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रंगे-ज़िन्दगी: बज़्मे-शायरी

वो मुझको बहुत भाता रहा ये बात मैं खुदसे छुपाता रहा मैं होता रहा कत्ल सरेआम वो सर झुकाये शर्माता रहा अब वो गालियाँ भी नहीं देतेपीने का तो मजा जाता रहाइसे ज़िंदगी कहो तो कहो सांस भर आता जाता रहा ...
रंगे-ज़िन्दगी: बज़्मे-शायरी...
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  May 17, 2012, 11:14 am
भूख के अहसास को इंकलाबियों को कहने दो गज़ल को माशूक की मरमरी बाहों में रहने दो हर एक मंजिल को सूए दार नहीं होना चाहिए कुछ को तो दिलबरे नादाँ की राहों में रहने दो जी नहीं सकते सिर्फ रोटी से कहा था ईसा ने कुछ तो खुशबू सुखन की गुलाबों में रहने दो ज्यादातर तो गमे रोजगार में बह ज...
रंगे-ज़िन्दगी: बज़्मे-शायरी...
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  March 26, 2012, 1:31 pm
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