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हृदय गवाक्ष

  शाम का इंतज़ार करते हम और हमारा इंतज़ार करता चबूतरा। हमारी दिन भर की कारगुजारियों का कच्चा चिट्ठा वहीं तो खुलता था। खिलखिलाता, गुनगुनाता, एक दूसरे का मजाक उड़ाता, एक दूसरे के टेंशन से रात ना सोये जाने के किस्से भी सुनता।त्यौहारों की ड्रेस, शादियों की तैयारी, मैचिंग्स ...
हृदय गवाक्ष...
कंचन सिंह चौहान
Tag :संस्मरण
  August 5, 2012, 2:37 am
पिछले ९ सालों में उस बाज़ार के सारे भिखारी अब शक्ल से पहचाने जाने लगे हैं। वो बूढ़े दादा..जिनके पास गुदड़ियों का एक पूरा भंडार है। जिनकी दाढ़ी भी उलझ उलझ कर गुदड़ी ही बन गई है। वो तीखे नाक नक्श वाली उनकी गाढ़ी साँवली युवा पत्नी..जो उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर उनके धंधे में उनक...
हृदय गवाक्ष...
कंचन सिंह चौहान
Tag :यूँ ही
  June 1, 2012, 12:33 am
पिछले वर्ष  लगभग इन्ही दिनों गुरू जी के ब्लॉग पर ग्रीष्म का तरही मुशायरा  हुआ था। वैशाख आया भी और जाने को भी है, तो सोचा लाइये ये मौसमी बयार यहाँ भी चले.....दोस्त सी आवाज़ देती,गर्मियों की वो दुपहरी,और रक़ीबों सी सताती, गर्मियों की वो दुपहरी।ओढ़ बैजंती के पत्ते, छूने थे जिसक...
हृदय गवाक्ष...
कंचन सिंह चौहान
Tag :तरही मुशायरा
  April 23, 2012, 6:30 am
जिंदगी का सफर जब शुरू होता है, तब पता भी नही होता कि मंजिल तक पहुँचते पहुँचते कितने अंजान चेहरे अपने लगने लगेंगे। लगता ही नही कि सफर की शुरुआत में ये जिंदगी में थे ही नही। ऐसा लगता है कि ये तो जमाने से हमारे साथ ही थे।ऐसा ही एक चेहरा है मेरे लिये प्रकाश सिंह अर्श...२८ अप्रै...
हृदय गवाक्ष...
कंचन सिंह चौहान
Tag :गुरुकुल
  April 18, 2012, 2:40 am
लगभग १० माह..... और गवाक्ष के कपाट खुले ही नही.....इस वर्ष की शुरुआत के बाद चौथाई से अधिक वर्ष भी बीत गया.... बस इसलिये कि खिड़कियाँ खोलूँ, तो शायद कुछ ताज़ी हवा मिले, कुछ राहत हो दम घुटते माहौल से....जाते हुए चैत को विदा देते हुए....चुवत अन्हरवे अजोर ओ रामा, चईत महिनवा,अमवा मउरि गईलें, ...
हृदय गवाक्ष...
कंचन सिंह चौहान
Tag :यूँ ही
  April 5, 2012, 4:53 pm
खाना जल्दी से बना के रख देना है। वर्ना किचेन में ही आ के बैठ जायेगा। और एक बार बात शुरू होगी तो खतम ही नही होगी। फिर दीदी गुस्सा होंगी। किचेन में ही बैठकी जम जाती है तुम्हारी।वो खाना बना कर बाहर बराम्दे मे ऐसी जगह बैठी है, जहाँ से सड़क के मोड़ की शुरुआत दिखाई देती है। कोई आता...
हृदय गवाक्ष...
