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Blog: parwaz परवाज़.....

Blogger: kanupriya Gupta
शहर सर्द नही होते,मौसम भी सर्द नही होते ये सारी सर्दियां,गर्म कपड़ों और आग की तपन से कम की जा सकती है।सर्द आत्माएं होती हैं, ये आत्माएं अपने आस पास का सारा जीवन सर्द कर देती हैं टेम्परेचर चाहे -20 हो सर्वाइव किया जा सकता है अगर चेहरे पर मुस्कुराहट और रिश्तों में ऊष्मा हो ...सर... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   7:00pm 8 Dec 2018 #
Blogger: kanupriya Gupta
फ़िल्म : मंटोडायरेक्टर : नंदिता दासराइटर : नंदिता दासस्टार कास्ट : नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी , रसिका दुग्गल, ताहिर राज भसीन, राजश्री देशपांडेसिनेमेटोग्राफी : कार्तिक विजयसेट डिज़ाइनिंग : रीता घोषआर्ट डायरेक्शन : राजेन्द्र चौधरीस्टिल फोटोग्राफी : आदित्य वर्मामंटो देखने से पह... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   5:54am 7 Dec 2018 #
Blogger: kanupriya Gupta
हम बच्चा हो जाने की हसरत तो करते रहते हैंकितना मुश्किल होगा सोचो फिर से बच्चा हो जानाये ऐसे करना होगा वो वैसे पढ़ना होगाऐ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   7:10pm 3 Jul 2018 #children
Blogger: kanupriya Gupta
मुझे तन्हाइयां बख्शोकहीं इस शोर से आगेअंधेरे घोर के आगेजो पल पल कसी जाएगले की डोर के आगेमुझे तन्हाइयां बख्शोमुझे तन्हाइयां बख्शोमैं उतना ही अकेला हूँजितना सीप में मोतीमेरी चाहत में सब पागलमुझे कुछ भी नहीं हासिलमेरी आँख डरती हैरोशनी के बवंडर सेचमकता हूँ ज़माने मेंड... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   8:23pm 4 Apr 2018 #kanupriyakahin
Blogger: kanupriya Gupta
प्यारे नानाजी,हम सच में आपको बहुत याद करते हैं।ये यादों का सफ़र आपके लिए आपके गांव और अपने ननिहाल को फिर से जी लेने की तमन्ना के साथ।ननिहाली किस्से हाँ यही नाम दे रही हूँ इस किस्सों की लहर को क्या कितना याद है कितनी यादें धुंधली हुई ये तो लिखते लिखते याद आएगा शायद पर अपना ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   9:35am 18 Nov 2017 #kayampur
Blogger: kanupriya Gupta
चलो हम दोनों भी इश्क़ में मशहूर हो जाएंतुम भोपाल हो जाओ, हम इंदौर हो जाएं तुम धीरे से मुस्का देना हम ताली देकर हँस देंगेतुम शायरी एक उछालना, हम बाहों में तुमको कस लेंगे तू भीमबैठका की सुबह सा शांत, मैं चौक बाज़ार की रात सी हूँतू भोपाली नफ़ासत वाला, मैं बिन बातों की बात सी ... Read more
clicks 311 View   Vote 0 Like   8:26am 14 Nov 2017 #
Blogger: kanupriya Gupta
देकर के ज़ख्म ख़ुद भी तो मरहम नहीं लेतेजो बीच राह छोड़ते हैं वो भी खुश नहीं रहतेइश्क़ की दीवारों में सेंध मारकरसोने के महलों ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   6:07am 14 Nov 2017 #
Blogger: kanupriya Gupta
वोइत्र की शीशी को दाहिने हाथ में लेती है और अपने बाएं हाथ की तरफ धीरे से बढ़ा देती है ,हथेली को उल्टा करके रुई के फाहे से उसपर खुशबू बिखेर लेती है और उस हाथ को अपनी नाक के पास ले जाकर सूँघती है और फिर खुशबू को सूंघते ही उसके चेहरे पर ऐसे भाव आते हैं जैसे किसी अजनबी से इस आस मे... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   1:40pm 27 Aug 2017 #itr
Blogger: kanupriya Gupta
बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर पोस्ट कर रही हूँ ..बेटे के लिए एक कविता लिखी है कितना सुन्दर है प्यारे बेटे तेरा इस जीवन में आना शीतल कोमल पूर्ण चन्द्र सा मद्धम मद्धम मुस्काना इस दुनिया के सब रिश्तों पर धीरे से भारी पड़ जानाहौले हौले से मेरा सबसे प्यारा अन्वित (दोस्त) हो जानातु... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   6:35pm 19 Sep 2016 #
Blogger: kanupriya Gupta
उतने मासूम नहीं लगते,उतने कच्चे नहीं लगते तेरे इस शहर के बच्चे मुझे बच्चे नहीं लगते जहाँ लगते थे मेले कभी गर्मी की छुट्टी में उन जगहों को अब झूले अच्छे नहीं लगते वो सिक्के जो बोए थे कभी नाना के बाग़ में पूरी जेबें भरे नोट भी उन सिक्को से नहीं लगते जो लोग दूसरों की गलतियों ... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   11:42am 17 Mar 2015 #
Blogger: kanupriya Gupta
छोटा सा, शहर गंगा का किनारा, कुछ गलियां  इन गलियों से ही अन्दर की तरफ जाती और छोटी गलियां जिनके दोनों तरफ कुछ घर, बड़ी गलियों में कुछ दुकानें और इन दुकानों में कुमार शानू ...नहीं कुमार शानू खुद नहीं पर उनकी आवाज़ ...और हमारे साथ उस आवाज़ को सुनता आयुष्मान खुराना ...मतलब फिल्म का ... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   1:37pm 4 Mar 2015 #
Blogger: kanupriya Gupta
मैं हमेशा से तुम्हे लिखना चाहती थी और  लिखना चाहती थी खुद को. लिखते लिखते जी लेना चाहती थी पर न जाने क्यों लिखते लिखते खो जाना इतना आसान नहीं , मैं ज़हर लिखना चाहती हु ऐसा ज़हर जो लिखते लिखते सूज गई उँगलियों में उतर आए , लिखने वाले को खबर ही न हो उसकी खुद की कलम अब उसे छलनी कर... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   12:22pm 30 Jan 2015 #
Blogger: kanupriya Gupta
आज कई दिन बाद ब्लॉग पर एक पोस्ट … इसे  कविता की जगह एक ऑफबीट सांग कहना ज्यादा बेहतर होगा … कोशिश कैसी है बताइयेगा …… कोई हमको ये बताए क्यों ये अंधी दौड़ है गलियां और चौबारे नहीं लंबी सड़क पर मोड़ हैक्यों  रात में दिन जैसा हो जाने की लम्बी  होड़ हैदिल घरों में रख... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   9:21am 7 Jan 2015 #
Blogger: kanupriya Gupta
बात ये नहीं की तुमने उसे कहाँ कैसे माराबात ये भी नहीं की मार देने के बादतुम्हें कितना अहसास हुआ की तुमने मार दिया ...मार दिया एक बच्ची को माँ के पेट मेंमार दिया उसे किसी पेड़ से लटकाकरमार दिया उसे काल कोठरी में बंद करकेया मार दिया उसके अरमानो कोफर्क नहीं पड़ता की क्यों  मा... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   2:02pm 25 Jun 2014 #
Blogger: kanupriya Gupta
एक ऐसी कविता जिसे कोई पुरूष लिखता तो बेहतर लिखता ज्यादा शिद्दत से लिखता...पर मैंने लिखी...लोग कहते हैं नारी का मन पढ़ा नहीं जा सकता..पर सच ये है कि पुरूष का मन ज्यादा गहरा है...उसमें भी प्रेम हैं संवेदनाए है...पुरूषो की ओर से ये एक कविता हर नारी के लिए....क्या कहूँ ओ प्रियतमा तु... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   9:30am 23 Apr 2014 #
Blogger: kanupriya Gupta
फ़ोन की लम्बी लम्बी  बातें कभी वो सुकून नहीं दे  सकती जो चिट्ठी के चंद शब्द देते हैं .तुम्हे कभी लिखने का शौक नहीं था और पढने का भी नहीं तो मेरी न जाने कितनी चिट्ठियां मन की मन में रह गई न उन्हें कागज़ मिले न स्याही .तुम्हारे छोटे छोटे मेसेज भी मैं कितनी बार पढ़ती थी तुमन... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   6:32pm 1 Apr 2014 #
Blogger: kanupriya Gupta
कई दिनों से कुछ लिखा ही नहीं जिसे यहाँ औसत किया ये कुछ  टुकड़े है कविताओं के  बस जो फेसबुक पर बिखरे थे समेत लाई हूँ …1. नज़दिकियां बढ़ी तो पता चला आसमां भी तंगदिल होता है...   कितने छोटे थे वो लोग जो सर पर साये की तरह थे 2. मैं तेरे नाम को हज़ार जगह लिखती हूँ,पर जो खो गया ह... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   6:28pm 1 Apr 2014 #
