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कुछ अलग सा

महर्षि वेदव्यास जी ने 18 पुराणों की रचना की थी। इस महाग्रंथ में भी 18 अध्याय हैं। श्रीकृष्ण जी ने 18 दिन तक अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया, जिसके भी 18 ही अध्याय हैं।  युद्ध भी पूरे 18 दिन तक चला। इसमें कौरवों की 11 और पांडवों की 7 यानी कुल 18 अक्षोहिणी से...
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Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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  September 13, 2018, 11:37 am
उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर में फूहड़ता प्रदर्शित करती युवती जैसे लोग अच्छी तरह जानते हैं कि उनके कर्म-कुकर्म के विरोध में यदि हजार आवाजें उठेंगीं तो पक्ष में भी सौ लोग खड़े हो जाएंगे ! यही सौ लोग सदा ऐसे सिरफिरों की ताकत और ढाल बन उनका मंतव्य पूरा करवाने ...
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  September 8, 2018, 4:35 pm
उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर में फूहड़ता प्रदर्शित करती युवती जैसे लोग अच्छी तरह जानते हैं कि उनके कर्म-कुकर्म के विरोध में यदि हजार आवाजें उठेंगीं तो पक्ष में भी सौ लोग खड़े हो जाएंगे ! यही सौ लोग सदा ऐसे सिरफिरों की ताकत और ढाल बन उनका मंतव्य पूरा करवाने ...
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  September 8, 2018, 4:35 pm
सवाल यह उठ रहा है कि मंदिरों की यह अकूत धन-सम्पदा कब और किस काम आएगी ? किस  ख़ास आयोजन के लिए इसे संभाल कर रखा जा रहा है ? क्या समय के साथ यह सब जमींदोज हो जाने के लिए है ? मंदिरों में जमा यह धन का पहाड़ देश की अमानत है ! यह अकूत, बेशुमार दौलत साधारण लोगों के द्वारा ...
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  September 5, 2018, 4:17 pm
पिताजी को पढ़ने का बहुत शौक था। जब मैं कुछ बड़ा हुआ तो मेरे लिए भी उस समय का बाल साहित्य घर आने लगा। सारी बाल पत्रिकाओं के नाम तो मुझे आज भी याद हैं; मनमोहन, बालक, चंदामामा, चुन्नू-मुन्नू जिनमें फिर पराग का नाम भी जुड़ गया। इसके अलावा पाठ्य पुस्तकों के इतर, तरह-तर...
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  September 4, 2018, 7:49 pm
ताश, अच्छी है या बुरी यह बहस का विषय हो सकता है। पर सैंकड़ों वर्षों से यह आदमी का मनोरंजन करती आ रही है इसमें दो राय नहीं है। इसके  बावन पत्तों में बारह पत्ते, तीन पात्रों, बादशाह, बेगम और गुलाम को तो सभी जानते हैं पर अपने-अपने वर्ग के अनुसार उनकी खासियत और उनके अलग-अलग स्...
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  September 1, 2018, 1:28 pm
ताश, अच्छी है या बुरी यह बहस का विषय हो सकता है। पर सैंकड़ों वर्षों से यह आदमी का मनोरंजन करती आ रही है इसमें दो राय नहीं है। इसके  बावन पत्तों में बारह पत्ते, तीन पात्रों, बादशाह, बेगम और गुलाम को तो सभी जानते हैं पर अपने-अपने वर्ग के अनुसार उनकी खासियत और उनके अलग-अलग स्...
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  September 1, 2018, 1:28 pm
रोशनआरा बेहद खूबसूरत थी। कई मुग़ल-गैर मुग़ल शहजादे, राजकुमार, राजे, नवाब मन ही मन उसका ख्वाब देखा करते थे। ऐसा ही एक युवक, जो था तो बाबर का वंशज पर वह और उसका परिवार वर्षों से सत्ता से दूर गुमनामी का जीवन जी रहे थे, रोज वहाँ आ शहजादी को देखा करता था...!#हिन्दी_ब्लागिंग   &nbs...
