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बावरा मन

पक्का निश्चय करसाध कर अपना लक्ष्यचले थे इस बार ये कदममंजिल की ओरमन में विश्वास लिएमान ईश्वर को पालनहारकर दिया था अर्पित खुद कोउस दाता के द्वारमेहनत का ध्येय लिएकर दिए दिन रात एकत्याग दिए थे हर सुख साधनकर्म के इम्तिहान मेंकभी किसी पलतुम आकर मुझे डरातेतोड़ने लगते थे मे...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :जिंदगी
  August 16, 2018, 11:19 pm
आज ...निकाल कर सूखे पत्तों को रख दिया अलग करके ..बिछड़न हिस्सों में बँट कर जीना सीखा देती है !!सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  August 10, 2018, 12:54 pm
रेशम सी जिंदगी में नीम से कड़वे रास्तेधुँधली सी हैं मंजिलें अनचाहे कई हादसे !!सु-मन...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :जिंदगी
  August 4, 2018, 3:50 pm
..ज़ख्मों को कुरेदती हूँ तो दर्द सकून देता है !!सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  July 27, 2018, 11:31 am
छलता है 'मन'यूँ ही मुझको बारहा लफ्ज़ों से फिर बेरुखी छलकने लगती है !!सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  July 21, 2018, 1:10 pm
ऐ साकी ! पीला एक घूँट कि जी लूँ ज़रा बेअसर साँस में जिंदगी की कुछ हरारत हो !!सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :साँस
  July 7, 2018, 12:28 pm
ठक ठक ...कौन ? अंदर से आवाज़ आई |मैं \ बाहर से उत्तर आया |मैं !! मैं कौन ?जिंदगी .... , उसने जवाब दिया |अच्छा ! किसकी ? \ अंदर से सवाल |तुम्हारी \ भूल गई मुझे ... | इसी बीच मन के अधखुले दरवाजे को लांघ कर उसने भीतर प्रवेश कर लिया | मैं कभी किसी को नहीं भूलती \ पर अकसर खुद को भूला देती हूँ दूसरों के ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :जिन्दगी
  June 24, 2018, 5:17 pm
तमाम खुशियों के बावजूद गम हरा है अभीजिंदगी की सूखी सतह पर नमी बाकी है शायद ।।सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  June 18, 2018, 3:20 pm
कोई बंदिश भी नहीं न कोई बेड़ियाँ हाथों में फिर भी - जाने कितनी साँसों की कैद में जकड़ी है ये जिंदगी ..!!सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :बंदिश
  June 6, 2018, 4:54 pm
असल में हम अपने ही कहे शब्दों से धोखा खाते हैं और हमारे शब्द हमारी चाह से ।हम सब धोखेबाज़ हैं खुद अपने !!सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  May 28, 2018, 11:29 am
एक अरसे से कलम ख़ामोश थीऔर लफ्ज़ छुट्टी परइस बरस -नज़्मों के इम्तिहान में 'मन'फेल हो गया ..!!सु-मन...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :मन
  March 31, 2018, 11:41 pm
मैंने दीया जला कर कर दी है रोशनी ...तुम प्रदीप्त बन   हर लो, मेरा सारा अविश्वास |मेरे आराध्य !आस के दीये में बची रहे नमी सुबह तलक ||सु-मन दीप पर्व मुबारक !!...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  October 18, 2017, 1:33 pm
गुनगुने से हैं दिन अब रातें अधठंडीमौसम के लिहाफ में शरद लेने लगी है करवट ||सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :शरद
  October 11, 2017, 12:07 pm
                               आभासी दुनिया का साभासी सच                                जो दीखता है वो होता नहीं ,जो होता है वो दीखता नहीं..                         आज बस में थोड़े कम लोग थे और मेरे सामने की सीट पर बैठी एक लड़की के हाथ में Mobile थ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :यथार्थ
  September 20, 2017, 3:40 pm
शाम खामोश होने को है और रात गुफ्तगू करने को आतुर ... इस छत पर काफी शामें ऐसी ही बीत जाती हैं ...आसमां को तकते हुए .... सामने पहाड़ी पर वो पेड़ आवाज लगाते हैं ..कुछ उड़ते परिदों को ..आओ ! बसेरा मिलेगा तुम्हें ..पर परिंदे उड़ जाते हैं दूर उस ओर ... अपने साथी संग .. सुनसान जंगल में रह जाती है पत्...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  September 13, 2017, 4:30 pm
