Hamarivani.com

feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/

जीवन-यात्रा के अंत की ओर अग्रसर हो रहे मेरे एक मित्र जब अपनी व्याधियों का वर्णन करने लगे कि कैसे अब उन्हें सुनाई कम देता है, कि चश्मा भी मददगार नहीं रह गया है, कि दांतों के अभाव में ‘डेंचर’से काम चलाना पड़ता है, कि घुटने में दर्द बना ही रहता है, इत्यादि, तो मुझे राजा भर्तृह...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :Uncategorized
  May 18, 2013, 11:17 am
मृच्छकटिकम्संस्कृत साहित्य की एक चर्चित नाट्यरचनाहै जिसकी चर्चा मैं पहले कभी कर चुका हूं (देखें ‘संस्कृत नाट्यकृति …’) । इस रचना में चोरी का एक प्रकरणहै, जिसमें चोरी के धंधे से जीवनयापन करने वाले चोर के मन में घुप अंधेरी रात में सेंध लगाते समय क्या-क्या विचार उपजते ह...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :नीति
  April 30, 2013, 10:28 am
तैत्तिरीय उपनिषद् 11 प्रमुख उपनिषदों (ईश, ऐतरेय, कठ, केन, छान्दोग्य, तैत्तिरीय, बृहदारण्यक, माण्डूक्य, मुण्डक, प्रश्न, श्वेताश्वर) में से एक है ।यों उपनिषदों की कुल संख्या इससे कहीं अधिक बताई जाती है । गीता प्रेस, गोरखपुर, के एक उपनिषद् विशेषांक में 54 उपनिषदोंका उल्लेख है ...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :अध्यात्म
  March 17, 2013, 4:16 pm
विगत ५ तारीख (जनवरी) और उसके पहले की चिट्ठा-प्रविष्टियों में महाभारत महाकाव्यके एक प्रकरण (भीष्म पितामहद्वारा महाराज युधिष्ठिरको दिये गये वृक्षों एवं जलाशयों की महत्ता के उपदेश) का जिक्र किया गया था । उसी से संबंधित इस अंतिम किश्त में नीति विषयक अन्य दो श्लोकोंका उल...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :नीति
  January 24, 2013, 8:25 pm
विगत ५ तारीख (जनवरी) और उसके पहले की चिट्ठा-प्रविष्टियों में महाभारत महाकाव्यके एक प्रकरण (भीष्म पितामहद्वारा महाराज युधिष्ठिरको दिये गये वृक्षों एवं जलाशयों की महत्ता के उपदेश) का जिक्र किया गया था । उसी से संबंधित इस अंतिम किश्त में नीति विषयक अन्य दो श्लोकोंका उल...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :नीति
  January 24, 2013, 8:25 pm
मैंने १६ अक्टूबरएवं १२ नवंबरके आलेखों में महाभारत महाकाव्यके एक प्रकरण का जिक्र किया था, जिसमें भीष्म पितामहद्वारा महाराज युधिष्ठिरको दिये गये वृक्षों एवं जलाशयों की महत्ताके उपदेश का वर्णन किया गया है । कई हफ़्तों के बाद मैं उसी विषय पर अगले दो श्लोकों को यहां उद्...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :नीति
  January 5, 2013, 10:48 pm
इस चिठ्ठे कीपिछली प्रविष्टि (16 अक्टूबर)में मैंने इस बात की चर्चा की थी कि महाभारत महाकाव्यके एक प्रकरण में भीष्म पितामहद्वारा महाराज युधिष्ठिरको वृक्षों एवं जलाशयों की महत्ताके उपदेश का वर्णन किया गया है । उसी विषय पर उपलब्ध अगले दो श्लोकों को यहां उद्धृत किया जा रह...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :नीति
  November 12, 2012, 4:12 pm
महर्षि व्यासविरचित महाकाव्य महाभारतमें एक प्रकरण है, जिसमें भीष्म पितामह महाराज युधिष्ठिरको प्रजा के हित में शासन चलाने के बारे में उपदेश देते हैं । यह प्रकरण कौरव-पांडव समाप्ति के बाद युधिष्ठिर द्वारा राजकाज संभालने के समय का है । इसी के अंतर्गत एक स्थल पर मृत्युश...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :धर्म
  October 16, 2012, 2:58 pm
