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कभी-कभार

       हाल ही में फेसबुक पर एक विडियो देखा, जो सम्भवतः महाराष्ट्र के किसी कॉलेज के घरेलू कार्यक्रम का है। (हो सकता है कि यह विडियो वायरल हो और प्रायः सबने देख रखा हो।) विडियो में एक नौजवान छात्र फिल्मी गाने- 'तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ'पर नृत्य कर रहा है...
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  June 30, 2019, 12:40 pm
       बाँस को हालाँकि पेड़ नहीं माना जाता- यह घास की श्रेणी में आता है (पादप विज्ञान के अनुसार, यह ग्रामिनीई (Gramineae) कुल की एक अत्यंत उपयोगी घास है), पर हम इसे यहाँ पेड़- पेड़ क्या, 'महीरूह'मान कर चल रहे हैं।        ***       अपने घर के पिछवाड़े में जो थोड़ी-सी परती ...
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  May 6, 2019, 9:46 pm
       साहेबगंज हमारे जिले का भी नाम है और उस शहर का भी नाम है, जहाँ हमारा जिला मुख्यालय है। यह विडियो हमने आज ही साहेबगंज रेलवे स्टेशन के नये बने फुट ओवर ब्रिज से बनाया है। विडियो के अन्त में आपको एक वाष्प इंजन दिखायी पड़ेगा, जिसे अब उठा कर स्टेशन के सामने प्राँगण ...
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  May 4, 2019, 6:40 pm
       हमारे बरहरवा में एक गोलीकाण्ड हुआ था- पुरानी बात है- सम्भवतः 1982 की। हमलोग आठवीं-नवीं कक्षा में थे। रेलवे स्टेशन के परिसर से पुलिसवालों ने प्रदर्शन कर रही जनता पर गोलियाँ चलायी थी। एक युवक मारा गया था। एक गोली सौ-डेढ़ सौ मीटर दूर अपने घर से बाहर खड़े हमारे दोस...
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  April 21, 2019, 9:16 pm
       बीते शुक्रवार को एक केंचुल मिला था, जिसकी लम्बाई 8 फीट के करीब थी- चार ईंच कम। यानि इतने लम्बे-लम्बे साँप आज भी हमारे इलाके में हैं। हम सोचते थे कि अब बड़े-बड़े साँप हमारे इलाके से- खासकर, रिहायशी इलाके से खत्म हो गये हैं। जंगल-पहाड़ों में होते होंगे, तो होते होंग...
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  April 21, 2019, 9:15 pm
       संजय हमारे "फर्स्ट-ब्वॉय"का नाम है- संजय डोकानियाँ। अभी वह भिलाई स्टील प्लाण्ट SAIL में AGMहै।        कहने की आवश्यकता नहीं, श्री अरविन्द पाठशाला से लेकर बरहरवा उच्च विद्यालय की दसवीं कक्षा तक वह हमेशा "टॉपर"ही रहा था। 1984 में मैट्रिक करने के बाद वह पटना स...
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  April 15, 2019, 8:39 pm
        ये दोनों तस्वीरें कल की हैं। हमारे यहाँ के बिन्दुधाम की। दोनों के बीच फासला सौ मीटर से ज्यादा का नहीं होगा। एक ओर पूरे ताम-झाम एवं आडम्बर के साथ महाशतचण्डी यज्ञ की पूर्णाहुति चल रही है, तो दूसरी तरफ धरतीपुत्र "साफा होड़" (आदिवासियों का वह समुदाय, जिसने ईसा...
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  April 14, 2019, 8:25 am
राजन जी के साथ, जो कभी होली की सुबह 'स्वांग'रचा करते थे... हमारे इलाके में होली को दो भागों में मनाते हैं- पहले भाग में सुबह से दोपहर तक पानी वाले रंग से होली खेलते हैं और दूसरे भाग में शाम को गुलाल से। ऐसी परम्परा देश के किन-किन हिस्सों में है, यह नहीं पता। जाहिर है कि पहले भा...
