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मन पाए विश्राम जहाँ

फूल ढूँढने निकला खुशबू पानी मथे जाता संसार बाहर ढूँढ रहा है प्यार, फूल ढूँढने निकला खुशबू मानव ढूँढे जग में सार ! लगे यहाँ  राजा भी भिक्षुक नेता मत के पीछे चलता, सबने गाड़े अपने खेमे बंदर बाँट खेल है चलता ! सही गलत का भेद खो रहा लक्ष्मण रेखा मिटी कभी की. मूल्यों की फ़िक...
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Tag :प्यार
  August 16, 2017, 5:55 pm
कान्हा तेरे नाम हजारों जब नभ पर बादल छाये हों वन से लौट रही गाएँ हों, दूर कहीं वंशी बजती हो  पग में पायलिया सजती हो ! मोर नाचते कुंजों में हों खिले कदम्ब निकुंजों में हों, वह चितचोर हमारे उर को, कहीं चुराए ले जाता है ! कान्हा याद बहुत आता है ! भादों की जब झड़ी लगी थी अं...
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Tag :कृष्णा
  August 14, 2017, 3:01 pm
तिर जाओ पात से सुनो ! तारे गाते हैं फूलों के झुरमुट.. प्रीत गीत गुनगुनाते हैं पल भर को निकट जाओ वृक्षों के कानों में कैसी, धुन भर जाते हैं ! देखो ! गगन तकता है बदलियों का झुंड झूम-झूम कर बरसता है ठिठको जरा सा.. बैठो, हरी घास पर पा परस दिल.. कैसे धड़कता है ! बहो ! कलकल बहती है न...
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Tag :उषा
  August 11, 2017, 3:15 pm
श्रावण की पूनम गगन पर छाए मेघ लगे हरियाली के अंबार बेला और मोगरे की सुगंध से सुवासित हुई हवा आया राखी का त्योहार गाने लगी फिजां ! भाई-बहन के अजस्र निर्मल नेह का अजर स्रोत सावन की जल धाराओं में ही तो नहीं छुपा है ! श्रावण की पूनम के आते ही याद आते हैं रंग-बिरंगे धागे क...
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Tag :गंगा
  August 5, 2017, 10:31 am
हर पगडंडी वहीं जा रही कोई उत्तर दिशा चल रहे दक्षिण दिशा किन्हीं को प्यारी, मंजिल पर मिलना ही होगा हर पगडंडी वहीं जा रही ! भर नयनों में प्रेमिल आँसू जब वे गीत विरह के गाते, बाना ओढ़े समाधान का तत्क्षण दूजे भी जुड़ जाते ! ‘तेरे’ सिवा न कोई दूजा कह कुछ मस्तक नहीं उठाते, ...
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Tag :दक्षिण
  August 3, 2017, 2:02 pm
थम जाता सुन मधुर रागिनी कोमल उर की कोंपल भीतर खिलने को आतुर है प्रतिपल, जब तक खुद को नहीं लुटाया दूर नजर आती है मंजिल ! मनवा पल-पल इत-उत डोले ठहरा आहट पाकर जिसकी, जैसे हिरण कुलाँचे भरता थम जाता सुन मधुर रागिनी ! जिसके आते ही उर प्रांगण देव वाटिका सा खिल जाता, हौले-हौले...
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Tag :प्रेमिल
  July 28, 2017, 3:33 pm
कविता हुंकारना चाहती है छिपी है अंतर के गह्वर में या उड़ रही है नील अंतरिक्ष की ऊँचाईयों में घूमती बियाबान मरुथलों में या डुबकी लगाती है सागर की गहराइयों में तिरती गंगा की शांत धारा संग कभी डोलती बन कावेरी की ऊंची तरंग खोज रही है अपना ठिकाना झांकती नेत्रों में... न...
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Tag :अमन
  July 24, 2017, 3:59 pm
उन अँधेरों से डरें क्यों खो गया है घर में कोई चलो उसे ढूँढ़ते हैं बह रही जो मन की सरिता बांध कोई बाँधते हैं आँधियों की ऊर्जा को पाल में कैसे समेटें  उन हवाओं से ही जाकर राज इसका पूछते हैं इक दिया, कुछ तेल, बाती जब तलक ये पास अपने उन अँधेरों से डरें क्यों खुद जो रस्ता ख...