कंचन सिंह चौहान
Tag :जन्मदिन मुबारक़
  June 16, 2011, 7:00 am
गुरू जीकी पोस्ट पर टिप्पणी करने गयी, तो यादों के गलियारे में ऐसी भटकी कि टिप्पणी बन गयी पोस्ट... तो वो ही सही !!१९८३ पता नही याद है या बार बार याद दिलाने के कारण याद रहता है। पड़ोस की टी०वी० पर सब के साथ मुझे भी ले जाया गया था। ये जून की बात है और हमारे यहाँ उसी साल सितंबर में टी...
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कंचन सिंह चौहान
Tag :विश्व कप २०११
  April 6, 2011, 1:48 pm
पिछले १० वर्षों से साथ रहने के बावज़ूद.... वो ये नही समझा कि ये परिवर्तन जो उसे सुखद लग रहे हैं, वो किसी की जीवंतता की समाप्ति का लक्षण है। उसे नही पता चल रहा कि उसके साथी ने इतना नाटकीय जीवन कभी नही जिया....!कितना अजीब है ? कि वो समझ भी नही पा रहा कि ऐसा होना तितलियों के रंगीन पर...
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कंचन सिंह चौहान
Tag :यूँ ही
  March 23, 2011, 8:52 pm
सोचतीहूँकिवोरातें,जो इस तसल्ली मिली बेचैनी से बिता दी जाती थीं,कि इधर हम इस लिये जग रहे हैं क्योंकिउधर कोई जागती आँखें ले कर जगा रहा है हमें....कितनी आसानी से कट जातीं,११ रू के एसएमएस पैक से,सायलेंट मोड मोबाईल के साथ।यावोदिन,जो इस सोच में कटते थे कितुमजानेकहाँहोगेआज....?क...
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कंचन सिंह चौहान
Tag :अकविता
  March 7, 2011, 8:00 am
रात के साढ़े ग्यारह बजे आप जब वैलेंटाइन डे को स्पेशल बनाने की ललक में घर से बाहर निकलते हैं कोई भी कपल नज़र नही आता। असल में तो सड़क भी लगभग सूनी ही है। मतलब लखनऊ की सड़क पर अगर १०-१२ लोग दिख भी रहे हैं तो, सूनी ही कही जायेगी ना। बाज़ार में पहुँचने पर सिर्फ एक प्रकार की दुकानें ...
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कंचन सिंह चौहान
Tag :वैलेंटाइन डे
  February 14, 2011, 12:30 pm
You're my Honeybunch, SugarplumPumpy-umpy-umpkin, You're my Sweetie PieYou're my Cuppycake, GumdropSnoogums-Boogums, You're the Apple of my EyeAnd I love you so and I want you to knowThat I'll always be right hereAnd I love to sing sweet songs to youBecause you are so dear(Lyrics and Music by Judianna Castle)ये सब आज भी उसी उम्र में ले कर चला जाता है....। छोटा सा....! दाढ़ी वाले गाल को हटाता और मन में सोचता ..... एक बार एक और पप्पी मिल जाये...!! म्म्म्म्म्आऽऽऽ... क्या खाया ...
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कंचन सिंह चौहान
Tag :श्रद्धांजली
  February 7, 2011, 1:13 pm
हाल चाल लेने की जनरल कॉल करती हूँ, तो उसकी आवाज़ थोड़ी डल लगती है।"क्या हाल है?""ठीक है।"" क्या हुआ बड़ा शोर है?""हम्म्म.. वो यहाँ आया था ना ! नीरा दी के घर""ओके ओके...नीरा ठीक है ?"" अरे वो मौसी..... वो... नीरा दीदी के ससुर एक्सपायर कर गये।""क्या ऽऽऽ ?? हे भगवाऽऽन !"मैने फोन काट दिया। ३ दिन पहले ...
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कंचन सिंह चौहान
Tag :यूँ ही
  January 20, 2011, 5:24 pm
देख रही हूँ कि ब्लॉग लेखन के मेरे आँकड़ें कम से कमतर होते जा रहे हैं। २००७ से कम २००८ में, २००८ से कम २००९ में और २००९ से कम २०१० में...! मात्र २३ पोस्ट.. इस पोस्ट को मिला कर।सोच रही हूँ कि गिरिजेश जी का आईडिया मुझे पहले क्यों नही आया और मैने क्यों नही रखा अपने चिट्ठे का नाम "एक आ...
