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Blog: मेरे अनुभव (Mere Anubhav)

Blogger: pallavi
जिस अखंड भारत का सपना कभी हमारे पूर्वजों ने देखा था आज वही भारत अपनी अपनी निजी समस्याओं को लेकर खंड-खंड में विभाजित होता दिखाई देता है। कहते है भारत एक प्रगतिशील देश है जिसे विकसित बनाने की निरंतर प्रक्रिया में हर क्षेत्र में विकास होना अनिवार्य है। लेकिन क्या वास्तव ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   7:07am 22 Jun 2019
Blogger: pallavi
आज बहुत दिनों बाद एक मित्र के कहने पर कुछ लिख रही हूँ। अन्यथा अब कभी कुछ लिखने का मन नहीं होता। लिखो भी तो क्या लिखो। कहने वाले कहते है अरे यदि आप एक संवेदन शील व्यक्ति हो तो कितना कुछ है आपके लिखने लिए कितना कुछ हो रहा है, कितना कुछ घट रहा है और आप तो अपने अनुभव लिखते हो फिर... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   2:10pm 10 Jun 2019
Blogger: pallavi
माँ,माँ क्या होती है यह हम सभी जानते हैं। लेकिन जब तक वह हमारे साथ होती है हमें उसके होने का एहसास नहीं होता, उसके होने की क्द्र नहीं होती और फिर जब वह हमसे दूर चली जाती है तब हमें पता चलता है कि सही मायनो में माँ क्या होती है। माँ से ही तो मायका होता है, वह न हो तो कितना ही स्... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   11:17am 11 Jun 2018
Blogger: pallavi
समय बदल गया किन्तु लोग नहीं बदले आज भी सब जस का तस ही है। आज भी जहां चार महिलाएं एकत्रित हो जाती हैं वहाँ उम्र के हिसाब से या तो सास नंदों की बुराई चलती है या बहुहों बेटियों का विषय ही चलता है। फर्क सिर्फ इतना है कि युवा स्त्रियाँ फ़ैशन-परेड,नाते-रिश्ते,फिल्में इस सब विषयो... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   6:53am 6 Dec 2017
Blogger: pallavi
यूँ देखा जाये तो परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। समय के साथ हर चीज़ में परिवर्तन आ जाता है । फिर चाहे वह कोई इंसान हो या अनुशासन बदलाव तो आखिर बदलाव ही है। अपने जमाने की बात सोचो तो लगता है, हम तो बहुत कठोर अनुशासन में पले बढ़े लोग हैं। फिर चाहे वह स्कूल का मामला हो या घ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   10:35am 27 Nov 2017
Blogger: pallavi
बच्चे तो आखिर बच्चे ही होते हैं। कुछ भी हो एक इंसान होने के नाते और उस से भी बढ़कर एक माँ होने के नाते ऐसा सब कुछ देखकर दुख तो होता ही है। प्रद्युम्न हत्याकांड के विषय में तो आप सभी जानते ही होंगे। इस विषय से भला कौन अछूता है ? 8 सितंबर 2017 हरियाणा के एक स्कूल में 7 वर्ष के एक मास... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   1:24pm 18 Nov 2017
Blogger: pallavi
जीवन में न जाने कितने अनुभव होते हैं ना,छोटे बड़े,अच्छे बुरे यहाँ तक कि हर पल एक अनुभव देकर जाता है भले ही वह क्षणिक ही क्यूँ न हो। ऐसे ही कुछ अनुभव मुझे भी हुए जब मैंने पुणे से दिवेआगर तक का सफर कार से तय किया। कार का नाम इसलिए लिया क्यूंकि जब आप अपनी कार से किसी यात्रा पर नि... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   4:05pm 29 Mar 2017
Blogger: pallavi
  आज के इस दौर में तकनीक के बिना जीवन सोचने में भी ऐसा लगता है मानो यह कोई असंभव सी बात हो,दिन प्रतिदिन हम तकनीक पर कितने निर्भर हो गए हैं कि उसका उपयोग करना हमारे लिए सांस लेने जितना ज़रूरी हो गया है। गैरों की तो मैं क्या बात करूँ, मेरा ही जीवन बिना किसी तकनीकी साधन के नह... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   11:20am 22 Mar 2017
Blogger: pallavi
