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'मेरा बचपन 'पापा की गोदी मेंअठखेली करता वो बचपन ,माँ के आँचल मेंछुपता-इठलाता वो बचपन ,आँखों में शरारत, ग़मों से अनजान ,हँसता-मुस्कुराता वो बचपन ,काश कोई लौटा दे ,वो प्यारा-सा मेरा बचपन !- सोनल पंवार ...
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  November 11, 2011, 11:16 pm
' मेरा बचपन 'पापा की गोदी मेंअठखेली करता वो बचपन ,माँ के आँचल मेंछुपता-इठलाता वो बचपन ,आँखों में शरारत, ग़मों से अनजान ,हँसता-मुस्कुराता वो बचपन ,काश कोई लौटा दे ,वो प्यारा-सा मेरा बचपन !- सोनल पंवार ...
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  November 11, 2011, 11:16 pm
’ सुनहरी शाम ‘ बीते लम्हें,बीते पल,बीती बातें , एक दिन यूँ ही याद बन जाएगी ! जीवन की ये सुनहरी शाम , एक दिन यूँ ही ढल जाएगी ! न होंगे पास अपने , न होंगे अनगिनत सपने , रिश्तों की तब न आहट होगी , जीवन की ये सुनहरी शाम , एक दिन यूँ ही ढल जाएगी ! न होगा ज़िन्दगी से कोई शिकवा , न होगी कोई शिक...
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  September 2, 2011, 10:15 pm
’ सुनहरी शाम ‘ बीते लम्हें,बीते पल,बीती बातें , एक दिन यूँ ही याद बन जाएगी ! जीवन की ये सुनहरी शाम , एक दिन यूँ ही ढल जाएगी ! न होंगे पास अपने , न होंगे अनगिनत सपने , रिश्तों की तब न आहट होगी , जीवन की ये सुनहरी शाम , एक दिन यूँ ही ढल जाएगी ! न होगा ज़िन्दगी से कोई शिकवा , न होगी कोई शिक...
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  September 2, 2011, 10:15 pm
“ आंखें “रिश्तों में हो मिठास ,तो आंखों में चमक आती है !जब बिगड़ती है कोई बात ,तो आंखों से छलक जाती है !ये आंखें ही तो होती है मन का दर्पण ,जिनसे मन की हर बात झलक जाती है !– सोनल पंवार...
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  June 25, 2011, 1:02 am
“ आंखें “रिश्तों में हो मिठास ,तो आंखों में चमक आती है !जब बिगड़ती है कोई बात ,तो आंखों से छलक जाती है !ये आंखें ही तो होती है मन का दर्पण ,जिनसे मन की हर बात झलक जाती है !– सोनल पंवार...
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  June 25, 2011, 1:02 am
'पिता 'हाथों को थाम कर जिनकेमैंने चलना है सीखा ,गोदी में जिनके सुकून भरामेरा बचपन है बीता ,विशाल हाथों में जिनकेसमा जाती थी मेरी नन्हीं-सी मुट्ठी ,उन ‘पिता’ की स्नेह भरी आँखों मेंमैंने स्वयं ईश्वर को देखा ! - सोनल पंवार...
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  June 20, 2011, 5:20 pm
' पिता 'हाथों को थाम कर जिनकेमैंने चलना है सीखा ,गोदी में जिनके सुकून भरामेरा बचपन है बीता ,विशाल हाथों में जिनकेसमा जाती थी मेरी नन्हीं-सी मुट्ठी ,उन ‘पिता’ की स्नेह भरी आँखों मेंमैंने स्वयं ईश्वर को देखा ! - सोनल पंवार...
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  June 20, 2011, 5:20 pm
‘ पिता – ईश्वर का वरदान ‘‘पिता’है ईश्वर का रूप ,है पावन एक धूप ,है स्नेह भरा संबल ,है खुशियों का नभतल ,है प्यार जिनका अमूल्य ,है रिश्ता वो अतुल्य ,है जिनसे मेरी पहचान ,ईश्वर का वो है वरदान !- सोनल पंवार...
