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बावरा मन

मैंने दीया जला कर कर दी है रोशनी ...तुम प्रदीप्त बन   हर लो, मेरा सारा अविश्वास |मेरे आराध्य !आस के दीये में बची रहे नमी सुबह तलक ||सु-मन दीप पर्व मुबारक !!...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  October 18, 2017, 1:33 pm
गुनगुने से हैं दिन अब रातें अधठंडीमौसम के लिहाफ में शरद लेने लगी है करवट ||सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :शरद
  October 11, 2017, 12:07 pm
                               आभासी दुनिया का साभासी सच                                जो दीखता है वो होता नहीं ,जो होता है वो दीखता नहीं..                         आज बस में थोड़े कम लोग थे और मेरे सामने की सीट पर बैठी एक लड़की के हाथ में Mobile थ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :यथार्थ
  September 20, 2017, 3:40 pm
शाम खामोश होने को है और रात गुफ्तगू करने को आतुर ... इस छत पर काफी शामें ऐसी ही बीत जाती हैं ...आसमां को तकते हुए .... सामने पहाड़ी पर वो पेड़ आवाज लगाते हैं ..कुछ उड़ते परिदों को ..आओ ! बसेरा मिलेगा तुम्हें ..पर परिंदे उड़ जाते हैं दूर उस ओर ... अपने साथी संग .. सुनसान जंगल में रह जाती है पत्...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  September 13, 2017, 4:30 pm
और तुम फिरहो जाते हो मुझसे दूरअकारण , निरुद्देश्य ...ये जानकर भीकि आआगे तुम पुनःमेरे ही पासस्वेच्छिक , समर्पित ...सच मानो -हर बार की तरह न पूछूँगी कोई प्रश्नन ही तुम देना कोई अर्जियां कि तुम्हारा पलायन कर फिर लौट आनामेरे इन्तज़ार के समोहन का साक्षी है !!सु-मन...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :समोहन
  August 14, 2017, 11:53 am
और तुम फिरहो जाते हो मुझसे दूरअकारण , निरुद्देश्य ...ये जानकर भीकि आआगे तुम पुनःमेरे ही पास स्वैच्छिक , समर्पित ...सच मानो -हर बार की तरह न पूछूँगी कोई प्रश्नन ही तुम देना कोई अर्जियां कि तुम्हारा पलायन कर फिर लौट आनामेरे इन्तज़ार के सम्मोहन का साक्षी है !!सु-मन...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :समोहन
  August 14, 2017, 11:53 am
अनगिनत प्रयास के बाद भीअब तक'तुम'दूर हो अछूती हो और 'मैं' हर अनचाहे से होकर गुजरता प्रारब्ध ।एक दिन किसी उस पल बिना प्रयास 'तुम'चली आओगीमेरे पास और बाँध दोगी श्वास में एक गाँठ ।तब तुम्हारे आलिंगन में सो जाऊँगा 'मैं' गहरी अनजगी नींद !*****उनींदी से भरा हूँ 'मैं'...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :खालीपन
  July 28, 2017, 12:42 pm
                         दोस्त वह जो जरूरत* पर काम आये ।                         सोच में हूँ कि मैं / हम जरूरत का सामान हैं । जरूरत पड़ी तो उपयोग कर लिया नहीं तो याद भी नहीं आती । रख छोड़ते हैं मेरा / हमारा नाम स्टोर रूम की तरह मोबाइल की कोन्टक्ट लिस्ट में को...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  July 24, 2017, 3:54 pm
                           सुबह और रात के बीच बाट जोहता एक खाली दिन ... इतना खाली कि बहुत कुछ समा लेने के बावजूद भी खाली .... कितने लम्हें ..कितने अहसास ...फिर भी खाली ... सूरज की तपिश से भी अतृप्त .. बस बीत जाना चाहता है | तलाश रहा कुछ ठहराव .. जहाँ कुछ पल ठहर सके ...अपने खालीपन...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  July 13, 2017, 4:16 pm
