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Blog: मन पाए विश्राम जहाँ

Blogger: Anita nihalani
 नीला अम्बर सदा वहीं थासंशय, भ्रम, भय, दुःख के बादल  जग को हमने जैसा देखा, छिपा लिया था दृष्टि पथ ही मन पर पड़ी हुई थी रेखा !कैसे दिखे विमल नभ अम्बरआशाओं की ओट पड़ी हो,कैसे कल-कल निर्मल सरिता भेदभाव की भीत गड़ी हो !दुराग्रहों के मोटे पर्दे नयनों को करते हों धूमिल,नीला अम्बर सद... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   5:46am 21 Sep 2020 #जग
Blogger: Anita nihalani
 पितृ पक्ष में परलोक से बना रहे हमारा संपर्क स्मरण यह पितृ श्राद्ध कराते हैं, हमारे अस्तित्त्व में जिन पूर्वजों का है योगदान जिस वंश परंपरा के हैं हम वाहक जगे कृतज्ञता की भावना उनके प्रति यह याद भी दिलाते हैं !बने रहें सत्य के पथ पर होते रहें दान-पुण्य भर भर भक्ति, ध्य... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   10:00am 16 Sep 2020 #पूर्वज
Blogger: Anita nihalani
जरा जाग कर देखा खुद को  स्वप्न खो गए जब नींदों से चढ़ा प्रीत का रंग गुलाल, दौड़ व्यर्थ की मिटी जगत में झरा हृदय से विषाद, मलाल ! द्रष्टा  बन मन जगत निहारे बना कृष्ण का योगी,अर्जुन,कर्ता का जब बोझ उताराकृत्य नहीं अब बनते बन्धन ! श्वास चल रही रक्त विचरता तन अपनी ही धुन में रमत... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   5:41am 9 Sep 2020 #कृष्ण
Blogger: Anita nihalani
 शब्दों के वह पार मिलेगा जब  खिलेगा भीतर मौन का पुष्प वहाँ न भावनाओं की डालियाँ होंगी न विचारों की भूमि !! शब्दों की नाव तो बनानी ही होगी जो उतार देगी शून्य के तट पर ! शब्द ले जाते हैं खुद से दूर शब्द जगत हैं माया हैं ! सत्य की यदि चाह है  तो उस आग से गुजरना होगा जहाँ जल जात... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   4:34am 8 Sep 2020 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
                                                             अमर स्पर्श “वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान उमड़ कर आँखों से चुपचाप, बही होगी कविता अनजान” इन कालजयी पंक्तियों के रचियता छायावाद के प्रमुख स्तम्भ, हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि, विचारक और दार्शनिक सुमित्रानंदन पंत को यूँ तो... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   5:24am 3 Sep 2020 #ईश्वर
Blogger: Anita nihalani
योग और प्रेम  जानने की इच्छा खुद को जानने की यदि जानने वाले की इच्छा बन जाये अर्थात ज्ञाता यदि स्वयं को जानने की इच्छा करे तो जो क्रिया करनी होगी उसे वही तो योग है ! जानने वाला यदि श्याम हो जानने की इच्छा राधा है जानने की क्रिया ही तो प्रेम है ! श्याम को इच्छा जगी स्वयं ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   9:55am 19 Aug 2020 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
 देश हमारा  सदा सत्य की राह दिखातागीत शांति का रहे सुनाता, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ मानकर सदा सभी का सुहित चाहता ! देश हमारा आगे बढ़ता सुख-समृद्धि के मार्ग खोलता, हर आपदा को दे चुनौती हँसकर मिलकर उसको सहता ! शांति यहाँ का मूलमन्त्र है परम अनूठा लोकतंत्र है, साथ निभाता सब देशो... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   5:55am 14 Aug 2020 #देश
Blogger: Anita nihalani
 फिर कोरोना देव अवतरित  पीला पात डाल से बिछड़ा संग पवन के डोले  इत उत,हम भी बिछुड़े अपने घर से पता खोजते गली-गली में ! कोई कहता काशी जाना काबा की भी राह दिखाता,गंगा तट पर शिव के डेरे  कोई महामंत्र ही फेरे ! द्वारे -द्वारे भटक रहे थे  हुए बंद मंदिर व शिवालय, फिर कोरोना देव अवत... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   5:16am 13 Aug 2020 #कोरोना