राजा भर्तृहरिएक कवि के रूप में भी विख्यात रहे हैं । उनके विषय में मैंने संक्षेपतः अन्यत्रलिखा है । उनके द्वारा विरचित तीन रचनाएं चर्र्चित रही हैं । वे हैं: नीतिशतक, शृंगारशतक, एवंवैराग्यशतक ।ये तीनों मिलकर शतकत्रयके नाम से भी जाने जाते हैं । इनकी विषयवस्तु नाम के अनु...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :Uncategorized
  September 24, 2012, 3:33 pm
इस ब्लॉग कीपिछली प्रविष्टिमें मैंने सरकारी धन के दुरुपयोगके संदर्भ में कौटिल्य (चाणक्य)के विचारों का आंशिक उल्लेख किया था । इस आलेख में उसी सिलसिले में अन्य तीन श्लोकों की मैं चर्चा कर रहा हूं ।अपि शक्या गतिर्ज्ञातुं पततां खे पतत्त्रिणाम् ।न तु प्रच्छन्नभावानां यु...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :नीति
  August 8, 2012, 11:01 am
कौटिल्य सुविख्यात ऐतिहासिक पुरुष चाणक्य का वैकल्पिक नाम है। चाणक्य के बारेमें दो-चार परिचयात्मक शब्द पहले कभी मैंने इसी ब्लॉग में लिखे हैं । उनका परिवार-प्रदत्त असली नाम विष्णुदत्तथा किंतु चणक के पुत्रहोने के नाते वे चाणक्य नाम से ही विख्यात हुए । कुटिल राजनीतिमें...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :नीति
  July 20, 2012, 10:16 pm
संस्कृत नीतिग्रंथ पंचतंत्रके एक प्रकरण में इस बात का उल्लेख पढ़ने को मिलता है कि मनुष्य समाज में धन-संपदा की महत्ताको प्रायः सर्वत्र स्वीकारा जाता है । अपने चिट्ठे की पिछली दो प्रविष्टियों (जून 6 एवं जून 15) में मैंने पंचतंत्र के तत्संबंधित कुछ श्लोकों का जिक्र किया था...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :नीति
  July 2, 2012, 6:52 pm
संस्कृतनीतिग्रंथ पंचतंत्रके एक प्रकरण में इस बात का वर्णन मिलता है कि मनुष्य के व्यावहारिक जीवन मेंधन-संपदा का बहुत महत्त्व है। उक्त तथ्य से संबंधिततीन श्लोकोंका उल्लेख मैंने पिछली पोस्टमें किया है । इस स्थल पर में तीन अन्य श्लोकों की चर्चाकर रहा हूं । ये श्लोक आगे ...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :कथा
  June 15, 2012, 3:39 pm
पंचतंत्रसंस्कृत साहित्य का सुविख्यात नीतिग्रंथहै,जिसका संक्षिप्त परिचय मैंने अन्यत्र दे रखा है । ग्रंथ के अंतर्गत एक प्रकरण में व्यावहारिक जीवन में धन-संपदा की महत्ता का वर्णन मिलता है । उसके दो सियार पात्रों – वस्तुतः दो भाइयों, दमनक एवं करटक– में से एक दूसरे के स...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :नीति
  June 6, 2012, 10:14 pm
ऋग्वेदके प्रथम मंडल में कुछ ऋचाएंहैं जिनमें मधु शब्द का वारंवार प्रयोग हुआ है । आम जन मधु शब्द को सामान्यतः शहद के लिए प्रयोग में लेते हैं । किंतु इन ऋचाओं में उसे व्यापक अर्थ में लिया गया है । मधुका अर्थ है जो मिठास लिए हो, जिससे सुखानुभूति हो, जो आनंदप्रद हो, अथवा जो श्...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :अध्यात्म
  May 11, 2012, 6:25 pm
‘मृच्छकटिकम्’संस्कृत साहित्य की एक चर्चित नाट्य-रचना है, जिसके बारे में मैं पहले अन्यत्र लिख चुका हूं (देखेंदिनांक 26-9-2010एवं 11-2-2009 की प्रविष्ठियां) ।उसका नायक अभिजात वर्ग का एक उदार एवं सरलहृदय ब्राह्मण है, जो अति दानशीलता के कारण अपनी संपन्नता खो बैठता है । नाटक में एक प...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :मनुस्मृति
  May 4, 2012, 10:17 pm
समाज मेंधन की महत्तासर्वत्र प्रायः सबके द्वारा स्वीकारी जाती है, और धनसंचय के माध्यम से स्वयं को सुरक्षित रखने का प्रयत्न कमोबेश सभी लोग करते हुए देखे जाते हैं । कदाचित् विरले लोग ही इस प्रश्न पर तार्किक चिंतन के साथ विचार करते होंगे कि धन की कितनी आवश्यकता किसी को सा...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :नीति