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  March 21, 2019, 9:50 pm
चित्र में सरसों के पीले फूलों से ढका खेत का एक टुकड़ा दिखायी पड़ रहा होगा। ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि उसके बाद खेतों का एक विशाल रकबा वीरान पड़ा है- यानि परती। हमारे इलाके में आजकल यह दृश्य आम है। धान की फसल के बाद करीब 90 प्रतिशत खेत परती रह जाते हैं। मुश्किल से दस प्रतिश...
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  January 17, 2019, 9:22 pm
     विजयादशमी के दिन शस्त्र-पूजन की परम्परा है। अब एक किसान या खेतीहर मजदूर के लिए अस्त्र-शस्त्र क्या है? बेशक, कुदाल (फावड़ा), हँसिया, तराजू इत्यादि। दूसरी जगहों के बारे में हम नहीं जानते, पर हमारे पैतृक गाँव में इन्हीं शस्त्रों की पूजन की परम्परा है। ऊपर जो दो छाया...
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  October 19, 2018, 5:11 pm
      तस्वीर खींचते समय एक होता है- 'इधर देखिये, मुकुराईये'कह कर (अँग्रेजी में- 'Say Cheese') तस्वीर खींचना और एक होता है- जब कोई किसी काम में या बातचीत में, या फिर किसी भी एक्टिविटि में मशगूल हो, तब तस्वीर खींच लेना। पहले तरीके से तस्वीर खींचने पर आम तौर पर एक "कृत्रिम"हँसी कै...
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  August 26, 2018, 11:13 am
      कल जाने क्या सूझा, हम शाम ढलने के बाद 'शिवगादी'के लिए रवाना हुए। उद्देश्य- सावन की पहली सोमवारी पर शिव की पूजा-अर्चना। योजना जयचाँद की थी। मेरा पाषाणयुगीन स्कुटर (बजाज- लीजेण्ड) कुछ समय से पंगु खड़ा है। जयचाँद ने ही अपने मित्र की स्कुटी की व्यवस्था की मेरे लिए। ...
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  July 31, 2018, 10:52 pm
हमारे इलाके का  "ब्लिस" . छाया-  जयचाँद        "ब्लिस"का हिन्दी हुआ- परमानन्द!       "ब्लिस"उस तस्वीर का शीर्षक है, जो कभी Windows XP का डिफॉल्ट वालपेपर हुआ करता था। इसके छायाकार हैं- चार्ल्स ओ'रियर। वे नेशनल जियोग्राफिक के मशहूर छायाकार हैं। इस तस्वीर को उन्होंन...
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  June 9, 2018, 9:00 pm
अभी तक जरुरत नहीं पड़ी थी; मगर पिछ्ले दिनों जब एक करीबी की चिकित्सा जाँच में गुर्दे की खराबी की समस्या सामने आयी, तो हमें (इण्टरनेट पर) गुर्दे के सम्बन्ध में थोड़ा अध्ययन करना पड़ा। पता चला कि खराब गुर्दों को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए कोई इंजेक्शन या दवा होती ही नहीं है! डॉक...
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  May 13, 2018, 8:28 pm
       वर्ष 2002 या 03 की बात है। हम 'बिहटा'में थे- पटना और आरा के बीच यह कस्बा है। वहाँ वायु सेना का एक स्टेशन है। बीस वर्षों की सेवा की अन्तिम पोस्टिंग थी हमारी- 2005 में घर लौटना था।        'सिगनल सेक्शन'से बाकी सभी सेक्शनों को खबर मिलती है- जिन्हें "सिम"चाहिए, उनके ...
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  March 24, 2018, 6:04 pm
       हमारे इलाके के एक झील का नाम है- पतौड़ा। बरहरवा से सात-आठ किलोमीटर दूर- उधवा कस्बे के पास। इस पर पहले से मेरा एक आलेख है इस ब्लॉग पर।       अभी खबर है कि इस बार सबसे अधिक प्रजाति के प्रवासी पक्षी इसी पतौड़ा झील में आये थे।Bird Watching अपने आप में एक शौक है। चिड़ियों ...
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  March 20, 2018, 7:23 pm
       कुछ दिनों पहले अभि ने कोलकाता से फोन पर अपनी माँ से कहा कि वह गिटार सीखना चाहता है। वह अनुमति माँग रहा था। हमदोनों ने तुरन्त सहमति दे दी।       हमें याद आया कि जब हम अभि की उम्र के थे, तब हम भी गिटार सीखना चाहते थे। तब हम आवडी में थे। 1986-87 की बात है। पता च...
