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कुछ अलग सा

यदि किसी ख़ास दिन ही बालाजी के दर्शन की मानता ना मानी हो तो दिवाली के तुरंत बाद या इस समय, अप्रैल में, चाहे गर्मी भले ही हो, हनुमान जयंती के बाद जाना ही श्रेयस्कर है। भीड़-भाड़ कम हो जाने की वजह से प्रभु खुले दिल से निश्चिंतता से दर्शन देते हैं। कोई हड़बड़ी नहीं, कोई&nbs...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  April 22, 2017, 2:21 pm
आज जो सक्षम हैं वे चतुर-चालाक हो गए हैं। अब वे खुद दान-दक्षिणा नहीं करते, दूसरों से करवाते हैं। जब भी किसी आपात अवस्था में  किसी सहायता की जरुरत होती है तो ये नेता-अभिनेता तुरंत  जनता के सामने झोली फैला कर पहुंच जाते हैं। देश के आम आदमी में लाख धोखों-चोटों के बावजूद...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  March 31, 2017, 4:47 pm
करीब साढ़े छः का समय था, एक आदमी मलिन से टी शर्ट-पैंट पहने, मुंह को कपडे से लपेटे वहां रखी मूर्तियों की आरती जैसा कुछ कर रहा था। काम ख़त्म होने पर मुझे नमस्ते की और मेरे कहने पर अपने चेहरे से कपड़ा हटाया। लगा कि वह नहाया हुआ भी नहीं हैअपने देश में या यूं कहिए कि विश्व भर...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  March 28, 2017, 5:26 pm
देश के चाहे किसी भी हिस्से में निकल जाइए, शहर हो या क़स्बा, आपको किसी न किसी पेड़ के नीचे हमारे भगवानों की भग्न, बदरंग या पुरानी मुर्तिया, टूटे कांच या फ्रेम में जड़ी देवी-देवताओं की कटी-फटी तस्वीरें, पूजा,  हवन इत्यादि से संबंधित वस्तुएं जरूर दिख जाएंगी। कभी ब...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  March 25, 2017, 4:42 pm
आपकी फ्रेंचाइजी वाले दुकानदार तो आपकी वस्तुओं पर पांच से दस प्रतिशत की छूट दे देते हैं पर आप अपने "मेगा-स्टोर"पर पांच रुपये भी नहीं छोड़ते, ऊपर से थैले के पैसे और धरवा लेते हो यह कैसा स्वदेशी प्रेम है ? अरे भाई ! यदि कोई आपके यहां से सात-आठ सौ, जो आपके यहां से खरीदारी की ...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  March 20, 2017, 5:48 pm
सपनों को पूरा करने में कोई बुराई नहीं है। पर उसके लिए अपनी तैयारी, अपनी क्षमता, अपनी औकात का एहसास होना बहुत जरुरी है। सिर्फ किसी को नीचा दिखाने के लिए ईर्ष्या या द्वेष की भावना से उठाया गया कदम कहीं का भी नहीं छोड़ता...... बचपन मे सुनी-पढ़ी कहानियां सदा ही सीख से भरी होती ...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  March 14, 2017, 11:05 am
लोगों का कहना है कि ये राजनीती वाले बहुत सक्षम और चतुर होते हैं। कांग्रेस पार्टी को अपने हश्र का अंदाज कुछ ही दिनों में लग गया था इसीलिए कोई भी बड़ा नेता प्रचार में नहीं आया एक-दो जगह प्रियंका को भेज उसे भी वापस बुला  लिया गया क्योंकि नतीजों से ख्याति पर असर पड़ता है। र...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  March 9, 2017, 3:33 pm
लोगों का कहना है कि ये राजनीती वाले बहुत सक्षम और चतुर होते हैं। कांग्रेस पार्टी को अपने हश्र का अंदाज कुछ ही दिनों में लग गया था इसीलिए कोई भी बड़ा नेता प्रचार में नहीं आया एक-दो जगह प्रियंका को भेज उसे भी वापस बुला  लिया गया क्योंकि नतीजों से ख्याति पर असर पड़ता है। र...
