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मन पाए विश्राम जहाँ

घाटियाँ जब खिलखिलायीं बह रही थी नदी उर की बने पत्थर हम अड़े थे, सामने ही था समुन्दर नजर फेरे ही खड़े थे ! गा रहा था जब कन्हैया बांसुरी की धुन सुनी ना, घाटियाँ जब खिलखिलायीं राह भी उनकी चुनी ना ! भीगता था जब चमन यह बंद कमरों में छिपे थे, चाँद पूनो का बुलाता नयन स्वप्न...
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Tag :चमन
  December 14, 2018, 9:10 am
रास्ते में फूल भी थे  कंटकों से बच निकलने में लगा दी शक्ति सारी, रास्ते में फूल भी थे बात यह दिल से भुला दी ! उलझनें जब घेरती थीं सुलझ जायें प्रार्थना की, किन्तु खुद ही तो रखा था चाहतों का बोझ भारी ! नींद सुख की जब मिली थी स्वप्न नयनों में भरे खुद, मंजिलें जब पास ही...
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Tag :फूल
  December 11, 2018, 4:26 pm
अपने जैसा मीत खोजता ओस कणों से प्यास बुझाते, जगती के दीवाने देखे, चकाचौंध पर मिटने वाले बस नादां परवाने देखे ! जो है, वही उन्हें होना है अपने जैसा मीत खोजते, घर है, वहीं उन्हें बसना है वीरानों में रहे भटकते ! बदल रहा है पल-पल जीवन जिसमें थिरता कभी न मिलती, बांट रहा है क...
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Tag :निर्मल
  December 7, 2018, 4:39 pm
स्वर्ण रश्मियों सा छू लेता माँ शिशु को आँचल में छुपाती आपद मुक्त बनाती राहें, या समर्थ हथेलियाँ पिता की थामें उसकी नन्हीं बाहें ! वैसे ही सिमटाये अपने आश्रय में कोई अनजाना, उस अपने को, जिसने उसकी चाहत को ही निज सुख माना !  अपनाते ही उसको पल में  बंध जाती है अविरत ड...
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Tag :चाहत
  November 27, 2018, 12:21 pm
बचपन लौटा था उस पल में बचपन को ढूँढा यादों में बाल दिवस पर नगमे गाये, मन के गलियारों में कितने साथी-संगी खड़े दिखाए ! रोते हुए किसी बच्चे के पोँछे आँसू और हँसाया, नन्ही सी ऊँगली इक थामी दूर गगन में चाँद दिखाया ! बचपन लौटा था उस पल में भीतर कोई खेल रहा था, बाहर मुस्कात...
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Tag :बाल दिवस
  November 15, 2018, 12:14 pm
जगमग दीप दीवाली के कुछ कह जाते  कुछ दे जाते सरस पावनी ज्योति बहाते जगमग दीप दीवाली के ! संदेसा गर कोई सुन ले कही-अनकही भाषा पढ़ ले शीतल मधुरिम  अजिर उजाला कोने-कोने में भर जाते जगमग दीप दीवाली के ! पंक्ति बद्ध सचेत प्रहरी से तिमिर अमावस का हर लेते खुद मिट कर...
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Tag :दीप
  October 30, 2018, 4:32 pm
मन माटी से जैसे कोई ऊँचे पर्वत, गहरी खाई दोनों साथ-साथ रहते हैं, कल-कल नदिया झर-झर झरने दोनों संग-साथ बहते हैं ! नीरव जंगल, रौरव बादल दोनों में ना अनबन कोई, शिव का तांडव, लास्य पार्वती दोनों में ही प्रीत समोई ! गीत प्रीत के, सहज जीत के चलो आज मिल कर गाते हैं,  नित्य रच...
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Tag :जंगल
  October 29, 2018, 3:09 pm
रौशनी थी हर कहीं कुछ कहा हमने नहीं सुन लिया उसने कहीं, तार कोई थी जुड़ी देख जग पाता नहीं ! एक तितली पास आ इक सँदेसा दे गयी, एक बदली सूर्य से उतार ओढ़नी गयी ! डालियाँ सजने लगीं दूब में भी आभ थी, कोहरे बहने लगे रौशनी थी हर कहीं ! सरल मुद्रा में मनस गोपियों सी सादगी, उतर...