Blogger: Anita nihalani
मन पंकज बन खिल सकता था  तन कैदी कोई मन कैदी कुछ धन के पीछे भाग रहे, तन, मन, धन तो बस साधन हैं बिरले ही सुन यह जाग रहे ! रोगों का आश्रय बना लिया तन मंदिर भी बन सकता था, जो मुरझा जाता इक पल में  मन पंकज बन खिल सकता था !  यदि दूजों का दुःख दूर करे वह धन भी पावन कर देता, जो जोड़-जोड़ लख ख... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   5:23am 10 Aug 2020 #दुःख
Blogger: Anita nihalani
 हर दिल की यही कहानी है   कुछ पाना है जग में आकर क्या पाना है यह ज्ञात नहीं, कुछ भरना है खाली मन में क्या भरना है आभास नहीं ! जो नाम कमाया व्यर्थ गया अब भी अपूर्णता खलती है, जो काम सधे पर्याप्त नहीं भीतर इच्छाएँ पलती हैं ! कर-कर के भी शमशान मिलाना कर पाए जो पीड़ित है, माया मि... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   9:09am 7 Aug 2020 #दिल
Blogger: Anita nihalani
राम  त्रेता युग में जन्मे थे  मर्यादापुरुषोत्तम राम,   किन्तु आज भी अति पावन  परम उनका सुंदर नाम ! अनंत को सांत बनाया  अवतरित  होकर विष्णु ने,  ना रहे राम पर सीमित भारत की सीमाओं में ! राम नाम मधुर जाप ने  सारे जग को गुंजाया,  हरि अनंत  कथा अनंता  हर युग ने गायी  गाथा ! ... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   6:03am 5 Aug 2020 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
जो शेष रहा अपना होगा वह बनकर बदली बरस रहा  फिर चातक उर क्यों तरस रहा,  ले जाये कोई बाँह थाम गर उन चरणों का परस रहा ! जो लक्ष्य गढ़े थे विलीन हुए  अब पत्तों सा ही उड़ना हो,  जब डोर बंधी हो जीवन से  फिर और कहाँ अब जुड़ना हो ! बिखरेगा हिम टुकड़ों सा मन  कल कल निनाद कर बह जाए, जो शे... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   10:10am 3 Aug 2020 #डोर
Blogger: Anita nihalani
आया अगस्त  नव उजास नव आस लिए फिर  नव प्रभात अगस्त ले आया,  त्योहारों  का उल्लास लिए   शुभ अष्टम सु-मास यह  आया ! रक्षा सूत्र बँधे हाथों में  अंतर प्रीत प्रकट हो इनमें,  अमर अदाह्य अभेद चेतना  सदा अभय ही जाना जिसने ! राम बसे जो रोम रोम में  महिमावान प्रभु पुनः विराजें,  ... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   12:53pm 1 Aug 2020 #कान्हा
Blogger: Anita nihalani
साक्षी  बनें साक्षी ?  नहीं, बनना नहीं है  सत्य को देखना भर है  क्या साक्षी नहीं हैं हम अपनी देहों के  शिशु से बालक  किशोर से प्रौढ़ होते !  क्या नहीं देखा हमने  क्षण भर पूर्व जो मित्र था उसे शत्रु होते   अथवा इसके विपरीत  वह  चाहे जो भी हो  वस्तु, व्यक्ति, परिस्थिति  क्य... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   9:15am 29 Jul 2020 #देह
Blogger: Anita nihalani
घर-बाहर  तुम्हारे भीतर जो भी शुभ है  वह तुम हो  और जो भी अनचाहा है  मार्ग की धूल है  सफर लंबा है  चलते-चलते लग गए हैं  कंटक  भी कुछ वस्त्रों पर   मटमैले से हो गए हैं  पर वे सब बाहर-बाहर हैं  धुल जायेंगे  एक बार जब पहुंचे जाओगे घर ! मार्ग में दलदल भी थे लोभ के  थोड़ा सा कीचड़ ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   5:28am 28 Jul 2020 #फल
Blogger: Anita nihalani
जरा पार की हद आंगन की  काल समेटे दुनिया अपनी  उससे पहले ही जगना है, ताग बटोरे बांध एक में  जान ही लें जगत सपना है !  जब तक बचा रहा पंजे से  तब तक मूषक रहा कुतरता,  पड़ जाता ज्यों उसके फंदे  मार्जार बन काल झपटता ! ऐसा ही कुछ कोरोना है  दबे पाँव राहें तकता है, जरा पार की हद आ... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   5:44am 15 Jul 2020 #कोरोना
Blogger: Anita nihalani
अभय  भयाक्रांत मन विचार नहीं करता  वह केवल डरता है  अस्तित्त्व के साथ एक नहीं होता  संशय ही भीतर भरता है  स्वप्नों के में भी डरा जाते हैं उसे पशु और दानव  भूल ही जाता है वह कि देवों की संतान है मानव  भय खबर देता है कि अभी आस्था अधूरी है  अभय के लिए जागना जरूरी है  कि अनं... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   5:24am 13 Jul 2020 #अभय
