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मा पलायनम !

मंगलवार की शाम चार बजे खबर मिलती है कि मेरे पड़ोसी गांव बख्शा निवासी  पंडित लक्ष्मी उपाध्याय को सबेरे किसी विषधर सर्प  ने काट लिया,जिला अस्पताल में भर्ती हैं ,मुंह से झाग निकल रहा है और अब वे बचेंगे नहीं। अचानक इस खबर ने मुझे झकझोर दिया। श्री उपाध्याय जी की उम्र ६० के ...
मा पलायनम !...
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  July 15, 2016, 2:47 pm
नई सुबह की गर्मजोशी से स्वागत करने की हम भारतीयों में बहुत पुरानी परम्परा रही है। जितनें भी प्राचीन  मनीषी,कवि  और विचारक रहे वे भी समय-समय पर इस बिंदु  पर जन मानस को आगाह भी करते रहे। आर्ष कवि कालिदास और भारत में द्वितीय नगरीकरण के जनक भगवान गौतम बुद्ध  ...
मा पलायनम !...
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  January 9, 2014, 5:54 pm
अपनेसभीमित्रों,आदरणीयजनोंकोप्रकाशपर्वपरबहुत-बहुतशुभकामनायें.....शुभ दीपावली .....जलाओदिएपररहेध्यानइतनाअँधेराधरापरकहींरहनजाए।नईज्योतिकेधरनएपंखझिलमिल,उड़ेमर्त्यमिट्टीगगनस्वर्गछूले,लगेरोशनीकीझड़ीझूमऐसी,निशाकीगलीमेंतिमिरराहभूले,खुलेमुक्तिकावहकिरणद्व...
मा पलायनम !...
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  October 26, 2011, 6:19 pm
गतांकसेआगे....21 सितम्बर 1995 को देव प्रतिमाओं ने अपने भक्तजनों के हाथों दुग्धपान किया , पूरे देश की तत्कालीन मीडिया ने उसे खूब प्रचारित किया। कन्याकुमारी से काश्मीर तक केवल यही खबर तैर रही थी। देश में हाई एलर्ट की स्थिति थी,तब राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार प...
मा पलायनम !...
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  September 17, 2011, 8:55 am
गतांक से आगे...मूल विज्ञान नीति 1958 में भारत के पहले प्रधानमंत्री पं0 जवाहरलाल नेहरू ने आम आदमी तक वैज्ञानिक मनोवृत्ति के प्रसार की पुरजोर वकालत की थी, किन्तु आज भी भारतीय परिप्रेक्ष्य में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आया हैं। वर्तमान समय में जनमाध्यम (इलेक्ट्रानिक एवं प...
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  September 15, 2011, 6:42 pm
आज अनवरत पर आदरणीय दिनेश राय द्विवेदी जी का यह आलेखपढ़ रहा था .मैं द्विवेदी जी के विचारों से पूरी तरह सहमत हूँ क़ि आज-कल मॉस मीडिया में नित्य प्रति कर्मकांड को लेकर तरह- तरह की चर्चा और सुझाव आते रहते हैं जो क़ि पढ़े-लिखे समाज के लिए कोई शुभ संकेत नही है.आजाद भारत के 64 वर्ष ब...
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  September 13, 2011, 9:41 pm
जैसा कि मेरीपिछलीपोस्टमें, मैंने साहित्य वाचस्पति स्व.डॉ श्री पाल सिंह क्षेम की चर्चा की थी .आज उस महाकवि का जन्मदिन है.क्षेमस्वनी आज मौन हैं-सन्नाटा है .प्रतिवर्ष आज के दिन दो सितम्बर को प्रतिष्ठित रचनाकारों,कवियों से जौनपुर गुंजायमान रहता था.उनकी चर्चा -संस्मरण आज...
मा पलायनम !...
