POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: मन पाए विश्राम जहाँ

Blogger: Anita nihalani
जन्मदिन की कविता  हे अनाम ! तुझे प्रणाम  जाने किस युग में आरम्भ हुई होगी यह यात्रा  या अनादि है यह भी तेरी तरह  कभी पत्थर, पौधा, जलचर, नभचर या थलचर बनते-बनते   मिला होगा अन्ततः यह मानव तन  फिर इस तन की यात्रा में भी  कभी राजा, कभी रंक  कभी स्त्री कभी पुरुष  कभी अशिक्षित ... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   5:37am 30 May 2020 #अहंकार
Blogger: Anita nihalani
चाह -अचाह  ‘वह’ क्या चाहता है  ‘वह’ चाहता भी है क्या ? जब तक चाह शेष है भीतर  तब तक ‘वह’ है नहीं  ‘वह’ सन्तुष्ट है अपने होने मात्र से  जैसे कोई फूल क्या चाहता है  वह बस होता है  शेष सब घटता है उसके आसपास  न भी घटे तो होता नहीं उसकी तरफ से  थोड़ा सा भी प्रयास  लोग ठिठकते हैं ... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   10:34am 29 May 2020 #तितली
Blogger: Anita nihalani
‘तू’ ‘मैं’ होकर ही खिलता है  ‘मैं’ ‘तू’ होकर ही मिलता है  ‘तू’ ‘मैं’ होकर ही खिलता है,  मन अंतर में यह खेल चले  बाहर इक कण ना हिलता है ! जो विभु अतीव वह क्षुद्र बना  सागर से ही हर लहर उठी,   मायापति वरत योगमाया  यह मन माया से रचता है ! जब तक यह भेद नहीं जाना  मैं''खुद को ही ... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   10:28am 22 May 2020 #मन
Blogger: Anita nihalani
सत्य क्या है  देह या आत्मा जगत या परमात्मा दुःख या सुख दोनों या दोनों के परे ? देह टिकती नहीं, है जगत निरंतर गतिमान, दुःख नहीं भाता  आत्मा है शाश्वत, परमात्मा अटल, सुख सदा लुभाता   जो है सदा, ध्रुव, और प्रिय  हाँ, वह हो सकता है सत्य ! पर... यदि देह न हो तो आत्मा का ज्ञान नह... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   6:04am 20 May 2020 #जगत
Blogger: Anita nihalani
आदि - अंत  आदि में 'एक'ही था  'एक'के सिवा दूसरा नहीं था  फिर विभक्त किया उसने स्वयं को 'दो'में  एक वामा कहलायी, बांये अंग में बैठने वाली  दूसरा अथक श्रम से सृष्टि का संधान करने वाला  दोनों में कोई छोटा-बड़ा न था  एक प्रेम की मधुर रस धार थी  एक घर बनाकर प्रतीक्षा करती  दूसरा ... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   5:59am 18 May 2020 #काल
Blogger: Anita nihalani
जितना दिया है अस्तित्त्व ने हमें  जितना दिया है अस्तित्त्व ने  कहाँ करते हैं हम उतने का ही उपयोग  ‘और चाहिए’ की धुन में व्यस्त रहता मन  देख ही नहीं पाता पूर्व का योग ! धारते आये हैं जिन्हें  उन शक्तियों को पहचानते नहीं    जिनका अनंत स्रोत  भर दिया अस्तित्त्व ने  उन... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   10:08am 15 May 2020 #अस्तित्त्व
Blogger: Anita nihalani
स्वप्न   स्वप्न टूटा, नींद टूटी, कर्म छूटे  स्वप्न जारी, नींद प्यारी, कर्म बंधन  स्वप्न में ही किले बनते और ढहते  स्वप्न में ही लोग हँसते और रोते भय के बादल खूब बन-बन कर बरसते  कामनाओं के समंदर बहा करते  डूबते जिनमें कभी भँवरों में फँसते  पत्थरों से कभी टकरा चूर होते क... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   6:37am 11 May 2020 #नींद
Blogger: Anita nihalani
भोर में  जब कूकती है कोकिल अमराई में  तो मन का कमल खिलने लगता है,  शीतल मन्द पवन की छुअन  सहला जाती है हौले से  हाँ, शायद उस स्पर्श  के द्वारा  वही कोई सन्देश भेजता है !  दूर नारंगी रग का वृत्त  जब रंग  रहा होता है   क्षितिज को  तो मन के सागर में   मानो नृत्य कर रही हों  ल... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   10:36am 8 May 2020 #धूप
Blogger: Anita nihalani
