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Blogger: Yogendra Joshi
जीवन-यात्रा के अंत की ओर अग्रसर हो रहे मेरे एक मित्र जब अपनी व्याधियों का वर्णन करने लगे कि कैसे अब उन्हें सुनाई कम देता है, कि चश्मा भी मददगार नहीं रह गया है, कि दांतों के अभाव में ‘डेंचर’से काम चलाना पड़ता है, कि घुटने में दर्द बना ही रहता है, इत्यादि, तो मुझे राजा भर्तृह... Read more
clicks 246 View   Vote 0 Like   5:47am 18 May 2013 #Uncategorized
Blogger: Yogendra Joshi
मृच्छकटिकम्संस्कृत साहित्य की एक चर्चित नाट्यरचनाहै जिसकी चर्चा मैं पहले कभी कर चुका हूं (देखें ‘संस्कृत नाट्यकृति …’) । इस रचना में चोरी का एक प्रकरणहै, जिसमें चोरी के धंधे से जीवनयापन करने वाले चोर के मन में घुप अंधेरी रात में सेंध लगाते समय क्या-क्या विचार उपजते ह... Read more
clicks 239 View   Vote 0 Like   4:58am 30 Apr 2013 #नीति
Blogger: Yogendra Joshi
तैत्तिरीय उपनिषद् 11 प्रमुख उपनिषदों (ईश, ऐतरेय, कठ, केन, छान्दोग्य, तैत्तिरीय, बृहदारण्यक, माण्डूक्य, मुण्डक, प्रश्न, श्वेताश्वर) में से एक है ।यों उपनिषदों की कुल संख्या इससे कहीं अधिक बताई जाती है । गीता प्रेस, गोरखपुर, के एक उपनिषद् विशेषांक में 54 उपनिषदोंका उल्लेख है ... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   10:46am 17 Mar 2013 #अध्यात्म
Blogger: Yogendra Joshi
विगत ५ तारीख (जनवरी) और उसके पहले की चिट्ठा-प्रविष्टियों में महाभारत महाकाव्यके एक प्रकरण (भीष्म पितामहद्वारा महाराज युधिष्ठिरको दिये गये वृक्षों एवं जलाशयों की महत्ता के उपदेश) का जिक्र किया गया था । उसी से संबंधित इस अंतिम किश्त में नीति विषयक अन्य दो श्लोकोंका उल... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   2:55pm 24 Jan 2013 #नीति
Blogger: Yogendra Joshi
विगत ५ तारीख (जनवरी) और उसके पहले की चिट्ठा-प्रविष्टियों में महाभारत महाकाव्यके एक प्रकरण (भीष्म पितामहद्वारा महाराज युधिष्ठिरको दिये गये वृक्षों एवं जलाशयों की महत्ता के उपदेश) का जिक्र किया गया था । उसी से संबंधित इस अंतिम किश्त में नीति विषयक अन्य दो श्लोकोंका उल... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   2:55pm 24 Jan 2013 #नीति
Blogger: Yogendra Joshi
मैंने १६ अक्टूबरएवं १२ नवंबरके आलेखों में महाभारत महाकाव्यके एक प्रकरण का जिक्र किया था, जिसमें भीष्म पितामहद्वारा महाराज युधिष्ठिरको दिये गये वृक्षों एवं जलाशयों की महत्ताके उपदेश का वर्णन किया गया है । कई हफ़्तों के बाद मैं उसी विषय पर अगले दो श्लोकों को यहां उद्... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   5:18pm 5 Jan 2013 #नीति
Blogger: Yogendra Joshi
इस चिठ्ठे कीपिछली प्रविष्टि (16 अक्टूबर)में मैंने इस बात की चर्चा की थी कि महाभारत महाकाव्यके एक प्रकरण में भीष्म पितामहद्वारा महाराज युधिष्ठिरको वृक्षों एवं जलाशयों की महत्ताके उपदेश का वर्णन किया गया है । उसी विषय पर उपलब्ध अगले दो श्लोकों को यहां उद्धृत किया जा रह... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   10:42am 12 Nov 2012 #नीति
Blogger: Yogendra Joshi
महर्षि व्यासविरचित महाकाव्य महाभारतमें एक प्रकरण है, जिसमें भीष्म पितामह महाराज युधिष्ठिरको प्रजा के हित में शासन चलाने के बारे में उपदेश देते हैं । यह प्रकरण कौरव-पांडव समाप्ति के बाद युधिष्ठिर द्वारा राजकाज संभालने के समय का है । इसी के अंतर्गत एक स्थल पर मृत्युश... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   9:28am 16 Oct 2012 #धर्म
Blogger: Yogendra Joshi
