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Blog: !!! आंशु - ओं के मोती...

Blogger: "आशु"
छिप-छिप आशु बहाने वालों, मोतीव्यर्थ लुटाने वालोंकुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है.सपना क्या है, नयन सेज पर सोया हुई आँख का पानीऔर टूटना है उसका ज्यों जागे कच्ची नींद जवानीगीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालोंकुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है.... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   12:24pm 28 Apr 2012 #
Blogger: "आशु"
आज का दिन मेरे लिए कुछ खास तो नहीं, लेकिन सोचा एक छोटी कहानी ही लिख दूँ...लोगो को अक्सर मैंने कहते सुना है की मेरे पास समय नहीं है पिताजी या माताजी .. या फिर.. मै आपके लिए कुछ भी कर पाने में असमर्थ हूँ...इत्यादि...इत्यादि...|||लेकिन करने वालो के लिए दुनिया में बहुत कुछ है.. जो हम सोच ... Read more
clicks 241 View   Vote 2 Like   6:59am 8 Feb 2012 #
Blogger: "आशु"
खुशहाली में इक बदहाली, तू भी है और मैं भी हूँहर निगाह पर एक सवाली, तू भी है और मै भी हूँदुनियां कुछ भी अर्थ लगाये,हम दोनों को मालूम हैभरे-भरे पर ख़ाली-ख़ाली , तू भी है और मै भी हूँ......."... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   6:28am 8 Feb 2012 #
Blogger: "आशु"
खुशहाली में इक बदहाली, तू भी है और मैं भी हूँहर निगाह पर एक सवाली, तू भी है और मै भी हूँदुनियां कुछ भी अर्थ लगाये,हम दोनों को मालूम हैभरे-भरे पर ख़ाली-ख़ाली , तू भी है और मै भी हूँ......."... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   6:28am 8 Feb 2012 #
Blogger: "आशु"
इस से पहले कि सजा मुझ को मुक़र्रर हो जाये उन हंसी जुर्मों कि जो सिर्फ मेरे ख्वाब में हैं ,इस से पहले कि मुझे रोक ले ये सुर्ख सुबह जिस कि शामों के अँधेरे मेरे आदाब में हैं ,अपनी यादों से कहो छोड़ दें तनहा मुझ को मैं परीशाँ भी हूँ और खुद में गुनाहगार भी हूँ इतना एहसान तो जायज... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   6:52am 18 Jan 2012 #
Blogger: "आशु"
‎" आबशारों की याद आती है ,फिर किनारों की याद आती है .जो नहीं हैं मग़र उन्ही से हूँ ,उन नज़ारों की याद आती है. ज़ख्म पहले उभर के आते हैं ,फिर हजारों की याद आती है. आईने में निहार कर खुद को ,कुछ इशारों की याद आती है .आसमाँ की सियाह रातों को ,अब सिंतारों की याद आती है. शोर में कु... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   12:11pm 12 Jan 2012 #
Blogger: "आशु"
‎" आबशारों की याद आती है ,फिर किनारों की याद आती है .जो नहीं हैं मग़र उन्ही से हूँ ,उन नज़ारों की याद आती है. ज़ख्म पहले उभर के आते हैं ,फिर हजारों की याद आती है. आईने में निहार कर खुद को ,कुछ इशारों की याद आती है .आसमाँ की सियाह रातों को ,अब सिंतारों की याद आती है. शोर में कुछ भी ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   12:11pm 12 Jan 2012 #
Blogger: "आशु"
‎"आबशारों की याद आती है ,फिर किनारों की याद आती है .जो नहीं हैं मग़र उन्ही से हूँ ,उन नज़ारों की याद आती है. ज़ख्म पहले उभर के आते हैं ,फिर हजारों की याद आती है. आईने में निहार कर खुद को ,कुछ इशारों की याद आती है .आसमाँ की सियाह रातों को ,अब सिंतारों की याद आती है. शोर में कु... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   12:11pm 12 Jan 2012 #
Blogger: "आशु"
"इल्म बड़ी दौलत हैतू भी स्कूल खोलइल्म पढ़ाफीस लगादौलत कमाफीस ही फीसपढाई के बीसबस के तीसयूनीफार्म के चालीसखेलों के अलगये वैराइटी प्रोग्राम के अलगलोगों के चीखने पर ना जादौलत कमाउससे और स्कूल खोलउससे और दौलत कमाकमाए जा ...कमाए जा ..."... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   12:56pm 9 Jan 2012 #
Blogger: "आशु"
मस्जिद तो अल्लाह की ठहरी मंदिर राम का निकलालेकिन मेरा लावारिस दिलअब जिस की जंबील में कोई ख्वाब कोई ताबीर नहीं हैमुस्तकबिल की रोशन रोशनएक भी तस्वीर नहीं हैबोल ए इंसान, ये दिल, ये मेरा दिलये लावारिस, ये शर्मिन्दा शर्मिन्दा दिलआख़िर किसके नाम का निकला मस्जिद तो अल्ला... Read more
clicks 186 View   Vote 1 Like   1:05pm 4 Jan 2012 #
Blogger: "आशु"
कोहनियों के ब़ल चलकरचाँद आज कितना करीब आया हैकांच की खिड़की से सरकतीबारिश की बूंदों कीकतारें और शीशे के इसपार भीगा हुआ मेरा मनचांदनी में नहाये हुए कुछ ख्वाबयादों की चादर भिगोने लगेआँखों के समंदर मेंघुलकर बह निकली एकतम्मना तुमसे जुड़ने की 'आशु'थरथराते होटों पे तुम्... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   7:54am 26 Sep 2011 #
clicks 114 View   Vote 0 Like   7:49am 23 Sep 2011 #
Blogger: "आशु"
मई का महीना और मध्याह्न का समय था। सूर्य की आँखें सामने से हटकर सिर पर जा पहुँची थीं, इसलिए उनमें शील न था। ऐसा विदित होता था मानो पृथ्वी उनके भय से थर-थर काँप रही थी। ठीक ऐसी ही समय एक मनुष्य एक हिरन के पीछे उन्मत्त चाल से घोड़ा फेंके चला आता था। उसका मुँह लाल हो रहा था और घ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   9:40am 12 Sep 2011 #