अप्प दीपो भव  तुम वही हो ! बुद्ध के अमोघ शब्द हैं ये  हमें मानने का जी चाहता है  वही दीप, वही प्रकाश  जो शाश्वत है, आनंद से भर देता है मुक्त और अभय कर... ले जाता है, देह की सीमाओं से परे ! नाता मन से भी टूट जाता है  तुम साक्षी बन जाते हो दोनों के  बुद्ध कहते ही अनंत का स्मरण हो... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   6:27am 7 May 2020 #प्रकाश
Blogger: Anita nihalani
लॉक डाउन में ढील ग्रीन, रेड और ऑरेंज जोंस में  अब  बंट गए हैं लोग  लगता है, विभाजन ही मानव की नियति है  ग्रीन में आजादी अधिक है  जिंदगी पूर्ववत होने का आभास दे रही है  अति उत्साह में लोग भूल जाते हैं  चेहरे पर मास्क लगाना  और दो गज की दूरी बनाये रखना  वे इस तरह बाहर निकल ... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   5:59am 6 May 2020 #ध्यान
Blogger: Anita nihalani
जब राज खुलेगा इक दिन यह  जो द्रष्टा है वह दृश्य बना  स्वप्नों में भेद यही खुलता, अंतर बंट जाय टुकड़ों में  फिर अनगिन रूप गढ़ा करता ! सुख स्वप्न रचे, हो आनन्दित  दुःख में खुद नर्क बना डाले, कभी मुक्त मगन उड़ा नभ में  कभी गह्वर, खाई व नाले ! जो डरता है, खुद को माना जो डरा रहे, ... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   6:03am 21 Mar 2020 #दृश्य
Blogger: Anita nihalani
कोरे कागज सा जो मन था  जब अनजान बना फिरता था  तब तेरे दीवाने थे हम,   जब से आना-जाना हुआ है  बेगाना सा क्यों लगता है !   रीत प्रीत की अजब निराली  सदा अधूरी चाहें दिल की,  जाने किसकी नजर लगी है  रस्ता धूमिल सा लगता है !   कोरे कागज सा जो मन था  अति उज्ज्वल शिखर हिमालय का,  मट... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   5:31am 19 Mar 2020 #अनजान
Blogger: Anita nihalani
कोरोना ने दी दस्तक  हर दर्द कुछ सिखाता है  सोते को जगाता है, अंतहीन मांगों पर  अंकुश भी लगाता है ! कोरोना ने दी दस्तक  घूँट कड़वे पिलाता है, अति सूक्ष्म दुश्मन यह  नजर नहीं आता है ! कोशिकाओं में जाकर  निज व्यूह रचाता है,  फेफड़ों को दुर्बल कर  रोगी को सताता है ! प्रकृति ... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   5:34am 17 Mar 2020 #दर्द
Blogger: Anita nihalani
देना  बादल बनकर बरसें नभ से  यह तो हो नहीं सकता  क्यों न उड़ा दें सारी वाष्प मन से  वाष्प जो कर देती है असहज  नहीं आता रवि किरणों सा  फूलों को खिलाना  तो क्या हुआ  प्रेम की ऊष्मा से सुखा दें अश्रु किसी के  जब देने का ही ठान लिया है  तो दे डालें स्वयं को पूरी तरह  नहीं रखें... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   5:54am 16 Mar 2020 #प्रेम
Blogger: Anita nihalani
राह देखे कोई भीतर प्रेम भीतर पल रहा है व्यर्थ ही मन उहापोह में, लगा रहकर रातदिन यूँ स्वयं को ही छल रहा है ! झाँक लेते आँख में भी शब्द को ही सत्य माना, डबडबाते आँसुओं में कोई बीता पल रहा है ! दौड़ मन की थमे जब तक कोई भीतर राह देखे, हो पहेली या.. सवाल पास उसके हल रहा है ! प्रेम ... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   10:55am 9 Mar 2020 #फुहार
Blogger: Anita nihalani
होली रंग भरे जीवन में जिसने  हर इक पल उसकी होली है,  संशय सभी जला डाले फिर हर करवट हँसी ठिठोली है ! मन मतवाला भूल भी जाय  कुदरत ले निकली टोली है,  रंगों की भाषा जो जाने  हर कदम जहाँ रंगोली है ! नीला अम्बर, रवि नारंगी  मेघ सलेटी, पंछी श्वेत, हरी घास पर पीली मैना  रक्तिम पु... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   7:36am 9 Mar 2020 #उर
Blogger: Anita nihalani
चाह-अचाह हर चाह रिझाती है पहले  फिर वही भगाती है  मन-सागर में लहरों की  एक पंक्ति जगाती है  मन के सूने पनघट पर ही  उसके आने की सम्भावना है  भीड़ में मिलन असंभव है  जब तक अटका है एक तार भी चाहत का  उसकी बांसुरी की धुन अनसुनी रह जाती है  जो बज रही है अहर्निश  उसकी याद में बह... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   9:06am 6 Mar 2020 #चाह