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Tag :दूब
  October 16, 2018, 3:57 pm
तुम ही हो नव भक्ति स्वरूपा नाम हजारों जग जननी के है अनंत शुभ शक्ति स्वरूपा, दया रूपिणी ! उर अंतर में तुम ही हो नव भक्ति स्वरूपा ! सारा जग तुमसे प्रेरित हो गतिमय निशदिन स्पंदित होता, तुम्हीं सृष्टि जन्माती हो माँ तुमसे जग विस्तार पा रहा ! अष्ट भुजाओं वाली देवी समृद...
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Tag :दुर्गा
  October 14, 2018, 12:39 pm
निज सुनहरी भाग्य रेखा स्वप्न देखा, उसी पल में खींच डाली निज सुनहरी भाग्य रेखा ! एक अनुपम स्वप्न सुंदर जागते चक्षु से मनहर कांपते थे प्राण भीतर ! ख़ुशी के पीछे छिपी थी एक शायद भीति रेखा स्वप्न देखा ! हम करें साकार सपने दाम उसका अक्स अपने  वैश्य है कितना अनोखा ! ह...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  October 8, 2018, 8:44 am
खुद न जाने जागता मन स्वप्न रातों को बुने मन नींद में कलियाँ चुने मन, क्या छिपाए गर्भ में निज खुद न जाने जागता मन ! कौन सा वह लोक जिसमें कल्पना के नगर रचता, कभी गहरी सी गुहा में एक समाधि में ठहरता ! छोड़ देता जब सुलगना इस-उसकी श्लाघा लेना, खोल कर खिड़की के पाट आसमा को ...
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Tag :नींद
  October 4, 2018, 2:58 pm
इन्द्रधनुष सा ही जग सारा एक दिवस, दिन की गुल्लक से कुछ अद्भुत पल चुरा लिए थे, ऋतु सुहावनी थी बसंत की मदमाती सुरभित हवा लिए ! पर्वत के ऊँचे शिखरों पर हिम के स्वर्णिम फूल खिले थे, देवदार के तरुओं पर भी आभामय कुछ छंद लिखे थे ! स्फााटिक मणि सी निर्मल शीतल जल धारा इक बहती ...
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Tag :काल
  September 29, 2018, 12:24 pm
उर से ऐसे ही बहे छंद मुक्त गगन है मुक्त पवन है मुक्त फिजायें गीत सुनातीं, मुक्त रहे मन चाह यही तो कदम-कदम पर है उलझाती ! सदा मुक्त जो कैद देह में  चाहों की जंजीरें बाँधी, नयन खुले से लगते भर हैं कहाँ नींद से नजरें जागी ! भावों की हाला पी पीकर होश गँवाए ठोकर खायी, व्य...
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Tag :नयन
  September 27, 2018, 11:36 am
अंतर्प्रवाह बहते हैं विचार... किसी सागर की तरह सागर.. जो बहता है लहरों में या भाप बनकर, जब वह आकाश में उठ जाता है संग हवाओं के ! जीवन भी बहता है घटनाओं में या फिर प्रेम भरी भावनाओं में जब मन ऊपर उठ जाता है..  यह तर्क है निरा... या आत्मा की आवाज कौन जानता है ? शब्द आते हैं ...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  September 19, 2018, 9:52 am
तलाश  जाने किसकी प्रतीक्षा में सोते नहीं नयन जाने किस घड़ी की आस में जिए चले जाता है जीवन शायद वह स्वयं ही प्यास बनकर भीतर प्रकटा है अपनी ही चाहत में कोई प्राण अटका है सब होकर भी जब कुछ भी नहीं पास अपने नहीं लुभाते अब परियों के भी सपने इस जगत का सारा मायाजाल देख लिया...
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Tag :तलाश
  September 16, 2018, 1:14 pm
जलधाराओं का संगीत  नभ से गिरती हुई जल धाराएँ जिनमें छुपा है एक संगीत जाने किस लोक से आती हैं धरा को तृप्त कर माटी को कोख से नव अंकुर जगाती हैं सुंदर लगती हैं नन्ही-नन्ही बूँदें धरती पर बहती हुई छोटी छोटी नदियाँ जो वर्षा रुकते ही हो जाती हैं विलीन गगन में उठा घनों क...
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Tag :तन
  September 10, 2018, 2:57 pm
जीवन अमृत बहा जा रहा कितनी बार चुभे हैं कंटक कितनी बार स्वप्न टूटे हैं, फिर-फिर राग लगाता यह दिल कितने संग-साथ छूटे हैं ! सुख की फसल लगाने जाते किन्तु उगे हैं दुःख ही उसमें, धन के भी अम्बार लगे हों भीतर का अभाव ही झलके ! ऊपर चढ़ने की खातिर जब कर उपेक्षा छोड़ा होगा, ल...
