनाया,घड़ी देखकर जगते-सोते रिश्तों को भी सोच बनाया ! तन-मन जैसे यंत्र बन गए  अब स्वत:स्फूर्त कहाँ है घटता,  वही सवाल, जवाब भी वही गुम हो गयी उर की सरसता !नहीं शेष सुवास साँसों मेंजब भी वे लघु होती जातीं, जितना ब... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   5:31am 18 May 2021 #जीवन
Blogger: Anita nihalani
घड़ी विचित्र यह दौर अनोखाजूझ रहा है देश आजकल जिस विपदा से वह है भारी,तुच्छ हुई है सम्मुख उसके जो कुछ भी की थी तैयारी !हैं प्रकृति के नियम अनजाने मानव जान, जान न जाने, घड़ी विचित्र यह दौर अनोखा कभी न पहले ऐसा देखा !कोटि-कोटि जन होते पीड़ित उतनी हम सांत्वना बहायें,भय आशंका के ... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   5:46am 30 Apr 2021 #पृथ्वी
Blogger: Anita nihalani
ज्यों धूप और पानी दिल में लरजता जो है  रग-रग में कम्प भरता,  वह भिगो रहा अहर्निश जो लौ को ओट देता !सम्भालता सदा है पल भर न साथ छोड़े, वह जिंदगी का मानीधड़कन वही है तन में !बरसता वही हर सूंवह चाँद बन चमकता, गर ढूंढना उसे चाहें कोई पता ना देता !ऐसे वह बंट रहा है ज्यों धूप और पानी,... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   5:38am 19 Apr 2021 #दिल
Blogger: Anita nihalani
यह विश्वास रहे अंतर मेंशायद एक परीक्षा है यहजो भी होगा लायक इसके, उसको ही तो देनी होगी शायद एक समीक्षा है यह ! जीवन के सुख-दुखका पलड़ा सदा डोलता थिर कब रहता, क्या समता को प्राप्त हुआ हैशेष रही अपेक्षा है यह !तन दुर्बल हो मन भी अस्थिर किन्तु साक्षी भीतर बैठा, शायद यही पूछन... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   9:42am 15 Apr 2021 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
वह मन को ख्वाब दे खोया हुआ सा लगता  खोया नहीं है जो, जिसे पाने की तमन्ना पाया हुआ है वो ! वही श्वास बना तन में जीवन को आंच दे,वही दौड़ता लहू संग  वह मन को ख्वाब दे ! जो अभी-अभी यहीं था फिर ढक लिया किसी ने, जैसे छुप गयी किरण हो बदलियों के पीछे !उसे ढूंढने न जाना जरा थमे रहना  धी... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   5:18am 14 Apr 2021 #दिल
Blogger: Anita nihalani
वर्षा थमी पंछी छोड़ नीड़ निज चहकें मेह थमा निकले सब घर से, सूर्य छिपा जो देख घटाएँ चमक रहा पुनः चमचम नभ में !जगह जगह छोटे चहबच्चे फुद्कें पंछी छपकें बच्चे, गहराई हरीतिमा भू की शीतलतर पवन के झोंके !पल भर पहले जो था काला नभ कैसा नीला हो आया, धुला-धुला सब स्वच्छ नहा कर  कुदरत ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   10:00am 5 Apr 2021 #बादल
Blogger: Anita nihalani
अमृत स्रोत सीएक दिन नहीं वर्ष के सारे दिन हमारे हैं,हर घड़ी, हर पल-छिन हमने जगत पर वारे हैं !माँ सी ममता छिपी नन्ही बालिका में जन्मते ही बहना के दुलार का मूर्त रूप है नारी सारे जहान से अनायास ही नाता बना लेती चाँद-सूरज को  बनाकर भाईपवन सहेली संग तिरती  !हो बालिका या वृद्धा... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   5:48am 8 Mar 2021 #बहना
Blogger: Anita nihalani
आने वाला है महिला दिवस मात्र नारी शक्ति का प्रतीक नहीं है बल्कि  याद दिलाता है यह दिवस कि अभी भी हो रहे हैं उनपर अत्याचार इक्कसवीं सदी में भी हो रहा है आए दिन ही उनके साथ दुर्व्यवहार अखबार के पन्नों पर तो कुछ ही खबरें आ पाती हैं मगर उन खबरों की हकीकत भीतर तक डरा जाती है ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   10:29am 4 Mar 2021 #नारी
