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Blog: कभी-कभार

Blogger: Jaydeep Shekhar
       जब हम नौवीं-दसवीं में थे, तब हमारे क्लब का नाम "पैन्थर्स क्लब"हुआ करता था। हमलोग बाकायदे एक छोटा-सा पुस्तकालय चलाया करते थे। जब पुस्तकालय का एक साल पूरा हुआ, तब हमलोगों ने बाकायदे एक "स्मारिका"भी प्रकाशित करवाया था। 1984 में हमलोगों ने मैट्रिक दिया था, और उस वक... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   2:59pm 15 Feb 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       पता चला कि आज विश्व रेडियो दिवस है।        सबसे पहले तो बात पिताजी और चाचाजी की। दोनों के पास छोटे-छोटे ट्रान्जिस्टर थे- शायद जापानी। जब मेरी दोनों दीदी बड़ी हुई और दोनों ने रेडियो सुनना शुरु किया, तब शायद पिताजी ने एक रेडियो खरीदा होगा। बाद में ट्रा... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   9:53am 13 Feb 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       परसों शाम जब हम 'बिन्दुवासिनी पहाड़'की ओर टहलने गये थे, तब देखे थे कि 'झिकटिया चौक'के बाद से सड़क चमकीले रंगीन कागजों से सजी हुई थी। साथ ही, आस-पास की आदिवासी बस्तियों से मादुल (मृदंग) की आवाजें भी आ रही थीं।        आज संयोग से कुछ पहले ही हम टहलने निकल गये... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   11:16am 6 Feb 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       "कजंगल"एक त्रैमासिक पत्रिका का नाम था। बात 1981-83 की है। इसे हमारे बरहरवा का "अभियात्री"क्लब प्रकाशित करता था। "सॉरेश सर"यानि आनन्द मोहन घोष इस क्लब के एक तरह से सर्वेसर्वा हुआ करते थे। यह पत्रिका थी तो बँगला की, लेकिन इसमें हिन्दी विभाग भी हुआ करता था। दुर्भा... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   10:25am 4 Feb 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
बहुत पहले पिताजी ने हमें एक तस्वीर दी थी और कहा था इससे कुछ और तस्वीरें बनवा दो। तस्वीर के पीछे बाकायदे सभी लोगों के नाम लिखे थे। जहाँ तक हमें याद है, पड़ोस के रुपश्री स्टुडियो की मदद से हमने उस छोटी तस्वीर से तीन या चार बड़ी तस्वीरें बनवा दी थीं। तस्वीरें बँट गयी- यानि जिन... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   8:08am 3 Feb 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       ऊपर जो तस्वीर आप देख रहे हैं, वह 25 जनवरी के दिन की तस्वीर है। साल- 1996; स्थान- मेरठ। जहाँ तक फोटोग्राफर की बात है, किसी पत्र-पत्रिका के प्रोफेशनल फोटोग्राफर थे वे। हिन्दी पंचांग के हिसाब से, उस दिन बसन्त-पञ्चमी थी।        तस्वीर में जो मुस्कान है, उसका यह... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   8:36am 25 Jan 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
शायद 2003 की बात होगी। हम छुट्टी लेकर घर आये थे कि अपने घर के पीछे की तरफ परती जगह पर अपने लिए अलग से एक बसेरा बनवा लें, क्योंकि दो साल बाद ही हमें सेवा से अवकाश लेना था। जो राजमिस्त्री आया, वह काम के लिए राजी तो हुआ, लेकिन उसका कहना था कि वह अगले महीने से काम शुरु करेगा। हमने जा... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   3:31pm 24 Jan 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
2020 का नया साल हमने सुन्दरबन के जंगलों में बिताया। स्टीमर पर। अल्बम फेसबुक पर है. देखने के लिए कृपया तस्वीर पर क्लिक करें        सुन्दरबन के परिचय में कुछ कहने की जरुरत तो खैर नहीं है, फिर भी बता दिया जाय कि यह करीब 10,000 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में फैला विश्व का सबसे बड़... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   2:18pm 2 Jan 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