दो साल हो गये मुझे पुणे आये मगर अभी तक यहाँ कि (नाईट लाइफ) के विषय में मुझे कोई जानकारी नहीं थी। विदेशों में तो नाईट लाइफ का चलन बहुत सुना और देखा था। हालांकि मुंबई के विषय में आम लोगों की यही राय है कि यह शहर दिन में सोता और रात में जागता है। खैर मैं बात कर रही हूँ पुणे की, हा... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   5:54pm 1 Mar 2017
Blogger: pallavi
बदलते समय के साथ बदलना शायद सब के बस की बात नहीं और मैं उन्हीं में से एक हूँ|आप लोगों को जानकर शायद आश्चर्य हो,लेकिन यह सच है मैंने अपने जीवन में आज से पहले कभी (पब) का चेहरा भी नहीं देखा था |एक तरह से देखा जाए तो पांच साल नई दिल्ली में रहने के बाद और आठ साल लन्दन में रहने के बा... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   6:26pm 15 Dec 2016
Blogger: pallavi
आज बहुत दिनो बाद कुछ लिखने का मन हो रहा है। न जाने क्यूँ पिछले कुछ महीनों से लिखने से मन उचट गया था। व्यतीत होते समय के साथ ऐसा लगता है मानो सब कुछ कितना तेजी से बदल रहा है। औरों के बारे में सोचो, तो लगता है मानो समय ने पंख लगा लिए हों। कई बार अपने गुजरते अच्छे समय के साथ भी ऐ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   11:25am 20 Sep 2016
Blogger: pallavi
वर्तमान हालातों को देखते हुए लगता है कि आज ज़िंदगी मौत से सस्ती हो गयी है। जान देना मानो बच्चों का खेल हो गया है। ज़रा कुछ हुआ नहीं कि लोग जान ऐसे देते है मानों कुछ हुआ ही नहीं।  देखो न प्रत्यूषा प्रत्यूषा प्रत्यूषा, आज चारों और बस एक ही नाम है। मेरे विचार में तो वह इतन... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   3:37am 17 Apr 2016
Blogger: pallavi
आज की तारीख में 'विश्वास', जैसे किसी दुरलभ चिड़िया का नाम हो गया है। जो अब कभी-कभी या कहीं- कहीं ही देखने को मिलती है। हर देखी सुनी बात पर भी विश्वास करने में संदेह होता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि हम जो देख रहे हैं जो पढ़ रहे है उसके पीछे का सच कुछ और ही हो। दिल तो कहता है कि विश्वा... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   5:15am 6 Apr 2016
Blogger: pallavi
“~डर के आगे ही जीत है~”आज फिर एक विज्ञापन देखा जिसमें हवा को स्वछ बनाने वाले यंत्र का उपयोग करने की सलाह दी जा रही थी अर्थात आसान शब्दों में कहूँ तो (एयर प्यूरीफायर) का विज्ञापन देखा। क्या वास्तव में हम इतने भयानक वातावरण में जी रहे हैं कि हमारे घर की हवा तक स्वच्छ नहीं है... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   9:40am 12 Mar 2016
Blogger: pallavi
कभी कभी बच्चों को पढ़ाते-पढ़ाते जब अपना बचपन याद आता है तो तब कैसी अच्छी सुखद अनुभूति का एहसास होता है। जिसके विषय में सोचकर ही चेहरे पर स्वतः एक भीनी सी मुस्कान आ जाती है। वैसे तो इन दिनों परीक्षा का माहौल है। जिसके चलते न सिर्फ बच्चे बल्कि हम बड़े भी परेशान हैं । फिर चाहे ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   11:31am 5 Mar 2016
Blogger: pallavi
कहते है परिवर्तन ही जीवन का आधार है। जो समय के साथ बदल जाये वही व्यक्ति सफल कहलाता है। लेकिन मेरी सोच और समझ यह कहती है कि “परिस्थिति के आधार पर समग्ररूप से मानवता का जो कल्याण करने में सक्षम हो या फिर जिसमें मानवता के कल्याण की भावना निहित हो,सही मायने में वही सच्चा बदल... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   3:37pm 28 Jan 2016
Blogger: pallavi
भारत वापस आने के बाद यह मेरी दूसरी दीपावली थी। जिसने मुझे अनगिनत अनुभव की पोटली दे डाली। पिछले साल दिवाली यही मेरे घर पुणे में मनाई थी और इस साल दिवाली मनाने हम जबलपुर गए, वह भी कार से, यह शुरुआत थी उन अनुभवों की जो आज तक के जीवन में मुझे पहले कभी न हुए थे। ऐसा इसलिए कहा क्य... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   3:52pm 12 Dec 2015