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  September 2, 2011, 9:06 pm
(चित्र साभार -श्री आशीष श्रीवास्तव )डॉ.श्रीपाल सिंह 'क्षेम' का निधन हमारे जनपद ही नहीं अपितु पूरे साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है.कल जनपद से हिन्दी जगत का सूर्य अस्त हो गया. डॉ क्षेम की उम्र नब्बे वर्ष थी लेकिन आज भी आपका जज्बा और हौसला कम नहीं था.अभी भी आप सक्रिय जी...
मा पलायनम !...
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  August 25, 2011, 8:50 pm
सावनजहाँभक्तिभावना,पर्यावरणउल्लासऔरहर-हरमहादेवकीविशेषउपासनाकेलिएजानाजाताहैवंहीयहमाहभाई -बहनकेअटूटप्यारऔरविश्वासकेलिएभीहमारेसमाजमेंजानापहचानाजातारहाहै.आजभलेहीहमयंत्रवत होगयेहों,संवेदनाएंहममेंसोगईंहोलेकिनज्यादादिननहींहुएजबहमडिज़िटलयुगमेंनही...
मा पलायनम !...
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  August 13, 2011, 10:00 pm
कल अचानक फोन पर जैसे ही पता चला कि श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्या पीठ के कुलपति महामहोपाध्याय प्रो.वाचस्पति उपाध्याय जी नहीं रहे,मानो वज्रपात हो गया.सहसा विश्वास नहीं हुआ ,लगा जैसे उनके किसी शुभचिंतक नें मृत्यु की झूठी खबर अंधविश्वास के चलते उड...
मा पलायनम !...
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  July 12, 2011, 10:18 pm
जौनपुरजिलामुख्यालयसेकरीब४५किलोमीटरकीदूरीपरउत्तर -पश्चिममेंखुटहनथानान्तर्गतस्थितगांव गढा-गोपालापुरअपनेऐतिहासिकअतीतकोलेकरकाफीसमृद्धरहाहै.३५एकड़भूमिमेंएकविशालटीलेपरस्थितयहगांवजनश्रुतिकेअनुसारकभीभरराजाओंकीराजधानीथा.स्थानीय लोग बताते हैं कि एक बार...
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  July 11, 2011, 10:09 am
गतांक से आगे......अब तक के उत्खनन के आधार पर मेरी पिछलीपोस्टमें इस संभावना की ओर इशारा किया गया था कि संभव है कि आज से करीब २५०० वर्ष पूर्व यहाँ एक नगरीय और विकसित संस्कृति स्थापित थी .इस दिशा में कुछ आरंभिक संकेत मिलनें भी लगे है . करीब दो उत्खनित स्थल पर रिंग बेल का प्रमाण ...
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  July 2, 2011, 8:41 pm
आज -कलपुरातात्विक उत्खनन को लेकर जौनपुर चर्चा में है. और हो भी क्यों न ,जौनपुर के अतीत के पन्नों को जानने की उत्सुकता हर किसी को है.जिला मुख्यालय से लगभग ५५ किलोमीटर दक्षिण -पश्चिम में मुंगराबादशाहपुर के पास स्थित यह गांव जनश्रुति के अनुसार कभी भर राजाओं के निवास का के...
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  June 29, 2011, 2:11 pm
रंगोंकेत्यौहारहोलीकीबहुत-बहुतशुभकामनाओंके साथ,अपनीपिछलीपोस्टकेक्रममेंआजफाग-गीतकीएकविधाचौतालप्रस्तुतहै.फगुआगायनमेंविशेषकरचौताल ( अर्द्धतीनताल,दादरा,कहरवाऔरफिरअर्द्धतीनताल ) काआनंद, क्याकहनें.आज इस पोस्ट में चौताल का एक पद ही शामिल किया गया है जिसको स्वर ...
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  March 20, 2011, 7:17 pm
फाग-रंग में रंगी मेरी पिछलीपोस्टऔर गत वर्ष की अपनीपोस्टमेंमैंने फाग-गीत के विविध विधाओं पर चर्चा की थी.आज की पोस्ट फाग-गीत -उलारा से सम्बंधित है.इस आंचलिक फाग गीत में एक तरुणी की गहन पीड़ा की मार्मिक अभिव्यक्ति को चित्रित कियागयाहै.वह कह रही है कि मैं तरुणी हूँ और मेर...