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Tag :पुष्प
  September 7, 2018, 3:10 pm
ऐसा दीवाना है कान्हा  आँसू बनकर जो बहता है  मौन रहे पर कुछ कहता है,  किसी नाम से उसे पुकारो उपालम्भ जो सब सहता है !    हो अनजाना कोई उससे  तब भी वह रग-रग पहचाने,  इक दिन तो पथ पर आएगा  कब तक कोई करे बहाने!  जब तक उसकी ओर न देखो  नेह सँदेसे भेजा करता,  कभी हँसा कर कभी रुलाकर  ...
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Tag :कान्हा
  September 3, 2018, 12:57 pm
कृष्ण जन्म  यह तन कारागार है अहंकार है कंस पञ्च इन्द्रियाँ संतरी भीतर बंदी हंस ! बुद्धि हमारी देवकी मन-अंतर वसुदेव इन दोनों का मिलन बना आनंद का गेह ! प्रहरी सब सो गए इन्द्रियाँ हुईं उपराम हृदय बुद्धि में खो गया भीतर प्रकटे श्याम ! अविरति है कालिंदी पार है गोकुल धाम ...
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Tag :कृष्ण
  September 2, 2018, 2:08 pm
 यह बंधन तो प्रेम का बंधन है  बचपन से किशोर फिर युवा होते तन फिर भी रहे वही बच्चों वाले प्यारे से मन उन्हीं मासूम मनों के बंधन में बंधे हो तुम दोनों एक-दूसरे का सम्बल बनकर देखभाल और परख कर खूबियाँ और कमियां सहकर छोटी-बड़ी कमजोरियां संग-संग चलने का निर्णय है तुम्हा...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  August 31, 2018, 8:46 am
सपनीला मन शब्दों का एक जखीरा बहा चला आता है जाने कहाँ से... शब्द जो ठोस नहीं हैं कितने वायवीय पर कितने शक्तिशाली देह दिखती है मन नहीं दिखता विचार जो नहीं दिखता आज कल देह धरेगा सूक्ष्म से स्थूल की यात्रा चलती रहेगी... देह के बिना भी हम हैं शब्द क्या ये नहीं बताते ...
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Tag :मन
  August 25, 2018, 3:15 pm
पाया परस जब नेह का तेरे बिना कुछ भी नहीं तेरे सिवा कुछ भी नहीं, तू ही खिला तू ही झरा तू बन बहा नदिया कहीं ! तू लहर तू ही समुन्दर हर बूंद में समाया भी, सुर नाद बनकर गूँजता गान तू अक्षर अजर भी ! है प्रीत करुणा भावना सपना बना तू भोर में, छू पलक तू ही जगाता सुख सम भरा हर पोर म...
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Tag :जीवन
  August 23, 2018, 1:35 pm
पुनः पुनः मिलन घटता है निकट आ सके कोई प्रियतम तभी दूर जाकर बसता है ! श्वास दूर जा नासापुट से अगले पल आकर मिलती है, आज झरी मृत हो जो कलिका पुनः रूप नया धर खिलती है ! बार–बार घट व्याकुल होकर पाहुन का रस्ता तकता है, उस प्रियजन का निशिवासर जो नयनों में छुपकर हँसता है ! ...
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Tag :मन पाए विश्राम जहाँ
  August 20, 2018, 3:03 pm
 भारत रत्न अटल जी बड़े दिवस पर जन्म लिया था अति विशाल कवि मानस पाया,  अंतर समर्पित राष्ट्र हित हो जूझ आंधियों में मुस्काया ! तेरह मास, पांच वर्षों  का सफर बड़ा ही कठिन गुजारा, किन्तु नहीं आया फिर से वह गौरवशाली समय दुबारा ! जनसंघ के संस्थापक बने बीजेपी को भी जन्म दि...
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Tag :कवि
  August 17, 2018, 10:27 am
तिरंगा नीलगगन में लहराते तिरंगे को देख याद आते हैं वे अनाम चेहरे इतिहास में जिनका कोई वर्णन नहीं इस अमर स्वतन्त्रता के वाहक जो बने ! आज आजाद हैं हम खुली हवा में श्वास लेने,  दिल का हाल कहने सुनने को ! चैन की नींद सो सकते हैं उगा सकते हैं धरा में अपनी पसंद की फसलें भ...
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Tag :कृष्ण
  August 14, 2018, 4:13 pm
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