Blogger: kanupriya Gupta
 हमें नहीं चाहिए इतिहास की उन किताबों में नामजिनमें त्याग की देवी बनाकर स्त्री-गुण गाए जाएत्याग हमारा स्त्रिय गुण है जो उभरकर आ ही जाता है पर इसे बंधन बनाकर हम पर थोपने का प्रपंच बंद करो......नहीं चाहिए तुम्हारी झूठी अहमतुष्टि के लिए अपनी आत्मा से प्रतिपल धिक्कार....तुम ... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   9:01am 20 Jan 2014 #
Blogger: kanupriya Gupta
तुम लाशों के ढेरों पर तिलक लगाकर खुश होगे या खून की नदियों को अज़ान सुनाकर खुश होगे तुम धर्म के रंगों से मरघट में होली खेलोगे या बच्चो के सर से माँ का आँचल चुराकर बहलोगे तुम संगीत की ध्वनि में करूणा का रस भर दोगे या बचपन के कन्धों पर बारूद की बोरी धर दोगे तुम सावन की बूंदों... Read more
clicks 358 View   Vote 0 Like   9:08am 18 Oct 2013 #
Blogger: kanupriya Gupta
अपना पसीना उनकी नज़रों में ख़राब है आजकल नेताजी क्या कम नवाब है उनके इत्र भी हमारी भूख पर भारी पड़े खुशबुओं के दौर में रोटी का ख्वाब है रेशमी शालू ,गुलाबी शाम के वो कद्रदान आमजन की बेबसी का क्या जवाब है मशहूर हो जाने को वो रोंदे हमारी लाश को लाश हो जाना ही बस अपना सबाब है रोश... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   12:16pm 14 Aug 2013 #
Blogger: kanupriya Gupta
भूख है और उम्र है ,दोनों ही खत्म होती नहीं प्रसादों जेसे बड़े आवास लेकर क्या करू उम्र भर की सेवा का मोल दिया न प्रेम से सम्पूर्ण समर्पण के बदले ,परिहास लेकर क्या करू बूँद बूँद के लिए तरसे हुए अंतस यहाँ कागजों के कुएं और तालाब लेकर क्या करूँ मैं चुनुँगा और को, राज करेगा दू... Read more
clicks 240 View   Vote 0 Like   10:02am 13 Aug 2013 #
Blogger: kanupriya Gupta
parwaz blog:kyo khand khand hai uttarakhandलाशों के ढेरों के बीच मानवता कराह रही बिगड़े हालातों के  बीच भूख हिलोरे मार रही बिना दस्तक के आ गया सारी वादी में प्रचुर विध्वंस किससे करें सवाल क्यों खंड खंड है उत्तराखंड क्यों बांधों ने सीना चीरा क्यों नदियों का रस्ता मोड़ा ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   12:01pm 5 Jul 2013 #
Blogger: kanupriya Gupta
वो सारी लड़कियां हाँ वो सब की सब  जेसी हैं वेसी थी नहीं  वो बनाई गई वैसी ,गढ़ा गया उन्हें  धीरे धीरे  जैसे जहर दिया जाता है ठीक वैसे ही  उनमे से कई को दिया गया  पढने लिखने का अधुरा सा हक  दूध के आधे ग्लास की तरह  जिसमे बची हुई आधी जगह  में ठूस ठूस कर भरा था  एक अ... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   10:23am 5 Jul 2013 #
Blogger: kanupriya Gupta
होममेकर मैगज़ीन के मई अंक में मेरा आर्टिकल "जाने अपने रिश्ते की गहराई " शीर्षक के साथ प्रकाशित हुआ ....लेख की झलकिया प्रस्तुत हैं ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   9:38am 2 Jul 2013 #
Blogger: kanupriya Gupta
 तुम और हम दो ध्रुवो की तरह दोनों पर ज़िन्दगी टिकी हुई नहीं हम नदी के दो किनारे नहीं जो साथ न  होकर भी साथ ही हो हम तो विज्ञान की पूरी किताब है न्यूटन के क्रिया प्रतिकिया के सिद्धांत की तरह जितनी तेज़ी से क्रिया होती है उतनी ही तेजी से प्रतिक्रिया एक दम नपे तुले कितने प्रेम... Read more
clicks 262 View   Vote 0 Like   4:26am 22 May 2013 #
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