हे निराकार !तू ही प्रमाण , तू ही शाखतू ही निर्वाण , तू ही राख तू ही बरकत , तू ही जमाल तू ही रहमत , तू ही मलालतू ही रहबर , तू ही प्रकाशतू ही तरुबर , तू ही आकाशतू ही जीवन , तू ही आस तू ही सु-मन , तू ही विश्वास !!*******मन में विश्वास है और विश्वास में तुममेरे आकारित परिवेश के तुम एकमात्र प्र...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :विश्वास
  June 29, 2017, 1:17 am
24 जून 2013 अस्पताल में अपनी दैनिक पूजा करते हुए माँ (मेरे लिए प्रार्थना भी)कर्मों के फल काउपासनाओं के तेज़ का दुख के भोगों का सुख की चाहों का मन के विश्वास का ईश्वर की आराधना का अपनों के साथ का रिश्तों के जुड़ाव का निश्छल प्रार्थनाओं का होता ही होगा कोई मोल ..**शरीर की नश्वरता क...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :जिंदगी
  June 24, 2017, 2:20 pm
एक कहानी होती है । जिसमें खूब पात्र होते हैं । एक निश्चित समय में दो पात्रों के बीच वार्तालाप होता है । दो पात्र कोई भी वो दो होतें हैं जो कथानक के हिसाब से तय होते हैं । कथानक कौन लिखता है... उन किसी को नहीं मालूम । मालूम है तो बस इतना कि उस लिखे को मिटाया नहीं जा सकता । प्रति...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  June 6, 2017, 11:44 am
मेरी बगिया का सुमन मुझसे ये कहता है ..सुमन कहे पुकार के , सु-मन मुझे न तोड़महकाऊँ घर आँगन , मुझसे मुँह न मोड़ ये डाली मुझे प्यारी , नहीं देवालय की चाहबतियाऊँ रोज़ तुमसे , रहने दे अपनी पनाह  मैं सु-मन , सुमन को ये कहती है ...तू सुमन मैं भी सु-मन , जानू तेरे एहसास खिलता रहे तू हमेशा . मत ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
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  April 6, 2017, 2:21 pm
आजकल बहुत सारे शब्द मेरे ज़ेहन में घूमते रहते हैं इतने कि समेट नहीं पा रही हूँ अनगिनत शब्द अंदर जाकर चुपचाप बैठ गए हैं । एक दोस्त की बात याद आ रही है जब कुछ अरसा पहले यूँ ही शब्द मेरे ज़ेहन में कैद हो गए थे ।उसने कहा था , 'सुमी ! अक्सर ऐसा होता है जब बहुत सारे शब्द हमारे अंदर इकट...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
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  March 25, 2017, 4:40 pm
वो लड़की अक्सर देखती रहती सूर्य किरणों में उपजे छोटे सुनहरी कणों को हाथ बढ़ा पकड़ लेती दबा कर बंद मुट्ठी में ले आती अपने कमरे में खोल कर मुट्ठी बिखेर देती सुनहरापन :रात, पनीली आँखों में चाँद को भरकर ठीक इस तरह रख देती कमरे में शबनमी चाँदनी खिड़की और दरवाजे को बंद करगुनगुनात...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
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  March 20, 2017, 12:18 pm
प्रेम !हर दिन का उजालाहर रात की चाँदनी हर दोपहर की तपिश हर शाम की मदहोशी तुम्हें एक दिन में समेट पाऊंइतनी खुदगर्ज़ नहीं .....मेरे प्रिय !तुम्हें चिन्हित तुम्हारा ये दिन तुम्हें बहुत बहुत मुबारक !!सु-मन  ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
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  February 14, 2017, 2:40 pm
