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आस्था के सैलाब की परिणिति दु:खों के सैलाब के रूप में हो गयी है. उत्तराखंड में विशेष रूप से गढ़वाल के दुर्गम पहाड़ों में स्थापित तीर्थ इस बार प्राकृतिक आपदा के शिकार हुए हैं. हजारों की संख्या में जनहानि व कई करोड़ रुपयों की धनहानि हुई है. प्रकृति के इस निष्ठुर रूप की किसी ...
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Tag :सामयिक
  June 27, 2013, 6:08 am
सुन्दरी बहुत सुन्दर तो नहीं थी, पर माता-पिता को उसमें सारी सुंदरता नजर आई थी क्योंकि उन्होंने उसे बड़ी मिन्नतों के बाद पाया था तदनुसार नाम भी रख लिया था. ज्यों ज्यों वह बड़ी होती गयी चँचल व बदमिजाज भी होती गयी. ऐसे बच्चे जब जवान हो जाते हैं तो कभी कभी माता-पिता के वश में भ...
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Tag :कहानियां
  June 25, 2013, 7:46 am
पण्डित लोग बच्चों के पैदा होते वक्त के ग्रह-नक्षत्रों की गणना करके राशि निकाल लेते हैं और तदनुसार नामकरण कर देते हैं. बच्चा जब बड़ा होता है तब उसे महसूस होता है कि उसका नाम कुछ और होता तो कुछ बात और अच्छी होती.कपोतसिंह क्षेत्री जब हाईस्कूल में पढ़ रहा था तो उसने जयशंकर प...
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Tag :कहानियां
  June 23, 2013, 6:45 am
जो लोग अपने जीवन में कुछ बड़ी उपलब्द्धि हासिल नहीं कर पाते हैं, वे अपने बच्चों से अपेक्षा रखते हैं कि उस ऊँचे मुकाम तक पहुंचें, जो कभी उनके अपने कल्पनालोक का लक्ष्य था, पर ऐसा हमेशा कहाँ हो पाता है? उनको अपने ही आत्मजों के साथ नई सामाजिक परिवर्तनों में व्यवस्थित होने में ...
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Tag :कहानियां
  June 21, 2013, 8:10 am
बड़े नामी शायर, निदा फाजली साहब, एक टेलीविजन चेनल द्वारा आयोजित गोष्ठी में कह रहे थे, “समय के साथ सब बदलता जाता है. नरेंद्र मोदी जी जो बारह साल पहले थे अब निश्चित तौर पर बदल गए होंगे. उनकी धार्मिक कट्टरता पहले जैसी नहीं रहेगी क्योंकि उनको देश चलाने के लिए आगे लाया जा रहा ह...
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Tag :सामयिक
  June 19, 2013, 6:31 am
प्रकृति ने हमें अनेक औषधीय गुणों वाले फलों से नवाज़ा है. इनमें से बिल्व फल भी एक है. यह संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसे साधारण बोलचाल में ‘बेल’ कहा जाता है. अंग्रेजी में इसे wood apple कहते हैं. बेल प्राय: दक्षिणी एशिया के सभी समशीतोष्ण जलवायु वाले देशों में पाया जाता है. भारत के स...
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Tag :सामयिक
  June 17, 2013, 7:26 am
(१)पति: बेगम, तुम बहुत खूबसूरत होती जा रही हो.पत्नी : (रसोई घर से, खुश होकर) तुमने कैसे जाना?पति : खुशबू आ रही है तुम्हें देखकर रोटिया भी जल रही हैं.  (२)एक लड़की को तीन लड़कों ने एक साथ प्रपोज किया. पहला: मैं तुम्हारे लिए जान तक दे सकता हूँ.लड़की: ऐसा तो सभी दीवाने कहा करते हैं.दू...
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Tag :चुटकुले
  June 15, 2013, 7:06 am
मुझे अपने साथ घटी अप्रिय घटनाओं को भूल जाने की आदत है. इसका लाभ ये होता है कि घाव हरे नहीं रहते है. यह स्वभाव की बात है, लेकिन मेरे साथ घटी तीन सच्ची घटनायें ऐसी हैं जो याद करने पर आज भी सिहरन पैदा करती हैं. इनको मैंने मौत से साक्षात्कार के रूप में अनुभव किया है.पहली घटना:तब ...
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Tag :संस्मरण
  June 13, 2013, 7:30 am
गोपू उर्फ गोपालकृष्ण सेंट जेवियर में सेवन्थ स्टेंडर्ड में पढ़ता है. आज जब वह स्कूल बस से उतर कर घर की तरफ चला तो पीछे से एक औरत ने अपने साथ चलने वाली दूसरी औरत से कहा, “ये मोटू किस चक्की का आटा खाता होगा?”गोपू ने मुड़ कर उस औरत की तरफ देखा तो वे दोनों उसके डील-डौल पर हँस रही ...