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Tag :तेल
  July 15, 2017, 10:54 am
गाना होगा अनगाया गीत गंध भी प्रतीक्षा करती है उन नासापुटों की, जो उसे सराहें प्रसाद भी प्रतीक्षा करता है उन हाथों की, जो उसे स्वीकार लें जो मिला उसे बांटना होगा होने को आये जो हो जाना होगा गाना होगा अनगाया गीत लुटाना होगा वह कोष भीतर छुपा    पलकों में बंद ख्वाबों ...
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Tag :ख्वाब
  July 12, 2017, 3:45 pm
मानव और परमात्मा मुक्ति की तलाश करे अथवा ऐश्वर्यों की परमात्मा होना चाहता है मानव या कहें ‘व्यष्टि’ बनना चाहता है ‘समष्टि’ प्रभुता की आकांक्षा छिपी है भीतर पर कृपण है उसका स्नेह जो प्रेम में नहीं बदलता बदल भी गया तो धुंधला-धुंधला है   पावन है यदि प्रेम तो धुआं न...
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Tag :प्रेम
  July 10, 2017, 3:57 pm
गुरू पूर्णिमा के अवसर पर युगों-युगों से राह दिखाते उर-अंतर का तमस मिटाते, ज्योति शिखा सम सदा प्रज्ज्वलित सीमाओं में नहीं समाते ! प्रेम, ज्ञान, सुख पुंज शांति के सुमन खिलाते परा भक्ति के बिना भेद दिल से अपनाया बंधन तोड़कर आसक्ति के ! विश्व बना परिवार तुम्हारा सदा ...
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Tag :जीवन
  July 9, 2017, 11:00 am
जादूगर और माया चला आता उसी तरह दुःख पीछे सुख के जैसे आदमी के पीछे उसकी छाया भर दामन में ख़ुशी बाँटने निकले कोई तो बदल देती है गमों में उसको माया भरें हर्जाना यदि चाहा सुख कण भर भी चुकायें कीमत हर आसक्ति हर मोह की कुछ भी यहाँ मुफ्त नहीं मिलता बिना एक हुए माटी से कोई बी...
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Tag :दुःख
  July 8, 2017, 2:36 pm
यहाँ दो नहीं हैं हर बार जब मैंने तुम्हें चाहा है खुद को ही पसंद किया है हर बार जब तुम्हारी किसी बात को सराहा है अपनी पीठ थपथपाई है हर कोई खुद से प्यार करे तो कितनी हसीन हो जाये यह दुनिया हर बार जब मैं तुम से दूर हुई खुद से ही दूर हुई हूँ हर शिकायत जो मैंने तुमसे की है ...
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Tag :घाव
  July 7, 2017, 1:37 pm
बन जाता वह खुद ही मस्ती  मस्ती की है प्यास सभी को हस्ती की तलाश सभी को मस्ती जो बिछड़े न मिलकर हस्ती जो बोले बढ़चढ़ कर दोनों का पर जोड़ नहीं है इस सवाल का तोड़ नहीं है हस्ती मिटे तो मस्ती मिलती यह सूने अंतर में खिलती हस्ती तो है एक उसी की मस्ती जिसके नाम में बसती मिट...
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Tag :प्यास
  July 6, 2017, 1:50 pm
थामता है हर घड़ी वह बूँद बनकर जो मिला था सिंधु सा वह बढ़ा आता, रोशनी की इक किरण था बन उजाला पथ दिखाता ! थामता है हर घड़ी वह जो बरसता प्रीत बनकर, खोल देता द्वार दिल के फिर सरसता गीत बनकर ! हर नुकीली राह को भी मृदु गोलाई में बदले, कंटकों से जो भरी थी मधु अमराई में बदले ! ब...
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Tag :प्रीत
  July 5, 2017, 9:26 am
जीवन की शाम  कितने बसंत बीते...याद नहीं  मन आज थका सा लगता मकड़जाल जो खुद ही बुना है और अब जिसमें दम घुटता है जमीनें जो कभी खरीदी गयीं थी इमारतें जो कभी बनवायी गयी थीं जिनमें कोई नहीं रहता अब जो कभी ख़ुशी देने की बनीं थीं सबब अब बनी हैं जी का जंजाल घड़ी विश्राम की आयी  ...
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Tag :बसंत
  July 3, 2017, 10:10 am
पा परस उसका सुकोमल बह रहा है अनवरत जो एक निर्झर गुनगुनाता, क्यों नहीं उसके निकट जा दिल हमारा चैन पाता ! झूमती सी गा रही जो हर कहीं सोंधी बयार, पा परस उसका सुकोमल क्यों न समझे झरता प्यार ! निकट ही जो शून्य बनकर बन अगोचर थाम रखता, भूल जाता बेखुदी में क्यों न उसका मा...
