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Blog: आस अभी भी... प्यास अभी भी...

Blogger: sankarshan
मैं किसी पर क्यों भला ऊँगली उठाऊँमैं स्वयं से दूर होता जा रहा हूँ !एक समय था मैं पिता का हाथ थामेसाथ चलता था कि खो न जाऊँ कहीं ,और माँ की गोद में था खेलता रहतानिर्भीक हो कर ज्यों समूची दुनिया हो वहीं!एक समय है राह पर काँटे ही काँटे हैं,और अकेले ही मुझे उस पर जाना है,भय, नि... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   5:40am 3 Nov 2016 #
Blogger: sankarshan
  मिट्टी  को थोड़ा मृदु बना मैंने बोया था बीज एक ,खाद दिया, जल - धूप - छाँह पर बाधा आती रही अनेक !  मिट्टी में तब अंकुर फूटे जब स्वेद बहा , उद्योग हुआ संपर्क नए नित बढ़े जभी पौधे को हिल - मिल रोग हुआ !  ये रोग पड़ा भारी मुझ पर माली था , त्याग न सकता था । आ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   6:06pm 9 Mar 2014 #
Blogger: sankarshan
   छोटी - छोटी बातों से तुम व्यर्थ परेशाँ होते हो !  छोटी - छोटी बातों से तुम व्यर्थ परेशाँ होते हो !इनसे निजात पाने को बस मुस्कान एक ही काफ़ी  है !! मंज़िल का रस्ता भटक गये तो नई राह ईज़ाद करो !वरना पैरों में खौफ़ भरने को ख़ार एक ही काफ़ी  है !! अपने गुनाह पर दिल से शर्मिन्दा हो तो यह... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   3:18am 19 Feb 2013 #
Blogger: sankarshan
   छोटी - छोटी बातों से तुम व्यर्थ परेशाँ होते हो !  छोटी - छोटी बातों से तुम व्यर्थ परेशाँ होते हो !इनसे निजात पाने को बस मुस्कान एक ही काफ़ी  है !! मंज़िल का रस्ता भटक गये तो नई राह ईज़ाद करो !वरना पैरों में खौफ़ भरने को ख़ार एक ही काफ़ी  है !! अपने गुनाह पर दिल... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   3:18am 19 Feb 2013 #
Blogger: sankarshan
ज़िन्दगी को टटोल कर देखा तो वक़्त के कुछ टुकड़े हाथ में आ गए और टुकड़े भी ऐसे ,कि जिनकी कोई पहचान नहीं !ख़ुशी वाले वक़्त के टुकड़े हैं या  ग़म के ,आशा के हैं या निराशा को जन्म देने वाले ...कुछ भी तो नहीं मालूम !क्या करूँ मैं इनको ले कर ?ज़िन्दगी की चादर अभी फटी भी तो नहीं ,वरना कोई ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   4:18am 21 Sep 2012 #
Blogger: sankarshan
कुरुक्षेत्र की युद्ध - भूमि के समान है जीवन ,इंसान जिसमेंमहाभारत के किसी पात्र को जीता है ।अपना सर्वस्व दे कर ,विजय की आशा में युद्ध करता है ...पराजित हो कर जीवन का मार्ग अवरुद्ध करता है ;और जयी होता है तोजीवन को संतुलित और शुद्ध करता है ।मैंने भी जिया है कुरुक्षेत्र को ।जी... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   1:17am 13 Mar 2012 #
Blogger: sankarshan
जहाँ ठोकर की थी उम्मीद , वहीं पर खड़ा हुआ !मैं ज़माने की जलती निगाहों के बीच बड़ा हुआ !!बड़ा अनमोल हूँ लेकिन पहुँच से दूर हूँ सबकी !मुझे वो ढूँढ लेंगे , एक खज़ाना हूँ गड़ा हुआ !!मेरी आँखों में सपने और मेरे पाँव में छाले !मेरे है सामने मंज़िल औ' मैं गुमसुम , डरा हुआ !!मुझे बेशक़ बुरा समझ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   12:02am 11 Mar 2012 #
Blogger: sankarshan
वर्ष नव ,हर्ष नव ,जीवन उत्कर्ष नव !नव उमंग ,नव तरंग ,जीवन का नव प्रसंग !नवल चाह ,नवल राह ,जीवन का नव प्रवाह !गीत नवल ,प्रीति नवल ,जीवन की रीति नवल !जीवन की नीति नवल !जीवन की जीत नवल !- बच्चन जी !नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   11:26am 26 Oct 2011 #