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  June 20, 2011, 5:13 pm
’ प्रण ‘नित नए बनते हैं प्रण ,और टूट जाते हैं प्रतिक्षण !प्रण लेना तो है सरल ,लेकिन उसे निभाना है मुश्किल !हर रोज़ बनते-टूटते हैं ये प्रण ,फिर भी हम लेते हैं ये प्रण !प्रण लेना ही है तोचलो हम मिलकर यह प्रण लें ,प्रण लें किसी एक बच्चे को साक्षर करने का ,प्रण लें किसी एक बुरी आदत ...
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  February 4, 2011, 10:25 pm
’ प्रण ‘नित नए बनते हैं प्रण ,और टूट जाते हैं प्रतिक्षण !प्रण लेना तो है सरल ,लेकिन उसे निभाना है मुश्किल !हर रोज़ बनते-टूटते हैं ये प्रण ,फिर भी हम लेते हैं ये प्रण !प्रण लेना ही है तोचलो हम मिलकर यह प्रण लें ,प्रण लें किसी एक बच्चे को साक्षर करने का ,प्रण लें किसी एक बुरी आदत ...
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  February 4, 2011, 10:25 pm
'यादें 'ज़िन्दगी के रंगीन पन्नों कोयादों की शबनम में भिगोना है मुझे ,यादों के हर एक पल कोअपनी आँखों में संजोना है मुझे ,बीत जाए ना ये ज़िन्दगीवक़्त की आग़ोश में ,वक़्त को हाथों में समेटकरखुद को यादों के समंदर में डुबोना है मुझे !- सोनल पंवार...
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  January 25, 2011, 11:02 pm
' यादें 'ज़िन्दगी के रंगीन पन्नों कोयादों की शबनम में भिगोना है मुझे ,यादों के हर एक पल कोअपनी आँखों में संजोना है मुझे ,बीत जाए ना ये ज़िन्दगीवक़्त की आग़ोश में ,वक़्त को हाथों में समेटकरखुद को यादों के समंदर में डुबोना है मुझे !- सोनल पंवार...
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  January 25, 2011, 11:02 pm
" माँ और पिता "ईश्वर की बनाई ममता की मूरत है 'माँ' ,ईश्वर ने गढ़ी वो अनमोल कृति है 'पिता' !जीवन की तपती धूप में शीतल छाँव है 'माँ' ,जीवन के अंधेरों में प्रदीप्त लौ है 'पिता' !ज़िन्दगी के आशियाने का स्तंभ है 'माँ' ,उस स्तंभ का आधार-नींव है 'पिता' !मेरे जीवन का अस्तित्व है जिनसे ,ईश्वर ...
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  January 25, 2011, 10:22 pm
'दर्द 'कोई शाख़ से पूछे ,उसके पत्तों के गिरने का दर्द !कोई लहरों से पूछे ,साहिल तक न पहुँच पाने का दर्द !कोई हवाओं से पूछे ,कभी न थम पाने का दर्द !कोई एक मकान से पूछे ,नींव के हिल जाने का दर्द !कोई चमन से पूछे ,उसके उजड़ जाने का दर्द !कोई इंसान से पूछे ,अपनों से बिछुड़ जाने का दर्द ...
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  October 12, 2010, 1:01 am
' दर्द 'कोई शाख़ से पूछे ,उसके पत्तों के गिरने का दर्द !कोई लहरों से पूछे ,साहिल तक न पहुँच पाने का दर्द !कोई हवाओं से पूछे ,कभी न थम पाने का दर्द !कोई एक मकान से पूछे ,नींव के हिल जाने का दर्द !कोई चमन से पूछे ,उसके उजड़ जाने का दर्द !कोई इंसान से पूछे ,अपनों से बिछुड़ जाने का दर्...
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  October 12, 2010, 1:01 am
"मेरा देश ( तब से अब तक ) "सोने की चिड़िया था कभी ,उन्मुक्त हवाओं का था बसेरा ,नारी की जहाँ होती थी पूजा ,ऐसी पावन भूमि का देश था मेरा !अंग्रेजों ने इस भूमि पर आकर ,इस चिड़िया के पर थे काट डाले ,फूट डालो-राज करो की नीति से ,इस देश के हज़ारों टुकड़े कर डाले ,गुलामी की जंजीरों में इसे जकड...