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  March 20, 2018, 6:40 pm
जगन्नाथ मंदिर           पुरी गये हुए तीन महीने से ज्यादा हो गये,पर अब तक इस यात्रा पर लिखना नहीं हो पाया था।       *         हुआ यूँ कि कई साल पहले जब हम पुरी गये थे (शायद 2007 में),तब हमने पड़ोस के रेलवे स्टेशन पाकुड़ से ‘गौहटी-पुरी एक्सप्रेस’ट्रेन पकड़ी थी...
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  March 20, 2018, 2:32 pm
       आज फेसबुक पर वरिष्ठ मित्र नारायण प्रसाद शर्माजी ने उन गीतों की याद दिलायी,जिन्हें हम अपने बचपन में विभिन्न खेल खेलते समय दुहराया करते थे। उनकी पोस्ट निम्न प्रकार से है:       ***    बच्चों का अपने खेलों में टॉस करने का मनोरंजक एवं रचनात्मक तरीका।उ...
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  February 24, 2018, 5:54 pm
       बंगाल- बेशक,बाँग्लादेश सहित- की एक गायन शैली है- "बाउल"। यह लोकगीत की एक शैली है। इसे गाने वाले आम तौर पर यायावर सन्यासी होते हैं,जो विचारधारा से वैष्णव होते हैं। जानकारी मिलती है कि सूफी फकीर भी इसे गाते हैं- हो सकता है,बाँग्लादेश में ये पाये जाते हों। अपने ...
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  January 28, 2018, 3:05 pm
      साहेबगंज और मनिहारी के बीच जो स्टीमर सेवा (इसे एल.सी.टी.,लाँच,या जहाज कहते हैं) चलती है,उससे हमने कई बार यात्रायें की हैं। कई अनुभवों का जिक्र इस ब्लॉग पर है। आज एक और अनुभव का जिक्र कर रहे हैं- आज के अखबार में प्रकाशित एक खबर को पढ़कर उस अनुभव की याद आ गयी है।वाकया ऐस...
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  January 18, 2018, 6:49 pm
        कल के अखबार में एक दुःखद समाचार प्रकाशित हुआ था- हमारे इलाके में कुछ ग्रामीण एक “सोंस” को मारकर खा गये।       “सोंस” एक मछली का नाम है,जो गंगा में पायी जाती है। जब नदियाँ मुक्त होकर बहती थीं,यानि जब बाँध आदि नहीं बने थे और जब नदियाँ प्रदूषित नहीं हुआ ...
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  January 11, 2018, 8:19 am
       आज टॉमी गुजर गया।       बहुत अफसोस हो रहा है। नन्हा-सा पिल्ला था वह। कुछ ही रोज पहले हमारे परिवार का सदस्य बना था। छोटा भाई लेकर आया था उसे। बता रहा था, अच्छी नस्ल का था। उसका स्वभाव था भी बहुत अच्छा। हर वक्त खेलने के मूड में रहता था। सबके साथ खेलता था, सब...
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  January 9, 2018, 8:08 pm
एक जमाने में ‘सकरीगली’ एक प्रसिद्ध ‘जहाज घाट’ हुआ करता था। यहाँ ‘जहाज’ कहा जा रहा है स्टीमर को। दूर-दराज से यात्रीगण रेल द्वारा सकरीगली स्टेशन तक आते थे, ‘घाट गाड़ी’ (स्टेशन और गंगाघाट के बीच चलने वाली ट्रेन) से घाट तक जाते थे और फिर यहाँ से स्टीमर में बैठकर या तो बहाव के ...
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  November 13, 2017, 8:20 am
       तस्वीर में जो वृद्ध महिला दिख रही हैं, उसे हमारे परिवार तथा आस-पास की रिश्तेदारी में "कोकी बूढ़ी"कहते हैं। इनका असली नाम हम नहीं जानते हैं। बरहरवा जंक्श्न से जो रेल लाईन फरक्का की ओर जाती है, उधर ही कहीं 'करला' (बँगला उच्चारण- कोरला) नामक छोटा-सा गाँव है, वहीं क...
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  November 12, 2017, 9:03 am
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