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Tag :किशोर कोना
  June 11, 2013, 8:15 am
रिन्कू नाम है उसका. उसको अपनी जाति का पता नहीं है. उसकी माँ ने केवल यह बताया था कि उसका बाप उसके पैदा होने से पहले कहीं गायब हो गया था. कहानी की शुरुआत यों होती है कि बाईस साल पहले आगरा के मोहनपुरा इलाके में एक मजदूर जोड़ा, बाबू और उसकी पत्नी नट्टी, कहीं राजस्थान के देहात से...
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Tag :कहानियां
  June 8, 2013, 7:03 am
उत्तरांचल के लीलाधर भट्ट अपनी जवानी में ही लखनऊ आ गए थे. एक सरकारी अस्पताल में बतौर वार्ड-बॉय नियुक्ति पा गए थे. ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे इसलिए साठ साला रिटायरमेंट तक ‘बॉय’ ही रहे.लीलाधर भट्ट बड़े सज्जन, सरल व आस्थावान व्यक्ति हैं, गरीबों, निराश्रितों की सेवा सुश्रुषा म...
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Tag :कहानियां
  June 6, 2013, 8:26 am
इस देश का कुछ नहीं होने वाला. ये यों ही घिसट कर चलेगा क्योंकि पूरे कुँवे में ही भांग पडी है. पूरे तन्त्र में भ्रष्टाचार अब कैंसर रोग की तरह अपनी जड़ें जमा चुका है.हमारे संविधान के तहत दी गयी राजनैतिक व्यवस्था भ्रमित होकर फेल हो गयी है. कोई सिद्धान्त नहीं रहा, सब तरह कुर्स...
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Tag :
  June 4, 2013, 6:05 am
(१)एक दुबले-पतले साहब की पत्नी कुछ ज्यादा ही मोटी-भारी थी. स्वभाव से अति आलसी भी. एक दिन बिस्तर पर पड़े पड़े दार्शनिक अंदाज में पति से बोली, “अजी, मौत कौन सी अच्छी रहती है, जो धीरे धीरे अपने आगोश में ले ले या चटपट आ जाये?”पति बड़ी देर से परेशान था क्योंकि पत्नी ने अपनी एक टांग...
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Tag :
  June 2, 2013, 8:00 am
(गाँव वालों की जुबानी)मनोरथ पांडे अंग्रेजों के जमाने में पटवारी थे. पटवारी बहुत बड़े इलाके का हाकिम होता था. तब एकीकृत अल्मोड़ा जिला काफी लंबा चौड़ा था. पिथोरागढ़, चंपावत और बागेश्वर को तहसील का दर्जा भी प्राप्त नहीं था. पटवारी यद्यपि राजस्व विभाग का बड़ा अधिकारी नहीं ...
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Tag :कहानियां
  May 31, 2013, 6:54 am
मैं भी तुम्हारी तरह ही एक सामाजिक प्राणी हूँ. मैं आकार में बहुत छोटी जरूर हूँ पर मेरा परिवार आपके परिवारों से कई गुना बड़ा होता है. हमारे परिवार की मुखिया एक ‘रानी माँ’ होती है. हम सब चीटियाँ उसकी सेवा में रात-दिन व्यस्त रहती हैं क्योंकि वह हम सब की जननी है. इसके अलावा परि...
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Tag :किशोर कोना
  May 29, 2013, 8:15 am
२७ मई १९६४ के दिन मैं ट्रेन से बड़े सवेरे जयपुर पँहुच गया था. मैं उन दिनों ‘लाखेरी सीमेंट कामगार बहुधंधी सहकारी समिति' का अवैतनिक महामंत्री भी था. सोसाइटीज के रजिस्ट्रार के कार्यालय में अपने विधान में संशोधन कराने के लिए कागजात पेश करने थे. मैं रात की ट्रेन से सवाईमाधो...
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Tag :संस्मरण
  May 27, 2013, 6:23 am
अब शहरों में सीमेंट के पक्के मकानों में चिड़ियों की रिहाइश नहीं रही क्योंकि घरों में उनके लिए कोई ‘कोटर’ नहीं छोड़े जाते हैं. हमारे शहर के कुछ पर्यावरण प्रेमियों ने पिछले ‘गौरैय्या दिवस’ पर कुछ खास किस्म के लटकने वाले लकड़ी के डिब्बे घोसलों के लिए लोगों में बांटे थे, ...
