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कुछ अलग सा

मुद्दा क्या है, जमीन छूना या दूरी पार करना ! अब मान लीजिए एक बल्लेबाज रन लेते समय दूसरे छोर पर पहुँच, किसी क्षेत्ररक्षक द्वारा फेंकी गयी बॉल से अपने को बचाने के लिए छलांग भरते हुए, बिना जमीन को छुए, विकेटों के भी पार चला जाता है और बॉल विकेट में लगती है तो वर्तमान नि...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  July 9, 2018, 1:58 pm
समय चक्र के घूमने के साथ ही अब फिर "घी"के दिन बहुरने लगे हैं। जी हाँ वही देसी घी जिसके पीछे, कुछ वर्षों पहले आहार, विहार, सेहत, स्वास्थ्य संबंधी विशेषज्ञ-डॉक्टर और ना जाने कौन कौन, पड़े हुए थे; इसकी बुराइयां और हानियाँ बताते हुए ! वैसे ही लोग उसी घी को आज फिर शरीर के लिए ...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  July 6, 2018, 4:32 pm
अक्सर लोगों को कहते पाया जाता है कि उम्र तो सिर्फ एक नंबर है, उसके बढ़ने से क्या होता है; दिल तो  जवान है ! बात कुछ हद तक ठीक हो सकती है, पर सच्चाई यह है कि दिल भले ही कितना भी जोश, उमंग, उत्साह से भरा रहे पर शरीर की मशीनरी एक उम्र के बाद धीमी पड़नी शुरु हो जाती है। द...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  July 3, 2018, 12:52 pm
पावस ऋतु आ ही गयी। इसके स्वागत के साथ-साथ ज़रा सी सावधानी भी बरत ली जाए तो यह खुशगवार मौसम और भी सुहावना हो जाएगा। तो सोचना क्या; आनंद लीजिए इस अनमोल-नायाब-जीवनदायक उपहार का, जिसे प्रकृति खुले दिल से लुटा रही है। पर अपनी तरफ से भी भरसक कोशिश और उपाय जरूर करें, गगन से झर...
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  June 28, 2018, 1:25 pm
फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है इसका डायरेक्शन, जिसे पता नहीं किसने, क्यों और क्या देख कर अब्बास-मस्तान जैसे सक्षम निर्देशकों को हटा कर, रमेश गोपी नायर यानी  #रेमो_डिसूजा को सौंप दिया। जिन्हें शुरू से लेकर अंत तक यही समझ में नहीं आया कि कहानी, उसके पात्रों और खासकर सल...
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  June 16, 2018, 7:34 pm
जिस तरह चाय की अलग-अलग कीमतें निर्धारित की जाती हैं उसकी विशेषता व गुणवत्ता को लेकर, वैसे ही केसर का मुल्यांकन भी होता है। अलग-अलग जगहों पर उपजने वाले केसर की कीमतों में भी फर्क होता है। फिर उसके संस्करण के दौरान बहुत कुछ बाहर आता रहता है जैसे बची हुई फूल की ...
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  June 14, 2018, 3:45 pm
देखने में "लिक्विड सोप"अच्छा, साफ़-सुथरा, रख-रखाव की सुविधा और आधुनिकता का प्रतीक भले ही हो पर पुराना साबुन का "बार या बट्टी"उससे बेहतर है। खपत को ही लें, साबुन की बट्टी से हाथ धोते हुए मात्र 0.35 ग्राम साबुन की जरुरत पड़ती है, वहीँ लिक्विड सोप की खपत एक बार ...
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  June 8, 2018, 4:53 pm
बहस में भाग लेने वाले "उस्ताद लोगों"के पास कोई ठोस उपाय नहीं होते; वह वहाँ बैठे ही होते है अपनी विद्वता के प्रदर्शन, दूसरों को उपदेश या उनकी आलोचना करने के लिए ! उनसे कोई पूछने वाला नहीं होता कि जनाब आपने इस मुसीबत से पार पाने के लिए निजी तौर पर क्या किया है ? क्...