बहुत उदास सी है शाम आज आसमान भीखाली खाली घर की ओर बढ़तेउसके कदमों में है कुछ भारीपन यूँ तो अकसर दबे पाँव ही आती है ये उदासी पर आज न जाने क्यूँ इसकी आहट में है चुभन सी जो उसकी रूह को कचोटती हुई भर रही है उसकी नसों में एक धीमा ज़हर और वो अजाने ह...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
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  February 9, 2017, 12:19 am
वो लड़कीसफ़र में जाने से पहलेबतियाती हैआँगन में खिले फूल पत्तों से देती है उन्हें हिदायत हमेशा खिले रहने कीरोज़ छत पर दाना चुगने आई चिड़िया को दे जाती है यूँ ही हर रोज़ आते रहने का न्योताचाहती है वो माँ का घर हरा – भरा..घर से निकलते वक़्त टेकती है सर घर की देहड़ी परबिना पीछे मुड़...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
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  December 27, 2016, 1:13 pm
वो लड़कीरोटी सेंकते हुएनहीं मिटने देना चाहती अपने हाथों में लगी नेलपॉलिशचिमटे से पकड़ करगुब्बारे सी फूलती रोटी सहेज कर रख लेती कैसरोल में नहीं माँजना चाहती सिंक में पड़े जूठे बर्तन गुलाबी रंगे नाखूनों से नहीं उतरने देना चाहती सुर्ख रंगत ..पर कुछ ही देर बाद अपनी इस चाहत क...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  December 12, 2016, 3:46 pm
वो लड़का सारे दिन के बाझिल पलों को सुला देता है थपकियाँ देकर हर रात अपने बिस्तर में आँख मूंदती बेजान हसरतें जब निढाल हो सो जाती हैं एक कोने में वो उन्हेंलेकरअपनी हथेली में सुबकता है रात भर सुबह उठकर फिर जीने लगता है कुछ और बोझिल साँसें होठों पे मुस्कराहट के साथ वो लड़का ब...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  November 25, 2016, 2:54 pm
सुनो ! याद है वो कड़क धूप तपे थे जिसमें हम दोनों रख ली है मैंने संभाल के शरद में ओढेंगे इस गुनगुने मौसम में भर देंगे थोड़ी सी गर्माहट !!सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :तपिश
  November 11, 2016, 11:31 am
छाये बादलचहका उपवन नेह बरसा !!सु-मन ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :
  November 3, 2016, 12:11 pm
रहें ना रहें हम , महका करेंगे बन के कली बन के सबा बागे वफ़ा में ..सर्दियों में क्यारी की शुरुआत आखिर मेहनत रंग ला ही गई |बात कई महीनों पहले की है | हमारे ऑफिस के प्रांगण में सामने की तरफ खाली पड़ी जगह थी जिसमें मैं पौधे लगाना चाहती थी पर सभी द्वारा मेरी बात नज़रअंदाज़ की जाती ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :जिंदगी
  July 21, 2016, 11:39 am
एक हद तकजीये जा सकते हैं सब सुखएक हद तक ही सहा जा सकता है कोई दुखसरल सी चाही हुई जिंदगी में मिलती हैं कई उलझने बेहिच बदल देते हैं हम रास्ता मनचाहे को पाने के लिएभूल जाते हैं अक्सरपाने के लिए कुछ खोने की गहरी बात तय करना चाहते हैं खुदअपने आकाश का दायरा छोड़ देते ...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :सुख
  June 24, 2016, 11:29 pm
मेरे जाने के बादहोती रहेंगी यूँ ही सुबहेंशामें भी गुजरेंगी इसी तरहरातें कभी अलसाई सी स्याह होगींकभी शबनमी चांदनी से भरपूरखिला करेंगे यूँ हीये बेशुमार फूल इस आँगनकमरा यूँ ही सजा रहेगाकुछ मामूली और कीमती चीज़ों सेयूँ चलती रहेगी घड़ी टिक-टिकचलता रहेगा वक़्त अपनी चालधड़क...
बावरा मन...
सुमन'मीत'
Tag :जिंदगी
  May 21, 2016, 7:39 pm
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