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कंचन सिंह चौहान
Tag :नव वर्ष मंगलमय
  December 27, 2010, 5:27 pm
माँ ना जाने कब से नाराज़ होती थी ? याद नही ...!इसलिये नही याद कि तब बहुत सारे कवच थे, बाबूजी, दोनो दीदियाँ और मेरी सबसे बड़ी भाभी। इन सब के बीच गर्मियों में दोपहर १२. ३० और सर्दियों मे शाम के लगभग ३.३० बजे मिलने वाली माँ का गुस्सा याद नही...!बहुत छोटे पर जब अपनी बात पूरी ना होने पर ...
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कंचन सिंह चौहान
Tag :माँ
  December 8, 2010, 3:23 pm
वो कहता है कि मैं दुनिया के लिये लिखती हूँ, कभी उसके लिये नही। जाने कितनी बार कहा है और मैं फिर भी नही लिखती। क्योंकि मैं अब भी नही समझ पाती कि उसके लिये कैसे लिखा जा सकता है, जिससे आपके २४ घंटे चलते हों। अम्मा अगर ७५ साल की ना हुई होतीं, तो उनके लिये क्या लिखती ? कैसे लिखती ? ...
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कंचन सिंह चौहान
Tag :जन्मदिन मुबारक़
  November 25, 2010, 6:00 am
लोग कहते हैं किअब मेरे लिखने में नही रही वो बात जो पहले थी।कैसे बताऊँ उन्हे,कि लिखना तो दर्द से होता है।और मेरा दर्द तो बहुत पुराना हो गया है अब,इतना ....कि अब ये दर्द हो गया है साँसों की तरह सहज और अनायास।चाहे जितनी भी असह्य पीड़ा हो,आप कितनी देर तक चिल्ला सकते हैं उस पीड़ा से...
हृदय गवाक्ष...
कंचन सिंह चौहान
Tag :अकविता
  September 27, 2010, 7:00 am
होठों पर जिह्वा पर छाले,टेर टेर कर हम तो हारे,सब लौटे पर वो ना लौटे,ऐसे छूटे छूटने वाले।भीड़ भरी लंबी सड़कों पर, दूर तलक नज़रें हैं जातीं,सब मिलते बस तुम ना मिलते, हूक भरी रह जाती छातीलाखों लाखों मान मनौव्वल, सुबह शाम निशिदिन हर क्षण पल,सब माने बस वो ना माने,ऐसे रूठे रूठने वा...
हृदय गवाक्ष...
कंचन सिंह चौहान
Tag :डायरी के पन्नों से
  September 11, 2010, 10:40 pm
जी करता है तुम्हारी चैट का प्रिंट आउट निकाल कर सिरहाने रख लूँ, और पुराने खतों की तरह पढ़ूँ रोज सोते समय ...
हृदय गवाक्ष...
कंचन सिंह चौहान
Tag :अकविता
  August 30, 2010, 7:00 am
यूँ कलाइयाँ तो हैं कई,पर मानव मन,ढूंढता है वही, जो खो गया कहीं...
हृदय गवाक्ष...
कंचन सिंह चौहान
Tag :
  August 23, 2010, 10:19 pm
वो कहता था कि "रोने के बाद आँखें और अच्छी लगने लगती हैं आपकी।" मैं कहती थी "इसीलिये तो वही काम करते हो जिससे मैं बस रोती ही रहूँ।" वो बहुत दूर चला गया, मैं हर बार रोने के बाद खुद से ही कहती"तुमने जानबूझ कर ऐसा किया, तुम्हे मैं रोती ही अच्छी लगती थी....!" पता था कि वो यही कहीं है, कि ...
हृदय गवाक्ष...
कंचन सिंह चौहान
Tag :गुलज़ार
  August 16, 2010, 7:00 am
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