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  March 13, 2011, 6:20 pm
फागुन फिर आ गया है . गाँव में बसंत पंचमी से फागुनी बयार बह रही है. मुझे गर्व होता है कि कुछ लोग आज भी लोग इस जीवन्तता को कायम किये हुए है,भले ही परिवर्तन का एक नया दौर आ चुका है-लेकिन इस डिजीटल युग में भी हम सब को मौसमों के आने -जाने का एहसास बखूबी होता रहता है.गांव-घर मदनोत्...
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  March 9, 2011, 9:34 pm
गंवई शादी के बारे में अपने सतीशभाईतो लिख ही चुके हैं ,आज मेरा भी मन हो चला है कि इस विषय पर एक पोस्ट ठेल ही दूँ.मई-जून-जुलाईमें शादियों की बात-पुरानी हुई अब तो ठंड के महीनों में केवल खरमास को छोड़ रोज शादियाँ हो रही हैं-लगता है अभी लिंग अनुपात यथार्थ में परिलक्षित नहीं है-व...
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  February 23, 2011, 7:48 pm
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है,यह तो सबको पता है लेकिन सामाजिक सरोकारों के साथ मानव को सामाजिकता के साथ -साथ असामाजिकता का दंश भी झेलना पड़ा है. आज कल बदलते मूल्यों के साथ लोंगो नें समाज के प्रति अपनी-अपनी अलगधारणाओं के चलते अलग परिभाषा भी बना ली है. हिन्दी शब्दकोश भी ...
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  February 13, 2011, 9:52 am
आगामी ८ फरवरी को वसंत पंचमी है .रीतिकाल के प्रतिनिधिमहा कवि देव के वसंत पर व्यक्त मनोभावों को दृष्टिगत रखते हुए आने वाले पूरे (फागुन)महीनेका स्वागतकिया जाय---डार द्रुम पलना, बिछौना नवपल्लव के,सुमन झ्रगूला सोहै तन छबि भारी दै।पवन झुलावै केकी कीर बहरावै देव,कोकिल हलावै...
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  February 6, 2011, 8:26 am
माफ़ कीजियेगा मैं किसी भी प्रतिबंधित या गैर प्रतिबंधित संघटन का न तो सदस्य हूँ और दूर-दूर तक न ही किसी राजनीतिक दल का प्राथमिक सदस्य.लेकिन पढ़े-लिखों के बीच पाकर यह गौरव जरूर होता है मैं भी एक जागरूक-सामाजिक और देश के विषय में सोचनें समझनें वाला सजग प्रहरी हूँ.प्रख्यात ...
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  January 31, 2011, 5:36 pm
समय-समय पर जीवन को जीने का अंदाज़ और ढंग परिस्थितियों के हिसाब से कैसे बदल जाते है,अचानक आयीसमस्याओं से हम कैसे दो चार हो जाते हैं -इसका सहज अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता . इस समय समूचा पूर्वांचलहाड़तोड़ ठंड के दौर से गुजर रहा है -ठंड से बचने के जुगाड़ में लोग परेशान हैं . सर...
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  January 9, 2011, 7:11 pm
कितना सही कहा गया है --कालों नयातो-वयमेवयाता.अर्थातसमयनहींजाताहमलोगजातेहैं.यहजीवनकीसचाईहै इससेहममुहनहींमोड़सकते.इतनीखरी-खरीबातअभीनववर्षकीपूर्वसंध्यापरआयोजितएकपार्टीमेंअपनेसमयकीएकमशहूरहस्तीनें, नववर्षकीअग्रिमशुभकामनाओंसहितहमलोंगोंकेसाथकही.मुझेअच...
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  January 1, 2011, 11:45 am
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