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  August 30, 2010, 2:02 am
" मेरा देश ( तब से अब तक ) "सोने की चिड़िया था कभी ,उन्मुक्त हवाओं का था बसेरा ,नारी की जहाँ होती थी पूजा ,ऐसी पावन भूमि का देश था मेरा !अंग्रेजों ने इस भूमि पर आकर ,इस चिड़िया के पर थे काट डाले ,फूट डालो-राज करो की नीति से ,इस देश के हज़ारों टुकड़े कर डाले ,गुलामी की जंजीरों में इसे जकड...
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  August 30, 2010, 2:02 am
”……आतंकवाद क्यूँ …….? “है आतंक-ही-आतंक फैला इस जहान में ,है दर्द-ही-दर्द फैला इस जहान में !आतंक जो फैला रहा वो भी एक इंसान है ,आतंक के साए में जो पल रहा वो भी एक इंसान है ,तो एक इंसान दूसरे इंसान का दुश्मन क्यूँ है ?इस प्यारे-से जहान में ये आतंकवाद क्यूँ है ?कतरा-कतरा खून का है ब...
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  August 14, 2010, 10:58 pm
माँ ,एक शब्द ,छिपा है जिसमे ,एक अनोखा संसार !माँ ,एक शब्द ,आँचल में जिसकी ,सुकून है सारे जहाँ का !माँ ,एक शब्द ,गहराई है जिसकी ,अथाह सागर के समान !माँ ,एक शब्द ,सबसे है न्यारा ,सबसे प्यारा ये शब्द !– सोनल पंवार...
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  May 6, 2010, 12:24 am
माँ ,एक शब्द ,छिपा है जिसमे ,एक अनोखा संसार !माँ ,एक शब्द ,आँचल में जिसकी ,सुकून है सारे जहाँ का !माँ ,एक शब्द ,गहराई है जिसकी ,अथाह सागर के समान !माँ ,एक शब्द ,सबसे है न्यारा ,सबसे प्यारा ये शब्द !– सोनल पंवार...
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  May 6, 2010, 12:24 am
( 9 अगस्त 2009 मेरी ज़िंदगी का सबसे बुरा दिन था क्योंकि उस दिन मैंने अपने पापा को हमेशा के लिए खो दिया ! पापा अब कभी नहीं आयेंगे लेकिन फिर भी मुझे हमेशा पापा का इंतज़ार रहेगा ! शायद ये इंतज़ार कभी ख़त्म नहीं होगा ! )“ पापा कब आओगे ? “पापा कब आओगे ?जाने कब से ढूंढ रही हूँअपनों में औ...
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  December 30, 2009, 9:47 pm
( 9 अगस्त 2009 मेरी ज़िंदगी का सबसे बुरा दिन था क्योंकि उस दिन मैंने अपने पापा को हमेशा के लिए खो दिया ! पापा अब कभी नहीं आयेंगे लेकिन फिर भी मुझे हमेशा पापा का इंतज़ार रहेगा ! शायद ये इंतज़ार कभी ख़त्म नहीं होगा ! )“ पापा कब आओगे ? “पापा कब आओगे ?जाने कब से ढूंढ रही हूँअपनों में औ...
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  December 30, 2009, 9:47 pm
"सूनी कलाई "एक हसरत थीकि मेरा एक भाई होता ,जिसकी सूनी कलाई मेंमेरा प्यार होता !लेकिन हसरतदिल की दिल में रह गई ,उसकी सूनी कलाई भीसूनी रह गई !- सोनल पंवार...
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  August 4, 2009, 1:05 am
" सूनी कलाई "एक हसरत थीकि मेरा एक भाई होता ,जिसकी सूनी कलाई मेंमेरा प्यार होता !लेकिन हसरतदिल की दिल में रह गई ,उसकी सूनी कलाई भीसूनी रह गई !- सोनल पंवार...
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  August 4, 2009, 1:05 am
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