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Blog: अभिव्यक्ति

Blogger: रोहित भूषण
पलकोँ का ये शामियाना तेरा,बहुत खूब ये आशियाना तेरा...काजल की काली चटख ये घटा,रंग इनसे भरूँ जिंदगी मेँ सदा,बिजलियोँ सी चमक, रौशनी सी दमक,मैँ निखरता रहूँ देख तेरी अदा,इशारोँ मेँ सब कुछ बताना तेरा,छुपे राज़ दिल के जताना तेरा ....                  पलकोँ का ये शामियाना त... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   6:52pm 9 Oct 2012 #
Blogger: रोहित भूषण
इस आँगन में खेले हमने, जाने कितने खेल,धमाचौकड़ी, छुआ-छुई से चोर-सिपाही-रेल...सैर सुहानी, रुत मस्तानी; खूब चली वह नाव, अब याद आती झोंकों वाली, मीठी शीतल छाँव...कोरे कागज़ के पन्नों पर, गीत मधुर जीवन के,रचे गए सब यहीं उजाले, स्नेह-सुमन उपवन के...आशीषों की पुण्य धार में , भींग सींच... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   6:38pm 9 Oct 2012 #
Blogger: रोहित भूषण
दूर उस चौराहे पर भीकू ठेला लगाता था,याद है कुछ? जी हाँ, वही जो समोसे बनाता था;साथ में पकोड़े-जलेबियाँ भी तलता था,फुर्सत में हथेली पर खैनी मलता था....दो रुपयों में एक समोसा,दस में पाव जलेबी....बच्चों का वही एक भरोसा,बोली उसकी अलबेली...आलू-मटर नहीं बाबू वह,खुद को रोज उबालता;तपकर-ख... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   6:20pm 9 Oct 2012 #
Blogger: रोहित भूषण
       देखो दीवाली आई आज,       हर्षित नगर-ग्राम-समाज,       छुट्टी पर दैनिक काम-काज,        देखो दीवाली आई आज....   बहती उल्लासमयी रसधार,    घोली उमंगों ने निखार,     गुन-गुन गाती 'बौराई'बयार,       घर-घर पहुँची 'उजली'बहार....                 &n... Read more
clicks 298 View   Vote 0 Like   5:53am 26 Oct 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
एक नशा दिल पे जैसे छा जाए,जब कभी आपका ख़याल आए...सामने हुस्न के, चाँदनी भी जले,जब भी आए, आपकी मिसाल आएजिंदगी स्याह, काली बेरंग थी,आप आए तो, रंग-गुलाल आए....कोई मकसद नहीं, वजह ना थी,क्यों जिएँ, ऐसे कुछ सवाल आए...नूर तुमसे है, सादगी तुमसे,                                  &nb... Read more
clicks 348 View   Vote 0 Like   11:48am 18 Oct 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
दबे पाँव चुपके हवा पास आई,लगा वो तुम्हारा संदेशा हो लाई;झोली थी खाली, झलक कोई ना थी;            न आहट, न खुशबू , खबर कोई ना थी....  जो पूछा पता, चाँद की चाँदनी से;वो बोली ना जानूँ, मैं इस रौशनी को;खिड़की के पल्ले, किए बंद तुमनेया शायद सखी को जलाया हो तुमने....उषा क्या, निशा ... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   1:06pm 14 Oct 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
स्वतंत्रता-दिवस की शुभकामनाओं के साथ एक आह्वान.....******************************​****         रण-भेरी बज उठी है यारों, जागो देश पुकारता;                      भ्रष्टों की अब खैर नहीं, बूढा शेर दहाड़ता...लोकपाल एक ब्रह्मास्त्र है,     आज जरुरत आन पड़ी;काले फन फैला फुंफकारती,   ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   1:02pm 15 Aug 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
धूप छत पर जब बिखरती है, हौले-हौले फिजा निखरती है;भँवरे फूलों से बात करते हैं, पत्ते-पत्ते चमक दमकते है;जब हवा झूमकर मचलती है, धूल उड़-उड़ गगन से मिलती है.....दूर तक खिली-खिली धरती,मानो दुल्हन नई-सी लगती है;रेशमी रौशनी की चादर में,लिपटी वो शबनमी सँवरती है... धूप छत पर जब बिखरती ... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   11:17am 17 Jul 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
