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के.सी.वर्मा ''कमलेश''

हर तरफ से बस एक ही शोर है। संविधान है खतरे में वन्समोर है। अराजकता की धुंध दिख रही है कहीं! या सिर्फ़ हंगामा कुछ और है। सेंकने को अपनी राजनीतिक रोटियां, या जनता के दर्द का शोर है। है अगर बेचैनी तो खोल लो आँखे अपने ही हैं, नहीं कोई और है। ज्यादा दिन नहीं ढोते बोझ आजकल, क्योंकि ...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  June 7, 2018, 12:22 am
ना विषय बदलेंगे  ,ना सरोकार बदलेंगे। यही जो चूमते हैं दर,यही 'सरकार' बदलेंगें ।। वही कुर्सियां होगी , होंगी वही ज़िल्लतें सारी/ नीति वही होगी पर देखना ,कैसे ये नीयत का  आधार बदलेंगे।। प्रचंड बहुमत का नशा जब ,छाएगा इनके जेहन में। यही देखना कैसे चुपके से ,सभ्य व्यवहार बदलें...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  May 12, 2018, 4:48 pm
जब तक तेरी इन आँखों को, इंतजार रहेगा। तब तक मेरी इन आँखों में ,प्यार रहेगा।। अपलक खुली रहेंगी ये, उम्र भर के लिए, जब तक साँसों का ज़िस्म पर, अख्तियार रहेगा।। क्यूँ कर कोई चाहेगा ये, बन्द हो आंखे, जब तक तेरी चाहत का, छाया ख़ुमार रहेगा।। ये तो मुरीद हैं तेरे, दीदार की खातिर, इनका य...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  May 4, 2018, 1:06 am
मिलता हूँ रोज खुद से,पर मुलाकात नही होती। मिलती हैं नजरों से नजर ,पर बात नही होती । बन कर अज़नबी जी रहे हैं ,दोनों बरसों से। पर चाह कर भी हममे ,कोई बात नही होती। कभी तो लगता है अनजाने ,हो गये है ये आसमाँ-जमीं, इन्सान हो गया  खुद अपने से ,कितना अज़नबी। 'कमलेश' आज हम सब से  मिलेंगे ,य...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  April 13, 2018, 4:16 pm
हम दिलजलों पर ,मत हंसों यारों, कभी तो तुम्हारा भी ,दिल जला होगा। ऐसे ही नहीं कोई बन जाता ,कवि और शायर, इस दिल को ज़रूर, किसी ने छला होगा। कितना भी बच कर चले ,हम ज़माने से, कोई ना कोई इल्ज़ाम ,तो मिला होगा। मर मिटे होंगे हम कभी ,मासूम सूरत पर, जब तिरछी नज़र का ,तीर चला होगा।। कोई नहीं ह...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  April 8, 2018, 9:40 am
ना आई अब तक सदा ,उस मोड़ से, जहां हुए थे हम जुदा, सब छोड़ के। गमे जुदाई है इक  ,ज़हर ज़िन्दगी में, होता है धीरे धीरे असर,ज़िन्दगी में। सब कुछ रुक जाएगा, एकदम एक दिन, साथ छोड़ देगी ,सांसों की हवा एक दिन। उसके दीदार को ,अपने सच्चे प्यार को, चाहूं  पाना अपने,खोए वफ़ाए इज़हार को। मुड़ के इक दिन...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  March 31, 2018, 11:37 pm
29/3/18 कोई यूं ही नहीं बिछुड़ता , कोई राज़ रहा होगा, शिकवा कल का कोई होगा , कोई आज रहा होगा। हमको नहीं जररूत होगी शायद मेरी ज़माने को जाते हुए उसका यही , अंदाज़ रहा होगा। आबे हवा को रास्ता बताना फिज़ूल है, इनकी तरह  भी उसका तस्स्वुर बेपरवाह रहा होगा।। नश्तर की तरह चुभती हैं 'कमलेश' वो...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  March 29, 2018, 2:10 pm
होता है आज भी दर्द ,उसी ठिकाने पर। आया था दिल जिस दिन ,तेरे निशाने पर।। टीश उठती है आह निकलती है ,होंठों से, नहीं होने देते ज़ाहिर ,दर्दे दिल ज़माने पर।। जब भी तेरी जुदाई के ज़ख़्म, रिसते हैं कभी, सकून मिलता है यादों का ,मरहम लगाने पर।। पूछते हैं सभी मेरा हाले-दिल ,अब कैसा है, हंसत...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
Tag :दर्द
  March 27, 2018, 9:58 pm
आप खूबसूरत हो , इसमें कोई शक़ नहीं। किसी को तुम कमतर कहो, कोई हक़ नहीं।। मान लेते थे कभी आंखें मूंदकर, मगर बिल्कुल अब नहीं। बरबस याद तुम्हारी आ ही गयी, दिखी भोली सूरत जब कहीं। तमन्नाओं की गागर है अधूरी भरी, ढूंढती हैं नज़रें तुमको सब कहीं। मेरे ख्यालों में जो अक्श तामीर है, उस...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  March 2, 2018, 11:17 pm
हिन्दी से सबको सबसे, हिन्दी को है पूरी आशा ,फले-फूले दिन-रात चौगुनी ,जन-मानस की भाषा ।इसमें निहित है हमारे पूरे , देश राष्ट्र -धर्म की मर्यादा ,जितना इसका मंथन होता ,बढ़े ज्ञान अमृत और ज्यादा ।बदल रहें इसके कार्य -क्षेत्र ,बदल रही सीमा परिभाषा,आभाषी मन मचल रहे हैं ,ले एक नय...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
