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Blog: कभी-कभार

Blogger: Jaydeep Shekhar
         हम 'कला- 360'नामक फोण्ट का इस्तेमाल सत्यजीत राय और 'बनफूल'की रचनाओं के अनुवाद को टाईप करने में करते हैं। यह फोण्ट काफी साफ-सुथरा है और स्थान भी ज्यादा लेता है- खुला-खुला का आभास मिलता है। अभिमन्यु ने बताया कि किताबों में कम जगह लेने वाले छोटे फोण्ट अच्छे लगत... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   6:26am 22 Feb 2021 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
        जिन्दगी एक रंगमंच है- सुख-दुःख के दृश्य आते-जाते रहते हैं। शो चलते रहता है और हम सब अपनी-अपनी भूमिका निभाते रहते हैं।ऐसे तो अभी हमारे "उत्सव भवन एवं प्राँगण"में बहुत काम बाकी है, पर हमने सोचा कि जो कार्यक्रम अपने घर में मनाया जाना है, क्यों न उसे "उत्सव भवन"... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   3:46pm 26 Jan 2021 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
        विभिन्न कारणों से साल 2020 ज्यादातर लोगों के लिए दुःखदायी रहा। मेरे लिए यह इसलिए मनहूस रहा कि जाते-जाते यह मेरी प्यारी चचेरी बहन को हमसे छीन ले गया! अब मुनमुन के ठहाके बस यादों में सुनायी पड़ेंगे। दरअसल, बात करते समय बीच-बीच में "हाः-हाः-हाः-हाः-"के जोरदार ठहा... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   4:00pm 14 Jan 2021 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
 तुकादी एक खेल का नाम है। एक बड़े-से रूमाल (लगभग 2 फीट गुणा 2 फीट) के बीचों-बीच एक गेन्द (टेनिस वाली गेन्द) को रखकर रूमाल को धागे से इस तरह बाँधा जाता है कि जब गेन्द को फेंककर मारा जाता है, तब इसकी आकृति 'धूमकेतु'-जैसी बन जाती है। इस गेन्द को भी 'तुकादी'ही कहते हैं।  दो टीम बनती ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   6:11am 7 Aug 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       चाचीजी बताया करते थीं कि जब वे इस घर में आयीं, तब यहाँ बड़ी-सी मिट्टी की हाँडी में भात पकता था। कई बार उनसे हाँडी टूटी भी थी। माँ ज्यादा बातचीत नहीं करती थीं/हैं, इसलिए उनका अनुभव हमें नहीं पता। यह भी हो सकता है कि उनसे कभी हाँडी न टूटी हो।        खैर, बचपन... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   1:07pm 31 Jul 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
     बरहरवा के "शाहजहाँ"नहीं रहे।        (आज सुबह यह अविश्वसनीय खबर मिली और दुर्भाग्य से, यह सच भी निकली... )       1975 में हमारे बरहरवा में 'अभिनय भारती'के बैनर तले एक भव्य नाटक का आयोजन हुआ था, जिसका नाम था- "शाहजहाँ"। भव्य मतलब वाकई भव्य आयोजन था- स्टेज, स्ट... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   8:21am 14 Jul 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       ये हैं जनाब गुड्डू रंगीला ग्रिलवाले 'ओल-झोल'              गुड्डू इनका नाम है;        रंगीला इनका मिजाज है;        ग्रिल का काम इनका पेशा है; और-        'ओल-झोल'इनका तकिया-कलाम है।        इनके फोन में जो 'कॉलर-ट्युन'है... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   8:39am 24 Jun 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
यह हमारे यहाँ रेलवे का तालाब है।एक जमाना था, जब भाप के इंजन चलते थे, तब हमारे बरहरवा जंक्शन में हर इंजन में पानी भरा जाता था। क्या बड़े-बड़े नल हुआ करते थे !तब हमलोग इसी तालाब में नहाने आया करते थे। वैसे, और भी तालाबों में नहाना होता था, पर मुख्य तालाब यही था।इस तालाब को पाईप-ल... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   9:51am 29 May 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