  October 10, 2011, 8:13 pm
भर्तृहरि राजा द्वारा विरचित शतकत्रयम् संस्कृत साहित्य की छोटी किंतु गंभीर अर्थ रखने वाली चर्चित रचना है ।कहा जाता है कि उन्हें प्रौढ़ावस्था पार करते-करते वैराग्य हो गया था और तदनुसार उन्होंने राजकार्य से संन्यास ग्रहण कर लिया था । उनके बारे में संक्षेप में मैंने क...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :नीति
  September 11, 2011, 3:56 pm
महाभारत महाकाव्यके आरंभिक पर्व – आदिपर्व– में अपराधी को देय दण्डकी महत्ता का उल्लेख है । उसका जिक्र मैंने पहले की एक पोस्ट में किया था । मुझे महाभारत युद्ध के बाद की स्थिति से संबंधित पर्व – शान्तिपर्व– में भी दण्ड की बातें पढ़ने को मिली हैं । मैं कुछ चुने हुए श्लोकों ...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :धर्म
  July 23, 2011, 7:38 pm
हिंदुओं के लिए वेदों का सैद्धांतिक महत्त्वआज भी है । सैद्धांतिक शब्द का प्रयोग मैं इसलिए कर रहा हूं कि व्यवहार में अब वेदों का अध्ययन करने वाले प्रायः नहीं के बराबर रह गये हैं, और उनके अनुसार जीवन यापन करने वाला तो शायद ही कोई रह गया होगा । वेद कितने स्वीकार्य हैं, इस बा...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :दर्शन
  July 5, 2011, 11:55 am
किसी भी शासकीय व्यवस्था में दण्ड की व्यवस्थाआवश्यक है । मनुस्मृतिमें तत्संबंधित कुछएक श्लोकों का उल्लेख मैंने इसी ब्लाग के 14 मई की पोस्ट में किया था ।उसी आशय के नीतिवचन मुझे महाभारत के आदिपर्व के ‘आस्तीक’ प्रकरणमें पढ़ने को मिले हैं । उक्त प्रकरण अर्जुन के प्रपौत्र, ...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :धर्म
  June 6, 2011, 10:18 pm
मनुस्मृतिहिंदू समाज का एक प्राचीन ग्रंथ है, जिसमें मनुष्य के कर्तव्यों का विवरणप्रस्तुत किया गया है । बहुत-से लोगों की दृष्टि में यह एक विवादास्पद ग्रंथहै, क्योंकि यह वर्ण-व्यवस्था का पक्षधर है और स्त्री को पुरुष के एकदम बराबर का दर्जा नहीं देता है, यद्यपि स्त्री को स...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :धर्म
  May 14, 2011, 10:22 am
कई वेदमंत्रों में सूर्य, अग्नि, इंद्र, वरुण इत्यादिदेवों के प्रति प्रार्थना का उल्लेख देखने को मिलता है । कुछ मंत्रों मेंदेवशब्द के प्रयोग द्वारा उनकी सामूहिक स्तुति भी व्यक्त की गई । ये देव वस्तुतः क्या हैं मैं कभी समझ नहीं पाया । ऐसा प्रतीत होता है कि वैदिक चिंतकों ...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :अध्यात्म
  April 16, 2011, 8:31 pm
हिंदू परिवारों के धार्मिक कर्मकांडों के निमंत्रणपत्रों पर अक्सर देव-वंदनाके छंद मुद्रित देखने को मिलते हैं । कम से कम उत्तर भारतीयों में तो यह परंपरा प्रचलित है ही । चूंकि शुभकार्यों का आरंभ गणेश-पूजन से होता है, अतः गणेश-वंदना के छंदों का प्रयोग सर्वाधिक मिलता है । क...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :कर्मकांड
  March 7, 2011, 10:15 pm
पिछली दो पोस्टों, दिनांकित 8-2-2011एवं 13-2-2011, क्रमशः, में मैंने इस बात का उल्लेख किया था कि अनेक हिंदू परिवार कार्यों के शुभारंभ के समय गणेश अर्चना करते हैं । प्रार्थना के तत्संबंधित छंद प्रायः वैवाहिक निमंत्रण-पत्रों तथा अन्य स्थलों पर अंकित देखने को मिलते हैं । मैंने कुछए...
feed/http://vichaarsankalan.wordpress.com/feed/...
Tag :कर्मकांड
  February 19, 2011, 11:45 am
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3685) कुल पोस्ट (167859)