Tag :हिंदी
  December 15, 2017, 9:34 pm
जो थे चिराग कभी घर के, कैसे देहरी के बुझे दिये हो गये। जिनके बिना सभी रचनाएं थी अधूरी, कैसे जिंदगी के हाशीये हो गये ।। तुम्हारे लिए  ही वक़्त उनके पास था, आज वक़्त नहीं है उनके लिए, घर घर नहीं बन पाएगा बिन माँ बाप के, फिरता रहे बेरुखी के तिनके लिए। ये ना भूलेंगे तुझे ता उम्र भर , ...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  November 18, 2017, 12:47 am
समंदर के किनारों पर ,अपना नाम लिखता हूँ। पता है मिटा देंगी इन्हें लहरें। फिर भी बेखौफ आम लिखता हूँ।। खुद ही खींच कर समानान्तर लकीरें, उनके साथ चलता हूँ। कभी तो मिल जाएं ये आपस में, दुआओं संग यही पैग़ाम लिखता हूँ।। कहीं कोई छाप ना लग जाये , मेरे शब्दों पर, कभी रहीम लिखता हूँ ,...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  September 7, 2017, 9:59 am
आंसूओ के मोती ,यूँ जाया  ना करो , ये दौलत है कीमती, यूँ बहाया ना करो। हंसते रहना हमेशा, जिनकी फ़ितरत रही, उनकी खूबसूरती , बेवज़ह यूँ ही गंवाया ना करो। इनके गिरने से टूट जाते हैं, रास्ते के पत्थर, झूठे ज़ज़्बातों के ख़ातिर , पलकों को भिगाया ना करो। जिन आंखों का गर , सूख चुका हो पानी उ...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
Tag :कुदरत
  August 1, 2017, 11:53 am
दीया जलता रहा,मेघ बरसते रहे , उनके दीदार को ,ये नैन तरसते रहे। जा बसे हो जब से,पिया तुम परदेस में, नैन हर पल उसी राह में ,ये भटकते रहे। टीश सी उठती है,इस दिल के ज़ख़्म में, दर्दे -जुदाई में बिलखते रहे,सिसकते रहे। बीते लम्हों की माला ,इक 2पिरोती रही, लड़ी बनती रही,दर्द के लम्हे बिखरत...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
Tag :
  July 25, 2017, 1:09 pm
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के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
Tag :
  November 1, 2015, 10:21 pm
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के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
Tag :
  October 4, 2015, 8:37 pm
मैं हिन्दू हूँ वो मुसलमां है ज़माना रोज़ कहता हैं । मगर इंसान है दोनों। मैं भी समझता हूँ वो भी समझता है।। मगर ये दूरियां बनाने की कोशिशें कौन करता है। है ईमान खतरे में ये कान कौन भरता है।। ये मैं भी समझता हूँ और वो भी समझता है।। नही जब भेद है दिल में तो बाहर चौकसी कैसी । कहीं ...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  October 3, 2015, 7:53 pm
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के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
Tag :
  September 15, 2015, 9:05 pm
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के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  September 15, 2015, 12:18 pm
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के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  August 26, 2015, 10:10 pm
जब निकले तेरी गली से दिल में ख्याल आया। आता था कभी नज़र चाँद के टुकड़े का साया ।। बरबस नजरें अब भी ढूंढती है तुमको पर वीरान सी खिड़की को बन्द पाया। मन में कहीं अब भी बाकी है तेरी चाहत बन्द खिड़की में  दिखती है तेरी छाया।। भूल जाने की तेरी ज़िद ने तोड़ दी ज़िंदगी जी कर भी अपनी ना ,...
के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
Tag :
  August 19, 2015, 4:37 pm
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के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
Tag :
  August 7, 2015, 10:09 pm
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के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
Tag :
  August 2, 2015, 6:40 pm
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के.सी.वर्मा ''कमलेश''...
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  July 26, 2015, 1:19 pm
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