Blogger: "आशु"
एक बार एक आम आदमी जोर जोर से चिल्लारहा था, "प्रधानमंत्री निकम्मा है ."पुलिस के एक सिपाही ने सुना और उस की गर्दन पकड़ के दो रसीद किये और बोला, "चल थाने, प्रधानमंत्री की बेइज्ज़ती करता है?"वो बोला, "साहब मै तो कह रहा था फ़्रांस का प्रधानमंत्री निकम्मा है."ये सुन कर सिपाही ने दो औ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   8:02am 27 Aug 2011 #
Blogger: "आशु"
    हम जानते हैं की समाज में जब भी परिवर्तन की नींव डालने की कोशिशे की गयी हैं, उसके विरोधाभाष में कुछ न कुछ समस्याए जरुर आई हैं | मैं यहाँ अन्ना जी, बाबा रामदेव या कांग्रेस का न ही समर्थन कर रहा हु और ना ही उनको विरोध | किन्तु एक बात मेरी समझ में नहीं आ रही कि, क्या वाकई सरक... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   5:48am 22 Aug 2011 #
Blogger: "आशु"
भ्रष्टाचार के खिलाफ चलने वाली मुहिम में अब एक नया मोड़ आन खड़ा हुआ है | मैं यहाँ ना तो अन्ना जी को सपोर्ट कर रहा हु और ना ही सरकार की इस दोहरी राजनीती के ही समर्थन में हूँ | क्यूंकि इस देश को अपने स्वार्थ के लिए बेच देना इनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है| चूँकि इस देश को हम अपनी मा... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   6:27am 20 Aug 2011 #
Blogger: "आशु"
अब तक हम अन्ना जी का सिर्फ नाम सुनते आ रहे है, लेकिन क्या हममें सभी को पता है की अन्ना जी कौन है, और उनकी जीवनी क्या है... तो आइये जानते है भ्रष्टाचार के खिलाफ बुलंद आवाज उठाने वाले इन समाजसेवी के बारे में...भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन में आम आदमी को जोड़ने वाले 73 साल के सामा... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   7:49am 18 Aug 2011 #
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निचे दिए गए अयाज़ साहब के सवालो का जबाब है किसी के पास?......MONDAY, AUGUST 2, 2010बाबरी मस्जिद या राम मंदिर : बौद्धिक दृष्टि में DR.AYAZ AHMADरामचंद्र जी एक राजा थे उन्होने शासन किया और चले गए । बाबर एक बादशाह था उसने शासन किया और चला गया । हकनामा की बाबरी मस्जिद से संबंधित पोस्ट पर चल रही बहस पढ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   10:11am 11 Aug 2011 #
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      आम धारणा है कि तापवृद्धि केवल मनुष्यों द्वारा उपजाई गई समस्या है। वास्तव में मानवीय क्रिया-कलाप धरती के बढ़ते हुए तापमान के एक अंश के लिए ही उत्तरदायी हैं। प्रकृति में स्वत: होने वाली बहुत-सी प्रक्रियाएँ भी तापवृद्धि का कारण हैं। वैज्ञानिकों ने तापवृद्धि के ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   8:04am 11 Aug 2011 #
Blogger: "आशु"
... श्रीगणेशाय नमः ...जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थलेगलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् |डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयंचकार चण्ड्ताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् || १||जटाकटाहसंभ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी-- विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि |धगद्धगद्धगज्ज्वलल... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   6:14am 6 Aug 2011 #
Blogger: "आशु"
जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है , और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं , उस समय ये बोध कथा , " काँच की बरनी और दो कप चाय " हमें याद आती है । दर्शनशास्त्र के एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   2:47pm 5 Aug 2011 #
Blogger: "आशु"
एक पागल आदमी था | वो अपने आप को बहुत सुन्दर समझता था | जैसा की सब पागल समझतें हैं की पृथ्वी पर उस जैसा सुन्दर दूसरा कोई नहीं है | यही पागलपन के लक्षण है लेकिन वह आईने के सामने जाने से डरता था, लेकिन जब भी कोई उसके सामने आइना ले आता तो वह आईना फोड़ देता था | लोग पूछते ऐसा क्यों? त... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   8:15am 4 Aug 2011 #
Blogger: "आशु"
सर फ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैदेखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है।करता नहीं क्यूं दूसरा कुछ बात चीतदेखता हूं मैं जिसे वो चुप तिरी मेहफ़िल में है।ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसारअब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफ़िल में है।वक़्त आने दे बता देंग... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   1:50pm 1 Aug 2011 #
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