राजा भर्तृहरिएक कवि के रूप में भी विख्यात रहे हैं । उनके विषय में मैंने संक्षेपतः अन्यत्रलिखा है । उनके द्वारा विरचित तीन रचनाएं चर्र्चित रही हैं । वे हैं: नीतिशतक, शृंगारशतक, एवंवैराग्यशतक ।ये तीनों मिलकर शतकत्रयके नाम से भी जाने जाते हैं । इनकी विषयवस्तु नाम के अनु... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   10:03am 24 Sep 2012 #Uncategorized
Blogger: Yogendra Joshi
इस ब्लॉग कीपिछली प्रविष्टिमें मैंने सरकारी धन के दुरुपयोगके संदर्भ में कौटिल्य (चाणक्य)के विचारों का आंशिक उल्लेख किया था । इस आलेख में उसी सिलसिले में अन्य तीन श्लोकों की मैं चर्चा कर रहा हूं ।अपि शक्या गतिर्ज्ञातुं पततां खे पतत्त्रिणाम् ।न तु प्रच्छन्नभावानां यु... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   5:31am 8 Aug 2012 #नीति
Blogger: Yogendra Joshi
कौटिल्य सुविख्यात ऐतिहासिक पुरुष चाणक्य का वैकल्पिक नाम है। चाणक्य के बारेमें दो-चार परिचयात्मक शब्द पहले कभी मैंने इसी ब्लॉग में लिखे हैं । उनका परिवार-प्रदत्त असली नाम विष्णुदत्तथा किंतु चणक के पुत्रहोने के नाते वे चाणक्य नाम से ही विख्यात हुए । कुटिल राजनीतिमें... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   4:46pm 20 Jul 2012 #नीति
Blogger: Yogendra Joshi
संस्कृत नीतिग्रंथ पंचतंत्रके एक प्रकरण में इस बात का उल्लेख पढ़ने को मिलता है कि मनुष्य समाज में धन-संपदा की महत्ताको प्रायः सर्वत्र स्वीकारा जाता है । अपने चिट्ठे की पिछली दो प्रविष्टियों (जून 6 एवं जून 15) में मैंने पंचतंत्र के तत्संबंधित कुछ श्लोकों का जिक्र किया था... Read more
clicks 253 View   Vote 0 Like   1:22pm 2 Jul 2012 #नीति
Blogger: Yogendra Joshi
संस्कृतनीतिग्रंथ पंचतंत्रके एक प्रकरण में इस बात का वर्णन मिलता है कि मनुष्य के व्यावहारिक जीवन मेंधन-संपदा का बहुत महत्त्व है। उक्त तथ्य से संबंधिततीन श्लोकोंका उल्लेख मैंने पिछली पोस्टमें किया है । इस स्थल पर में तीन अन्य श्लोकों की चर्चाकर रहा हूं । ये श्लोक आगे ... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   10:09am 15 Jun 2012 #कथा
Blogger: Yogendra Joshi
पंचतंत्रसंस्कृत साहित्य का सुविख्यात नीतिग्रंथहै,जिसका संक्षिप्त परिचय मैंने अन्यत्र दे रखा है । ग्रंथ के अंतर्गत एक प्रकरण में व्यावहारिक जीवन में धन-संपदा की महत्ता का वर्णन मिलता है । उसके दो सियार पात्रों – वस्तुतः दो भाइयों, दमनक एवं करटक– में से एक दूसरे के स... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   4:44pm 6 Jun 2012 #नीति
Blogger: Yogendra Joshi
ऋग्वेदके प्रथम मंडल में कुछ ऋचाएंहैं जिनमें मधु शब्द का वारंवार प्रयोग हुआ है । आम जन मधु शब्द को सामान्यतः शहद के लिए प्रयोग में लेते हैं । किंतु इन ऋचाओं में उसे व्यापक अर्थ में लिया गया है । मधुका अर्थ है जो मिठास लिए हो, जिससे सुखानुभूति हो, जो आनंदप्रद हो, अथवा जो श्... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   12:55pm 11 May 2012 #अध्यात्म
Blogger: Yogendra Joshi
‘मृच्छकटिकम्’संस्कृत साहित्य की एक चर्चित नाट्य-रचना है, जिसके बारे में मैं पहले अन्यत्र लिख चुका हूं (देखेंदिनांक 26-9-2010एवं 11-2-2009 की प्रविष्ठियां) ।उसका नायक अभिजात वर्ग का एक उदार एवं सरलहृदय ब्राह्मण है, जो अति दानशीलता के कारण अपनी संपन्नता खो बैठता है । नाटक में एक प... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   4:47pm 4 May 2012 #मनुस्मृति
Blogger: Yogendra Joshi
समाज मेंधन की महत्तासर्वत्र प्रायः सबके द्वारा स्वीकारी जाती है, और धनसंचय के माध्यम से स्वयं को सुरक्षित रखने का प्रयत्न कमोबेश सभी लोग करते हुए देखे जाते हैं । कदाचित् विरले लोग ही इस प्रश्न पर तार्किक चिंतन के साथ विचार करते होंगे कि धन की कितनी आवश्यकता किसी को सा... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   2:43pm 10 Oct 2011 #नीति