Blogger: sankarshan
उनसे महज़ दोस्ती की है !पर उनके नाम ज़िन्दगी की है !!ग़म को ख़ुशी के चिराग़ों में डाल कर !बुझते हुए वक़्त पे रौशनी की है !!आशियाने का सपना पूरा हुआ आख़िर !खुद के नाम दो गज ज़मीं की है !!कोई और न आ कर कुचल डाले इन्हें !अरमानों ने यही सोच कर ख़ुदकुशी की है !!'गिरि' ने खुद को गुनाहगार सा... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   11:17am 26 Oct 2011 #
Blogger: sankarshan
जब से मैं खुद से मिला हूँ !मैं अकेला हो चला हूँ! चाँद खुद से नहीं रौशन ,मैं मगर जलता दीया हूँ !ठोकर लगी तो बैठ जाऊं ?आँधियों का सिलसिला हूँ !वो मुझमे देखता है अक्स अपनी ,महबूब का मैं आइना हूँ !फूल जैसे धूल में लिपटे हुए हों ,जैसा भी हूँ अपनी माँ का लाड़ला हूँ !- संकर्षण गिरि ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   3:05am 2 Oct 2011 #
Blogger: sankarshan
इक अजब - सा द्वन्द्व मन में !क्या करूँ , थोडा व्यथित हूँ ,स्वयं से ही मैं चकित हूँ ,क्यों मुझे संघर्ष करना पड़ रहा इन्द्रिय - दमन में !इक अजब - सा द्वन्द्व मन में !पत्थर बनूँ या फूल कोमल ,फ़ैसला करने में असफल ,उर को जब भी ठेस पहुँची , आ गए आँसू नयन में ! एक अजब - सा द्वन्द्व मन में !लक... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   8:16am 17 Sep 2011 #
Blogger: sankarshan
ख़ुदाको 'गिरि' का सुकून ... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   8:01am 4 Sep 2011 #
Blogger: sankarshan
ईद , मीठी ईद !हो गयी महीन से मुस्कान वाले चन्द्रमा की दीद !ईद , मीठी ईद !!बारिश दुआ की ,रहमत ख़ुदा की ,आमीन ! सब पर रौशनी करता रहे ख़ुर्शीद !ईद मीठी, ईद मीठी , ईद मीठी , ईद !!ईद , मीठी ईद !! - संकर्षण गिरि ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   5:00am 30 Aug 2011 #
Blogger: sankarshan
किससे मैं उम्मीद करूँ , समझेगा मेरी कौन बात ! कौन चाहता है मुझ पर मुस्कान खिले , किसको धुन है नींद चैन की सोऊँ मैं ? है कद्र किसे जज़्बात , मेरे अहसासों की , कौन मुझे गलबाँही दे जब रोऊँ मैं ? शुष्क पीत तरु की फुनगी , पतझर में जैसे फूल - पात ! किससे मैं उम्मीद करूँ , समझेगा मेरी कौन बा... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   1:42am 28 Aug 2011 #
Blogger: sankarshan
चुभतीहुईयादें... चुभतीहुईकुछयादें , अचानकज़ेहनमेंआकर , करजातीहैंमनकोखिन्न... चुभतीहुईयादें , बार - बारउन्हींपलोंमेंलेजातीहैंमुझे , जीनेकोमजबूरकरतीहैंफिरसेवहीलम्हे ! औरटूटकरफिरसेबिखरजाताहूँमैं ; दग्धह्रदयलिएवर्तमानमेंवापसआताहूँमैं। चुभतीहुईयादेंज़ख्मबनकरचि... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   3:58am 15 Aug 2011 #
Blogger: sankarshan
मेरे जीवन में आयीं तुम ,भाई को उसकी बहन मिली ;बहन का भाई से अटूट स्नेह का रिश्ता है ,भाई के लिए उसकी बहन एक फ़रिश्ता है...!- संकर्षण गिरि ... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   6:56pm 12 Aug 2011 #
Blogger: sankarshan
तेरे रूख्सार पे अश्क़ों की ये बूँदें कैसी ,ये जुदाई तो महज चंद दिनों की होगी !फूल - सा चेहरा तेरा गर अभी मुरझायेगा ,चैन से मेरा सफ़र क्या कभी कट पायेगा ,तेरी मुस्कान ही मेरे लिए ताक़त होगी !तेरे रूख्सार पे अश्क़ों की ये बूँदें कैसी !!दूरी चाहत को बढ़ाती है , ये सच है सुन ले ,आने ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   3:08am 30 Jul 2011 #