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  March 9, 2017, 3:33 pm
वैज्ञानिकों और यहां के कर्मचारियों की अथक मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि आपको यहां पौधों की ऐसी-ऐसी जातियां-प्रजातियां फलते-फ़ूलते मिलेंगी जिनका आपने या तो नाम ही नहीं सुना होगा या फिर नाम ही सुना होगा। कुछ तो ऐसी भी प्रजातियां हैं जिनके पूर्वज लाखों-लाख साल पहले डाय...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  March 3, 2017, 12:43 pm
बात सम्मान की है, यदि कोई जबरदस्ती खड़ा हो भी जाता है पर उसका ध्यान कहीं और होता है तो उसका क्या फ़ायदा ! अभी दो दिन पहले फिल्म देखने जाना हुआ था, शुरू होने के पहले जब राष्ट्रगान बजा तो सब खड़े तो हुए पर दसियों लोग अपने मोबाइल में ही उलझे दिखे। मेरी सामने वाली कतार में भी एक...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  February 17, 2017, 2:55 pm
हमारे देश में अनेकों भाषाएं बोली जाती हैं। सब का अलग-अलग लहजा और उच्चारण हैं। इसी कारण लाखों लोग अभी भी शुद्ध हिंदी नहीं बोल पाते हैं। उनका तो हम बुरा नहीं मानते। कहना तो नहीं चाहिए पर हमारे कुछ राष्ट्रपति भी कहां साफ़ हिंदी बोल पाते थे। अभी भी कई  कलाकार हैं जिन्होंने ...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  February 15, 2017, 3:34 pm
पहली बार बचपन में जब "उसने कहा था"कहानी को पढने और फिल्म देखने का मौका मिला तो ना कुछ महसूस हुआ नाहीं उसकी गहराई समझ में आई थी, सब सर के ऊपर से गुजर गया था। पढाई के दौरान इस कहानी के कोर्स में होने के कारण फिर बहुत बार इसे पढने का मौका मिला तब जाकर समझ में आया कि कैसे और क्य...
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  February 14, 2017, 12:23 pm
इसमें कोई शक नहीं कि आधुनिक फोन के अनगिनत लाभ, ढेरों अच्छाइयां, विशेषताएं तथा उपयोग हैं पर साथ ही कुछ बुराइयां भी हैं। सही मायने में यह फोन की भी बुराइयां नहीं हैं हमारी ही गलतियां हैं, जो हम बिना सोचे-समझे उसका अनियंत्रित तरीके से प्रयोग करते रहते हैं। अति तो कि...
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  February 10, 2017, 1:40 pm
सत्तर के दशक में कलकत्ता शहर के लिए एक कानून पारित किया गया था, जिसके तहत यदि कोई मूत्रालय के अलावा कहीं और मूत्र-विसर्जन करते पकड़ा जाता था तो उसे जुर्माना भरना पड़ता था ! शहर को साफ़-सुथरा रखने के लिए उठाया गया था यह कदम, सोच अच्छी थी, पर नियम लागू करते समय ...
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  February 9, 2017, 4:37 pm
बसंत के चेहरे पर स्मित हास्य था, बोला मैं तो हर साल आता हूँ। आदिकाल से ही जब-जब शीत ऋतु के मंद पडने और ग्रीष्म के आने की आहट होती है, मैं पहुँचता रहा हूँ। सशरीर ना सही पर अपने आने का सदा प्रमाण देता रहा हूँ । आपने भी जरूर महसूस किया ही होगा कि मेरे आगमन से सरदी से ठिठुरी जिंद...
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  February 1, 2017, 5:21 pm
पहले बड़े-बड़े निर्माताओं, कलाकारों, निर्देशकों की फिल्मों का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता था। क्रिकेट के टेस्ट मैचों की तरह साल-दो साल में उनकी फ़िल्में परदे तक पहुंचा करती थीं। हर निर्माता, निर्देशक, कलाकार की और उनके हुनर की अपनी अलग पहचान हुआ करती थी। आज की ...
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  January 28, 2017, 5:44 pm
किसी ख़ास दिन रेलवे स्टेशन पर जरुरत से ज्यादा ही गहमा-गहमी नजर आती है। कर्मचारी चुस्त-दुरुस्त व मुस्तैद, नाहीं कहीं गंदगी ना दाग-धब्बे, करीने से सजे सैंकड़ों गमले जिनमें बड़े-बड़े सुंदर फूल-पौधे अपनी छटा बिखेरते शोभा पा रहे होते हैं। प्लेटफार्म इतने साफ़ और चमकदार कि ...