Blogger: Anita nihalani
इक अनंत आकाश छुपा है  इक अनंत आकाश छुपा है  ऋतु बासन्ती बाट जोहती,  अंतर की गहराई में ही  छिपा सिंधु का अनुपम मोती ! दिल तक जाना है दिमाग से  भाव जगे, छूटें उलझन से,  कुशल-क्षेम का राग मिटे अब  मुक्ति पा लें सभी अभाव से ! मिटे नहीं जब खुद से दूरी दिखे आवरण, उलझा आशय, उस अना... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   9:25am 9 Jul 2020 #आकाश
Blogger: Anita nihalani
जिंदगी खुद राज अपने  व्यर्थ जो भी छूट जाये  सार्थक हृदय को लुभाये,  जिंदगी खुद राज अपने  खोल मंजिल पर बिठाये ! बस यही इक प्रार्थना हो मौन गीतों में गुजाएँ,  चाह का हर बीज जलकर  रिक्त हो मन गुनगुनाये ! जो तुम्हारी कामना हो  हाथ से वह कर्म हो अब,  जो नचाता था अभी तक  हुक्... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   10:18am 7 Jul 2020 #चाह
Blogger: Anita nihalani
गुरू  प्राकट्य सूर्य समान गुरु की गाथा कही न जाये शब्दों में सामर्थ्य कहाँ है, पावन ज्योति, विमल चांदनी  बिखरी उसके चरण जहाँ हैं ! गुरू  प्राकट्य सूर्य समान अंधकार अंतर का मिटाए, मनहर चाँद पूर्णिमा का है  सौम्य भाव हृदय में जगाए ! सिर पर हाथ धरे जिसके वह जन्मों का फ... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   9:34am 5 Jul 2020 #चाँदनी
Blogger: Anita nihalani
योगी  प्रमाद की नींद पर  कभी सुदिन खड़ा नहीं होता  यह सही है, जब जाग जाए मन  तभी उसके लिए सवेरा होता ! वे  विलग हैं,अनोखे हैं   स्वार्थ उन्हें नहीं चलाता उनकी ऊर्जा का स्रोत अहंकार से नहीं  परमात्मा से है आता ! भय से भाग खड़े हों या क्रोध से करें सामना  यह सामान्य जन करते... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   11:22am 24 Jun 2020 #ध्यान
Blogger: Anita nihalani
भाव और अभाव   जो भी दुःख है...  अभाव से उपजा है  जो भी इच्छा है...  उस अभाव को दूर करने की है  जो भी कर्म है...  उस इच्छा को पूरा करने के लिए है  समीकरण सीधा है  अभाव का अनुभव ही कर्म में लगाता है    सिर पर छत हो  घर में दाने हों  तन ढका हो  तब तो गिर जायेगा अभाव ?   नहीं, मन एक नया अभ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   5:32am 23 Jun 2020 #अभाव
Blogger: Anita nihalani
योग तभी घटता जीवन में  टुकड़ा-टुकड़ा मन बिखरा जो  जुड़ जाता जब हुआ समर्पित  योग तभी घटता जीवन में  सुख-दुःख दोनों होते अर्पित !  योगारुढ़ हो युद्ध करो तुम  कहा कृष्ण ने था अर्जुन को,  जीवन भी जब युद्ध बना हो  योगी हर मानव क्यों ना हो ?  योगी का मन एक शिला सा  दुई में जीता ह... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   5:55am 21 Jun 2020 #मन
Blogger: Anita nihalani
सच की तलाश  सच है खाली आकाश सा...  शून्य ! तभी उसे भरा जा सकता है झूठ अथवा मिथ्या से  जैसे नींद में जब सब खो जाता है मन से  तो स्वप्न उसे भर देते हैं  जो मिथ्या होते हुए भी  देते हैं सच का आभास ! सच कोरे कागज सा है  जिस पर शब्दों को अंकित करें तो  पढ़ना होता है खाली जगह में  दो ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   10:39am 19 Jun 2020 #माया
Blogger: Anita nihalani
तू और मैं  जैसे कड़ी से कड़ी जुड़ी है इस तरह  कि कोई जोड़ नजर नहीं आता  ‘तू’ जुड़ा है’मैं’ से उसे भेद जरा नहीं भाता  ‘मैं’ को यह ज्ञात नहीं   निज संसार बसाता है सृष्टि के अहर्निश गूँजते संगीत में  अपनी ढपली अपना राग सुनाता है  कभी सुर मिल जाते हैं संयोग से तो  फूला नहीं समा... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   5:13am 18 Jun 2020 #तू
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