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  June 4, 2018, 5:39 pm
इस नाम के पड़ने की वजह का कारण खोजने पर पता चला कि किसी समय यहां मछली पकड़ने में उपयोग होने वाली "डिंगा"यानी नौकाओं की मरम्मत की जाती थी। जिसके लिए उन्हें उल्टा कर उनके पेंदे के बाहरी हिस्से में कोलतार लगा सूखने के लिए छोड़ दिया जाता था। फिर उनको दुरुस्त कर काम लायक ...
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  May 30, 2018, 3:55 pm
आज देश में दो ही ऐसी राजनितिक पार्टियां हैं जिनका कुछ न कुछ आधार पूरे देश में है। इनमें भी पहले नंबर पर कांग्रेस है, जिसके समर्पित कार्यकर्त्ता देश के कोने-कोने में आस्था की अलख जगाए बैठे हैं। पर उसके अदूरदर्शी नेता इसका फायदा न उठा सिर्फ मोदी के पीछे पड़े हुए है...
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  May 25, 2018, 11:37 am
देखने वाला तंग हो जाता है, हर पांच मिनट के बाद "बेल्ले"हीरो को झेल, जो दिन भर कुत्ते-बिल्ली की तस्वीर खींचता बैठा है और उसे बिना कैमरे के पता ही नहीं चलता कि उसका कुत्ता बिन नहाए है। एक और महाशय ने पूरे देश की जुबान को रंगने का ठेका ले सबके दिमाग की ऐसी की तैसी कर धर...
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  May 23, 2018, 3:05 pm
दोनों IPL में एक समानता जरूर है, दोनों के "खिलाड़ी"बिकने के लिए सदा तैयार रहते हैं। जो ज्यादा बोली लगाता है इनकी स्वामिभक्ति उसी की हो जाती है, अगला मौका आने तक ! पर जहां 'प्रीमियम लीग'अपनी कुछ खामियों के बावजूद प्रशंसनीय खेल व मैत्री भावना के साथ क्रिके...
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  May 22, 2018, 2:18 pm
एक दिन पहले ही आलिया की फिल्म "राजी"भी वहीँ लगी हुई थी, पुरानी लत के कीड़े ने जोर मारा ! प्रस्ताव पेश किया तो मना किसने करना था, सारे एक से बढ़ कर एक शौकीन; पर शर्त एक ही थी कि पहले पेट-पूजा का प्रसाद ग्रहण कर ही दोबारा हॉल में प्रवेश किया जाएगा। बात तर्क-सम्मत थी, सो सर्व-सम्...
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  May 14, 2018, 2:48 pm
अपराजितो फिल्म का एक सीन, जिसमें अपु अपनी माँ से कहता है कि उसे सुबह की ट्रेन पकड़नी है सो जल्दी उठा देना। सीधी व साधारण सी बात है कि अगले दृश्य में माँ, सुबह हो गयी है, अपु उठो कह कर जगा देती। पर उस गरीबी के मारे परिवार में घडी कहाँ थी ! सुबह कब और कितने बजे ट्रेन ...
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  May 3, 2018, 1:54 pm
तलाशी लेने, छापा मारने, किसी को पकड़ने या अपराधी का पीछा करते हुए पुलिस सायरन बजाते क्यों घूमती है ? रात को चौकीदार डंडा पटक, सीटी बजा कर पहरेदारी क्यों करता है ? क्या चोर को बताने के लिए कि भाई मैं इधर हूँ ; तू अपना देख ले ! क्यों लोअर कोर्ट का फैसला हाई कोर्ट में उलट जात...
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  April 30, 2018, 4:04 pm
दिनों-दिन बढ़ाई जाती कीमतों से तो यही लगता है कि मंशा-ए-हाकिम यही है कि मुश्किल हालातों में किसी तरह गुजर कर रहे नागरिकों के पास की दमड़ी को भी तरह-तरह के हथकंडे अपना किसी तरह हथिया लिया जाए। किराया बढ़ाना सबसे सरल और तुरंत उगाही का तरीका है। क्योंकि कमाई के और पचा...
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  April 27, 2018, 5:33 pm
सुबह से ही भम्भल-भूसे में हूँ कि आज के दिन का उद्देश्य क्या है ? क्योंकि हमारे यहां रिवायत है कि दिवस उसी का मनाया जाता है जिसके अस्तित्व पर हम खुद खतरा मंडरवाते हैं और फिर उसे बचाने का नाटक करने का एक दिन निर्धारित कर देते हैं। जैसे पर्यावरण दिवस, हिंदी ...
