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Blog: अमलतास

Blogger: कुमार शिव
'ग़ज़ल'चेहरे बदल के मिलता है रहता है चुप्पियाँ साधे बेहद संभल के मिलता हैये वक्त आजकल हम से चेहरे बदल के मिलता हैउस को फिजूल लोगों से फुरसत नहीं है मिलने कीपर जिन से उस का मतलब है बाहर निकल के मिलता हैये है जो चांद पूनम का चांदी का एक सिक्का हैहोता है जब मेहरबाँ ये हम से ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   6:30pm 10 Oct 2011 #
Blogger: कुमार शिव
'ग़ज़ल'दर्द कई चेहरे के पीछे थे कुमार 'शिव'शज़र हरे  कोहरे के पीछे थे दर्द कई  चेहरे के पीछे थेबाहर से दीवार हुई थी नम अश्क कई  कमरे के पीछे थेघुड़सवार दिन था आगे  और हम अनजाने खतरे के पीछे थेधूप, छाँव, बादल, बारिश, बिजली सतरंगे गजरे के पीछे थेनहीं मयस्सर था दीदार हम... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   12:56am 27 Jul 2011 #कुमार शिव
Blogger: कुमार शिव
'ग़ज़ल'खून को क्या हो गया है- कुमार शिवएड़ियों को पुतलियों को उंगलियों को देख लेंआओ इस जर्जर शहर की पसलियों को देख लेंखून को क्या हो गया है क्यों नहीं आता उबालबंद गलियों की नसों को धमनियों को देख लेंदेखने को जब यहाँ कुछ भी नहीं है तो चलोखिलखिलाती थीं कभी उन खिड़कियों को ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:35pm 20 Jul 2011 #कुमार शिव
Blogger: कुमार शिव
'नज़्म'बोलता है उदास सन्नाटा    कुमार शिव रूबरू है शमा के आईनाबंद कमरे की खिड़कियाँ कर दोशाम से तेज चल रही है हवा ये जो पसरा हुआ है कमरे मेंकुछ गलतफहमियों का अजगर हैख्वाहिशें हैं अधूरी बरसों कीहौसलों पर टिका मुकद्दर हैरात की सुरमई उदासी मेंठीक से देख मैं नहीं पा... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   12:50pm 10 Jul 2011 #Nazm
Blogger: कुमार शिव
'कविता' हरा बाँस वनमैं ने देखा है पहाड़ों को पक्षियों की तरह उड़ते हुए और भीड़ पर धमाधम गिरते हुए जब चलती है काली आंधी एक साथ उड़ते हैं पहाड़ रेगिस्तान बन जाते हैं शहर चलने लगते हैं दरख़्त एक दूसरे की शाखें पकड़े तेजी से दौड़ती हैं काँटेदार झाड़ियाँ अचानक उठ खड़ी होती ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   1:35pm 2 Jul 2011 #Kumar Shiv
Blogger: कुमार शिव
‘गीत’ तुम ने छोड़ा शहर ...- कुमार शिव तुम ने छोड़ा शहर धूप दुबली हुई पीलिया हो गया है अमलतास को बीच में जो हमारे ये दीवार थी पारदर्शी इसे वक्त ने कर दिया शब्द तुम ले चलीं गुनगुनाते हुए मैं संभाले रहा रिक्त ये हाशिया तुमने छोड़ा शहर तम हुआ चम्पई नीन्द आती नहीं है हरी घास को... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   2:38pm 27 Jun 2011 #गीत
Blogger: कुमार शिव
‘गीत’ तुम ने छोड़ा शहर ...- कुमार शिव तुम ने छोड़ा शहर धूप दुबली हुई पीलिया हो गया है अमलतास को बीच में जो हमारे ये दीवार थी पारदर्शी इसे वक्त ने कर दिया शब्द तुम ले चलीं गुनगुनाते हुए मैं संभाले रहा रिक्त ये हाशिया तुमने छोड़ा शहर तम हुआ चम्पई नीन्द आती नहीं है हरी घास को... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   2:38pm 27 Jun 2011 #कुमार शिव
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