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Tag :संस्मरण
  May 25, 2013, 6:36 am
(चित्र सौजन्य treepicturesonline.com)हमारी हल्द्वानी में उत्तराखंड की सबसे बड़े कृषि उपज मंडी है. बारहों महीने यहाँ गहमा-गहमी रहती है. अनाज व सब्जियों के साथ ही मौसमी फलों की बहार रहती है. अब आम की फसल आने वाली है, पर स्थानीय लीची बाजार में बहुतायत से आ चुकी है. कहते हैं कि अगर आम फलों क...
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Tag :सामयिक
  May 23, 2013, 7:34 am
दुर्गालाल राजपूत के नाम में ‘सिंह’ नहीं जुड़ा क्योंकि वह एक दासी का बेटा था. उसका बाप बृजराज भी उसी की तरह पिछली पीढ़ी का ‘गोला-बाँदा’ था.वह जब छोटा था तो उसे इन रिश्तों की कोई समझ नहीं थी और राजमहल की जनानी ड्योढ़ी की दासियों व उनके खैरख्वाह हिजडों की जो दुनिया उसने देख...
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Tag :कहानियां
  May 21, 2013, 7:50 am
आज की बैठक ‘क्रिकेट मैचों में फिक्सिंग की बीमारी’ पर सदस्यों के विचार जानने के लिए आहूत की गयी थी. उपस्थिति २१ थी. न. १ : साथियों, देश का सर एक बार फिर शर्म से झुक गया है. भ्रष्टाचार के मामलों में हमने क्रिकेट जैसे ‘जेंटिलमैन खेल’ को भी नहीं छोड़ा. क्रिकेट को टुच्चे खिलाड़ि...
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Tag :सामयिक
  May 19, 2013, 6:47 am
तब फूलों केकलियों केसपने आते थे,झरने बहते थे,हवा मे अठखेलियाँ हुआ करती थी,मन का पंछी-बिना गुदगुदाए मुस्काता था,हंसता रहता था.दूर क्षितिज के उस पार-किसी  से तार जुड़े थेअपनेपन के रिश्ते;जिनकी मुझे प्रतीक्षा रहती थी .फिर उजास, स्वर्णिम आभा मेंतृण-बेल-लता-बृक्षरसीले, मधुर...
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Tag :कवितायेँ
  May 17, 2013, 6:29 am
(१)डॉक्टरों की खराब लेखनी के बारे में यह मिथक बना हुआ है कि अपनी लिखाई कभी कभी वे खुद भी नहीं पढ़ पाते हैं, लेकिन कैमिस्ट/फार्मसिस्ट उसे आसानी से पढ़ लेते हैं.एक युवती एक मेडीकल स्टोर पर खड़ी थी. भीड़ के कम होने का इन्तजार करती रही. जब सब चले गए तो उसने फार्मसिस्ट से याचना भ...
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Tag :चुटकुले
  May 15, 2013, 7:17 am
भारतवर्ष के इतिहास में ईसा से लगभग ३०० वर्ष पहले एक कल्याणकारी शासक हुए जिनको अशोक महान के नाम से जाना जाता है. वे मौर्य वंश के राजा थे. अपने राज्य की सीमाओं को बढ़ाते हुए जब उन्होंने कलिंग के युद्ध में नरसंहार देखा तो इतने द्रवित हो गए कि इसके बाद उन्होंने कोई युद्ध नही...
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Tag :सामयिक
  May 13, 2013, 7:04 am
मेरे घर के पिछवाड़े, दक्षिण की तरफ मेरे पड़ोसी ने कतार में अनेक अशोक वृक्ष लगा रखे हैं. ग्रीष्म के दिनों में तेज गर्म हवाओं का सामना करते हुए इनके सुन्दर हरे पत्तों की सरसराहट बहुत प्यारी लगती है. सुबह सुबह खिड़की पर से इन अशोक वृक्षों के दर्शन से सुखद अनुभूति भी होती है....
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Tag :सामयिक
  May 12, 2013, 6:48 am
अब से लगभग ३५० वर्ष पूर्व का समय हिन्दी साहित्य की कविताओं का ‘रीति काल’ कहा जाता है. इससे पूर्व का समय ‘भक्ति काल’ के नाम से जाना जाता है. जिसमें सूरदास, तुलसीदास, कबीरदास, रैदास आदि अनेक कवि हुए थे.रीति काल के कवियों की विशेषता यह थी कि वे श्रृंगारिक रचनाएँ लिखा करते थे. ...
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Tag :किशोर कोना
  May 10, 2013, 8:09 am
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