और तुम फिरहो जाते हो मुझसे दूरअकारण , निरुद्देश्य ...ये जानकर भीकि आआगे तुम पुनःमेरे ही पासस्वेच्छिक , समर्पित ...सच मानो -हर बार की तरह न पूछूँगी कोई प्रश्नन ही तुम देना कोई अर्जियां कि तुम्हारा पलायन कर फिर लौट आनामेरे इन्तज़ार के समोहन का साक्षी है !!सु-मन...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :समोहन
  August 14, 2017, 11:53 am
और तुम फिरहो जाते हो मुझसे दूरअकारण , निरुद्देश्य ...ये जानकर भीकि आआगे तुम पुनःमेरे ही पास स्वैच्छिक , समर्पित ...सच मानो -हर बार की तरह न पूछूँगी कोई प्रश्नन ही तुम देना कोई अर्जियां कि तुम्हारा पलायन कर फिर लौट आनामेरे इन्तज़ार के सम्मोहन का साक्षी है !!सु-मन...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :समोहन
  August 14, 2017, 11:53 am
अनगिनत प्रयास के बाद भीअब तक'तुम'दूर हो अछूती हो और 'मैं' हर अनचाहे से होकर गुजरता प्रारब्ध ।एक दिन किसी उस पल बिना प्रयास 'तुम'चली आओगीमेरे पास और बाँध दोगी श्वास में एक गाँठ ।तब तुम्हारे आलिंगन में सो जाऊँगा 'मैं' गहरी अनजगी नींद !*****उनींदी से भरा हूँ 'मैं'...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :खालीपन
  July 28, 2017, 12:42 pm
                         दोस्त वह जो जरूरत* पर काम आये ।                         सोच में हूँ कि मैं / हम जरूरत का सामान हैं । जरूरत पड़ी तो उपयोग कर लिया नहीं तो याद भी नहीं आती । रख छोड़ते हैं मेरा / हमारा नाम स्टोर रूम की तरह मोबाइल की कोन्टक्ट लिस्ट में को...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  July 24, 2017, 3:54 pm
                           सुबह और रात के बीच बाट जोहता एक खाली दिन ... इतना खाली कि बहुत कुछ समा लेने के बावजूद भी खाली .... कितने लम्हें ..कितने अहसास ...फिर भी खाली ... सूरज की तपिश से भी अतृप्त .. बस बीत जाना चाहता है | तलाश रहा कुछ ठहराव .. जहाँ कुछ पल ठहर सके ...अपने खालीपन...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  July 13, 2017, 4:16 pm
हे निराकार !तू ही प्रमाण , तू ही शाखतू ही निर्वाण , तू ही राख तू ही बरकत , तू ही जमाल तू ही रहमत , तू ही मलालतू ही रहबर , तू ही प्रकाशतू ही तरुबर , तू ही आकाशतू ही जीवन , तू ही आस तू ही सु-मन , तू ही विश्वास !!*******मन में विश्वास है और विश्वास में तुममेरे आकारित परिवेश के तुम एकमात्र प्र...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :विश्वास
  June 29, 2017, 1:17 am
24 जून 2013 अस्पताल में अपनी दैनिक पूजा करते हुए माँ (मेरे लिए प्रार्थना भी)कर्मों के फल काउपासनाओं के तेज़ का दुख के भोगों का सुख की चाहों का मन के विश्वास का ईश्वर की आराधना का अपनों के साथ का रिश्तों के जुड़ाव का निश्छल प्रार्थनाओं का होता ही होगा कोई मोल ..**शरीर की नश्वरता क...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :जिंदगी
  June 24, 2017, 2:20 pm
एक कहानी होती है । जिसमें खूब पात्र होते हैं । एक निश्चित समय में दो पात्रों के बीच वार्तालाप होता है । दो पात्र कोई भी वो दो होतें हैं जो कथानक के हिसाब से तय होते हैं । कथानक कौन लिखता है... उन किसी को नहीं मालूम । मालूम है तो बस इतना कि उस लिखे को मिटाया नहीं जा सकता । प्रति...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  June 6, 2017, 11:44 am
मेरी बगिया का सुमन मुझसे ये कहता है ..सुमन कहे पुकार के , सु-मन मुझे न तोड़महकाऊँ घर आँगन , मुझसे मुँह न मोड़ ये डाली मुझे प्यारी , नहीं देवालय की चाहबतियाऊँ रोज़ तुमसे , रहने दे अपनी पनाह  मैं सु-मन , सुमन को ये कहती है ...तू सुमन मैं भी सु-मन , जानू तेरे एहसास खिलता रहे तू हमेशा . मत ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  April 6, 2017, 2:21 pm
आजकल बहुत सारे शब्द मेरे ज़ेहन में घूमते रहते हैं इतने कि समेट नहीं पा रही हूँ अनगिनत शब्द अंदर जाकर चुपचाप बैठ गए हैं । एक दोस्त की बात याद आ रही है जब कुछ अरसा पहले यूँ ही शब्द मेरे ज़ेहन में कैद हो गए थे ।उसने कहा था , 'सुमी ! अक्सर ऐसा होता है जब बहुत सारे शब्द हमारे अंदर इकट...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  March 25, 2017, 4:40 pm
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