Blogger: sankarshan
नयनाभिराम है दृश्य ,क्योंकि तक रहे नयन हैं तुमको !अखिल सृष्टि के कोलाहल में ज्यों कोकिल की वाणी ,अंतर के सूनेपन को भरने वाली कल्याणी !आज हिलोरें मार रहा उर पा अपनी प्रेयसी को , आज नयन के कोरों में उठ छलक पड़ा है पानी !आज अलौकिकता को मैंने अपनी बाहों में घेरा ,आज भुवन संपूर्... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   6:38pm 24 Jul 2011 #
Blogger: sankarshan
छलकते नयनों से दो चार ,बूँद में बह गया सारा प्यार !चिता की धूम्र उठी नभ में ,उठा ले गया मिट्टी कुम्हार !वहाँ तक बचपन आ पहुँचा ,जहाँ पर सीमित है अधिकार !रात ने सूनेपन के साथ ,अँधेरा मुझसे लिया उधार !मैं तब भी बहुत अकेला हूँ ,कि जब ये पृथ्वी है परिवार !- संकर्षण गिरि ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   4:23pm 9 Jun 2011 #
Blogger: sankarshan
तुम मुझको गलबाँही देना , मैं दूँगा संसार !तुम रखना बस नींव प्रेम की , मैं दूँगा विस्तार !!तुम नभ की जब ओर तकोगी , छूने की आशा में !मैं तब साथ तुम्हारे चल कर , चुनूँगा पथ के ख़ार !!मेरी जितनी ऊँचाई है , उतनी ऊँची तुम !हम दोनों का एक दूसरे पर है सम अधिकार !!प्रेम भावना होगी तब ही सफल स... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   5:51am 28 May 2011 #
Blogger: sankarshan
घृणा के बोये मैंने बीज ,उठी अंतर से करुण पुकार ,कहीं पर सिसक उठी एक रूह ,किसी का भूला भटका प्यार !समय के तरकश से अक्सर ,निकलते रहे हैं तीर अचूक ,जिन्होंने बेधे मेरे प्राण , कि जिससे वाणी हो गयी मूक !समंदर सूख गया निर्लज्ज ,जगा कर मेरे उर की प्यास ;भ्रमर को पत्थर से क्या काम ,भ्र... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   2:10pm 14 May 2011 #
Blogger: sankarshan
स्वप्न की जब सत्य से टक्कर हुई , किस्मत मेरी कुछ और भी जर्जर हुई !छोटी - सी उम्र में बड़े अनुभव हुए , रुसवाइयाँ हुईं तो वो जम कर हुईं !वक़्त का चेहरा बड़ा मासूम है , धोखे में रहा , गलती ये अक्सर हुई !पत्थर है वो , पूजा के काबिल , मैं फूल, मेरी दुर्गति खिल कर हुई !दूर से ही दीखता है चाँ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   5:03am 4 Apr 2011 #
Blogger: sankarshan
बहुत दिनों से सोच रहा था मैं भी कविता लिखूँ ,आज लेखनी उछल पड़ी है क्या करती है देखूँ !बालक मैं नादान बहुत हूँ कविता टेढ़ी खीर ,अरे लेखनि ! क्यों उठती है तेरे दिल में पीर ?इसीलिए कि पिता जी मेरे कविता करते रहते हैं ,और मेरे अग्रज जी भी इस धुन में आगे रहते हैं ?जब इस घर में सब कोई कव... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   6:02am 12 Feb 2011 #
Blogger: sankarshan
२२ अगस्त , २००९ को चेन्नई में समंदर पहली बार महसूस करने पर...मैंने आज समंदर देखा !लहरों का चढ़ना - उतराना ,लहरों का संगीत सुनाना ,दूर क्षितिज तक जल ही जल , यह दृश्य बड़ा ही सुन्दर देखा !मैंने आज समंदर देखा !सीने में तूफ़ान है मगर ,स्वागत सबके पाँव चूम कर !ऐसा ही एक सागर मैंने अपने ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   2:25pm 11 Jan 2011 #संगीत
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