Blogger: Anita nihalani
मन सुमन बना खिलना चाहे इस पल में कल को ले आना बीती बात को दोहराना दिलों की पुरानी आदत है !जीवन प्रतिक्षण कुछ और बने रहो गतिशील बस यही कहे मुड़ देखे, मन की चाहत है !हर घटना कुछ दे मुक्त हुई वह घड़ी स्वयं में  रिक्त हुई    जा टिकना मिथ्या राहत है ! नव जीवन में जगना चाहे मन सुमन ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   5:28am 3 Mar 2021 #मन
Blogger: Anita nihalani
दूजा  निज आनंद में डूबापंछी दो हैं एक बसेरा एक उड़े दूसरा चितेरा, निज प्रतिबिम्ब से चोंच लड़ाताकभी जाल में भी फंस जाता !कड़वे मीठे फल भी खाये बार-बार खाकर पछताए,इस डाली से उस शाखा पर व्यर्थ ही खुद को रहा थकाए !कुछ पाने की होड़ में रहता क्षण-क्षण जोड़-तोड़ में रहता, कभी तके दूजे ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   5:30am 22 Feb 2021 #पंछी
Blogger: Anita nihalani
जो बरसती है अकारण छू रहा है मखमली सा परस कोई इक अनूठा, बह रहा ज्यों इक समुन्दर आए नजर बस छोर ना !काँपते से गात के कण लगन सिहरन भर रही हो, कोई सरिता स्वर्ग से ज्यों हौले-हौले झर रही हो  !एक मदहोशी है ऐसी होश में जो ले के आती, नाम उसका कौन जाने कौन जो करुणा बहाती !बह रही वह पुण्... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   3:31am 20 Feb 2021 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
उसे बहने दोवह बहना चाहता है निर्विरोध निर्विकल्प हमारे माध्यम से प्रेम और आनंद बन पाहन बन यदि रोका उसका मार्ग तो वही बहेगा रोष और विषाद बनकर !वह हजार-हजार ढंग से प्रकट होता है यदि राम बनने की सम्भावना न दिखे तो रावण बन सकता है वह उस ऊर्जावान नदी की तरह है जिसे मार्ग न ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   5:06am 15 Feb 2021 #ज्ञान
Blogger: Anita nihalani
शरण गए बिन बात न बनती अंधकार मन का जो हरता ज्ञान मोतियों से उर भरता उसकी महिमा कही न जाती गुरुद्वार पर भीड़ उमड़ती शरण गए बिन बात न बनती शरण गए बिन बात न बनती !हर पीड़ा का कारण जाने भीतर बाहर वह पहचाने परम सत्य तक खुद ले जाता उसके निकट अभय मन पाता आँखों से शुभ कृपा झलकती शर... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   5:26am 10 Feb 2021 #पीड़ा
Blogger: Anita nihalani
नाविक भी हो मीत पुरानासुख का सागर सभी चाहते दुःख के ग्राह वहीं रहते हैं,नैया एक अगर पा जाएँ उस तट पहुँचें यह कहते हैं !हो नाव में सुराख़ न कोई नाविक भी हो मीत पुराना,लहरों पर उठते-गिरते ही कट जायेगा सफर सुहाना !देह ही तरणि मन है नाविक अब सब जांच परख लें ऐसे, मिले प्रकृति से ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   8:48am 8 Feb 2021 #नाविक
Blogger: Anita nihalani
जाने कैसी लीला अद्भुत  भोली सी मुस्कान ओढ़कर सेल्फी तो इक ले डाली,पर दीवाने दिल से पूछा है क्या वह अपने से राजी !जिसने देखे स्वप्न सलोने या जो ख्वाबों में रोया था, उस छलिया से कुछ तो पूछो कब वह चैन से सोया था !‘उसको’ तो बस तकना आता टुकुर-टुकुर देखा करता है, मन बेचारा किसकी ... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   9:32am 5 Feb 2021 #दिल
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