हमें नहीं पता था कि वर्ष में एक दिन ऐसा भी होता है, जिस दिन आँवले के पेड़ के नीचे भोजन करने की परम्परा है। आज पहली बार पता चला और पहली बार हमने आँवले के पेड़ के नीचे भोजन किया।        दिवाली के बाद अभी-अभी तो छठ महापर्व की गहमा-गहमी समाप्त हुई और बीते कल ही "गौशाला मेला"... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   3:17pm 5 Nov 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
पिछ्ले हफ्ते के मंगलवार से शुरु हुई वर्षा इस हफ्ते सोमवार तक जारी रही। इन सात दिनों की बरसात में हमारे बरहरवा के दक्षिण में सैकड़ों वर्गकिलोमीटर का क्षेत्र एक विशाल झील में परिणत हो गया। कल वर्षा रुकी थी, तो ये कल की तस्वीरें हैं। यह जो झील बनी, इसका एक किनारा तो गंगा नदी ... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   6:25am 2 Oct 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
मेरी एक दबी हुई इच्छा थी कि 'जय जवान'के बाद 'जय किसान'की भी भूमिका निभाऊँ, मगर हो नहीं पाया था। पिताजी, दादाजी डॉक्टर होने के साथ-साथ खेती-बाड़ी पर पूरा ध्यान रखते थे। हमारी पीढ़ी ने नजरअन्दाज कर दिया। दूसरी बात, रासायनिक खाद और कीटनाशकों से मुझे सख्त नफरत है, जबकि जो लोग खेत... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   5:43am 20 Sep 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
मेरे पिताजी के एक अनन्य मित्र का कल स्वर्गवास हो गया। हमलोग उन्हें "राजकिशोर जेठू"कहा करते थे- यानि वे उम्र में पिताजी से कुछ बड़े ही रहे होंगे, लेकिन थे मित्र ही। बिलकुल पड़ोस में उनका घर है, लेकिन वे दुमका शहर में बस गये थे। शुरु में अध्यापक रहे, बाद में वकील बने। एक समय मे... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   8:14am 17 Sep 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       हमारे मुहल्ले में बहुत पहले मलेरिया विभाग के एक अधिकारी किराये पर रहते थे- हीरालाल साहा। उनके बड़े सुपुत्र को हमलोग'ललन भैया'के नाम से जानते थे। उन्होंने ही पहली बार मुहल्ले में सरस्वती पूजा का आयोजन किया था- बेशक, मुहल्ले के बड़े बच्चों को साथ लेकर। शायद य... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   8:52am 2 Sep 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       किसी के पास 'विजन'होता है, वह कल्पना कर सकता है कि कोई चीज किस तरह की होनी चाहिए। किसी के पास 'दक्षता'य 'कौशल'होता है, वह 'विजन'को समझ जाने के बाद उसे साकार रुप दे सकता है। आम तौर पर दोनों गुण एक ही व्यक्ति के पास नहीं होते।        हमने अपने राजमिस्त्री से ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   7:25am 21 Aug 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
राजमहल की पहाड़ियों में जंगली जानवर तो कुछ बचे नहीं हैं- ले-देकर कुछ हाथी कभी-कभार नजर आ जाते हैं। (महाराजपुर के निकटवर्ती) तालझारी इलाके में पत्थर-खनन अपेक्षाकृत कम है, इसलिए यहाँ जंगल बचे हुए हैं और यहीं कभी-कभार हाथी दिखते हैं। जिक्र इसलिए कि इस बार मोती झरना के आस-पास ... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   5:16am 29 Jul 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       हाल ही में फेसबुक पर एक विडियो देखा, जो सम्भवतः महाराष्ट्र के किसी कॉलेज के घरेलू कार्यक्रम का है। (हो सकता है कि यह विडियो वायरल हो और प्रायः सबने देख रखा हो।) विडियो में एक नौजवान छात्र फिल्मी गाने- 'तुझमें रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ'पर नृत्य कर रहा है... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   7:10am 30 Jun 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       बाँस को हालाँकि पेड़ नहीं माना जाता- यह घास की श्रेणी में आता है (पादप विज्ञान के अनुसार, यह ग्रामिनीई (Gramineae) कुल की एक अत्यंत उपयोगी घास है), पर हम इसे यहाँ पेड़- पेड़ क्या, 'महीरूह'मान कर चल रहे हैं।        ***       अपने घर के पिछवाड़े में जो थोड़ी-सी परती ... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   4:16pm 6 May 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       साहेबगंज हमारे जिले का भी नाम है और उस शहर का भी नाम है, जहाँ हमारा जिला मुख्यालय है। यह विडियो हमने आज ही साहेबगंज रेलवे स्टेशन के नये बने फुट ओवर ब्रिज से बनाया है। विडियो के अन्त में आपको एक वाष्प इंजन दिखायी पड़ेगा, जिसे अब उठा कर स्टेशन के सामने प्राँगण ... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   1:10pm 4 May 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       हमारे बरहरवा में एक गोलीकाण्ड हुआ था- पुरानी बात है- सम्भवतः 1982 की। हमलोग आठवीं-नवीं कक्षा में थे। रेलवे स्टेशन के परिसर से पुलिसवालों ने प्रदर्शन कर रही जनता पर गोलियाँ चलायी थी। एक युवक मारा गया था। एक गोली सौ-डेढ़ सौ मीटर दूर अपने घर से बाहर खड़े हमारे दोस... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   3:46pm 21 Apr 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       बीते शुक्रवार को एक केंचुल मिला था, जिसकी लम्बाई 8 फीट के करीब थी- चार ईंच कम। यानि इतने लम्बे-लम्बे साँप आज भी हमारे इलाके में हैं। हम सोचते थे कि अब बड़े-बड़े साँप हमारे इलाके से- खासकर, रिहायशी इलाके से खत्म हो गये हैं। जंगल-पहाड़ों में होते होंगे, तो होते होंग... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   3:45pm 21 Apr 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       संजय हमारे "फर्स्ट-ब्वॉय"का नाम है- संजय डोकानियाँ। अभी वह भिलाई स्टील प्लाण्ट SAIL में AGMहै।        कहने की आवश्यकता नहीं, श्री अरविन्द पाठशाला से लेकर बरहरवा उच्च विद्यालय की दसवीं कक्षा तक वह हमेशा "टॉपर"ही रहा था। 1984 में मैट्रिक करने के बाद वह पटना स... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   3:09pm 15 Apr 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
        ये दोनों तस्वीरें कल की हैं। हमारे यहाँ के बिन्दुधाम की। दोनों के बीच फासला सौ मीटर से ज्यादा का नहीं होगा। एक ओर पूरे ताम-झाम एवं आडम्बर के साथ महाशतचण्डी यज्ञ की पूर्णाहुति चल रही है, तो दूसरी तरफ धरतीपुत्र "साफा होड़" (आदिवासियों का वह समुदाय, जिसने ईसा... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   2:55am 14 Apr 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
राजन जी के साथ, जो कभी होली की सुबह 'स्वांग'रचा करते थे... हमारे इलाके में होली को दो भागों में मनाते हैं- पहले भाग में सुबह से दोपहर तक पानी वाले रंग से होली खेलते हैं और दूसरे भाग में शाम को गुलाल से। ऐसी परम्परा देश के किन-किन हिस्सों में है, यह नहीं पता। जाहिर है कि पहले भा... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   4:20pm 21 Mar 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
चित्र में सरसों के पीले फूलों से ढका खेत का एक टुकड़ा दिखायी पड़ रहा होगा। ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि उसके बाद खेतों का एक विशाल रकबा वीरान पड़ा है- यानि परती। हमारे इलाके में आजकल यह दृश्य आम है। धान की फसल के बाद करीब 90 प्रतिशत खेत परती रह जाते हैं। मुश्किल से दस प्रतिश... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   3:52pm 17 Jan 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
     विजयादशमी के दिन शस्त्र-पूजन की परम्परा है। अब एक किसान या खेतीहर मजदूर के लिए अस्त्र-शस्त्र क्या है? बेशक, कुदाल (फावड़ा), हँसिया, तराजू इत्यादि। दूसरी जगहों के बारे में हम नहीं जानते, पर हमारे पैतृक गाँव में इन्हीं शस्त्रों की पूजन की परम्परा है। ऊपर जो दो छाया... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   11:41am 19 Oct 2018 #
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