        जब कोई लम्बा काम किया जाता है, तो बीच-बीच में विराम (ब्रेक) लिया जाता है। विराम के दौरान या तो आराम किया जाता है, या फिर, दिल-दिमाग को राहत पहुँचाने वाला कोई काम किया जाता है।        जैसा कि जिक्र कर चुके हैं- 'डाना'नामक वृहत् बँगला उपन्यास के प्रथम खण्ड... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   12:52pm 22 Apr 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
भारतीयों को भारतीय पक्षियों से परिचित कराने के लिए सलीम अली ने वैज्ञानिक शैली में पुस्तक लिखी थी। भाषा अँग्रेजी थी और बात है 1941 की। बाद के दिनों में उनकी पुस्तक के बहुत सारे अनुवाद एवं संस्करण प्रकाशित हुए और आज वे 'बर्डमैन ऑफ इण्डिया'के नाम से जाने जाते हैं।     &nbs... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   9:51am 18 Apr 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       जब हम नौवीं-दसवीं में थे, तब हमारे क्लब का नाम "पैन्थर्स क्लब"हुआ करता था। हमलोग बाकायदे एक छोटा-सा पुस्तकालय चलाया करते थे। जब पुस्तकालय का एक साल पूरा हुआ, तब हमलोगों ने बाकायदे एक "स्मारिका"भी प्रकाशित करवाया था। 1984 में हमलोगों ने मैट्रिक दिया था, और उस वक... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   2:59pm 15 Feb 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       पता चला कि आज विश्व रेडियो दिवस है।        सबसे पहले तो बात पिताजी और चाचाजी की। दोनों के पास छोटे-छोटे ट्रान्जिस्टर थे- शायद जापानी। जब मेरी दोनों दीदी बड़ी हुई और दोनों ने रेडियो सुनना शुरु किया, तब शायद पिताजी ने एक रेडियो खरीदा होगा। बाद में ट्रा... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   9:53am 13 Feb 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       परसों शाम जब हम 'बिन्दुवासिनी पहाड़'की ओर टहलने गये थे, तब देखे थे कि 'झिकटिया चौक'के बाद से सड़क चमकीले रंगीन कागजों से सजी हुई थी। साथ ही, आस-पास की आदिवासी बस्तियों से मादुल (मृदंग) की आवाजें भी आ रही थीं।        आज संयोग से कुछ पहले ही हम टहलने निकल गये... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   11:16am 6 Feb 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       "कजंगल"एक त्रैमासिक पत्रिका का नाम था। बात 1981-83 की है। इसे हमारे बरहरवा का "अभियात्री"क्लब प्रकाशित करता था। "सॉरेश सर"यानि आनन्द मोहन घोष इस क्लब के एक तरह से सर्वेसर्वा हुआ करते थे। यह पत्रिका थी तो बँगला की, लेकिन इसमें हिन्दी विभाग भी हुआ करता था। दुर्भा... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   10:25am 4 Feb 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
बहुत पहले पिताजी ने हमें एक तस्वीर दी थी और कहा था इससे कुछ और तस्वीरें बनवा दो। तस्वीर के पीछे बाकायदे सभी लोगों के नाम लिखे थे। जहाँ तक हमें याद है, पड़ोस के रुपश्री स्टुडियो की मदद से हमने उस छोटी तस्वीर से तीन या चार बड़ी तस्वीरें बनवा दी थीं। तस्वीरें बँट गयी- यानि जिन... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   8:08am 3 Feb 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       ऊपर जो तस्वीर आप देख रहे हैं, वह 25 जनवरी के दिन की तस्वीर है। साल- 1996; स्थान- मेरठ। जहाँ तक फोटोग्राफर की बात है, किसी पत्र-पत्रिका के प्रोफेशनल फोटोग्राफर थे वे। हिन्दी पंचांग के हिसाब से, उस दिन बसन्त-पञ्चमी थी।        तस्वीर में जो मुस्कान है, उसका यह... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   8:36am 25 Jan 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
शायद 2003 की बात होगी। हम छुट्टी लेकर घर आये थे कि अपने घर के पीछे की तरफ परती जगह पर अपने लिए अलग से एक बसेरा बनवा लें, क्योंकि दो साल बाद ही हमें सेवा से अवकाश लेना था। जो राजमिस्त्री आया, वह काम के लिए राजी तो हुआ, लेकिन उसका कहना था कि वह अगले महीने से काम शुरु करेगा। हमने जा... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   3:31pm 24 Jan 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