Blogger: pallavi
कंक्रीटों के जंगल के बीच एक छोटे से भू भाग में टीन के पतरों से बने कुछ मकान जो उनमें रहने वाले गरीब मजदूर परिवार के लिए घर कहलाते है। घर जिसका सीधा सा अर्थ होता है एक इंसान के लिए सर छिपाने की एक ऐसी जगह जहां आकर उस इंसान को सुकून मिलता है, शांति मिलती है। या फिर यह कहा जाए क... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   12:01pm 1 Dec 2015
Blogger: pallavi
साधारण लोग सोचते है मृत्यु एक विराम है जिसके आगे सब समाप्त हो जाता है। शेष कुछ भी नहीं रहता सिवाए मिट्टी के पर क्या यही सच है। मेरे अंदर कई प्रश्न उठते है मगर जवाब आजतक नहीं मिला। मृत्यु क्या है एक जीवन का अंत या फिर एक नयी शुरुआत। मृत्यु को लेकर हम यह मानते है कि मरणोपरा... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   9:16am 19 Nov 2015
Blogger: pallavi
अपराधी आखिर कौन ? बलात्कार या बलात्कारी जैसा शब्द सुनकर अब अजीब नहीं लगता। क्यूंकि अब तो यह बहुत ही आम बात हो गयी है। कई बार तो एक स्त्री होने के बावजूद भी अब ऐसे विषयों को पढ़ने का या इस विषय पर सोचने का भी मन नहीं करता। कुछ हद तक तो अब अफसोस भी नहीं होता। हालांकी मैं यह ब... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   7:46am 29 Oct 2015
Blogger: pallavi
"गुनाहों का देवता"यह नाम तो आप सभी ने देखा सुना और पढ़ा ही होगा। शायद ही कोई ऐसा हो जिसे हिन्दी साहित्य में रुचि हो और उसने यह उपन्यास न पढ़ा हो। क्या कहूँ क्या लिखूँ निःशब्द हूँ मैं इस रचना को पढ़कर। जी हाँ धर्मवीर भारती जी की अपने आप में एक अदबुद्ध अद्वितीय रचना है यह "गुनाह... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   5:30am 23 Oct 2015
Blogger: pallavi
आखिर ऐसा क्यूँ होता है। आज हर कोई केवल अपनी बात कहना चाहता है किन्तु किसी दूसरे की कोई बात सुनना कोई नहीं चाहता। हर कोई ऐसा एक व्यक्ति चाहता है जो पूरे संयम और धेर्य के साथ आपकी पूरी बात सुने वह भी बिना कोई प्रतिक्रिया दिये। न सिर्फ सुने, बल्कि आपको समझने का भी प्रयास करे... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   6:26am 15 Oct 2015
Blogger: pallavi
"रिश्तों की डोरी में एक धागा मेरा एक तुम्हारा "यह पंक्ति पढ़कर क्या आपको कुछ याद आया। संभवतः नहीं! क्यूंकि टीवी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों के बीच घड़ी घड़ी होते मध्यांतर पर ध्यान ही कौन देता है। है ना! लेकिन मैं शायद उनमें से हूँ जो कार्यक्रमों पर कम और विज्ञापनों प... Read more
clicks 208 View   Vote 1 Like   5:59am 8 Oct 2015
Blogger: pallavi
आज के वातावरण में जहां एक ओर प्रतियोगिता का माहौल है। वहाँ क्या रिश्ते और क्या व्यापार अर्थात रिश्तों में भी इतनी औपचारिकता आ गयी है कि कई बार यकीन ही नहीं होता। इस का कारण जागरूकता है या विकास,यह कहना मुश्किल है। क्यूंकि यदि जागरूकता की बात की जाये तो आज की नारी जागरूक... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   6:57am 4 Oct 2015
Blogger: pallavi
अब इसे अच्छा तो कोई दूजा नाम हो नहीं सकती था इस पोस्ट का! नहीं? पाँच महीने बाद जब ब्लॉग पर वापसी हो तब शुरुआत तो शुभ होनी ही चाहिए। यूं भी इन दिनों यहाँ गणपती का ज़ोर है। लेकिन पांचवे दिन के बाद अब कई जगहों से विसर्जन हो चला है। जहां तक माहौल की बात है। कई दिन पहले से माहौल खु... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   6:45pm 24 Sep 2015
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