Blogger: Anita nihalani
खुल गए जो बंधन कब के इक यादों की गठरी है इक सपनों का झोला है, जो इन्हें उतार सकेगा उसमें ही सुख डोला है ! जो कृत्य हुए अनजाने या जिनकी छाप पुरानी, कई बार गुजरता अंतर उन गलियों से अक्सर ही ! खुल गए जो बन्धन कब के तज-तज कर पुनः पकड़ता, ढंग यही आता उसको उनमें खुद व्यर्थ जकड़त... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   5:01am 27 Feb 2020 #मन
Blogger: Anita nihalani
सोये हैं हम...  बस जरा सी बात इतनी  सुख की चादर ओढ़ मन पर  खोये हैं हम  सोये हैं हम ! एक सागर रौशनी का  पास ही कुछ दूर बहता  पर तमस का आवरण है  कह इसे कई बार  यूँ ही रोये हैं हम…! नींद में भी जागता मन  फसल स्वप्नों की उगाता  जाने कितने बीज ऐसे  बोये हैं हम ! नींद उसकी जागरण भी  ... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   6:59am 17 Feb 2020 #जागरण
Blogger: Anita nihalani
ढाई आखर जिसने बांचे  ढाई आखर जिसने बाँचे अंतर पिघल-पिघल बह जाये, अधरों पर स्मित नयन मद भरे एक रहस्य मधुर बन जाये ! कदमों में मीरा की थिरकन कानों में कान्हा मुरली धुन, यादें पनघट बनी डोलतीं घटता पी से मिलन प्रतिक्षण ! मानस के उत्तंग शिखर से भावों की इक नदी उतरती कण-कण उ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   6:16am 14 Feb 2020 #भाव
Blogger: Anita nihalani
जाने क्यों फूलों के अंबार जहाँ हम काँटों को चुन लेते, सुंदरता की खान जहाँ कुरूपता हम बुन लेते ! देव जहां आतुर नभ में आशीषों से घर भरने, स्वयं को ही समर्थ मान लगते बाधा से डरने ! भेद जरा जाना होता इस अनंत जग में आकर, किसके बल पर टिका हुआ किसे रिझाते गा गाकर ! सुख की आशा म... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   10:05am 12 Feb 2020 #जग
Blogger: Anita nihalani
एक न एक दिन... जहाँ दो हैं संघर्ष जारी रहेगा जहाँ दो हैं मार-काट नहीं रुकेगी कभी दूसरे की सोच पर मार अभी अन्य के विचार की काट जहाँ दो हैं वहाँ अहंकार टकराएगा एक यदि भीरु होगा दूसरा दबाएगा एक यदि सहिष्णु होगा दूसरा सताएगा जहाँ दो होंगे और समझ होगी वहीं चैन होगा जहाँ दो ह... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   2:34pm 9 Feb 2020 #पहचान
Blogger: Anita nihalani
मेरा भारत महान मत कहें स्वयं को देशभक्त कायर हैं हम अपमान सहकर उदासीन होने की आदत हो गयी है हमें हजार वर्षों की गुलामी ने पंगु बना दिया है हमारी सोच को विदेशी ताकतों ने देश पर ही राज नहीं किया हमारी चेतना पर भी राज किया जो या तो निर्लिप्त है या अनभिज्ञ होने का स्वांग र... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   9:54am 5 Feb 2020 #चेतना
Blogger: Anita nihalani
पारिजात हों उपवन में मानस हंस ध्यान मोती  चुन-चुन कर पुलकित होता,  सुमिरन डोरी में जिसको  अंतर मन निरख पिरोता ! मुस्कानों में छलक उठे  सच्चे मोती की आभा,  जिसने पहचाना सच को   दुनिया में वही सुभागा ! ध्यान बिना अंतर मरुथल  मन पंछी फिरे उदासा, रस की भीनी धार बहे  वह है ... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   10:15am 3 Feb 2020 #अमृत
Blogger: Anita nihalani
उन सभी बच्चों के नाम जिनका आज जन्मदिन है और जो घर से दूर हैं सुख की फसल भीतर खिले है गगन सीमा तुम्हारी  उसके पहले मत थमो,  बिखरी हुईं मन रश्मियां इक पुंज अग्नि का बनो ! जब नयन खोले यहाँ थे अज्ञात थी सारी व्यथा, कुछ खा लिया फिर सो गए  इतनी ही थी जीवन कथा ! फिर भेद मेधा ... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   5:10am 2 Feb 2020 #गगन
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:

Members Login

    Forget Password? Click here!
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3954) कुल पोस्ट (193541)