Blogger: Yogendra Joshi
भर्तृहरि राजा द्वारा विरचित शतकत्रयम् संस्कृत साहित्य की छोटी किंतु गंभीर अर्थ रखने वाली चर्चित रचना है ।कहा जाता है कि उन्हें प्रौढ़ावस्था पार करते-करते वैराग्य हो गया था और तदनुसार उन्होंने राजकार्य से संन्यास ग्रहण कर लिया था । उनके बारे में संक्षेप में मैंने क... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   10:26am 11 Sep 2011 #नीति
Blogger: Yogendra Joshi
महाभारत महाकाव्यके आरंभिक पर्व – आदिपर्व– में अपराधी को देय दण्डकी महत्ता का उल्लेख है । उसका जिक्र मैंने पहले की एक पोस्ट में किया था । मुझे महाभारत युद्ध के बाद की स्थिति से संबंधित पर्व – शान्तिपर्व– में भी दण्ड की बातें पढ़ने को मिली हैं । मैं कुछ चुने हुए श्लोकों ... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   2:08pm 23 Jul 2011 #धर्म
Blogger: Yogendra Joshi
हिंदुओं के लिए वेदों का सैद्धांतिक महत्त्वआज भी है । सैद्धांतिक शब्द का प्रयोग मैं इसलिए कर रहा हूं कि व्यवहार में अब वेदों का अध्ययन करने वाले प्रायः नहीं के बराबर रह गये हैं, और उनके अनुसार जीवन यापन करने वाला तो शायद ही कोई रह गया होगा । वेद कितने स्वीकार्य हैं, इस बा... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   6:25am 5 Jul 2011 #दर्शन
Blogger: Yogendra Joshi
किसी भी शासकीय व्यवस्था में दण्ड की व्यवस्थाआवश्यक है । मनुस्मृतिमें तत्संबंधित कुछएक श्लोकों का उल्लेख मैंने इसी ब्लाग के 14 मई की पोस्ट में किया था ।उसी आशय के नीतिवचन मुझे महाभारत के आदिपर्व के ‘आस्तीक’ प्रकरणमें पढ़ने को मिले हैं । उक्त प्रकरण अर्जुन के प्रपौत्र, ... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   4:48pm 6 Jun 2011 #धर्म
Blogger: Yogendra Joshi
मनुस्मृतिहिंदू समाज का एक प्राचीन ग्रंथ है, जिसमें मनुष्य के कर्तव्यों का विवरणप्रस्तुत किया गया है । बहुत-से लोगों की दृष्टि में यह एक विवादास्पद ग्रंथहै, क्योंकि यह वर्ण-व्यवस्था का पक्षधर है और स्त्री को पुरुष के एकदम बराबर का दर्जा नहीं देता है, यद्यपि स्त्री को स... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   4:52am 14 May 2011 #धर्म
Blogger: Yogendra Joshi
कई वेदमंत्रों में सूर्य, अग्नि, इंद्र, वरुण इत्यादिदेवों के प्रति प्रार्थना का उल्लेख देखने को मिलता है । कुछ मंत्रों मेंदेवशब्द के प्रयोग द्वारा उनकी सामूहिक स्तुति भी व्यक्त की गई । ये देव वस्तुतः क्या हैं मैं कभी समझ नहीं पाया । ऐसा प्रतीत होता है कि वैदिक चिंतकों ... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   3:01pm 16 Apr 2011 #अध्यात्म
Blogger: Yogendra Joshi
हिंदू परिवारों के धार्मिक कर्मकांडों के निमंत्रणपत्रों पर अक्सर देव-वंदनाके छंद मुद्रित देखने को मिलते हैं । कम से कम उत्तर भारतीयों में तो यह परंपरा प्रचलित है ही । चूंकि शुभकार्यों का आरंभ गणेश-पूजन से होता है, अतः गणेश-वंदना के छंदों का प्रयोग सर्वाधिक मिलता है । क... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   4:45pm 7 Mar 2011 #कर्मकांड
Blogger: Yogendra Joshi
पिछली दो पोस्टों, दिनांकित 8-2-2011एवं 13-2-2011, क्रमशः, में मैंने इस बात का उल्लेख किया था कि अनेक हिंदू परिवार कार्यों के शुभारंभ के समय गणेश अर्चना करते हैं । प्रार्थना के तत्संबंधित छंद प्रायः वैवाहिक निमंत्रण-पत्रों तथा अन्य स्थलों पर अंकित देखने को मिलते हैं । मैंने कुछए... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   6:15am 19 Feb 2011 #कर्मकांड
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