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  August 22, 2018, 5:46 pm
रोशनआरा बेहद खूबसूरत थी। कई मुग़ल-गैर मुग़ल शहजादे, राजकुमार, राजे, नवाब मन ही मन उसका ख्वाब देखा करते थे। ऐसा ही एक युवक, जो था तो बाबर का वंशज पर वह और उसका परिवार वर्षों से सत्ता से दूर गुमनामी का जीवन जी रहे थे, रोज वहाँ आ शहजादी को देखा करता था...!#हिन्दी_ब्लागिंग पुर...
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  August 22, 2018, 5:46 pm
पिछले हफ्ते ब्लॉग पर रामायण के एक अहम पात्र सम्पाती पर दो आलेख डाले थे। उस समय ऐसे ही विचार आया कि क्या ''सम्पाती'' को कोई जानता भी है ? पहले आस-पास के लोगों से, फिर जान-पहचान वालों से फिर पार्क में सैर करते वक्त चार-पांच लोगों से पूछा ! अंजाम वही हुआ जिसका अंदेशा था ! एक भी ...
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  August 20, 2018, 3:58 pm
सम्पाती समुद्र तट पर आ पसरने वाले जिस समूह को अपना प्रभू-प्रदत्त भोजन समझ कर लपक रहा था, वह कोई मामूली वानर दल नहीं था ! यह रावण द्वारा सीता हरण के पश्चात उनकी खोज में जामवंत, हनुमान तथा अंगद जैसे महावीरों के नेतृत्व में  निकली वह वानर सेना की टुकड़ी थी, ज...
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  August 18, 2018, 10:46 am
सम्पाती और जटायू का यह सूर्य प्रवास कोई भावावेश में, अहम के अतिरेक में या अति उत्साह में उठा लिया गया कदम नहीं था। लाखों-लाख मील की यात्रा का आगाज, बहुत सोच-समझ कर राह में आने वाली सारी अड़चनों, परेशानियों, आकस्मिक मुसीबतों को जानते-बूझते, खान-पान-आराम, सुरक्ष...
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  August 14, 2018, 5:15 pm
सम्पाती और जटायू का सूर्य प्रयाण कोई भावावेश में, अहम के अतिरेक में या अति उत्साह में उठा लिया गया कदम नहीं था। लाखों-लाख मील की यात्रा का आगाज, बहुत सोच-समझ कर राह में आने वाली सारी अड़चनों, परेशानियों, आकस्मिक मुसीबतों को जानने-बूझने के बाद ही संभव हो पा...
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  August 14, 2018, 5:15 pm
हमारा शरीर एक अजूबा है। चाहे सहनशक्ति हो, तेजी हो या फिर बल-प्रयोग इससे इंसान ने अनेक हैरतंगेज कारनामो को अंजाम दिया है। कइयों ने तो ऐसे-ऐसे करतब किए, दिखाएं हैं जिन्हें देख आम आदमी दांतो तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो जाता है। पर विश्वास कीजिए, आकाश से ले कर सागर की ...
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  August 9, 2018, 10:26 am
पहले तो इस खेल को खेलने की सुविधा कहीं-कहीं ही होती थी पर आजकल यह आम होता जा रहा है। मुझे गुड़गांव के आम्बिएंस मॉल में तीन-चार बार इसे खेलने का मौका मिला है। दिखने में जितना आसान लगता है उतना आसान यह है नहीं ! पहले तो यूँ ही बॉल को पकड़ कर दे मारते थे पिन पर ! पर धीरे-धी...
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  August 6, 2018, 12:03 pm
आज का बाजार इतना चतुर, कुटिल और चंट हो गया है कि वह सदा यह कोशिश करता है कि जो आपको लेना है वह तो आप लें ही ! जो नहीं लेना है या जिसकी जरुरत नहीं है वह भी आप लें ! इसीलिए किसी भी तरह का मेन्यू बनाने में इंसान की भावनाओं जैसे उसका मनोविज्ञान, अपनी मार्जिन का लेखा-जोखा,&nb...
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  August 2, 2018, 11:12 am
अपने शुरूआती दौर में ही अमिताभ ने  फिल्म ''रेशमा और शेरा"में गूंगे-बहरे का किरदार निभाया। उसके बाद उनकी अनेक ऐसी फिल्में आईं  जिसका मुख्य किरदार किसी न किसी असाध्य बीमारी से पीडि़त था। जैसे फिल्म मजबूर में ब्रेन-ट्यूमर, ब्लैक में अल्जीमर्स, पा में प्रोज...