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  April 25, 2018, 5:50 pm
एक रात जब एक पहरेदार ने सुबह चार बजे की सुचना घंटा बजा कर दी, तो दूसरे ने पूछा, का हो, मिसिर ! केतना बजइले ? पहला बोला, चार ! पर हम तो तीन ठो सुनले हईं ! पहला बोला।  अरे नाहीं, पूरा गिन के चार बार बजइले हईं !  दूसरा, अरे बुड़बक, तीन बार बजइले हउआ, फजिर में बड़ा साब निकाल बाहिर क...
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  April 18, 2018, 1:26 pm
कवि वेंकटाध्वरि रचित ‘राघवयादवीयम्’ एक विलक्षण ग्रंथ है। इस ग्रंथ की विशेषता और अद्भुत खासियत यह है कि इसमें के 30 श्लोकों को अगर सीधे-सीधे पढ़ते जाएं, तो रामकथा बनती है, पर उन्हीं श्लोकों को उल्टा यानी विपरीत क्रम में पढ़ने पर वह कृष्ण-कथ...
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  April 13, 2018, 10:41 am
कवि वेंकटाध्वरि रचित ‘राघवयादवीयम्’ एक विलक्षण ग्रंथ है। इस ग्रंथ की विशेषता और अद्भुत खासियत यह है कि इसमें के 30 श्लोकों को अगर सीधे-सीधे पढ़ते जाएं, तो रामकथा बनती है, पर उन्हीं श्लोकों को उल्टा यानी विपरीत क्रम में पढ़ने पर वह कृष्ण-कथ...
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  April 13, 2018, 10:41 am
युवक अपने बच्चे को हिंदी वर्णमाला के अक्षरों से परिचित करवा रहा था। आजकल के अंग्रेजियत के समय में यह एक दुर्लभ वार्तालाप था सो मेरा सारा ध्यान उन पर ही अटक कर रह गया और मैं यथासंभव उनके साथ ही चलने लगा। कुछ ही देर में "ट वर्ग"की बारी आ गयी। युवक के 'ठ' से '...
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  April 11, 2018, 6:40 pm
पिछले साल एक फिल्म "हिंदी मीडियम"आई थी। जिसमें एक धनाढ्य व्यक्ति खुद को गरीब तबके का साबित कर अपने बच्चे को एक प्रतिष्ठित स्कूल में, आरक्षित कोटे के अंतर्गत दाखिल करवा देता है। पर दिल्ली के इन महाशय ने यह कारनामा फिल्म आने के चार साल पहले ही कर दिया था। ...
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  April 8, 2018, 4:17 pm
शादी-ब्याह में बेचारे समय को कौन पूछता है, खासकर पंजाबियों के यहां तो दो-तीन घंटे की बात कोई मायने ही नहीं रखती, ना ही उभय-पक्ष इस पर ध्यान देते हैं। पर उस समय हम सब आश्चर्य चकित रह गए जब ठीक छह बजे बारात दरवाजे पर आ खड़ी हुयी। थोड़ी हड़बड़ी तो हुई पर साढ़े आठ बजते-बजते पंडाल तकरी...
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  April 5, 2018, 6:28 pm
अपने यहां सार्वजनिक रूप से मेले-ठेले या होली-दिवाली मिलन पर इसका आयोजन तो फिर भी समझ में आता है पर अभी पिछले दिनों  "हिंदू नव वर्ष"समारोह में इसे आयोजित होते देख, पता नहीं कुछ अजीब सा क्यों लगा !  हालांकि खेल मजेदार है, उत्सुकता, मनोरंजन, एकाग्रता, रोम...
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  March 27, 2018, 3:44 pm
काफी कोशिशों के बाद भी न्याय ना मिलने पर पुजारी ताराचंद जी ने देवी  को ताले-जंजीर से  बाँध कर प्रतिज्ञा की कि जब तक देवी माँ  भगत को आशीर्वाद नहीं देंगी  और उसे निर्दोष साबित  नहीं करेंगी वह  ताला जंजीर  नहीं खोलेंगे....#हिन्दी_ब्लागिंग    जी हाँ ! यह सच ...
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  March 24, 2018, 4:33 pm
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