 इन दिनों मीडिया तथा कुछ लोग खूब हो-हल्ला मचा रहे हैं कि योग-गुरु"बाबा रामदेव"का भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करना; एक राजनीतिक चाल का हिस्सा अथवा एक स्वार्थपरक कृत्य है. मैं प्रस्तुत कविताके माध्यम से इसका विरोध करता हूँ..********************************                    &n... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   7:45pm 6 Jun 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
********************आरा से है, लगाव पुराना,  फिर भी मुझे, अलगाव निभाना;भूल गया मैं, घर क्या होता,  परदेस में जब, कभी ये मन रोता; पगले को आस बंधाता हूँ,ढाढस दे, चुप करवाता हूँ;  उस नगरी में, तब आयेंगे,    जब पढ़-लिख, कुछ बन जायेंगें; संकल्प ये दृढ़, विश्वास अटल, एक दिन अवश्य, हम हो... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   9:46am 22 May 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
"प्रस्तावना"प्रस्तुत 'जीवन-चरित'यादों की फुलवारी से चुनकर एकत्रित पुष्पों से गूंथी हुई वह माला है जिसमें सच्चाई की ताजगी और उमंगों की खुशबू है. यह रचना उस आदर्शवादी, प्रखर, परोपकारी मानव को समर्पित है जो निःस्वार्थ सेवा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध रहे. आज की पीढ़ी यदि इस गाथ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   11:34am 15 May 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
                                                                आतंक के साम्राज्य में, बेचारी मानवता रोती,                          भार ऐसे कुकृत्यों का, कैस... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   2:42pm 7 May 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
      नई दिशा,डगर नई; जिंदगी कहाँ खड़ी;   दूर कितनी आ गई,कश्ती जो बचपन में चली... कल की जैसे बात हो, साथियों के साथ वो; धूल में कपड़े सने, एक-दूजे से भिड़े;चीका-कंचे-गिल्ली-डंडा, मिलजुल हमनें थे खेले;चटकीली-मीठी गोलियाँ, वो इमलियों की चोरियाँ,बागों में मुफ्त दावतें, ... Read more
clicks 300 View   Vote 0 Like   4:21am 7 May 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
आँखों में सपनों की प्यारी,इक बारात सजाई है;साल नए, तुम जल्दी आना,पलकें कब से बिछाई हैं....                    झोली में खुशियाँ भर लाना,                    आशा की किरणें बिखराना;                    जा... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   9:30pm 6 May 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
रंग की भाषा, रंग की बोली,नाम इसी का होली है;झूमे अबीर-गुलाल संग टोली,प्रीत की पावन डोली है....               फागुन की बरात रंगीली,                  रुत मतवाली, बड़ी नशीली;                     भोर किरण करती अ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   9:06pm 6 May 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
उनसे मिलन की घडी सुहानी,आ ही गई वो रूत मस्तानी;बेताबी अपनी बढती जाए;धडकन बनी दीवानी......                         नयनों से ही बात बढ़ी है,                         एक कड़ी दरम्याँ जुड़ी है;          &nbs... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   8:48pm 6 May 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
                                                                                                                                                                        आज धरा के पावन आँगन,फिर से उषा मुस्काई ह... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   7:43pm 6 May 2011 #
Blogger: रोहित भूषण
  हम खेतों-से,खलिहानों से;  और हरे मैदानों से,  खट्टी-मीठी अमवारी से;  नीली-पीली फुलवारी से...फिर उधर जरा चलें...        कभी लिपटे हम धूलों में,और झुले कभी झूलों में;लुके-छिपे उन खेलों में,पले-पढ़े उन मेलों में..संगों में रंग भरें...               ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   5:08pm 6 May 2011 #
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