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Tag :परस
  July 2, 2017, 9:20 am
चुने राह के कंटक अनगिन वरदानों को शाप मानकर रहा खोजता द्वार सुखों का, राह ताकता भटका राही प्रियतम उर से कहीं निकट था ! तन कंचन सा कोमल अंतर श्वासों की दी अद्भुत माला, मेधा, प्रज्ञा शक्ति अनोखी नयनों में भर दिया उजाला ! उऋण कहाँ तिल भर भी होगा हर पल भी यदि कोई गाये, ...
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Tag :पाहन
  June 30, 2017, 11:19 am
खो जाता अनंत आकाश ख्वाब मंजिलों के अंतर में  पाहन बाँध पगों में चलते, नील गगन में उड़ना चाहें बँधी बेड़ियाँ खोल न पाते ! नजरें सदा क्षुद्र पर रहतीं खो जाता अनंत आकाश, घोर अँधेरे बसे हृदय में ढूँढ़ रहा मन प्रखर प्रकाश ! सदा बँधी तट पर लंगर से बरसों बरस नाव को खेते, सुदू...
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Tag :गीत
  June 29, 2017, 4:17 pm
हाथ थाम भी ले जाता है जागें हम, कोई यह चाहे भांति-भांति के करे उपचार, कभी पिलाये दुःख का काढ़ा सुख झूला दे कभी पुचकार ! राहें यदि दुर्गम लगती हों हाथ थाम भी ले जाता है, किंतु यदि न सजग रहा कोई पथ का पत्थर बन जाता है ! ठोकर खाकर भी हम जागें आखिर कब तक यूँ भटकेंगे, चार दिनों...
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Tag :ठोकर
  June 28, 2017, 3:43 pm
अंतर इक दिन बने प्रार्थना उसके सिवा न कोई जग में उसकी ही ख़ुशबू कण-कण में, उससे ही प्रकटी हर शै है उसकी ही प्रतिमा हर मन में ! ऐसा है वह, वैसा है वह जाने कितने रूप बनाये, दूर खुदा से अब भी उतना मंदिर-मस्जिद रोज बनाये ! छिपी प्रीत है भीतर गहरे अंतर है सूना का सूना, अनजाना ...
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Tag :जलवा
  June 23, 2017, 9:04 am
दोराहे हर मोड़ खड़े हैं कहीं प्रज्ज्वलित अग्नि शिखा सी कहीं धुँए से ढकी सुलगती, कहीं सुगंधित अनिल बह रही कहीं घुटन से फिजां रुँधी सी ! जीवन मिले बिछाय बिसातें  चाहे जिस पाले में जाएँ, पल-पल चुनना स्वयं को यहाँ किसे सहेजें किसे लुटाएं ! दोराहे हर मोड़ खड़े हैं निज हाथ...
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Tag :अनिल
  June 21, 2017, 2:36 pm
तृषित उर की मालती है खिल न पाया कमल दिल का यही पीड़ा सालती है, इक तंद्रालस ने घेरा बात कल पर टालती है ! जगत केवल इक बहाना एक अवसर, रास्ता इक, खोज खुद की चल रही है तृषित उर की मालती है ! साज भी है उँगलियाँ भी मृदु रागिनी भी बज रही, श्रवण लेकिन सुन न पाते  चेतना धुन पालती ...
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Tag :खोज
  June 19, 2017, 1:37 pm
बूँद यहाँ हर नयना ढलकी जाने क्या पाने की धुन है हर दिल में बजती रुनझुन है, किस आशा में दौड़ लगाते क्षण भर की ही यह गुनगुन है ! दिवस-रात हम स्वप्न देखते इक उधेड़बुन जगते-सोते, चैन के दो पल भी न ढूँढे जीवन बीता हँसते-रोते ! जाने कितनी बार मिला है फूल यही हर बार खिला है, स्...
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Tag :नयन
  June 18, 2017, 10:43 am
ओ मेरे मन ! ओ मेरे मन ! जरा थम तो सही कर पहचान खुद से हजार छिद्रों वाला तू पूर्ण क्योंकर हो सकेगा अभाव यह तेरा कभी न भरेगा तू मान ही ले यह सच्चाई आज जान ही ले तुझे ऐसा ही बनाया है ऊपरवाले ने ही खेल रचाया है तू कभी गाता कभी रोता है दोनों बार ही नयन भिगोता है दो कलों क...
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Tag :कूल
  June 16, 2017, 10:02 am
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