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  July 31, 2018, 3:00 pm
अभी पिछले दिनों फिर एक बार 65 के युद्ध के बाद भारत सरकार को हैदराबाद के निजाम द्वारा स्वर्ण दिए जाने की बात चर्चा में रही थी। बात ठीक थी, समय पर देश को आर्थिक सहारा भी मिला था पर सारे घटनाक्रम पर एक सवाल भी अपना सर उठाता है कि अचानक भारत विरोधी, पाक परस्त, अत्यंत कजूं...
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  July 29, 2018, 12:07 pm
आज अखबार में पुरस्कार मिलने की बात आने पर लोगों को #सोनम_वांगचुक और उनके कार्यों को जानने की उत्सुकता होगी बहुत से लोग पहली बार उनको जानेंगें; पर उनसे प्रभावित हो 2009 में एक फिल्म "थ्री इडियट्स"भी बनी थी। जिसमें आमिर खान ने इनके जीवन से प्रभावित हो  'फुनशुक वांग...
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  July 27, 2018, 6:17 pm
महाकाव्य रामायण में  कुछ अहम पात्र ऐसे भी हैं जिनका कथा में योगदान तो बहुत महत्वपूर्ण है पर उनके बारे में  विस्तृत जानकारी नहीं मिलती।  ऐसा ही एक पात्र है, सम्पाती ! जिसने सीताजी के लंका में रावण की कैद में होने के बारे में सही दिशा निर्देश दे, श्री राम जी की सहायता...
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  July 26, 2018, 5:28 pm
राजकुमारी की लैंग्चा खाने की इच्छा उसके मायके कृष्णनगर पहुंचाई गयी ! अब लैंग्चा क्या होता है यह किसी को भी पता नहीं था। वहाँ किसी भी हलवाई को इस तरह की किसी मिठाई के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। दरअसल राजकुमारी भी इस मिठाई का नाम भूल चुकी थी उसे सिर्फ यह याद था कि उ...
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  July 22, 2018, 10:34 am
मातृभूमि ! ज्यादातर या सरल भाषा में कहा जाए तो जो इंसान जहां जन्म लेता है, वही उसकी मातृभूमि कहलाती है। पर आज दुनिया सिमट सी गयी है। रोजी-रोटी, काम-धंधे या बेहतर भविष्य की चाहत में लोग विदेश आने-जाने लगे हैं। तो ऐसे लोगों की संतान का जन्म यदि दूसरे देश में होता ...
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  July 20, 2018, 4:40 pm
मातृभूमि ! ज्यादातर या सरल भाषा में कहा जाए तो जो इंसान जहां जन्म लेता है, वही उसकी मातृभूमि कहलाती है। पर आज दुनिया सिमट सी गयी है। रोजी-रोटी, काम-धंधे या बेहतर भविष्य की चाहत में लोग विदेश आने-जाने लगे हैं। तो ऐसे लोगों की संतान का जन्म यदि दूसरे देश में होता ...
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  July 20, 2018, 4:40 pm
मुद्दा क्या है, जमीन छूना या दूरी पार करना ! अब मान लीजिए एक बल्लेबाज रन लेते समय दूसरे छोर पर पहुँच, किसी क्षेत्ररक्षक द्वारा फेंकी गयी बॉल से अपने को बचाने के लिए छलांग भरते हुए, बिना जमीन को छुए, विकेटों के भी पार चला जाता है और बॉल विकेट में लगती है तो वर्तमान नि...
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  July 9, 2018, 1:58 pm
समय चक्र के घूमने के साथ ही अब फिर "घी"के दिन बहुरने लगे हैं। जी हाँ वही देसी घी जिसके पीछे, कुछ वर्षों पहले आहार, विहार, सेहत, स्वास्थ्य संबंधी विशेषज्ञ-डॉक्टर और ना जाने कौन कौन, पड़े हुए थे; इसकी बुराइयां और हानियाँ बताते हुए ! वैसे ही लोग उसी घी को आज फिर शरीर के लिए ...
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  July 6, 2018, 4:32 pm
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