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  January 24, 2017, 1:43 pm
आशा है इस पारंपरिक खेल को वैर भावना से मुक्त कर इंसान और पशु दोनों की सुरक्षा का भी ख्याल रखते हुए  खेल भावना  के तहत ही खेला जाएगा, जिससे फिर कभी इस पर कोई विवाद खड़ा न हो...कहावत है , उतसव प्रिया: मानवा। पर आज कल देश में घटित हो रहे वाकयों को देख कर लगने लगा है कि क...
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  January 22, 2017, 12:07 pm
अमितजी, आपके स्तर, आपकी ख्याति के लायक बिल्कुल नहीं है यह विज्ञापन ! विज्ञापन ही सही माँ तो माँ होती है उसकी तौहीन करना वह भी बार-बार, किसी भी तरह, कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता !  अभी कुछ दिनों से टी.वी. पर #एवरेस्टमसालोंका एक विज्ञापन आ रहा है जिसमें अमिताभ बच्च...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  January 16, 2017, 5:29 pm
वह पंद्रह-बीस जनों की प्रोफेशनल पार्टी थी, जो जगह-जगह जा वर्षों से भागवत की व्याख्या, उसके उपदेश व उस पर प्रवचन देती आ रही है।  उतनी रात को भी मेरे ज्ञान-चक्षु चैतन्य हो गए कि जरुरी नहीं कि हमारा आचरण हमारे कर्म के अनुकूल ही हो !!!    दुनिया में तरह-तर के ल...
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  January 10, 2017, 12:27 pm
कमजोर व भीरु मध्यम वर्ग पर ही सरकार का जोर चलता है, इन्हीं से सबसे ज्यादा ईमानदारी और देशभक्ति की अपेक्षा की जाती है। इन्हीं से सब्सिडी छोड़ने, बढ़ते किराए को झेलने, आने-जाने, रहने, खाने पर ज्यादा शुल्क चुकाने, सरकार के अमले और उसके खर्चों को निपटाने की आशा की जाती ह...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  January 6, 2017, 3:52 pm
उन्होंने हमारे ज्ञान में वृद्धि की कि वे कोई ऐसी-वैसी हस्ती नहीं है वे वेदों के प्रकांड ज्ञाता हैं जिसके लिए उन्हें जबलपुर से हरिद्वार किसी यज्ञ को पूर्ण करने हेतु बुलाया गया है। वे अक्सर यहां आमंत्रित रहते हैं। यहां के लोगों में उनकी बड़ी प्रतिष्ठा और मान है। यह और&nbs...
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  January 1, 2017, 6:17 pm
उत्सव प्रिया: मानवा। मानव स्वभाव से ही उत्सव प्रिय होता है। इसीलिए उसे जिस चीज से भी आनंद-ख़ुशी मिलती है वह उसे अपना लेता है और यह जो पश्चिम द्वारा आयोजित-प्रायोजित नव-वर्ष का उत्सव है वह तो अपने में मौज-मस्ती, हंसी-ख़ुशी, आनंद-उल्लास समेटे लाता ही है, इ...
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  December 31, 2016, 5:12 pm
4 दिसम्बर 2016, रविवार सुबह पौने बारह बजे के करीब माँ ने अंतिम सांस ली। पिछले दो-तीन महीने से उम्र का बोझ शरीर पर भारी पड़ता जा रहा था, जिसके चलते तन की सारी क्रियाएं-प्रतिक्रियाएं शिथिल पड़ती जा रही थीं। रायपुर से फोन कम ही आता था, मैं ही समय-समय पर फोन कर हालात की जानक...
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  December 28, 2016, 4:44 pm
दीमक जैसा छोटा सा कीड़ा सबसे ज्यादा गैस उत्पादित करता है। फिर कतार में लगते हैं ऊंट, ज़ेबरा, भेड़, गाय, हाथी, कुत्ते तथा इंसान।  जान कर  आश्चर्य होगा कि चीन में   "Professional  Smeller"  द्वारा गंध सूंघ कर रोगों का निदान किया जाता रहा है। इनके काम की तरह ही इनको इस काम के एवज में ...
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  November 29, 2016, 4:51 pm
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