2020 का नया साल हमने सुन्दरबन के जंगलों में बिताया। स्टीमर पर। अल्बम फेसबुक पर है. देखने के लिए कृपया तस्वीर पर क्लिक करें        सुन्दरबन के परिचय में कुछ कहने की जरुरत तो खैर नहीं है, फिर भी बता दिया जाय कि यह करीब 10,000 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में फैला विश्व का सबसे बड़... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   2:18pm 2 Jan 2020 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
हमें नहीं पता था कि वर्ष में एक दिन ऐसा भी होता है, जिस दिन आँवले के पेड़ के नीचे भोजन करने की परम्परा है। आज पहली बार पता चला और पहली बार हमने आँवले के पेड़ के नीचे भोजन किया।        दिवाली के बाद अभी-अभी तो छठ महापर्व की गहमा-गहमी समाप्त हुई और बीते कल ही "गौशाला मेला"... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   3:17pm 5 Nov 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
पिछ्ले हफ्ते के मंगलवार से शुरु हुई वर्षा इस हफ्ते सोमवार तक जारी रही। इन सात दिनों की बरसात में हमारे बरहरवा के दक्षिण में सैकड़ों वर्गकिलोमीटर का क्षेत्र एक विशाल झील में परिणत हो गया। कल वर्षा रुकी थी, तो ये कल की तस्वीरें हैं। यह जो झील बनी, इसका एक किनारा तो गंगा नदी ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   6:25am 2 Oct 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
मेरी एक दबी हुई इच्छा थी कि 'जय जवान'के बाद 'जय किसान'की भी भूमिका निभाऊँ, मगर हो नहीं पाया था। पिताजी, दादाजी डॉक्टर होने के साथ-साथ खेती-बाड़ी पर पूरा ध्यान रखते थे। हमारी पीढ़ी ने नजरअन्दाज कर दिया। दूसरी बात, रासायनिक खाद और कीटनाशकों से मुझे सख्त नफरत है, जबकि जो लोग खेत... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   5:43am 20 Sep 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
मेरे पिताजी के एक अनन्य मित्र का कल स्वर्गवास हो गया। हमलोग उन्हें "राजकिशोर जेठू"कहा करते थे- यानि वे उम्र में पिताजी से कुछ बड़े ही रहे होंगे, लेकिन थे मित्र ही। बिलकुल पड़ोस में उनका घर है, लेकिन वे दुमका शहर में बस गये थे। शुरु में अध्यापक रहे, बाद में वकील बने। एक समय मे... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   8:14am 17 Sep 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       हमारे मुहल्ले में बहुत पहले मलेरिया विभाग के एक अधिकारी किराये पर रहते थे- हीरालाल साहा। उनके बड़े सुपुत्र को हमलोग'ललन भैया'के नाम से जानते थे। उन्होंने ही पहली बार मुहल्ले में सरस्वती पूजा का आयोजन किया था- बेशक, मुहल्ले के बड़े बच्चों को साथ लेकर। शायद य... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   8:52am 2 Sep 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
       किसी के पास 'विजन'होता है, वह कल्पना कर सकता है कि कोई चीज किस तरह की होनी चाहिए। किसी के पास 'दक्षता'य 'कौशल'होता है, वह 'विजन'को समझ जाने के बाद उसे साकार रुप दे सकता है। आम तौर पर दोनों गुण एक ही व्यक्ति के पास नहीं होते।        हमने अपने राजमिस्त्री से ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   7:25am 21 Aug 2019 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
राजमहल की पहाड़ियों में जंगली जानवर तो कुछ बचे नहीं हैं- ले-देकर कुछ हाथी कभी-कभार नजर आ जाते हैं। (महाराजपुर के निकटवर्ती) तालझारी इलाके में पत्थर-खनन अपेक्षाकृत कम है, इसलिए यहाँ जंगल बचे हुए हैं और यहीं कभी-कभार हाथी दिखते हैं। जिक्र इसलिए कि इस बार मोती झरना के आस-पास ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   5:16am 29 Jul 2019 #
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